रक्षा प्रौद्योगिकी
- अग्नि-5 (Agni-V) मिसाइल की रेंज 5000
किमी से अधिक है – यह भारत की ICBM (Intercontinental Ballistic Missile)
श्रेणी की मिसाइल है। इसमें MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle)
तकनीक है, जिससे एक मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों को भेद सकती है। यह परमाणु हथियार ले जाने
में सक्षम है।
- अग्नि-1 (Agni-I) मिसाइल की रेंज 700-1200
किमी है – यह एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है। यह
परमाणु सक्षम है और इसे सड़क एवं रेल मोबाइल लॉन्चर से प्रक्षेपित किया जा सकता है।
- अग्नि-2 (Agni-II) मिसाइल की रेंज 2000
किमी है – यह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है। यह परमाणु
सक्षम है और दो चरणों वाले ठोस ईंधन इंजन पर कार्य करती है।
- अग्नि-3 (Agni-III) मिसाइल की रेंज 3000
किमी है – यह मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है। यह
परमाणु सक्षम है और इसे 2008 में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था।
- अग्नि-4 (Agni-IV) मिसाइल की रेंज 4000
किमी है – यह मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है। यह
परमाणु सक्षम है और इसमें उन्नत नेविगेशन एवं मार्गदर्शन प्रणाली है।
- अग्नि-6 (Agni-VI) मिसाइल अंतरमहाद्वीपीय
(Intercontinental) है – इसकी रेंज 8000 किमी तक है। यह MIRV
तकनीक से लैस है और इसे भारत की सबसे शक्तिशाली मिसाइल माना जाता है। इसमें क्रूज
मिसाइल क्षमताएँ भी विकसित की जा रही हैं।
- अग्नि-5 मिसाइल में MIRV तकनीक (Multiple Independently
Targetable Re-entry Vehicle) है – इस तकनीक से एक ही मिसाइल एकाधिक परमाणु
वारहेड ले जा सकती है जो विभिन्न लक्ष्यों पर स्वतंत्र रूप से हमला कर सकते हैं। यह तकनीक भारत
को परमाणु निवारण (Nuclear Deterrence) क्षमता प्रदान करती है।
- DRDO (Defence Research and Development Organisation)
भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी संस्था है – इसका गठन 1958 में हुआ था। DRDO
का मुख्यालय नई दिल्ली में है। इसका मुख्य मिशन रक्षा प्रौद्योगिकी का
विकास एवं आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।
- DRDO का गठन 1958 में रक्षा अनुसंधान (Defence
Research) के लिए हुआ था – यह भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। DRDO का
आदर्श वाक्य है – "बलस्य मूलं विज्ञानम्" (विज्ञान ही शक्ति का मूल है)।
- DRDO का मिशन रक्षा प्रौद्योगिकी (Defence Technology) का विकास
है – यह मिसाइलों, विमानों, टैंकों, रडारों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों, ड्रोनों एवं साइबर
सुरक्षा पर अनुसंधान करता है।
- DRDO की स्थापना रक्षा अनुसंधान (Defence Research) के लिए हुई
थी – इसने अग्नि, पृथ्वी, आकाश, नाग, त्रिशूल, ब्रह्मोस, प्रलय, निर्भय, स्मार्ट, हेलिना,
भवानी, बाराक-8 जैसी अनेक मिसाइलों का विकास किया है।
- DRDO का उद्देश्य (Vision) रक्षा में आत्मनिर्भरता
(Self-reliance) प्राप्त करना है – यह "आत्मनिर्भरता" (Make in India) की दिशा में रक्षा
उत्पादन को बढ़ावा देता है और निजी क्षेत्र के साथ सहयोग करता है।
- पृथ्वी मिसाइल (Prithvi Missile) सतह से सतह
(Surface-to-Surface) पर मार करती है – यह भारत की पहली स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल है। इसके तीन
प्रकार हैं – पृथ्वी-1 (150 किमी) , पृथ्वी-2 (350 किमी) , पृथ्वी-3 (350 किमी, नौसेना संस्करण)।
- पृथ्वी-2 मिसाइल परमाणु हथियार (Nuclear Warhead) ले जा सकती
है – यह तरल ईंधन (liquid fuel) पर कार्य करती है। यह भारत की प्रतिशोधी निवारण क्षमता
(retaliatory deterrence) का हिस्सा है।
- प्रहार मिसाइल (Prahaar Missile) की रेंज 150
किमी है – यह एक सतह-से-सतह कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। यह अत्यधिक
तीव्र एवं परिशुद्ध (highly accurate) है।
- ब्रह्मोस (BrahMos) एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
(Supersonic Cruise Missile) है – यह भारत-रूस संयुक्त सहयोग (ब्रह्मोस
एयरोस्पेस) से बनी है। इसका नाम ब्रह्मपुत्र (Brahmaputra) और मॉस्कवा (Moskva) नदियों पर
रखा गया है।
- ब्रह्मोस मिसाइल भारत-रूस सहयोग (India-Russia Joint Venture)
से बनी है – ब्रह्मोस एयरोस्पेस (BrahMos Aerospace) एक संयुक्त उद्यम है जिसमें भारत 50.5%
एवं रूस 49.5% हिस्सेदार है।
- ब्रह्मोस मिसाइल की गति 2.8 मैक
(Mach) है – लगभग 3456 km/h। यह दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज
मिसाइल है। इसका नया संस्करण ब्रह्मोस-II हाइपरसोनिक है।
- ब्रह्मोस मिसाइल का वजन 2500 किग्रा
(kg) है – यह 200-300 किलोग्राम परमाणु या पारंपरिक वारहेड ले जा सकती है।
- ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज मूलतः 290
किमी थी – मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण प्रणाली (MTCR) के कारण सीमित थी। MTCR में शामिल होने
के बाद इसकी रेंज अब 450 किमी कर दी गई है।
- ब्रह्मोस मिसाइल जमीन (Land), समुद्र (Sea), हवा (Air) से लॉन्च
की जा सकती है – यह ब्रह्मोस-ए (एयर) , ब्रह्मोस-एन (नौसेना) , ब्रह्मोस-एल
(लैंड) संस्करणों में उपलब्ध है। सुखोई-30 MKI विमान से ब्रह्मोस-ए लॉन्च किया जाता है।
- ब्रह्मोस मिसाइल में रैमजेट (Ramjet)
इंजन है – यह सुपरसोनिक गति पर कार्य करता है और इसमें कोई घूमने वाला पार्ट नहीं होता। यह ईंधन को दहन के
लिए संपीड़ित करता है।
- ब्रह्मोस-II (BrahMos-II) एक हाइपरसोनिक
(Hypersonic) मिसाइल है – इसकी गति 5 मैक (Mach) से अधिक (लगभग 6000 km/h)
होगी। यह स्क्रैमजेट (Scramjet) तकनीक पर आधारित है।
- आकाश मिसाइल (Akash Missile) एक वायु रक्षा
प्रणाली (Air Defence System) है – इसकी रेंज 25 किमी है। यह सतह-से-हवा
(Surface-to-Air) मिसाइल है जो 4.5 मैक गति से यात्रा करती है।
- आकाश मिसाइल सिस्टम (Akash Missile System) DRDO द्वारा बनाया
गया है – यह मल्टी-टारगेट मार कर सकती है। इसका उन्नत संस्करण
आकाश-एनजी (Akash-NG – New Generation) है, जिसकी रेंज अधिक एवं मारक क्षमता उन्नत है।
- नाग मिसाइल (Nag Missile) एक टैंक रोधी मिसाइल
(Anti-Tank Missile – ATGM) है – इसका विकास DRDO ने किया है। यह "फायर एंड
फॉरगेट" (fire and forget) तकनीक पर कार्य करती है। इसे हेलिना (Helina) नामक हेलीकॉप्टर संस्करण भी है।
- DRDO ने हेलिना (Helina) मिसाइल विकसित की है – यह
हैल (HAL) रुद्र एवं एएलएच ध्रुव (ALH Dhruv) हेलीकॉप्टर से लॉन्च होने
वाली टैंक रोधी मिसाइल है।
- निर्भय मिसाइल (Nirbhay Missile) एक सबसोनिक
क्रूज मिसाइल (Subsonic Cruise Missile) है – यह 0.7 मैक गति से यात्रा करती है। इसकी रेंज
1000 किमी से अधिक है। यह गोलाकार (terrain hugging) उड़ान क्षमता रखती है।
- प्रलय मिसाइल (Pralay Missile) DRDO द्वारा विकसित की गई
है – यह एक सतह-से-सतह (Surface-to-Surface) कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है।
इसकी रेंज 150-500 किमी है।
- DRDO ने भवानी (Bhavani) मिसाइल विकसित की है – यह एक
पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल (Portable ATGM) है, जिसे सैनिक (सोल्जर) कंधे पर ले जा सकता
है।
- DRDO ने बाराक-8 (Barak-8) मिसाइल विकसित की है – यह
भारत-इज़राइल संयुक्त प्रयास है। यह एक लंबी दूरी की सतह-से-हवा (LR-SAM)
मिसाइल है, जिसकी रेंज 70-100 किमी है।
- DRDO ने स्मार्ट (SMART – Supersonic Missile Assisted Torpedo)
मिसाइल विकसित की है – यह पनडुब्बी रोधी (Anti-Submarine) मिसाइल है। यह
सुपरसोनिक गति से यात्रा करती है और टॉरपीडो (torpedo) गिराती है।
- DRDO ने त्रिशूल (Trishul) मिसाइल विकसित की थी – यह
एक सतह-से-हवा (Surface-to-Air) मिसाइल थी, जिसे बाद में बंद (closed) कर दिया गया। आकाश
मिसाइल इसका उन्नत विकल्प है।
- DRDO ने सतह-से-हवा (Surface-to-Air) मार करने वाली मिसाइल बनाई
है – आकाश (Akash) एवं मैत्री (Maitri) इस श्रेणी की
मिसाइलें हैं, जो हवाई हमलों से रक्षा करती हैं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन शक्ति (Mission Shakti) का
उल्लेख किया था – यह 27 मार्च 2019 को सफल किया गया था। इसने भारत को दुनिया
का चौथा एंटी-सैटेलाइट (ASAT – Anti-Satellite) क्षमता वाला देश बनाया (अमेरिका, रूस, चीन
के बाद)।
- मिशन शक्ति (Mission Shakti) उपग्रह रोधी मिसाइल
(Anti-Satellite Missile) है – इस मिसाइल ने 300 किमी ऊँचाई पर स्थित
माइक्रोसैट-आर (Microsat-R) उपग्रह को नष्ट किया। यह DRDO द्वारा विकसित
की गई थी।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजस (Tejas) विमान का उल्लेख
किया था – यह हल्का लड़ाकू विमान (LCA – Light Combat Aircraft) है, जिसे
HAL (Hindustan Aeronautics Limited) ने विकसित किया है। यह 4.5 पीढ़ी की
तकनीक पर आधारित है।
- तेजस (Tejas) एक हल्का लड़ाकू विमान (LCA – Light Combat
Aircraft) है – यह एकल इंजन (single engine) वाला मल्टी-रोल विमान है। यह
भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिज़ाइन एवं निर्मित लड़ाकू विमान है।
- LCA तेजस (Light Combat Aircraft Tejas) का विकास HAL
(Hindustan Aeronautics Limited) ने किया है – एचएएल भारत का प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी है। तेजस
का डिज़ाइन एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने किया था।
- तेजस विमान में AESA रडार (Active Electronically Scanned Array
Radar) है – यह स्वदेशी उन्नत रडार है जो एक साथ कई लक्ष्यों पर नज़र रख सकता
है। यह इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (electronic warfare) क्षमता प्रदान करता है।
- तेजस विमान में स्वदेशी रडार (Indigenous Radar) से लैस
है – उत्तम (Uttam) AESA रडार इसमें लगाया जा रहा है। यह तेजस Mk-1A और तेजस
Mk-2 में प्रयुक्त होगा।
- तेजस विमान में मल्टी-रोल (Multi-Role) क्षमता है – यह
हवा-से-हवा (Air-to-Air) , हवा-से-जमीन (Air-to-Ground) ,
प्रतिशोधी (Offensive) एवं प्रतिरोधी (Defensive) मिशनों में सक्षम है।
- तेजस विमान में स्वदेशी इंजन (Indigenous Engine) लगा
है – प्रारंभ में इसमें अमेरिकी GE-F404 इंजन लगा था। भविष्य में
कावेरी (Kaveri) स्वदेशी इंजन विकसित किया जा रहा है।
- तेजस विमान में मल्टी-मोड रडार (Multi-Mode Radar) है
– यह हवा-से-हवा (Air-to-Air) एवं हवा-से-जमीन (Air-to-Ground) मोड दोनों
में कार्य करता है।
- तेजस विमान में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली (Electronic Warfare
System) है – यह शत्रु के रडार से बचने एवं स्वयं को सुरक्षित रखने में सक्षम है।
- तेजस विमान में फ्लाई-बाय-वायर (Fly-by-Wire) तकनीक है
– यह कम्प्यूटर-नियंत्रित उड़ान प्रणाली है। यह विमान को अधिक स्थिरता एवं नियंत्रण प्रदान करती है।
- तेजस विमान में मल्टी-रोल मिसाइलें (Multi-Role Missiles)
हैं – यह पाइथन (Python) , डर्बी (Derby) , आर-73
(R-73) एवं ब्रह्मोस-एनजी (BrahMos-NG) जैसी मिसाइलें ले जा सकता है।
- तेजस Mk-1A (Tejas Mark-1A) उन्नत संस्करण (Advanced Version)
है – इसमें उत्तम AESA रडार , इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सुइट ,
बीवीआर (Beyond Visual Range) मिसाइल क्षमता है। यह आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं के लिए उन्नत
किया गया है।
- DRDO ने तेजस Mk-2 (Tejas Mark-2) का विकास शुरू किया
है – इसे मीडियम वेट फाइटर (MWF – Medium Weight Fighter) कहा जाता है। इसमें
जीई एफ-414 (GE F-414) इंजन लगेगा।
- सुखोई-30 MKI (Sukhoi-30 MKI) भारतीय वायुसेना (IAF – Indian
Air Force) का लड़ाकू विमान है – यह रूसी मूल का ट्विन-इंजन (twin-engine)
विमान है, जिसे भारत में HAL द्वारा लाइसेंस के तहत निर्मित किया जाता है। यह 4.5 पीढ़ी का
विमान है और सुपरमैन्यूवरेबिलिटी (supermaneuverability) के लिए जाना जाता है।
- राफेल (Rafale) विमान फ्रांस (France) से आयात किया गया
है – यह दो इंजन (twin-engine) वाला 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल
लड़ाकू विमान है। इसे दस्सॉ एविएशन (Dassault Aviation) द्वारा बनाया गया है।
- रुद्र (Rudra) हेलीकॉप्टर सशस्त्र (Armed) है – यह
HAL ध्रुव (Dhruv) का सशस्त्र संस्करण है। इसमें हेलिना (Helina) टैंक रोधी
मिसाइल , 70 मिमी रॉकेट एवं 20 मिमी तोप लगी होती है।
- DRDO ने हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर (LCH – Light Combat
Helicopter) बनाया है – इसे प्रचंड (Prachand) नाम दिया गया है। यह दुनिया का
एकमात्र हेलीकॉप्टर है जो 5 किमी की ऊँचाई पर उतर सकता है और हथियार ले जा सकता है।
- INS विक्रांत (INS Vikrant) भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत
(Indigenous Aircraft Carrier – IAC) है – इसे कोच्चि शिपयार्ड में बनाया गया है। इसे
2 सितंबर 2022 को कमीशन किया गया था। यह 260 मीटर लंबा है और इसमें
30 से अधिक विमान ले जाने की क्षमता है।
- INS विक्रमादित्य (INS Vikramaditya) भी एक विमानवाहक पोत
(Aircraft Carrier) है – यह मूल रूप से रूसी एडमिरल गोर्शकोव (Admiral
Gorshkov) था, जिसे भारत ने खरीदकर 2013 में सेवा में शामिल किया। इसका मुख्य विमान
मिग-29K है।
- INS विशाखापत्तनम (INS Visakhapatnam) एक स्टील्थ डिस्ट्रॉयर
(Stealth Destroyer) है – यह पी15बी (Project 15B) श्रेणी का युद्धपोत है।
इसमें उन्नत स्टील्थ तकनीक (Radar Absorbent Coating) है।
- INS कोलकाता (INS Kolkata) एक स्टील्थ डिस्ट्रॉयर (Stealth
Destroyer) है – यह पी15ए (Project 15A) श्रेणी का प्रमुख युद्धपोत है। इसमें
बाराक-8 (Barak-8) एयर डिफेंस सिस्टम और ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइलें लगी
हैं।
- INS मुरमुगाओ (INS Mormugao) स्टील्थ डिस्ट्रॉयर (Stealth
Destroyer) है – यह पी15बी (Project 15B) श्रेणी का दूसरा युद्धपोत है। इसे
18 दिसंबर 2022 को कमीशन किया गया था।
- INS शिवालिक (INS Shivalik) स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट
(Indigenous Stealth Frigate) है – यह पी17 (Project 17) श्रेणी का प्रमुख
युद्धपोत है। इसमें कम रडार क्रॉस-सेक्शन (low RCS) तकनीक है।
- INS सतपुरा (INS Satpura) स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate)
है – यह भी पी17 (Project 17) श्रेणी का युद्धपोत है। इसका नाम
सतपुरा पर्वतश्रेणी पर रखा गया है।
- INS सह्याद्रि (INS Sahyadri) स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth
Frigate) है – यह पी17 (Project 17) श्रेणी का तीसरा युद्धपोत है। इसे
2012 में कमीशन किया गया।
- INS तलवार (INS Talwar) स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate)
है – यह तलवार श्रेणी (Talwar class) का युद्धपोत है। यह रूसी
क्रिवाक-3 (Krivak-III) डिज़ाइन पर आधारित है।
- INS त्रिशूल (INS Trishul) स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate)
है – यह तलवार श्रेणी (Talwar class) का दूसरा युद्धपोत है। इसे
2003 में कमीशन किया गया।
- INS कमोर्ता (INS Kamorta) स्टील्थ कार्वेट (Stealth Corvette)
है – यह पी28 (Project 28) श्रेणी का पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (ASW –
Anti-Submarine Warfare) है।
- INS कवरत्ती (INS Kavaratti) पनडुब्बी रोधी युद्धपोत
(Anti-Submarine Warfare Ship) है – यह पी28 (Project 28) श्रेणी का चौथा एवं
अंतिम युद्धपोत है। इसे 2020 में कमीशन किया गया।
- INS चेन्नई (INS Chennai) डिस्ट्रॉयर युद्धपोत (Destroyer
Warship) है – यह पी15ए (Project 15A) श्रेणी का तीसरा युद्धपोत है। इसे
2016 में कमीशन किया गया।
- INS रणविजय (INS Ranvijay) डिस्ट्रॉयर युद्धपोत (Destroyer
Warship) है – यह राजपूत श्रेणी (Rajput class) का युद्धपोत है। इसे
1988 में कमीशन किया गया था।
- INS रणवीर (INS Ranveer) डिस्ट्रॉयर युद्धपोत (Destroyer
Warship) है – यह भी राजपूत श्रेणी (Rajput class) का ही युद्धपोत है।
- INS बैंगलोर (INS Bangalore) डिस्ट्रॉयर युद्धपोत (Destroyer
Warship) है – यह दिल्ली श्रेणी (Delhi class) का युद्धपोत है।
- INS बेतवा (INS Betwa) फ्रिगेट युद्धपोत (Frigate Warship)
है – यह ब्रह्मपुत्र श्रेणी (Brahmaputra class) का युद्धपोत है।
- INS गोदावरी (INS Godavari) फ्रिगेट युद्धपोत (Frigate Warship)
है – यह गोदावरी श्रेणी (Godavari class) का प्रमुख युद्धपोत था (अब
सेवामुक्त/डिकमीशन हो चुका)।
- INS खुखरी (INS Khukri) कार्वेट युद्धपोत (Corvette Warship)
है – यह खुखरी श्रेणी (Khukri class) का युद्धपोत है।
- INS कृपाण (INS Kirpan) कार्वेट युद्धपोत (Corvette Warship)
है – यह भी खुखरी श्रेणी (Khukri class) का युद्धपोत है।
- INS अरिहंत (INS Arihant) भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी
(Nuclear Submarine) है – यह SSBN (Ship Submersible Ballistic Nuclear)
श्रेणी की पनडुब्बी है। यह 80 मेगावाट (MW) दबावयुक्त जल रिएक्टर (Pressurized Water
Reactor) पर कार्य करती है। इसमें K-15 बालाकोट (K-15 Balaakot) परमाणु मिसाइलें लगी हैं।
- INS अरिघाट (INS Arighat) दूसरी परमाणु पनडुब्बी (Second
Nuclear Submarine) है – यह अरिहंत श्रेणी (Arihant class) की दूसरी पनडुब्बी
है। इसमें K-4 मिसाइलें लगी हैं, जिनकी रेंज 3500 किमी है।
- INS चक्र (INS Chakra) रूस से लीज़ पर ली गई पनडुब्बी (Leased
Submarine) है – यह रूसी अकुला श्रेणी (Akula class) की S-72
चक्र-द्वितीय थी। यह भारत को 2012-2021 तक लीज़ पर दी गई थी।
- INS करंज (INS Karanj) स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी (Scorpene
Class Submarine) है – यह पी75 (Project 75) के अंतर्गत भारत में
मझगाँव डॉक शिपयार्ड (MDL – Mazagon Dock Limited) में बनाई गई है। इस श्रेणी में कुल
6 पनडुब्बियाँ हैं – कलवरी, खांडेरी, करंज, वेला, वागीर, वाग्शीर।
- INS वेला (INS Vela) स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी (Scorpene
Class Submarine) है – इसे 25 नवंबर 2021 को कमीशन किया गया। यह पनडुब्बी
SM-39 एक्सोसेट (Exocet) एंटी-शिप मिसाइलों से लैस है।
- INS द्रोणाचार्य (INS Dronacharya) नौसेना का प्रशिक्षण केंद्र
(Naval Training Centre) है – यह कोच्चि (Kochi) में स्थित है। यह नौसेना अधिकारियों को
तोपखाना (Gunnery) प्रशिक्षण देता है।
- INS शिवाजी (INS Shivaji) नौसेना का प्रशिक्षण केंद्र (Naval
Training Centre) है – यह लोनावला (Lonavala) में स्थित है। यह तकनीकी प्रशिक्षण
(Technical Training) प्रदान करता है।
- INS अंग्रे (INS Angre) नौसेना का प्रशिक्षण केंद्र (Naval
Training Centre) है – यह मुंबई (Mumbai) में स्थित है। इसका नाम कन्होजी अंग्रे
(Kanhoji Angre) मराठा नौसेना कमांडर के नाम पर रखा गया है।
- INS तारिणी (INS Tarini) नौसेना की नौकायन पोत (Sailing Vessel)
है – यह नौसेना नौकायान जहाज (Naval Sailing Ship) है। इसी पोत पर
नौसेना दल ने जल परिक्रमा (Navika Sagar Parikrama) की थी।
- INS शारदा (INS Sarada) नौसेना का गश्ती जहाज (Patrol Vessel)
है – यह सुकन्या श्रेणी (Sukanya class) का गश्ती जहाज है।
- INS सुजाता (INS Sujata) गश्ती जहाज (Patrol Vessel)
है – यह भी सुकन्या श्रेणी (Sukanya class) का जहाज है।
- INS सुनयना (INS Sunayana) गश्ती जहाज (Patrol Vessel)
है – यह भी सुकन्या श्रेणी (Sukanya class) का जहाज है।
- INS सुकन्या (INS Sukanya) गश्ती जहाज (Patrol Vessel)
है – यह सुकन्या श्रेणी (Sukanya class) का प्रमुख जहाज है।
- INS किल्टन (INS Kiltan) पनडुब्बी रोधी युद्धपोत
(Anti-Submarine Warfare Ship) है – यह कमोर्ता श्रेणी (Kamorta class) का
दूसरा युद्धपोत है।
- INS कदमत्त (INS Kadmatt) पनडुब्बी रोधी युद्धपोत
(Anti-Submarine Warfare Ship) है – यह कमोर्ता श्रेणी (Kamorta class) का
तीसरा युद्धपोत है।
- INS सागरध्वनि (INS Sagardhwani) अनुसंधान पोत (Research
Vessel) है – यह नौसेना महासागरीय प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (Naval Oceanographic
Laboratory) से संबद्ध है।
- INS सिनाई (INS Sinai) अनुसंधान पोत (Research Vessel)
है – यह हाइड्रोग्राफिक (Hydrographic) सर्वेक्षण के लिए उपयोग किया जाता है।
- INS शक्ति (INS Shakti) नौसेना का सप्लाई जहाज (Supply Ship)
है – यह दीपक श्रेणी (Deepak class) का बड़ा टैंकर है, जो युद्धपोतों को ईंधन
एवं रसद पहुँचाता है।
- पिनाका रॉकेट लांचर (Pinaka Rocket Launcher) स्वदेशी
है – यह DRDO द्वारा विकसित बहु-बैरल रॉकेट लांचर (MBRL –
Multi-Barrel Rocket Launcher) है। इसका नाम पिनाक (Pinak – शिव का धनुष) पर
रखा गया है।
- पिनाका रॉकेट (Pinaka Rocket) का विकास DRDO ने किया
है – यह सतह-से-सतह (Surface-to-Surface) रॉकेट है। यह 12 सेकंड में 12 रॉकेट
दाग सकता है।
- पिनाका Mk-I (Pinaka Mark-1) की रेंज 40
किमी है – यह मूल संस्करण था।
- पिनाका Mk-II (Pinaka Mark-2) की रेंज 75
किमी है – यह उन्नत संस्करण है।
- DRDO ने अर्जुन टैंक (Arjun Tank) विकसित किया है – यह
मेन बैटल टैंक (MBT – Main Battle Tank) है। इसका नाम महारथी अर्जुन पर
रखा गया है। इसमें 120 मिमी तोप (Rifled Gun) लगी है।
- DRDO ने अर्जुन Mk-1A (Arjun Mark-1A) टैंक विकसित किया
है – यह 14 प्रमुख उन्नयनों (upgrades) वाला संस्करण है। इसमें उन्नत कवच
(armor) एवं मिसाइल प्रणाली है।
- DRDO ने लेजर हथियार (Laser Weapons) विकसित किए हैं –
ये निर्देशित ऊर्जा हथियार (Directed Energy Weapons – DEWs) हैं। इनका उपयोग ड्रोन,
मिसाइलों को नष्ट करने के लिए किया जाता है।
- DRDO ने DRIST (DRDO Indigenous Stand-off Track) विकसित किया
है – यह ड्रोन निरीक्षण प्रणाली (Drone Inspection System) है।
- DRDO ने DRDO नेत्र (Netra) ड्रोन विकसित किया है – यह
निगरानी एवं टोही (Surveillance & Reconnaissance) ड्रोन है।
- DRDO ने रुस्तम (Rustom) ड्रोन विकसित किया है – यह
भारत का मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE – Medium Altitude Long Endurance)
ड्रोन है, जो प्रेडेटर (Predator) के समकक्ष है।
- DRDO ने मिसाइल डिफेंस सिस्टम (Missile Defence System) बनाया
है – यह दो-स्तरीय (Two-tiered) बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली (BMD – Ballistic
Missile Defence) है। पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD) उच्च ऊँचाई एवं अश्विन
(Ashwin) / अडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD) निम्न ऊँचाई का इंटरसेप्टर है।
- DRDO ने रक्षा उपग्रह (Defence Satellite) विकसित किया
है – जीसैट-7 (GSAT-7 – Rukmini) भारतीय नौसेना का संचार उपग्रह है।
जीसैट-7ए (GSAT-7A) वायुसेना के लिए है।
- DRDO ने हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missile) का परीक्षण
किया है – हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV – Hypersonic
Technology Demonstrator Vehicle) 7 सितंबर 2020 को सफलतापूर्वक परीक्षित
किया गया।