अकार्बनिक रसायन
- सोडियम (Sodium – Na) का परमाणु क्रमांक
(Atomic Number) 11 है – यह एक क्षार धातु (alkali metal) है, अत्यधिक
अभिक्रियाशील। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,1 है। इसे मिट्टी के तेल (kerosene) में रखा जाता है।
- लिथियम (Lithium – Li) का परमाणु क्रमांक
(Atomic Number) 3 है – यह सबसे हल्की धातु (lightest metal) है। इसका उपयोग
रिचार्जेबल बैटरियों (Li-ion batteries) में होता है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,1 है।
- फॉस्फोरस (Phosphorus – P) का परमाणु क्रमांक
(Atomic Number) 15 है – यह एक अधातु (non-metal) है। यह तीन प्रकार के
अपररूपों (allotropes – सफेद, लाल, काला) में पाया जाता है। सफेद फॉस्फोरस अत्यधिक ज्वलनशील (highly
flammable) होता है।
- सल्फर (Sulphur – S) का परमाणु क्रमांक
(Atomic Number) 16 है – यह पीले रंग का, गंधहीन अधातु है। इसका उपयोग रबर
वल्कनीकरण (vulcanization of rubber) , कीटनाशक, सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) बनाने में होता है।
- क्लोरीन (Chlorine – Cl) एक हैलोजन
(Halogen) तत्व है – यह समूह 17 (आवर्त सारणी – Periodic Table) का सदस्य है। अन्य हैलोजन हैं
– फ्लोरीन (F), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I), एस्टाटीन (At)। क्लोरीन का उपयोग जल शुद्धिकरण (water
purification) और ब्लीचिंग पाउडर (bleaching powder) बनाने में होता है।
- सल्फ्यूरिक अम्ल (Sulphuric Acid) का रासायनिक
सूत्र (Chemical Formula) H₂SO₄ है – इसे "रसायनों का राजा" (King of
Chemicals) कहते हैं। इसका उपयोग उर्वरक (fertilizers – सुपरफॉस्फेट) , बैटरी (lead-acid batteries) ,
डिटर्जेंट, रंग, विस्फोटक एवं पेट्रोलियम शोधन में किया जाता है।
- नाइट्रिक अम्ल (Nitric Acid) का उपयोग
विस्फोटक (explosives) बनाने में होता है – इसका सूत्र HNO₃ है। इसका उपयोग TNT
(Trinitrotoluene) , नाइट्रोग्लिसरीन (nitroglycerin) , RDX (Research Department Explosive) आदि विस्फोटक
बनाने में होता है।
- नाइट्रिक अम्ल (Nitric Acid) का उपयोग TNT
(Trinitrotoluene) बनाने में होता है – TNT एक शक्तिशाली विस्फोटक है। TNT का सूत्र C₇H₅N₃O₆
है। इसका उपयोग सैन्य उद्योग एवं खनन में किया जाता है।
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Hydrochloric Acid – HCl) का
उपयोग पाचन (digestion) में होता है – मानव आमाशय (stomach) में HCL (0.5% से 0.9%
सांद्रता) भोजन के पाचन एवं जीवाणुओं को नष्ट करने में सहायता करता है। इसका pH मान लगभग 1.5 से 3.5 होता
है।
- अमोनिया (Ammonia) का रासायनिक सूत्र
(Chemical Formula) NH₃ है – यह एक रंगहीन गैस है जिसमें तीखी गंध होती है।
इसका उपयोग उर्वरक (यूरिया – urea) , विस्फोटक, क्लीनर एवं रेफ्रिजरेंट के रूप में होता है। हैबर प्रक्रिया
(Haber process) द्वारा NH₃ बनाया जाता है।
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड (Sodium Hydroxide – NaOH) का
उपयोग साबुन (soap) बनाने में होता है – इसे "कास्टिक सोडा" (Caustic Soda) भी कहते हैं।
इसका उपयोग कागज (paper) , रेयान (rayon) , डिटर्जेंट, एल्युमीनियम शोधन एवं सफाई एजेंट के रूप में होता है।
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) का उपयोग कागज
उद्योग (paper industry) में होता है – इसका उपयोग लकड़ी से सेल्यूलोज (cellulose) को अलग करने
(kraft process) और कागज को ब्लीच करने में किया जाता है।
- कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (Calcium Hydroxide – Ca(OH)₂)
को चूने का पानी (lime water) कहते हैं – इसका उपयोग CO₂ गैस के परीक्षण (milky colour
formation) , सफेदी (whitewashing) , चिनाई (mortar) तथा जल शुद्धिकरण में pH सुधार के लिए किया जाता है।
- कैल्सियम ऑक्साइड (Calcium Oxide – CaO) को
बुझा चूना (quick lime) कहते हैं – यह चूना पत्थर (limestone – CaCO₃) को गर्म करने पर
बनता है। पानी मिलाने पर यह तीव्र ऊष्मा उत्सर्जित करता है और कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड बनाता है।
- कैल्सियम ऑक्साइड (CaO) का उपयोग निर्माण
(construction) में होता है – इसका उपयोग मोर्टार (mortar) , सीमेंट (cement) , प्लास्टर
(plaster) , ईंटें बनाने एवं कृषि में मिट्टी का pH सुधारने के लिए किया जाता है।
- पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (Potassium Hydroxide – KOH)
का उपयोग बैटरी (battery) में होता है – इसे "कास्टिक पोटाश" (Caustic Potash) कहते हैं।
इसका उपयोग क्षारीय बैटरियों (alkaline batteries) , साबुन, डिटर्जेंट एवं उर्वरकों में होता है।
- क्लोरीन (Chlorine) का उपयोग जल शुद्धिकरण
(water purification) में होता है – यह पानी में उपस्थित बैक्टीरिया, वायरस एवं सूक्ष्मजीवों
को नष्ट करता है। इसका उपयोग ब्लीचिंग पाउडर बनाने में भी किया जाता है।
- सोडियम हाइपोक्लोराइट (Sodium Hypochlorite – NaOCl)
का उपयोग ब्लीच (bleach) में होता है – यह एक शक्तिशाली ऑक्सीकरण एजेंट है। इसका उपयोग
कपड़ों को ब्लीच करने, सफाई एजेंट, जीवाणुनाशक (disinfectant) एवं जल शुद्धिकरण में किया जाता है।
- कैल्सियम हाइपोक्लोराइट (Calcium Hypochlorite –
Ca(OCl)₂) का उपयोग ब्लीचिंग पाउडर (bleaching powder) में होता है – इसे
"क्लोरीनयुक्त चूना" (chlorinated lime) भी कहते हैं। इसका उपयोग जल शुद्धिकरण, कपड़ा उद्योग, सफेदी और
जीवाणुनाशक के रूप में होता है।
- कैल्सियम कार्बोनेट (Calcium Carbonate – CaCO₃)
चूना पत्थर (limestone) का मुख्य घटक है – इसका उपयोग सीमेंट, चूना, काँच, आयरन एवं स्टील
उद्योग, निर्माण सामग्री एवं कृषि में (मिट्टी का pH सुधार) किया जाता है। संगमरमर (marble) और चॉक (chalk)
भी CaCO₃ ही हैं।
- कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO₃) का उपयोग सीमेंट
(cement) में होता है – सीमेंट बनाने के लिए चूना पत्थर (CaCO₃) को मिट्टी (clay) के साथ
मिलाकर भट्टी (kiln) में पकाया जाता है। इससे क्लिंकर (clinker) बनता है, जिसे पीसकर सीमेंट बनाया जाता है।
- सोडियम कार्बोनेट (Sodium Carbonate – Na₂CO₃) को
वाशिंग सोडा (Washing Soda) कहते हैं – इसका उपयोग डिटर्जेंट, काँच, कागज, साबुन, वस्त्र
एवं जल मृदुकरण (water softening) में किया जाता है। इसका दशा जलयोजित (decahydrate – Na₂CO₃·10H₂O) होता
है।
- सोडियम बाइकार्बोनेट (Sodium Bicarbonate – NaHCO₃) को
बेकिंग सोडा (Baking Soda) कहते हैं – इसका उपयोग बेकिंग (रोटी, केक फूलाने) , अग्निशामक
(fire extinguisher) , एंटासिड (antacid) , सफाई एजेंट एवं कपड़ा उद्योग में होता है। गर्म करने पर यह CO₂
गैस छोड़ता है।
- सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃) का उपयोग
अग्निशामक (fire extinguisher) में होता है – यह गर्म करने पर CO₂ उत्सर्जित करता है, जो
आग पर ऑक्सीजन की परत को रोकता है। इसका उपयोग सोडा-एसिड अग्निशामक (soda-acid extinguisher) में किया जाता
है।
- पोटैशियम कार्बोनेट (Potassium Carbonate – K₂CO₃) का
उपयोग काँच बनाने (glass making) में होता है – इसे "पोटाश" (Potash) भी कहते हैं। इसका
उपयोग साबुन, काँच, सिरेमिक, डिटर्जेंट एवं उर्वरकों में होता है।
- पोटैशियम कार्बोनेट (K₂CO₃) का उपयोग साबुन
(soap) में होता है – यह एक क्षारीय यौगिक है जो वसा के साथ अभिक्रिया करके साबुन बनाता है
(saponification)। इसका उपयोग मुलायम साबुन (liquid soaps) में होता है।
- कैल्सियम सल्फेट (Calcium Sulphate – CaSO₄·½H₂O) को
प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris – POP) कहते हैं – यह जिप्सम (gypsum – CaSO₄·2H₂O)
को 373K पर गर्म करने से बनता है। पानी मिलाने पर यह जलयोजित (hydrated) होकर जम जाता है, इसका उपयोग
प्लास्टर, मूर्तियाँ एवं फ्रैक्चर में कास्ट बनाने में होता है।
- कैल्सियम सल्फेट (CaSO₄·2H₂O) को जिप्सम
(Gypsum) कहते हैं – इसका उपयोग प्लास्टर ऑफ पेरिस, सीमेंट (सेटिंग समय नियंत्रित करने के लिए)
, उर्वरक, चॉक एवं निर्माण में होता है।
- सोडियम क्लोराइड (Sodium Chloride – NaCl) नमक
(Salt) का रासायनिक नाम है – यह एक आयनिक यौगिक है। इसका उपयोग भोजन में स्वाद, खाद्य संरक्षण
(pickling) , रासायनिक उद्योग, सड़कों पर बर्फ पिघलाने (de-icing) एवं सोडियम एवं क्लोरीन के उत्पादन में
होता है।
- कैल्सियम क्लोराइड (Calcium Chloride – CaCl₂) का
उपयोग नमी अवशोषक (moisture absorber) में होता है – यह जल-अपघर्षी (hygroscopic) है। इसका
उपयोग डेसीकैंट (desiccant – सिलिका जेल की तरह) , सड़कों पर बर्फ पिघलाने, कंक्रीट के सेटिंग समय बढ़ाने
एवं खाद्य उद्योग में किया जाता है।
- कैल्सियम क्लोराइड (CaCl₂) का उपयोग सड़क
डी-आइसिंग (road de-icing) में होता है – यह बर्फ (ice) का हिमांक (freezing point) कम कर देता
है, जिससे बर्फ पिघलती है। इसका उपयोग ठंडे देशों में सड़कों पर दुर्घटनाएँ रोकने के लिए किया जाता है।
- पोटैशियम क्लोरेट (Potassium Chlorate – KClO₃) का
उपयोग माचिस (matches) में होता है – यह एक ऑक्सीकरण एजेंट है। इसका उपयोग आतिशबाजी
(fireworks) , विस्फोटक, माचिस की तीली (matchstick head) एवं ऑक्सीजन उत्पादन में होता है।
- सोडियम क्लोरेट (Sodium Chlorate – NaClO₃) का उपयोग
कीटाणुनाशक (disinfectant) में होता है – यह हर्बिसाइड (herbicide – खरपतवार नाशक) एवं
ब्लीचिंग एजेंट के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। कागज उद्योग में इसका उपयोग क्लोरीन डाइऑक्साइड (ClO₂)
बनाने में होता है।
- पोटैशियम परक्लोरेट (Potassium Perchlorate – KClO₄)
का उपयोग आतिशबाजी (fireworks) में होता है – यह एक मजबूत ऑक्सीकरण एजेंट है। इसका उपयोग
रॉकेट प्रणोदक (rocket propellant) , आतिशबाजी, विस्फोटक एवं फ्लेयर (flare) में किया जाता है।
- पोटैशियम सल्फेट (Potassium Sulfate – K₂SO₄) का उपयोग
उर्वरक (fertilizer) में होता है – यह पोटाश उर्वरक का एक रूप है, जो पौधों को पोटैशियम
(K) एवं सल्फर (S) प्रदान करता है। इसका उपयोग रासायनिक उद्योग में भी किया जाता है।
- पोटैशियम सल्फेट (K₂SO₄) का उपयोग रासायनिक
उद्योग (chemical industry) में होता है – यह एक मध्यम उर्वरक (potassium fertilizer) एवं
काँच, साबुन, एल्युमीनियम सल्फेट बनाने के लिए उपयोगी है।
- सोडियम सल्फेट (Sodium Sulfate – Na₂SO₄) का उपयोग
डिटर्जेंट (detergent) में होता है – इसका उपयोग डिटर्जेंट पाउडर में फिलर (filler) या
बल्किंग एजेंट के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग काँच एवं कागज उद्योग में भी होता है।
- सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) का उपयोग काँच उद्योग
(glass industry) में होता है – यह काँच बनाने में सोडा (Na₂CO₃) के साथ उपयोग किया जाता है।
इसके डीकाहाइड्रेट रूप (Na₂SO₄·10H₂O) को "ग्लौबर नमक" (Glauber's salt) कहते हैं।
- कॉपर सल्फेट (Copper Sulfate – CuSO₄) का रंग
नीला (blue) होता है – यह पेंटाहाइड्रेट रूप (CuSO₄·5H₂O) में नीला और निर्जल (anhydrous)
रूप में सफेद होता है। इसका उपयोग कृषि में कवकनाशी (fungicide) , जल में अल्गीसाइड, रंगाई में मॉर्डेंट के
रूप में होता है।
- फेरस सल्फेट (Ferrous Sulfate – FeSO₄) का रंग
हरा (green) होता है – इसका उपयोग कृषि में आयरन सप्लीमेंट (पौधों में क्लोरोसिस ठीक करने)
, स्याही (ink) , रंगाई, जल उपचार एवं दवा के रूप में होता है। यह हीप्टाहाइड्रेट (FeSO₄·7H₂O) रूप में हरा
होता है।
- जिंक सल्फेट (Zinc Sulfate – ZnSO₄) का उपयोग
कृषि (agriculture) में होता है – यह जिंक उर्वरक (zinc fertilizer) के रूप में प्रयोग
किया जाता है। इसका उपयोग रंग उद्योग, चिकित्सा (zinc supplement) , जल उपचार एवं रासायनिक संश्लेषण में भी
होता है।
- जिंक सल्फेट (ZnSO₄) का उपयोग रंग उद्योग
(paint industry) में होता है – इसका उपयोग वर्णक (pigment – lithopone) , कागज ब्लीचिंग एवं
चिकित्सा में कसैले (astringent) के रूप में किया जाता है।
- जिंक सल्फेट (ZnSO₄) का उपयोग चिकित्सा
(medicine) में होता है – यह जिंक की कमी (zinc deficiency) को दूर करने के लिए सप्लीमेंट के
रूप में दिया जाता है। इसका उपयोग आँखों की बूँदों (eye drops) , मरहम (ointment) एवं कसैले (astringent) के
रूप में भी होता है।
- मैग्नीशियम सल्फेट (Magnesium Sulfate – MgSO₄) को
एप्सम नमक (Epsom salt) कहते हैं – इसका उपयोग चिकित्सा में (रेचक – laxative) , स्नान नमक
(bath salt) , कृषि में मैग्नीशियम उर्वरक, कागज उद्योग एवं रंगाई में किया जाता है।
- मैग्नीशियम सल्फेट (MgSO₄) का उपयोग औषधि
(medicine) में होता है – इसका उपयोग कब्ज (constipation) दूर करने (रेचक – laxative) ,
एक्लम्पसिया (eclampsia) और मैग्नीशियम की कमी पूरक के रूप में किया जाता है।
- मैग्नीशियम सल्फेट (MgSO₄) का उपयोग उर्वरक
(fertilizer) में होता है – यह पौधों के लिए सल्फर एवं मैग्नीशियम (प्रकाश संश्लेषण –
photosynthesis के लिए आवश्यक) का स्रोत है। इसका उपयोग कृषि एवं बागवानी में होता है।
- मैग्नीशियम सल्फेट (MgSO₄) का उपयोग
जिम्नास्टिक चाक (gymnastics chalk) में होता है – यह हाथों को सुखाने और पकड़ बढ़ाने के
लिए उपयोग किया जाता है। इसका नाम "एप्समाइट" (epsomite) भी है।
- पोटैशियम नाइट्रेट (Potassium Nitrate – KNO₃) का
उपयोग बारूद (gunpowder) में होता है – इसे "सॉल्टपीटर" (saltpeter) भी कहते हैं। यह बारूद
का एक मुख्य घटक (75% KNO₃, 15% charcoal, 10% sulphur) है। इसका उपयोग उर्वरक, आतिशबाजी एवं खाद्य संरक्षण
(preservative – E252) में भी होता है।
- पोटैशियम नाइट्रेट (KNO₃) का उपयोग आतिशबाजी
(fireworks) में होता है – यह आतिशबाजी में ऑक्सीकरण एजेंट (oxidizer) का कार्य करता है। यह
रॉकेट प्रणोदक एवं फ्लेयर (flare) में भी प्रयुक्त होता है।
- पोटैशियम नाइट्रेट (KNO₃) का उपयोग उर्वरक
(fertilizer) में होता है – यह पौधों को नाइट्रोजन एवं पोटैशियम प्रदान करता है। इसका उपयोग
हाइड्रोपोनिक्स एवं गन्ने (sugarcane) की फसल में अधिक होता है।
- सोडियम नाइट्रेट (Sodium Nitrate – NaNO₃) का उपयोग
विस्फोटक (explosive) में होता है – इसे "चिली सॉल्टपीटर" कहते हैं। यह उर्वरक, काँच
उद्योग, खाद्य संरक्षण एवं विस्फोटक बनाने में उपयोग किया जाता है।
- पोटैशियम नाइट्राइट (Potassium Nitrite – KNO₂) का
उपयोग खाद्य संरक्षण (food preservation) में होता है – यह मांस उत्पादों (सॉसेज, बेकन)
में प्रिजर्वेटिव एवं रंग स्थिरक (colour fixative) के रूप में उपयोग किया जाता है (E249)।
- मैग्नीशियम नाइट्रेट (Magnesium Nitrate – Mg(NO₃)₂)
का उपयोग आतिशबाजी (fireworks) में होता है – यह ऑक्सीकरण एजेंट के रूप में कार्य करता है
और सफेद रंग उत्पन्न करता है। इसका उपयोग सिरेमिक, उर्वरक एवं रासायनिक संश्लेषण में भी होता है।
- कैल्सियम नाइट्रेट (Calcium Nitrate – Ca(NO₃)₂) का
उपयोग उर्वरक (fertilizer) में होता है – यह पौधों को कैल्सियम और नाइट्रोजन प्रदान करता
है। इसका उपयोग अपशिष्ट जल उपचार (wastewater treatment) , कंक्रीट योज्य (concrete additive) एवं रासायनिक
संश्लेषण में भी होता है।
- जिंक नाइट्रेट (Zinc Nitrate – Zn(NO₃)₂) का उपयोग
आतिशबाजी (fireworks) में होता है – यह ऑक्सीकरण एजेंट है। इसका उपयोग रासायनिक संश्लेषण,
कपड़ा उद्योग, रंगाई एवं उत्प्रेरक (catalyst) के रूप में होता है।
- आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide – Fe₂O₃) जंग
(rust) का कारण है – जंग लोहे की नमी एवं ऑक्सीजन के संपर्क में आने से बनता है (Fe₂O₃·xH₂O –
hydrated iron(III) oxide)। यह लोहे के क्षरण (corrosion) को तीव्र करता है।
- जिंक ऑक्साइड (Zinc Oxide – ZnO) का उपयोग
सनस्क्रीन (sunscreen) में होता है – यह UV-A और UV-B किरणों को अवशोषित/प्रतिबिंबित करता
है। इसका उपयोग रबर उद्योग, सिरेमिक, पेंट, प्लास्टिक, मरहम (zinc ointment) एवं डायपर रैश क्रीम में होता
है।
- जिंक ऑक्साइड (ZnO) का उपयोग रबर उद्योग
(rubber industry) में होता है – यह रबर को अधिक मजबूती प्रदान करता है एवं वल्कनीकरण
(vulcanization) प्रक्रिया में उत्प्रेरक (activator) के रूप में कार्य करता है। इसका उपयोग टायर, कन्वेयर
बेल्ट एवं जूते बनाने में होता है।
- जिंक ऑक्साइड (ZnO) का उपयोग सिरेमिक
(ceramic) में होता है – यह सिरेमिक ग्लेज़ (glaze) , एनामेल (enamel) एवं काँच में अपारदर्शी
(opacifier) के रूप में उपयोग किया जाता है।
- जिंक ऑक्साइड (ZnO) का उपयोग पेंट
(paint) में होता है – यह सफेद वर्णक (white pigment – चीनी सफेद – Chinese white) के रूप में
कार्य करता है। यह कवकनाशी (fungicide) और जीवाणुरोधी (antibacterial) गुण भी रखता है।
- कॉपर ऑक्साइड (Copper Oxide – CuO) का रंग
काला (black) होता है – यह कॉपर का ऑक्साइड है। इसका उपयोग क्वांटम डॉट्स, पिगमेंट, बैटरी,
उत्प्रेरक (catalyst) एवं सिरेमिक में होता है। Cu₂O (क्यूप्रस ऑक्साइड) लाल रंग का होता है।
- मैग्नीशियम ऑक्साइड (Magnesium Oxide – MgO) का उपयोग
रिफ्रैक्टरी (refractory) में होता है – इसका गलनांक बहुत उच्च (2852°C) होता है। इसका
उपयोग भट्टियों (furnaces) की अस्तर (lining) , सीमेंट, उर्वरक एवं चिकित्सा (एंटासिड) में किया जाता है।
- मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) का उपयोग सीमेंट
(cement) में होता है – यह मैग्नीशियम सीमेंट (magnesia cement) बनाने में उपयोग किया जाता है।
इसका उपयोग पोर्टलैंड सीमेंट में एक योज्य (additive) के रूप में भी किया जाता है।
- मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (Magnesium Hydroxide –
Mg(OH)₂) का उपयोग एंटासिड (antacid) में होता है – यह अम्लता कम करता है।
दूध (milk of magnesia) के रूप में यह कब्ज के लिए रेचक (laxative) और अम्लता के लिए एंटासिड है।
- सिलिकॉन डाइऑक्साइड (Silicon Dioxide – SiO₂)
रेत (sand) का मुख्य घटक है – इसका उपयोग काँच (glass) , सिरेमिक, कंक्रीट, सीमेंट,
सिलिकॉन चिप (semiconductor) , अपघर्षक (abrasive) एवं ऑप्टिकल फाइबर में होता है। क्वार्ट्ज (quartz) भी
SiO₂ का रूप है।
- सिलिकॉन ऑक्साइड (SiO₂) का उपयोग काँच
(glass) में होता है – सोडा-लाइम ग्लास (soda-lime glass) में SiO₂ (70%) , Na₂CO₃ और CaO होता
है। बोरोसिलिकेट ग्लास (Pyrex) में B₂O₃ भी होता है।
- सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO₂) का उपयोग सिरेमिक
(ceramic) में होता है – यह सिरेमिक उत्पादों (टाइल्स, बर्तन) का मुख्य घटक है। इसका उपयोग
उच्च तापमान वाले अनुप्रयोगों में होता है।
- कैल्सियम फॉस्फेट (Calcium Phosphate – Ca₃(PO₄)₂)
हड्डियों (bones) का मुख्य घटक है – मानव हड्डियों का लगभग 70% (हाइड्रॉक्सीपैटाइट –
Ca₁₀(PO₄)₆(OH)₂) के रूप में होता है। इसका उपयोग उर्वरक, चिकित्सा एवं भोजन योज्य में होता है।
- कैल्सियम कार्बाइड (Calcium Carbide – CaC₂) का उपयोग
एसिटिलीन गैस (Acetylene – C₂H₂) में होता है – पानी के साथ अभिक्रिया करके यह एसिटिलीन
गैस छोड़ता है, जिसका उपयोग ऑक्सी-एसिटिलीन टॉर्च (वेल्डिंग) एवं रासायनिक संश्लेषण में होता है।
- कैल्सियम सिलिकेट (Calcium Silicate – CaSiO₃) का
उपयोग सीमेंट (cement) में होता है – यह पोर्टलैंड सीमेंट (Portland cement) का एक मुख्य
घटक (alite – Ca₃SiO₅ एवं belite – Ca₂SiO₄) है। इसका उपयोग उच्च तापमान इन्सुलेशन में भी होता है।
- कैल्सियम फ्लोराइड (Calcium Fluoride – CaF₂) का उपयोग
ऑप्टिक्स (optics) में होता है – इसे "फ्लोराइट" (fluorite) कहते हैं। इसका उपयोग लेंस,
प्रिज्म एवं टेलिस्कोप में करने से क्रोमेटिक एबरेशन (chromatic aberration) कम होता है।
- कैल्सियम सल्फाइड (Calcium Sulfide – CaS) का उपयोग
चमकदार पेंट (glow-in-dark paint) में होता है – यह फॉस्फोरेसेंट (phosphorescent) पदार्थ
है। इसका उपयोग सड़कों पर रात्रि मार्कर, घड़ी डायल एवं खिलौनों में होता है।
- नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (Nitrogen Dioxide – NO₂)
वायु प्रदूषक (air pollutant) है – यह भूरे रंग की गैस है, जो धुंध (smog) एवं अम्लीय
वर्षा (acid rain) का कारण बनती है। यह वाहनों एवं उद्योगों से उत्सर्जित होती है।
- सल्फर डाइऑक्साइड (Sulfur Dioxide – SO₂) का उपयोग
ब्लीचिंग (bleaching) में होता है – इसका उपयोग कपड़ा, कागज, गन्ने की चीनी आदि को ब्लीच
करने (सफेद करने) में किया जाता है। यह खाद्य संरक्षक (preservative – E220) भी है।
- सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) का उपयोग खाद्य
संरक्षण (food preservation) में होता है – यह जीवाणुओं की वृद्धि को रोकता है। इसका उपयोग
सूखे मेवे (dried fruits) , जूस, वाइन एवं जैम में किया जाता है।
- सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) का उपयोग रेफ्रिजरेंट
(refrigerant) में होता है – आजकल यह कम प्रयुक्त होता है (अधिक उपयोग क्लोरोफ्लोरोकार्बन –
CFCs एवं HFCs का होता है)।
- सल्फर ट्राइऑक्साइड (Sulfur Trioxide – SO₃) का उपयोग
सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) बनाने में होता है – SO₃ पानी से अभिक्रिया करके H₂SO₄ बनाता है
(यह संपर्क प्रक्रिया – contact process का हिस्सा है)।
- सल्फर (Sulphur) का उपयोग रबर वल्कनीकरण
(rubber vulcanization) में होता है – यह रबर को अधिक मजबूत एवं प्रत्यास्थ (elastic) बनाता
है। इसकी खोज चार्ल्स गुडइयर (Charles Goodyear) ने 1839 में की थी।
- सल्फर (S) का उपयोग कीटनाशक
(pesticide) में होता है – सल्फर फफूंदनाशक (fungicide) के रूप में अंगूर, सेब, सब्जियों पर
उपयोग किया जाता है। यह जैविक खेती (organic farming) में स्वीकार्य है।
- नाइट्रिक ऑक्साइड (Nitric Oxide – NO) रंगहीन
गैस (colourless gas) है – यह वायुमंडल में मौजूद एक प्रदूषक (pollutant) है। यह वायु में
ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके NO₂ बनाता है।
- जिंक सल्फाइड (Zinc Sulfide – ZnS) का उपयोग
चमकदार पेंट (glow paint) में होता है – यह फॉस्फोर (phosphor) है, जो इलेक्ट्रॉन द्वारा
उत्तेजित होने पर प्रकाश उत्सर्जित करता है। इसका उपयोग कैथोड रे ट्यूब (CRT) , टीवी स्क्रीन एवं चमकदार
सामग्रियों में होता है।
- जिंक सल्फाइड (ZnS) का उपयोग टीवी स्क्रीन (TV
screen) में होता है – पुराने CRT टेलीविजन (कैथोड रे ट्यूब) में ZnS का उपयोग फॉस्फोर कोटिंग
के रूप में किया जाता था, जो इलेक्ट्रॉन बीम से टकराकर प्रकाश उत्पन्न करता था।
- आयरन सल्फाइड (Iron Sulfide – FeS) का उपयोग
बैटरी (battery) में होता है – इसका उपयोग लिथियम-आयरन-सल्फाइड बैटरियों (Li-FeS) में
कैथोड के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग रंगद्रव्य (pigment) एवं रासायनिक संश्लेषण में भी होता है।
- फॉस्फोरस सल्फाइड (Phosphorus Sulfide – P₄S₃) का
उपयोग माचिस (matches) में होता है – यह सुरक्षा माचिस (safety match) के तीली के सिरे
(strike anywhere matches) में उपयोग किया जाता है। यह अत्यधिक ज्वलनशील (flammable) होता है।
- पोटैशियम सल्फाइड (Potassium Sulfide – K₂S) का उपयोग
रासायनिक उद्योग (chemical industry) में होता है – यह एक सल्फाइड स्रोत है। इसका उपयोग
रंगाई, चमड़ा उद्योग एवं विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान में होता है।
- सोडियम सल्फाइड (Sodium Sulfide – Na₂S) का उपयोग
चमड़ा उद्योग (leather industry) में होता है – इसका उपयोग चमड़े से बाल हटाने (dehairing)
के लिए किया जाता है। इसका उपयोग रंगाई, कागज उद्योग एवं जल उपचार में भी होता है।
- सोडियम सल्फाइट (Sodium Sulfite – Na₂SO₃) का उपयोग
कागज उद्योग (paper industry) में होता है – इसका उपयोग कागज बनाने में लकड़ी से लिग्निन
(lignin) हटाने (sulfite process) एवं ब्लीचिंग में किया जाता है।
- सिल्वर सल्फाइड (Silver Sulfide – Ag₂S) का उपयोग
आभूषणों (jewelry) में होता है – यह चांदी पर होने वाला काला धब्बा (tarnish) है। इसका
उपयोग सेमीकंडक्टर एवं फोटोकंडक्टर में भी होता है।
- फॉस्फोरस पेंटाक्लोराइड (Phosphorus Pentachloride –
PCl₅) का सूत्र PCl₅ है – इसका उपयोग क्लोरीनीकरण (chlorination) एवं
जल-अपघर्षी (dehydrating agent) के रूप में रासायनिक संश्लेषण में होता है।
- फॉस्फोरस पेंटॉक्साइड (Phosphorus Pentoxide – P₂O₅)
का उपयोग नमी अवशोषक (moisture absorber) में होता है – यह एक शक्तिशाली डेसीकैंट
(desiccant) है, जो पानी के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करता है। इसका उपयोग फॉस्फोरिक अम्ल (H₃PO₄) बनाने में
भी होता है।
- फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड (Phosphorus Trichloride –
PCl₃) का उपयोग रासायनिक संश्लेषण (chemical synthesis) में होता है – यह
PCl₅, PSCl₃, फॉस्फाइट एस्टर (phosphite esters) एवं कीटनाशक (organophosphorus pesticides) बनाने में
उपयोगी है।
- फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड (PCl₃) का उपयोग
कीटनाशक (pesticide) में होता है – यह फॉस्फोरस युक्त कीटनाशकों (जैसे – डीडीटी का एक
विकल्प) के संश्लेषण में मध्यवर्ती (intermediate) है।
- फॉस्फोरस (Phosphorus) का उपयोग डिटर्जेंट
(detergent) में होता है – फॉस्फेट (जैसे – सोडियम ट्राइपॉलीफॉस्फेट – STPP) का उपयोग
डिटर्जेंट में जल मृदुकरण (water softening) एवं गंदगी हटाने के लिए किया जाता था (अब यूट्रोफिकेशन –
eutrophication के कारण कम किया जा रहा है)।
- सिलिकॉन कार्बाइड (Silicon Carbide – SiC) का उपयोग
अपघर्षक (abrasive) में होता है – इसे "कार्बोरंडम" (Carborundum) कहते हैं। यह हीरे के
बाद सबसे कठोर पदार्थों में से एक है। इसका उपयोग कटिंग टूल, सैंडपेपर, ग्राइंडिंग व्हील एवं सेमीकंडक्टर
में होता है।
- सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) का उपयोग कटिंग टूल
(cutting tool) में होता है – इसकी उच्च कठोरता के कारण इसका उपयोग औद्योगिक कटिंग, ड्रिलिंग
एवं पीसने (grinding) में किया जाता है।
- सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड (Silicon Tetrachloride –
SiCl₄) का उपयोग सेमीकंडक्टर (semiconductor) में होता है – इसका उपयोग शुद्ध
सिलिकॉन (सोलर सेल और चिप) के उत्पादन में मध्यवर्ती के रूप में किया जाता है।
- सिल्वर नाइट्रेट (Silver Nitrate – AgNO₃) का उपयोग
फोटोग्राफी (photography) में होता है – यह प्रकाश के प्रति संवेदनशील (photosensitive)
होता है। फोटोग्राफिक फिल्म में सिल्वर हैलाइड (AgBr/AgCl) का उपयोग होता है, जो AgNO₃ से बनते हैं।
- सिल्वर नाइट्रेट (AgNO₃) का उपयोग दर्पण बनाने
(mirror making) में होता है – टोलेंस अभिकर्मक (Tollens' reagent – [Ag(NH₃)₂]OH) एल्डिहाइड्स
(aldehydes) के साथ अभिक्रिया करके सिल्वर मिरर (silver mirror) बनाता है।
- सिल्वर नाइट्रेट (AgNO₃) का उपयोग चिकित्सा
(medicine) में होता है – इसका उपयोग मस्सा (warts) हटाने, कॉटराइजेशन (cauterization – ऊतकों
को जलाकर हटाना) और एंटीसेप्टिक के रूप में होता है।
- सिल्वर क्लोराइड (Silver Chloride – AgCl) का उपयोग
फोटोग्राफी (photography) में होता है – यह प्रकाश के संपर्क में आने पर काला (Ag metal)
हो जाता है। इसका उपयोग फोटो फिल्म एवं फोटोक्रोमिक लेंस (photochromic lenses) में होता है।
- सिल्वर क्लोराइड (AgCl) का उपयोग फोटो फिल्म
(photo film) में होता है – यह सिल्वर हैलाइड फोटोग्राफी का एक मुख्य घटक है। इसका उपयोग
फोटोग्राफिक पेपर एवं फिल्म की कोटिंग में किया जाता है।
- सिल्वर आयोडाइड (Silver Iodide – AgI) का उपयोग
बादल बीज बोने (cloud seeding) में होता है – यह बादलों में नमी के कणों को जमाकर कृत्रिम
वर्षा (artificial rain) उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
- जिंक ऑक्साइड (ZnO) का उपयोग सनस्क्रीन
(sunscreen) में होता है – यह UV किरणों को रोकता है। इसका उपयोग रबर उद्योग, सिरेमिक, पेंट,
मलहम (zinc ointment) एवं कॉस्मेटिक्स में किया जाता है। (पुनरावृत्ति से बचने के लिए एक बार नीचे दिया गया,
किंतु पहले भी है।)
- जिंक क्लोराइड (Zinc Chloride – ZnCl₂) का उपयोग
बैटरी (battery) में होता है – इसका उपयोग सूखी सेल (dry cell – लेक्लैंशे सेल) में
इलेक्ट्रोलाइट के रूप में किया जाता है। यह लकड़ी परिरक्षक (wood preservative) , उत्प्रेरक एवं सोल्डरिंग
फ्लक्स के रूप में भी उपयोग किया जाता है।
- जिंक कार्बोनेट (Zinc Carbonate – ZnCO₃) का उपयोग
औषधि (medicine) में होता है – इसका उपयोग जिंक सप्लीमेंट, मलहम, कॉस्मेटिक्स एवं रबर
उद्योग में होता है। प्राकृतिक रूप में यह "स्मिथ्सोनाइट" (smithsonite) खनिज के रूप में पाया जाता है।
- जिंक फॉस्फेट (Zinc Phosphate – Zn₃(PO₄)₂) का उपयोग
जंग रोधी कोटिंग (anti-corrosion coating) में होता है – इसका उपयोग प्राइमर पेंट (primer
paint) के रूप में स्टील की सतहों पर जंग रोकने के लिए किया जाता है।
- पोटैशियम परमैंगनेट (Potassium Permanganate – KMnO₄)
का उपयोग कीटाणुनाशक (disinfectant) में होता है – यह एक प्रबल ऑक्सीकरण एजेंट (strong
oxidizing agent) है। इसका उपयोग जल शुद्धिकरण, घावों को साफ करने, कवकनाशी (fungicide) और रासायनिक
संश्लेषण में होता है।
- पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄) का उपयोग ऑक्सीकरण
(oxidation) में होता है – इसका उपयोग कार्बनिक रसायन (organic chemistry) में अल्कोहल,
एल्कीन, एल्डिहाइड एवं अन्य यौगिकों के ऑक्सीकरण के लिए किया जाता है। यह स्वयं अपचयित होकर Mn²⁺ (गुलाबी →
रंगहीन) हो जाता है।
- पोटैशियम ब्रोमाइड (Potassium Bromide – KBr) का उपयोग
फोटोग्राफी (photography) में होता है – इसका उपयोग फोटोग्राफिक फिल्म में सिल्वर ब्रोमाइड
(AgBr) बनाने के लिए किया जाता है। यह प्रकाश के प्रति संवेदनशील होता है।
- पोटैशियम फ्लोराइड (Potassium Fluoride – KF) का उपयोग
काँच उद्योग (glass industry) में होता है – इसका उपयोग एचएफ (हाइड्रोफ्लोरिक अम्ल) को
संग्रहीत करने, काँच की एचिंग (glass etching) एवं फ्लक्स (flux) के रूप में होता है।
- मैग्नीशियम क्लोराइड (Magnesium Chloride – MgCl₂) का
उपयोग अग्निरोधी (flame retardant) में होता है – यह कागज, कपड़ा एवं लकड़ी को आग से बचाने
वाली कोटिंग में उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग धूल नियंत्रण (dust control) , डी-आइसिंग (de-icing) एवं
टोफू (tofu) बनाने में भी होता है।
- मैग्नीशियम क्लोराइड (MgCl₂) का उपयोग
रासायनिक संश्लेषण (chemical synthesis) में होता है – यह मैग्नीशियम धातु (electrolysis)
और अन्य मैग्नीशियम यौगिकों के उत्पादन में उपयोग किया जाता है।
- मैग्नीशियम कार्बोनेट (Magnesium Carbonate – MgCO₃)
का उपयोग जिम्नास्टिक चाक (gymnastics chalk) में होता है – यह हाथों को सूखा रखता है और
पकड़ बढ़ाता है। इसका उपयोग एथलीटों, क्लाइम्बिंग, वेटलिफ्टिंग में भी किया जाता है।
- मैग्नीशियम फ्लोराइड (Magnesium Fluoride – MgF₂) का
उपयोग ऑप्टिक्स (optics) में होता है – इसका उपयोग लेंस पर एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग
(anti-reflective coating) एवं प्रिज्म में होता है, क्योंकि यह UV किरणों को पारित करता है।
- मैग्नीशियम सल्फाइड (Magnesium Sulfide – MgS) का
उपयोग रासायनिक संश्लेषण (chemical synthesis) में होता है – यह एक सल्फाइड स्रोत है। इसका
उपयोग फॉस्फोर (phosphor) के रूप में भी होता है।
- नाइट्रोजन (Nitrogen – N₂) का उपयोग अमोनिया
संश्लेषण (ammonia synthesis) में होता है – हैबर प्रक्रिया (Haber process) में N₂ + 3H₂ ⇌
2NH₃ बनता है। अमोनिया से उर्वरक, विस्फोटक एवं रासायनिक उत्पाद बनते हैं।
- कॉपर सल्फाइड (Copper Sulfide – CuS) का उपयोग
खनन (mining) में होता है – यह कॉपर अयस्कों (chalcopyrite – CuFeS₂, chalcocite – Cu₂S,
covellite – CuS) का हिस्सा है। इसमें से तांबा (copper) निकाला जाता है।
- सोडियम बाइसल्फेट (Sodium Bisulfate – NaHSO₄) का
उपयोग खाद्य उद्योग (food industry) में होता है – इसका उपयोग pH कम करने वाले एजेंट
(acidulant) , क्लीनर एवं डिटर्जेंट योज्य के रूप में किया जाता है।
- कैल्सियम सिलिकेट (CaSiO₃) का उपयोग सीमेंट
(cement) में होता है – (ऊपर उल्लिखित) यह पोर्टलैंड सीमेंट का एक प्रमुख योज्य है।
- सोडियम सिलिकेट (Sodium Silicate – Na₂SiO₃) का उपयोग
डिटर्जेंट (detergent) में होता है – इसे "पानी का काँच" (water glass) भी कहते हैं। इसका
उपयोग कागज उद्योग, सीमेंट योज्य, एडहेसिव (adhesive) एवं आग प्रतिरोधी (fireproofing) में होता है।
- फॉस्फोरस (P) का उपयोग डिटर्जेंट
(detergent) में होता है – (ऊपर उल्लिखित) फॉस्फेट यूट्रोफिकेशन (algae bloom) का कारण बनते
हैं, अब फॉस्फेट-मुक्त (phosphate-free) डिटर्जेंट प्रचलन में हैं।
- जिंक कार्बोनेट (ZnCO₃) – ऊपर उल्लिखित है।