आर्थिक और क्षेत्रीय भूगोल: कृषि (Economic & Regional Geography: Agriculture)
1. भारतीय कृषि की विशेषताएँ
भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था का आधार है, जो 2025 में GDP में 15% और 50% रोज़गार प्रदान करती है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ:
- निर्वाह कृषि: 60% किसान छोटे और सीमांत हैं, जो स्वयं के लिए उत्पादन करते हैं।
- विविधता: विभिन्न जलवायु और मिट्टी के कारण चावल, गेहूँ, गन्ना, कपास जैसी फसलें।
- मानसून पर निर्भरता: 55% कृषि क्षेत्र असिंचित, मानसून पर निर्भर।
- मिश्रित कृषि: फसल उत्पादन के साथ पशुपालन।
- कम मशीनीकरण: छोटे भूखंडों और श्रम आधारित तकनीक।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत विश्व में चावल और गेहूँ का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, और 2025 में कृषि निर्यात $50 बिलियन तक पहुँचा है।
2. बंजर भूमि समस्याएँ
परिभाषा और कारण
बंजर भूमि वह भूमि है जो उत्पादकता खो चुकी है। भारत में 17% भूमि बंजर है। प्रमुख कारण:
- मृदा क्षरण: जल और पवन अपरदन, विशेष रूप से राजस्थान और गुजरात में।
- लवणीकरण: सिंचाई से मिट्टी में लवण जमा होना, जैसे पंजाब।
- क्षारीकरण: मिट्टी का pH असंतुलन, जैसे उत्तर प्रदेश।
- अति उपयोग: गहन कृषि और रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग।
प्रभाव
- कम उत्पादकता: फसल उत्पादन में 20% कमी।
- आर्थिक नुकसान: ग्रामीण आजीविका पर प्रभाव।
- पर्यावरणीय हानि: जैव विविधता और जल चक्र पर प्रभाव।
समाधान
- वृक्षारोपण और कंटूर जुताई।
- ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई।
- जैविक खेती और मृदा संरक्षण नीतियाँ।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत में 2025 में बंजर भूमि सुधार के लिए "मृदा स्वास्थ्य कार्ड" योजना के तहत 15 करोड़ किसानों को लाभ मिला है।
3. फसल पैटर्न और तीव्रता
फसल पैटर्न
भारत में फसल पैटर्न जलवायु, मिट्टी, और सिंचाई पर निर्भर करता है। प्रमुख फसलें:
| फसल |
प्रमुख क्षेत्र |
विशेषताएँ |
| चावल |
पश्चिम बंगाल, पंजाब |
मानसूनी, जलोढ़ मिट्टी |
| गेहूँ |
पंजाब, हरियाणा |
रबी, ठंडी जलवायु |
| गन्ना |
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र |
उष्णकटिबंधीय, सिंचित |
| कपास |
गुजरात, महाराष्ट्र |
काली मिट्टी, मध्यम वर्षा |
फसल तीव्रता
फसल तीव्रता (Cropping Intensity) एक वर्ष में एक ही भूमि पर उगाई गई फसलों की संख्या को दर्शाती है। भारत में औसत तीव्रता 145% है।
- उच्च तीव्रता: पंजाब, हरियाणा (200% तक)।
- निम्न तीव्रता: राजस्थान, मध्य प्रदेश (120% से कम)।
- वृद्धि के उपाय: बहु-फसली खेती, ड्रिप सिंचाई, उन्नत बीज।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में ड्रिप सिंचाई के उपयोग से भारत में फसल तीव्रता 10% बढ़ी है, विशेष रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों में।
4. कृषि दक्षता और उत्पादकता
कृषि दक्षता
कृषि दक्षता संसाधनों (जल, मिट्टी, श्रम) के इष्टतम उपयोग को दर्शाती है। भारत में दक्षता बढ़ाने के कारक:
- मशीनीकरण: ट्रैक्टर, हार्वेस्टर का उपयोग।
- सिंचाई: 2025 में 50% कृषि क्षेत्र सिंचित।
- उन्नत बीज: हाइब्रिड और GM बीज।
उत्पादकता
उत्पादकता प्रति हेक्टेयर फसल उत्पादन को दर्शाती है। भारत में प्रमुख फसलों की उत्पादकता (2025):
| फसल |
उत्पादकता (क्विंटल/हेक्टेयर) |
विश्व औसत |
| चावल |
25 |
30 |
| गेहूँ |
35 |
40 |
| गन्ना |
700 |
750 |
चुनौतियाँ
- छोटे भूखंड: औसत जोत 1.08 हेक्टेयर।
- जलवायु परिवर्तन: अनियमित मानसून, सूखा।
- मृदा स्वास्थ्य: रासायनिक उर्वरकों से ह्रास।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत में 2025 में प्रति हेक्टेयर चावल उत्पादकता पंजाब में 40 क्विंटल तक पहुँची, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
5. हरित क्रांति का प्रभाव
परिचय
हरित क्रांति (1960-70) ने भारत में उच्च उपज वाली किस्मों (HYV), रासायनिक उर्वरकों, और सिंचाई के उपयोग से कृषि उत्पादन बढ़ाया।
प्रमुख प्रभाव
- सकारात्मक:
- उत्पादन वृद्धि: 1960 में 70 मिलियन टन से 2025 में 300 मिलियन टन खाद्यान्न।
- खाद्य सुरक्षा: भारत खाद्यान्न निर्यातक बना।
- आर्थिक विकास: पंजाब, हरियाणा में समृद्धि।
- नकारात्मक:
- क्षेत्रीय असमानता: पंजाब, हरियाणा लाभान्वित, पूर्वी भारत पिछड़ा।
- पर्यावरणीय हानि: मृदा लवणीकरण, जल स्तर में कमी।
- किसानों पर दबाव: उच्च लागत, ऋण।
द्वितीय हरित क्रांति
2025 में द्वितीय हरित क्रांति का फोकस टिकाऊ कृषि, जैविक खेती, और पूर्वी भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार) पर है।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में हरित क्रांति के परिणामस्वरूप भारत का खाद्यान्न भंडार 80 मिलियन टन तक पहुँचा है।
6. कृषि क्षेत्र और भूमि सुधार
कृषि क्षेत्र
भारत में कृषि क्षेत्रों का वर्गीकरण जलवायु, मिट्टी, और फसलों के आधार पर:
| क्षेत्र |
प्रमुख फसलें |
विशेषताएँ |
| उत्तरी मैदान |
चावल, गेहूँ |
जलोढ़ मिट्टी, गहन कृषि |
| दक्कन पठार |
कपास, मूंगफली |
काली मिट्टी, मध्यम वर्षा |
| तटीय क्षेत्र |
नारियल, मसाले |
लैटेराइट मिट्टी, उच्च वर्षा |
| मरुस्थलीय |
बाजरा, ज्वार |
रेतीली मिट्टी, कम वर्षा |
भूमि सुधार
भूमि सुधारों का उद्देश्य भूमि स्वामित्व में समानता और उत्पादकता बढ़ाना है। प्रमुख उपाय:
- जमींदारी उन्मूलन: 1950 के दशक में, उत्तर प्रदेश और बिहार में।
- भू-सीमा अधिनियम: अधिकतम भूमि स्वामित्व की सीमा।
- भू-समेकन: छोटे भूखंडों का एकीकरण।
- डिजिटल भूमि रिकॉर्ड: 2025 में 90% भूमि रिकॉर्ड डिजिटल।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत में भूमि सुधारों ने 2 करोड़ से अधिक भूमिहीन किसानों को भूमि वितरित की है।
7. आधुनिककरण और योजना
कृषि आधुनिककरण
कृषि आधुनिककरण में प्रौद्योगिकी और टिकाऊ प्रथाओं का उपयोग शामिल है:
- प्रौद्योगिकी: ड्रोन, सेंसर, और AI आधारित कृषि।
- जैविक खेती: 2025 में 3 मिलियन हेक्टेयर जैविक कृषि क्षेत्र।
- स्मार्ट सिंचाई: ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम।
कृषि योजना
भारत सरकार की योजनाएँ कृषि विकास को बढ़ावा देती हैं:
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: फसल नुकसान पर बीमा।
- किसान सम्मान निधि: 6,000 रुपये वार्षिक सहायता।
- राष्ट्रीय कृषि मिशन: टिकाऊ कृषि और उत्पादकता।
- ई-नाम: राष्ट्रीय कृषि बाजार, ऑनलाइन व्यापार।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में ई-नाम ने 1.5 करोड़ किसानों को जोड़ा, और डिजिटल कृषि मंचों ने 20% व्यापार बढ़ाया।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत ने 2025 में कृषि आधुनिककरण के लिए 1 ट्रिलियन रुपये का निवेश किया, जिसमें ड्रोन और AI तकनीक शामिल हैं।