हाइड्रोकार्बन और उसके यौगिक
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हाइड्रोकार्बन वे कार्बनिक यौगिक हैं जिनमें केवल कार्बन और हाइड्रोजन तत्व पाए जाते हैं। ये पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और कोयले के मुख्य घटक हैं तथा ऊर्जा उत्पादन, पेट्रोकेमिकल उद्योग और ईंधन निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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मीथेन (CH₄) सबसे सरल तथा पहला एल्केन है। यह प्राकृतिक गैस का मुख्य घटक है, दलदली क्षेत्रों में बनने के कारण मार्श गैस कहलाती है तथा CNG और बिजली उत्पादन में स्वच्छ ईंधन के रूप में प्रयुक्त होती है।
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हाइड्रोकार्बन मुख्यतः संतृप्त और असंतृप्त दो प्रकार के होते हैं। संतृप्त हाइड्रोकार्बन में केवल एकल बंध होते हैं, जबकि असंतृप्त में द्वि या त्रि-बंध पाए जाते हैं, इसलिए उनकी रासायनिक सक्रियता अधिक होती है।
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एल्केन संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें केवल एकल सहसंयोजक बंध पाए जाते हैं। इनका सामान्य सूत्र CnH₂n+₂ होता है तथा ये सामान्यतः प्रतिस्थापन अभिक्रिया करते हैं।
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एल्कीन असंतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें कम-से-कम एक द्विबंधन होता है। इनका सामान्य सूत्र CnH₂n होता है तथा ये योगात्मक अभिक्रियाएँ आसानी से करते हैं।
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एल्काइन ऐसे असंतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें कम-से-कम एक त्रिबंधन उपस्थित होता है। इनका सामान्य सूत्र CnH₂n-₂ होता है और ये उच्च रासायनिक सक्रियता प्रदर्शित करते हैं।
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बेंजीन (C₆H₆) एक प्रमुख सुगंधित हाइड्रोकार्बन है। इसकी संरचना में छह कार्बन परमाणुओं का वलय होता है तथा अनुनाद के कारण यह अत्यधिक स्थायी यौगिक माना जाता है।
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मीथेन का सूत्र CH₄ होता है तथा इसका अणु चतुष्फलकीय संरचना रखता है। यह रंगहीन, गंधहीन और अत्यधिक ज्वलनशील गैस है।
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ईथेन (C₂H₆) दूसरा एल्केन है जो प्राकृतिक गैस में पाया जाता है। इसका उपयोग एथिलीन तथा अन्य पेट्रोकेमिकल पदार्थों के निर्माण में किया जाता है।
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एथिलीन (C₂H₄) एक महत्वपूर्ण एल्कीन है जिसका उपयोग पॉलिथीन, PVC तथा प्लास्टिक उद्योग में व्यापक रूप से किया जाता है। यह फलों को कृत्रिम रूप से पकाने में भी सहायक है।
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एसिटिलीन (C₂H₂) एक प्रमुख एल्काइन है जो ऑक्सी-एसिटिलीन ज्वाला में लगभग 3000°C ताप उत्पन्न करता है। इसका उपयोग वेल्डिंग और धातु काटने में किया जाता है।
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एल्केन में केवल सिग्मा (σ) बंध पाए जाते हैं, इसलिए ये अपेक्षाकृत कम प्रतिक्रियाशील होते हैं। इनका उपयोग ईंधन, मोमबत्ती और स्नेहक बनाने में किया जाता है।
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एल्कीन में एक पाई (π) बंध पाया जाता है, जिसके कारण यह आसानी से रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेते हैं। इनका उपयोग पॉलिमर तथा रासायनिक मध्यवर्ती बनाने में होता है।
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एल्काइन में दो पाई (π) बंध पाए जाते हैं। इनका उपयोग कार्बनिक संश्लेषण, प्लास्टिक तथा औषधीय रसायनों के निर्माण में किया जाता है।
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बेंजीन में तीन पाई बंध होते हैं, लेकिन अनुनाद के कारण सभी बंध समान लंबाई के होते हैं। यह रासायनिक उद्योग में विलायक तथा डाई निर्माण में उपयोगी है।
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हाइड्रोकार्बन जीवाश्म ईंधनों के मुख्य घटक हैं। पेट्रोल, डीजल, LPG और प्राकृतिक गैस जैसे ईंधन इन्हीं से प्राप्त होते हैं।
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प्राकृतिक गैस में मुख्यतः मीथेन पाई जाती है। यह कोयले और पेट्रोलियम की तुलना में कम प्रदूषण उत्पन्न करती है।
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प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग LPG में किया जाता है। LPG का पूर्ण रूप Liquefied Petroleum Gas है।
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ब्यूटेन अत्यधिक ज्वलनशील गैस है जिसका उपयोग गैस लाइटर, कैंपिंग स्टोव तथा पोर्टेबल ईंधन उपकरणों में किया जाता है।
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एथिलीन एक पौध हार्मोन की तरह कार्य करता है और फलों को जल्दी पकाने में सहायक होता है। केले और आम को पकाने में इसका प्रयोग किया जाता है।
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एसिटिलीन जलने पर अत्यधिक ताप उत्पन्न करता है। इसका उपयोग धातुओं की कटाई तथा औद्योगिक वेल्डिंग कार्यों में होता है।
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हाइड्रोकार्बन अत्यधिक दहनशील होते हैं। इनके अपूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड बन सकती है, जो विषैली गैस है।
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मीथेन का पूर्ण दहन स्वच्छ माना जाता है क्योंकि इससे कम धुआँ और कम राख उत्पन्न होती है। इसलिए इसे पर्यावरण-अनुकूल ईंधन माना जाता है।
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मीथेन एक महत्वपूर्ण ग्रीनहाउस गैस है। यह कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में अधिक ऊष्मा अवशोषित करती है और वैश्विक तापवृद्धि बढ़ाती है।
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पेट्रोल विभिन्न हाइड्रोकार्बनों का मिश्रण है जिसमें सामान्यतः C₅–C₁₂ तक के यौगिक पाए जाते हैं। इसका उपयोग आंतरिक दहन इंजनों में होता है।
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केरोसीन में सामान्यतः C₁₀–C₁₆ हाइड्रोकार्बन पाए जाते हैं। इसका उपयोग जेट ईंधन तथा घरेलू स्टोव में किया जाता है।
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डीजल में सामान्यतः C₁₆–C₂₀ हाइड्रोकार्बन पाए जाते हैं। यह भारी वाहनों, ट्रैक्टरों तथा जनरेटरों में प्रयुक्त होता है।
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एथिलीन का उपयोग पॉलिथीन तथा अन्य प्लास्टिक बनाने में किया जाता है। यह आधुनिक प्लास्टिक उद्योग का मूल कच्चा माल है।
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हाइड्रोकार्बन का उपयोग रबर, प्लास्टिक, डिटर्जेंट, औषधि, पेंट और सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में किया जाता है। आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था इन पर आधारित है।
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बेंजीन का उपयोग नाइट्रोबेंजीन, फिनॉल, डाई, डिटर्जेंट तथा विस्फोटक पदार्थों के निर्माण में किया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक विलायक भी है।
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एल्केन सामान्यतः कम प्रतिक्रियाशील होते हैं, जबकि एल्कीन और एल्काइन अधिक प्रतिक्रियाशील होते हैं। यह अंतर उनके बंधों की प्रकृति के कारण होता है।
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एल्कीन का हाइड्रोजनीकरण करने पर एल्केन प्राप्त होते हैं। वनस्पति तेलों को घी में बदलने की प्रक्रिया इसी सिद्धांत पर आधारित है।
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एल्काइन के आंशिक हाइड्रोजनीकरण से एल्कीन तथा पूर्ण हाइड्रोजनीकरण से एल्केन बनते हैं। यह औद्योगिक कार्बनिक संश्लेषण में महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
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बेंजीन का नाइट्रेशन करने पर नाइट्रोबेंजीन प्राप्त होता है। इसका उपयोग डाई तथा औषधि उद्योग में किया जाता है।
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मीथेन का उपयोग हाइड्रोजन, मेथनॉल और अमोनिया के औद्योगिक निर्माण में किया जाता है। यह उर्वरक उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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एथिलीन ग्लाइकॉल, जो एंटीफ्रीज के रूप में प्रयुक्त होता है, एथिलीन से तैयार किया जाता है। इसका उपयोग वाहनों के रेडिएटर में किया जाता है।
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एसिटिलीन का उपयोग विनाइल क्लोराइड, रबर तथा कृत्रिम फाइबर बनाने में किया जाता है। यह पॉलिमर उद्योग में महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
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हाइड्रोकार्बन का उपयोग स्नेहक, मोम, डामर, वैक्स और गैसोलीन बनाने में किया जाता है। सड़क निर्माण तथा परिवहन उद्योग में इनका विशेष महत्व है।
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मीथेन का गलनांक लगभग -182.5°C होता है। यह अत्यंत कम तापमान पर ठोस अवस्था में परिवर्तित होती है।
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ईथेन का क्वथनांक लगभग -88.6°C होता है। यह सामान्य ताप पर गैसीय अवस्था में पाया जाता है।
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एथिलीन का क्वथनांक लगभग -103.7°C होता है। यह अत्यधिक ज्वलनशील गैस है तथा रासायनिक उद्योग में महत्वपूर्ण है।
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एसिटिलीन का क्वथनांक लगभग -84°C होता है। यह वायु के साथ विस्फोटक मिश्रण बना सकता है, इसलिए सावधानी से संग्रहित किया जाता है।
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बेंजीन का क्वथनांक लगभग 80.1°C होता है। यह रंगहीन द्रव है तथा इसकी गंध विशेष प्रकार की होती है।
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हाइड्रोकार्बन का उपयोग पेट्रोकेमिकल उद्योग में व्यापक रूप से किया जाता है। इससे सिंथेटिक फाइबर, प्लास्टिक और उर्वरक बनाए जाते हैं।
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एल्केन का दहन ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, जिसमें अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है। इसलिए इन्हें प्रमुख ईंधन माना जाता है।
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हाइड्रोकार्बन आधुनिक ऊर्जा उत्पादन का मुख्य स्रोत हैं। ताप विद्युत संयंत्रों, वाहनों और उद्योगों में इनका व्यापक उपयोग होता है।