संसाधन (Resources)
1. वस्तुओं का वितरण
परिभाषा और प्रकार
वस्तुएँ (Commodities) वे संसाधन हैं जो आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोगी हैं, जैसे खनिज, कृषि उत्पाद, और ऊर्जा संसाधन। भारत में इनका वितरण असमान है और जलवायु, भूवैज्ञानिक संरचना, और मानवीय गतिविधियों पर निर्भर करता है।
- खनिज: कोयला (झारखंड), लौह अयस्क (ओडिशा)।
- कृषि उत्पाद: चावल (पश्चिम बंगाल), गेहूँ (पंजाब)।
- ऊर्जा संसाधन: पेट्रोलियम (असम, गुजरात), जलविद्युत (हिमाचल)।
वितरण पैटर्न
| वस्तु |
प्रमुख क्षेत्र |
विशेषताएँ |
| कोयला |
झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ |
70% भारत का कोयला उत्पादन |
| लौह अयस्क |
ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक |
विश्व का 5% भंडार |
| चावल |
पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश |
50% राष्ट्रीय उत्पादन |
| पेट्रोलियम |
असम, गुजरात, मुंबई हाई |
30% राष्ट्रीय माँग |
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत में 2025 में कोयला भंडार 360 बिलियन टन है, जो विश्व का 10% है।
2. ऊर्जा संसाधन
कोयला
कोयला भारत का प्रमुख ऊर्जा स्रोत है, जो 60% बिजली उत्पादन के लिए उपयोग होता है।
- भंडार: 360 बिलियन टन, मुख्यतः दामोदर घाटी।
- उत्पादन: 2025 में 1 बिलियन टन।
- चुनौतियाँ: पर्यावरण प्रदूषण, खनन से मृदा क्षरण।
पेट्रोलियम
पेट्रोलियम परिवहन और उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत 70% कच्चा तेल आयात करता है।
- भंडार: मुंबई हाई, असम, गुजरात।
- उत्पादन: 2025 में 35 मिलियन टन।
- रिफाइनरियाँ: जामनगर (रिलायंस), मथुरा।
जलविद्युत
जलविद्युत नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है, जो हिमालय और पश्चिमी घाट में प्रचुर है।
- क्षमता: 2025 में 50 गीगावाट (कुल ऊर्जा का 15%)।
- प्रमुख परियोजनाएँ: भाखड़ा नंगल (पंजाब), टिहरी (उत्तराखंड)।
- चुनौतियाँ: विस्थापन, पारिस्थितिक प्रभाव।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत में 2025 में कुल स्थापित बिजली क्षमता 450 गीगावाट है, जिसमें जलविद्युत का हिस्सा 11% है।
3. बहुउद्देशीय परियोजनाएँ
परिभाषा और उद्देश्य
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ नदियों पर बांध और जलाशय बनाकर बिजली, सिंचाई, और बाढ़ नियंत्रण प्रदान करती हैं।
- उद्देश्य: बिजली उत्पादन, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल।
- प्रमुख परियोजनाएँ:
- भाखड़ा नंगल: सतलज नदी, पंजाब - 1,325 मेगावाट, 7 मिलियन हेक्टेयर सिंचाई।
- टिहरी बांध: भागीरथी नदी, उत्तराखंड - 2,400 मेगावाट।
- सरदार सरोवर: नर्मदा नदी, गुजरात - 1,450 मेगावाट, 1.8 मिलियन हेक्टेयर सिंचाई।
प्रभाव
- सकारात्मक: खाद्य सुरक्षा, बिजली आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण।
- नकारात्मक: विस्थापन, जैव विविधता हानि, जलजमाव।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में सरदार सरोवर परियोजना ने 4 राज्यों में 2 मिलियन किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान की है।
4. ऊर्जा संकट और विकल्प
ऊर्जा संकट
ऊर्जा संकट बढ़ती माँग और सीमित आपूर्ति के कारण उत्पन्न होता है। भारत में प्रमुख कारण:
- उच्च माँग: 2025 में ऊर्जा माँग 5% वार्षिक वृद्धि।
- सीमित संसाधन: गैर-नवीकरणीय संसाधनों का ह्रास।
- प्रदूषण: कोयला आधारित संयंत्रों से CO₂ उत्सर्जन।
विकल्प
- सौर ऊर्जा: 2025 में 150 गीगावाट स्थापित क्षमता।
- पवन ऊर्जा: गुजरात, तमिलनाडु में 50 गीगावाट।
- नाभिकीय ऊर्जा: कुडनकुलम (तमिलनाडु) में 6,000 मेगावाट।
- जैव ऊर्जा: बायोमास और बायोगैस से 10 गीगावाट।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत ने 2025 में राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत 100 गीगावाट सौर ऊर्जा लक्ष्य हासिल किया, और 2030 तक 300 गीगावाट का लक्ष्य है।
5. समुद्री संसाधन
परिभाषा और प्रकार
समुद्री संसाधन हिंद महासागर और भारत की 7,500 किमी तट रेखा से प्राप्त होते हैं। प्रमुख प्रकार:
- मत्स्य पालन: भारत विश्व में मछली उत्पादन में तीसरा (14 मिलियन टन, 2025)।
- खनिज: पेट्रोलियम (मुंबई हाई), मैंगनीज नोड्यूल्स।
- नमक उत्पादन: गुजरात (70% राष्ट्रीय उत्पादन)।
- पर्यटन: गोवा, केरल के समुद्र तट।
चुनौतियाँ
- अति मछली पकड़ना: जलीय जैव विविधता पर खतरा।
- प्रदूषण: तेल रिसाव, प्लास्टिक कचरा।
- समुद्र स्तर वृद्धि: तटीय क्षेत्रों पर खतरा।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में भारत ने समुद्री संसाधनों के संरक्षण के लिए "ब्लू इकोनॉमी" नीति लागू की, जिससे मत्स्य पालन निर्यात 20% बढ़ा।
6. जैविक संसाधन
परिभाषा और महत्व
जैविक संसाधन वन, वन्य जीवन, और कृषि संसाधन हैं, जो पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- वन: भारत में 23% भू-क्षेत्र वन (2025)।
- वन्य जीवन: 50,000 प्रजातियाँ, जैसे बाघ, गैंडा।
- कृषि: चावल, गेहूँ, औषधीय पौधे।
प्रमुख क्षेत्र
| संसाधन |
प्रमुख क्षेत्र |
विशेषताएँ |
| वन |
पश्चिमी घाट, हिमालय |
सदाबहार, पर्णपाती वन |
| वन्य जीवन |
सुंदरबन, काजीरंगा |
बाघ, गैंडा |
| औषधीय पौधे |
पूर्वी हिमालय |
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ |
संरक्षण उपाय
- राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य: 106 राष्ट्रीय उद्यान, 565 अभयारण्य (2025)।
- बॉयोस्फीयर रिजर्व: 18 रिजर्व, जैसे नीलगिरि, सुंदरबन।
- जैव विविधता अधिनियम, 2002: प्रजातियों का संरक्षण।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत में 2025 में जैव विविधता संरक्षण के लिए 18 बॉयोस्फीयर रिजर्व हैं, जिनमें 11 UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में भारत ने जैविक संसाधनों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता कार्य योजना को और मजबूत किया, जिससे 30% संरक्षित क्षेत्रों में वृद्धि हुई।