राजनीतिक संगठन (Political Organization)
1. ऐतिहासिक दृष्टिकोण: एकता और विविधता
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत का राजनीतिक संगठन प्राचीन काल से ही एकता और विविधता का अद्वितीय मिश्रण रहा है। प्राचीन भारत में मौर्य, गुप्त, और चोल जैसे साम्राज्यों ने केंद्रीकृत शासन स्थापित किया, जबकि क्षेत्रीय राजवंशों ने विविधता को बनाए रखा। मध्यकाल में मुगल और मराठा शासन ने क्षेत्रीय और केंद्रीय शक्ति के बीच संतुलन बनाया।
- वैदिक काल (1500-600 ई.पू.): जनपदों और गणराज्यों में प्रारंभिक लोकतांत्रिक व्यवस्था।
- मौर्य काल (322-185 ई.पू.): चंद्रगुप्त और अशोक के तहत केंद्रीकृत प्रशासन।
- मध्यकाल: मुगल साम्राज्य ने एकता को बढ़ावा दिया, लेकिन क्षेत्रीय सूबेदारों को स्वायत्तता दी।
- ब्रिटिश काल: केंद्रीकृत औपनिवेशिक शासन, लेकिन रियासतों की स्वायत्तता।
एकता और विविधता
भारत की एकता सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से समृद्ध रही है, लेकिन भाषा, धर्म, और क्षेत्रीय पहचान ने विविधता को बढ़ाया। संविधान (1950) ने एकता को मजबूत करने के लिए संघीय ढांचा अपनाया, जो विविधता को समायोजित करता है।
- सांस्कृतिक एकता: सनातन धर्म, बौद्ध धर्म, और संत परंपराएँ।
- विविधता: 22 अनुसूचित भाषाएँ, 8 प्रमुख धर्म, और क्षेत्रीय संस्कृतियाँ।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत का संविधान एकता और विविधता को संतुलित करने के लिए विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें 470 अनुच्छेद हैं।
2. राज्यों का पुनर्गठन
ऐतिहासिक संदर्भ
स्वतंत्रता (1947) के बाद, भारत में 562 रियासतों और ब्रिटिश प्रांतों का एकीकरण हुआ। राज्यों का पुनर्गठन भाषाई, सांस्कृतिक, और प्रशासनिक आधार पर किया गया।
- राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956: भाषा के आधार पर 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।
- प्रमुख उदाहरण: आंध्र प्रदेश (तेलुगु), तमिलनाडु (तमिल), महाराष्ट्र (मराठी)।
- बाद के पुनर्गठन: 2000 में उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड; 2014 में तेलंगाना।
प्रभाव
- सकारात्मक: क्षेत्रीय पहचान को बढ़ावा, प्रशासनिक दक्षता।
- नकारात्मक: क्षेत्रीय असमानता, केंद्र-राज्य तनाव।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: 2025 में भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं, जो 1956 के पुनर्गठन का परिणाम हैं।
3. क्षेत्रीय चेतना
परिभाषा और कारक
क्षेत्रीय चेतना क्षेत्रीय पहचान, संस्कृति, और हितों पर आधारित जागरूकता है, जो राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों को प्रेरित करती है।
- कारक: भाषा (तमिल, बंगाली), धर्म (सिख, इस्लाम), आर्थिक असमानता।
- उदाहरण: द्रविड़ आंदोलन (तमिलनाडु), असम आंदोलन (1979-85), पंजाब में खालिस्तान आंदोलन।
प्रमुख क्षेत्रीय दल
| दल |
राज्य |
प्रमुख विचारधारा |
| DMK |
तमिलनाडु |
द्रविड़ पहचान, सामाजिक न्याय |
| शिवसेना |
महाराष्ट्र |
मराठी अस्मिता, हिंदुत्व |
| अकाली दल |
पंजाब |
सिख पहचान, क्षेत्रीय स्वायत्तता |
| बीजद |
ओडिशा |
क्षेत्रीय विकास |
परीक्षा उपयोगी तथ्य: क्षेत्रीय दलों की संख्या 2025 में 50 से अधिक है, जो भारत की बहुदलीय व्यवस्था को दर्शाते हैं।[](https://byjus.com/ias-hindi/regional-political-parties-in-hindi/)
4. केंद्र–राज्य संबंध
संवैधानिक ढांचा
भारत का संविधान केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करता है (सातवीं अनुसूची):
- संघ सूची: रक्षा, विदेश, रेलवे (100 विषय)।
- राज्य सूची: पुलिस, कृषि, स्वास्थ्य (61 विषय)।
- समवर्ती सूची: शिक्षा, पर्यावरण, श्रम (52 विषय)।
राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356): केंद्र सरकार राज्य सरकार को हटा सकती है।
चुनौतियाँ
- वित्तीय असंतुलन: GST और वित्त आयोग के माध्यम से संसाधन वितरण।
- क्षेत्रीय असमानता: पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों के बीच विकास का अंतर।
- राजनीतिक तनाव: विभिन्न दलों की सरकारों के बीच टकराव।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में 16वें वित्त आयोग ने राज्यों को करों में 41% हिस्सेदारी की सिफारिश की है।
5. भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ और भू-राजनीतिक मुद्दे
अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ
भारत की 14,103 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा 7 देशों (पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश, अफगानिस्तान) से लगती है।
| देश |
सीमा लंबाई (किमी) |
प्रमुख मुद्दे |
| पाकिस्तान |
3,323 |
LoC, कश्मीर विवाद |
| चीन |
3,488 |
लद्दाख, अरुणाचल विवाद |
| बांग्लादेश |
4,096 |
प्रवास, तस्करी |
| नेपाल |
1,751 |
कालापानी विवाद |
भू-राजनीतिक मुद्दे
- चीन-पाकिस्तान गठजोड़: CPEC और यारलुंग जांगबो बांध परियोजनाएँ।
- रूस-यूक्रेन संघर्ष: भारत की तटस्थता, ऊर्जा आपूर्ति पर प्रभाव।
- इजरायल-गाजा युद्ध: भारत का संतुलित दृष्टिकोण।
- जलवायु परिवर्तन: हिंद महासागर में समुद्र स्तर वृद्धि।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत-पाकिस्तान सीमा (LoC) 740 किमी लंबी है और विश्व की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक है।
6. भारत–हिंद महासागर भू-राजनीति
रणनीतिक महत्व
हिंद महासागर भारत की भू-राजनीति का केंद्र है, जो विश्व व्यापार का 50% और तेल व्यापार का 80% वहन करता है। भारत की 7,500 किमी तट रेखा इसे रणनीतिक शक्ति प्रदान करती है।
- प्रमुख बंदरगाह: मुंबई, चेन्नई, विशाखापत्तनम।
- परियोजनाएँ: सागरमाला (बंदरगाह विकास), चाबहार बंदरगाह (ईरान)।
- गठबंधन: QUAD (भारत, USA, जापान, ऑस्ट्रेलिया)।
चुनौतियाँ
- चीन की उपस्थिति: स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स (हम्बनटोटा, ग्वादर)।
- पायरेसी: सोमालिया तट पर समुद्री डकैती।
- पर्यावरणीय खतरे: समुद्र स्तर वृद्धि से मालदीव, लक्षद्वीप प्रभावित।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में भारत ने हिंद महासागर में नौसैनिक अभ्यास (मालाबार) को QUAD के साथ बढ़ाया है।
7. SAARC में भारत की भूमिका
परिचय
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) 1985 में स्थापित हुआ, जिसमें 8 सदस्य देश (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव, अफगानिस्तान) हैं। भारत SAARC का सबसे बड़ा और प्रभावशाली सदस्य है।
भारत की भूमिका
- आर्थिक सहयोग: दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) को बढ़ावा।
- क्षेत्रीय विकास: SAARC उपग्रह (2017), आपदा प्रबंधन केंद्र।
- नेतृत्व: भारत ने क्षेत्रीय स्थिरता और विकास में योगदान दिया।
चुनौतियाँ
- भारत-पाकिस्तान तनाव: 2016 के बाद SAARC शिखर सम्मेलन निष्क्रिय।
- क्षेत्रीय अस्थिरता: बांग्लादेश (2024), म्यांमार (2021), अफगानिस्तान (2021) में संकट।
- वैकल्पिक मंच: भारत ने BIMSTEC और IORA पर ध्यान केंद्रित किया।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: SAARC का मुख्यालय काठमांडू (नेपाल) में है, और भारत ने 2025 तक SAFTA के तहत 25% टैरिफ में कमी की है।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में भारत ने BIMSTEC को SAARC के विकल्प के रूप में मजबूत किया, जिसमें 7 देश शामिल हैं।