प्राकृतिक भूगोल (Physical Geography)
1. जैवभौतिक संरचना और गतिशीलता
पृथ्वी का निर्माण और संरचना
पृथ्वी का निर्माण लगभग 4.6 अरब वर्ष पहले सौर मंडल के निर्माण के साथ हुआ था। यह सौर निहारिका के गैस और धूल
कणों के एकत्रीकरण से बनी। पृथ्वी की संरचना को तीन प्रमुख परतों में विभाजित किया गया है:
| परत |
विवरण |
गहराई |
महत्वपूर्ण विशेषताएँ |
| भूपर्पटी (Crust) |
पृथ्वी की सबसे बाहरी परत, स्थल और समुद्र के नीचे |
5-70 किमी |
सिलिका और एल्यूमिनियम (सायल) युक्त, महाद्वीपीय और समुद्री भूपर्पटी |
| मैटल (Mantle) |
प्लास्टिक जैसी परत, पृथ्वी की आयतन का ~84% |
70-2900 किमी |
सिलिका और मैग्नीशियम (सिमा) युक्त, संवहन धाराएँ |
| क्रोड (Core) |
लौह और निकल (निफे) युक्त, बाहरी और आंतरिक क्रोड |
2900-6370 किमी |
बाहरी क्रोड तरल, आंतरिक क्रोड ठोस, चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत |
परीक्षा उपयोगी तथ्य: पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र आंतरिक क्रोड के ठोस होने और बाहरी क्रोड के
तरल लौह के संवहन के कारण उत्पन्न होता है। 2025 में चुंबकीय ध्रुवों का विस्थापन 40 किमी प्रति वर्ष की दर से
हो रहा है।
अतिरिक्त तथ्य: पृथ्वी की भूपर्पटी की मोटाई महाद्वीपों के नीचे 30-70 किमी और समुद्रों के
नीचे 5-10 किमी है। मैटल में संवहन धाराएँ प्लेट टेक्टॉनिक्स को संचालित करती हैं, जो भूकंप और ज्वालामुखी
गतिविधियों का कारण हैं।
पृथ्वी पर चालन: घूर्णन, परिक्रमा और उनके प्रभाव
पृथ्वी की दो प्रमुख गतियाँ हैं:
- घूर्णन (Rotation): पृथ्वी अपनी अक्ष पर 23 घंटे 56 मिनट में एक चक्कर पूरा करती है।
प्रभाव:
- दिन और रात का चक्र।
- कोरिऑलिस बल: पवनों और समुद्री धाराओं को दायीं (उत्तरी गोलार्द्ध) और बायीं (दक्षिणी गोलार्द्ध) ओर
मोड़ता है।
- परिक्रमा (Revolution): पृथ्वी सूर्य के चारों ओर 365.25 दिन में एक चक्कर पूरा करती है।
प्रभाव:
- ऋतु परिवर्तन: पृथ्वी की अक्ष का 23.5° झुकाव ऋतुओं का कारण है।
- पेरिहिलियन (जनवरी, ~147 मिलियन किमी) और एफिलियन (जुलाई, ~152 मिलियन किमी)।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: कोरिऑलिस बल भूमध्य रेखा पर शून्य और ध्रुवों पर अधिकतम होता है। यह
चक्रवातों और समुद्री धाराओं की दिशा को प्रभावित करता है।
अतिरिक्त तथ्य: पृथ्वी की घूर्णन गति धीरे-धीरे कम हो रही है (लगभग 1.7 मिलीसेकंड प्रति सदी),
जिसके कारण समय-समय पर लीप सेकंड जोड़े जाते हैं।
प्लेट टेक्टॉनिक्स, पर्वत निर्माण, इसोस्टेसी
प्लेट टेक्टॉनिक्स: पृथ्वी की भूपर्पटी 7 प्रमुख और कई छोटी प्लेटों में विभाजित है, जो मैटल के
संवहन के कारण गतिशील हैं।
- प्लेट सीमाएँ:
- अपसारी (Divergent): प्लेटें अलग होती हैं, जैसे मध्य-अटलांटिक कटक।
- अभिसारी (Convergent): प्लेटें टकराती हैं, जैसे हिमालय का निर्माण।
- रूपांतरण (Transform): प्लेटें एक-दूसरे के साथ घिसटती हैं, जैसे सैन एंड्रियास फॉल्ट।
- पर्वत निर्माण (Orogeny): अभिसारी सीमाओं पर प्लेटों के टकराव से पर्वत बनते हैं, जैसे
हिमालय (भारतीय और यूरेशियन प्लेट)।
- इसोस्टेसी: भूपर्पटी का गुरुत्वीय संतुलन, जैसे हिमनदों के पिघलने से भूपर्पटी का ऊपर
उठना।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: हिमालय का निर्माण भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराव से हुआ, जो आज भी
प्रति वर्ष 4-5 मिमी की दर से ऊपर उठ रहा है।
अतिरिक्त तथ्य: इसोस्टेसी के कारण स्कैंडिनेविया और कनाडा जैसे क्षेत्र हिमनदों के पिघलने के
बाद प्रति वर्ष 1-2 सेमी ऊपर उठ रहे हैं, जिससे तटीय क्षेत्रों का भू-आकृति परिवर्तन हो रहा है।
ज्वालामुखी क्रिया, भूकंपीय घटना
ज्वालामुखी क्रिया: मैटल से मैग्मा, गैस और राख का निकलना।
- प्रकार:
- शील्ड ज्वालामुखी: चौड़े, कम ढाल वाले, जैसे हवाई द्वीप।
- स्ट्रैटोवोल्कैनो: शंकु आकार, जैसे माउंट फुजी।
- लावा डोम: मोटा लावा, जैसे माउंट सेंट हेलेन्स।
- भूकंपीय घटना: प्लेट सीमाओं पर तनाव मुक्ति के कारण भूकंप।
- रिएक्टर पैमाना: भूकंप की तीव्रता मापता है।
- मरकैली पैमाना: भूकंप के प्रभावों को मापता है।
| ज्वालामुखी प्रकार |
विशेषताएँ |
उदाहरण |
| शील्ड ज्वालामुखी |
चौड़े, कम ढाल, बेसाल्टिक लावा |
माउना लोआ (हवाई) |
| स्ट्रैटोवोल्कैनो |
शंकु आकार, विस्फोटक |
माउंट वेसुवियस (इटली) |
| लावा डोम |
मोटा लावा, छोटे विस्फोट |
माउंट सेंट हेलेन्स (USA) |
परीक्षा उपयोगी तथ्य: प्रशांत महासागर का "रिंग ऑफ फायर" विश्व के 75% सक्रिय ज्वालामुखियों और
90% भूकंपों का क्षेत्र है।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में इंडोनेशिया और जापान में ज्वालामुखी गतिविधियाँ बढ़ी हैं, जो प्लेट
टेक्टॉनिक्स की सक्रियता और भूकंपीय जोखिम को दर्शाती हैं।
अपरदन, अपक्षय, भूमि व्यापक विकास
अपक्षय (Weathering): चट्टानों का भौतिक, रासायनिक और जैविक विघटन।
- भौतिक अपक्षय: तापमान परिवर्तन, ठंढ, यांत्रिक टूटन।
- रासायनिक अपक्षय: ऑक्सीकरण, कार्बोनेशन, जलयोजन।
- जैविक अपक्षय: पौधों की जड़ें, जीवों की गतिविधियाँ।
अपरदन (Erosion): चट्टानों और मिट्टी का हटना और परिवहन।
- जल अपरदन: नदियाँ, वर्षा।
- पवन अपरदन: रेगिस्तानी क्षेत्रों में।
- हिम अपरदन: हिमनदों द्वारा।
- समुद्री अपरदन: लहरों द्वारा।
भूमि व्यापक विकास: अपक्षय और अपरदन द्वारा भू-आकृतियों का निर्माण।
- नदियों द्वारा भू-आकृतियाँ: घाटियाँ, डेल्टा, पंखाकार जलोढ़।
- हिमनदों द्वारा भू-आकृतियाँ: यू-आकार की घाटियाँ, मोरेन, ड्रमलिन।
- समुद्री प्रक्रियाओं द्वारा भू-आकृतियाँ: समुद्र तट, लैगून, प्रवाल भित्तियाँ।
- पवन द्वारा भू-आकृतियाँ: टिब्बा, लोएस जमा।
| भू-आकृति |
प्रक्रिया |
उदाहरण |
| घाटी (Valley) |
नदी अपरदन |
गंगा घाटी |
| डेल्टा |
नदी द्वारा तलछट जमाव |
सुंदरबन डेल्टा |
| टिब्बा (Dune) |
पवन अपरदन |
थार मरुस्थल |
| यू-आकार की घाटी |
हिमनदी अपरदन |
हिमालय की घाटियाँ |
परीक्षा उपयोगी तथ्य: नदियों द्वारा निर्मित डेल्टा विश्व के सबसे उपजाऊ क्षेत्रों में से हैं,
जैसे गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा। 2025 में डेल्टा क्षेत्रों में समुद्र स्तर वृद्धि से खतरा बढ़ रहा है।
अतिरिक्त तथ्य: जलवायु परिवर्तन से हिमनदों का तेजी से पिघलना भू-आकृतियों को बदल रहा है,
विशेष रूप से हिमालय और आल्प्स में, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ रहा है।
बहुचक्र भूमि रूप (Polycyclic Landforms)
बहुचक्र भूमि रूप वे भू-आकृतियाँ हैं जो कई भूवैज्ञानिक चक्रों (जैसे अपरदन, उत्थान, तलछट जमाव) से बनती हैं।
- उदाहरण: हिमालय, अप्पलाचियन पर्वत।
- प्रक्रिया: पर्वत निर्माण, अपरदन, और पुनर्जनन।
- विशेषताएँ: जटिल संरचनाएँ, विभिन्न युगों के अवशेष।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: हिमालय एक बहुचक्र भूमि रूप है, जो कई टेक्टॉनिक और अपरदन चक्रों से बना
है। इसका निर्माण 50 मिलियन वर्ष पहले शुरू हुआ था।
अतिरिक्त तथ्य: बहुचक्र भूमि रूपों का अध्ययन प्राचीन जलवायु और टेक्टॉनिक गतिविधियों को समझने
में मदद करता है। 2025 में हिमालय के भूवैज्ञानिक अध्ययन से भूकंपीय जोखिमों का आकलन बढ़ा है, विशेष रूप से
उत्तराखंड और नेपाल में।