कम्प्यूटर (Computers)
- कम्प्यूटर (computer) एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो डेटा को
प्रोसेस (process) करता है – यह इनपुट लेता है, उसे प्रोसेस करता है, आउटपुट देता है और
परिणामों को स्टोर करता है। इसकी कार्यप्रणाली IPO (Input → Process → Output) चक्र पर आधारित होती है।
- कम्प्यूटर का डेटा प्रोसेसिंग चक्र (data processing cycle) –
इनपुट (input), प्रोसेस (process) और आउटपुट (output) होता है – इनपुट डिवाइस (कीबोर्ड, माउस)
से डेटा लिया जाता है, CPU द्वारा प्रोसेस किया जाता है, और मॉनिटर/प्रिंटर जैसे आउटपुट डिवाइस पर परिणाम
दिखाया जाता है।
- डेटा प्रोसेसिंग (data processing) CPU द्वारा की जाती
है – CPU (Central Processing Unit) सभी गणनाएँ एवं निर्देशों का निष्पादन करता है। इसकी गति
गीगाहर्ट्ज़ (GHz) में मापी जाती है।
- CPU (Central Processing Unit) को कम्प्यूटर का मस्तिष्क
(brain) कहा जाता है – यह ALU (Arithmetic Logic Unit – गणितीय एवं तार्किक संक्रियाएँ) और CU
(Control Unit – नियंत्रण इकाई) से मिलकर बना होता है। CPU रजिस्टर (registers) में अस्थायी डेटा रखता है।
- RAM (Random Access Memory) अस्थायी मेमोरी (temporary memory)
है जो डेटा को अस्थायी रूप से स्टोर करती है – यह वोलेटाइल (volatile) मेमोरी है, अर्थात बिजली
बंद होने पर इसका सारा डेटा समाप्त हो जाता है। इसे मुख्य मेमोरी (main memory) भी कहते हैं।
- ROM (Read Only Memory) स्थायी मेमोरी (permanent memory) है जो
बूट प्रक्रिया (booting process) के लिए उपयोगी होती है – यह नॉन-वोलेटाइल (non-volatile) होती
है, अर्थात बिजली बंद होने पर भी डेटा सुरक्षित रहता है। ROM में BIOS (Basic Input Output System) स्टोर
होता है।
- कैश मेमोरी (cache memory) तेज़ डेटा पहुँच (fast data access)
प्रदान करती है – यह CPU के निकट स्थित अति-तीव्र मेमोरी (SRAM) होती है। L1 (स्तर 1) , L2
(स्तर 2) और L3 (स्तर 3) कैश के विभिन्न स्तर होते हैं; L1 सबसे तीव्र एवं सबसे छोटा होता है।
- वर्चुअल मेमोरी (virtual memory) RAM की कमी (shortage) को पूरा
करती है – यह हार्ड डिस्क के एक भाग को अस्थायी RAM के रूप में उपयोग करती है। यह पेजिंग
(paging) तकनीक पर काम करती है, परंतु वास्तविक RAM से धीमी होती है।
- बाइनरी सिस्टम (binary system) में डेटा के प्रतिनिधित्व के लिए
केवल 0 और 1 का उपयोग होता है – कम्प्यूटर सभी डेटा (संख्या, अक्षर, चित्र, ध्वनि) को बाइनरी
(0 एवं 1) में परिवर्तित करके समझता है। प्रत्येक 0 या 1 को एक बिट (bit) कहते हैं।
- 1 बाइट (byte) में 8 बिट्स (bits) होते हैं – एक बाइट
में 2⁸ = 256 विभिन्न मान (0 से 255) संग्रहीत किए जा सकते हैं। एक बाइट सामान्यतः एक अंग्रेजी वर्णमाला
(character) को स्टोर करने के लिए पर्याप्त होती है।
- कम्प्यूटर में डेटा (data) बिट्स (bits) और बाइट्स (bytes) में
मापा जाता है – बिट सबसे छोटी इकाई (0 या 1) है, जबकि बाइट (8 बिट) मूल मापन इकाई है। सभी बड़ी
इकाइयाँ (KB, MB, GB, TB) बाइट पर आधारित हैं।
- 1 किलोबाइट (KB) में 1024 बाइट्स (bytes) होते हैं –
यह 2¹⁰ बाइट के बराबर होता है। 1 KB लगभग एक छोटे पैराग्राफ को स्टोर कर सकता है।
- 1 मेगाबाइट (MB) में 1024 किलोबाइट्स (KB) होते हैं –
यह 2²⁰ बाइट के बराबर होता है। एक MP3 गाना लगभग 3-5 MB का होता है।
- 1 गीगाबाइट (GB) में 1024 मेगाबाइट्स (MB) होते हैं –
यह 2³⁰ बाइट के बराबर होता है। एक मूवी लगभग 1-2 GB की हो सकती है।
- 1 टेराबाइट (TB) में 1024 गीगाबाइट्स (GB) होते हैं –
यह 2⁴⁰ बाइट के बराबर होता है। एक आधुनिक हार्ड डिस्क 1 TB, 2 TB या अधिक की होती है।
- कम्प्यूटर में डेटा (data) बाइनरी (binary) प्रारूप में
संग्रहित (stored) होता है – सभी फाइलें – चाहे टेक्स्ट, इमेज, वीडियो या ऑडियो – अंततः 0 और 1
की श्रृंखला के रूप में स्टोर होती हैं।
- ASCII (American Standard Code for Information Interchange)
डेटा (अक्षरों) को बाइनरी (binary) में परिवर्तित करता है – ASCII 7-बिट या 8-बिट कोड का उपयोग
करता है। उदाहरण – 'A' का ASCII कोड 65 (बाइनरी 1000001) है।
- यूनिकोड (Unicode) विभिन्न भाषाओं (languages) के अक्षरों के
लिए उपयोगी है – ASCII केवल अंग्रेजी वर्णों का समर्थन करता है, जबकि यूनिकोड हिंदी, अरबी,
चीनी, जापानी सहित सभी भाषाओं के अक्षरों को कोड प्रदान करता है। UTF-8 इसका लोकप्रिय एन्कोडिंग है।
- हार्ड डिस्क (hard disk – HDD) डेटा का स्थायी भंडारण
(permanent storage) करती है – यह नॉन-वोलेटाइल मैग्नेटिक स्टोरेज डिवाइस है। इसमें प्लैटर
(platters) घूमते हैं और डेटा चुंबकीय रूप से लिखा/पढ़ा जाता है। HDD 5400 RPM से 7200 RPM गति में आती है।
- SSD (Solid State Drive) तीव्र डेटा भंडारण (fast data storage)
प्रदान करता है – SSD में कोई घूमने वाला भाग नहीं होता; यह फ्लैश मेमोरी (NAND) का उपयोग करता
है। यह HDD से 5-10 गुना तेज होता है, लेकिन प्रति GB अधिक महंगा होता है।
- HDD (Hard Disk Drive) पारंपरिक डेटा भंडारण डिवाइस
(traditional storage device) है – यह कम लागत में अधिक क्षमता (2 TB, 4 TB, 8 TB) प्रदान करता
है। इसका उपयोग डेस्कटॉप, लैपटॉप एवं सर्वर में किया जाता है।
- ऑप्टिकल डिस्क (optical disk) – CD, DVD, Blu-ray – डेटा भंडारण
(data storage) के लिए उपयोगी है – इसमें डेटा लेजर द्वारा पढ़ा/लिखा जाता है। CD में 700 MB,
DVD में 4.7 GB (एकल परत) एवं Blu-ray में 25-50 GB तक डेटा स्टोर हो सकता है।
- USB ड्राइव (USB flash drive) पोर्टेबल डेटा भंडारण (portable
storage) प्रदान करता है – यह फ्लैश मेमोरी पर आधारित है और USB पोर्ट से जुड़ता है। यह
प्लग-एंड-प्ले (plug-and-play) डिवाइस है, अर्थात बिना ड्राइवर इंस्टॉल किए कार्य करता है।
- मदरबोर्ड (motherboard) कम्प्यूटर के सभी भागों (CPU, RAM, HDD,
GPU) को जोड़ता है – यह एक बड़ा सर्किट बोर्ड होता है जिसमें सभी घटकों के लिए स्लॉट एवं
कनेक्टर होते हैं। यह कम्प्यूटर की रीढ़ (backbone) है।
- BIOS (Basic Input Output System) बूट प्रक्रिया (boot process)
को नियंत्रित करता है – यह ROM में संग्रहित फर्मवेयर (firmware) है। BIOS हार्डवेयर को
इनिशियलाइज़ करता है और ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड करता है। अब UEFI (Unified Extensible Firmware Interface)
इसका आधुनिक विकल्प है।
- GPU (Graphics Processing Unit) ग्राफिक्स प्रोसेसिंग (graphics
processing) के लिए उपयोगी है – GPU विशेष रूप से समानांतर गणनाओं (parallel computations) के
लिए डिज़ाइन किया गया है, जो गेमिंग, वीडियो एडिटिंग एवं मशीन लर्निंग में आवश्यक है। NVIDIA और AMD प्रमुख
GPU निर्माता हैं।
- प्रोसेसर गति (processor speed) गीगाहर्ट्ज़ (GHz – Gigahertz)
में मापी जाती है – 1 GHz = 10⁹ चक्र प्रति सेकंड। उच्च GHz का अर्थ तीव्र प्रसंस्करण होता है,
परंतु यह कोर (cores – दोहरी, चौगुनी) की संख्या पर भी निर्भर करता है।
- ऑपरेटिंग सिस्टम (OS – Operating System) हार्डवेयर (hardware)
और सॉफ्टवेयर (software) के बीच इंटरफेस (interface) का कार्य करता है – यह संसाधन प्रबंधन
(resource management – CPU, मेमोरी, डिवाइस) , फ़ाइल प्रबंधन एवं उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस प्रदान करता है।
- विंडोज़ (Windows) माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विकसित एक लोकप्रिय
ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) है – यह GUI (Graphical User Interface) पर आधारित है। Windows 95, XP,
7, 10, 11 इसके प्रमुख संस्करण हैं। यह डेस्कटॉप कम्प्यूटरों में सर्वाधिक उपयोग किया जाता है।
- लिनक्स (Linux) एक ओपन-सोर्स (open-source) ऑपरेटिंग सिस्टम
है – यह निःशुल्क उपलब्ध है और इसका सोर्स कोड सार्वजनिक है। Ubuntu, Fedora, Debian, Red Hat
इसके लोकप्रिय डिस्ट्रो (distributions) हैं। इसका उपयोग सर्वर, सुपरकम्प्यूटर एवं एंड्रॉइड में होता है।
- ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) कम्प्यूटर के संसाधनों (resources) का
प्रबंधन (management) करता है – यह CPU समय, मेमोरी आवंटन, इनपुट/आउटपुट डिवाइस एवं फ़ाइल
सिस्टम को नियंत्रित करता है।
- मल्टीटास्किंग (multitasking) कम्प्यूटर को एक साथ कई कार्य
(multiple tasks) करने में सक्षम बनाता है – ऑपरेटिंग सिस्टम CPU समय को छोटे-छोटे अंतरालों
में विभाजित करता है, जिससे उपयोगकर्ता को एक साथ कई कार्य चलते हुए प्रतीत होते हैं।
- कम्प्यूटर में GUI (Graphical User Interface) ग्राफिकल इंटरफेस
है – इसमें आइकन (icons), बटन (buttons), मेनू (menus) और विंडो (windows) होते हैं, जिन्हें
माउस से क्लिक किया जा सकता है। Windows, macOS, Linux GUI के उदाहरण हैं।
- कम्प्यूटर में CLI (Command Line Interface) कमांड लाइन इंटरफेस
है – इसमें उपयोगकर्ता टेक्स्ट कमांड (जैसे – dir, cd, copy) टाइप करता है। यह GUI से अधिक
शक्तिशाली एवं लचीला है, परंतु इसके लिए कमांड याद रखना आवश्यक है। Linux टर्मिनल एवं Windows
CMD/PowerShell इसके उदाहरण हैं।
- हार्डवेयर (hardware) कम्प्यूटर का भौतिक (physical) भाग
है – जिसे छुआ जा सकता है, जैसे – CPU, मॉनिटर, कीबोर्ड, माउस, हार्ड डिस्क, RAM, मदरबोर्ड।
- सॉफ्टवेयर (software) कम्प्यूटर का प्रोग्राम (program) भाग
है – जिसे छुआ नहीं जा सकता, परंतु यह हार्डवेयर को निर्देश देता है कि क्या करना है।
सॉफ्टवेयर दो प्रकार के होते हैं – सिस्टम सॉफ्टवेयर (OS) एवं एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर (MS Office, गेम्स)।
- माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस (Microsoft Office) एक उत्पादकता सॉफ्टवेयर
सूट (productivity suite) है – इसमें Word (दस्तावेज़), Excel (स्प्रेडशीट), PowerPoint
(प्रेजेंटेशन), Outlook (ईमेल) आदि शामिल हैं।
- माइक्रोसॉफ्ट वर्ड (MS Word) दस्तावेज़ निर्माण (document
creation) के लिए उपयोगी है – इसमें टेक्स्ट फ़ॉर्मेटिंग, टेबल, चित्र, स्पेलिंग चेक, मेल मर्ज
(mail merge) आदि सुविधाएँ होती हैं। फ़ाइल एक्सटेंशन .doc या .docx होता है।
- एक्सेल (MS Excel) स्प्रेडशीट प्रबंधन (spreadsheet management)
के लिए उपयोगी है – इसमें डेटा को पंक्तियों (rows) एवं स्तंभों (columns) में व्यवस्थित किया
जाता है। इसमें फॉर्मूले, फंक्शन (SUM, AVERAGE, IF) , चार्ट एवं पिवट टेबल (pivot table) होते हैं। फ़ाइल
एक्सटेंशन .xlsx होता है।
- पावरपॉइंट (MS PowerPoint) प्रेजेंटेशन (presentation) बनाने के
लिए उपयोगी है – इसमें स्लाइड्स (slides) बनाई जाती हैं, जिनमें टेक्स्ट, चित्र, एनिमेशन एवं
ट्रांज़िशन जोड़े जा सकते हैं। फ़ाइल एक्सटेंशन .pptx होता है।
- सी (C language) एक सामान्य प्रयोजन प्रोग्रामिंग भाषा (general
purpose programming language) है – इसे डेनिस रिची ने 1972 में विकसित किया था। यह संरचित
(structured) भाषा है और ऑपरेटिंग सिस्टम (UNIX) , ड्राइवर, एम्बेडेड सिस्टम के विकास में उपयोग होती है।
- पायथन (Python) एक उच्च-स्तरीय (high-level) प्रोग्रामिंग भाषा
है – यह सरल, पठनीय एवं इंटरप्रेटेड (interpreted) भाषा है। इसका उपयोग डेटा साइंस, मशीन
लर्निंग, वेब डेवलपमेंट (Django) , AI, स्क्रिप्टिंग में होता है।
- जावा (Java) एक प्लेटफॉर्म-स्वतंत्र (platform-independent)
प्रोग्रामिंग भाषा है – “Write Once, Run Anywhere” (WORA) इसकी विशेषता है। जावा कोड को JVM
(Java Virtual Machine) पर चलाया जाता है, जो इसे ऑपरेटिंग सिस्टम से स्वतंत्र बनाता है।
- HTML (HyperText Markup Language) वेब पेज (web page) बनाने की
भाषा है – यह एक मार्कअप (markup) भाषा है, प्रोग्रामिंग भाषा नहीं। इसमें टैग्स (tags –
<html>, <body>, <h1> आदि) का उपयोग होता है।
- अल्गोरिदम (algorithm) समस्याओं (problems) को हल करने के
चरणबद्ध तरीके (step-by-step procedure) हैं – यह प्रोग्रामिंग की नींव है। एक अच्छा एल्गोरिदम
स्पष्ट, सीमित एवं प्रभावी होता है।
- प्रोग्रामिंग में लूप (loop) दोहराव (repetition) के लिए उपयोगी
होता है – for loop (निश्चित संख्या में दोहराव) , while loop (शर्त पूरी होने तक) , do-while
loop (कम से कम एक बार) लूप के प्रकार हैं। लूप से कोड की पुनरावृत्ति कम होती है।
- डिबगिंग (debugging) प्रोग्राम की त्रुटियों (errors) को
ढूँढ़ने एवं ठीक करने की प्रक्रिया है – त्रुटियाँ तीन प्रकार की होती हैं – सिंटेक्स त्रुटि
(syntax error) , रनटाइम त्रुटि (runtime error) एवं लॉजिकल त्रुटि (logical error)। डिबगर (debugger) टूल
इस कार्य में सहायता करते हैं।
- डेटाबेस (database) डेटा का संगठित संग्रह (organized
collection) है – डेटाबेस में डेटा को तालिकाओं (tables) , पंक्तियों (rows) एवं स्तंभों
(columns) में व्यवस्थित किया जाता है। उदाहरण – छात्र डेटाबेस, ग्राहक डेटाबेस।
- SQL (Structured Query Language) डेटाबेस प्रबंधन (database
management) के लिए उपयोगी भाषा है – SQL से SELECT (डेटा प्राप्ति) , INSERT (डेटा जोड़ना) ,
UPDATE (अपडेट) , DELETE (हटाना) आदि क्रियाएँ की जाती हैं।
- DBMS (Database Management System) डेटा प्रबंधन (data
management) करता है – यह डेटा को संग्रहित, पुनर्प्राप्त, अपडेट एवं सुरक्षित करता है। प्रकार
– RDBMS (Oracle, MySQL, PostgreSQL) , NoSQL (MongoDB) ।
- MySQL एक लोकप्रिय डेटाबेस प्रबंधन सॉफ्टवेयर (DBMS)
है – यह ओपन-सोर्स RDBMS (Relational Database Management System) है और अधिकांश वेबसाइटों
(जैसे – WordPress) के पीछे कार्य करता है।
- इंटरनेट (Internet) डेटा संचार (data communication) के लिए
नेटवर्कों (networks) का वैश्विक समूह (global network) है – यह TCP/IP प्रोटोकॉल पर आधारित
है। लाखों निजी, सार्वजनिक, अकादमिक, व्यावसायिक नेटवर्क इसे मिलकर बनाते हैं।
- इंटरनेट की शुरुआत ARPANET (Advanced Research Projects Agency
Network) से हुई थी – यह 1969 में अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा बनाया गया था। यह आधुनिक इंटरनेट
का अग्रदूत (predecessor) था।
- IP एड्रेस (Internet Protocol address) कम्प्यूटर (या नेटवर्क
डिवाइस) की पहचान (identification) के लिए उपयोग होता है – IPv4 (32-बिट – उदा. 192.168.1.1)
और IPv6 (128-बिट – अधिक एड्रेस) इसके दो संस्करण हैं। IP एड्रेस नेटवर्क में डिवाइस को अद्वितीय (unique)
पहचान देता है।
- HTTP (HyperText Transfer Protocol) वेब पेजों (web pages) को
स्थानांतरित करने का प्रोटोकॉल है – यह क्लाइंट (ब्राउज़र) और सर्वर के बीच डेटा ट्रांसफर करता
है। HTTPS (S – Secure) एन्क्रिप्टेड संस्करण है, जो सुरक्षित संचार सुनिश्चित करता है।
- WWW (World Wide Web) का पूर्ण रूप वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide
Web) है – इसे टिम बर्नर्स-ली ने 1989 में विकसित किया था। यह इंटरनेट पर एक सेवा है जो वेब
पेजों तक पहुँच प्रदान करती है।
- URL (Uniform Resource Locator) वेब संसाधन (web resource) का
पता (address) होता है – उदाहरण – https://www.google.com/search?q=computer । URL में
प्रोटोकॉल (http/https) , डोमेन नाम (google.com) और पाथ (path) शामिल होता है।
- वेब ब्राउज़र (web browser) इंटरनेट तक पहुँच (access) प्रदान
करता है – यह HTML कोड को दृश्य (visual) वेब पेज में बदलता है। उदाहरण – Google Chrome,
Mozilla Firefox, Safari, Microsoft Edge, Opera।
- गूगल क्रोम (Google Chrome) एक लोकप्रिय वेब ब्राउज़र (web
browser) है – यह गूगल द्वारा विकसित किया गया है और सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला ब्राउज़र
है। यह तीव्र एवं एक्सटेंशन-समर्थित है।
- सर्च इंजन (search engine) वेब (web) पर जानकारी (information)
खोजता है – यह एल्गोरिदम द्वारा लाखों वेब पेजों को इंडेक्स (index) करता है और प्रासंगिक
परिणाम दिखाता है।
- गूगल (Google) एक प्रमुख सर्च इंजन (search engine) है
– इसकी स्थापना लैरी पेज एवं सर्गेई ब्रिन ने 1998 में की थी। यह विश्व का सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला
सर्च इंजन है।
- DNS (Domain Name System) डोमेन नाम (domain name –
www.google.com) को IP एड्रेस (8.8.8.8) में परिवर्तित (resolve) करता है – DNS के बिना हमें
हर वेबसाइट का संख्यात्मक IP एड्रेस याद रखना पड़ता। इसे “इंटरनेट की फोन बुक” भी कहते हैं।
- ईमेल (Email – Electronic Mail) डिजिटल संदेश (digital message)
भेजने का माध्यम है – यह SMTP (Simple Mail Transfer Protocol) पर कार्य करता है। Gmail,
Outlook, Yahoo प्रमुख ईमेल सेवाएँ हैं।
- FTP (File Transfer Protocol) फ़ाइल (file) स्थानांतरण
(transfer) के लिए उपयोगी है – इसका उपयोग कम्प्यूटर एवं सर्वर के बीच फ़ाइलें अपलोड/डाउनलोड
करने के लिए किया जाता है। SFTP (Secure FTP) एन्क्रिप्टेड संस्करण है।
- TCP/IP (Transmission Control Protocol/Internet Protocol)
इंटरनेट संचार (internet communication) का आधार (foundation) है – TCP डेटा को पैकेटों में
विभाजित करता है एवं पुनः संयोजित करता है; IP एड्रेसिंग एवं रूटिंग करता है।
- कम्प्यूटर नेटवर्क (computer network) डेटा साझा करने (data
sharing) में सक्षम बनाता है – यह कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ता है, जिससे फ़ाइलें, प्रिंटर,
इंटरनेट एवं अन्य संसाधन साझा किए जा सकते हैं।
- LAN (Local Area Network) स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क (local area
network) है – यह एक छोटे भौगोलिक क्षेत्र (जैसे – ऑफिस, स्कूल, घर) में फैला होता है। इसकी
गति उच्च (100 Mbps से 10 Gbps) एवं विलंबता (latency) निम्न होती है।
- WAN (Wide Area Network) विस्तृत क्षेत्र नेटवर्क (wide area
network) है – यह बड़े भौगोलिक क्षेत्रों (देश, महाद्वीप) में फैला होता है। इंटरनेट सबसे बड़ा
WAN है।
- मॉडेम (modem) डिजिटल (digital) सिग्नल और एनालॉग (analog)
सिग्नल को परिवर्तित (convert) करता है – MODEM = MODulator + DEModulator। यह कम्प्यूटर के
डिजिटल डेटा को फ़ोन लाइन/केबल पर भेजने योग्य एनालॉग सिग्नल में बदलता है और आने वाले एनालॉग सिग्नल को
डिजिटल में।
- राउटर (router) डेटा पैकेट (data packet) को विभिन्न नेटवर्कों
के बीच निर्देशित (direct) करता है – यह IP एड्रेस का उपयोग करके सबसे कुशल पथ (path) चुनता
है। राउटर इंटरनेट से कई डिवाइसों को जोड़ने का कार्य करता है।
- Wi-Fi (Wireless Fidelity) वायरलेस नेटवर्किंग (wireless
networking) के लिए उपयोगी है – यह IEEE 802.11 मानक पर आधारित है। बिना केबल के डिवाइसों को
इंटरनेट/नेटवर्क से जोड़ता है। Wi-Fi 5, Wi-Fi 6 इसके नवीनतम संस्करण हैं।
- ब्लूटूथ (Bluetooth) छोटी दूरी (10-100 मीटर) के डेटा
स्थानांतरण (data transfer) के लिए है – यह 2.4 GHz रेडियो फ्रीक्वेंसी का उपयोग करता है।
वायरलेस हेडफोन, कीबोर्ड, माउस एवं फ़ाइल ट्रांसफर के लिए उपयोग होता है।
- नेटवर्क टोपोलॉजी (network topology) नेटवर्क (network) की
संरचना (structure) होती है – यह बताती है कि कम्प्यूटर एवं डिवाइस किस प्रकार जुड़े हैं।
- स्टार टोपोलॉजी (star topology) एक सामान्य नेटवर्क संरचना
(common network structure) है – सभी डिवाइस एक केंद्रीय हब/स्विच से जुड़े होते हैं। यह
विश्वसनीय (reliable) है, क्योंकि एक डिवाइस खराब होने पर अन्य कार्य करते रहते हैं।
- बस टोपोलॉजी (bus topology) में एक मुख्य केबल (main cable)
होती है – सभी डिवाइस इसी केबल से जुड़े होते हैं। यह सरल एवं सस्ती है, परंतु केबल खराब होने
पर पूरा नेटवर्क बंद हो जाता है।
- ऑप्टिकल फाइबर (optical fiber) डेटा संचार (data communication)
के लिए उपयोगी है – यह प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन (total internal reflection) सिद्धांत
पर कार्य करता है। तांबे की तुलना में यह अत्यधिक तीव्र (5-10 Gbps) एवं लंबी दूरी तक डेटा भेजता है।
- कम्प्यूटर नेटवर्क में टोपोलॉजी (topology) नेटवर्क की संरचना
(arrangement) है – स्टार, बस, रिंग (ring) , मेश (mesh) , ट्री (tree) मुख्य टोपोलॉजी हैं।
- कम्प्यूटर में प्रोटोकॉल (protocol) डेटा संचार (data
communication) के नियम (rules) हैं – यह निर्धारित करता है कि डेटा कैसे फ़ॉर्मेट किया जाए,
प्रेषित किया जाए, एवं त्रुटियों को कैसे संभाला जाए।
- डेटा ट्रांसमिशन (data transmission) डिजिटल सिग्नल (digital
signal) के रूप में होता है – डिजिटल सिग्नल में केवल दो स्थितियाँ (0 और 1) होती हैं, जो
एनालॉग सिग्नल की तुलना में कम शोर-प्रभावित (noise-resistant) होती हैं।
- बैंडविड्थ (bandwidth) डेटा स्थानांतरण की गति (data transfer
speed) है – इसे bps (bits per second) , Kbps, Mbps, Gbps में मापा जाता है। अधिक बैंडविड्थ =
तीव्र डेटा ट्रांसफर।
- डेटा ट्रांसमिशन की गति (data transmission speed) Mbps
(मेगाबिट्स प्रति सेकंड) में मापी जाती है – 1 Mbps = 10⁶ बिट्स/सेकंड। इंटरनेट स्पीड (जैसे –
100 Mbps) में “बिट” (बाइट नहीं) का उपयोग होता है।
- डेटा ट्रांसमिशन (data transmission) Wi-Fi (वायरलेस) से
वायरलेस (wireless) तरीके से होता है – Wi-Fi रेडियो तरंगों (radio waves) का उपयोग करता है।
यह केबल की आवश्यकता को समाप्त करता है।
- डेटा ट्रांसमिशन (data transmission) ऑप्टिकल फाइबर (optical
fiber) से सबसे तेज (fastest) होता है – ऑप्टिकल फाइबर > ताँबे का केबल > Wi-Fi > सैटेलाइट,
तीव्रता के क्रम में।
- 5G नवीनतम मोबाइल नेटवर्क तकनीक (latest mobile network
technology) है – यह 4G से लगभग 100 गुना तीव्र (10 Gbps तक) है, अत्यंत कम विलंबता (1 ms) एवं
लाखों डिवाइसों को जोड़ने की क्षमता रखता है।
- कम्प्यूटर नेटवर्क में डेटा साझाकरण (data sharing) LAN
(स्थानीय) से होता है – LAN में फ़ाइलें, प्रिंटर, फोल्डर साझा किए जा सकते हैं।
- कम्प्यूटर का इनपुट डिवाइस (input device) कीबोर्ड (keyboard)
है – कीबोर्ड में टाइपराइटर जैसी व्यवस्था होती है। यह उपयोगकर्ता द्वारा दबाई गई कुंजियों
(keys) को इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल में बदलता है। QWERTY सबसे सामान्य कीबोर्ड लेआउट है।
- माउस (mouse) एक पॉइंटिंग डिवाइस (pointing device) है
– यह स्क्रीन पर कर्सर (cursor) को नियंत्रित करता है। इसे 1968 में डगलस एंगेलबार्ट ने विकसित किया था।
इसमें लेफ्ट क्लिक (चयन) , राइट क्लिक (मेनू) एवं स्क्रॉल व्हील होते हैं।
- मॉनिटर (monitor) एक आउटपुट डिवाइस (output device) है
– यह CPU द्वारा प्रोसेस किए गए परिणामों को विजुअल (दृश्य) रूप में प्रदर्शित करता है। LCD, LED, OLED इसके
प्रकार हैं। रेज़ोल्यूशन (resolution) पिक्सल (pixels) की संख्या होती है – 1920×1080 (Full HD) , 3840×2160
(4K) ।
- प्रिंटर (printer) हार्ड कॉपी (hard copy – कागज़ पर) आउटपुट
देता है – प्रकार – इंकजेट (inkjet – रंगीन, धीमा) , लेज़र (laser – शीघ्र, ब्लैक एंड वाइट) ,
डॉट मैट्रिक्स (dot matrix – बिल, कार्बन कॉपी)।
- स्कैनर (scanner) छवियों (images) को डिजिटल रूप (digital
format) में परिवर्तित करता है – यह फोटोग्राफ, दस्तावेज़ या चित्र को स्कैन करके उनका डिजिटल
कॉपी बनाता है। यह एक इनपुट डिवाइस है।
- डेटा आउटपुट (data output) मॉनिटर (monitor) पर प्रदर्शित
(displayed) होता है – मॉनिटर सबसे सामान्य आउटपुट डिवाइस है। स्पीकर (ध्वनि) , प्रिंटर
(कागज़) अन्य आउटपुट डिवाइस हैं।
- कम्प्यूटर वायरस (computer virus) एक हानिकारक प्रोग्राम है जो
सॉफ्टवेयर (software) को नुकसान पहुँचा सकता है – यह स्वयं को अन्य प्रोग्रामों में कॉपी कर
लेता है (self-replicating) एवं फ़ाइलों को डिलीट, करप्ट या चोरी कर सकता है।
- एंटीवायरस (antivirus) सॉफ्टवेयर वायरस (virus) से सुरक्षा
(protection) करता है – यह संक्रमित फ़ाइलों को स्कैन, पता लगाता है एवं हटाता है। उदाहरण –
Norton, McAfee, Quick Heal, Avast, Kaspersky।
- फायरवॉल (firewall) नेटवर्क सुरक्षा (network security) के लिए
उपयोगी है – यह अनधिकृत पहुँच (unauthorized access) को रोकता है। यह हार्डवेयर (router) या
सॉफ्टवेयर (Windows Firewall) हो सकता है।
- कम्प्यूटर में पासवर्ड (password) डेटा सुरक्षा (data security)
प्रदान करता है – एक मजबूत पासवर्ड लंबा (8+ अक्षर) , मिश्रित (अपरकेस, लोअरकेस, संख्या,
प्रतीक) एवं अप्रत्याशित होना चाहिए।
- एन्क्रिप्शन (encryption) डेटा को सुरक्षित (secure) करता
है – यह पठनीय डेटा (plaintext) को अपठनीय (ciphertext) में बदल देता है। AES (Advanced
Encryption Standard) एवं RSA सामान्य एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम हैं।
- डिक्रिप्शन (decryption) एन्क्रिप्टेड (encrypted) डेटा को पुनः
मूल पठनीय रूप में प्राप्त करता है – इसके लिए कुंजी (key) की आवश्यकता होती है। सही कुंजी के
बिना एन्क्रिप्टेड डेटा को पढ़ा नहीं जा सकता।
- साइबर सुरक्षा (cybersecurity) डिजिटल हमलों (digital attacks)
से बचाव करती है – इसमें नेटवर्क सुरक्षा, एप्लिकेशन सुरक्षा, सूचना सुरक्षा एवं डिजास्टर
रिकवरी शामिल है।
- हैकिंग (hacking) अनधिकृत (unauthorized) डेटा पहुँच (access)
है – व्हाइट हैट (ethical – कानूनी) , ब्लैक हैट (अवैध) , ग्रे हैट (मिश्रित) के प्रकार हैं।
- फिशिंग (phishing) ऑनलाइन धोखाधड़ी (online fraud) का एक प्रकार
है – इसमें धोखेबाज नकली ईमेल/वेबसाइट (बैंक, कंपनी के नाम पर) भेजकर उपयोगकर्ता का पासवर्ड,
क्रेडिट कार्ड नंबर चुराते हैं।
- मालवेयर (malware) हानिकारक सॉफ्टवेयर (harmful software)
है – Malware = Malicious Software। वायरस, ट्रोजन, रैंसमवेयर (ransomware) , वर्म (worm) ,
spyware इसके प्रकार हैं।
- ट्रोजन वायरस (Trojan virus) एक छिपा हुआ हानिकारक प्रोग्राम
(hidden harmful program) है – यह उपयोगी सॉफ्टवेयर के रूप में प्रच्छन्न (disguised) होता है।
ट्रोजन स्वयं की प्रतिलिपि नहीं बनाता (वायरस से अंतर)।
- कम्प्यूटर में बैकअप (backup) डेटा हानि (data loss) से बचाता
है – नियमित बैकअप (बाहरी HDD, क्लाउड) से हार्डवेयर विफलता, वायरस या आकस्मिक विलोपन पर डेटा
पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
- डेटा रिकवरी (data recovery) खोए डेटा (lost data) को पुनः
प्राप्त करती है – यह डिलीट/करप्ट फ़ाइलों को विशेष सॉफ्टवेयर द्वारा पुनः प्राप्त करने की
प्रक्रिया है।
- डेटा सुरक्षा (data security) पासवर्ड (password) और
एन्क्रिप्शन (encryption) से होती है – बहु-कारक प्रमाणीकरण (MFA – Multi Factor
Authentication) सुरक्षा की अतिरिक्त परत जोड़ता है।
- कम्प्यूटर में डेटा सुरक्षा (data security) एन्क्रिप्शन
(encryption) से बढ़ती है – एन्क्रिप्टेड डेटा चोरी होने पर भी पढ़ा नहीं जा सकता, क्योंकि
उसके लिए कुंजी (key) आवश्यक होती है।
- कम्प्यूटर में डेटा सुरक्षा (data security) फायरवॉल (firewall)
से बढ़ती है – फायरवॉल नियमों (rules) के आधार पर आने वाले और जाने वाले ट्रैफ़िक को नियंत्रित
करता है।
- कम्प्यूटर में डेटा सुरक्षा (data security) साइबर सुरक्षा
(cybersecurity) से बढ़ती है – साइबर सुरक्षा में नेटवर्क, डिवाइस, डेटा, एप्लिकेशन एवं
उपयोगकर्ता सुरक्षा शामिल है।
- क्लाउड कम्प्यूटिंग (cloud computing) ऑनलाइन डेटा भंडारण
(online data storage) प्रदान करता है – Google Drive, iCloud, Dropbox, OneDrive उदाहरण हैं।
डेटा इंटरनेट के माध्यम से कहीं भी, किसी भी डिवाइस से पहुँचा जा सकता है।
- क्लाउड बैकअप (cloud backup) ऑनलाइन डेटा भंडारण (online data
storage) है – यह स्थानीय बैकअप की तुलना में अधिक सुरक्षित एवं सुलभ होता है, क्योंकि यह
भौतिक आपदाओं (आग, बाढ़) से प्रभावित नहीं होता।
- डेटा बैकअप (data backup) क्लाउड (cloud) पर संग्रहित (stored)
किया जाता है – स्वचालित क्लाउड बैकअप से डेटा हानि का जोखिम बहुत कम हो जाता है।
- इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT – Internet of Things) उपकरणों
(devices) को आपस में जोड़ता है – IoT में स्मार्ट घड़ी, स्मार्ट बल्ब, कनेक्टेड कार, होम
ऑटोमेशन आते हैं। ये डिवाइस इंटरनेट पर डेटा भेजते एवं प्राप्त करते हैं।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI – Artificial Intelligence) मशीनों को
बुद्धिमान (intelligent) बनाती है – AI मशीनों को मानव-सदृश सीखने, तर्क करने, समस्या समाधान
एवं निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। उदाहरण – चैटबॉट, स्वचालित कार, फेस रिकग्निशन।
- मशीन लर्निंग (Machine Learning) AI (Artificial Intelligence)
का एक भाग (subset) है – यह मॉडलों को डेटा से स्वतः सीखने (learn from data without explicit
programming) की क्षमता देता है। सुपरवाइज्ड, अनसुपरवाइज्ड, रीइन्फोर्समेंट लर्निंग इसके प्रकार हैं।
- ब्लॉकचेन (blockchain) क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) के लिए
उपयोगी है – यह एक विकेन्द्रीकृत (decentralized) , अपरिवर्तनीय (immutable) डिस्ट्रीब्यूटेड
लेज़र है। बिटकॉइन ब्लॉकचेन पर कार्य करता है।
- बिटकॉइन (Bitcoin) एक डिजिटल मुद्रा (digital currency)
है – यह केंद्रीय बैंक या किसी प्राधिकरण द्वारा जारी नहीं की जाती। इसका लेनदेन ब्लॉकचेन पर
दर्ज होता है। इसे 2009 में छद्म नाम सातोशी नाकामोतो ने बनाया था।
- डेटा माइनिंग (data mining) डेटा से पैटर्न (patterns) निकालता
है – यह बड़े डेटासेट्स में छिपे सहसंबंध (correlations) एवं रुझान (trends) खोजता है। इसका
उपयोग मार्केटिंग, बैंकिंग, चिकित्सा में होता है।
- बिग डेटा (big data) विशाल डेटा सेट्स (very large datasets) का
प्रबंधन (management) है – इसे 3V द्वारा परिभाषित किया जाता है – Volume (बड़ी मात्रा) ,
Velocity (तीव्र गति) , Variety (विविधता)। Hadoop, Spark इसके टूल हैं।
- डेटा वेयरहाउस (data warehouse) केंद्रीकृत डेटा भंडारण
(centralized data storage) है – यह विभिन्न स्रोतों से डेटा एकत्रित करता है ताकि विश्लेषण
(analytics) एवं रिपोर्टिंग की जा सके।
- डेटा संपीड़न (data compression) डेटा आकार (data size) को कम
करता है – इससे स्टोरेज स्थान बचता है एवं ट्रांसमिशन तीव्र होता है। लॉसलेस (lossless – ZIP)
एवं लॉसी (lossy – JPEG, MP3) इसके प्रकार हैं।
- ZIP फ़ाइल (ZIP file) डेटा संपीड़न (data compression) का
उदाहरण है – यह लॉसलेस संपीड़न तकनीक है। एक या अधिक फ़ाइलों को ZIP फ़ोल्डर में संपीड़ित किया
जाता है।
- कम्प्यूटर का पहला प्रोग्रामेबल (programmable) मशीन ENIAC
(Electronic Numerical Integrator and Computer) था – इसे 1946 में पेंसिल्वेनिया
विश्वविद्यालय में बनाया गया था। यह विशाल (30 टन) एवं धीमा था, तथा आर्टिलरी बैलिस्टिक गणनाओं के लिए उपयोग
हुआ।
- डेटा विश्लेषण (data analysis) बिग डेटा तकनीकों (big data
techniques) से होता है – इसमें डेटा माइनिंग, मशीन लर्निंग, स्टैटिस्टिकल एनालिसिस एवं
विज़ुअलाइज़ेशन शामिल हैं।
- API (Application Programming Interface) सॉफ्टवेयर संचार
(software communication) के लिए है – यह विभिन्न सॉफ्टवेयरों को आपस में डेटा और कार्यक्षमता
साझा करने की अनुमति देता है।
- सॉफ्टवेयर अपडेट (software update) बग्स (bugs) को ठीक (fix)
करता है – यह नई सुविधाएँ, सुरक्षा पैच (security patches) एवं प्रदर्शन सुधार लाता है।
- कम्प्यूटर में मेमोरी मापने (memory measurement) की इकाई
बाइट्स (bytes) है – बाइट (8 बिट) , फिर KB (1024 बाइट) , MB (1024 KB) , GB (1024 MB) , TB
(1024 GB) , PB (1024 TB) आगे बढ़ते हैं।