भौगोलिक विचारधारा का विकास

1. विभिन्न देशों के भूगोलविदों का योगदान

भारतीय भूगोलविद

विद्वान योगदान महत्वपूर्ण कार्य
डी.एन. वाजपेयी भारतीय भूगोल के जनक, क्षेत्रीय भूगोल "भारत का भूगोल"
रामलोचन सिंह कृषि भूगोल, भूदृश्य विश्लेषण "भारत का कृषि भूगोल"
एस.पी. चटर्जी भौतिक भूगोल, हिमालय अध्ययन "भारत: भूगोल"
राधाकमल मुखर्जी मानव भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल "सामाजिक भूगोल"
परीक्षा उपयोगी तथ्य: प्राचीन भारत में वराहमिहिर ने "बृहत्संहिता" में भूगोल संबंधी जानकारी दी। आर्यभट्ट ने पृथ्वी की गोलाकारता का उल्लेख किया। कालिदास के "मेघदूत" में भौगोलिक विवरण मिलते हैं।

जर्मन भूगोलविद

विद्वान योगदान विचारधारा
अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट आधुनिक भूगोल के जनक, समाकलनात्मक दृष्टिकोण वैज्ञानिक भूगोल
कार्ल रिटर मानव-पर्यावरण संबंध, क्षेत्रीय भूगोल ऐतिहासिक भूगोल
फ्रेडरिक रैटजेल राजनीतिक भूगोल, नीचतावाद "एंथ्रोपोज्योग्राफी"
अल्फ्रेड हेटनर क्षेत्रवाद, भूगोल की प्रकृति चिरस्थायी भूगोल

फ्रेंच भूगोलविद

विद्वान योगदान विचारधारा
पॉल विडाल डी ला ब्लाश संभावितवाद, क्षेत्रीय भूगोल "प्रिंसिपल्स ऑफ ह्यूमन ज्योग्राफी"
जीन ब्रून्श मानव भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल फ्रेंच भूगोल स्कूल
एलिसे रेक्लस विश्व भूगोल, सामाजिक भूगोल "द अर्थ एंड इट्स इनहैबिटेंट्स"

ब्रिटिश भूगोलविद

विद्वान योगदान विचारधारा
हाफोर्ड मैकिंडर राजनीतिक भूगोल, हार्टलैंड सिद्धांत "द ज्योग्राफिकल पिवट ऑफ हिस्ट्री"
पीटर हैगेट मात्रात्मक क्रांति, स्थानिक विश्लेषण "लोकेशनल एनालिसिस इन ह्यूमन ज्योग्राफी"
डेविड हार्वे कट्टरपंथी भूगोल, शहरी भूगोल "सोशल जस्टिस एंड द सिटी"

सोवियत भूगोलविद

विद्वान योगदान विचारधारा
निकोलाई बरांस्की आर्थिक भूगोल, क्षेत्रीय योजना सोवियत भूगोल स्कूल
लेव सेमेनोविच बर्ग भौतिक भूगोल, परिदृश्य भूगोल प्राकृतिक क्षेत्रों का वर्गीकरण

2. प्रमुख भूगोलिक विचारधाराएँ

19वीं शताब्दी

नीचतावाद (Determinism)

मानव समाज और संस्कृति पर भौतिक पर्यावरण के निर्णायक प्रभाव का सिद्धांत। फ्रेडरिक रैटजेल और एल्सवर्थ हंटिंगटन के विचार।

20वीं शताब्दी आरंभ

संभावितवाद (Possibilism)

पॉल विडाल डी ला ब्लाश द्वारा प्रतिपादित - मानव पर्यावरण को संशोधित कर सकता है, पर्यावरण संभावनाएँ प्रदान करता है।

1920-1950

क्षेत्रवाद (Regionalism)

अल्फ्रेड हेटनर और रिचर्ड हार्टशोर्न द्वारा - भूगोल को क्षेत्रीय विभिन्नताओं के अध्ययन के रूप में देखना।

1950-1960

प्रत्यक्षवाद (Positivism)

वैज्ञानिक पद्धति पर जोर, सिद्धांत निर्माण और परीक्षण। फ्रेड के. शेफर द्वारा "विज्ञान के रूप में भूगोल की अपवादिकता" लेख।

1960-1970

मात्रात्मक क्रांति (Quantitative Revolution)

सांख्यिकीय विधियों और गणितीय मॉडलों का उपयोग। पीटर हैगेट, डब्ल्यू. बंज आदि द्वारा प्रवर्तित।

मॉडल और सिस्टम अवधारणा

3. समकालीन भूगोलिक विचारधाराएँ

विचारधारा मुख्य विचार प्रमुख विद्वान
व्यवहारवादी भूगोल (Behavioral) मानव व्यवहार और धारणा पर जोर, निर्णय प्रक्रिया के. लिंच, डी. लोवेन्थल
कट्टरपंथी भूगोल (Radical) सामाजिक असमानताओं का विश्लेषण, मार्क्सवादी दृष्टिकोण डेविड हार्वे, नील स्मिथ
मानवतावादी भूगोल (Humanistic) मानव अनुभव, अर्थ और मूल्यों पर ध्यान यी-फू तुआन, एडवर्ड रेल्फ
उत्तर-आधुनिक भूगोल (Post-modern) बहुलवाद, सापेक्षवाद, विविध दृष्टिकोण एडवर्ड सोजा, माइकल डियर
नारीवादी भूगोल (Feminist) लैंगिक असमानताओं का स्थानिक विश्लेषण डोरिन मैसी, जिलियन रोज
पारिस्थितिक भूगोल (Ecological) मानव-पर्यावरण संबंध, स्थायित्व इयान मैकहार्ग, गिल्बर्ट व्हाइट
परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारतीय भूगोल के विकास में महत्वपूर्ण संस्थान:

समकालीन भारतीय भूगोलविद

भारतीय भूगोल का विकास कालक्रम

  1. प्रारंभिक चरण (1900-1947): ब्रिटिश प्रभाव, सर्वेक्षण और मानचित्रण
  2. स्वतंत्रता पश्चात (1947-1970): क्षेत्रीय विकास, योजना पर जोर
  3. मात्रात्मक क्रांति (1970-1990): वैज्ञानिक पद्धतियाँ, मॉडल
  4. समकालीन चरण (1990-वर्तमान): बहुविषयक दृष्टिकोण, सामाजिक मुद्दे

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य