अम्ल, क्षार, लवण
- खट्टे खाद्य पदार्थों (नींबू, इमली) की प्रकृति अम्लीय होती है क्योंकि इनमें विभिन्न कार्बनिक अम्ल (साइट्रिक, टार्टरिक) उपस्थित होते हैं। ये अम्ल स्वाद कलिकाओं पर H⁺ आयनों के प्रभाव से खट्टापन उत्पन्न करते हैं। अम्लीय खाद्य पदार्थों के अत्यधिक सेवन से दांतों के इनेमल को नुकसान हो सकता है।
- कड़वे खाद्य पदार्थों (करेला, सोडा) की प्रकृति क्षारीय होती है क्योंकि इनमें क्षारीय यौगिक (जैसे एल्कलॉइड) पाए जाते हैं। ये पदार्थ मुंह में कड़वाहट उत्पन्न करते हैं। अधिकांश क्षारीय खाद्य पदार्थ कड़वे स्वाद वाले होते हैं, जैसे हल्दी, मूली, कॉफी।
- अंडे को सिरके (एसीटिक अम्ल 5-8%) के विलयन में 20-24 घंटे रखने पर इसका कैल्शियम कार्बोनेट आवरण घुल जाता है क्योंकि अम्ल क्षारीय आवरण से अभिक्रिया कर CO₂ गैस उत्सर्जित करता है। इस प्रक्रिया को अंडा विलयन (डीन्यूडेशन) कहते हैं। इस प्रयोग से अंडे की अर्धपारदर्शी झिल्ली दिखाई देती है, जिससे कोशिका झिल्ली का अध्ययन किया जाता है।
- साइट्रिक अम्ल (C₆H₈O₇) का प्राथमिक स्रोत नारंगी (संतरा) है जिसमें यह 1% तक पाया जाता है। यह अम्ल नींबू, मौसंबी, ग्रेपफ्रूट, कीवी एवं अन्य खट्टे फलों में भी प्रचुर मात्रा में होता है। इसका उपयोग खाद्य परिरक्षक (E330), पेय पदार्थों में स्वाद बढ़ाने, एंटीऑक्सीडेंट के रूप में तथा डिटर्जेंट में पानी को मृदु बनाने के लिए किया जाता है।
- अत्यधिक अम्लीय मृदा (pH 4.5 से कम) को उदासीन करने के लिए बुझा हुआ चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, Ca(OH)₂) प्रयोग किया जाता है क्योंकि यह क्षारीय होता है जो मृदा के अम्ल को उदासीन करता है। इस प्रक्रिया को चूना लगाना (लाइमिंग) कहते हैं। यह मृदा के pH को बढ़ाकर 6.5-7.0 (उर्वरता के लिए आदर्श) करता है तथा पौधों को कैल्शियम एवं मैग्नीशियम प्रदान करता है।
- सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) का दूसरा नाम धोने का सोडा (वॉशिंग सोडा) है जो कपड़ों से ग्रीस एवं तेल हटाने में सहायक होता है। यह जल की स्थायी कठोरता (कैल्शियम एवं मैग्नीशियम सल्फेट/क्लोराइड) को दूर करता है। इसका दस अणु जलयोजित रूप (Na₂CO₃·10H₂O) सामान्यतः धोने के सोडे के रूप में मिलता है। इसका उपयोग कांच, कागज, साबुन एवं डिटर्जेंट उद्योग में होता है।
- अम्लीय या क्षारीय पदार्थ की जांच के लिए सूचक (इंडिकेटर) का उपयोग होता है जो pH के अनुसार अपना रंग बदलता है। प्राकृतिक सूचकों में लिटमस (लाइकेन से प्राप्त), हल्दी (करक्यूमिन), लाल गोभी, चाय, अंगूर, गुड़हल के फूल प्रमुख हैं। कृत्रिम सूचकों में फिनॉलफ्थेलिन, मेथिल ऑरेंज, ब्रोमोथाइमॉल ब्लू, यूनिवर्सल इंडिकेटर शामिल हैं।
- चुने का पानी (लाइम वॉटर) रासायनिक रूप से कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, Ca(OH)₂ है, न कि कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) क्योंकि यह क्षारीय विलयन होता है। इसे बिना बुझे चूने (CaO) को जल में घोलकर बनाया जाता है। यह जल में अल्प घुलनशील होता है तथा इसका उपयोग CO₂ गैस की पहचान के लिए किया जाता है, जिससे यह दूधिया (CaCO₃ अवक्षेप) हो जाता है।
- सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃) को अत्यधिक गर्म करने (200°C से अधिक) पर सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃), जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनता है इस अभिक्रिया को कैल्सीनेशन कहते हैं: 2NaHCO₃ → Na₂CO₃ + H₂O + CO₂↑। इस गुण के कारण ही बेकिंग सोडा को बेकिंग पाउडर में उपयोग किया जाता है, जहाँ गर्म करने पर CO₂ निकलकर आटा फूलाती है। औद्योगिक रूप से इसी विधि से सोडियम कार्बोनेट बनाया जाता है।
- अम्ल (जैसे H₂SO₄, HCl, HNO₃, CH₃COOH) नीले लिटमस पेपर को लाल रंग में बदल देते हैं क्योंकि अम्ल H⁺ आयन मुक्त करते हैं जो लिटमस के रंगद्रव्य (अज़ुराइटिन) के साथ अभिक्रिया कर रंग परिवर्तन करते हैं। यह गुण अम्ल पहचान का सबसे सरल एवं प्राचीनतम तरीका है। क्षार लाल लिटमस को नीला करते हैं। लिटमस का pH परास 4.5 (लाल) से 8.3 (नीला) तक होता है।
- कैल्शियम हाइपोक्लोराइट, Ca(OCl)₂, का सामान्य नाम ब्लीचिंग पाउडर (विरंजक चूर्ण) है जो एक पीले रंग का चूर्ण होता है। यह क्लोरीन गैस को बुझे चूने (Ca(OH)₂) पर प्रवाहित करने से बनता है। इसका उपयोग कपड़ा, कागज एवं लकड़ी के विरंजन (ब्लीचिंग), जल शुद्धिकरण एवं कीटाणुशोधन में होता है। यह एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है।
- दूधिया मैग्नीशियम (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया) में मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड, Mg(OH)₂, पाया जाता है जो एक सफेद, अघुलनशील क्षारीय यौगिक है। इसका उपयोग एंटासिड दवा के रूप में पेट के अम्ल (HCl) को उदासीन करने तथा रेचक (लैक्सेटिव) के रूप में किया जाता है। यह जल में अल्प घुलनशील होने के कारण दूधिया सस्पेंशन बनाता है, जिससे इसका नाम मिल्क ऑफ मैग्नीशिया पड़ा।
- चींटी के डंक (फॉर्मिका रूफा) में फॉर्मिक अम्ल (मेथेनोइक अम्ल, HCOOH) पाया जाता है जो जलन एवं दर्द का कारण होता है। यह सबसे सरल कार्बोक्सिलिक अम्ल है। इसका नाम लैटिन 'फॉर्मिका' (चींटी) से लिया गया है। इस अम्ल का उपयोग चमड़ा कमाने, कपड़ा रंगाई, कीटनाशक एवं रबर उद्योग में किया जाता है। डंक का प्रभाव बेकिंग सोडा (क्षार) लगाने से कम होता है।
- नीले लिटमस को लाल करने वाला द्रव अम्ल (एसिड) होता है क्योंकि अम्लीय विलयन में H⁺ आयन लिटमस के अणु की संरचना बदल देते हैं। अम्ल सभी प्रकार के लिटमस (पेपर, विलयन, टिंचर) को लाल करते हैं। क्षारीय पदार्थ लाल लिटमस को नीला करते हैं। लिटमस परीक्षण किसी पदार्थ के अम्लीय या क्षारीय होने की पुष्टि करता है, परंतु pH मान नहीं बताता।
- अंगूर (द्राक्षा) में प्रमुख रूप से टार्टरिक अम्ल (C₄H₆O₆) पाया जाता है जो अंगूर, केला, इमली, एवोकाडो में प्राकृतिक रूप से उपस्थित होता है। यह अम्ल वाइन बनाने की प्रक्रिया में अवक्षेपित होकर पोटैशियम बाइटार्ट्रेट (वाइन टार्टर) बनाता है। इसका उपयोग बेकिंग पाउडर (खमीर एजेंट), खाद्य परिरक्षक (E334), औषधियों एवं फोटोग्राफी में किया जाता है। यह एक प्रबल एंटीऑक्सीडेंट भी है।
- अम्लीय और क्षारीय तत्वों की जांच के लिए हल्दी (करक्यूमा लोंगा) का उपयोग किया जा सकता है क्योंकि इसमें करक्यूमिन नामक पीला रंगद्रव्य होता है, जो क्षारीय माध्यम में लाल-भूरा हो जाता है। अम्लीय माध्यम में यह पीला ही बना रहता है। हल्दी का पेस्ट या कागज सरल एवं सस्ता प्राकृतिक सूचक है। इसका उपयोग बोरेक्स, साबुन, सोडियम हाइड्रॉक्साइड जैसे क्षारीय पदार्थों की पहचान के लिए किया जाता है।
- सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) का उपयोग जल की स्थाई कठोरता (कैल्शियम एवं मैग्नीशियम सल्फेट/क्लोराइड) दूर करने में होता है क्योंकि यह इन धातुओं के आयनों के साथ अघुलनशील कार्बोनेट बनाता है: Ca²⁺ + CO₃²⁻ → CaCO₃↓। इस प्रक्रिया को कार्बोनेट विधि कहते हैं। अस्थाई कठोरता (Ca(HCO₃)₂, Mg(HCO₃)₂) उबालने से दूर हो जाती है। धोने का सोडा इसी उद्देश्य से उपयोग किया जाता है।
- मिट्टी की pH (अम्लता/क्षारीयता) को चूना पत्थर (कैल्शियम कार्बोनेट, CaCO₃) मिलाकर बढ़ाया जा सकता है क्योंकि यह क्षारीय प्रतिक्रिया कर अम्ल को उदासीन करता है। चूना पत्थर मृदा में पीसकर (एग्रीकल्चरल लाइम) डाला जाता है। यह मृदा के pH को धीरे-धीरे बढ़ाता है, जो अधिकांश फसलों के लिए 6.0-7.5 आदर्श होता है। बुझा चूना [Ca(OH)₂] तीव्र क्रिया करता है जबकि चूना पत्थर धीमी क्रिया करता है।
- जल में विरंजक चूर्ण (ब्लीचिंग पाउडर, Ca(OCl)₂) मिलाकर क्लोरीनेशन किया जाता है जिससे जल में क्लोरीन गैस मुक्त होकर रोगजनक जीवाणुओं, विषाणुओं एवं प्रोटोजोआ को मार देती है। मुख्य अभिक्रिया: Ca(OCl)₂ + H₂O → Ca(OH)₂ + Cl₂↑। यह पेयजल शुद्धिकरण का सबसे सस्ता एवं प्रभावी तरीका है। इसका उपयोग स्विमिंग पूल, नगर निगम जल आपूर्ति एवं खाद्य प्रसंस्करण में किया जाता है।
- सामान्य बैटरी (लीड-एसिड बैटरी) में सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) 30-40% सांद्रता में होता है जो विद्युत अपघट्य (इलेक्ट्रोलाइट) का कार्य करता है। यह लेड (Pb) एवं लेड डाइऑक्साइड (PbO₂) इलेक्ट्रोडों के मध्य आयनों का संचालन करता है। बैटरी डिस्चार्ज होने पर सल्फ्यूरिक अम्ल की सांद्रता घटती है तथा चार्ज करने पर बढ़ती है। इसी सिद्धांत पर वाहनों की बैटरी कार्य करती हैं।
- विरंजन पाउडर (ब्लीचिंग पाउडर) बनाने में क्लोरीन गैस (Cl₂) का उपयोग होता है जिसे बुझे चूने (Ca(OH)₂) पर प्रवाहित किया जाता है। अभिक्रिया: 2Cl₂ + 2Ca(OH)₂ → Ca(OCl)₂ + CaCl₂ + 2H₂O। यह पीले रंग का चूर्ण अत्यधिक अस्थिर एवं आर्द्रताशील होता है। इसकी सक्रियता समय के साथ कम होती जाती है। इसका उपयोग कीटाणुशोधन एवं विरंजन दोनों में होता है। इसका जलीय विलयन हाइपोक्लोराइट कहलाता है।
- मधुमक्खी के डंक (एपिस मेलिफेरा) को बेअसर करने के लिए बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट, NaHCO₃) उपयोगी है क्योंकि मधुमक्खी के डंक में फॉर्मिक अम्ल (HCOOH) होता है, जो एक अम्ल है। बेकिंग सोडा एक क्षारीय पदार्थ है जो अम्ल को उदासीन कर देता है। इसके विपरीत, ततैया के डंक में क्षारीय विष होता है, जिसे उदासीन करने के लिए सिरके (एसीटिक अम्ल) का उपयोग किया जाता है।
- साइनाइड (HCN) का रासायनिक नाम प्रुसिक अम्ल (हाइड्रोजन साइनाइड) है जो एक अत्यधिक विषैला, रंगहीन एवं अस्थिर द्रव है। यह बादाम की विशिष्ट गंध वाला होता है। इसका उपयोग प्लास्टिक (ऐक्रेलिक फाइबर), कीटनाशक, रंग (प्रुशियन ब्लू), औषधियाँ एवं नाइलॉन के निर्माण में होता है। साइनाइड विषैला होता है क्योंकि यह कोशिकीय श्वसन एंजाइम साइटोक्रोम ऑक्सीडेज को बाधित करता है।
- ऑयल ऑफ विट्रियल (विट्रियल का तेल) सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) का दूसरा नाम है क्योंकि प्राचीन काल में इसे हरा या नीला विट्रियल (फेरस सल्फेट या कॉपर सल्फेट) के ताप अपघटन से प्राप्त किया जाता था। यह एक गाढ़ा, रंगहीन, अत्यधिक संक्षारक तैलीय द्रव है। इसका क्वथनांक 337°C होता है। यह कागज, कपड़ा, लकड़ी एवं यहाँ तक कि मांस को भी जला देता है। इसका उपयोग उर्वरक, बैटरी, पेट्रोलियम शोधन एवं विस्फोटक बनाने में होता है।
- चुने का पानी (लाइम वॉटर) रासायनिक रूप से कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, Ca(OH)₂ है जो बिना बुझे चूने (CaO) को जल में मिलाने से बनता है: CaO + H₂O → Ca(OH)₂ + ऊष्मा। यह एक मध्यम क्षारीय विलयन है (pH लगभग 12.4)। इसका उपयोग CO₂ गैस की पहचान (दूधिया होना), सल्फर डाइऑक्साइड की अवशोषण, दीवारों की सफेदी (पेस्ट के रूप में) एवं कृषि में मृदा उपचार के लिए किया जाता है।
- ब्लीचिंग पाउडर (विरंजक चूर्ण) का रासायनिक नाम कैल्शियम हाइपोक्लोराइट, Ca(OCl)₂ है जो क्लोरीन गैस को बुझे चूने पर प्रवाहित करने से बनता है। यह एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है जो रंगों को हटाने (विरंजन) एवं कीटाणुओं को मारने का कार्य करता है। इसका उपयोग कपड़ा उद्योग, अस्पतालों, जल शुद्धिकरण संयंत्रों एवं स्विमिंग पूलों में व्यापक रूप से किया जाता है। यह हवा में नमी के संपर्क में आने पर क्लोरीन गैस मुक्त करता है, जिससे इसकी पहचान गंध से होती है।
- कोका-कोला एवं अन्य कोला पेय पदार्थों का खट्टा स्वाद फॉस्फोरिक अम्ल (H₃PO₄) के कारण होता है जो एक अकार्बनिक अम्ल है। यह कार्बोनिक अम्ल की तुलना में अधिक प्रबल होता है तथा पेय को तीखा एवं ताज़ा स्वाद प्रदान करता है। फॉस्फोरिक अम्ल पेय के pH को 2.5-3.0 के बीच बनाए रखता है, जो जीवाणुओं के विकास को रोकता है। इसका उपयोग उर्वरक (सुपरफॉस्फेट), डिटर्जेंट, खाद्य परिरक्षक एवं दांतों के उपचार में भी किया जाता है।
- बिना बुझा हुआ चूना (क्विकलाइम) कैल्शियम ऑक्साइड (CaO) है जो चूना पत्थर (CaCO₃) को उच्च ताप (900-1000°C) पर कैल्सीनेशन द्वारा प्राप्त किया जाता है: CaCO₃ → CaO + CO₂↑। यह एक सफेद, संक्षारक एवं क्षारीय ठोस है। जल के साथ तीव्र ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कर बुझा चूना [Ca(OH)₂] बनाता है। इसका उपयोग इस्पात निर्माण (अपमिश्रक हटाने), चीनी शोधन, कागज उद्योग एवं निर्माण सामग्री (प्लास्टर, मोर्टार) में होता है।
- नींबू (लिमोन) में साइट्रिक अम्ल (C₆H₈O₇) 4-8% तक पाया जाता है जो इसे खट्टा स्वाद प्रदान करता है। यह एक कमजोर ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल है। नींबू का रस pH लगभग 2.0-2.5 का होता है। साइट्रिक अम्ल कोशिकीय श्वसन (क्रेब्स चक्र) का एक मध्यवर्ती यौगिक है। इसका उपयोग खट्टे स्वाद के लिए, खाद्य परिरक्षक (E330), विटामिन C के ऑक्सीकरण को रोकने, डिटर्जेंट में पानी मृदु बनाने तथा दवाइयों में स्वाद बढ़ाने वाले पदार्थ के रूप में किया जाता है।
- मधुमक्खी के डंक (हनीबी स्टिंग) में फॉर्मिक अम्ल (HCOOH, मेथेनोइक अम्ल) होता है जो एक साधारण कार्बोक्सिलिक अम्ल है। यह जलन, दर्द, लालिमा एवं सूजन उत्पन्न करता है। डंक के प्रभाव को कम करने के लिए बेकिंग सोडा (क्षार) लगाना चाहिए, जो अम्ल को उदासीन करता है। चींटी, मधुमक्खी एवं बिच्छू के डंक में फॉर्मिक अम्ल मुख्य विषाक्त यौगिक होता है। इस अम्ल का नाम लैटिन 'फॉर्मिका' (चींटी) से लिया गया है।
- अमोनिया का जलीय विलयन (NH₃ + H₂O ⇌ NH₄⁺ + OH⁻) लाल लिटमस को नीला कर देता है क्योंकि यह क्षारीय होता है तथा OH⁻ आयन मुक्त करता है। यह विलयन एमोनियम हाइड्रॉक्साइड (NH₄OH) कहलाता है, जो एक दुर्बल क्षार है। इसका उपयोग घरेलू क्लीनर (काँच, फर्श, बर्तन), उर्वरक (एमोनियम सल्फेट, यूरिया), रेफ्रिजरेंट (NH₃), विस्फोटक एवं रासायनिक उद्योग में होता है। तेज गंध के कारण इसकी पहचान आसानी से हो जाती है।
- चिली शोरा (चिली सॉल्टपीटर) सोडियम नाइट्रेट (NaNO₃) का सामान्य नाम है जो चिली एवं पेरू के शुष्क रेगिस्तानी क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह एक प्राकृतिक नाइट्रोजन उर्वरक है। इसका उपयोग काँच उद्योग (फाइनिंग एजेंट), विस्फोटक (गनपाउडर में ऑक्सीकारक), खाद्य परिरक्षक (मांस में - E251) एवं नाइट्रिक अम्ल बनाने में किया जाता है। यह अत्यधिक जलशोषक (हाइग्रोस्कोपिक) होता है, इसलिए इसे बंद डिब्बों में रखा जाता है।
- तरल ब्लीच (लिक्विड ब्लीच) का मुख्य घटक सोडियम हाइपोक्लोराइट (NaOCl) है जो सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन में क्लोरीन गैस प्रवाहित करने से बनता है: 2NaOH + Cl₂ → NaOCl + NaCl + H₂O। यह एक हल्के पीले रंग का द्रव है। इसका उपयोग घरेलू विरंजक, कीटाणुनाशक, दुर्गन्ध हटाने वाला, कपड़ों को सफेद करने एवं जल शुद्धिकरण में किया जाता है। यह प्रकाश एवं ऊष्मा में विघटित हो जाता है।
- मैग्नीशियम (Mg) जलने (हवा में ऑक्सीजन से अभिक्रिया) पर मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) बनता है जो एक सफेद, क्षारीय ठोस है: 2Mg + O₂ → 2MgO + प्रचंड ऊष्मा एवं दीप्ति। यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है तथा तीव्र सफेद ज्वाला उत्पन्न करती है, इसलिए मैग्नीशियम का उपयोग फोटोग्राफी फ्लैश बल्ब, आतिशबाजी एवु सिग्नल ज्वाला में किया जाता है। MgO का उपयोग अग्निरोधक, दुर्दम्य (रेफ्रैक्टरी) ईंट, एंटासिड एवं सौंदर्य प्रसाधनों में होता है।
- कार्बोलिक अम्ल (कार्बोलिक एसिड) फिनोल (C₆H₅OH) का दूसरा नाम है जो कोयला टार से प्राप्त एक सफेद, क्रिस्टलीय ठोस है। यह अत्यधिक विषैला एवं संक्षारक होता है तथा त्वचा पर जलन पैदा करता है। इसका उपयोग एंटीसेप्टिक, कीटाणुनाशक (लाइसोल), रेजिन (बैकेलाइट), नायलॉन, दवाइयाँ (एस्पिरिन), रंग (फिनॉल्फथेलिन) एवं विस्फोटकों के निर्माण में किया जाता है। लॉर्ड लिस्टर ने सर्जरी में फिनोल के एंटीसेप्टिक गुणों का प्रथम उपयोग किया था।
- पोटैशियम नाइट्रेट (KNO₃) का उपयोग पटाखों (आतिशबाजी), विस्फोटकों (गनपाउडर) एवं माचिस के निर्माण में होता है क्योंकि यह एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है। गनपाउडर (बारूद) में 75% KNO₃, 15% चारकोल (ईंधन) एवं 10% सल्फर (ईंधन एवं स्थिरकारक) होता है। गर्म करने पर यह अपघटित होकर ऑक्सीजन मुक्त करता है, जो दहन को तीव्र करता है। इसका उपयोग उर्वरक (नाइट्रोजन एवं पोटैशियम स्रोत), खाद्य परिरक्षक (E252), दांतों के संवेदनशीलता उपचार, काँच उद्योग एवं रॉकेट प्रणोदक में भी किया जाता है।
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) मानव पेट में गैस्ट्रिक जूस के रूप में पाया जाता है, 0.1-0.5% सांद्रता में जो भोजन (विशेषतः प्रोटीन) के पाचन में सहायता करता है। यह एंजाइम पेप्सिन को सक्रिय करता है, जो प्रोटीन को पेप्टाइडों में तोड़ता है। यह रोगजनक जीवाणुओं को मारता है। पेट में HCl की अधिकता से अल्सर एवं एसिडिटी होती है, जिसके लिए एंटासिड (Mg(OH)₂, Al(OH)₃) का उपयोग किया जाता है।
- सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) का उपयोग लीड-एसिड बैटरियों (वाहनों की बैटरी) में विद्युत अपघट्य के रूप में किया जाता है जो सीसा एवं सीसा डाइऑक्साइड इलेक्ट्रोडों के मध्य आयन संचालन करता है। इसका उपयोग उर्वरक (सुपरफॉस्फेट, अमोनियम सल्फेट), पेट्रोलियम शोधन (एल्किलेशन), विस्फोटक, रंग, दवाइयाँ, प्लास्टिक, इस्पात संक्षारण एवं अम्ल वर्षा के अध्ययन में होता है। यह विश्व का सबसे अधिक उत्पादित रसायन है (वार्षिक 25 करोड़ टन)।
- नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) का उपयोग विस्फोटक बनाने में होता है जैसे TNT (ट्राइनाइट्रोटॉल्यूनि), नाइट्रोग्लिसरीन, नाइट्रोसेल्यूलोज (गनकॉटन), पिकरिक अम्ल एवं अमोनियम नाइट्रेट। यह एक प्रबल ऑक्सीकारक एवं संक्षारक अम्ल है, जो अधिकांश धातुओं (एल्युमीनियम, क्रोमियम, लोहा) को निष्क्रिय (पैसिवेट) कर देता है। इसका उपयोग उर्वरक (अमोनियम नाइट्रेट), रंग, दवाइयाँ (नाइट्रोग्लिसरीन हृदय औषधि), एवं रॉकेट ईंधन (हाइपरगोलिक) में होता है। सोने एवं प्लैटिनम को छोड़कर यह सभी धातुओं के साथ अभिक्रिया करता है।
- एसीटिक अम्ल (CH₃COOH, एथेनोइक अम्ल) सिरके (विनेगर) में 4-8% सांद्रता में पाया जाता है जो इसे खट्टा स्वाद एवं तीखी गंध प्रदान करता है। यह एक दुर्बल कार्बनिक अम्ल है। इसका उपयोग खाद्य परिरक्षक (E260 - अचार, सॉस), खाना पकाने (सलाद ड्रेसिंग), प्लास्टिक (पीवीए, सेल्यूलोज एसीटेट), सिंथेटिक रेशे (एसीटेट), रंग, दवाइयाँ (एस्पिरिन), फोटोग्राफी एवं घरेलू क्लीनर के रूप में किया जाता है। शुद्ध एसीटिक अम्ल को ग्लेशियल एसीटिक अम्ल कहते हैं (99%+ सांद्रता)।
- कार्बोनिक अम्ल (H₂CO₃) शीतल पेय (कोल्ड ड्रिंक्स) में पाया जाता है जो CO₂ गैस को जल में घोलने से बनता है: CO₂ + H₂O ⇌ H₂CO₃। यह एक अत्यंत दुर्बल एवं अस्थिर अम्ल है, जो तुरंत पुनः CO₂ एवं H₂O में विघटित हो जाता है। यही कारण है कि शीतल पेय खोलने पर CO₂ के बुलबुले निकलते हैं। यह पेय को झागदार बनावट (फ़िज़) तथा हल्का खट्टा स्वाद प्रदान करता है। यह मानव रक्त के pH संतुलन (pH 7.35-7.45) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- लैक्टिक अम्ल (C₃H₆O₃, 2-हाइड्रॉक्सीप्रोपेनोइक अम्ल) दही (योगर्ट) में पाया जाता है जो दूध में उपस्थित लैक्टोबैसिलस जीवाणुओं द्वारा लैक्टोज़ के किण्वन से बनता है। यह दही को खट्टा स्वाद प्रदान करता है। यह मांसपेशियों में जोरदार व्यायाम (अवायवीय श्वसन) के बाद जमा होता है, जिससे थकान एवं दर्द (मसल क्रैम्प) होता है। इसका उपयोग खाद्य परिरक्षक (E270), सौंदर्य प्रसाधन (त्वचा नमीकारक), दवाइयाँ (कैल्शियम लैक्टेट) एवं बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक में किया जाता है।
- ऑक्सेलिक अम्ल (C₂H₂O₄, एथेनडाइओइक अम्ल) पालक (स्पिनेच), टमाटर, चुकंदर, कोको एवं रूबर्ब में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है यह एक द्विबीजक (डाइबेसिक) कार्बनिक अम्ल है। यह विषैला होता है क्योंकि शरीर में यह कैल्शियम के साथ अघुलनशील कैल्शियम ऑक्सेलेट बनाता है, जो गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन) का कारण बन सकता है। इसका उपयोग दाग धब्बे (स्याही, रस्ट, रंजक) हटाने, कपड़ा विरंजन, धातु सफाई (रस्ट रिमूवर), एवं प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में किया जाता है।
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) का उपयोग साबुन (सोप) बनाने में होता है जिस प्रक्रिया को साबुनीकरण (सैपोनिफिकेशन) कहते हैं। इसमें वसा (त्रिएसिलग्लिसरॉल) NaOH के साथ अभिक्रिया कर साबुन (सोडियम कार्बोक्सिलेट) एवं ग्लिसरॉल बनाता है। यह एक प्रबल संक्षारक क्षार (कास्टिक सोडा) है, जो त्वचा को गंभीर रूप से जला देता है। इसका उपयोग कागज, कपड़ा (मर्सरीकरण), एल्युमीनियम उत्पादन (बायर प्रक्रम), डिटर्जेंट, रेयॉन फाइबर, पेट्रोलियम शोधन, नल खोलने वाले क्लीनर, एवं नहरों में मृत जानवरों के अपघटन (असुरक्षित) में भी किया जाता है।
- पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH) का उपयोग क्षारीय बैटरियों (एल्कलाइन बैटरी - मैंगनीज डाइऑक्साइड-जिंक) में विद्युत अपघट्य के रूप में होता है जो सोडियम हाइड्रॉक्साइड की तुलना में अधिक चालकता प्रदान करता है। इसका उपयोग पोटैशियम साबुन (तरल साबुन), जैविक एवं अकार्बनिक यौगिकों के संश्लेषण, उर्वरक, दवाइयाँ, इलेक्ट्रोप्लेटिंग एवं घरेलू क्लीनर (ड्रेन क्लीनर) में किया जाता है। यह NaOH की तुलना में अधिक घुलनशील एवं अधिक क्षारीय होता है। सूखे ग्रेन्यूल्स के रूप में यह हवा से CO₂ एवं नमी अवशोषित करता है।
- कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, Ca(OH)₂, का उपयोग मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने (अम्लीय मृदा का उपचार) के लिए किया जाता है जिसे खेतों में चूना लगाना (लाइमिंग) कहते हैं। यह मृदा के pH को बढ़ाता है, अम्लीयता कम करता है, तथा पौधों को कैल्शियम एवं मैग्नीशियम प्रदान करता है। इसका उपयोग सफेदी (दीवारों की रंगाई), क्लोरीन गैस अवशोषण, SO₂ हटाने (चिमनी स्क्रबर), जल शोधन (pH समायोजन), दाँतों की जड़ उपचार, खाद्य प्रसंस्करण (मक्का सानना - निक्सटैमलाइजेशन) एवं निर्माण में मोर्टार, प्लास्टर के रूप में होता है।
- मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड, Mg(OH)₂, का उपयोग एंटासिड दवाओं (दूधिया मैग्नीशिया) में होता है जो पेट के अम्ल (HCl) को उदासीन करता है: Mg(OH)₂ + 2HCl → MgCl₂ + 2H₂O। यह एक दुर्बल क्षार है, जो जल में अल्प घुलनशील होने के कारण आंत्र में अवशोषित नहीं होता, अतः यह सुरक्षित एंटासिड है। उच्च मात्रा में यह रेचक (लैक्सेटिव) के रूप में कार्य करता है। इसका उपयोग अग्निरोधक (फ्लेम रिटार्डेंट), अपशिष्ट जल उपचार (pH समायोजन), दुर्गन्ध हटाने वाले (डिओडोरेंट - दुर्गन्धयुक्त सल्फर यौगिकों के अवक्षेपण हेतु) एवं सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है।
- अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (NH₄OH) का उपयोग घरेलू क्लीनर (ग्लास क्लीनर, फ़र्श क्लीनर) में होता है जो वसा एवं ग्रीस को घोलने में प्रभावी है। यह अमोनिया गैस के जलीय विलयन के रूप में एक दुर्बल क्षार है। इसका उपयोग रासायनिक उद्योग में (नाइट्रोसेल्यूलोज, रेयॉन फाइबर, उर्वरक), दुर्गन्ध हटाने वाला, बेकरी (बेकिंग पाउडर में NH₄HCO₃ के उत्पादन में), दवाइयाँ (लिनिमेंट, घर्षण कम करने वाली क्रीम), वस्त्र उद्योग (कपास की सफाई), फोटोग्राफी (फिक्सर), इलेक्ट्रोप्लेटिंग एवं प्रयोगशाला अभिकर्मक के रूप में किया जाता है।
- सोडियम क्लोराइड (NaCl) सामान्य नमक (टेबल साल्ट) है जो समुद्री जल, नमक की खानों (हलाइट) एवं झीलों से प्राप्त किया जाता है। यह मानव आहार का सबसे महत्वपूर्ण मसाला एवं परिरक्षक है। शरीर में यह तंत्रिका आवेगों के संचालन, जल संतुलन एवं पाचन (HCl उत्पादन) के लिए आवश्यक है। इसका औद्योगिक उपयोग क्लोरीन एवं सोडियम धातु के उत्पादन (इलेक्ट्रोलिसिस), सोडियम कार्बोनेट (सॉल्वे प्रक्रम), साबुन, रंग, वस्त्र, चमड़ा कमाने, खाद्य संरक्षण (अचार, मांस), जल मृदुकरण (आयन एक्सचेंजर पुनर्जनन) एवं सड़कों पर बर्फ पिघलाने (आइस मेल्ट) में किया जाता है।
- सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃) को खाने का सोडा (बेकिंग सोडा) कहा जाता है जिसका उपयोग बेकिंग (पकाने) में खमीर उठाने वाले एजेंट (लीवनिंग एजेंट) के रूप में किया जाता है। गर्म करने (या अम्ल के साथ) यह CO₂ गैस उत्सर्जित करता है, जिससे आटा फूलता है। इसका उपयोग एंटासिड (एसिडिटी दूर करने), अग्निशामक (CO₂ उत्पादन), दाग हटाने (रस्ट, ग्रीस), सफाई एजेंट (किचन, बाथरूम), सौंदर्य प्रसाधन (दाँत सफेद करने, बदबू दूर करने) एवं व्यक्तिगत देखभाल (पसीना अवशोषक, शेविंग क्रीम में) में किया जाता है। मधुमक्खी के डंक पर लगाने से यह फॉर्मिक अम्ल को उदासीन करता है।
- कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (CaSO₄·½H₂O) को प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) कहते हैं जो जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) को 120-180°C पर गर्म करने से बनता है। यह एक सफेद चूर्ण है, जो जल के साथ मिलाने पर पुनः जिप्सम में बदलकर दृढ़ता से सख्त हो जाता है (सेटिंग), जिसके कारण इसका उपयोग निर्माण (दीवारों की पलस्तर, मूर्तियाँ, सजावटी सामान, टूटी हड्डियों की कास्ट (फ्रैक्चर उपचार), दाँतों की छाप (डेंटल कास्ट) एवं सिरेमिक (मोल्ड) बनाने में होता है।
- पोटैशियम क्लोराइड (KCl) का उपयोग उर्वरक (म्यूरेट ऑफ पोटाश) में नाइट्रोजन एवं फास्फोरस के साथ मिलाकर मिश्रित उर्वरक (NPK - नाइट्रोजन-फास्फोरस-पोटैशियम) के रूप में किया जाता है क्योंकि यह पोटैशियम का प्रमुख स्रोत है, जो पौधों के लिए आवश्यक तीसरा प्राथमिक पोषक तत्व है। इसका उपयोग सोडियम क्लोराइड के विकल्प के रूप में 'लो-सोडियम नमक' (उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए), जल मृदुकरण (आयन एक्सचेंजर पुनर्जनन - सोडियम की तुलना में महंगा), काँच उद्योग, दवाइयाँ (पोटैशियम की कमी के उपचार में), अग्निशामक (सूखा पाउडर), एवं इलेक्ट्रोलिसिस में पोटैशियम धातु एवं KOH उत्पादन के लिए भी किया जाता है।
- अमोनियम क्लोराइड (NH₄Cl) का उपयोग जिंक-कार्बन बैटरियों (सूखी बैटरी) में विद्युत अपघट्य के रूप में होता है जो पेस्ट (मैंगनीज डाइऑक्साइड एवं कार्बन के साथ) के रूप में उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग वेल्डिंग में फ्लक्स (धातु की सफाई एवं ऑक्साइड हटाने), धातुकर्म (टिन, जिंक, कॉपर को साफ करने), दवाइयाँ (कफ सिरप में एक्सपेक्टोरेंट - कफ निकालने वाला), खाद्य योज्य (पके हुए माल में खमीर उठाने वाला, E510), चमड़ा कमाने, कपड़ा रंगाई एवं प्रयोगशाला (अम्लीय विलयन के रूप में) में किया जाता है। गर्म करने पर यह उर्ध्वपातन करता है।
- मेथिल ऑरेंज एक कृत्रिम सूचक (फिनाइलएजो-4-सल्फ़ोनेट) है, जो अम्लीय माध्यम (pH 3.1 से कम) में लाल एवं क्षारीय माध्यम (pH 4.4 से अधिक) में पीला हो जाता है इसका रंग परिवर्तन परास 3.1 से 4.4 pH के बीच होता है। इसका उपयोग प्रबल अम्ल एवं दुर्बल क्षार के अनुमापन (टाइट्रेशन) में किया जाता है। यह एक एजो रंग है, जो जल में घुलनशील होता है। फिनॉल्फ्थेलिन के विपरीत, मेथिल ऑरेंज अम्लीय माध्यम में रंग बदलता है।
- फिनॉल्फ्थेलिन (C₂₀H₁₄O₄) एक कृत्रिम सूचक है, जो क्षारीय माध्यम (pH 8.2 से अधिक) में गुलाबी से लाल (मैजेंटा) हो जाता है, परन्तु अम्लीय माध्यम (pH 8.2 से कम) में रंगहीन बना रहता है इसका रंग परिवर्तन परास 8.2 से 10.0 pH के बीच होता है। इसका उपयोग दुर्बल अम्ल एवं प्रबल क्षार के अनुमापन में किया जाता है। यह जल में अल्प घुलनशील होता है, अतः इसे प्रायः अल्कोहल में विलयन कर प्रयोग किया जाता है। क्षारीय माध्यम में इसकी संरचना आयनित होकर रंगीन हो जाती है।
- हल्दी (करक्यूमा लोंगा) में करक्यूमिन नामक रंगद्रव्य होता है, जो क्षारीय माध्यम (pH > 7.5) में लाल-भूरे (ईंट जैसे) रंग में बदल जाता है, जबकि अम्लीय एवं उदासीन माध्यम में पीला रहता है यह एक प्राकृतिक सूचक है, जो साधारण घरेलू परीक्षणों में उपयोगी है। क्षारीय पदार्थ (जैसे साबुन, बोरेक्स, सोडा) लगाने पर हल्दी लाल हो जाती है। साबुन के विलयन से हल्दी का कागज लाल हो जाता है, जबकि एसीटिक अम्ल (सिरका) पीला बना रहता है।
- लाल गोभी (रेड कैबेज) का रस एक प्राकृतिक pH सूचक है, जो अम्लीय माध्यम (pH < 7) में गुलाबी से लाल (pH 2 पर गुलाबी, pH 4 पर बैंगनी-गुलाबी), उदासीन (pH 7) में बैंगनी, एवं क्षारीय माध्यम (pH > 7) में नीले से हरे/पीले (pH 8 पर नीला, pH 10 पर हरा, pH 12 पर पीला) रंग में बदलता है इसमें एंथोसायनिन नामक रंगद्रव्य होता है, जो pH के अनुसार आणविक संरचना बदलता है।
- अम्ल और क्षार की अभिक्रिया को उदासीनकरण (न्यूट्रलाइज़ेशन) कहते हैं, जिसमें लवण और जल बनते हैं उदाहरण: HCl + NaOH → NaCl + H₂O। यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी (एक्सोथर्मिक) होती है, अर्थात इसमें ऊष्मा निकलती है। उदासीनकरण के बाद विलयन का pH 7 (उदासीन) हो जाता है। यह अवधारणा एंटासिड (पेट के अम्ल को उदासीन करना), अम्लीय मृदा उपचार (चूना डालना), एवं क्षारीय अपशिष्ट जल उपचार (अम्ल डालना) में प्रयुक्त होती है।
- अम्ल सक्रिय धातुओं (जैसे Zn, Mg, Fe, Al) से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस (H₂) उत्पन्न करते हैं उदाहरण: Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑। सोना, चाँदी, ताँबा, प्लैटिनम जैसी अक्रिय धातुएँ अम्ल (नाइट्रिक को छोड़कर) से अभिक्रिया नहीं करतीं। अभिक्रिया की दर अम्ल की सांद्रता एवं धातु की सक्रियता श्रेणी पर निर्भर करती है। मैग्नीशियम एवं जिंक अम्ल से तीव्रता से अभिक्रिया करते हैं, जबकि लोहा धीमी गति से अभिक्रिया करता है।
- हाइड्रोजन गैस (H₂) की पहचान जलती हुई मोमबत्ती या स्प्लिंट के पास ले जाने पर विशिष्ट ‘पॉप’ (तेज आवाज) की ध्वनि से होती है क्योंकि हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील है एवं वायु (ऑक्सीजन) के साथ मिलकर विस्फोटक मिश्रण बनाता है। यह ध्वनि जल के तीव्र निर्माण (2H₂ + O₂ → 2H₂O) के कारण उत्पन्न होती है। यह अम्ल एवं धातु अभिक्रिया में बनने वाली गैस की पुष्टि करने का सबसे सरल एवं सुरक्षित परीक्षण है।
- कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) से अम्ल की अभिक्रिया (जैसे HCl, H₂SO₄, HNO₃) से कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO₂) निकलती है उदाहरण: CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂↑। यही अभिक्रिया चूना पत्थर या संगमरमर पर अम्ल गिरने पर होती है (अम्ल वर्षा द्वारा इमारतों का क्षरण)। CO₂ गैस को बुझे चूने के पानी (लाइम वॉटर) में प्रवाहित करने पर यह दूधिया (CaCO₃ अवक्षेप) हो जाता है, जो CO₂ की पुष्टि करता है।
- अम्ल और धातु ऑक्साइड (जैसे CuO, MgO, CaO) की अभिक्रिया से लवण और जल बनता है उदाहरण: 2HCl + CuO → CuCl₂ + H₂O। यह अभिक्रिया उदासीनीकरण (न्यूट्रलाइज़ेशन) के समान है, जहाँ धातु ऑक्साइड क्षार के रूप में कार्य करता है। इसी कारण अम्लीय मृदा में चूना (CaO या Ca(OH)₂) डाला जाता है, जो धातु ऑक्साइड के रूप में अम्ल को उदासीन करता है। जंग (आयरन ऑक्साइड, Fe₂O₃) भी अम्ल से अभिक्रिया कर लवण (FeCl₃) एवं जल बनाता है, जिसका उपयोग रस्ट रिमूवर में होता है।
- pH मान 7 उदासीन (न्यूट्रल) प्रकृति को दर्शाता है, जिसमें H⁺ एवं OH⁻ आयनों की सांद्रता बराबर (10⁻⁷ M) होती है शुद्ध जल का pH 7 होता है। 7 से कम pH अम्लीय, 7 से अधिक pH क्षारीय प्रकृति को दर्शाता है। pH स्केल सोरेन सोरेंसन द्वारा प्रस्तावित किया गया था। यह H⁺ आयन सांद्रता का ऋणात्मक लघुगणक (logarithm) है: pH = -log₁₀[H⁺]।
- pH मान 0 सबसे अधिक अम्लीय (प्रबलतम अम्ल) होता है जैसे सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) 1 M विलयन का pH लगभग 0 होता है। pH 0 पर H⁺ आयन सांद्रता 1 M (10⁰) होती है। अत्यधिक अम्लीय पदार्थ अत्यधिक संक्षारक एवं खतरनाक होते हैं। बैटरी अम्ल (सल्फ्यूरिक) का pH लगभग 0.5-1.0 होता है।
- pH मान 14 सबसे अधिक क्षारीय (प्रबलतम क्षार) होता है जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) 1 M विलयन का pH 14 होता है। pH 14 पर OH⁻ आयन सांद्रता 1 M होती है। अत्यधिक क्षारीय पदार्थ भी अत्यधिक संक्षारक होते हैं। कास्टिक सोडा (NaOH) घरेलू ड्रेन क्लीनर में पाया जाता है, जिसका pH लगभग 13-14 होता है।
- ब्यूटिरिक अम्ल (C₄H₈O₂, ब्यूटेनोइक अम्ल) बासी घी (रैंसिड घी) एवं खराब मक्खन की तीखी एवं दुर्गंध का कारण है यह एक कार्बोक्सिलिक अम्ल है, जो वसा के हाइड्रोलिसिस (जल अपघटन) एवं ऑक्सीकरण (रैंसिडिटी) से बनता है। पशुओं के पसीने (विशेषतः बकरी) एवं दुग्ध उत्पादों में भी यह अम्ल पाया जाता है। इसका नाम लैटिन 'ब्यूटिरम' (मक्खन) से लिया गया है। इसका उपयोग स्वाद बढ़ाने वाले (बटर फ्लेवर), प्लास्टिसाइज़र, एवं इत्र के घटक के रूप में होता है।
- यूरिक अम्ल (C₅H₄N₄O₃) मानव मूत्र (यूरिन) में नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट उत्पाद के रूप में पाया जाता है यह प्यूरीन (एडेनिन, ग्वानिन - DNA/RNA के घटक) के चयापचय का अंतिम उत्पाद है। मानव शरीर में यकृत यूरिक अम्ल बनाता है, जो गुर्दों द्वारा मूत्र में उत्सर्जित होता है। इसकी अधिकता से गाउट (गठिया) रोग (जोड़ों में सुई जैसे क्रिस्टल जमा होना) एवं गुर्दे की पथरी (यूरिक एसिड स्टोन) होती है। पक्षी एवं सरीसृप भी यूरिक अम्ल उत्सर्जित करते हैं।
- ग्लूकोनिक अम्ल (C₆H₁₂O₇) ग्लूकोज के ऑक्सीकरण (ग्लूकोज ऑक्सीडेज एंजाइम द्वारा) से बनता है जो एक दुर्बल कार्बनिक अम्ल है। इसका कैल्शियम लवण (कैल्शियम ग्लूकोनेट) का उपयोग कैल्शियम की कमी दूर करने वाली दवा (इंजेक्शन एवं टैबलेट) के रूप में किया जाता है। यह खाद्य योज्य (E574) के रूप में अम्लता नियामक, सफाई एजेंट (बोतल धोने वाले डिटर्जेंट में कैल्शियम स्केल हटाने), कंक्रीट मिश्रण में अभिमंदन अवरोधक (सेटिंग रिटार्डर) एवं सौंदर्य प्रसाधनों में होता है।
- पिकरिक अम्ल (2,4,6-ट्राइनाइट्रोफिनोल, C₆H₃N₃O₇) एक पीला क्रिस्टलीय विस्फोटक है इसका उपयोग प्रथम विश्व युद्ध में गोला-बारूद, बम एवु विस्फोटक भराव (मेलिनाइट, लिड्डाइट) के रूप में किया गया था। यह अपने विस्फोटक गुणों के साथ-साथ एक प्रबल कड़वा स्वाद वाला यौगिक (सबसे कड़वे में से एक) है, जिसका उपयोग धातु विज्ञान (स्टील की एचिंग), जैविक रंग (पीला रंग), प्रयोगशाला अभिकर्मक एवं मलेरिया उपचार (ऐतिहासिक) में भी होता है। यह अम्लीय होता है (pKa 0.38) तथा धातुओं के साथ अत्यधिक संवेदनशील विस्फोटक पिक्रेट लवण बनाता है।
- बैरियम हाइड्रॉक्साइड, Ba(OH)₂, का उपयोग प्रयोगशाला परीक्षणों (अनुमापन, कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषण) एवं कार्बनिक संश्लेषण में क्षार के रूप में होता है यह सोडियम हाइड्रॉक्साइड की तुलना में अधिक क्षारीय (pH ~13.9, 0.1M) है। इसका उपयोग चीनी उद्योग (चुकंदर चीनी शोधन), स्नेहक (लुब्रिकेंट) उत्पादन, जल शोधन (सल्फेट हटाने), काँच उद्योग (बैरियम सिलिकेट) एवं बैरियम यौगिकों (बैरियम कार्बोनेट, बैरियम सल्फेट) के उत्पादन में किया जाता है। यह विषैला होता है तथा जल में घुलनशील बैरियम यौगिक अत्यधिक विषैले होते हैं।
- लिथियम हाइड्रॉक्साइड (LiOH) अंतरिक्ष यानों, पनडुब्बियों एवं अपोलो अंतरिक्ष मिशनों में CO₂ गैस हटाने के लिए उपयोगी है क्योंकि यह कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया कर लिथियम कार्बोनेट (Li₂CO₃) बनाता है: 2LiOH + CO₂ → Li₂CO₃ + H₂O। सोडियम हाइड्रॉक्साइड एवं पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड की तुलना में LiOH हल्का होता है (परमाणु द्रव्यमान कम), जो अंतरिक्ष यान के भार के लिए लाभप्रद है। इसका उपयोग लिथियम-आयन बैटरियों के उत्पादन, चिकनाई ग्रीस (लिथियम साबुन) एवं विलायक (सेलूलोज के लिए) में भी होता है।
- जिंक हाइड्रॉक्साइड, Zn(OH)₂, का उपयोग दुर्गन्धनाशक (डिओड्रेंट) एवं प्रतिस्वेदक (एंटीपर्सपिरेंट) के रूप में होता है क्योंकि यह त्वचा के रोम छिद्रों को अस्थायी रूप से संकुचित करता है, जिससे पसीना कम निकलता है तथा दुर्गंध पैदा करने वाले जीवाणुओं की वृद्धि रुकती है। यह एक एम्फोटेरिक हाइड्रॉक्साइड है, अर्थात यह अम्ल एवं क्षार दोनों में घुल जाता है: Zn(OH)₂ + 2HCl → ZnCl₂ + 2H₂O; Zn(OH)₂ + 2NaOH → Na₂ZnO₂ + 2H₂O (सोडियम जिंकेट)। इसका उपयोग रबर उत्पादन, चमड़ा कमाने एवं रंजक के रूप में भी किया जाता है।
- क्रोमियम हाइड्रॉक्साइड (Cr(OH)₃) एक हरा रंगद्रव्य (वर्डिग्रिस) है, जिसका उपयोग चीनी मिट्टी (सिरेमिक), पेंट, स्याही एवं रंग बनाने में रंजक के रूप में होता है यह क्रोमियम (III) यौगिक है, जो अपने गहरे हरे रंग के लिए प्रसिद्ध है। इसका उपयोग क्रोमियम धातु के उत्पादन (इलेक्ट्रोप्लेटिंग में क्रोमियम स्रोत), रासायनिक संश्लेषण (उत्प्रेरक के रूप में), चमड़ा कमाने (क्रोम टैनिंग, जो त्वचा को कोमल एवं जलरोधी बनाती है) एवं वस्त्र रंगाई में भी किया जाता है। यह एक एम्फोटेरिक हाइड्रॉक्साइड है, जो अम्ल एवं क्षार दोनों में घुलनशील है।
- आयरन (II) हाइड्रॉक्साइड, Fe(OH)₂, एक हरा-सफेद अघुलनशील यौगिक है, जिसका उपयोग जल शोधन (फ्लोक्कुलेशन - अशुद्धियों का अवक्षेपण) में किया जाता है यह हवा में आसानी से ऑक्सीकृत होकर भूरे रंग के आयरन (III) हाइड्रॉक्साइड, Fe(OH)₃, में बदल जाता है। इसका उपयोग बैटरियों (निकेल-आयरन बैटरी, एडिसन बैटरी) में इलेक्ट्रोड के रूप में, रंजक निर्माण, चुंबकीय सामग्री एवं उत्प्रेरक के रूप में होता है। यह हीमोग्लोबिन एवु मायोग्लोबिन में लौह का एक मॉडल यौगिक है।
- आयरन (III) हाइड्रॉक्साइड, Fe(OH)₃, एक भूरा अघुलनशील यौगिक है, जिसका उपयोग दवा निर्माण (एंटीएनेमिक दवाएँ - आयरन की कमी दूर करने वाली), जल शोधन (अवक्षेपक के रूप में) एवं रंजक (पीला/भूरा) के रूप में होता है यह लोहे के क्षरण (जंग) का एक घटक है। औषधीय रूप में फेरिक हाइड्रॉक्साइड पॉलीमाल्टोज़ कॉम्प्लेक्स का उपयोग एनीमिया के उपचार में किया जाता है। इसका उपयोग आर्सेनिक (As) एवं फॉस्फेट जैसे प्रदूषकों को जल में से अवक्षेपित (हटाने) करने के लिए भी किया जाता है।
- निकेल हाइड्रॉक्साइड, Ni(OH)₂, का उपयोग रिचार्जेबल बैटरियों (निकेल-कैडमियम Ni-Cd, निकेल-मेटल हाइड्राइड Ni-MH) में धनात्मक इलेक्ट्रोड (कैथोड) के रूप में किया जाता है चार्जिंग के दौरान यह निकेल ऑक्सीहाइड्रॉक्साइड, NiOOH, में ऑक्सीकृत होता है। यह बैटरी की क्षमता एवं स्थायित्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका उपयोग रासायनिक उत्प्रेरक, रंजक (हरा), एवं इलेक्ट्रोप्लेटिंग में निकेल कोटिंग के लिए भी किया जाता है। यह एक हरा ठोस है, जो अम्ल में घुलनशील है।
- कॉपर (II) हाइड्रॉक्साइड, Cu(OH)₂, एक हल्का नीला अघुलनशील यौगिक है, जिसका उपयोग फंगीसाइड (बोर्डो मिक्सचर) एवं कीटनाशक के रूप में किया जाता है बोर्डो मिश्रण (कॉपर सल्फेट + बुझा चूना) फफूंद एवं जीवाणु रोगों (जैसे डाउनी मिल्ड्यू) के नियंत्रण हेतु कृषि में छिड़काव किया जाता है। इसका उपयोग सेरेमिक ग्लेज़ (नीला रंग), रंजक, रासायनिक उत्प्रेरक, एवं प्रयोगशाला में कॉपर यौगिकों के संश्लेषण में होता है। गर्म करने पर यह अपघटित होकर काला कॉपर (II) ऑक्साइड (CuO) बनाता है।
- मैग्नीशियम सल्फेट (MgSO₄·7H₂O, एप्सम साल्ट) का उपयोग त्वचा उपचार (सूजन कम करने, मांसपेशियों के दर्द में, एप्सम साल्ट स्नान) एवं रेचक (लैक्सेटिव) के रूप में होता है यह मैग्नीशियम का स्रोत है। इसका उपयोग कृषि में मैग्नीशियम उर्वरक (MgSO₄), चमड़ा कमाने, कागज उद्योग, वस्त्र रंगाई, अग्निशामक (सूखा पाउडर), टोफू उत्पादन (कोगुलेंट के रूप में), एवं प्रयोगशाला अभिकर्मक (निर्जलीकारक) के रूप में किया जाता है।
- क्यूपरिक सल्फेट (कॉपर सल्फेट, CuSO₄·5H₂O) को नीला थोथा (ब्लू विट्रियल) कहा जाता है क्योंकि यह नीले क्रिस्टल के रूप में पाया जाता है। निर्जल (निर्जलीय) कॉपर सल्फेट (CuSO₄) सफेद होता है, जो जल के संपर्क में आने पर नीला हो जाता है (जल परीक्षण)। इसका उपयोग कृषि में फंगीसाइड, जल शोधन (शैवाल नाशक), विद्युत परिष्करण (इलेक्ट्रोलिसिस), रंग उद्योग (नीला रंग), एवं प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में होता है।
- जिंक सल्फेट (ZnSO₄·7H₂O) का उपयोग विटामिन पूरक (जिंक की कमी दूर करने), रासायनिक उर्वरक (जिंक स्रोत), कागज उद्योग (ब्लीचिंग सहायक), वस्त्र उद्योग (रंगाई सहायक) एवं रंग निर्माण (लिथोपोन - ZnS + BaSO₄) में किया जाता है यह एक सफेद क्रिस्टलीय ठोस है। इसका उपयोग प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में, दवाइयों (जिंक ऑक्साइड के अग्रदूत के रूप में), कसैले (एस्ट्रिंजेंट) के रूप में (मामूली कट एवं एक्ने उपचार) एवु इलेक्ट्रोप्लेटिंग (जिंक कोटिंग) में भी होता है।
- एल्युमिनियम सल्फेट, Al₂(SO₄)₃, का उपयोग जल शुद्धिकरण (फ्लोक्कुलेशन) में किया जाता है यह जल में Al(OH)₃ फ्लोक्स बनाता है, जो अशुद्धियों, कोलॉइडी कणों एवं बैक्टीरिया को अवक्षेपित कर देता है। इसका उपयोग कागज उद्योग (साइजिंग एवं रेजिन प्रिसिपिटेशन), रंगाई (मॉर्डेंट के रूप में - रंग को कपड़े पर चिपकाना), अग्निरोधक (फ्लेम रिटार्डेंट), कंक्रीट वॉटरप्रूफिंग, चमड़ा कमाने, दुर्गन्धनाशक (डिओडोरेंट में एल्युमीनियम क्लोराइड के साथ) एवं फार्मास्यूटिकल्स (एंटीसेप्टिक) में किया जाता है।
- फेरस सल्फेट (आयरन (II) सल्फेट, FeSO₄·7H₂O, ग्रीन विट्रियल) का उपयोग खून की दवाओं (एनीमिया - आयरन की कमी के उपचार), रासायनिक उर्वरक (लौह स्रोत), कीटनाशक (मॉस कंट्रोल), काली स्याही (गैलिक अम्ल के साथ टैनो-फेरेट कॉम्प्लेक्स) एवं जल शोधन (अवक्षेपक) में किया जाता है यह हल्के हरे क्रिस्टल के रूप में पाया जाता है। प्रयोगशाला में इसका उपयोग फेहलिंग विलयन के घटक के रूप में भी होता है।
- सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄·10H₂O, ग्लुबर साल्ट) का उपयोग डिटर्जेंट (वाशिंग पाउडर में फिलर एवं बिल्डर - पानी को मृदु बनाने के लिए), कागज उद्योग (क्राफ्ट प्रक्रम में), काँच उद्योग (फाइनिंग एजेंट), वस्त्र उद्योग एवं चिकित्सा में रेचक के रूप में किया जाता है यह सोडियम सल्फेट निर्जल (Na₂SO₄) एवं सोडियम सल्फेट दशजलयोजित (Na₂SO₄·10H₂O) दोनों रूपों में पाया जाता है। यह रासायनिक उद्योग में सोडियम सल्फाइड (Na₂S) के उत्पादन में अग्रदूत के रूप में भी उपयोगी है।
- अमोनियम नाइट्रेट (NH₄NO₃) का उपयोग विस्फोटक (ANFO - अमोनियम नाइट्रेट एवं ईंधन तेल के मिश्रण) एवं उर्वरक (34% नाइट्रोजन) के रूप में होता है यह अत्यधिक हाइग्रोस्कोपिक होता है। गर्म करने पर यह अपघटित होकर N₂O (लाफिंग गैस) एवं H₂O बनाता है, लेकिन 200°C से अधिक ताप पर यह विस्फोटक रूप से अपघटित होता है। इसके कारण ही 2020 के बेरूत विस्फोट (2,750 टन NH₄NO₃) जैसी घटनाएँ घटती हैं। इसका उपयोग नाइट्रस ऑक्साइड (एनेस्थेटिक) के उत्पादन में भी किया जाता है।
- अम्ल जल में H⁺ (हाइड्रोजन आयन) उत्पन्न करते हैं, जो उनके अम्लीय गुणों का कारण है आरहेनियस सिद्धांत के अनुसार, अम्ल वह पदार्थ है जो जल में H⁺ आयन मुक्त करता है। उदाहरण: HCl → H⁺ + Cl⁻। H⁺ आयन अकेले नहीं रहते, बल्कि जल के साथ H₃O⁺ (हाइड्रोनियम आयन) बनाते हैं। H⁺ आयनों की सांद्रता जितनी अधिक होगी, अम्ल उतना ही प्रबल होगा।
- क्षार (बेस) जल में OH⁻ (हाइड्रॉक्साइड आयन) उत्पन्न करते हैं, जो उनके क्षारीय गुणों का कारण है आरहेनियस सिद्धांत के अनुसार, क्षार वह पदार्थ है जो जल में OH⁻ आयन मुक्त करता है। उदाहरण: NaOH → Na⁺ + OH⁻। OH⁻ आयनों की सांद्रता जितनी अधिक होगी, क्षार उतना ही प्रबल होगा। प्रबल क्षार जल में पूर्णतः आयनित होते हैं, जबकि दुर्बल क्षार (जैसे NH₄OH) आंशिक रूप से आयनित होते हैं।
- लवण (साल्ट) अम्ल और क्षार की उदासीनकरण अभिक्रिया से बनते हैं, जिनमें धातु आयन एवं अम्ल मूलक (ऐनायन) होते हैं उदाहरण: HCl + NaOH → NaCl (सोडियम क्लोराइड) + H₂O। लवण आयनिक यौगिक होते हैं, जो जल में घुलकर आयनों में विघटित (आयनित) हो जाते हैं तथा विद्युत का चालन करते हैं। विभिन्न प्रकार के लवणों में सामान्य नमक (NaCl), पोटाश (KCl), एप्सम साल्ट (MgSO₄), नीला थोथा (CuSO₄) आदि शामिल हैं।
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) जल में पूर्णतः आयनित होकर H⁺ एवं Cl⁻ आयन बनाता है: HCl + H₂O → H₃O⁺ + Cl⁻ यह एक प्रबल अम्ल है क्योंकि इसका आयनन स्थिरांक (Ka) बहुत उच्च (>10⁹) होता है। यही कारण है कि HCl जलीय विलयन में लगभग 100% आयनित रहता है। इसके विलयन की चालकता अधिक होती है।
- शुष्क HCl गैस लिटमस पेपर का रंग नहीं बदलती क्योंकि H⁺ आयनों के उत्पादन के लिए जल (आयनन माध्यम) आवश्यक होता है जल के अभाव में HCl अणु अविघटित रहते हैं, जिससे कोई H⁺ आयन नहीं बनता। यह गुण सिद्ध करता है कि अम्लीय व्यवहार (H⁺ आयन देना) केवल जलीय विलयन में ही प्रदर्शित होता है। यह आरहेनियस अवधारणा का प्रमाण भी है।
- अम्ल को जल में मिलाने से (तनुकरण) सुरक्षित होता है, परन्तु जल को अम्ल में मिलाना असुरक्षित एवं विस्फोटक हो सकता है क्योंकि अम्ल का जल में मिलाने पर ऊष्मा नियंत्रित रूप से निकलती है, जबकि जल को अम्ल में मिलाने पर तीव्र ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया से विस्फोट हो सकता है। सुरक्षा नियम: "जल में अम्ल मिलाओ, अम्ल में जल नहीं" (AAA - Add Acid to Water)। तनुकरण के समय हमेशा सुरक्षात्मक उपकरण (चश्मा, दस्ताने) पहनने चाहिए।
- अम्ल की सांद्रता (मोलरिटी) कम होने पर H₃O⁺ (हाइड्रोनियम आयन) की सांद्रता कम हो जाती है, जिससे pH मान बढ़ता है pH = -log₁₀[H₃O⁺] के अनुसार, H₃O⁺ सांद्रता कम होने पर pH अधिक होता है। 0.1 M HCl का pH = 1, जबकि 0.001 M HCl का pH = 3। इस प्रकार तनुकरण से अम्ल का pH उदासीन (7) की ओर बढ़ता है।
- सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) एक अत्यधिक संक्षारक (कॉरोसिव), गाढ़ा, रंगहीन, तैलीय द्रव है यह कागज, कपड़ा, लकड़ी एवं मानव त्वचा को गंभीर रूप से जला देता है (डीहाइड्रेशन)। यह एक प्रबल द्विक्षारकीय अम्ल है, जो दो H⁺ आयन दे सकता है। यह जल के साथ अत्यधिक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया करता है, इसलिए तनुकरण करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
- साइट्रिक अम्ल (C₆H₈O₇) एक कार्बनिक अम्ल है, जो खट्टे फलों (नींबू, संतरा) में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है यह एक दुर्बल ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल है। इसका उपयोग खाद्य परिरक्षक (E330), पेय पदार्थों में स्वाद बढ़ाने, एंटीऑक्सीडेंट, जल मृदुकारक, डिटर्जेंट एडिटिव, दवाइयों एवं सौंदर्य प्रसाधनों (pH समायोजन) में किया जाता है। यह विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) का एक रासायनिक सम्बन्धी है।
- नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) एक ऑक्सीकारक अम्ल है, जो धातुओं के साथ H₂ के स्थान पर NO, NO₂, N₂O जैसे ऑक्साइड बनाता है यह एक प्रबल अम्ल एवं शक्तिशाली ऑक्सीकारक है, जो अधिकांश धातुओं (ताँबा, चाँदी) को घोल देता है। सोने एवं प्लैटिनम को छोड़कर यह सभी धातुओं के साथ अभिक्रिया करता है। सान्द्र HNO₃ (90%+) एल्युमीनियम, क्रोमियम, लोहे को निष्क्रिय (पैसिवेट) कर देता है। इसका उपयोग विस्फोटक, उर्वरक एवु रंजक बनाने में होता है।
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) एक संक्षारक क्षार (कास्टिक सोडा) है, जो त्वचा, कपड़ों एवं कागज को गंभीर रूप से जला सकता है यह जल में अत्यधिक घुलनशील है एवं तनुकरण के समय बहुत अधिक ऊष्मा निकलती है। यह वसा (फैट) को साबुन में परिवर्तित करता है (साबुनीकरण)। इसका उपयोग ड्रेन क्लीनर, कागज उद्योग, एल्युमीनियम उत्पादन (बायर प्रक्रम), एवं पेट्रोलियम शोधन में होता है।
- अम्ल वर्षा (एसिड रेन) मुख्यतः सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) एवं नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) के कारण होती है, जो कोयला एवं पेट्रोलियम के दहन से उत्सर्जित SO₂ एवं NOₓ के जल के साथ अभिक्रिया से बनते हैं इसका pH 5.6 से कम होता है। यह मृदा, जल स्रोतों को अम्लीय बनाता है, वनों (विशेषतः शंकुधारी वन), मछलियों एवं संगमरमर की इमारतों (ताजमहल सहित) को क्षति पहुँचाता है।
- pH स्केल 0 से 14 तक होता है, जो विलयन के H⁺ आयन सांद्रता का ऋणात्मक लघुगणक है pH 7 उदासीन, 0-6.99 अम्लीय, 7.01-14 क्षारीय होता है। pH पैमाना लघुगणकीय होता है, अर्थात pH 3 में pH 4 की तुलना में 10 गुना अधिक H⁺ आयन होते हैं। इसका उपयोग रसायन, जीव विज्ञान (रक्त pH 7.35-7.45), कृषि (मृदा pH), चिकित्सा (गैस्ट्रिक pH), जल गुणवत्ता आदि में किया जाता है।
- लिटमस एक प्राकृतिक सूचक (लाइकेन - रोसेला टिनक्टोरिया से प्राप्त) है, जो अम्ल में लाल एवं क्षार में नीला हो जाता है यह एक जलीय घोल या कागज (लिटमस पेपर) के रूप में उपलब्ध है। इसका रंग परिवर्तन परास pH 4.5 से 8.3 के बीच है। यह सबसे पुराना एवं सबसे सरल pH संकेतक है। लाल लिटमस पेपर क्षार के संपर्क में नीला हो जाता है, जबकि नीला लिटमस पेपर अम्ल के संपर्क में लाल हो जाता है।
- मेथिल ऑरेंज एक कृत्रिम सूचक है, जिसका उपयोग प्रयोगशालाओं में अनुमापन (टाइट्रेशन) के लिए किया जाता है यह एक एजो डाई है। यह अम्लीय माध्यम (pH < 3.1) में लाल, उदासीन एवं दुर्बल अम्लीय माध्यम (pH 3.1-4.4) में नारंगी, तथा क्षारीय माध्यम (pH > 4.4) में पीला होता है। इसका उपयोग प्रबल अम्ल एवं दुर्बल क्षार के अनुमापन में किया जाता है।
- अम्ल (HCl, H₂SO₄) एवं धातु कार्बोनेट (जैसे CaCO₃, Na₂CO₃) की अभिक्रिया से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस, लवण एवं जल बनता है उदाहरण: 2HCl + CaCO₃ → CaCl₂ + H₂O + CO₂↑। यही अभिक्रिया अम्ल वर्षा द्वारा संगमरमर (CaCO₃) के क्षरण का भी कारण है। CO₂ को बुझे चूने के पानी (Ca(OH)₂) में प्रवाहित करने पर विलयन दूधिया हो जाता है, जिससे CO₂ की पुष्टि होती है।
- सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃, बेकिंग सोडा) एक एंटासिड के रूप में उपयोगी है, क्योंकि यह पेट के अतिरिक्त हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) को उदासीन करता है अभिक्रिया: NaHCO₃ + HCl → NaCl + H₂O + CO₂↑। यह एंटासिड तीव्र क्रिया करता है, लेकिन CO₂ गैस उत्पन्न करता है, जिससे डकार (बेलचिंग) हो सकती है। अधिक मात्रा में लेने पर रक्त अल्कलोसिस एवु सोडियम ओवरलोड हो सकता है।
- कैल्शियम क्लोराइड (CaCl₂) एक अत्यधिक हाइग्रोस्कोपिक (नमी सोखने वाला) यौगिक है, जिसका उपयोग निर्जलीकारक (डेसिकैंट) के रूप में किया जाता है यह नमी को अवशोषित कर आर्द्रता कम करता है। इसका उपयोग सड़कों पर बर्फ पिघलाने (आइस मेल्ट - क्योंकि यह जल का हिमांक बिन्दु कम करता है), धूल नियंत्रण (रोड डस्ट सप्रेसेंट), कंक्रीट में त्वरित सेटिंग एडिटिव, एवं प्रयोगशाला में निर्जलीकारक (अभिकर्मकों से जल निकालने) के रूप में किया जाता है।
- पोटैशियम नाइट्रेट (KNO₃, शोरा) एक नाइट्रोजन एवं पोटैशियम स्रोत है, जिसका उपयोग मिश्रित उर्वरकों (NPK) में किया जाता है यह एक ऑक्सीकारक भी है, जिसका उपयोग विस्फोटक (गनपाउडर), पटाखे (आतिशबाजी), माचिस एवं रॉकेट प्रणोदक में होता है। यह पौधों को फूल एवं फल निर्माण में सहायता करता है।
- अम्ल और क्षार की उदासीनकरण अभिक्रिया (न्यूट्रलाइज़ेशन) एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, अर्थात इसमें ऊष्मा निकलती है उदाहरण: HCl + NaOH → NaCl + H₂O + ΔH (ऊष्मा), जहाँ ΔH ≈ -57.1 kJ/mol। इसे उदासीनीकरण ऊष्मा (एन्थैल्पी ऑफ न्यूट्रलाइज़ेशन) कहते हैं। यह अभिक्रिया हमेशा जल और लवण का निर्माण करती है।
- सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) 1M विलयन का pH मान लगभग 0 के करीब होता है, जो अत्यधिक अम्लीय प्रकृति को दर्शाता है यह विश्व का सबसे अधिक उत्पादित रसायन है। इसका उपयोग बैटरियों (लीड-एसिड बैटरी में विद्युत अपघट्य), उर्वरक, पेट्रोलियम शोधन, इस्पात संक्षारण, रंग, दवाइयाँ एवं विस्फोटक बनाने में होता है।
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) 1M विलयन का pH मान 14 के करीब होता है, जो अत्यधिक क्षारीय प्रकृति को दर्शाता है यह कास्टिक सोडा के नाम से जाना जाता है, जो अत्यधिक संक्षारक है। इसका उपयोग साबुन, कागज, एल्युमीनियम (बायर प्रक्रम), डिटर्जेंट, पेट्रोलियम शोधन, नल खोलने वाले क्लीनर, वस्त्र उद्योग (मर्सरीकरण) एवु रेयॉन फाइबर बनाने में होता है।
- लवण (जैसे NaCl, KCl, CuSO₄) जल में आयनित होकर अपने घटक आयनों (Na⁺, Cl⁻, K⁺, Cu²⁺, SO₄²⁻) में विघटित हो जाते हैं, जिससे विलयन विद्युत का चालन करता है यह इलेक्ट्रोलाइट्स का गुण है। विद्युत का चालन आयनों की गति के कारण होता है। आयनों की सांद्रता जितनी अधिक होगी, चालकता उतनी ही अधिक होगी। गैर-आयनिक यौगिक (जैसे चीनी) जल में विद्युत चालन नहीं करते।
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) मानव पेट में गैस्ट्रिक जूस के रूप में पाया जाता है, जो प्रोटीन पाचन एंजाइम पेप्सिन को सक्रिय करता है एवं हानिकारक बैक्टीरिया को मारता है पेट में अत्यधिक अम्ल से अल्सर एवं एसिडिटी होती है, जिसके उपचार में एंटासिड (Mg(OH)₂, Al(OH)₃, NaHCO₃) का उपयोग किया जाता है। प्रोटॉन पंप अवरोधक (PPI) भी अम्ल स्राव को कम करते हैं।
- सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) का उपयोग रंग (डाई) बनाने में किया जाता है, विशेषतः एजो रंगों के निर्माण में (डाइज़ोटाइजेशन एवं कपलिंग अभिक्रियाओं में) यह सल्फोनेशन अभिक्रिया (रंगों में सल्फोनिक अम्ल समूह जोड़ने) के लिए आवश्यक है। इसका उपयोग कपड़ा उद्योग, प्रिंटिंग स्याही, चमड़ा एवं कागज रंगाई में होता है।
- नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) का उपयोग रंजक (डाई) बनाने में (नाइट्रेशन प्रक्रम द्वारा - नाइट्रो समूह -NO₂ जोड़ने) किया जाता है नाइट्रो रंजक (जैसे पिकरिक अम्ल, पीला रंग), एनिलिन रंजक (एनिलिन बैंगनी), एवं एजो रंजक नाइट्रोजन यौगिकों से बनते हैं। इसका उपयोग कपड़ा, खाद्य, एवं कॉस्मेटिक रंगों के संश्लेषण में होता है।
- एसीटिक अम्ल (CH₃COOH) का उपयोग खाद्य संरक्षण (अचार बनाने, सिरके के रूप में) एवं स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है यह एक दुर्बल अम्ल है, जो जीवाणुओं एवं फफूंदों की वृद्धि को रोकता है। इसका उपयोग सलाद ड्रेसिंग, सॉस, मेयोनेज़, और केचप में भी किया जाता है। यह खाद्य योज्य E260 के रूप में पंजीकृत है।
- कार्बोनिक अम्ल (H₂CO₃) शीतल पेय (कोक, स्प्राइट, फैंटा) को फिज़ (बुलबुले) एवं हल्का खट्टापन प्रदान करता है यह CO₂ गैस के जल में घुलने से बनता है: CO₂ + H₂O ⇌ H₂CO₃। यह अत्यधिक अस्थिर अम्ल है, जो बोतल खोलते ही H₂O और CO₂ में टूट जाता है, जिससे बुलबुले निकलते हैं।
- लैक्टिक अम्ल (C₃H₆O₃) मांसपेशियों में जोरदार व्यायाम (अवायवीय श्वसन) के बाद जमा होता है, जिससे थकान, दर्द एवं ऐंठन (मसल क्रैम्प) होती है कॉरी चक्र के अनुसार, यकृत लैक्टिक अम्ल को ग्लूकोज में पुनः परिवर्तित करता है। यही कारण है कि व्यायाम के बाद हल्की स्ट्रेचिंग एवं आराम से रिकवरी होती है। एथलीटों में लैक्टिक अम्ल की अधिकता को 'ऑक्सीजन ऋण' से संबद्ध किया जाता है।
- ऑक्सेलिक अम्ल (C₂H₂O₄) का उपयोग कपड़ों एवं सतहों से दाग (स्याही, जंग, रंग) हटाने के लिए रंजक नाशक (ब्लीचिंग एजेंट) के रूप में किया जाता है यह कैल्शियम एवं आयरन यौगिकों के साथ घुलनशील परिसर बनाता है। इसका उपयोग लकड़ी (रस्ट स्टेन), पत्थर, चीनी मिट्टी, बाथरूम टाइल्स, कार रेडिएटर क्लीनर एवं धातु पॉलिशिंग में दाग हटाने के लिए किया जाता है।
- टार्टरिक अम्ल (C₄H₆O₆) का उपयोग बेकिंग पाउडर में अम्लीय घटक के रूप में किया जाता है, जो सोडियम बाइकार्बोनेट (खाने का सोडा) के साथ अभिक्रिया कर CO₂ गैस उत्पन्न करता है, जिससे आटा फूलता है इसका उपयोग क्रीम ऑफ टार्टर (पोटैशियम बाइटार्ट्रेट) के रूप में, कैंडी, कार्बोनेटेड पेय, जैम, जिलेटिन एवं वाइन उद्योग (अम्लता नियंत्रण) में भी होता है। यह अंगूर एवं केले में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।
- फॉर्मिक अम्ल (HCOOH) चींटी के डंक (स्टिंग) में पाया जाता है, जो जलन, लालिमा एवं दर्द का कारण होता है यह सबसे सरल कार्बोक्सिलिक अम्ल है। इसका उपयोग चमड़ा कमाने (टैनिंग), कपड़ा रंगाई, कीटनाशक (विशेषतः मधुमक्खी पालन में वैरोआ माइट नियंत्रण), रबर उद्योग, खाद्य परिरक्षक (E236), एवं सिलेज (पशु चारा) परिरक्षक में किया जाता है।