परमाणु संरचना (Atomic Structure)
- परमाणु (Atom) किसी तत्व का लघुतम भाग होता है, जिसमें उस तत्व के सभी रासायनिक गुण विद्यमान होते हैं – परमाणु रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग ले सकता है। ग्रीक शब्द 'एटमोस' (Atomos – जिसे काटा न जा सके) से व्युत्पन्न।
- परमाणु के नाभिक (Nucleus) में प्रोटॉन (Proton) और न्यूट्रॉन (Neutron) होते हैं – नाभिक परमाणु का केंद्रीय, धनावेशित भाग होता है, जिसमें परमाणु का लगभग समस्त द्रव्यमान (99.9% से अधिक) केन्द्रित होता है।
- इलेक्ट्रॉन (Electron) नाभिक के चारों ओर निश्चित कक्षाओं (orbits) में चक्कर लगाते हैं – ये कक्षाएँ ऊर्जा स्तर (shells K, L, M, N) कहलाती हैं। प्रत्येक कक्षा में एक निश्चित ऊर्जा होती है।
- परमाणु का केंद्र का धनावेशित हिस्सा न्यूक्लियस (Nucleus) कहलाता है – न्यूक्लियस में धनावेशित प्रोटॉन और उदासीन न्यूट्रॉन होते हैं। नाभिक का आकार लगभग 1.2 × 10⁻¹⁵ मीटर (1 फर्मी) होता है।
- फोटॉन (Photon) परमाणु का भाग नहीं है – फोटॉन विद्युत चुम्बकीय विकिरण का एक कण (प्रकाश का क्वांटम) है, जो द्रव्यमान रहित एवं आवेश रहित होता है। यह परमाणु के अन्दर नहीं होता, बल्कि ऊर्जा के रूप में उत्सर्जित/अवशोषित होता है।
- प्राकृतिक तत्व (Natural element) में एक ही प्रकार के परमाणु मिलते हैं – अर्थात किसी तत्व के सभी परमाणुओं में प्रोटॉनों की संख्या (परमाणु क्रमांक – Z) समान होती है। उदाहरण – सभी हाइड्रोजन परमाणुओं में 1 प्रोटॉन।
- परमाणु विद्युत रूप से उदासीन (neutral) होता है – क्योंकि इसमें धनावेशित प्रोटॉनों की संख्या और ऋणावेशित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बराबर होती है। इस प्रकार कुल आवेश शून्य होता है।
- परमाणु का अधिकांश स्थान रिक्त (empty space) होता है – नाभिक अत्यधिक सघन एवं सूक्ष्म होता है, जबकि इलेक्ट्रॉन बहुत दूरी पर चक्कर लगाते हैं, जिससे अधिकांश आयतन रिक्त होता है। यह रदरफोर्ड के α-कण प्रकीर्णन प्रयोग से सिद्ध हुआ।
- परमाणु का द्रव्यमान नाभिक (nucleus) में केंद्रित होता है – प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन (न्यूक्लियॉन) का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान से लगभग 1836 गुना अधिक होता है। अतः इलेक्ट्रॉन द्रव्यमान में नगण्य योगदान देते हैं।
- परमाणु का द्रव्यमान मुख्यतः प्रोटॉन (Proton) और न्यूट्रॉन (Neutron) से आता है – द्रव्यमान संख्या (A) = प्रोटॉनों की संख्या (Z) + न्यूट्रॉनों की संख्या (N)। इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान (9.11 × 10⁻³¹ kg) नगण्य होता है।
- परमाणु का आकार लगभग 10⁻¹⁰ मीटर (1 Å – एंगस्ट्रॉम) के क्रम का होता है – 1 एंगस्ट्रॉम = 10⁻¹⁰ मीटर। नाभिक का आकार इससे लगभग 10⁵ गुना छोटा (10⁻¹⁵ मीटर) होता है।
- नाभिक का आकार लगभग 10⁻¹⁵ मीटर (1 फर्मी) होता है – 1 फर्मी = 10⁻¹⁵ मीटर। नाभिक का घनत्व लगभग 10¹⁷ kg/m³ होता है, जो अत्यधिक उच्च है।
- परमाणु में न्यूक्लियस का आकार परमाणु से लगभग 10⁵ गुना छोटा होता है – तुलना के लिए – यदि परमाणु क्रिकेट मैदान के आकार का हो, तो नाभिक उसके बीच में एक मटर के दाने के बराबर होगा।
- परमाणु की रासायनिक प्रकृति (chemical nature) संयोजी इलेक्ट्रॉनों (valence electrons) पर निर्भर करती है – संयोजी इलेक्ट्रॉन सबसे बाहरी कक्षा (valence shell) में स्थित होते हैं। ये इलेक्ट्रॉन ही रासायनिक बंधन बनाने में भाग लेते हैं।
- परमाणु के तीन आधारभूत अवयव (fundamental constituents) प्रोटॉन (proton), न्यूट्रॉन (neutron) और इलेक्ट्रॉन (electron) हैं – प्रोटॉन धनावेशित, न्यूट्रॉन उदासीन, इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित। ये तीनों मिलकर सभी परमाणुओं की रचना करते हैं।
- प्रोटॉन (Proton) का आवेश +1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम (C) होता है – द्रव्यमान लगभग 1.6726 × 10⁻²⁷ kg (1.007276 u) होता है। प्रोटॉन की खोज गोल्डस्टीन (Goldstein) ने कैनाल किरणों (canal rays) के प्रयोग से की थी।
- प्रोटॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन से लगभग 1836 गुना अधिक होता है – प्रोटॉन द्रव्यमान = 1.6726 × 10⁻²⁷ kg, इलेक्ट्रॉन द्रव्यमान = 9.11 × 10⁻³¹ kg। अनुपात ≈ 1836 : 1।
- न्यूट्रॉन (Neutron) आवेश-रहित (neutral) कण है – द्रव्यमान प्रोटॉन के लगभग बराबर (1.6749 × 10⁻²⁷ kg या 1.008665 u) होता है। न्यूट्रॉन की खोज जेम्स चैडविक (James Chadwick) ने 1932 में की थी।
- न्यूट्रॉन (Neutron) स्थायी कण (stable particle) नहीं है – मुक्त न्यूट्रॉन (free neutron) अस्थायी होता है और इसका अर्ध-आयु लगभग 14 मिनट 39 सेकंड होता है। नाभिक के भीतर न्यूट्रॉन स्थायी होते हैं।
- इलेक्ट्रॉन (Electron) का आवेश -1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम होता है – द्रव्यमान 9.11 × 10⁻³¹ kg (≈ 0.000548 u) होता है। इलेक्ट्रॉन की खोज जे.जे. थॉमसन (J.J. Thomson) ने 1897 में कैथोड किरण नलिका (cathode ray tube) के प्रयोग से की थी।
- इलेक्ट्रॉन के आवेश (charge) का निर्धारण मिलिकन (Millikan) ने किया – उनके प्रसिद्ध तेल-बूंद प्रयोग (oil-drop experiment) से इलेक्ट्रॉन के आवेश का सटीक मान ज्ञात किया गया। इस कार्य के लिए उन्हें 1923 में नोबेल पुरस्कार मिला।
- ड्यूट्रॉन (Deuteron) में एक प्रोटॉन (proton) और एक न्यूट्रॉन (neutron) होता है – यह हाइड्रोजन के समस्थानिक ड्यूटेरियम (deuterium – D या ²H) का नाभिक है। इसका परमाणु क्रमांक 1 एवं द्रव्यमान संख्या 2 होती है।
- इलेक्ट्रॉन (Electron) और पॉजिट्रॉन (Positron) कण-प्रतिकण युग्म (particle-antiparticle pair) हैं – पॉजिट्रॉन इलेक्ट्रॉन का प्रतिकण है, जिसका आवेश +1.6 × 10⁻¹⁹ C होता है। पॉजिट्रॉन की खोज कार्ल एंडरसन (Carl Anderson) ने 1932 में की थी।
- पॉजिट्रॉन (Positron) की खोज कार्ल एंडरसन (Carl Anderson) ने की थी – उन्होंने बादल कक्ष (cloud chamber) में ब्रह्मांडीय किरणों का अध्ययन करते हुए पॉजिट्रॉन का पता लगाया। इस खोज के लिए उन्हें 1936 में नोबेल पुरस्कार मिला।
- न्यूट्रिनो (Neutrino) का द्रव्यमान और आवेश शून्य (zero) होता है – यह अत्यंत सूक्ष्म एवं उदासीन कण है, जो बीटा-क्षय (β-decay) में उत्सर्जित होता है। इसके अस्तित्व की परिकल्पना वोल्फगांग पाउली (Wolfgang Pauli) ने 1930 में की थी।
- न्यूट्रिनो (Neutrino) पर कोई विद्युत आवेश (electric charge) नहीं होता – यह पदार्थ के साथ अत्यंत दुर्बल अंतःक्रिया करता है। प्रति सेकंड अरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर से बिना किसी अंतःक्रिया के गुजर जाते हैं।
- न्यूट्रिनो (Neutrino) की खोज पाउली (Pauli) ने प्रस्तावित की थी – उन्होंने बीटा-क्षय में ऊर्जा संरक्षण को स्पष्ट करने के लिए न्यूट्रिनो की परिकल्पना की। वास्तविक खोज 1956 में क्लाइड कोवान (Clyde Cowan) और फ्रेडरिक रेइन्स (Frederick Reines) ने की।
- क्वार्क (Quark) का आंशिक आवेश (fractional charge) +1/3 या +2/3 होता है – क्वार्क प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के मूलभूत घटक हैं। प्रोटॉन में दो अप (up – +2/3) और एक डाउन (down – -1/3) क्वार्क होते हैं।
- फोनॉन (Phonon) क्रिस्टल (crystal) के कंपन (vibration) में पाया जाता है – यह ध्वनि का एक क्वांटम (quantum of sound) है। फोनॉन ठोस अवस्था भौतिकी (solid state physics) में महत्वपूर्ण अवधारणा है।
- बोसॉन (Boson) कण सत्येंद्र नाथ बोस (Satyendra Nath Bose) के नाम से जुड़ा है – बोसॉन वे कण होते हैं जो बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी (Bose-Einstein statistics) का पालन करते हैं। इनमें पूर्णांक चक्रण (integer spin – 0, 1, 2) होता है।
- मेसॉन (Meson) नाभिकीय कणों (nucleons) को बांधता है – यह प्रबल नाभिकीय बल (strong nuclear force) का वाहक कण (mediator) है। मेसॉन की खोज हिदेकी युकावा (Hideki Yukawa) ने 1935 में की थी, जिसके लिए उन्हें 1949 में नोबेल पुरस्कार मिला।
- मेसॉन (Meson) की खोज युकावा (Yukawa) ने की थी – उन्होंने प्रबल नाभिकीय बल की व्याख्या के लिए मेसॉन की परिकल्पना की। बाद में π-मेसॉन (pion) की खोज की गई।
- अल्फा कण (Alpha particle – α) का द्रव्यमान हीलियम नाभिक (helium nucleus) के बराबर होता है – इसमें 2 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन होते हैं। आवेश +2e, द्रव्यमान लगभग 4 u (6.64 × 10⁻²⁷ kg) होता है।
- α-कण (Alpha particle) दो प्रोटॉन और दो न्यूट्रॉन से बने होते हैं – यह हीलियम-4 (⁴He) का नाभिक है। अल्फा कण रेडियोसक्रिय क्षय (α-decay) से उत्सर्जित होते हैं।
- बीटा कण (Beta particle – β⁻) ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन (negatively charged electron) होते हैं – β⁻ क्षय में न्यूट्रॉन प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन और एंटीन्यूट्रिनो में परिवर्तित होता है। β⁺ कण पॉजिट्रॉन होते हैं।
- गामा किरणें (Gamma rays – γ) विद्युत चुम्बकीय तरंगें (electromagnetic waves) हैं – ये द्रव्यमान एवं आवेश रहित होती हैं। γ-किरणें अत्यधिक ऊर्जा वाली होती हैं और नाभिकीय क्षय में उत्सर्जित होती हैं।
- परमाणु क्रमांक (Atomic number – Z) प्रोटॉनों की संख्या (number of protons) से निर्धारित होता है – यह तत्व की पहचान होती है। उदाहरण – कार्बन में 6 प्रोटॉन (Z=6), ऑक्सीजन में 8 प्रोटॉन (Z=8)।
- द्रव्यमान संख्या (Mass number – A) प्रोटॉन (protons) और न्यूट्रॉन (neutrons) की संख्या का योग है – सूत्र: A = Z + N (जहाँ N = न्यूट्रॉनों की संख्या)। यह परमाणु के भार को दर्शाता है।
- प्लूटोनियम-242 (Plutonium-242 – ²⁴²Pu) में 148 न्यूट्रॉन होते हैं – इसका परमाणु क्रमांक 94 (प्रोटॉन) है। अतः न्यूट्रॉन = 242 – 94 = 148। यह एक ट्रांसयूरेनिक तत्व है।
- हाइड्रोजन-1 (Hydrogen-1 – ¹H) में कोई न्यूट्रॉन (no neutron) नहीं होता – यह हाइड्रोजन का सबसे सामान्य समस्थानिक है, जिसमें केवल 1 प्रोटॉन और 1 इलेक्ट्रॉन होता है।
- समस्थानिक (Isotopes) में प्रोटॉन (protons) समान (same) होते हैं, लेकिन न्यूट्रॉन (neutrons) भिन्न (different) होते हैं – अतः इनका परमाणु क्रमांक (Z) समान तथा द्रव्यमान संख्या (A) भिन्न होती है। उदाहरण – ¹H, ²H (ड्यूटेरियम), ³H (ट्रिटियम)।
- प्राकृतिक तत्वों में एक ही प्रकार के परमाणु (एक ही Z) होते हैं – परंतु समस्थानिकों (समान Z, भिन्न A) की उपस्थिति के कारण, किसी तत्व के सभी परमाणुओं का द्रव्यमान समान नहीं होता।
- इलेक्ट्रॉन (Electron) और प्रोटॉन (Proton) की संख्या समान (equal) होती है – उदासीन परमाणु में Z = इलेक्ट्रॉनों की संख्या। आयन (cation/anion) में यह संतुलन बिगड़ जाता है।
- एकधनायनित कार्बन (Monocationic carbon – C⁺) में 6 प्रोटॉन, 6 न्यूट्रॉन होते हैं – C⁺ में 6 प्रोटॉन, 5 इलेक्ट्रॉन (क्योंकि एक इलेक्ट्रॉन कम हो गया) और 6 न्यूट्रॉन (यदि यह ¹²C हो)। न्यूट्रॉन द्रव्यमान संख्या पर निर्भर करते हैं।
- परमाणु का सिद्धांत (Atomic Theory) जॉन डाल्टन (John Dalton) ने प्रस्तावित किया – 1808 में डाल्टन का परमाणु सिद्धांत प्रकाशित हुआ। इसमें कहा गया कि सभी पदार्थ परमाणुओं से बने हैं, जो अविभाज्य (indivisible) हैं।
- परमाणु मॉडल में थॉमसन (J.J. Thomson) ने प्लम पुडिंग मॉडल (Plum Pudding Model) दिया – 1897 में थॉमसन ने प्रस्तावित किया कि परमाणु एक धनावेशित गोला है, जिसमें इलेक्ट्रॉन बीज की तरह बिखरे हैं। इसे "किशमिश पुडिंग मॉडल" भी कहते हैं।
- परमाणु नाभिक (Atomic Nucleus) की खोज अर्नेस्ट रदरफोर्ड (Ernest Rutherford) ने की – 1911 में उन्होंने α-कण प्रकीर्णन प्रयोग (gold foil experiment) किया, जिससे सिद्ध हुआ कि परमाणु का धनावेश एक सघन नाभिक में केन्द्रित होता है।
- रदरफोर्ड (Rutherford) ने α-कण प्रकीर्णन (alpha particle scattering) से नाभिक (nucleus) सिद्ध किया – सोने की पतली पन्नी पर α-कणों की बमबारी से कुछ कण बिखर गए, कुछ वापस लौट आए। इससे सिद्ध हुआ कि परमाणु में एक सघन, धनावेशित नाभिक होता है।
- बोहर मॉडल (Bohr Model) में इलेक्ट्रॉन (electrons) स्थिर कक्षा (stable orbits) में चक्कर लगाते हैं – नील्स बोर (Niels Bohr) ने 1913 में यह मॉडल प्रस्तुत किया। इन कक्षाओं को स्थिर कक्षाएँ (stationary orbits) कहा जाता है, जिनमें इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकिरणित नहीं करते।
- बोहर (Bohr) ने हाइड्रोजन परमाणु (Hydrogen atom) का मॉडल प्रस्तुत किया – यह मॉडल केवल एक इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं (H, He⁺, Li²⁺) पर लागू होता है। इसके अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित ऊर्जा स्तरों (K, L, M, N) में चक्कर लगाते हैं।
- सोमरफेल्ड (Sommerfeld) ने बोहर सिद्धांत में अंडाकार कक्षा (elliptical orbit) जोड़ी – 1916 में सोमरफेल्ड ने बोहर के वृत्ताकार कक्षाओं में सुधार करते हुए अंडाकार कक्षाओं का सुझाव दिया, जिससे सूक्ष्म संरचना (fine structure) को समझाया जा सका।
- क्वांटम सिद्धांत (Quantum Theory) मैक्स प्लांक (Max Planck) ने प्रस्तावित किया – 1900 में प्लांक ने कहा कि ऊर्जा निरंतर रूप में नहीं, बल्कि छोटे पैकेटों (quanta) के रूप में उत्सर्जित/अवशोषित होती है। इसके लिए उन्हें 1918 में नोबेल पुरस्कार मिला।
- हाइजेनबर्ग (Heisenberg) ने अनिश्चितता सिद्धांत (Uncertainty Principle) प्रतिपादित किया – 1927 में प्रस्तावित, इस सिद्धांत के अनुसार किसी कण की स्थिति (position) और संवेग (momentum) को एक साथ पूर्ण परिशुद्धता से नहीं मापा जा सकता।
- हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत (Uncertainty Principle) स्थिति (position) और संवेग (momentum) की अनिश्चितता बताता है – गणितीय रूप में Δx × Δp ≥ h/4π (जहाँ Δx = स्थिति में अनिश्चितता, Δp = संवेग में अनिश्चितता, h = प्लांक नियतांक)।
- श्रोडिंगर समीकरण (Schrödinger equation) इलेक्ट्रॉन की स्थिति निर्धारित करता है – 1926 में एरविन श्रोडिंगर (Erwin Schrödinger) ने यह समीकरण प्रस्तुत किया। इससे इलेक्ट्रॉन के ढूँढ़ने की प्रायिकता (probability) कक्षक (orbital) में व्यक्त होती है।
- परमाणु का क्वांटम मॉडल (Quantum Model) आधुनिक संरचना का आधार है – यह श्रोडिंगर समीकरण पर आधारित है और इलेक्ट्रॉनों के कक्षकों (orbitals) को तरंग फलन (wave function) द्वारा व्यक्त करता है।
- इलेक्ट्रॉन (Electron) की तरंग प्रकृति (wave nature) डी ब्रोगली (de Broglie) ने खोजी – 1924 में लुई डी ब्रोगली (Louis de Broglie) ने प्रस्तावित किया कि सभी पदार्थ (matter) में तरंग-कण द्वैत (wave-particle duality) होता है। इस कार्य के लिए उन्हें 1929 में नोबेल पुरस्कार मिला।
- इलेक्ट्रॉन की तरंग-कण द्वैत प्रकृति (wave-particle duality) होती है – यह व्यतिकरण (interference) एवं विवर्तन (diffraction) में तरंग की तरह और प्रकाश-विद्युत प्रभाव में कण की तरह व्यवहार करता है।
- डी ब्रोगली तरंगदैर्घ्य (de Broglie wavelength) का सूत्र λ = h/mv है – जहाँ λ = तरंगदैर्घ्य, h = प्लांक नियतांक (6.63 × 10⁻³⁴ Js) , m = द्रव्यमान, v = वेग।
- 0.66 kg गेंद (ball) की डी ब्रोगली तरंगदैर्घ्य लगभग 1 × 10⁻³⁵ m होती है – इतनी सूक्ष्म तरंगदैर्घ्य को मापा नहीं जा सकता। अतः स्थूल वस्तुएँ तरंग की तरह व्यवहार नहीं करतीं, क्योंकि उनकी तरंगदैर्घ्य अत्यधिक छोटी होती है।
- ऑफबाऊ सिद्धांत (Aufbau Principle) इलेक्ट्रॉन कक्षा भरने का क्रम (order of filling orbitals) नियंत्रित करता है – इलेक्ट्रॉन न्यूनतम ऊर्जा वाले कक्षकों में पहले भरे जाते हैं। कक्षक भरने का क्रम: 1s, 2s, 2p, 3s, 3p, 4s, 3d, 4p, 5s, 4d, 5p, 6s,… (n+l नियम)
- इलेक्ट्रॉन भरने का क्रम (Order of filling) ns, (n-2)f, (n-1)d, np है – यह ऑफबाऊ सिद्धांत का विस्तार है। उदाहरण – 6s के बाद 4f, फिर 5d, फिर 6p भरता है।
- चुम्बकीय क्वांटम संख्या (Magnetic quantum number – m) कक्षा के अभिविन्यास (orientation of orbital) से संबंधित है – इसका मान -l से +l तक होता है। यह बताता है कि कक्षक अंतरिक्ष में किस दिशा में स्थित है।
- कक्षक (orbital) का अभिविन्यास (orientation) चुम्बकीय क्वांटम संख्या (magnetic quantum number – m) नियंत्रित करती है – s उपकोश (l=0) में m=0 (एक कक्षक) , p उपकोश (l=1) में m = -1, 0, +1 (तीन कक्षक) , d उपकोश (l=2) में पाँच कक्षक।
- उपकोश (subshell) में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2(2l+1) होती है – जहाँ l = अज़ीमुथल क्वांटम संख्या। s (l=0) → 2, p (l=1) → 6, d (l=2) → 10, f (l=3) → 14 इलेक्ट्रॉन।
- परमाणु में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2n² होती है – n = मुख्य क्वांटम संख्या। K कोश (n=1) → 2, L कोश (n=2) → 8, M कोश (n=3) → 18, N कोश (n=4) → 32 इलेक्ट्रॉन।
- परमाणु में कक्षकों (orbitals) की संख्या n² होती है – n=1 → 1 कक्षक (1s) , n=2 → 4 कक्षक (2s, 2pₓ, 2pᵧ, 2p₂) , n=3 → 9 कक्षक (3s, 3pₓ, 3pᵧ, 3p₂, 3dₓᵧ, 3dᵧ₂, 3dₓ₂, 3dₓ²⁻ᵧ², 3d₂²) आदि।
- पाउली का अपवर्जन सिद्धांत (Pauli's Exclusion Principle) इलेक्ट्रॉन विन्यास (electronic configuration) को नियंत्रित करता है – इस सिद्धांत के अनुसार एक परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के चारों क्वांटम संख्याएँ (n, l, m, s) समान नहीं हो सकतीं।
- हुंड का नियम (Hund's Rule) इलेक्ट्रॉन युग्मन (electron pairing) को नियंत्रित करता है – किसी उपकोश में पहले प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन समान चक्रण (parallel spin) से भरते हैं, फिर युग्मन (pairing) होता है।
- दो इलेक्ट्रॉन (two electrons) एक कक्षा (orbital) में विपरीत चक्रण (opposite spins) रखते हैं – पाउली के अपवर्जन सिद्धांत के अनुसार, एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं, जिनके चक्रण विपरीत (+1/2 और -1/2) होते हैं।
- परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (electronic configuration) क्वांटम संख्याओं (quantum numbers) पर निर्भर करता है – n (कोश) , l (उपकोश) , m (कक्षक) , s (चक्रण) चारों क्वांटम संख्याएँ मिलकर इलेक्ट्रॉन की स्थिति निर्धारित करती हैं।
- इलेक्ट्रॉन का चक्रण (spin) ±1/2 होता है – यह एक आंतरिक कोणीय संवेग (intrinsic angular momentum) है। चक्रण के कारण इलेक्ट्रॉन छोटे चुंबक की तरह व्यवहार करते हैं।
- p-इलेक्ट्रॉन (p-electron) का कक्षीय कोणीय संवेग (orbital angular momentum) √2 h/2π है – सूत्र: √[l(l+1)] × h/2π। p इलेक्ट्रॉन के लिए l = 1, अतः √[1(1+1)] = √2।
- क्वांटम संख्याएँ (Quantum numbers) n=3, l=0, m=0, s=+1/2 संभव (possible) हैं – n=3 (M कोश) , l=0 (s उपकोश) , m=0, s=+1/2 – यह वैध सेट है।
- n=3, l=2, m=-3 क्वांटम संख्या (quantum numbers) अमान्य (invalid) है – क्योंकि m का मान -l से +l तक होता है। यहाँ l=2, अतः m = -2, -1, 0, +1, +2 हो सकता है, -3 नहीं।
- कक्षा n=3, l=2, m=+2 में एक कक्षक (one orbital) होता है – दिए गए n, l, m के लिए केवल एक कक्षक निर्धारित होता है।
- n=3, l=1, m=0 में एक कक्षक (one orbital) होता है – यह 3p उपकोश का एक विशिष्ट कक्षक (3p₂) है।
- चौथे ऊर्जा स्तर (n=4) में 16 कक्षक (orbitals) होते हैं – n=4 के लिए कक्षकों की संख्या n² = 16। इसमें 1 (4s) + 3 (4p) + 5 (4d) + 7 (4f) = 16 कक्षक होते हैं।
- n=4, l=3 उपकोश (4f) में अधिकतम 14 इलेक्ट्रॉन होते हैं – l=3 के लिए अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2(2×3+1) = 2×7 = 14। यह f-ब्लॉक के तत्वों (लैंथेनाइड्स एवं एक्टिनाइड्स) में पाया जाता है।
- n=3, l=1, m=-1 में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं – किसी भी कक्षक में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं (पाउली अपवर्जन सिद्धांत)।
- क्लोरीन (Chlorine – Cl) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (electronic configuration) 2, 8, 7 है – परमाणु क्रमांक 17। पूर्ण विन्यास: 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁵। संयोजी इलेक्ट्रॉन 7 हैं, अतः यह 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cl⁻ (ऑक्टेट) बनाता है।
- रुबिडियम (Rubidium – Rb) का संयोजी इलेक्ट्रॉन (valence electron) 5s¹ है – परमाणु क्रमांक 37। विन्यास: [Kr] 5s¹। यह क्षार धातु (alkali metal) है, अत्यधिक अभिक्रियाशील।
- Co³⁺ (Cobalt ion) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (electronic configuration) [Ar] 3d⁶ है – Co (Z=27) का विन्यास [Ar] 4s² 3d⁷ है। Co³⁺ में 3 इलेक्ट्रॉन निकलते हैं – पहले 4s से (2) फिर 3d से (1) → [Ar] 3d⁶।
- Ni²⁺ (Nickel ion) का चुम्बकीय आघूर्ण (magnetic moment) 2.83 BM (Bohr Magneton) है – Ni (Z=28) का विन्यास [Ar] 4s² 3d⁸ है। Ni²⁺ में 2 इलेक्ट्रॉन कम → [Ar] 3d⁸। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 2, अतः μ = √n(n+2) = √(2×4) = √8 ≈ 2.83 BM।
- Yb²⁺ (Ytterbium ion) लैंथेनाइड आयन (lanthanide ion) डायमैग्नेटिक (diamagnetic) है – Yb (Z=70) का विन्यास [Xe] 4f¹⁴ 6s²। Yb²⁺ में 2 इलेक्ट्रॉन कम → [Xe] 4f¹⁴ (पूर्णतः भरा 4f उपकोश)। कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं, अतः डायमैग्नेटिक।
- लैंथेनाइड (Lanthanides) का सामान्य विन्यास (general configuration) (n-2)f¹⁻¹⁴ (n-1)d⁰⁻¹ ns² है – Ce (Z=58) से Lu (Z=71) तक यह विन्यास पाया जाता है। 4f उपकोश इलेक्ट्रॉनों से भरता है।
- हीलियम नाभिक (Helium nucleus) में दो प्रोटॉन और दो न्यूट्रॉन होते हैं – हीलियम-4 (⁴He) का परमाणु क्रमांक 2 (2 प्रोटॉन) , द्रव्यमान संख्या 4 (2 न्यूट्रॉन)। यह अल्फा कण के समान है।
- Be²⁺ (Beryllium ion) Li⁺ (Lithium ion) के साथ आइसोइलेक्ट्रॉनिक (isoelectronic) है – Be²⁺ (Z=4) में 2 इलेक्ट्रॉन, Li⁺ (Z=3) में 2 इलेक्ट्रॉन। दोनों ही He (हीलियम) के विन्यास (1s²) के समान हैं।
- आइसोइलेक्ट्रॉनिक प्रजातियाँ (Isoelectronic species) में समान इलेक्ट्रॉन (same number of electrons) होते हैं – उदाहरण – O²⁻ (8+2=10 e⁻), F⁻ (9+1=10 e⁻), Ne (10 e⁻), Na⁺ (11-1=10 e⁻), Mg²⁺ (12-2=10 e⁻) सभी आइसोइलेक्ट्रॉनिक (10 e⁻) हैं।
- हाइड्रोजन परमाणु (Hydrogen atom) की बोहर त्रिज्या (Bohr radius) 0.53 Å (एंगस्ट्रॉम) है – नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच की दूरी n=1 कक्षा के लिए 0.529 × 10⁻¹⁰ m (लगभग 0.53 Å) होती है। इसे a₀ से व्यक्त करते हैं।
- पहली उत्तेजित अवस्था (first excited state – n=2) में त्रिज्या 2.12 Å होता है – बोहर त्रिज्या का सूत्र rₙ = n² × a₀ (a₀ = 0.53 Å) । n=2 के लिए r₂ = 4 × 0.53 = 2.12 Å।
- हाइड्रोजन परमाणु (Hydrogen atom) में n=2 की ऊर्जा -13.6/4 eV (अर्थात -3.4 eV) होती है – सूत्र Eₙ = -13.6/n² eV। n=1 के लिए E₁ = -13.6 eV (मूल अवस्था – ground state) , n=2 के लिए E₂ = -13.6/4 = -3.4 eV (प्रथम उत्तेजित अवस्था – first excited state)।
- हाइड्रोजन (Hydrogen) की पहली उत्तेजित अवस्था (n=2) की ऊर्जा -3.4 eV है – (ऊपर देखें) n=1 (मूल अवस्था) से n=2 (उत्तेजित अवस्था) में जाने के लिए 10.2 eV ऊर्जा अवशोषित करनी पड़ती है।
- बोहर सिद्धांत (Bohr's theory) में n=1 की ऊर्जा अधिक ऋणात्मक (more negative) होती है – अधिक ऋणात्मक का अर्थ है अधिक स्थिर (more stable) होना। n=1 (मूल अवस्था) सबसे स्थिर अवस्था है।
- दूसरे बोहर कक्षा (n=2) की ऊर्जा -328 kJ/mol है – 1 eV = 96.485 kJ/mol, अतः -3.4 × 96.485 ≈ -328 kJ/mol। यह हाइड्रोजन के लिए है।
- हाइड्रोजन परमाणु में n=6 से n=5 में कम ऊर्जा वाला फोटॉन उत्सर्जित होता है – ऊर्जा अंतर ΔE ∝ (1/n₁² – 1/n₂²) । बड़े n से छोटे n में उत्सर्जन होता है। ΔE n=6→5 < ΔE n=5→4 < ΔE n=4→3 < ΔE n=3→2 < ΔE n=2→1।
- प्लांक स्थिरांक (Planck's constant – h) का मान 6.63 × 10⁻³⁴ Js (जूल-सेकंड) है – यह क्वांटम यांत्रिकी का एक मूलभूत स्थिरांक है। h = 6.62607015 × 10⁻³⁴ Js।
- फोटॉन ऊर्जा (Photon energy) का सूत्र E = hc/λ है – जहाँ h = प्लांक स्थिरांक, c = प्रकाश की गति (3 × 10⁸ m/s) , λ = तरंगदैर्घ्य। यह प्रकाश-वैद्युत प्रभाव और क्वांटम यांत्रिकी का मूल सूत्र है।
- 45 nm (नैनोमीटर) तरंगदैर्घ्य (wavelength) की ऊर्जा 4.42 × 10⁻¹⁸ J है – E = hc/λ = (6.63×10⁻³⁴ × 3×10⁸) / (45×10⁻⁹) = (1.989×10⁻²⁵) / (45×10⁻⁹) ≈ 4.42×10⁻¹⁸ J।
- 6 × 10¹⁵ s⁻¹ आवृत्ति (frequency) की तरंगदैर्घ्य (wavelength) 50 nm है – λ = c/ν = (3×10⁸) / (6×10¹⁵) = 0.5×10⁻⁷ m = 50×10⁻⁹ m = 50 nm।
- E₁ = 25 eV और E₂ = 50 eV के लिए तरंगदैर्घ्य (wavelength) λ₁ = 2λ₂ होता है – ∵ λ ∝ 1/E, अतः λ₁/λ₂ = E₂/E₁ = 50/25 = 2, ∴ λ₁ = 2λ₂।
- हाइड्रोजन में n=4 से n=1 संक्रमण (transition) की आवृत्ति 3.08 × 10¹⁵ s⁻¹ है – ΔE = 13.6(1/1² – 1/4²) = 13.6(1 – 1/16) = 13.6×15/16 = 12.75 eV। ν = ΔE/h = (12.75×1.6×10⁻¹⁹) / (6.63×10⁻³⁴) ≈ 3.08×10¹⁵ Hz।
- इलेक्ट्रॉन (Electron) की स्थिति (position) और संवेग (momentum) में अनिश्चितता (uncertainty) होती है – हाइजेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार Δx × Δp ≥ h/4π। यह मापन की सीमा (fundamental limit) है।
- इलेक्ट्रॉन की गति (velocity) में अनिश्चितता (uncertainty) 1 × 10⁹ cm/s हो सकती है – सूक्ष्म कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन) के लिए अनिश्चितता बहुत अधिक होती है। यही कारण है कि परमाणु में इलेक्ट्रॉन का सटीक पथ (trajectory) ज्ञात नहीं किया जा सकता।
- इलेक्ट्रॉन की गति (velocity) में अनिश्चितता (uncertainty) लगभग 5.79 × 10⁶ m/s होती है – यह मान विशिष्ट परिस्थितियों के लिए गणना से प्राप्त होता है। स्थिति और संवेग की अनिश्चितता समान होने पर Δv = √(h/2πm) होता है।
- इलेक्ट्रॉन की स्थिति (position) और संवेग (momentum) की अनिश्चितता (uncertainty) समान होने पर Δv = √(h/2πm) होता है – यह सूत्र हाइजेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत से व्युत्पन्न होता है।
- परमाणु में इलेक्ट्रॉन (Electron) की गति (speed) प्रकाश की गति (speed of light) से कम होती है – हाइड्रोजन के मूल अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गति लगभग c/137 (~ 2.2 × 10⁶ m/s) होती है, जो प्रकाश की गति (3 × 10⁸ m/s) से बहुत कम है।
- रासायनिक गुण (Chemical properties) परमाणु संख्या (Atomic number – Z) पर निर्भर करते हैं – क्योंकि परमाणु संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या निर्धारित करती है, और इलेक्ट्रॉन (विशेषकर संयोजी इलेक्ट्रॉन) रासायनिक व्यवहार के लिए उत्तरदायी होते हैं।
- परमाणु संरचना (Atomic structure) का अध्ययन रसायन विज्ञान (Chemistry) का आधार है – तत्वों के गुण, रासायनिक बंधन, अभिक्रियाएँ – सब कुछ परमाणु संरचना पर निर्भर करता है।