सल्फर, नाइट्रोजन, हैलोजन, अक्रिय गैसें
- सल्फर (S) एक अधातु है जो समूह 16
में स्थित है। यह पीला क्रिस्टलीय ठोस होता है। इसका परमाणु क्रमांक 16 है तथा यह प्रकृति में मुक्त एवं
खनिज रूपों में पाया जाता है।
- नाइट्रोजन (N) वायुमंडल का 78% भाग
घेरती है, जो इसे सबसे प्रचुर गैस बनाता है। यह रंगहीन, गंधहीन एवं जीवन के लिए आवश्यक तत्व है। इसका परमाणु
क्रमांक 7 है।
- हैलोजन समूह 17 के तत्व हैं जिनमें
F, Cl, Br, I एवं At शामिल हैं। ये अत्यधिक प्रतिक्रियाशील अधातुएँ हैं। इनके बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन
होते हैं।
- अक्रिय गैसें समूह 18 में स्थित हैं,
जिनमें He, Ne, Ar, Kr, Xe एवं Rn शामिल हैं। इनके बाह्यतम कोश पूर्ण होते हैं, अतः ये रासायनिक रूप से
अत्यधिक निष्क्रिय होती हैं।
- सल्फर का प्रतीक S है, जो लैटिन 'सल्फर' से लिया गया
है। यह एक बहुतायत में पाया जाने वाला अधातु तत्व है। इसका उपयोग प्राचीन काल से रसायन उद्योग में होता आया
है।
- नाइट्रोजन का प्रतीक N है, जो लैटिन 'नाइट्रोजेनियम'
(नाइट्र जनक) से बना है। यह जीवमंडल में नाइट्रोजन चक्र के माध्यम से निरंतर संचारित होती रहती है।
- फ्लोरीन (F) सबसे अधिक प्रतिक्रियाशील
हैलोजन एवं सबसे अधिक विद्युतऋणात्मक तत्व है। यह लगभग सभी तत्वों से अभिक्रिया करता है। इसका
परमाणु क्रमांक 9 है।
- हीलियम (He) एक अक्रिय गैस है जिसका
परमाणु क्रमांक 2 है। यह ब्रह्मांड में दूसरा सबसे प्रचुर तत्व है। सभी तत्वों में इसका क्वथनांक सबसे कम
होता है।
- सल्फर का उपयोग बारूद (गनपाउडर) बनाने में किया जाता
है, जो सल्फर, चारकोल और पोटैशियम नाइट्रेट का मिश्रण होता है। प्राचीन काल से यह युद्ध सामग्री एवं
आतिशबाजी में प्रयुक्त होता रहा है।
- नाइट्रोजन का उपयोग उर्वरक (यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट)
बनाने में किया जाता है, जो कृषि में फसल उत्पादन के लिए आवश्यक है। हैबर प्रक्रम द्वारा वायुमंडलीय
नाइट्रोजन से अमोनिया बनाई जाती है।
- क्लोरीन (Cl) का उपयोग जल शुद्धिकरण एवं
कीटाणुशोधन में किया जाता है, जो पीने के पानी को रोगजनक जीवाणुओं से मुक्त करता है। इसका
परमाणु क्रमांक 17 है तथा यह पीली-हरी गैस है।
- हीलियम (He) का उपयोग गुब्बारों एवं हवाई
जहाजों में किया जाता है, क्योंकि यह हाइड्रोजन की तुलना में सुरक्षित (अज्वलनशील) है। यह वायु
से हल्का होता है, जिससे यह ऊपर उठता है।
- सल्फर का गलनांक 115.21°C है, जो अपेक्षाकृत कम होने
के कारण इसे आसानी से द्रवित किया जा सकता है। इसका क्वथनांक 444.6°C है। गर्म करने पर इसकी श्यानता पहले
बढ़ती है, फिर घटती है।
- नाइट्रोजन का क्वथनांक -195.8°C है, जिससे यह तरल
नाइट्रोजन के रूप में क्रायोजेनिक अनुप्रयोगों में उपयोगी होती है। इसका गलनांक -209.86°C है। यह अत्यंत
शीतलन में कार्य करती है।
- फ्लोरीन का क्वथनांक -188.12°C है, जो अत्यंत कम होने
के कारण यह सामान्य ताप पर गैसीय अवस्था में रहता है। इसका गलनांक -219.67°C है। यह सर्वाधिक विद्युतऋणात्मक
तत्व है।
- हीलियम का क्वथनांक -268.93°C है, जो किसी भी तत्व का
सबसे निम्नतम क्वथनांक है। यह परम शून्य के निकट भी द्रव अवस्था में बना रहता है। इसका उपयोग अतिचालकता
अनुसंधान में होता है।
- सल्फर का उपयोग रबर वल्कनीकरण (Vulcanization) में
किया जाता है, जिससे प्राकृतिक रबर अधिक मजबूत एवं ताप-प्रतिरोधी बन जाता है। इस प्रक्रिया में रबर में
अनुप्रस्थ-आबंधन (cross-linking) होता है, जिससे टायर बनते हैं।
- नाइट्रोजन का उपयोग खाद्य संरक्षण (MAP पैकेजिंग) में
किया जाता है, जहाँ यह ऑक्सीजन को विस्थापित करके ऑक्सीकरण एवं जीवाणु वृद्धि रोकता है। चिप्स के पैकेटों
में नाइट्रोजन भरी जाती है, जिससे उत्पाद ताजा एवं कुरकुरा बना रहता है।
- क्लोरीन का उपयोग ब्लीच (विरंजक) बनाने में किया जाता
है, जैसे सोडियम हाइपोक्लोराइट (NaClO) जो घरेलू ब्लीच है। यह कपड़ों को सफेद करने एवं सतहों को कीटाणुरहित
करने में प्रयुक्त होता है।
- आर्गन (Ar) का उपयोग विद्युत बल्बों
में भरने के लिए किया जाता है, जहाँ यह ऑक्सीजन को प्रवेश करने से रोकता है तथा टंगस्टन फिलामेंट को जलने से
बचाता है। यह निष्क्रिय वातावरण प्रदान करता है।
- सल्फर पीला क्रिस्टलीय ठोस होता है, जो गंधक के नाम से
भी जाना जाता है। यह तीन अपरूपों (रोम्बिक, मोनोक्लिनिक, अनाकार) में पाया जाता है। गर्म करने पर यह पिघलकर
गहरे लाल रंग का द्रव बन जाता है।
- नाइट्रोजन रंगहीन, गंधहीन एवं स्वादहीन गैस है, जो
सामान्य ताप पर अक्रिय व्यवहार दर्शाती है। यह जल में अल्प घुलनशील होती है तथा लगभग सभी तत्वों से
अभिक्रिया नहीं करती। इसका उपयोग सुरक्षात्मक वातावरण में होता है।
- हैलोजन अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होते हैं क्योंकि इनके
बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं। ये प्रबल ऑक्सीकारक होते हैं। इनकी प्रतिक्रियाशीलता का क्रम: F >
Cl > Br > I होता है।
- अक्रिय गैसें रासायनिक रूप से निष्क्रिय होती हैं
क्योंकि इनके बाह्यतम कोश पूर्णतः भरे होते हैं (He में 2, शेष में 8 इलेक्ट्रॉन)। सामान्य परिस्थितियों में
ये यौगिक नहीं बनाती, किंतु भारी अक्रिय गैसें कुछ यौगिक बना सकती हैं।
- सल्फर का उपयोग सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) बनाने में
किया जाता है, जो सबसे अधिक उत्पादित एवं सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक अम्ल है। इसका उपयोग उर्वरक, बैटरी,
पेट्रोलियम शोधन, इस्पात संक्षारण एवं रंग उद्योग में होता है।
- नाइट्रोजन का उपयोग अमोनिया (NH₃) संश्लेषण (हैबर
प्रक्रम) में किया जाता है, जहाँ N₂ और H₂ उच्च ताप एवं दबाव पर अभिकृत होकर अमोनिया बनाते हैं। अमोनिया से
यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट जैसे उर्वरक बनते हैं, जो खाद्य आपूर्ति के लिए अनिवार्य हैं।
- फ्लोरीन का उपयोग टेफ्लॉन (PTFE) बनाने में किया जाता
है, जो एक अत्यधिक अक्रिय, अचिपकने वाला एवं उच्च-ताप सहनशील पॉलिमर है। इसका उपयोग नॉन-स्टिक कुकवेयर,
रासायनिक पाइपिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इन्सुलेटर एवं चिकित्सा उपकरणों में होता है।
- नियॉन (Ne) का उपयोग विज्ञापन संकेतों (नियॉन
लैंप) में किया जाता है, जहाँ उच्च वोल्टेज प्रवाहित करने पर यह नारंगी-लाल रंग का प्रकाश
उत्सर्जित करता है। प्रत्येक अक्रिय गैस अपना विशिष्ट रंग देती है। इसका उपयोग उच्च-वोल्टेज संकेतकों में भी
होता है।
- सल्फर का परमाणु क्रमांक 16 है तथा इसका इलेक्ट्रॉन
विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁴ है। यह तीसरे आवर्त एवं समूह 16 में स्थित है। प्रकृति में यह चार स्थायी
समस्थानिकों के रूप में पाया जाता है, जिनमें ³²S (95%) सबसे प्रचुर है।
- नाइट्रोजन का परमाणु क्रमांक 7 है, इलेक्ट्रॉन विन्यास
1s² 2s² 2p³ है। यह दूसरे आवर्त एवं समूह 15 में स्थित है। इसके दो स्थायी समस्थानिक हैं - ¹⁴N (99.6%) एवं
¹⁵N (0.4%)। यह नाइट्रोजन चक्र का आधार है।
- क्लोरीन का परमाणु क्रमांक 17 है, इलेक्ट्रॉन विन्यास
1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁵ है। यह तीसरे आवर्त एवं समूह 17 में स्थित है। प्रकृति में यह दो स्थायी समस्थानिकों
³⁵Cl (75.77%) एवं ³⁷Cl (24.23%) के मिश्रण के रूप में पाई जाती है।
- हीलियम का परमाणु क्रमांक 2 है, इलेक्ट्रॉन विन्यास
1s² है, जो पूर्णतः भरा हुआ K-कोश है। यह ब्रह्मांड में दूसरा सबसे प्रचुर तत्व है। पृथ्वी पर यह प्राकृतिक
गैस क्षेत्रों में रेडियोधर्मी क्षय के उपोत्पाद के रूप में मिलता है।
- सल्फर का उपयोग कीटनाशक (सल्फर फ्यूमिगेंट) के रूप में
किया जाता है, जो कवकनाशी एवं कीटनाशी दोनों है। तत्वीय सल्फर जैविक खेती में फफूंद एवं माइट्स को नियंत्रित
करने के लिए पाउडर या फ्यूमिगेंट के रूप में प्रयुक्त होता है। यह पौधों को फफूंद रोगों से बचाता है।
- नाइट्रोजन का उपयोग विस्फोटक (TNT, नाइट्रोग्लिसरीन)
बनाने में किया जाता है, जहाँ नाइट्रो समूह (-NO₂) की उपस्थिति यौगिकों को अस्थिर एवं ऊर्जावान बनाती है।
अमोनियम नाइट्रेट (NH₄NO₃) का उपयोग उर्वरक के साथ-साथ खनन विस्फोटकों (ANFO) में भी किया जाता है।
- ब्रोमीन (Br) एकमात्र ऐसा अधातु है जो द्रव
अवस्था में पाया जाता है (कमरे के ताप पर)। यह गहरे लाल-भूरे रंग का, अत्यधिक अस्थिर एवं
संक्षारक द्रव होता है। इसका परमाणु क्रमांक 35 है तथा क्वथनांक 58.8°C होता है।
- क्रिप्टॉन (Kr) का उपयोग लेजर तकनीक (एक्साइमर
लेजर) में किया जाता है, विशेष रूप से क्रिप्टॉन फ्लोराइड (KrF) लेजर जो पराबैंगनी विकिरण
उत्पन्न करता है। इसका उपयोग सेमीकंडक्टर निर्माण, LASIK सर्जरी एवं वैज्ञानिक अनुसंधानों में किया जाता है।
यह उच्च-प्रदर्शन लैंपों में भी भरा जाता है।
- सल्फर का उपयोग दवाइयों (सल्फोनामाइड्स / सल्फा दवाएँ)
में होता है, जो प्रथम प्रभावी जीवाणुरोधी औषधियाँ थीं। ये मूत्र मार्ग संक्रमण एवं अन्य जीवाणु रोगों के
उपचार में प्रयुक्त होती हैं। सल्फर का उपयोग त्वचा रोगों (एक्ने, सोरायसिस) के उपचार में सामयिक क्रीम के
रूप में भी होता है।
- तरल नाइट्रोजन (-196°C) का उपयोग क्रायोजेनिक
शीतलन में किया जाता है, जो जैविक नमूनों (रक्त, ऊतक, शुक्राणु) के दीर्घकालीन संरक्षण के लिए
आवश्यक है। इसका उपयोग क्रायोसर्जरी (त्वचा के मस्सों को जमाकर हटाने), अतिचालकता अनुसंधान एवं फूड फ्लैश
फ्रीजिंग में किया जाता है।
- आयोडीन (I) का उपयोग थायराइड उपचार एवं
कीटाणुनाशक में किया जाता है। थायरॉक्सिन हार्मोन के निर्माण के लिए यह आवश्यक है। इसकी कमी से
गण्डमाला (goiter) होता है, जिसके निवारण हेतु नमक में आयोडीन मिलाया जाता है। आयोडीन टिंचर एक प्रभावी
एंटीसेप्टिक है।
- रेडॉन (Rn) एक रेडियोधर्मी अक्रिय
गैस है जो रेडियम के α-क्षय से उत्पन्न होती है। यह रंगहीन एवं गंधहीन होती है, जो यूरेनियम
युक्त चट्टानों से उत्सर्जित होती है। यह कैंसरजनक है और फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकती है। इसकी अर्धायु
3.8 दिन होती है।
- सल्फर का उपयोग माचिस (सुरक्षा माचिस) बनाने में किया
जाता है, जहाँ माचिस की तीली के सिरे पर सल्फर एवं लाल फास्फोरस का मिश्रण होता है। डिब्बे के किनारे रगड़ने
पर घर्षण से ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे माचिस जल उठती है। यह पारंपरिक माचिस उद्योग का अभिन्न अंग रहा
है।
- नाइट्रोजन का उपयोग स्टेनलेस स्टील (अस्टेनाइटिक
स्टील) बनाने में किया जाता है, जहाँ नाइट्रोजन मिलाने से इस्पात की संक्षारण प्रतिरोधकता एवं यांत्रिक
शक्ति बढ़ जाती है। यह इस्पात उच्च ताप पर भी मजबूती बनाए रखता है, अतः इसका उपयोग रासायनिक संयंत्रों एवं
सर्जिकल उपकरणों में होता है।
- क्लोरीन का उपयोग पीवीसी (PVC) बनाने में किया जाता
है, जो विश्व में सबसे अधिक उत्पादित प्लास्टिकों में से एक है। PVC का उपयोग निर्माण सामग्री (पाइप, खिड़की
के फ्रेम), विद्युत केबल इन्सुलेशन, चिकित्सा उपकरण (रक्त बैग), खिलौने एवं कृत्रिम चमड़े में व्यापक रूप से
होता है।
- आर्गन (Ar) का उपयोग धातु वेल्डिंग
(TIG/MIG) में सुरक्षात्मक (शील्ड) गैस के रूप में किया जाता है। यह पिघले हुए धातु क्षेत्र को
वायुमंडलीय ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन से बचाता है, जो अन्यथा ऑक्साइड बनाकर वेल्ड को भंगुर बना सकते हैं। इसका
उपयोग एल्युमीनियम एवं स्टेनलेस स्टील की वेल्डिंग में होता है।
- सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) एक प्रमुख वायु
प्रदूषक है, जो कोयला एवं खनिज तेल के दहन से उत्सर्जित होता है। यह अम्ल वर्षा का मुख्य कारण
है, क्योंकि वायुमंडल में यह जल के साथ अभिक्रिया कर सल्फ्यूरस एवं सल्फ्यूरिक अम्ल बना लेता है। इससे मृदा,
जल स्रोत एवं इमारतों को नुकसान होता है।
- नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO, NO₂) नाइट्रिक अम्ल
(HNO₃) बनाते हैं, जो अम्ल वर्षा का एक अन्य प्रमुख कारण है। वाहनों के इंजनों में उच्च ताप पर
N₂ एवं O₂ अभिक्रिया कर NOₓ बनाते हैं। ये गैसें जल के साथ अभिक्रिया कर नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं, जो धूम्र
कोहरे (smog) एवं ओजोन प्रदूषण का भी कारण बनती हैं।
- फ्लोरीन का उपयोग दंत मंजन (टूथपेस्ट) एवं पेयजल में
(फ्लोराइड) किया जाता है, जो दंत क्षय (कैविटी) रोकने में सहायक होता है। सोडियम फ्लोराइड (NaF) दाँतों के
इनेमल को मजबूत बनाता है तथा अम्लों के प्रति प्रतिरोध बढ़ाता है। यह दाँतों पर फ्लोरोपैटाइट की सुरक्षात्मक
परत बनाता है।
- हीलियम का उपयोग एमआरआई मशीनों में किया जाता है, जहाँ
अतिचालक चुंबकों को अति-निम्न ताप पर ठंडा करने के लिए तरल हीलियम (-269°C) का उपयोग किया जाता है। यह
शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है, जिससे शरीर के अंगों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन छवियाँ बनती हैं।
केवल हीलियम ही इतने निम्न ताप पर द्रवित रहता है।
- सल्फर का उपयोग रासायनिक उद्योग में मूलभूत कच्चे माल
के रूप में होता है। सल्फ्यूरिक अम्ल उद्योग का 'रक्त' कहलाता है। कार्बन डाइसल्फाइड (CS₂) का उपयोग रेयॉन
फाइबर बनाने में होता है। सल्फाइट्स का उपयोग कागज उद्योग एवं खाद्य परिरक्षक के रूप में किया जाता है।
- नाइट्रोजन का उपयोग रासायनिक संश्लेषण में (हैबर
प्रक्रम, ओस्टवाल्ड प्रक्रम) किया जाता है। हैबर प्रक्रम से अमोनिया, ओस्टवाल्ड प्रक्रम से नाइट्रिक अम्ल
बनता है। नाइट्रिक अम्ल का उपयोग TNT, नाइट्रोग्लिसरीन, नाइट्रोसेल्यूलोज (फोटोग्राफी फिल्म) बनाने में होता
है। यह औद्योगिक रसायनों का आधार है।
- ब्रोमीन (Br) का उपयोग अग्निशामकों (हैलोन
यौगिक) में किया जाता था, जो आग बुझाने में अत्यधिक प्रभावी थे। परंतु इनके ओजोन क्षयकारी
गुणों के कारण मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) के तहत इनका उत्पादन एवं उपयोग प्रतिबंधित कर दिया गया। अब
पर्यावरण-अनुकूल अग्निशामकों का उपयोग किया जाता है।
- नियॉन (Ne) का उपयोग लाइट ट्यूब एवं
उच्च-वोल्टेज संकेतकों में किया जाता है। नियॉन लैंप में कम दबाव पर नियॉन गैस भरी होती है,
जिसमें उच्च वोल्टेज लगाने पर यह नारंगी-लाल प्रकाश उत्सर्जित करती है। इसका उपयोग सर्किट ब्रेकरों, टेस्टर
एवं वोल्टेज प्रोटेक्टर में संकेतक के रूप में भी किया जाता है।
- सल्फर का उपयोग उर्वरकों (सल्फर-लेपित यूरिया, अमोनियम
सल्फेट) में किया जाता है, क्योंकि सल्फर पौधों के लिए एक आवश्यक द्वितीयक पोषक तत्व है। यह प्रोटीन निर्माण
में अमीनो अम्ल (सिस्टीन, मेथिओनिन) तथा विटामिन (बायोटिन, थायामिन) का अभिन्न अंग है। इसकी कमी से पौधों की
वृद्धि रुक जाती है।
- नाइट्रोजन का उपयोग खनन (ANFO विस्फोटक) में किया जाता
है, जहाँ अमोनियम नाइट्रेट (NH₄NO₃) एवं ईंधन तेल का मिश्रण विस्फोटक के रूप में प्रयुक्त होता है। ANFO
सस्ता एवं सुरक्षित होता है, जिसके कारण यह विश्व में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला खनन विस्फोटक है। इसका
उपयोग कोयला, तांबा, लौह अयस्क एवं चूना पत्थर के खनन में होता है।
- आयोडीन का उपयोग कीटाणुनाशक (आयोडीन टिंचर,
पोविडोन-आयोडीन) में व्यापक रूप से होता है, जो जीवाणुओं, विषाणुओं एवं कवकों को नष्ट करने में सक्षम है।
पोविडोन-आयोडीन (बीटाडीन) ऑपरेशन से पहले त्वचा की सफाई के लिए स्वर्ण मानक माना जाता है। यह प्रोटीन को
आयोडिनेट कर एंजाइमों को निष्क्रिय कर देता है।
- क्रिप्टॉन (Kr) का उपयोग फोटोग्राफी (फ्लैश
लैंप) एवं लेजर में किया जाता है। क्रिप्टॉन से भरे फ्लैश बल्ब आर्गन बल्बों की तुलना में अधिक
चमकदार एवं कुशल होते हैं। क्रिप्टॉन-86 का उपयोग कभी मीटर की परिभाषा (1960-1983) के लिए एक मानक के रूप
में किया जाता था। इसका उपयोग उच्च-प्रदर्शन हलोजन लैंप में भी होता है।
- सल्फर का उपयोग रंग निर्माण (लिथोपोन, अल्ट्रामरीन,
थायोइंडिगो) में किया जाता है। लिथोपोन (BaSO₄ + ZnS) एक श्वेत वर्णक है जो पेंट में प्रयुक्त होता है।
अल्ट्रामरीन (नीला रंग) सल्फर, सोडियम एलुमिनोसिलिकेट एवं सोडियम सल्फेट से बनता है, जिसका उपयोग कपड़ा एवं
प्लास्टिक में होता है।
- नाइट्रोजन का उपयोग औषधि निर्माण (नाइट्रोफ्यूरेंटोइन,
नाइट्रोग्लिसरीन, सल्फा दवाएँ) में किया जाता है। नाइट्रोफ्यूरेंटोइन मूत्र मार्ग संक्रमण में एंटीबायोटिक
है। नाइट्रोग्लिसरीन हृदयशूल (एनजाइना) के उपचार में वैसोडिलेटर है। नाइट्रोजन प्रोटीन, DNA एवं RNA का
अभिन्न अंग है, अतः चिकित्सा विज्ञान का आधार है।
- क्लोरीन (Cl) का उपयोग कीटाणुनाशक (जल शोधन,
स्विमिंग पूल) के रूप में सर्वाधिक मात्रा में किया जाता है। क्लोरीन जल में घुलकर हाइपोक्लोरस
अम्ल (HOCl) बनाती है, जो सूक्ष्मजीवों की कोशिका भित्ति को नष्ट कर देती है। नगर निगमों द्वारा पेयजल का
क्लोरीनीकरण अनिवार्य रूप से किया जाता है, जिसने जलजनित रोगों को लगभग समाप्त कर दिया है।
- आर्गन (Ar) का उपयोग धातु गलाने एवं शोधन (AOD
प्रक्रम) में सुरक्षात्मक वातावरण बनाने के लिए किया जाता है। AOD प्रक्रम में आर्गन ऑक्सीजन
के साथ मिलाकर कार्बन को नियंत्रित तरीके से हटाता है, जिससे स्टेनलेस स्टील का उत्पादन होता है। टाइटेनियम,
जिरकोनियम जैसी रिएक्टिव धातुओं की ढलाई में आर्गन अनिवार्य है।
- सल्फर का क्वथनांक 444.6°C है, जो अपेक्षाकृत उच्च
होने के कारण यह सामान्य ताप पर ठोस रहता है। गर्म करने पर सल्फर बिना द्रवित हुए कुछ उर्ध्वपातन भी करता
है। सल्फर वाष्प के विभिन्न आण्विक रूप (S₂ से S₈) ताप के अनुसार बदलते हैं। 720°C पर यह मुख्यतः S₂ अणुओं
के रूप में होती है।
- नाइट्रोजन का गलनांक -209.86°C एवं क्वथनांक -195.8°C
है, जो इसे तरल नाइट्रोजन के रूप में क्रायोजेनिक द्रव बनाता है। तरल नाइट्रोजन का उपयोग क्रायोजेनिक मिलिंग
(बिना ऑक्सीकरण के पीसना), संकुचन-फिटिंग, जैविक नमूना संरक्षण (ब्लड बैंक), एवं खाद्य फ्लैश फ्रीजिंग
(आइसक्रीम) में होता है।
- फ्लोरीन (F) का परमाणु क्रमांक 9 है तथा इसकी
विद्युतऋणात्मकता (3.98) सबसे अधिक है। यह अत्यधिक विषैली एवं संक्षारक गैस है, जो कांच
(SiO₂) को भी क्षरण कर सकती है। इसके यौगिकों का उपयोग यूरेनियम संवर्धन (UF₆), रेफ्रिजरेंट (फ्रेऑन) एवं
एल्युमीनियम गलाने (क्रायोलाइट) में किया जाता है।
- हीलियम (He) का उपयोग डाइविंग टैंकों (स्कूबा
डाइविंग) में गहरे समुद्र में गोताखोरी के लिए किया जाता है। हीलियम, नाइट्रोजन की तुलना में
रक्त में 50% कम घुलनशील है, अतः यह डीकंप्रेशन सिकनेस (द बेंड्स) को रोकता है। हीलियम-ऑक्सीजन मिश्रण
(हेलिओक्स) का उपयोग 50 मीटर से अधिक गहराई पर किया जाता है।
- सल्फर का उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों (क्रीम, शैम्पू,
साबुन) में मुँहासे (एक्ने) एवं रूसी (डैंड्रफ) के उपचार के लिए किया जाता है। सल्फर एक केराटोलिटिक एजेंट
है, जो मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाता है एवं रोम छिद्र खोलता है। यह सूजनरोधी एवं रोगाणुरोधी गुण भी रखता है,
जिससे एक्ने पैदा करने वाले जीवाणु मर जाते हैं।
- नाइट्रोजन का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग (अर्धचालक
निर्माण) में अक्रिय वातावरण बनाने के लिए किया जाता है। सिलिकॉन वेफर्स के निर्माण के दौरान उच्च ताप पर
ऑक्सीकरण रोकने के लिए नाइट्रोजन का उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग रीफ्लो ओवन (SMT सोल्डरिंग), वेफर
हैंडलिंग एवं इलेक्ट्रॉनिक घटकों की पैकेजिंग में भी होता है।
- ब्रोमीन (Br) का क्वथनांक 58.8°C है, जो अधातुओं में
एकमात्र ऐसा है जो कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पाया जाता है। यह गहरे लाल-भूरे रंग का द्रव है जो अस्थिर
एवं तीखी गंध वाला होता है। यह त्वचा के संपर्क में आने पर गंभीर रासायनिक जलन उत्पन्न करता है। इसका उपयोग
फोटोग्राफी फिल्म (AgBr) एवं दवाइयों के निर्माण में होता है।
- रेडॉन (Rn) का उपयोग कैंसर उपचार
(ब्रेकीथेरेपी) में किया जाता था, विशेष रूप से प्रोस्टेट एवं त्वचा के कैंसर में। रेडॉन सीड
सीधे ट्यूमर के अंदर रखे जाते थे, जहाँ से अल्फा विकिरण कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देता था। रेडॉन-222 की
अर्धायु 3.8 दिन होती है। अब इसके स्थान पर I-125, Ir-192 का उपयोग होता है।
- सल्फर का उपयोग डिटर्जेंट (LABS) बनाने में होता है,
जो आधुनिक सिंथेटिक डिटर्जेंट का मुख्य अवयव है। LABS एक सल्फोनेटेड यौगिक है जिसमें रेखीय एल्किल श्रृंखला
बेंजीन रिंग से जुड़ी होती है। सल्फोनेट समूह जल-प्रेमी (हाइड्रोफिलिक) होता है, जबकि एल्किल श्रृंखला
जल-विरोधी (हाइड्रोफोबिक) होती है, जिससे ग्रीस घुल जाता है।
- नाइट्रोजन का उपयोग पेट्रोलियम शोधन में अक्रिय गैस के
रूप में किया जाता है, जहाँ यह ऑक्सीजन को विस्थापित करता है और आग या विस्फोट के जोखिम को कम करता है।
रिफाइनरियों में टैंकों एवं पाइपलाइनों की सफाई से पहले नाइट्रोजन से शुद्धिकरण (purging) किया जाता है।
इसका उपयोग तेल कुओं में दबाव बनाए रखने के लिए भी किया जाता है।
- क्लोरीन का क्वथनांक -34.04°C है, जो कमरे के ताप पर
इसे गैसीय अवस्था में रखता है। यह हरे-पीले रंग की, तीखी एवं दम घोंटू गंध वाली गैस है, जो वायु से 2.5 गुना
सघन होती है, अतः रिसाव पर यह नीचे जमा हो जाती है। 1000 ppm पर कुछ ही साँसों में मृत्यु हो सकती है। इसका
उपयोग प्रथम विश्व युद्ध में रासायनिक हथियार के रूप में किया गया था।
- नियॉन (Ne) का क्वथनांक -245.92°C है, जो हीलियम के
बाद दूसरा सबसे कम क्वथनांक है। इसका परमाणु क्रमांक 10 है तथा इलेक्ट्रॉन विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ (पूर्ण
अष्टक) है। यह अत्यधिक निष्क्रिय है तथा कोई स्थायी रासायनिक यौगिक नहीं बनाता। नियॉन ब्रह्मांड में पाँचवाँ
सबसे प्रचुर तत्व है, परंतु पृथ्वी पर दुर्लभ (18 ppm) है।
- सल्फर का उपयोग सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) उत्पादन में
किया जाता है, जो सल्फर के वायु में दहन से बनती है। SO₂ का उपयोग सल्फ्यूरिक अम्ल निर्माण में मध्यवर्ती के
रूप में, खाद्य परिरक्षक (E220) के रूप में सूखे मेवों एवं जूस में, कागज एवं वस्त्रों के विरंजन (ब्लीचिंग)
में, एवं कीटाणुनाशक के रूप में किया जाता है।
- नाइट्रोजन का उपयोग वायु शुद्धिकरण (पर्जिंग) में किया
जाता है, जहाँ नाइट्रोजन से ऑक्सीजन, जल वाष्प एवं दूषित पदार्थ हटाए जाते हैं। फार्मास्युटिकल उद्योग में
दवाओं की पैकेजिंग से पहले ampoules को नाइट्रोजन से शुद्ध किया जाता है, जिससे ऑक्सीजन-संवेदनशील दवाएँ
खराब न हों। खाद्य पैकेजों से ऑक्सीजन निकालने के लिए भी नाइट्रोजन का उपयोग होता है।
- आयोडीन (I) का क्वथनांक 184.3°C है, जो हैलोजन समूह
में चौथा सदस्य है। यह बैंगनी-काले रंग का ठोस होता है, जो गर्म करने पर उर्ध्वपातन (बिना द्रवित हुए वाष्प)
करता है। आयोडीन थायरॉक्सिन हार्मोन के लिए अनिवार्य है; इसकी कमी से गण्डमाला होता है। विश्व स्वास्थ्य
संगठन द्वारा नमक के आयोडीनीकरण की सिफारिश की गई है।
- क्रिप्टॉन (Kr) का उपयोग मापक यंत्रों (स्तर
संसूचक, लीक डिटेक्टर) एवं वैज्ञानिक अनुसंधानों में किया जाता है। क्रिप्टॉन-85 (रेडियोधर्मी,
अर्धायु 10.76 वर्ष) का उपयोग बीटा-विकिरण स्रोत के रूप में कागज एवं धातु फॉइल की मोटाई मापने में किया
जाता है। क्रिप्टॉन-81 का उपयोग भू-जल कालनिर्धारण (50,000-800,000 वर्ष) में किया जाता है।
- सल्फर का उपयोग रासायनिक संयंत्रों (उत्प्रेरक,
मध्यवर्ती) में अनेक रूपों में किया जाता है। सल्फ्यूरिक अम्ल संयंत्र सबसे बड़े रासायनिक संयंत्र हैं।
सल्फर का उपयोग कार्बन डाइसल्फाइड (CS₂) संयंत्रों में होता है, जिससे रेयॉन फाइबर बनता है। थियोफीन (C₄H₄S)
का उपयोग औषधियों एवं एग्रोकेमिकल्स में होता है।
- नाइट्रोजन का उपयोग नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) बनाने
में किया जाता है, जो एक भूरी-लाल रंग की विषैली गैस एवं शक्तिशाली ऑक्सीकारक है। NO₂ का उत्पादन नाइट्रिक
अम्ल संश्लेषण (ओस्टवाल्ड प्रक्रम) में एक मध्यवर्ती के रूप में होता है। यह एक प्रमुख वायु प्रदूषक है जो
धूम्र कोहरे (smog) एवं अम्ल वर्षा का कारण बनता है।
- फ्लोरीन (F) का उपयोग रासायनिक उद्योग (UF₆,
HF, SF₆) में व्यापक रूप से होता है। यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (UF₆) का उपयोग यूरेनियम संवर्धन
(नाभिकीय ईंधन) के लिए किया जाता है। हाइड्रोफ्लुओरिक अम्ल (HF) का उपयोग कांच नक़्क़ाशी एवं एल्काइलेशन
उत्प्रेरक में होता है। सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF₆) एक उच्च-वोल्टेज विद्युत इन्सुलेटर है।
- हीलियम (He) का उपयोग अंतरिक्ष अनुसंधान
(रॉकेट ईंधन टैंक शुद्धिकरण) में किया जाता है। रॉकेट ईंधन टैंकों को भरने से पहले हीलियम से
शुद्ध किया जाता है, क्योंकि यह अत्यधिक निष्क्रिय है एवं किसी भी अवशिष्ट गैस को हटा देता है। हीलियम का
उपयोग रॉकेट टैंकों में दबाव बनाए रखने (pressurization) के लिए भी किया जाता है।
- सल्फर का उपयोग सल्फोनामाइड दवाओं (सल्फा दवाएँ) में
किया जाता है, जो प्रथम प्रभावी जीवाणुरोधी एजेंट थे। ये दवाएँ जीवाणुओं में फोलेट संश्लेषण (आवश्यक एंजाइम
DHPS) को बाधित करती हैं। मनुष्यों में फोलेट संश्लेषण नहीं होता, इसलिए ये मनुष्य को नुकसान पहुँचाए बिना
जीवाणुओं को मार देती हैं। इनका उपयोग UTI, ब्रोंकाइटिस एवं डायरिया में किया जाता है।
- नाइट्रोजन का उपयोग रासायनिक उर्वरक (यूरिया, अमोनियम
नाइट्रेट) में सबसे अधिक मात्रा में किया जाता है। विश्व के कुल नाइट्रोजन उत्पादन का 80%
उर्वरकों में चला जाता है। हैबर प्रक्रम के बिना वर्तमान विश्व जनसंख्या का भरण-पोषण संभव नहीं होता। यूरिया
(46% N) सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला ठोस नाइट्रोजन उर्वरक है।
- ब्रोमीन (Br) का परमाणु क्रमांक 35 है तथा इलेक्ट्रॉन
विन्यास [Ar] 3d¹⁰ 4s² 4p⁵ है। यह हैलोजन समूह का तीसरा सदस्य है। प्रकृति में ब्रोमीन समुद्री जल (65 ppm)
एवं मृत सागर के जल में NaBr, KBr, MgBr₂ के रूप में पाया जाता है। इसका निष्कर्षण समुद्री जल से क्लोरीन
गैस प्रवाहित करके किया जाता है: 2Br⁻ + Cl₂ → Br₂ + 2Cl⁻।
- आर्गन (Ar) का परमाणु क्रमांक 18 है एवं यह तीसरे
आवर्त में स्थित है। आर्गन पृथ्वी के वायुमंडल में सबसे प्रचुर अक्रिय गैस है (0.934%)। इसकी प्रचुरता का
कारण यह है कि Ar-40 पोटैशियम-40 के रेडियोधर्मी β-क्षय से उत्पन्न होता है। आर्गन की खोज 1894 में लॉर्ड
रेले एवं सर विलियम रैमसे ने की थी।
- सल्फर का उपयोग सल्फर यौगिकों (H₂S, SOCl₂, SO₂Cl₂)
बनाने में मूलभूत तत्व के रूप में होता है। हाइड्रोजन सल्फाइड (H₂S) एक अत्यधिक विषैली, सड़े अंडे जैसी गंध
वाली गैस है। थियोनिल क्लोराइड (SOCl₂) का उपयोग कार्बोक्सिलिक अम्लों को एसिड क्लोराइड्स में परिवर्तित
करने के लिए किया जाता है (मेडिसिनल केमिस्ट्री में महत्वपूर्ण)।
- नाइट्रोजन का उपयोग खाद्य उद्योग (MAP, फ्लैश
फ्रीजिंग) में व्यापक रूप से होता है। MAP (मॉडिफाइड एटमॉस्फियर पैकेजिंग) में खाद्य पैकेज से
ऑक्सीजन हटाकर नाइट्रोजन भरी जाती है, जिससे ऑक्सीकरण एवं जीवाणु वृद्धि रुकती है। तरल नाइट्रोजन का उपयोग
खाद्य पदार्थों के त्वरित फ्रीजिंग में किया जाता है, जिससे बनावट एवं गुणवत्ता बनी रहती है।
- क्लोरीन का उपयोग रासायनिक हथियारों (प्रथम विश्व
युद्ध) में किया गया था। 22 अप्रैल 1915 को Ypres में जर्मन सेना द्वारा पहली बार क्लोरीन गैस
का प्रयोग किया गया था, जिससे 5,000 सैनिक मारे गए। क्लोरीन फुफ्फुसीय एडिमा (फेफड़ों में द्रव जमा) से
मृत्यु का कारण बनती है। 1925 के जिनेवा प्रोटोकॉल के तहत रासायनिक हथियारों पर प्रतिबंध है।
- नियॉन (Ne) का परमाणु क्रमांक 10 है तथा यह दूसरे
आवर्त का अंतिम तत्व है। इसका नाम ग्रीक शब्द 'नियोस' (नया) से लिया गया है, जो 1898 में इसकी खोज के समय
दिया गया था। नियॉन के तीन स्थायी समस्थानिक हैं: ²⁰Ne (90.48%), ²¹Ne (0.27%), ²²Ne (9.25%)। He-Ne लेजर
(632.8 nm लाल प्रकाश) का आविष्कार 1960 में हुआ था।