रासायनिक एवं भौतिक परिवर्तन, विलयन
- भौतिक परिवर्तन (Physical Change) में केवल
पदार्थ की अवस्था (state of matter) बदलती है, रासायनिक संरचना (chemical
composition) नहीं बदलती – उदाहरण – पानी का बर्फ बनना, बर्फ का पानी बनना। अणुओं की पहचान वही
रहती है।
- भौतिक परिवर्तन (Physical Change) सामान्यतः
उत्क्रमणीय (Reversible) होते हैं – अर्थात मूल पदार्थ को वापस प्राप्त किया जा सकता है।
उदाहरण – पानी को गर्म करके भाप बनाना और भाप को ठंडा करके पुनः पानी प्राप्त करना।
- पानी का वाष्पीकरण (Evaporation) और संघनन
(Condensation) भौतिक परिवर्तन (Physical Change) के उदाहरण हैं – वाष्पीकरण
में द्रव (पानी) गैस (भाप) में बदलता है, संघनन में गैस द्रव में। दोनों में H₂O के अणु वही रहते हैं।
- बर्फ का पिघलना (Melting of ice) और पानी का जमना (Freezing of
water) भौतिक परिवर्तन (Physical Change) हैं – पिघलने पर बर्फ (ठोस) → पानी
(द्रव), जमने पर पानी (द्रव) → बर्फ (ठोस)। दोनों ही प्रक्रियाएँ उत्क्रमणीय हैं।
- भौतिक परिवर्तन (Physical Change) में ऊर्जा
परिवर्तन (energy change) बहुत कम (small) होता है – अवस्था परिवर्तन में
ऊर्जा (गुप्त ऊष्मा – latent heat) का अवशोषण या उत्सर्जन होता है, परंतु यह रासायनिक परिवर्तनों की तुलना
में बहुत कम होता है।
- भौतिक परिवर्तन (Physical Change) में कोई नया
पदार्थ (new substance) नहीं बनता – मूल पदार्थ केवल अपना रूप, आकार, अवस्था या आकृति बदलता
है। उदाहरण – कागज को फाड़ना (टुकड़े बदल गए, किंतु कागज ही है)।
- धातु का पिघलना (Melting of metal) एक भौतिक
परिवर्तन (Physical Change) है – लोहे, ताँबे, सोने, चाँदी आदि को गर्म करने पर वह पिघल जाती
है, परंतु ठंडा करने पर पुनः वही धातु प्राप्त हो जाती है। इसमें धातु की रासायनिक पहचान नहीं बदलती।
- भौतिक परिवर्तन (Physical Change) में
द्रव्यमान संरक्षित (mass conserved) रहता है – द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of
Conservation of Mass) भौतिक परिवर्तनों पर भी लागू होता है। भौतिक परिवर्तन के बाद कुल द्रव्यमान
अपरिवर्तित रहता है।
- काँच का टूटना (Breaking of glass) एक भौतिक
परिवर्तन (Physical Change) है – टूटने के बाद भी काँच का टुकड़ा काँच ही रहता है, कोई नया
रासायनिक पदार्थ नहीं बनता। यह परिवर्तन प्रायः अपरिवर्तनीय होता है (टुकड़ों को जोड़ना कठिन)।
- कागज का फटना (Tearing of paper) भौतिक
परिवर्तन (Physical Change) है, लेकिन जलना (burning) रासायनिक परिवर्तन (Chemical
Change) – फटने पर कागज के टुकड़े कागज ही रहते हैं, जबकि जलने पर कागज CO₂, जलवाष्प और राख
में बदल जाता है (नए पदार्थ बनते हैं)।
- नमक (Salt) का पानी (Water) में घुलना भौतिक
परिवर्तन (Physical Change) है – NaCl पानी में घुलकर Na⁺ और Cl⁻ आयनों में पृथक हो जाता है।
पानी को वाष्पित (evaporate) करने पर पुनः नमक प्राप्त किया जा सकता है।
- चीनी (Sugar) का पानी (Water) में घुलना भी
भौतिक परिवर्तन (Physical Change) है – चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁) पानी में घुलकर अणुओं के रूप में
बिखर जाती है। पानी को वाष्पित करके चीनी पुनः प्राप्त की जा सकती है।
- भौतिक परिवर्तन (Physical Change) में
रासायनिक बंध (chemical bonds) नहीं टूटते – अणुओं के बीच के अंतराण्विक बल
(intermolecular forces) में परिवर्तन होता है, परंतु सहसंयोजक बंध (covalent bonds) या आयनिक बंध (ionic
bonds) नहीं टूटते।
- भौतिक परिवर्तन (Physical Change) में पदार्थ
की पहचान (identity) बनी रहती है – परिवर्तन के बाद भी पदार्थ की रासायनिक पहचान (chemical
identity) वही रहती है। उदाहरण – पानी के तीनों अवस्थाओं (बर्फ, जल, भाप) में H₂O ही रहता है।
- पानी का क्वथन (Boiling) और संघनन (Condensation)
उत्क्रमणीय प्रक्रियाएँ (reversible processes) हैं – 100°C (सामान्य वायुदाब पर) पानी
उबलकर भाप बनता है, तथा भाप को ठंडा करने पर पुनः पानी प्राप्त होता है। दोनों भौतिक परिवर्तन हैं।
- भौतिक परिवर्तन (Physical Change) में कोई गैस
उत्सर्जन (gas emission) नहीं होता – भौतिक परिवर्तनों में प्रायः कोई गैस (बुलबुले) नहीं
निकलती। यदि गैस निकलती है (जैसे – उबलते पानी से भाप) , तो वह मूल पदार्थ का ही वाष्प होता है, नया पदार्थ
नहीं।
- भौतिक परिवर्तन (Physical Change) में
द्रव्यमान एवं ऊर्जा दोनों संरक्षित (conserved) रहते हैं – ऊर्जा संरक्षण का नियम (Law of
Conservation of Energy) एवं द्रव्यमान संरक्षण का नियम दोनों ही भौतिक परिवर्तनों पर लागू होते हैं (E =
mc² के अनुसार द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता सूक्ष्म स्तर पर होती है, परंतु सामान्य रासायनिक/भौतिक परिवर्तनों
में यह नगण्य है)।
- भौतिक परिवर्तन (Physical Change) में अवस्था
परिवर्तन (state change) आम (common) है – ठोस → द्रव (पिघलना) , द्रव → गैस (वाष्पीकरण/क्वथन)
, गैस → द्रव (संघनन) , द्रव → ठोस (जमना/हिमीकरण) , ठोस → गैस (उर्ध्वपातन – sublimation) आदि।
- भौतिक परिवर्तन (Physical Change) में केवल
भौतिक गुण (physical properties) बदलते हैं – जैसे – आकार (size), आकृति (shape), अवस्था
(state), घनत्व (density), गलनांक (melting point), क्वथनांक (boiling point) आदि। रासायनिक गुण (जैसे –
अभिक्रियाशीलता – reactivity) नहीं बदलते।
- भौतिक परिवर्तन (Physical Change) के बाद मूल
पदार्थ (original substance) पुनः प्राप्त किया जा सकता है – यह भौतिक परिवर्तन की
उत्क्रमणीयता (reversibility) का ही परिणाम है। उदाहरण – नमक के विलयन को वाष्पित कर नमक प्राप्त करना।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) में नए
पदार्थ (new substance) का निर्माण होता है – मूल पदार्थ की रासायनिक संरचना बदल जाती है।
उदाहरण – लोहे पर जंग लगना (Fe₂O₃·xH₂O) , लकड़ी का जलना (CO₂, जलवाष्प, राख) , दूध का दही बनना (लैक्टिक
अम्ल – lactic acid)।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) सामान्यतः
अपरिवर्तनीय (Irreversible) होते हैं – एक बार रासायनिक परिवर्तन होने के बाद मूल पदार्थ
को सामान्य भौतिक विधियों द्वारा पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता। उदाहरण – अंडे का उबलना (पकना)
अपरिवर्तनीय है।
- लकड़ी का जलना (Burning of wood) रासायनिक
परिवर्तन (Chemical Change) है – जलने पर लकड़ी (सेल्यूलोज – cellulose) CO₂, जलवाष्प और राख
में बदल जाती है। यह एक ऊष्माक्षेपी (exothermic – ऊर्जा उत्सर्जन) अभिक्रिया है।
- लोहे का जंग लगना (Rusting of iron) रासायनिक
परिवर्तन (Chemical Change) है – लोहा (Fe) ऑक्सीजन (O₂) और जल (H₂O) के साथ अभिक्रिया करके
हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃·xH₂O – जंग – rust) बनाता है। यह एक ऑक्सीकरण (oxidation) प्रक्रिया है।
- दूध का दही बनना (Curdling of milk) रासायनिक
परिवर्तन (Chemical Change) है – दूध में उपस्थित लैक्टोज (lactose) जीवाणुओं द्वारा लैक्टिक
अम्ल (lactic acid – C₃H₆O₃) में बदल जाता है, जिससे प्रोटीन (casein) जम जाता है। यह अपरिवर्तनीय है।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) में
रासायनिक बंध (chemical bonds) टूटते और नए बंध (new bonds) बनते हैं – अभिकारकों
(reactants) के परमाणु नए रूप में व्यवस्थित होकर उत्पाद (products) बनाते हैं।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) में
ऊर्जा उत्सर्जन (Exothermic) या अवशोषण (Endothermic) हो सकता है – Exothermic – ऊष्मा
उत्सर्जित होती है (जैसे – जलाना) , Endothermic – ऊष्मा अवशोषित होती है (जैसे – प्रकाश संश्लेषण –
photosynthesis) ।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) में
द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass) लागू होता है – अभिकारकों का कुल
द्रव्यमान = उत्पादों का कुल द्रव्यमान (परमाणु न तो उत्पन्न होते हैं, न नष्ट)। लैवोज़िए (Lavoisier) ने इस
नियम को प्रतिपादित किया।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) में रंग
परिवर्तन (colour change) देखा जा सकता है – उदाहरण – लोहे पर जंग लगने से भूरा रंग, ताँबे पर
हरा रंग (basic copper carbonate) , लिटमस (litmus) का लाल से नीला (क्षार के साथ)।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) में गैस
का उत्सर्जन (gas evolution) या अवक्षेपण (precipitation) हो सकता है – उदाहरण – Zn + HCl →
ZnCl₂ + H₂↑ (हाइड्रोजन गैस) , AgNO₃ + NaCl → AgCl↓ (सफेद अवक्षेप – white precipitate) ।
- मोमबत्ती का जलना (Burning of candle)
रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) है – मोम (हाइड्रोकार्बन – hydrocarbon) + O₂ → CO₂ +
H₂O + ऊष्मा + प्रकाश। मोम का पिघलना (melting) भौतिक परिवर्तन है, किंतु जलना रासायनिक परिवर्तन है।
- कागज का जलना (Burning of paper) रासायनिक
परिवर्तन (Chemical Change) है – कागज (सेल्यूलोज़) जलकर CO₂, जलवाष्प एवं राख में बदल जाता
है। यह अपरिवर्तनीय और ऊष्माक्षेपी (exothermic) प्रक्रिया है।
- अम्ल (Acid) और क्षार (Base) का संनादन
(Neutralization) रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) है – Acid + Base →
Salt + Water (H⁺ + OH⁻ → H₂O) । उदाहरण – HCl + NaOH → NaCl + H₂O। यह एक ऊष्माक्षेपी (exothermic)
अभिक्रिया है।
- भोजन का पचना (Digestion of food) रासायनिक
परिवर्तन (Chemical Change) है – एंजाइम (enzymes) भोजन के बड़े अणुओं (कार्बोहाइड्रेट,
प्रोटीन, वसा) को छोटे अणुओं (ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, फैटी अम्ल) में तोड़ते हैं। यह जटिल रासायनिक प्रक्रिया
है।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) में
रासायनिक संरचना (chemical composition) बदलती है – अणुओं की परमाणु व्यवस्था बदल जाती है।
उदाहरण – 2H₂ + O₂ → 2H₂O (हाइड्रोजन और ऑक्सीजन → पानी – बिल्कुल नया गुण)।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) में
ऊर्जा परिवर्तन (energy change) स्पष्ट रूप से दिखाई देता है – ऊष्मा (heat) , प्रकाश
(light) , ध्वनि (sound) , गैस (gas) आदि के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित या अवशोषित हो सकती है।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) में
द्रव्यमान एवं ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं – द्रव्यमान संरक्षण एवं ऊर्जा संरक्षण
(प्रथम ऊष्मागतिकी नियम – First Law of Thermodynamics) दोनों नियम लागू होते हैं। नाभिकीय अभिक्रियाओं में
(E=mc²) द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता के अनुसार संरक्षण होता है।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) में नए
यौगिक (new compound) का निर्माण होता है – अभिकारकों के परमाणु पुनर्व्यवस्थित होकर नए पदार्थ
(जिनके भिन्न रासायनिक गुण हों) बनाते हैं।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) में गंध
भी बदल सकती है (change in odour) – उदाहरण – अंडे का सड़ना (दुर्गंध – bad smell), दूध का
खट्टा होना (खट्टी गंध – sour smell) ।
- दूध का खट्टा होना (Souring of milk) रासायनिक
परिवर्तन (Chemical Change) है – दूध में उपस्थित लैक्टोज (lactose) जीवाणुओं द्वारा लैक्टिक
अम्ल (lactic acid – C₃H₆O₃) में परिवर्तित हो जाता है, जिससे दूध खट्टा हो जाता है (pH घटता है)। यह
अपरिवर्तनीय है।
- विलयन (Solution) एक समांगी मिश्रण
(homogeneous mixture) है – इसमें अवयव (components) सूक्ष्म स्तर पर एकसमान रूप से वितरित
होते हैं। उदाहरण – नमक का पानी, चीनी का पानी, हवा (गैसीय विलयन)।
- विलयन (Solution) में विलेय (solute) और
विलायक (solvent) होते हैं – विलेय वह पदार्थ है जो घुलता है, विलायक वह पदार्थ है जिसमें
विलेय घुलता है। जल (water) को "सार्वत्रिक विलायक" (universal solvent) कहते हैं।
- विलयन (Solution) में कणों (particles) का
आकार 1 nm (नैनोमीटर) से कम होता है – 1 nm = 10⁻⁹ मीटर। इतने छोटे कण नंगी आँखों से नहीं देखे
जा सकते, और न ही माइक्रोस्कोप से।
- विलयन (Solution) में कण एकसमान वितरित
(uniformly distributed) होते हैं – विलयन के प्रत्येक भाग में विलेय की मात्रा समान होती है
(यदि विलयन समांगी है)।
- संतृप्त विलयन (Saturated Solution) में और
विलेय (more solute) नहीं घुलता – किसी निश्चित तापमान पर विलयन उस विलेय की अधिकतम मात्रा घोल
चुका होता है। अतिरिक्त विलेय अघुलित रहता है।
- असंतृप्त विलयन (Unsaturated Solution) में और
विलेय (more solute) घुल सकता है – यह संतृप्तता सीमा से कम विलेय घोलता है। इसमें और अधिक
विलेय मिलाया जा सकता है जो घुल जाएगा।
- अति-संतृप्त विलयन (Supersaturated Solution)
अस्थिर (unstable) होता है – इसमें सामान्य परिस्थिति में घुलनशीलता से अधिक विलेय घुला
होता है (प्रायः गर्म करके बनाया जाता है, फिर धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है)। थोड़ी-सी हलचल से अतिरिक्त
विलेय क्रिस्टल (crystal) बनाकर अवक्षेपित (precipitate) हो जाता है।
- विलयन (Solution) का क्वथनांक (Boiling Point) विलेय (solute)
की मात्रा पर निर्भर करता है – जितना अधिक विलेय घुलेगा, क्वथनांक उतना ही बढ़ेगा (क्वथनांक
उन्नयन – boiling point elevation)। यह अणुसंख्य गुणधर्म (colligative property) है।
- विलयन (Solution) का हिमांक (Freezing Point) विलायक (solvent)
से कम होता है – विलेय मिलाने पर हिमांक घट जाता है (हिमांक अवनमन – freezing point
depression)। यही कारण है कि सड़कों पर बर्फ पिघलाने के लिए नमक छिड़का जाता है।
- विलयन (Solution) का रंग (colour) विलेय (solute) पर निर्भर
करता है – CuSO₄ (कॉपर सल्फेट) का विलयन नीला, KMnO₄ (पोटेशियम परमैंगनेट) का बैंगनी, FeSO₄
(फेरस सल्फेट) का हल्का हरा, NiCl₂ का हरा आदि।
- इलेक्ट्रोलाइट विलयन (Electrolyte Solution)
विद्युत का संचालन (conductor) करते हैं – ये वे विलयन हैं जिनमें आयन (ions) होते हैं।
उदाहरण – NaCl विलयन, HCl विलयन, H₂SO₄ विलयन। ये प्रबल (strong) या दुर्बल (weak) इलेक्ट्रोलाइट हो सकते
हैं।
- गैर-इलेक्ट्रोलाइट विलयन (Non-electrolyte Solution)
विद्युत के अचालक (non-conductor) होते हैं – ये वे विलयन हैं जिनमें अणु (molecules) होते
हैं, आयन नहीं। उदाहरण – चीनी का विलयन (C₁₂H₂₂O₁₁) , यूरिया का विलयन।
- विलयन (Solution) में विलेय (solute) का घुलना तापमान
(temperature) पर निर्भर करता है – प्रायः ठोस विलेयों की घुलनशीलता (solubility) तापमान
बढ़ने पर बढ़ती है (अपवाद – Ca(OH)₂) , जबकि गैसों की घुलनशीलता तापमान बढ़ने पर घटती है।
- विलयन का आसवन (Distillation) एक भौतिक
प्रक्रिया (physical process) है – विभिन्न क्वथनांक वाले द्रवों को अलग करने के लिए आसवन का
उपयोग किया जाता है। उदाहरण – पेट्रोलियम का प्रभाजी आसवन (fractional distillation)।
- विलयन (Solution) में मोलरता (Molarity – M) ताप
(temperature) पर निर्भर करती है – Molarity = विलेय के मोल / विलयन का आयतन (लीटर में)।
आयतन ताप पर निर्भर करता है (प्रसार – expansion) , अतः Molarity ताप के साथ बदलती है।
- विलयन (Solution) में मोललता (Molality – m) ताप
(temperature) पर निर्भर नहीं करती – Molality = विलेय के मोल / विलायक का द्रव्यमान (kg
में) । द्रव्यमान ताप पर प्रभावित नहीं होता, अतः Molality ताप-स्वतंत्र (temperature-independent) है।
- विलयन (Solution) की सान्द्रता (concentration) मोल अंश
(mole fraction) में व्यक्त की जा सकती है – मोल अंश = किसी घटक के मोल / कुल मोल। यह भी
ताप-स्वतंत्र है।
- विलयन का निर्माण (Formation of Solution) एक
भौतिक प्रक्रिया (physical process) है – इसमें घटकों के बीच कोई रासायनिक अभिक्रिया नहीं
होती (हालाँकि कभी-कभी H-बंधन या सॉल्वेशन – solvation होता है)। इसे भौतिक परिवर्तन माना जाता है।
- विलयन (Solution) का घनत्व (density) विलेय (solute) की मात्रा
पर निर्भर करता है – अधिक विलेय घोलने पर विलयन का घनत्व बढ़ता है (जब तक विलेय का घनत्व
विलायक से अधिक हो)। उदाहरण – समुद्री जल (saline water) का घनत्व शुद्ध जल से अधिक होता है।
- पानी (Water) में शराब (Alcohol) का मिश्रण एक
समांगी विलयन (homogeneous solution) है – दोनों द्रव (liquid) पूर्णतः मिश्रणीय
(miscible) हैं। यह विलयन के उदाहरण में गिना जाता है (यद्यपि शराब का पानी के साथ संकुचन – contraction भी
होता है)।
- कोलॉइड (Colloid) में कणों (particles) का
आकार 1–1000 nm (नैनोमीटर) होता है – यह विलयन (1 nm से कम) और निलंबन (1000 nm से अधिक) के
मध्य का होता है। उदाहरण – दूध, धुआँ, कोहरा, पेंट, जैम।
- निलंबन (Suspension) में कणों (particles) का
आकार 1000 nm (> 1 µm) से बड़ा होता है – ये कण नंगी आँखों से देखे जा सकते हैं। उदाहरण –
मिट्टी का पानी में मिश्रण, चाक (chalk) का पानी में घोल, गाद (silt) ।
- कोलॉइड (Colloid) में कण टिण्डल प्रभाव (Tyndall
Effect) दिखाते हैं – जब प्रकाश की किरण कोलॉइड से गुजरती है, तो कण प्रकाश को
प्रकीर्णित (scatter) करते हैं, जिससे प्रकाश का पथ दिखाई देता है। टिण्डल प्रभाव का उपयोग कोलॉइड और विलयन
में अंतर करने में किया जाता है।
- विलयन (Solution) में कण टिण्डल प्रभाव (Tyndall
Effect) नहीं दिखाते – विलयन के कण इतने छोटे (1 nm से कम) होते हैं कि प्रकाश को
प्रकीर्णित नहीं कर पाते। अतः विलयन पारदर्शी (transparent) होता है।
- निलंबन (Suspension) में कण अवसादन (sedimentation)
करते हैं – निलंबन के बड़े कण गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे बैठ जाते हैं। इसे अवसादन
(sedimentation) कहते हैं। कोलॉइड के कण अवसादन नहीं करते (ब्राउनियन गति के कारण)।
- कोलॉइड (Colloid) में कण ब्राउनियन गति (Brownian
Motion) दिखाते हैं – कोलॉइडी कणों का माध्यम (dispersion medium) के अणुओं से
टकराने के कारण यादृच्छिक (random) गति करना। इस गति को रॉबर्ट ब्राउन (1827) ने खोजा था।
- कोलॉइड (Colloid) में कणों को छानने (filtration) से
अलग नहीं किया जा सकता – कोलॉइडी कण साधारण फिल्टर पेपर (filter paper) के छिद्रों (pores)
से निकल जाते हैं (कण आकार 1–1000 nm, फिल्टर पेपर के छिद्र ~2000 nm)। अल्ट्राफिल्ट्रेशन
(ultrafiltration) द्वारा अलग किया जा सकता है।
- निलंबन (Suspension) में कणों को छानने (filtration) से
अलग किया जा सकता है – निलंबन के कण (1000 nm से बड़े) साधारण फिल्टर पेपर द्वारा अलग किए
जा सकते हैं। उदाहरण – मिट्टी के पानी को छानने पर रेत/मिट्टी फिल्टर पर रुक जाती है।
- दूध (Milk) एक कोलॉइड (Colloid) है –
यह एक एमल्शन (emulsion – द्रव में द्रव का कोलॉइड) है। इसमें वसा (fat) के छोटे-छोटे बूंदे पानी में बिखरे
होते हैं। इन बूंदों को एमल्सीफायर (emulsifier) स्थिर रखता है।
- मक्खन (Butter) एक कोलॉइड (Colloid)
है – यह एक जेल (gel – ठोस में द्रव का कोलॉइड) है। इसमें पानी के छोटे-छोटे बूंदे वसा में बिखरे होते हैं
(दूध के विपरीत प्रकार – water-in-oil emulsion)।
- कोहरा (Fog) एक कोलॉइड (Colloid) है
– यह एरोसोल (aerosol – गैस में द्रव के छोटे बूंदे) है। धुआँ (smoke) भी एरोसोल है (गैस में ठोस कण)।
- धूल (Dust) का पानी में मिश्रण निलंबन
(Suspension) है – धूल के कण (बड़े आकार) पानी में कुछ समय तक तैरते रहते हैं, किंतु अंततः
अवसादित हो जाते हैं।
- कोलॉइड (Colloid) के कण स्थिरता (stability) के लिए
विद्युत आवेश (electric charge) रखते हैं – सभी कोलॉइडी कण एक ही प्रकार के
आवेश (सभी धनात्मक या सभी ऋणात्मक) रखते हैं। परस्पर प्रतिकर्षण (repulsion) के कारण वे आपस में मिलकर
अवक्षेपित नहीं होते।
- निलंबन (Suspension) में कण नग्न आँखों (naked eyes) से
देखे जा सकते हैं – क्योंकि उनका आकार 1 µm (1000 nm) से अधिक होता है। उदाहरण – मिट्टी के
कण, रेत के कण, चाक के कण।
- कोलॉइड (Colloid) के कण निलंबन (suspension) के कणों से
छोटे (smaller) होते हैं – कोलॉइड (1–1000 nm) , निलंबन (>1000 nm) , विलयन (
<1 nm) । तुलनात्मक आकार क्रम: विलयन < कोलॉइड < निलंबन।
- निलंबन (Suspension) अस्थायी मिश्रण (temporary
mixture) होता है – समय के साथ यह अवसादित हो जाता है। विलयन (स्थायी) और कोलॉइड
(अपेक्षाकृत स्थायी) स्थायी होते हैं।
- कोलॉइड (Colloid) को हेट्रोजीनस मिश्रण (heterogeneous
mixture) माना जाता है – यद्यपि कोलॉइड नग्न आँखों से एकसमान दिखता है, किंतु सूक्ष्म
(microscopic) स्तर पर यह विषमांगी होता है (कण माध्यम में बिखरे होते हैं)।
- निलंबन (Suspension) का उदाहरण – मिट्टी का पानी में
घुलना (mud in water) – यह दूषित जल (turbid water) का उदाहरण है। इसे छानकर या
अवसादन द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है।
- कोलॉइड (Colloid) में कण प्रकाश का प्रकीर्णन
(scattering of light) करते हैं – यही टिण्डल प्रभाव का कारण है। इसी के कारण
आकाश नीला दिखता है, कोहरे में हेडलाइट दिखती है, और सूर्य की किरणें कमरे में दिखाई देती हैं (जब धूल के कण
हों)।
- जेल (Gel) कोलॉइड (Colloid) का उदाहरण
है – जेल में तरल (liquid) ठोस (solid) माध्यम में फैला होता है। उदाहरण –
जैम (jam), जेली (jelly) , मक्खन (butter) , सिलिका जेल (silica gel – desiccant) ।