वातावरणीय प्रक्रियाएँ (Climatology)
1. वायुमंडल की संरचना
पृथ्वी के वायुमंडल को मुख्यतः 5 परतों में विभाजित किया गया है:
| परत |
ऊँचाई (किमी) |
महत्वपूर्ण विशेषताएँ |
| क्षोभमंडल (Troposphere) |
0-12 (विषुवत रेखा पर 18, ध्रुवों पर 8) |
सभी मौसमी घटनाएँ, तापमान ह्रास (6.5°C प्रति किमी) |
| समताप मंडल (Stratosphere) |
12-50 |
ओजोन परत (20-30 किमी), तापमान वृद्धि |
| मध्यमंडल (Mesosphere) |
50-80 |
सबसे ठंडी परत (-90°C), उल्काएँ जलती हैं |
| आयनमंडल (Thermosphere) |
80-700 |
तापमान 1500°C तक, अंतरिक्ष यान की कक्षा |
| बाह्यमंडल (Exosphere) |
700+ |
वायुमंडल और अंतरिक्ष के बीच संक्रमण क्षेत्र |
परीक्षा उपयोगी तथ्य: क्षोभमंडल में ऊँचाई के साथ तापमान में कमी को "सामान्य ताप ह्रास दर"
(Normal Lapse Rate) कहते हैं (6.5°C प्रति किमी)। हाल के अध्ययनों से पुष्टि हुई है कि यह दर मुख्यतः
अपरिवर्तित है, हालांकि जलवायु परिवर्तन से कुछ क्षेत्रों में भिन्नताएँ देखी जा रही हैं।
वायुमंडल के महत्वपूर्ण घटक
- नाइट्रोजन (78.08%): जैविक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक
- ऑक्सीजन (20.95%): श्वसन और दहन के लिए
- आर्गन (0.93%): निष्क्रिय गैस
- कार्बन डाइऑक्साइड (0.0425%): ग्रीनहाउस प्रभाव के लिए जिम्मेदार (अगस्त 2025 तक औसतन 425
ppm, जो 2024 से बढ़ा है)
- जलवाष्प (0-4%): मौसम प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण
अतिरिक्त तथ्य: कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर मानवीय गतिविधियों के कारण तेजी से बढ़ रहा है, जो
वैश्विक तापन को बढ़ावा दे रहा है।
2. तापन और सूर्य किरणों का वितरण
पृथ्वी पर तापन तीन प्रक्रियाओं द्वारा होता है:
- संचालन (Conduction): सीधे संपर्क द्वारा ऊष्मा हस्तांतरण
- संवहन (Convection): द्रव/गैस के संचलन द्वारा
- विकिरण (Radiation): विद्युत चुम्बकीय तरंगों द्वारा
सूर्यातप (Insolation) के निर्धारक कारक:
- सूर्य की किरणों का आपतन कोण: सीधी किरणें अधिक ऊर्जा देती हैं
- दिन की अवधि: लंबे दिन अधिक ऊर्जा ग्रहण
- वायुमंडलीय पारदर्शिता: बादल, धूल कण ऊर्जा अवशोषित करते हैं
- पृथ्वी की दूरी सूर्य से: जनवरी में निकटतम (पेरिहिलियन), जुलाई में दूरस्थ (एफ़िलियन)
परीक्षा उपयोगी तथ्य: "अल्बेडो" (Albedo) पृथ्वी द्वारा परावर्तित सौर विकिरण का प्रतिशत है।
पृथ्वी का औसत अल्बेडो अब लगभग 29% है (2025 में रिकॉर्ड निम्न 28.711% तक पहुंचा, जो जलवायु परिवर्तन के कारण
घट रहा है)। बर्फ सबसे अधिक अल्बेडो (80-90%) रखती है।
अतिरिक्त तथ्य: अल्बेडो में कमी से अधिक सौर ऊर्जा अवशोषित हो रही है, जो वैश्विक तापन को तेज
कर रही है, विशेष रूप से ध्रुवीय बर्फ पिघलने और बादलों में कमी से।
3. वायुसंघर्ष, वायुदाब और पवन प्रणाली
वायुसंघर्ष (Air Masses)
विशाल वायु राशियाँ जिनके तापमान और आर्द्रता की विशेषताएँ एकसमान होती हैं। वर्गीकरण:
- उष्णकटिबंधीय समुद्री (mT): गर्म और आर्द्र - मानसूनी वर्षा के लिए जिम्मेदार
- उष्णकटिबंधीय स्थलीय (cT): गर्म और शुष्क - गर्मियों में उत्तर भारत की लू
- ध्रुवीय समुद्री (mP): ठंडी और आर्द्र - शीतकालीन वर्षा
- ध्रुवीय स्थलीय (cP): ठंडी और शुष्क - उत्तरी अमेरिका में शीत लहर
- आर्कटिक (A): अत्यंत ठंडी - ध्रुवीय क्षेत्रों से
वायुदाब (Atmospheric Pressure)
समुद्र तल पर सामान्य वायुदाब 1013.25 mb (मिलीबार) या 760 mm Hg होता है।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: "कोरिऑलिस बल" पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होता है जो उत्तरी
गोलार्द्ध में पवनों को दायीं ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मोड़ देता है। यह भूमध्य रेखा पर शून्य और
ध्रुवों पर अधिकतम होता है।
विश्व की प्रमुख पवन प्रणालियाँ
| पवन |
विशेषताएँ |
क्षेत्र |
| व्यापारिक पवनें (Trade Winds) |
उत्तर-पूर्व (उ.गो.) और दक्षिण-पूर्व (द.गो.) |
30°N/S से भूमध्य रेखा तक |
| पछुआ पवनें (Westerlies) |
दक्षिण-पश्चिम (उ.गो.) और उत्तर-पश्चिम (द.गो.) |
30°-60° अक्षांश |
| ध्रुवीय पवनें (Polar Easterlies) |
उत्तर-पूर्व (उ.गो.) और दक्षिण-पूर्व (द.गो.) |
60°-90° अक्षांश |
अतिरिक्त तथ्य: जलवायु परिवर्तन से पवन प्रणालियों में परिवर्तन हो रहा है, जैसे पछुआ पवनें
मजबूत हो रही हैं, जो मौसम पैटर्न को प्रभावित कर रही हैं।
4. आर्द्रता और वर्षा के प्रकार
आर्द्रता (Humidity)
- निरपेक्ष आर्द्रता: वायु में जलवाष्प का वास्तविक परिमाण (gm/m³)
- सापेक्ष आर्द्रता: वायु में उपस्थित जलवाष्प/संतृप्ति के लिए आवश्यक जलवाष्प का अनुपात (%)
- विशिष्ट आर्द्रता: जलवाष्प का द्रव्यमान/वायु के कुल द्रव्यमान का अनुपात (gm/kg)
वर्षा के प्रकार
| प्रकार |
विवरण |
उदाहरण |
| संवहनीय वर्षा |
गर्म वायु के ऊपर उठने और ठंडी होने से |
उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में दोपहर की वर्षा |
| ऊर्ध्वाधर वर्षा |
पर्वतों के ढाल पर वायु के ऊपर चढ़ने से |
भारत में मानसूनी वर्षा (पश्चिमी घाट) |
| चक्रवाती वर्षा |
चक्रवातों में गर्म वायु के ऊपर उठने से |
पश्चिमी विक्षोभ से उत्तर भारत में शीतकालीन वर्षा |
परीक्षा उपयोगी तथ्य: "वर्षा छाया प्रदेश" (Rain Shadow Area) पर्वतों के पवनविमुख ढाल पर
स्थित शुष्क क्षेत्र होते हैं। उदाहरण: पश्चिमी घाट के पूर्व में दक्कन का पठार।
अतिरिक्त तथ्य: जलवायु परिवर्तन से वर्षा पैटर्न बदल रहे हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में बाढ़ और
अन्य में सूखा बढ़ रहा है।
5. उष्णकटिबंधीय चक्रवात
उष्णकटिबंधीय चक्रवात निम्नलिखित विशेषताएँ रखते हैं:
- 8°-15° उत्तरी/दक्षिणी अक्षांशों के बीच उत्पन्न
- समुद्री सतह का तापमान 27°C से अधिक होना आवश्यक
- कोरिऑलिस बल की पर्याप्त मात्रा
- ऊर्ध्वाधर पवन वेग में कम अंतर
- पूर्व-स्थित कम दाब क्षेत्र
उष्णकटिबंधीय चक्रवात और समशीतोष्ण चक्रवात में अंतर
| पैरामीटर |
उष्णकटिबंधीय चक्रवात |
समशीतोष्ण चक्रवात |
| उत्पत्ति |
समुद्र पर 8°-15° अक्षांश |
35°-65° अक्षांश, स्थल/समुद्र |
| आकार |
छोटा (100-500 km) |
विशाल (1000-2500 km) |
| जीवनकाल |
7 दिन से कम |
15-20 दिन |
| ऊर्जा स्रोत |
गुप्त ऊष्मा (समुद्री जल वाष्पीकरण) |
वायुराशियों का तापांतर |
| वर्षा |
केंद्र के निकट भारी वर्षा |
व्यापक क्षेत्र में हल्की वर्षा |
अतिरिक्त तथ्य: जलवायु परिवर्तन से उष्णकटिबंधीय चक्रवात अधिक तीव्र हो रहे हैं, हालांकि उनकी
संख्या में कमी आ सकती है।
6. विश्व की जलवायु वर्गीकरण
कोपेन का जलवायु वर्गीकरण (Köppen Climate Classification)
वर्षा और तापमान के आधार पर 5 प्रमुख समूह:
| प्रकार |
प्रतीक |
विशेषताएँ |
उदाहरण |
| उष्णकटिबंधीय आर्द्र |
A |
सभी महीनों का औसत तापमान ≥18°C, भारी वर्षा |
अमेज़न बेसिन, केरल |
| शुष्क |
B |
वाष्पीकरण > वर्षा |
थार मरुस्थल, सहारा |
| समशीतोष्ण |
C |
सबसे ठंडे महीने का औसत -3°C से 18°C |
भारत का उत्तरी मैदान, यूरोप |
| शीतोष्ण |
D |
सबसे ठंडे महीने का औसत <-3°C, गर्म महीने>10°C |
रूस, कनाडा |
| ध्रुवीय |
E |
सबसे गर्म महीने का औसत <10°C< /td>
| अंटार्कटिका, ग्रीनलैंड |
थॉर्नथ्वेट वर्गीकरण (Thornthwaite Classification)
पौधों की जल आवश्यकता पर आधारित, जलवायु को 5 प्रकारों में वर्गीकृत करता है:
- आर्द्र (A): वर्षा > पौधों की आवश्यकता
- आर्द्र-अर्धआर्द्र (B1): थोड़ी कमी गर्मियों में
- अर्धआर्द्र (B2): मध्यम जल कमी
- अर्धशुष्क (C1): गंभीर जल कमी
- शुष्क (C2): अत्यधिक जल कमी
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत में कोपेन के अनुसार अधिकांश भाग "Aw" (उष्णकटिबंधीय सवाना) जलवायु
के अंतर्गत आता है, जहाँ "A" उष्णकटिबंधीय और "w" शुष्क शीतऋतु को दर्शाता है। थार मरुस्थल "BWhw" (गर्म
मरुस्थल) है।
7. ओजोन परत और उसकी वर्तमान स्थिति (Updated Section)
ओजोन परत समताप मंडल में स्थित है और UV किरणों से रक्षा करती है।
- सीएफसी कटौती के कारण ओजोन छिद्र ठीक हो रहा है, लेकिन पूर्ण सुधार में 50 वर्ष लगेंगे।
- 2025 में आर्कटिक ओजोन स्तर असामान्य रूप से कम रहे।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के कारण ओजोन परत ठीक हो रही है, लेकिन जलवायु
परिवर्तन से नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं।
8. वैश्विक जलवायु परिवर्तन के प्रभाव (New Section)
जलवायु परिवर्तन के प्रमुख प्रभाव:
- तापमान में वृद्धि: 2025-2029 में 1.5°C से अधिक होने की 70% संभावना।
- प्रजातियों पर प्रभाव: 1.5-2°C वार्मिंग से अधिकांश स्थलीय प्रजातियों की सीमाएँ सिकुड़ेंगी।
- चरम मौसम: बाढ़, सूखा, और चक्रवातों की तीव्रता में वृद्धि।
- समुद्र स्तर वृद्धि: बर्फ पिघलने से तटीय क्षेत्र प्रभावित।
- पेरिस समझौते की सीमा: 1.5°C सीमा पार करने के लिए केवल 3 वर्ष शेष।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: जलवायु जोखिम सूचकांक 2025 के अनुसार, चरम मौसम से मानवीय और आर्थिक हानि
बढ़ रही है।