मिश्र धातुएँ और अधातुएँ
- मिश्र धातु (Alloy) धातु (metal) और अन्य तत्वों (elements) का समांगी मिश्रण है – मिश्र धातु बनाने का उद्देश्य कठोरता, जंग प्रतिरोधकता, तन्यता, चमक आदि गुणों में सुधार करना होता है। उदाहरण – पीतल (Brass) , स्टील (Steel) , स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel)।
- अधातु (Non-Metal) विद्युत का कुचालक (poor conductor of electricity) है – अपवाद – ग्रेफाइट (graphite – कार्बन का एक अपररूप) विद्युत का सुचालक है। सामान्यतः अधातुएँ भंगुर (brittle) , आघातवर्ध्य नहीं (non-ductile) , और चमकहीन (non-lustrous) होती हैं।
- कार्बन (Carbon – C) एक अधातु (non-metal) है – यह जीवन का आधार तत्व है। इसके प्रमुख अपररूप (allotropes) हैं – हीरा (diamond – सबसे कठोर पदार्थ) , ग्रेफाइट (graphite – सुचालक) , फुलरीन (fullerene – C₆₀) , ग्राफीन (graphene – अत्यंत मजबूत) , कोयला, लकड़ी का कोयला (charcoal) ।
- फॉस्फोरस (Phosphorus – P) एक अधातु (non-metal) है और हड्डियों (bones) तथा दाँतों (teeth) में पाया जाता है – यह मानव शरीर में कैल्सियम के साथ हाइड्रॉक्सीएपेटाइट [Ca₁₀(PO₄)₆(OH)₂] के रूप में पाया जाता है। फॉस्फोरस डीएनए, आरएनए और एटीपी का एक आवश्यक घटक है।
- नाइट्रोजन (Nitrogen – N₂) वायुमंडल (atmosphere) का 78% हिस्सा है – शेष 21% ऑक्सीजन, 0.93% आर्गन (Argon) , 0.04% कार्बन डाइऑक्साइड एवं अन्य गैसें। नाइट्रोजन अक्रियाशील (inert) होती है, अतः इसका उपयोग फूड पैकेजिंग में ऑक्सीडेशन रोकने के लिए किया जाता है।
- ब्रोमीन (Bromine – Br) एकमात्र द्रव अधातु (only liquid non-metal) है – यह कमरे के तापमान पर लाल-भूरे रंग का द्रव है। अत्यधिक विषैला और संक्षारक (corrosive) होता है। द्रव अवस्था में एकमात्र अन्य तत्व पारा (mercury – Hg) है, परंतु वह धातु है।
- सल्फर (Sulphur – S) का परमाणु क्रमांक (Atomic Number) 16 है – यह पीले रंग का, गंधहीन अधातु है। इसका उपयोग सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) , रबर वल्कनीकरण, कीटनाशक, बारूद, औषधियाँ, डाई, प्लास्टिक, माचिस, विस्फोटक एवं उर्वरकों में होता है।
- नाइट्रोजन (Nitrogen) का परमाणु क्रमांक (Atomic Number) 7 है – इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,5 है। यह एक अक्रियाशील (inert) गैस है, जो कमरे के तापमान पर अन्य तत्वों से आसानी से अभिक्रिया नहीं करती।
- क्लोरीन (Chlorine – Cl) का परमाणु क्रमांक (Atomic Number) 17 है – यह हैलोजन (halogen) समूह का सदस्य है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,7 है। क्लोरीन एक हरापन-पीली गैस है, जिसमें तीखी गंध होती है, और यह विषैली होती है।
- आयोडीन (Iodine – I) का परमाणु क्रमांक (Atomic Number) 53 है – यह हैलोजन समूह (Group 17) का सदस्य है। यह ठोस अवस्था में क्रिस्टलीय, चमकदार, बैंगनी-काला होता है। गर्म करने पर यह ऊर्ध्वपातित (sublimes) होता है।
- ब्रोमीन (Bromine – Br) का परमाणु क्रमांक (Atomic Number) 35 है – यह हैलोजन समूह का सदस्य है। इसका क्वथनांक (Boiling Point) 58.8°C है, अतः यह कमरे के तापमान पर द्रव होता है। यह अत्यधिक विषैला एवं संक्षारक (corrosive) होता है।
- फ्लोरीन (Fluorine – F) का परमाणु क्रमांक (Atomic Number) 9 है – यह सबसे अधिक विद्युतऋणात्मक (electronegative) तत्व है। फ्लोरीन अत्यधिक अभिक्रियाशील (highly reactive) है, इसलिए यह प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता।
- फ्लोरीन (Fluorine – F) सबसे अधिक प्रतिक्रियाशील अधातु (most reactive non-metal) है – यह लगभग सभी तत्वों (यहाँ तक कि कुछ उत्कृष्ट गैसों – xenon) से अभिक्रिया करता है। इसका उपयोग टेफ्लॉन (PTFE) , यूरेनियम संवर्धन (enrichment) , रेफ्रिजरेंट (CFCs) एवं दंत चिकित्सा (fluoride toothpaste) में होता है।
- आयोडीन (Iodine – I) का क्वथनांक (Boiling Point) 184.3°C है – यह हैलोजनों में सबसे अधिक क्वथनांक रखता है। गर्म करने पर यह ऊर्ध्वपातित (sublimes) होता है, अर्थात ठोस से सीधे वाष्प में बदलता है (बिना पिघले)।
- पीतल (Brass) ताँबा (Copper – 60-80%) और जस्ता (Zinc – 20-40%) की मिश्र धातु है – इसका रंग सुनहरा-पीला होता है। इसका उपयोग बर्तन, नल, पानी के फिटिंग्स, संगीत वाद्ययंत्र (बिगुल, तुरही) , बिजली के उपकरण, बोल्ट, नट, गियर, सजावटी वस्तुएँ एवं सिक्के बनाने में होता है।
- पीतल (Brass) का उपयोग बर्तन (utensils) बनाने में होता है – इसकी सुनहरी चमक एवं संक्षारण प्रतिरोधकता (corrosion resistance) के कारण इसका उपयोग कलात्मक बर्तन, थाली, कटोरे, पूजा सामग्री आदि बनाने में किया जाता है।
- पीतल (Brass) का उपयोग नल (taps) बनाने में होता है – इसका जंग न लगने का गुण (जल प्रतिरोध) इसे प्लंबिंग (plumbing) के लिए उपयुक्त बनाता है।
- कांस्य (Bronze) ताँबा (Copper – 88%) और टिन (Tin – 12%) की मिश्र धातु है – यह पीतल से अधिक कठोर एवं मजबूत होती है। इसका उपयोग मूर्तियाँ (statues) , सिक्के, पिस्टन, बियरिंग्स, घंटियाँ, झांझ (cymbals) , तार, केबल एवं सागरीय (marine) उपकरणों में होता है।
- कांस्य (Bronze) का उपयोग मूर्तियाँ (statues) बनाने में होता है – इसका ऐतिहासिक महत्व है (कांस्य युग – Bronze Age)। प्रसिद्ध मूर्तियाँ – "द थिंकर" (The Thinker) और अधिकांश सार्वजनिक प्रतिमाएँ कांस्य की ही बनी होती हैं।
- कांस्य (Bronze) का उपयोग सिक्कों (coins) में होता है – प्राचीन कांस्य सिक्के (Roman, Greek) तथा आधुनिक सिक्कों (जैसे – 10, 20, 50 पैसे के भारतीय सिक्के) में इस मिश्र धातु का उपयोग होता है।
- बेल मेटल (Bell Metal) ताँबा (Copper – 77-80%) और टिन (Tin – 20-23%) की मिश्र धातु है – यह कांस्य का ही एक विशेष रूप है। यह कठोर एवं भंगुर (brittle) होती है, किंतु इसमें उच्च ध्वनिकीय गुण (acoustic properties) होते हैं, जिससे घंटियों में सुरीली आवाज निकलती है।
- बेल मेटल (Bell Metal) का उपयोग घंटियाँ (bells) बनाने में होता है – मंदिरों, चर्चों एवं स्कूलों की घंटियाँ बेल मेटल की बनाई जाती हैं। इसी का उपयोग संगीत वाद्ययंत्रों में भी होता है।
- बेल मेटल (Bell Metal) का उपयोग संगीत उपकरणों (musical instruments) में होता है – इसका उपयोग झांझ (cymbals) , गोंग (gong) , कराटाल (karatal) आदि बनाने में किया जाता है।
- गन मेटल (Gun Metal) ताँबा (Copper – 88%), टिन (Tin – 10%) और जस्ता (Zinc – 2%) की मिश्र धातु है – इसका उपयोग आग्नेयास्त्रों (guns) , पाइप फिटिंग्स, पंप, वाल्व, बियरिंग्स, गियर एवं तोपों (cannons) के निर्माण में किया जाता है।
- जर्मन सिल्वर (German Silver – Nickel Silver) ताँबा (Copper – 60%), जस्ता (Zinc – 20%) और निकल (Nickel – 20%) की मिश्र धातु है – इसमें चाँदी (silver) बिल्कुल नहीं होती, केवल रंग चाँदी जैसा होता है। इसका उपयोग सजावटी वस्तुएँ, आभूषण, कटलरी, संगीत वाद्ययंत्र, सिक्के (कुछ देशों में) और बर्तन बनाने में होता है।
- जर्मन सिल्वर (German Silver) का उपयोग सजावटी वस्तुओं (decorative items) में होता है – इसकी चमक के कारण इसका उपयोग कृत्रिम आभूषण, पूजा वस्तुएँ, ट्रे, बर्तन, लैंप स्टैंड बनाने में किया जाता है।
- जर्मन सिल्वर (German Silver) का उपयोग आभूषण (jewelry) में होता है – यह सस्ता और चमकीला होता है, इसलिए इसे स्टील के साथ मिलाकर नकली चाँदी के आभूषण बनाए जाते हैं।
- कांस्टेंटन (Constantan) ताँबा (Copper – 55%) और निकल (Nickel – 45%) की मिश्र धातु है – इस विशेषता का प्रतिरोध (resistivity) तापमान बदलने पर लगभग स्थिर रहता है। इसका उपयोग थर्मोकपल (thermocouple) और विद्युत उपकरणों में होता है।
- कांस्टेंटन (Constantan) का उपयोग थर्मोकपल (thermocouple) में होता है – थर्मोकपल तापमान मापने का उपकरण है। कांस्टेंटन-कॉपर युग्म (J-type thermocouple) व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।
- कांस्टेंटन (Constantan) का उपयोग विद्युत उपकरणों (electrical devices) में होता है – इसका उपयोग प्रतिरोध तार, रिओस्टेट (rheostat) , लोड बैंक (load banks) , हीटिंग तार और प्रिसीजन रेजिस्टर में होता है।
- प्यूटर (Pewter) टिन (Tin – 85-99%) और सीसा (Lead) / ताँबा (Copper) / एंटीमनी (Antimony) की मिश्र धातु है – प्राचीन काल में इसमें सीसा (Pb) मिलाया जाता था, परंतु अब सीसारहित (lead-free) प्यूटर अधिक प्रचलित है। इसका उपयोग सजावटी बर्तन, टेबलवेयर, प्याले, थाली, गहने, खिलौने आदि बनाने में होता है।
- प्यूटर (Pewter) का उपयोग सजावटी बर्तनों (decorative utensils) में होता है – इसका रंग चाँदी जैसा और नीरस (matte) होता है। इसका उपयोग स्मृति चिह्न (souvenirs) , कप, चम्मच, बेल्ट बकल आदि बनाने में होता है।
- प्यूटर (Pewter) का उपयोग टेबलवेयर (tableware) में होता है – यह सस्ता, कम गलनांक वाला (melting point ~170-230°C) एवं आकर्षक होता है। व्यापक उपयोग के लिए टिन (Sn) मुख्य घटक होता है।
- मोनल (Monel Metal) निकल (Nickel – 65-70%) और ताँबा (Copper – 30-35%) की मिश्र धातु है – इसमें थोड़ी मात्रा में लोहा (Fe) , मैंगनीज (Mn) , सिलिकॉन (Si) , कार्बन (C) भी होता है। इसका उपयोग रासायनिक उद्योग (chemical industry) , समुद्री उपकरण (marine equipment) , पंप, वाल्व, नाव के प्रोपेलर, तेल रिफाइनरी, हीट एक्सचेंजर, अल्ट्रासोनिक सफाई, बॉयलर फीड वाटर हीटर एवं तरल परिवहन प्रणाली में होता है।
- मोनल (Monel Metal) का उपयोग समुद्री उपकरणों (marine equipment) में होता है – यह समुद्री जल (sea water) के क्षरण (corrosion) को सहन करता है। इसका उपयोग नौसेना जहाजों, पनडुब्बियों, एवं सागरीय पाइपलाइनों में किया जाता है।
- मोनल (Monel Metal) का उपयोग पंप (pumps) में होता है – रासायनिक पंप एवं अपतटीय (offshore) ड्रिलिंग पंप में इसका उपयोग क्षरण प्रतिरोधकता के कारण होता है।
- सोल्डर (Solder) सीसा (Lead – 50-63%) और टिन (Tin – 37-50%) की मिश्र धातु है – इसका गलनांक बहुत कम (183-190°C) होता है। इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स (electronics) , प्लंबिंग (plumbing) , वेल्डिंग, सर्किट बोर्ड पर कंपोनेंट्स को जोड़ने, टिन के डिब्बे बनाने, रेडियो-टेलीविज़न रिपेयर, सोल्डरिंग आयरन द्वारा करने में होता है। (अब RoHS के अनुसार लेड-फ्री सोल्डर – Sn, Cu, Ag – प्रचलित हैं)
- सोल्डर (Solder) का उपयोग वेल्डिंग (welding) में होता है – सोल्डरिंग, वेल्डिंग का एक रूप है जहाँ मूल धातुओं को पिघलाए बिना, केवल सोल्डर को पिघलाकर जोड़ा जाता है।
- ड्यूरालुमिन (Duralumin) एल्यूमीनियम (Aluminium – 95%), ताँबा (Copper – 4%), मैग्नीशियम (Mg – 0.5%) और मैंगनीज (Mn – 0.5%) की मिश्र धातु है – यह अत्यधिक हल्की (lightweight) और मजबूत होती है। इसका उपयोग विमान (aircraft) , रॉकेट (rocket) , अंतरिक्ष यान (spacecraft) , पुल, मोटरकार, ट्रक, बस, साइकिल फ्रेम, खेल उपकरण (बेसबॉल बैट, लॉन टेनिस रैकेट) और सैन्य उपकरणों में होता है।
- ड्यूरालुमिन (Duralumin) का उपयोग विमान निर्माण (aircraft manufacturing) में होता है – इसकी उच्च तनन सामर्थ्य (tensile strength) और कम घनत्व के कारण यह विमान के फ्रेम, पंख, धड़, रिवेट, प्रोपेलर ब्लेड, लैंडिंग गियर आदि में उपयोग किया जाता है।
- ड्यूरालुमिन (Duralumin) का उपयोग रॉकेट (rocket) में होता है – यह रॉकेट के बाहरी ढाँचे (structure) और ईंधन टैंक में उपयोग किया जाता है। इसका गुणवत्ता-से-भार अनुपात (strength-to-weight ratio) उत्कृष्ट है।
- एल्यूमीनियम मिश्र धातु (Aluminium alloy) हल्की (lightweight) होती है – शुद्ध एल्यूमीनियम (Al) कमजोर होती है, किंतु Cu, Mg, Mn, Si, Zn मिलाने से यह अत्यधिक मजबूत हो जाती है। एल्यूमीनियम मिश्र धातु का घनत्व लगभग 2.7 g/cm³ होता है, जो स्टील (7.8 g/cm³) का लगभग एक-तिहाई है।
- मैग्नीशियम मिश्र धातु (Magnesium alloy) हल्की और मजबूत (lightweight & strong) होती है – मैग्नीशियम (Mg) घनत्व = 1.74 g/cm³ (सबसे हल्की संरचनात्मक धातु)। Mg-Al-Zn (AZ) श्रेणी की मिश्र धातु का उपयोग विमान (aircraft) , ऑटोमोबाइल (automobile) , लैपटॉप, मोबाइल फोन, कैमरा, टेनिस रैकेट, सीट फ्रेम, कीबोर्ड, पावर टूल, ड्रोन, साइकिल फ्रेम एवं सैन्य उपकरणों में होता है।
- मैग्नीशियम मिश्र धातु (Mg alloy) का उपयोग विमान (aircraft) में होता है – Mg मिश्र धातु से जेट इंजन के पुर्जे, गियरबॉक्स, हेलिकॉप्टर रोटर, सीट फ्रेम एवं कॉकपिट में उपयोग होता है। यह स्टील की तुलना में 75% हल्की होती है।
- मैग्नीशियम मिश्र धातु (Mg alloy) का उपयोग ऑटोमोबाइल (automobile) में होता है – Mg मिश्र धातु से स्टीयरिंग व्हील, इंजन ब्लॉक, गियरबॉक्स हाउसिंग, सीट फ्रेम, डैशबोर्ड, व्हील रिम बनाए जाते हैं, जिससे वाहन हल्का होता है और ईंधन दक्षता बढ़ती है।
- स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) में क्रोमियम (Chromium – 10.5% से अधिक) होता है – यह क्रोमियम की पतली परत ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके Cr₂O₃ बनाती है, जो जंग को रोकती है (passivation layer)। इसमें कार्बन (C – 0.08-1.2%) , निकल (Ni – 8-10.5%) , मोलिब्डेनम (Mo) , टाइटेनियम (Ti) आदि भी हो सकते हैं।
- स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) जंग प्रतिरोधी (corrosion resistant) है – इसी कारण यह रसोई (kitchen) , चिकित्सा (medical) , रासायनिक (chemical) , एवं समुद्री (marine) उपकरणों में प्रयुक्त होता है।
- स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) का उपयोग रसोई उपकरणों (kitchenware) में होता है – इससे बर्तन, चम्मच, कांटा, चाकू, बेसिन, सिंक, कुकर, फ्रिज, एवं ओवन बनाए जाते हैं।
- निकेल स्टील (Nickel Steel) निकल (Nickel) और लोहा (Iron) की मिश्र धातु है – निकल (2-5%) मिलाने से स्टील की कठोरता, तनन सामर्थ्य (tensile strength) , और भंजन क्षमता (toughness) बढ़ जाती है। इसका उपयोग पुल निर्माण (bridge construction) , बख्तरबंद वाहन, सागरीय प्लेटफार्म, बॉयलर, प्रेशर वेसेल, पाइपलाइन, क्रेन, ड्रिलिंग रिग, समुद्री जहाज एवं हेवी मशीनरी में होता है।
- निकेल स्टील (Nickel Steel) का उपयोग पुल निर्माण (bridge construction) में होता है – इसकी उच्च सामर्थ्य एवं भंजन क्षमता (toughness) से लंबे पुल (जैसे – भारत में हावड़ा ब्रिज में कुछ भाग) बनाए जाते हैं।
- निकेल स्टील (Nickel Steel) का उपयोग बख्तरबंद वाहनों (armoured vehicles) में होता है – इसका उपयोग सैन्य टैंकों, एपीसी (armoured personnel carriers) , बख्तरबंद कारों, युद्धपोतों के कवच (armour plates) में किया जाता है।
- मैंगनीज स्टील (Manganese Steel – Hadfield Steel) मैंगनीज (Manganese – 11-14%) और लोहा (Iron) की मिश्र धातु है – यह अत्यधिक कठोर और घर्षण-प्रतिरोधी (abrasion resistant) होती है। इसका उपयोग रेलवे ट्रैक (railway track) , ड्रिल, क्रशर, बुलडोजर ब्लेड, कंक्रीट मिक्सर, फोर्कलिफ्ट, रॉक ड्रिल, माइनिंग उपकरण, श्रेडर (shredder) और रेलवे क्रॉसिंग में होता है।
- मैंगनीज स्टील (Manganese Steel) का उपयोग रेलवे ट्रैक (railway tracks) में होता है – रेल के फिश प्लेट (fish plate) , स्विच (switch) , क्रॉसिंग (rail crossings) , टर्नआउट एवं अन्य बिंदुओं पर मैंगनीज स्टील का उपयोग किया जाता है, जहाँ घर्षण और आघात (impact) अधिक होता है।
- मैंगनीज स्टील (Manganese Steel) का उपयोग ड्रिल (drills) में होता है – इसकी सतह कठोर होने के कारण इसका उपयोग चट्टानों की ड्रिलिंग, फोर्जिंग, उत्खनन (excavation) उपकरणों में होता है।
- निक्रोम (Nichrome) निकल (Nickel – 80%) और क्रोमियम (Chromium – 20%) की मिश्र धातु है – इसका प्रतिरोध उच्च और ऑक्सीकरण प्रतिरोधकता (oxidation resistance) अच्छी होती है। इसका उपयोग हीटिंग तारों (heating wires) , इलेक्ट्रिक हीटर, ओवन, टोस्टर, हेयर ड्रायर, हीटिंग कॉइल, रूम हीटर, इलेक्ट्रिक इस्तरी, ब्रॉडिंग मशीन, लैब फर्नेस, हीट गन, केटल, वॉटर हीटर में होता है।
- निक्रोम (Nichrome) का उपयोग इलेक्ट्रिक हीटर (electric heater) में होता है – इसका उच्च प्रतिरोध और उच्च गलनांक (1400°C) इसे गरम करने के लिए आदर्श बनाता है।
- निक्रोम (Nichrome) का उपयोग ओवन (oven) में होता है – टोस्टर, माइक्रोवेव, पिज़्ज़ा ओवन, ब्रेड टोस्टर में निक्रोम हीटिंग तत्व (heating element) होते हैं।
- इन्वार (Invar) लोहा (Iron – 64%) और निकल (Nickel – 36%) की मिश्र धातु है – इसका विशेष गुण यह है कि इसका तापीय प्रसार गुणांक (coefficient of thermal expansion) लगभग शून्य होता है। इसका उपयोग सटीक उपकरणों (precision instruments) , घड़ियाँ (clocks) , पेंडुलम, टेप माप (measuring tapes) , लंबाई मानकों (length standards) , लेजर इंटरफेरोमीटर, सर्जिकल टूल्स, वैज्ञानिक यंत्र, दूरबीन अस्तर, रॉकेट नोजल, सिंक्रोट्रॉन में होता है।
- इन्वार (Invar) का उपयोग घड़ियों (watches) में होता है – इसका उपयोग बैलेंस व्हील (balance wheel) , पेंडुलम, घड़ी के पुर्जे बनाने में होता है, ताकि तापमान बदलने पर घड़ी की गति प्रभावित न हो।
- टंग्स्टन स्टील (Tungsten Steel) टंग्स्टन (Tungsten – W) और लोहा (Iron) की मिश्र धातु है – टंग्स्टन स्टील अत्यधिक कठोर एवं उच्च तापमान पर भी अपनी कठोरता बनाए रखता है। इसका उपयोग कटिंग टूल (cutting tools) , हथियार (weapons) , सर्जिकल उपकरण, ड्रिल बिट, मिलिंग कटर, टर्निंग टूल, टैप, डाई, आरी ब्लेड, पंचिंग टूल, इंजीनियरिंग उपकरणों में होता है।
- टंग्स्टन स्टील (Tungsten Steel) का उपयोग हथियार निर्माण (weapons) में होता है – टैंक के कवच भेदी (armour-piercing) गोले, राइफल बैरल, मिसाइल नोजल, ड्रिलिंग उपकरण एवं उच्च-शक्ति कटिंग उपकरणों में होता है।
- क्रोम स्टील (Chrome Steel) क्रोमियम (Chromium – Cr) और लोहा (Iron) की मिश्र धातु है – क्रोमियम (0.5-2%) मिलाने से स्टील की कठोरता और जंग प्रतिरोधकता बढ़ती है। इसका उपयोग सर्जिकल उपकरणों (surgical instruments) , बॉल बेयरिंग (ball bearings) , रोलर बेयरिंग, कटिंग टूल, औद्योगिक चाकू, सीमेंट मिक्सर, चेन, ऑटो पार्ट्स, ड्रिल बिट, रिंच (wrenches) , स्पैनर, दंत चिकित्सा उपकरण (dental tools) , एंडोस्कोप, कैंची, स्केलपेल (scalpel) में होता है।
- क्रोम स्टील (Chrome Steel) का उपयोग सर्जिकल उपकरणों (surgical instruments) में होता है – यह संक्षारण प्रतिरोधी, कठोर, तीक्ष्ण एवं टिकाऊ होता है। सर्जिकल ब्लेड, फोर्सेप्स, स्केलपेल, कैंची, आंखों के उपकरण, चिमटी, स्पैटुला इसी के बनते हैं।
- मिश्र धातु स्टील (Alloy Steel) का उपयोग मशीनरी (machinery) , निर्माण (construction) , पुल, बिल्डिंग, पाइपलाइन, ऑटोमोबाइल, रेल, जहाज, हथियार, औद्योगिक उपकरणों, वायुयान, रिएक्टर, प्रेशर वेसेल, फास्टनर, शाफ्ट, गियर में होता है।
- नाइट्रोजन (N₂) का उपयोग स्टील निर्माण (steel making) में होता है – स्टील निर्माण में नाइट्रोजन को स्टील में मिलाया जाता है (नाइट्राइडिंग – nitriding) , जिससे स्टील की कठोरता और घर्षण प्रतिरोधकता बढ़ती है।
- सल्फर (Sulphur – S) का उपयोग बारूद (gunpowder – black powder) बनाने में होता है – बारूद में सल्फर (S) , चारकोल (C – कोयला) और साल्टपीटर (KNO₃ – पोटैशियम नाइट्रेट) मिलाया जाता है। सल्फर बारूद को अधिक स्थिरता और ज्वलनशीलता प्रदान करता है।
- सल्फर (Sulphur – S) का उपयोग सल्फ्यूरिक अम्ल (Sulphuric Acid – H₂SO₄) बनाने में होता है – संपर्क प्रक्रिया (Contact process) में S को जलाकर SO₂ बनाया जाता है, फिर SO₂ से SO₃, और फिर SO₃ से H₂SO₄ बनता है। H₂SO₄ "रसायनों का राजा" (King of Chemicals) है।
- सल्फर (Sulphur – S) का उपयोग रबर वल्कनीकरण (vulcanization of rubber) में होता है – प्राकृतिक रबर को सल्फर के साथ गर्म करने से रबर अधिक मजबूत, प्रत्यास्थ (elastic) और ताप प्रतिरोधी (heat resistant) बनता है। यह चार्ल्स गुडइयर (Charles Goodyear) की खोज है।
- सल्फर (Sulphur – S) का उपयोग कीटनाशक (pesticide) में होता है – सल्फर का उपयोग फफूंदनाशक (fungicide) के रूप में अंगूर, सेब, सब्जियों, गेहूँ, कपास, बागवानी फसलों में किया जाता है। यह जैविक खेती (organic farming) में प्रचलित है।
- सल्फर (Sulphur – S) का उपयोग दवाइयों (medicines) में होता है – सल्फा ड्रग्स (sulfonamide antibiotics) , मुँहासे (acne) की दवाएँ (सल्फर साबुन) , त्वचा रोगों में मलहम, खुजली (scabies) , फफूंद (fungal infections) के उपचार में सल्फर यौगिक उपयोग होते हैं।
- सल्फर (Sulphur – S) का उपयोग डाई निर्माण (dyes) में होता है – सल्फर डाई (sulfur dyes) का उपयोग कपड़ा उद्योग (textile industry) में सेल्यूलोज (cotton) के रंगाई के लिए किया जाता है।
- सल्फर (Sulphur – S) का उपयोग प्लास्टिक उद्योग (plastic industry) में होता है – पॉलिसल्फाइड (polysulfide) , पॉलिसल्फोन (polysulfone) और कुछ विशेष इंजीनियरिंग प्लास्टिक में सल्फर शामिल होता है।
- सल्फर (Sulphur – S) का उपयोग सल्फेट उर्वरक (sulphate fertilizer) में होता है – (NH₄)₂SO₄ (अमोनियम सल्फेट) एक मुख्य नाइट्रोजन-सल्फर उर्वरक है। सल्फर का उपयोग पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व (क्लोरोफिल, प्रोटीन बनाने) के रूप में किया जाता है।
- सल्फर (Sulphur – S) का उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों (cosmetics) में होता है – सल्फर मुँहासे रोधी क्रीम, लोशन, साबुन, फेसवॉश, शैम्पू में प्रयुक्त होता है।
- सल्फर डाइऑक्साइड (Sulphur Dioxide – SO₂) वायु प्रदूषक (air pollutant) है – यह वायुमंडल में SO₂, SO₃ के रूप में मिलकर सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) बनाता है, जिससे अम्लीय वर्षा (acid rain) होती है। इससे पौधों, जलजीवों, पत्थर की संरचनाएँ, मूर्तियाँ नष्ट होती हैं।
- कार्बन (Carbon – C) का उपयोग हीरे (diamond) के रूप में होता है – हीरा कार्बन का सबसे कठोर अपररूप है। इसका उपयोग आभूषण, कटिंग टूल, ड्रिल बिट, ग्राइंडिंग व्हील, औद्योगिक काटने, पॉलिशिंग, ड्रिलिंग, सोने के खनन, विज्ञान अनुसंधान, ऑप्टिकल विंडो, हीट सिंक में होता है।
- कार्बन (Carbon – C) का उपयोग ग्रेफाइट (graphite) के रूप में होता है – ग्रेफाइट कार्बन का एक अपररूप (allotrope) है, जो विद्युत का सुचालक है। इसका उपयोग पेंसिल लेड, बैटरी इलेक्ट्रोड, लुब्रिकेंट (dry lubricant) , रिएक्टर मॉडरेटर (nuclear) , ब्रेक लाइनिंग, मोल्ड, क्रूसिबल (crucible) , स्टील उद्योग, सोलर सेल, फ्यूल सेल में होता है।
- कार्बन (Carbon – C) का उपयोग बैटरी (battery) में होता है – बैटरी में कार्बन इलेक्ट्रोड (carbon rod) , कार्बन ब्लैक (carbon black) , ग्रेफाइट (graphite) का उपयोग होता है। उदाहरण – ड्राई सेल (Zn-C) , लिथियम-कार्बन (Li-C) , लेड-एसिड बैटरी (इलेक्ट्रोड नहीं, परंतु ग्रिड में) में।
- कार्बन (Carbon – C) का उपयोग ईंधन (fuel) के रूप में होता है – कोयला (coal) , कोक (coke) , लकड़ी का कोयला (charcoal) , पीट (peat) , एन्थ्रेसाइट (anthracite) , ग्रेफाइट (उच्च ताप भट्टियों में) ईंधन के रूप में उपयोग होते हैं।
- कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide – CO₂) एक ग्रीनहाउस गैस (greenhouse gas) है – यह जीवाश्म ईंधन (coal, petrol, diesel) जलाने से उत्सर्जित होती है। यह वायुमंडल में ऊष्मा को रोककर वैश्विक तापन (global warming) एवं जलवायु परिवर्तन (climate change) का कारण बनती है।
- नाइट्रोजन (Nitrogen – N₂) का उपयोग उर्वरक (fertilizer) बनाने में होता है – हैबर प्रक्रिया (Haber process) से NH₃ (अमोनिया) बनती है, जिससे यूरिया [CO(NH₂)₂] , अमोनियम नाइट्रेट (NH₄NO₃) , अमोनियम सल्फेट (NH₄)₂SO₄ , अमोनियम फॉस्फेट (NH₄)₃PO₄ आदि उर्वरक बनते हैं।
- नाइट्रोजन (Nitrogen – N₂) का उपयोग अमोनिया (NH₃) बनाने में होता है – N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ (हैबर प्रक्रिया) । अमोनिया का उपयोग उर्वरक, विस्फोटक, रेफ्रिजरेंट, क्लीनर, फर्टिलाइजर, प्लास्टिक, औषधि निर्माण में होता है।
- नाइट्रोजन (Nitrogen – N₂) का उपयोग खाद्य संरक्षण (food preservation) में होता है – चिप्स, बिस्कुट, सूखे मेवे, पैकेट वाले खाद्य पदार्थों में ऑक्सीजन (O₂) हटाकर नाइट्रोजन भरी जाती है (nitrogen flushing) , जिससे खाद्य ऑक्सीडाइज नहीं होता और लंबे समय तक ताजा रहता है।
- नाइट्रोजन (Nitrogen – N₂) का उपयोग तरल शीतलन (liquid cooling) में होता है – तरल नाइट्रोजन (LN₂ – बॉयलिंग पॉइंट -196°C) का उपयोग क्रायोजेनिक्स (cryogenics) , चिकित्सा (cryosurgery) , डीएनए/आरएनए भंडारण, खाद्य फ्रीजिंग, सुपरकंडक्टिविटी, प्रयोगशाला शीतलन, केमिकल रिएक्शन स्टॉपिंग, टायर फिटिंग, अंग संरक्षण (organ preservation) में होता है।
- नाइट्रोजन (Nitrogen – N₂) का उपयोग विस्फोटक (explosives) बनाने में होता है – अमोनियम नाइट्रेट (NH₄NO₃) , टीएनटी (TNT – C₆H₂(NO₂)₃CH₃) , RDX (C₃H₆N₆O₆) , HMX (nitramine) , नाइट्रोग्लिसरीन (NG) , गनकोटन (nitrocellulose) आदि विस्फोटकों में नाइट्रोजन यौगिक होते हैं।
- नाइट्रोजन (Nitrogen – N₂) का उपयोग खनन (mining) में होता है – विस्फोटकों के रूप में (ANFO – Ammonium Nitrate Fuel Oil) , गैस (oxygen displacement) से आग को बुझाने, सुरंगों में विस्फोटक वेंटिलेशन, कोयला खनन में धूल को दबाने, शील गैस (inert gas) के रूप में, अग्निशामक (fire suppression) में भी।
- नाइट्रोजन (Nitrogen – N₂) का उपयोग रासायनिक संश्लेषण (chemical synthesis) में होता है – इसका उपयोग नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) , साइनाइड (NaCN) , हाइड्रोजन साइनाइड (HCN) , सिलिकॉन नाइट्राइड (Si₃N₄) , यूरिया (urea) आदि बनाने में किया जाता है।
- नाइट्रोजन (Nitrogen – N₂) का उपयोग औषधि निर्माण (pharmaceuticals) में होता है – नाइट्रोजन का उपयोग एंटीबायोटिक्स (penicillin) , सल्फा ड्रग्स, विटामिन, एनेस्थेटिक (nitrous oxide – N₂O – laughing gas) , कैंसर दवाएँ, एंटीवायरल, एंटीफंगल दवाओं के निर्माण में होता है।
- नाइट्रोजन (Nitrogen – N₂) का उपयोग वायुयान टायरों (aircraft tyres) में होता है – नाइट्रोजन, ऑक्सीजन (O₂) की तुलना में अधिक स्थिर होती है, यह टायर की उम्र बढ़ाती है और आग लगने का खतरा कम करती है। इसका उपयोग रेसिंग कार टायरों में भी किया जाता है।
- क्लोरीन (Chlorine – Cl₂) का उपयोग जल शुद्धिकरण (water purification) में होता है – क्लोरीन पानी में कीटाणुओं (bacteria, viruses) को मारता है। इसका उपयोग नगरपालिका जल आपूर्ति (municipal water supply) , पीने के पानी, स्विमिंग पूल, सीवेज उपचार (sewage treatment) में किया जाता है।
- क्लोरीन (Chlorine – Cl₂) का उपयोग ब्लीच (bleach) बनाने में होता है – ब्लीचिंग पाउडर (Ca(OCl)₂) और सोडियम हाइपोक्लोराइट (NaOCl) क्लोरीन के यौगिक हैं, जो कपड़ा ब्लीचिंग और सफाई एजेंट के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
- क्लोरीन (Chlorine – Cl₂) का उपयोग पीवीसी (PVC – Polyvinyl Chloride) बनाने में होता है – PVC बहुलक [–CH₂–CHCl–]ₙ है, जिसका उपयोग पाइप, केबल, तार, फर्श, छत, झिल्ली, बिल्डिंग सामग्री, बोतलें, क्रेडिट कार्ड, ट्यूब, विनाइल रिकॉर्ड, इंसुलेशन, कृत्रिम चमड़ा, बैग, पर्दे, फर्नीचर में होता है।
- क्लोरीन (Chlorine – Cl₂) का उपयोग कीटाणुनाशक (disinfectant) में होता है – अस्पताल, प्रयोगशाला, खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, पोल्ट्री फार्म, औद्योगिक सफाई, घरेलू उपयोग (bleach) में क्लोरीन यौगिक (NaOCl, Ca(OCl)₂) का उपयोग होता है।
- क्लोरीन (Chlorine – Cl₂) का उपयोग रासायनिक उद्योग (chemical industry) में होता है – क्लोरीन का उपयोग सॉल्वैंट्स (CHCl₃, CCl₄) , क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) , सिलिकॉन, टाइटेनियम डाइऑक्साइड (TiO₂) , रंग, डाइ, रबर, फार्मास्युटिकल, एग्रोकेमिकल, सिंथेटिक फाइबर (PVC, PVDC, PTFE) के निर्माण में होता है।
- फॉस्फोरस (Phosphorus – P) का उपयोग माचिस (matches) बनाने में होता है – लाल फॉस्फोरस (red P) का उपयोग सुरक्षा माचिस (safety matches) की बॉक्स के साइड की पट्टी पर और पीला फॉस्फोरस (yellow P) कभी प्रयुक्त होता था (अब बंद)।
- फॉस्फोरस (Phosphorus – P) का उपयोग उर्वरक (fertilizer) में होता है – फॉस्फेट उर्वरक (Single Superphosphate – SSP, DAP – Diammonium Phosphate, NPK मिश्रण) फसलों को P पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
- फॉस्फोरस (Phosphorus – P) का उपयोग डिटर्जेंट (detergent) में होता है – फॉस्फेट (STPP – सोडियम ट्राइपॉलीफॉस्फेट) डिटर्जेंट में पानी को मृदु (soft) करता है और गंदगी हटाने में मदद करता है।
- फॉस्फोरस (Phosphorus – P) का उपयोग रासायनिक हथियारों (chemical weapons) में हुआ था – सफेद फॉस्फोरस (white P) का उपयोग इन्सेन्डियरी (incendiary) हथियार, स्मोक स्क्रीन, ट्रेसर बुलेट, बम में हुआ है, जो युद्ध में अत्यधिक क्रूर माना जाता है।
- फॉस्फोरस (Phosphorus – P) का उपयोग सैन्य हथियारों (military weapons) में होता है – सफेद फॉस्फोरस (WP) गोला-बारूद, रॉकेट, आर्टिलरी शेल, हैंड ग्रेनेड, विमान बम, मोर्टार राउंड में उपयोग होता है।
- आयोडीन (Iodine – I) का उपयोग थायराइड उपचार (thyroid treatment) में होता है – आयोडीन थायरोक्सिन (thyroxine – T₄) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T₃) हार्मोन का प्रमुख घटक है। इसकी कमी से गण्डमाला (goitre) रोग होता है। आयोडीन युक्त नमक (iodized salt) इसकी कमी दूर करता है।
- आयोडीन (Iodine – I) का उपयोग कीटाणुनाशक (disinfectant) में होता है – टिंचर आयोडीन (tincture iodine – I₂ + KI + alcohol) का उपयोग घावों, कटने, चोट, सर्जिकल साइट को साफ करने के लिए किया जाता है।
- आयोडीन (Iodine – I) का उपयोग औषधीय टिंचर (medicinal tincture) में होता है – टिंचर आयोडीन (2% I₂ , 2% KI , 96% alcohol) का उपयोग एंटीसेप्टिक (antiseptic) के रूप में किया जाता है।
- फ्लोरीन (Fluorine – F) का उपयोग टेफ्लॉन (Teflon – PTFE) बनाने में होता है – टेफ्लॉन का सूत्र [–CF₂–CF₂–]ₙ है, जो नॉन-स्टिक (non-stick) कोटिंग है (कुकवेयर, पाइप, बेयरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्पेस सूट, केबल इंसुलेशन, क्लोदिंग में)।
- फ्लोरीन (Fluorine – F) का उपयोग रेफ्रिजरेंट (refrigerant) में होता है – क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs – Freon) और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) में फ्लोरीन होता है। (CFCs अब ओजोन परत क्षरण के कारण प्रतिबंधित हैं – मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987)
- ब्रोमीन (Bromine – Br) का उपयोग अग्निशामक (fire extinguisher) में होता है – हैलोजेनेटेड अग्निशामक (halon – CBrClF₂ या CBrF₃) में ब्रोमीन होता है। Halon अत्यधिक प्रभावी है किंतु ओजोन परत क्षरण (ozone depletion) के कारण अब इसका उत्पादन बंद है।
- ब्रोमीन (Bromine – Br) का उपयोग औषधि निर्माण (pharmaceuticals) में होता है – ब्रोमाइड (bromides – KBr, NaBr) का उपयोग शामक (sedative) , एंटीकन्वल्सेंट (anticonvulsant) , कैंसर रोधी दवाओं (anticancer) और कीटनाशकों में होता है।
- टाइटेनियम मिश्र धातु (Titanium alloy) का उपयोग विमान निर्माण (aircraft manufacturing) में होता है – Ti-6Al-4V (टाइटेनियम-6% एल्यूमीनियम-4% वैनेडियम) अत्यधिक मजबूत और हल्का होता है। इसका उपयोग इंजन ब्लेड, एयरफ्रेम, लैंडिंग गियर, फ़ास्टनर, नट, बोल्ट, हाइड्रोलिक पाइप, एग्जॉस्ट नोजल, अंतरिक्ष यान (spacecraft) में होता है।
- टाइटेनियम मिश्र धातु (Ti alloy) का उपयोग अंतरिक्ष यान (spacecraft) में होता है – यह उच्च तापमान, संक्षारण, विकिरण (radiation) को सहन करता है। इसका उपयोग रॉकेट कैसिंग, उपग्रह घटक, इंजन नोजल, ईंधन टैंक, एयरलॉक, हीट शील्ड, दबाव वाहिका (pressure vessel) में होता है।
- टाइटेनियम मिश्र धातु (Ti alloy) का उपयोग चिकित्सा उपकरणों (medical devices) में होता है – इसकी जैव-अनुकूलता (biocompatibility) के कारण इसका उपयोग हड्डी प्रत्यारोपण (bone implants) , कृत्रिम जोड़, पेंच, प्लेट, डेन्चर, कृत्रिम हृदय वाल्व, रीढ़ की हड्डी प्रत्यारोपण, सर्जिकल टूल्स, डेंटल इम्प्लांट, नेल, स्टेंट, क्रानियल प्लेट, कार्डियक पेसमेकर केसिंग में होता है।
- मैग्नीशियम मिश्र धातु (Mg alloy) का उपयोग ऑटोमोबाइल (automobiles) में होता है – (पुनरावृत्ति से बचने के लिए एक बार) सीट फ्रेम, स्टीयरिंग व्हील, डैशबोर्ड, इंजन ब्लॉक, ट्रांसमिशन केस, गियर बॉक्स, व्हील रिम, फ्यूल टैंक, पैनल, हुड, ट्रंक लिड, डोर इनर पैनल।