क्षेत्रीय विकास और योजना (Regional Development and Planning)
1. क्षेत्रीय विकास की समस्याएँ
क्षेत्रीय विकास में भारत के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक, सामाजिक, और पर्यावरणीय असमानताएँ प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
- आर्थिक असमानता: महाराष्ट्र, गुजरात जैसे विकसित राज्यों की तुलना में बिहार, झारखंड जैसे राज्यों में कम प्रति व्यक्ति आय।
- बुनियादी ढाँचा: पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, बिजली की कमी।
- संसाधन असमानता: जल संसाधनों का असमान वितरण, जैसे राजस्थान में जल की कमी।
- सामाजिक असमानता: शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में क्षेत्रीय अंतर।
- पर्यावरणीय समस्याएँ: वनों की कटाई, मृदा क्षरण।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत में 2025 में प्रति व्यक्ति आय में क्षेत्रीय अंतर 1:5 है, जहाँ गुजरात में ₹3,50,000 और बिहार में ₹70,000 है।
2. मल्टी-लेवल योजना
मल्टी-लेवल योजना में राष्ट्रीय, राज्य, जिला, और स्थानीय स्तर पर समन्वित विकास योजनाएँ शामिल हैं।
- राष्ट्रीय स्तर: नीति आयोग, पंचवर्षीय योजनाएँ।
- राज्य स्तर: राज्य विकास योजनाएँ, जैसे महाराष्ट्र का MMRDA।
- जिला स्तर: जिला योजना समितियाँ (DPC)।
- स्थानीय स्तर: पंचायती राज, नगर निगम।
उदाहरण: नीति आयोग की आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme) ने 2025 में 112 पिछड़े जिलों में शिक्षा और स्वास्थ्य में 30% सुधार किया।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में नीति आयोग ने मल्टी-लेवल योजना के तहत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया, जिससे योजनाओं की पारदर्शिता 40% बढ़ी।
3. मेट्रो क्षेत्र की योजना
मेट्रो क्षेत्र (महानगर) शहरीकरण और आर्थिक विकास के केंद्र हैं, लेकिन इनमें ट्रैफिक, आवास, और प्रदूषण की समस्याएँ हैं।
- प्रमुख मेट्रो: दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता।
- योजनाएँ:
- मेट्रो रेल: 2025 में 20 शहरों में 800 किमी मेट्रो नेटवर्क।
- स्मार्ट सिटी मिशन: 100 शहरों में डिजिटल और टिकाऊ बुनियादी ढाँचा।
- AMRUT: शहरी जल आपूर्ति और सीवेज प्रबंधन।
- चुनौतियाँ: झुग्गी-झोपड़ियाँ, प्रदूषण, और संसाधन दबाव।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: दिल्ली मेट्रो 2025 में 450 किमी नेटवर्क के साथ विश्व का 10वाँ सबसे बड़ा मेट्रो सिस्टम है।
4. आदिवासी क्षेत्र की योजना
आदिवासी क्षेत्र (मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा) में सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन और संसाधन शोषण प्रमुख समस्याएँ हैं।
- योजनाएँ:
- वन अधिकार अधिनियम, 2006: 2 करोड़ आदिवासियों को भूमि स्वामित्व।
- TRIFED: आदिवासी हस्तशिल्प और उत्पादों का विपणन।
- एकलव्य मॉडल स्कूल: 2025 में 500 स्कूल स्थापित।
- चुनौतियाँ: वन विनाश, खनन, और विस्थापन।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में TRIFED ने आदिवासी उत्पादों का निर्यात $1 बिलियन तक बढ़ाया, जिससे 1 मिलियन आदिवासियों को लाभ हुआ।
5. पहाड़ी क्षेत्र की योजना
पहाड़ी क्षेत्र (हिमालय, उत्तराखंड, हिमाचल) में भूस्खलन, कनेक्टिविटी की कमी, और पर्यावरणीय संवेदनशीलता चुनौतियाँ हैं।
- योजनाएँ:
- हिल एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम: पर्यावरण-संरक्षित विकास।
- चारधाम परियोजना: उत्तराखंड में 900 किमी सड़क विकास।
- पर्यटन प्रोत्साहन: हिमाचल में इको-टूरिज्म।
- चुनौतियाँ: भूस्खलन, जलवायु परिवर्तन, और अति-पर्यटन।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: 2025 में चारधाम परियोजना ने उत्तराखंड में पर्यटन को 20% बढ़ाया, लेकिन भूस्खलन जोखिम 15% बढ़ा।
6. सूखा-प्रवण क्षेत्र की योजना
सूखा-प्रवण क्षेत्र (राजस्थान, मराठवाड़ा) में जल की कमी और कम उत्पादकता प्रमुख समस्याएँ हैं।
- योजनाएँ:
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई।
- वाटरशेड विकास: 2025 में 5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र कवर।
- सूखा-प्रतिरोधी फसलें: बाजरा, ज्वार को प्रोत्साहन।
- चुनौतियाँ: अनियमित मानसून, मृदा क्षरण।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में राजस्थान में ड्रिप सिंचाई ने जल उपयोग दक्षता 30% बढ़ाई और फसल उत्पादकता 15% सुधारी।
7. वाटरशेड प्रबंधन
वाटरशेड प्रबंधन जल और मृदा संसाधनों का टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करता है।
- उपाय:
- चेक डैम और कंटूर बंडिंग।
- वृक्षारोपण और मृदा संरक्षण।
- राष्ट्रीय वाटरशेड विकास कार्यक्रम: 2025 में 10 मिलियन हेक्टेयर कवर।
- प्रभाव: जल स्तर में 20% सुधार, मृदा क्षरण में 25% कमी।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारत में 2025 में वाटरशेड प्रबंधन ने 2 मिलियन किसानों को लाभ पहुँचाया, विशेष रूप से मध्य प्रदेश और राजस्थान में।
8. विकासात्मक असमानताएँ
विकासात्मक असमानताएँ क्षेत्रीय, सामाजिक, और आर्थिक स्तर पर भारत में मौजूद हैं।
- क्षेत्रीय: दक्षिण और पश्चिमी राज्य (केरल, गुजरात) बनाम पूर्वी और उत्तर-पूर्वी (बिहार, असम)।
- सामाजिक: लैंगिक असमानता, आदिवासी और गैर-आदिवासी के बीच अंतर।
- आर्थिक: शहरी (10% जनसंख्या, 60% GDP) बनाम ग्रामीण (65% जनसंख्या, 40% GDP)।
उपाय: समावेशी विकास, क्षेत्रीय निवेश, और सामाजिक योजनाएँ जैसे PMAY, MGNREGA।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में MGNREGA ने 10 करोड़ ग्रामीण परिवारों को 100 दिन का रोज़गार प्रदान किया, जिससे ग्रामीण-शहरी असमानता 10% घटी।
9. पंचवर्षीय योजनाओं में समावेशी विकास
पंचवर्षीय योजनाएँ (1951-2017, बाद में नीति आयोग) भारत में समावेशी विकास का आधार रही हैं।
- प्रथम योजना (1951-56): कृषि और सिंचाई पर फोकस।
- द्वितीय योजना (1956-61): भारी उद्योग और आत्मनिर्भरता।
- 11वीं योजना (2007-12): समावेशी विकास, 9% GDP वृद्धि लक्ष्य।
- 12वीं योजना (2012-17): टिकाऊ विकास, सामाजिक समावेशन।
- वर्तमान (2025): नीति आयोग ने समावेशी विकास के लिए 3-वर्षीय कार्य योजना शुरू की, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोज़गार पर जोर।
प्रमुख योजनाएँ: PMJAY (5 लाख रुपये स्वास्थ्य बीमा), स्किल इंडिया, और स्टार्टअप इंडिया।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: 12वीं पंचवर्षीय योजना ने भारत में गरीबी दर को 21% तक कम किया, और नीति आयोग ने 2025 में 100% डिजिटल साक्षरता का लक्ष्य रखा।
अतिरिक्त तथ्य: 2025 में नीति आयोग की आकांक्षी जिला कार्यक्रम ने 112 जिलों में HDI (मानव विकास सूचकांक) में 25% सुधार किया।