खाद्य संरक्षण, पोषण, औषधि आदि
- खाद्य संरक्षण में सुखाना एक प्राचीन विधि है, जिसमें खाद्य पदार्थों से नमी (पानी) हटाकर सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, फफूंद, यीस्ट) के विकास को रोका जाता है, क्योंकि वे नमी के बिना जीवित नहीं रह सकते। यह विधि मांस (बिल्टोंग), मछली (सूखी मछली), फल (किशमिश, अंजीर, खुबानी), अनाज और सब्जियों (मटर, गाजर) के लिए उपयोग की जाती है। आधुनिक विधियों में इलेक्ट्रिक डिहाइड्रेटर और फ्रीज-ड्राइंग (लियोफिलाइजेशन) शामिल हैं।
- विटामिन A (रेटिनॉल) रतौंधी (रात में कम दिखाई देना) से बचाता है, क्योंकि यह रेटिना में रोडोप्सिन (दृश्य बैंगनी) नामक प्रकाश-संवेदी वर्णक के निर्माण के लिए आवश्यक है। इसकी गंभीर कमी से जेरोफ्थाल्मिया (आंखों का सूखापन) और कॉर्नियल अल्सरेशन हो सकता है, जिससे स्थायी अंधापन हो सकता है। इसके प्रमुख स्रोत गाजर (β-कैरोटीन), मक्खन, अंडे की जर्दी, पालक, शकरकंद, कॉड लिवर ऑयल और डेयरी उत्पाद हैं।
- पेनिसिलिन (पेनिसिलिन) एक एंटीबायोटिक दवा है, जिसकी खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1928 में पेनिसिलियम नोटेटम फफूंद से की थी। यह जीवाणुओं की कोशिका भित्ति (पेप्टिडोग्लाइकन) के संश्लेषण को रोककर उन्हें नष्ट करता है, जिससे जीवाणु टूटकर मर जाते हैं। इसका उपयोग स्ट्रेप्टोकोकल, स्टैफिलोकोकल, न्यूमोकोकल और मेनिंगोकोकल संक्रमणों (गले का खराश, निमोनिया, मेनिन्जाइटिस, सिफलिस) के उपचार में किया जाता है।
- नमक (सोडियम क्लोराइड) खाद्य संरक्षण में उपयोगी है क्योंकि यह परासरण (ओस्मोसिस) द्वारा खाद्य पदार्थों से नमी (पानी) निकाल लेता है, जिससे सूक्ष्मजीवों के विकास के लिए आवश्यक जल की मात्रा कम हो जाती है। नमकीन बनाना (साल्टिंग) मांस (बेकन, हैम), मछली (सॉल्टेड कॉड), मक्खन और सब्जियों (सॉकरक्राट, किम्ची) को संरक्षित करने की सबसे पुरानी विधियों में से एक है। यह विधि खाद्य पदार्थों के स्वाद को भी बढ़ाती है।
- विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) स्कर्वी रोग (मसूड़ों से खून आना, दांत गिरना, कमजोरी, घाव भरने में देरी) से बचाता है, क्योंकि यह कोलेजन (त्वचा, हड्डियों, रक्त वाहिकाओं का संरचनात्मक प्रोटीन) के संश्लेषण और एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में आवश्यक है। यह शरीर में आयरन के अवशोषण को भी बढ़ाता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। इसके प्रमुख स्रोत संतरा, नींबू, अमरूद, कीवी, आंवला (भारतीय आंवला), स्ट्रॉबेरी और शिमला मिर्च हैं।
- एस्पिरिन (एसिटाइलसैलिसिलिक अम्ल) एक दर्द निवारक (एनाल्जेसिक), बुखार कम करने वाली (एंटीपायरेटिक) और सूजन कम करने वाली (एंटी-इंफ्लेमेटरी) दवा है, जो प्रोस्टाग्लैंडिन (दर्द और सूजन के रसायन) के संश्लेषण को रोकती है। कम खुराक (75-81 मिलीग्राम) पर, यह रक्त को पतला करने वाली (एंटीप्लेटलेट) दवा के रूप में कार्य करती है, जो हृदय रोगियों में दिल के दौरे और स्ट्रोक को रोकने में मदद करती है। इसका उपयोग सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, गठिया और बुखार के लिए किया जाता है।
- खाद्य संरक्षण में ठंडा करना (रेफ्रिजरेशन) प्रभावी है क्योंकि कम तापमान (0-5°C) पर सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, फफूंद, यीस्ट) की चयापचय दर और वृद्धि धीमी हो जाती है या रुक जाती है। प्रशीतन (रेफ्रिजरेटर) भोजन को कुछ दिनों से लेकर हफ्तों तक सुरक्षित रखता है, जबकि फ्रीजिंग (-18°C से नीचे) भोजन को महीनों या वर्षों तक सुरक्षित रख सकती है। यह विधि दूध, मांस, अंडे, सब्जियाँ, फल और तैयार भोजन के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
- विटामिन D (कैल्सिफेरॉल) हड्डियों के लिए आवश्यक है क्योंकि यह आंतों से कैल्शियम (Ca) और फास्फोरस (P) के अवशोषण को बढ़ाता है, जो हड्डियों के खनिजीकरण और विकास के लिए अनिवार्य हैं। इसकी कमी से बच्चों में रिकेट्स (हड्डियाँ मुलायम, टेढ़ी) और वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया (हड्डियों का कमजोर होना) और ऑस्टियोपोरोसिस होता है। इसका प्राथमिक स्रोत सूर्य का पराबैंगनी (UV-B) प्रकाश है (त्वचा में संश्लेषण), और आहार स्रोतों में अंडे की जर्दी, फैटी मछली (सैल्मन, टूना), फोर्टिफाइड दूध और कॉड लिवर ऑयल शामिल हैं।
- पैरासिटामॉल (एसिटामिनोफेन) एक बुखार कम करने वाली (एंटीपायरेटिक) और दर्द निवारक (एनाल्जेसिक) दवा है, लेकिन यह एस्पिरिन की तरह सूजन कम नहीं करती है। यह मस्तिष्क के थर्मोरेगुलेटरी केंद्र (हाइपोथैलेमस) पर कार्य करके बुखार कम करती है और दर्द की अनुभूति को अवरुद्ध करती है। यह सिरदर्द, दांत दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पीठ दर्द, जोड़ों के दर्द और फ्लू के लक्षणों में उपयोगी है, लेकिन अत्यधिक खुराक (10 ग्राम से अधिक) से गंभीर यकृत (लीवर) क्षति हो सकती है।
- सिरका (एसीटिक अम्ल का 4-8% जलीय विलयन) खाद्य संरक्षण में उपयोग किया जाता है क्योंकि यह खाद्य पदार्थों के pH को 4.6 से नीचे (अम्लीय) कर देता है, जिसमें अधिकांश रोगजनक बैक्टीरिया, विशेष रूप से क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम (बोटुलिज़्म का कारण), विकसित नहीं हो सकते। यह विधि सब्जियों (खीरा, प्याज, मिर्च), फलों और अंडों के अचार (पिकलिंग) के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। सिरके का उपयोग सॉस, केचप, मेयोनेज़ और सलाद ड्रेसिंग के संरक्षण में भी किया जाता है।
- प्रोटीन शरीर के निर्माण (विकास, मरम्मत, रखरखाव) में मदद करता है क्योंकि यह अमीनो अम्लों की लंबी श्रृंखलाओं से बना होता है, जो मांसपेशियों, त्वचा, बाल, नाखून, एंजाइम, हार्मोन, एंटीबॉडी और हीमोग्लोबिन के आवश्यक घटक हैं। प्रोटीन के प्रमुख स्रोत मांस, मछली, अंडे, दूध, पनीर, दालें (मसूर, मूंग, उड़द), सोयाबीन, राजमा, छोले और नट्स (बादाम, अखरोट) हैं। प्रोटीन की गंभीर कमी से बच्चों में क्वाशियोकोर और मैरास्मस जैसे कुपोषण रोग हो सकते हैं।
- एंटासिड (एंटासिड) पेट की अम्लता (हाइपरएसिडिटी, एसिड रिफ्लक्स, हार्टबर्न) को कम करता है क्योंकि ये दुर्बल क्षार (जैसे मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड, एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड, सोडियम बाइकार्बोनेट, कैल्शियम कार्बोनेट) होते हैं। ये पेट में स्रावित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के साथ उदासीनीकरण अभिक्रिया करके नमक और पानी बनाते हैं, जिससे जलन और दर्द से राहत मिलती है। आधुनिक एंटासिड में अक्सर सिमेथिकोन (गैस कम करने वाला) भी मिलाया जाता है।
- डिब्बाबंदी (कैनिंग) खाद्य संरक्षण की एक आधुनिक विधि है, जिसे 1809 में निकोलस अपर्ट (फ्रांस) ने विकसित किया था। इसमें खाद्य पदार्थों को उच्च ताप (115-121°C, दबाव कुकर या ऑटोक्लेव में) पर गर्म करके सूक्ष्मजीवों (बीजाणुओं सहित) को नष्ट किया जाता है, और फिर उन्हें एयरटाइट (वायुरुद्ध) धातु या कांच के कंटेनरों (जार, डिब्बे) में सील कर दिया जाता है। यह विधि सब्जियाँ (मटर, मक्का, टमाटर), फल (आड़ू, अनानास), मांस, मछली, सूप और बीन्स को कमरे के तापमान पर वर्षों तक सुरक्षित रखती है।
- विटामिन B1 (थायमिन) बेरी-बेरी (बेरी-बेरी) रोग से बचाता है, जो तंत्रिका तंत्र (झुनझुनी, मांसपेशियों का कमजोर होना, पक्षाघात) और हृदय (हृदय विफलता, एडीमा) को प्रभावित करता है। यह कार्बोहाइड्रेट चयापचय (पाइरूवेट डिहाइड्रोजनेज एंजाइम का सहकारक) के लिए आवश्यक है, जो भोजन से ऊर्जा उत्पन्न करने में मदद करता है। इसके प्रमुख स्रोत चावल की भूसी (चोकर - ब्राउन राइस), साबुत अनाज (गेहूं, जौ), फलियाँ, सूअर का मांस, यीस्ट (खमीर), नट्स और बीज हैं।
- स्ट्रेप्टोमाइसिन एक एमिनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक है जो टीबी (तपेदिक, ट्यूबरक्यूलोसिस) के लिए उपयोगी है, और इसे 1943 में सेलमैन वैक्समैन ने खोजा था (जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला)। यह जीवाणुओं में प्रोटीन संश्लेषण (30S राइबोसोमल सबयूनिट से बंधकर) को बाधित करता है, जिससे जीवाणु मर जाते हैं। यह टीबी के अलावा, प्लेग (Yersinia pestis), ब्रुसेलोसिस, टुलारेमिया और कुछ ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरियल संक्रमणों में भी प्रयोग किया जाता है, लेकिन इसके दुष्प्रभावों में किडनी (गुर्दे) और कान (श्रवण शक्ति की हानि) को नुकसान शामिल है।
- चीनी (सुक्रोज) खाद्य संरक्षण में जैम, जेली, मुरब्बा और कैंडीड फल बनाने में उपयोगी है क्योंकि उच्च शर्करा सांद्रता (60-70%) परासरण द्वारा सूक्ष्मजीवों से पानी निकाल लेती है, जिससे वे मर जाते हैं या बढ़ नहीं पाते। चीनी फलों के प्राकृतिक रंग और स्वाद को बनाए रखने में भी मदद करती है और उनकी बनावट को सुधारती है। शहद (प्राकृतिक रूप से कम नमी वाला, उच्च शर्करा वाला) भी एक उत्कृष्ट प्राकृतिक संरक्षक है।
- आयोडीन (I) थायराइड ग्रंथि के लिए आवश्यक है क्योंकि यह थायरॉक्सिन (T₄) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T₃) हार्मोन का एक अनिवार्य घटक है, जो शरीर के चयापचय, वृद्धि और विकास को नियंत्रित करते हैं। आयोडीन की कमी से गण्डमाला (थायरॉयड ग्रंथि का बढ़ना), हाइपोथायरायडिज्म (सुस्ती, वजन बढ़ना), बौनापन और मानसिक मंदता हो सकती है। इसके मुख्य स्रोत आयोडाइज्ड नमक, समुद्री भोजन (मछली, झींगा, शंख), समुद्री शैवाल (केल्प), दूध और अंडे हैं।
- क्लोरमफेनिकॉल एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम (व्यापक स्पेक्ट्रम) एंटीबायोटिक है जो ग्राम-पॉजिटिव और ग्राम-नेगेटिव दोनों प्रकार के बैक्टीरिया के खिलाफ प्रभावी है। यह बैक्टीरिया में प्रोटीन संश्लेषण (50S राइबोसोमल सबयूनिट से बंधकर) को रोकता है, जिससे जीवाणु मर जाते हैं। इसका उपयोग टाइफाइड, साल्मोनेलोसिस, मेनिन्जाइटिस (हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा) और रिकेट्सियल संक्रमणों में किया जाता है, लेकिन इसके गंभीर दुष्प्रभाव (अप्लास्टिक एनीमिया - अस्थि मज्जा विफलता) के कारण इसका उपयोग अब अत्यधिक सीमित है।
- पास्चुरीकरण (पाश्चुरीकरण) दूध संरक्षण की एक विधि है, जिसे लुई पाश्चर ने 1860 के दशक में विकसित किया था। इसमें दूध को एक विशिष्ट तापमान पर एक निश्चित समय के लिए गर्म किया जाता है (जैसे, 63°C पर 30 मिनट - LTLT, या 72°C पर 15 सेकंड - HTST), जिससे रोगजनक बैक्टीरिया (जैसे, साल्मोनेला, ई. कोलाई, ब्रुसेला, माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्यूलोसिस) मर जाते हैं, लेकिन दूध का स्वाद और पोषण मूल्य लगभग वैसा ही रहता है। यह प्रक्रिया दूध की शेल्फ-लाइफ को 2-3 सप्ताह तक बढ़ा देती है, जबकि स्टरलाइजेशन (UHT - अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर) दूध को महीनों तक सुरक्षित रखता है।
- विटामिन K (फाइलोक्विनोन K1, मेनाक्विनोन K2) रक्त का थक्का बनाने (रक्त जमाव) में मदद करता है क्योंकि यह लीवर में थक्के कारकों (प्रोथ्रोम्बिन - फैक्टर II, VII, IX, X, प्रोटीन C और S) के संश्लेषण के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से रक्त का थक्का ठीक से नहीं बनता, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव (हेमरेज) हो सकता है, जो नवजात शिशुओं के लिए विशेष रूप से खतरनाक है। इसके प्रमुख स्रोत हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, केल, ब्रोकली), किण्वित खाद्य पदार्थ (नाट्टो, दही), और आंतों के बैक्टीरिया द्वारा संश्लेषण हैं।
- इबुप्रोफेन एक गैर-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा (NSAID) है जो सूजन (एडिमा, लालिमा), दर्द और बुखार को कम करती है। यह साइक्लोऑक्सीजिनेज (COX-1 और COX-2) एंजाइम को बाधित करके प्रोस्टाग्लैंडिन (दर्द और सूजन के रासायनिक दूत) के संश्लेषण को कम करता है। इसका उपयोग गठिया (रूमेटाइड, ऑस्टियोआर्थराइटिस), पीरियड दर्द (मासिक धर्म में ऐंठन), सिरदर्द, दांत दर्द, मांसपेशियों में दर्द और मोच के लिए किया जाता है। इसे भोजन के साथ लेना चाहिए क्योंकि यह पेट में जलन और अल्सर पैदा कर सकता है।
- बेंजोइक अम्ल (C₆H₅COOH, E210) एक प्रभावी खाद्य परिरक्षक (प्रिजर्वेटिव) है, जो यीस्ट, फफूंद और कुछ बैक्टीरिया के विकास को रोकता है। यह अम्लीय माध्यम (pH 2.5-4.0) में सबसे अधिक प्रभावी होता है, क्योंकि अअलग (non-dissociated) रूप सूक्ष्मजीवों की कोशिका झिल्ली में प्रवेश कर उनके चयापचय को बाधित कर सकता है। इसका उपयोग शीतल पेय, फलों के रस, अचार, जैम, सॉस और मछली उत्पादों में किया जाता है। इसका सोडियम नमक (सोडियम बेंजोएट, E211) पानी में अधिक घुलनशील होता है।
- कार्बोहाइड्रेट (शर्करा, स्टार्च, सेल्यूलोज) शरीर के लिए ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत हैं क्योंकि ये पाचन के दौरान ग्लूकोज (C₆H₁₂O₆) में टूट जाते हैं, जो कोशिकीय श्वसन (माइटोकॉन्ड्रिया में) द्वारा ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) के रूप में ऊर्जा प्रदान करता है। प्रति ग्राम कार्बोहाइड्रेट लगभग 4 कैलोरी ऊर्जा देता है। इसके प्रमुख स्रोत अनाज (चावल, गेहूं, मक्का), फल (केला, सेब), सब्जियाँ (आलू, शकरकंद), फलियाँ, और शहद हैं।
- टेट्रासाइक्लिन एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक है, लेकिन बच्चों (8 वर्ष से कम) और गर्भवती महिलाओं में यह दांतों के लिए हानिकारक हो सकता है क्योंकि यह दांतों के विकास के दौरान कैल्शियम के साथ जुड़कर दांतों को स्थायी रूप से पीला-भूरा (टेट्रासाइक्लिन दाग) कर देता है और तामचीनी (इनेमल) को कमजोर करता है। यह जीवाणुओं में प्रोटीन संश्लेषण (30S राइबोसोम से बंधकर) को बाधित करता है। इसका उपयोग मुँहासे (एक्ने), क्लैमाइडिया, रिकेट्सिया (टिक-बोर्न बीमारियाँ), और माइकोप्लाज्मा संक्रमणों के उपचार में किया जाता है।
- निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) खाद्य संरक्षण में उपयोगी है क्योंकि पानी (नमी) को हटाकर, यह सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, फफूंद, यीस्ट) के विकास और एंजाइमी गतिविधि को रोक देता है, जिससे भोजन खराब नहीं होता। यह विधि फलों (किशमिश, अंजीर, खुबानी, सेब, केला), सब्जियों (टमाटर, प्याज, गाजर, मटर), जड़ी-बूटियों, मांस (बिल्टोंग, जर्की) और मछली को संरक्षित करती है। धूप में सुखाना, हवा में सुखाना, या इलेक्ट्रिक डिहाइड्रेटर का उपयोग किया जाता है; फ्रीज-ड्राइंग (लियोफिलाइजेशन) सबसे उन्नत विधि है।
- विटामिन E (टोकोफेरॉल) त्वचा के लिए लाभकारी है क्योंकि यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट (एंटी-ऑक्सीडेंट) है जो मुक्त मूलकों (फ्री रेडिकल्स) से त्वचा कोशिकाओं को होने वाले नुकसान (फोटोएजिंग, झुर्रियाँ, सूरज की क्षति) से बचाता है। यह कोशिका झिल्लियों (लिपिड पेरोक्सीडेशन) को ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाता है, त्वचा को नमीयुक्त रखता है और घाव भरने में मदद करता है। इसके प्रमुख स्रोत वनस्पति तेल (सूरजमुखी, सोयाबीन, बादाम), नट्स (बादाम, अखरोट), बीज (सूरजमुखी के बीज), हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, ब्रोकोली), और एवोकाडो हैं।
- मॉर्फिन (अफीम एल्कलॉइड) एक नारकोटिक (मादक) दर्द निवारक (एनाल्जेसिक) दवा है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी) में ओपिओइड रिसेप्टर्स (μ-रिसेप्टर्स) पर कार्य करके दर्द की धारणा को कम करती है। इसका उपयोग गंभीर दर्द (कैंसर, हार्ट अटैक, बड़ी सर्जरी, गंभीर चोट) में किया जाता है, लेकिन इसका दुरुपयोग और लत (मॉर्फिन एडिक्शन) अत्यधिक खतरनाक है, क्योंकि अधिक मात्रा में यह श्वसन अवसाद (सांस रुकना) का कारण बन सकता है।
- सोडियम बेंजोएट (C₆H₅COONa, E211) एक खाद्य परिरक्षक (प्रिजर्वेटिव) है, जो बेंजोइक अम्ल का सोडियम नमक है और पानी में अधिक घुलनशील है। यह अम्लीय माध्यम (pH 2.5-4.0, जैसे कोका-कोला, फलों के रस, सिरका, सॉस, अचार) में सबसे अधिक प्रभावी होता है, जहाँ यह गैर-आयनित बेंजोइक अम्ल में परिवर्तित हो जाता है जो यीस्ट और फफूंद के विकास को रोकता है। इसका व्यापक रूप से जैम, जूस, कार्बोनेटेड पेय, मार्जरीन और सलाद ड्रेसिंग के संरक्षण में उपयोग किया जाता है।
- आयरन (Fe) एनीमिया (रक्ताल्पता) से बचाता है क्योंकि यह हीमोग्लोबिन (Hb) और मायोग्लोबिन (मांसपेशियों में ऑक्सीजन भंडारण) का एक अनिवार्य घटक है, जो फेफड़ों से शरीर के सभी ऊतकों तक ऑक्सीजन (O₂) पहुँचाता है। इसकी कमी से माइक्रोसाइटिक, हाइपोक्रोमिक एनीमिया (थकान, कमजोरी, पीलापन, सांस फूलना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, चक्कर आना) होता है। इसके प्रमुख स्रोत लाल मांस, कलेजी (लिवर), हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक), फलियाँ (सोयाबीन, दालें), सूखे मेवे (किशमिश, खजूर), और फोर्टिफाइड अनाज हैं।
- सल्फोनामाइड्स (सल्फा दवाएँ) जीवाणुरोधी (एंटीबैक्टीरियल) दवाएं हैं, जो पहली प्रभावी जीवाणुरोधी एजेंट थीं, और ये जीवाणुओं में फोलिक अम्ल (फोलेट) के संश्लेषण को बाधित करती हैं, जो उनकी वृद्धि और प्रतिकृति के लिए आवश्यक है। मनुष्यों में, फोलेट आहार से प्राप्त होता है, जबकि बैक्टीरिया को स्वयं इसे बनाना पड़ता है, इसलिए ये दवाएं मानव कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना चुनिंदा रूप से बैक्टीरिया को मारती हैं। ये मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI), ब्रोंकाइटिस, और डायरिया (यात्रियों के दस्त) के उपचार में उपयोग की जाती हैं।
- स्मोकिंग (धूम्रपान) खाद्य संरक्षण की एक पारंपरिक विधि है, जिसमें मांस या मछली को लकड़ी (हिकोरी, मेपल, ओक, चेरी) के धुएं में रखा जाता है। धुएं में फिनोल, फॉर्मल्डिहाइड, एसीटिक अम्ल, और क्रेओसोट जैसे एंटीऑक्सीडेंट और रोगाणुरोधी यौगिक होते हैं जो सूक्ष्मजीवों को मारते हैं और ऑक्सीकरण (रैन्सीडिटी) को धीमा करते हैं। स्मोकिंग सतह पर एक सुरक्षात्मक परत (बार्क) भी बनाती है और एक विशिष्ट स्वाद, सुगंध, और रंग प्रदान करती है। इसका उपयोग सॉसेज, बेकन, हैम, सैल्मन, पनीर और मसालों के लिए किया जाता है।
- कैल्शियम (Ca) हड्डियों और दांतों (कंकाल प्रणाली) को मजबूत बनाता है, क्योंकि यह उनके खनिजीकरण (हाइड्रॉक्सीपैटाइट, Ca₁₀(PO₄)₆(OH)₂ के रूप में) के लिए आवश्यक है, जो उन्हें कठोरता और संरचनात्मक शक्ति प्रदान करता है। यह मांसपेशियों के संकुचन, तंत्रिका आवेगों के संचरण, रक्त के थक्के बनने, और हार्मोन स्राव के लिए भी अनिवार्य है। इसके प्रमुख स्रोत दूध, पनीर, दही, हरी पत्तेदार सब्जियाँ (ब्रोकोली, केल), फोर्टिफाइड अनाज, टोफू, और बादाम हैं।
- क्विनाइन (C₂₀H₂₄N₂O₂) मलेरिया (मलेरिया, प्लाज्मोडियम परजीवी) के उपचार के लिए उपयोगी है, और यह सिंकोना पेड़ (सिनकोना ऑफिसिनैलिस) की छाल से प्राप्त होता है। यह प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (सबसे घातक प्रजाति) को मारता है और इसे एंटीमलेरियल दवा के रूप में सदियों से उपयोग किया जाता रहा है। यह उच्च बुखार और ठंड लगने वाले मलेरिया के हमलों के खिलाफ प्रभावी है, हालाँकि प्रतिरोध (रेसिस्टेंस) विकसित हो गया है। इसका उपयोग रात में पैरों में ऐंठन (लेग क्रैम्प्स) के लिए भी किया जाता है, और यह टॉनिक वॉटर (कुनैन युक्त पेय) का कड़वा स्वाद प्रदान करता है।
- नमकीन बनाना (साल्टिंग) खाद्य संरक्षण का एक तरीका है जिसमें सूक्ष्मजीवों से पानी निकालने के लिए नमक (NaCl) का उपयोग किया जाता है। उच्च नमक सांद्रता (10-20%) परासरण के माध्यम से बैक्टीरिया और फफूंद की कोशिकाओं को निर्जलित कर उन्हें मार देती है या उनके विकास को रोक देती है। मांस (बेकन, हैम), मछली (सॉल्टेड कॉड, लॉक्स, एंकोवी), मक्खन, और सब्जियाँ (सॉकरक्राट, किम्ची) नमकीन बनाकर संरक्षित की जाती हैं। भारत में, आम, नींबू, और मिर्च का अचार नमक और मसालों के साथ (तेल के साथ या बिना) बनाया जाता है।
- विटामिन B12 (कोबालामिन, C₆₃H₈₈CoN₁₄O₁₄P) तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य (माइलिन शीथ के रखरखाव और मरम्मत) और DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) के संश्लेषण के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से मेगालोब्लास्टिक एनीमिया (बड़ी, अपरिपक्व लाल रक्त कोशिकाएँ), तंत्रिका क्षति (झुनझुनी, सुन्नता, चलने में कठिनाई, मेमोरी लॉस), और पैरानोइया हो सकता है। यह मुख्य रूप से पशु-आधारित खाद्य पदार्थों (यकृत, मांस, मछली, अंडे, दूध) में पाया जाता है; शाकाहारियों को इसके पूरक लेने की आवश्यकता होती है।
- डायजेपाम (वैलियम, C₁₆H₁₃ClN₂O) एक बेंजोडायजेपाइन (बेंजोडायजेपाइन) दवा है जो एक शांतिदायक (ट्रैंक्विलाइज़र), चिंता निवारक (एंक्सिओलिटिक), मांसपेशी शिथिलक (मसल रिलैक्सेंट), और निरोधी (एंटीकन्वल्सेंट) के रूप में कार्य करती है। यह मस्तिष्क में GABA (गामा-एमिनोब्यूट्रिक अम्ल, एक निरोधात्मक न्यूरोट्रांसमीटर) के प्रभाव को बढ़ाकर काम करती है, जिससे तंत्रिका कोशिकाओं की अति-उत्तेजना कम हो जाती है। इसका उपयोग चिंता, मांसपेशियों की ऐंठन, नींद न आना (अनिद्रा), पैनिक अटैक, और शराब वापसी के लक्षणों के उपचार में किया जाता है।
- सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) एक खाद्य परिरक्षक (प्रिजर्वेटिव) है, जिसका उपयोग सूखे मेवे (किशमिश, अंजीर, खुबानी), वाइन, सिरका, जूस और अचार में किया जाता है। यह एक रोगाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल) और एंटीऑक्सीडेंट (एंटीऑक्सीडेंट) एजेंट है, जो बैक्टीरिया, फफूंद, और यीस्ट के विकास को रोकता है और खाद्य पदार्थों के ऑक्सीकरण (रंग बदलना, भूरा होना) को रोकता है। सूखे फलों में, यह उनके चमकीले रंग को बनाए रखता है और उन्हें खराब होने से बचाता है।
- फोलिक अम्ल (विटामिन B9, फोलेट) गर्भावस्था में अत्यधिक जरूरी है क्योंकि यह भ्रूण में न्यूरल ट्यूब (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के अग्रदूत) के समुचित विकास के लिए आवश्यक है, जो गर्भावस्था के पहले 28 दिनों में बनती है। इसकी कमी से न्यूरल ट्यूब दोष (स्पाइना बिफिडा, एनेसेफली) और मेगालोब्लास्टिक एनीमिया हो सकता है। इसके प्रमुख स्रोत हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, सलाद), फलियाँ (दालें, छोले), एवोकाडो, ब्रोकली, और फोर्टिफाइड अनाज (आटा, चावल) हैं। गर्भवती महिलाओं को अक्सर फोलिक एसिड की खुराक लेने की सलाह दी जाती है।
- एरिथ्रोमाइसिन (C₃₇H₆₇NO₁₃) एक मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक (मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक) है जो बैक्टीरिया में प्रोटीन संश्लेषण (50S राइबोसोमल सबयूनिट से बंधकर) को बाधित करता है। यह पेनिसिलिन-प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प है, विशेष रूप से उन रोगियों के लिए जिन्हें पेनिसिलिन से एलर्जी है। इसका उपयोग श्वसन पथ के संक्रमण (निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, स्ट्रेप थ्रोट), त्वचा संक्रमण, कान में संक्रमण (ओटिटिस मीडिया), और यौन संचारित रोगों (क्लैमाइडिया, सिफलिस) के उपचार में किया जाता है।
- फ्रीजिंग (फ्रीजिंग) खाद्य संरक्षण की एक अत्यधिक प्रभावी विधि है, जिसमें भोजन को उसके हिमांक (आमतौर पर -18°C से नीचे) से नीचे के तापमान पर ठंडा किया जाता है। इस तापमान पर, पानी बर्फ के क्रिस्टल में बदल जाता है, जिससे सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, फफूंद, यीस्ट) की चयापचय गतिविधि और वृद्धि पूरी तरह से रुक जाती है, और एंजाइमी प्रतिक्रियाएं भी अत्यधिक धीमी हो जाती हैं। यह विधि मांस, मछली, पोल्ट्री, सब्जियाँ, फल, तैयार भोजन, ब्रेड और आइसक्रीम को महीनों या वर्षों तक सुरक्षित रख सकती है।
- जिंक (Zn) प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) को मजबूत करता है क्योंकि यह T-लिम्फोसाइट्स (श्वेत रक्त कोशिकाओं का एक प्रकार) के विकास और सक्रियण के लिए आवश्यक है, जो संक्रमणों (वायरल, बैक्टीरियल) से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह कोशिका विभाजन, घाव भरने, DNA संश्लेषण और एंजाइमों (कार्बोनिक एनहाइड्रेज़, अल्कोहल डिहाइड्रोजनेज़) के उचित कार्य के लिए भी अनिवार्य है। इसके प्रमुख स्रोत मांस, कस्तूरी, केकड़ा, फलियाँ, नट्स, बीज, और फोर्टिफाइड अनाज हैं।
- स्ट्रेप्टोकाइनेज (स्ट्रेप्टोकाइनेज) एक एंजाइम है जो रक्त के थक्के (ब्लड क्लॉट) को हटाने में उपयोगी है क्योंकि यह प्लास्मिनोजेन (निष्क्रिय एंजाइम) को प्लास्मिन (सक्रिय एंजाइम) में परिवर्तित करता है, जो फाइब्रिन (थक्के का मुख्य संरचनात्मक प्रोटीन) को तोड़कर थक्के को घोल देता है। इसका उपयोग दिल के दौरे (मायोकार्डियल इंफार्क्शन), पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों में थक्का), गहरी शिरा घनास्त्रता (DVT), और स्ट्रोक में थक्के (क्लॉट बस्टर) के रूप में किया जाता है। यह स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया से प्राप्त होता है।
- खाद्य संरक्षण में वैक्यूम पैकिंग (निर्वात पैकेजिंग) उपयोगी है क्योंकि यह पैकेज से लगभग सारी हवा (विशेष रूप से ऑक्सीजन) निकाल देती है, जिससे ऑक्सीडेटिव रैन्सीडिटी (भोजन में तेल/वसा का खराब होना) और एरोबिक बैक्टीरिया (जिन्हें बढ़ने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है) के विकास को रोका जा सकता है। यह विधि ताजा और प्रसंस्कृत मांस, मछली, पनीर, सब्जियाँ, फल, और कॉफी बीन्स के शेल्फ जीवन को काफी हद तक बढ़ा देती है। यह अक्सर MAP (मॉडिफाइड एटमॉस्फियर पैकेजिंग) के साथ संयोजन में प्रयोग किया जाता है।
- विटामिन B2 (राइबोफ्लेविन, C₁₇H₂₀N₄O₆) को राइबोफ्लेविन कहा जाता है, और यह ऊर्जा चयापचय (कार्बोहाइड्रेट, वसा, और प्रोटीन को ऊर्जा में परिवर्तित करने) के लिए आवश्यक एक सहकारक (कोएंजाइम FAD और FMN) है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी कार्य करता है और त्वचा, आंखों (मोतियाबिंद को रोकने में मदद), तंत्रिका तंत्र, और लाल रक्त कोशिकाओं के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। इसके प्रमुख स्रोत दूध, अंडे, मांस (यकृत), हरी पत्तेदार सब्जियाँ, बादाम, और फोर्टिफाइड अनाज हैं।
- लिडोकेन (लिडोकेन, C₁₄H₂₂N₂O) एक स्थानीय संवेदनाहारी (लोकल एनेस्थेटिक) दवा है जो त्वचा, श्लेष्मा झिल्ली, या ऊतक के एक छोटे से क्षेत्र में दर्द की अनुभूति को अवरुद्ध करती है। यह तंत्रिका कोशिकाओं के सोडियम चैनलों (सोडियम चैनल) को अवरुद्ध करता है, जिससे तंत्रिका आवेगों का संचरण रुक जाता है। इसका उपयोग मामूली सर्जिकल प्रक्रियाओं, दांतों की ड्रिलिंग, त्वचा की टांके लगाने, एंडोस्कोपी, और पुराने दर्द (जैसे, पोस्टहर्पेटिक न्यूराल्जिया) के उपचार में टॉपिकल जेल, पैच, या इंजेक्शन के रूप में किया जाता है।
- सल्फाइट्स (सल्फर डाइऑक्साइड और इसके लवण, जैसे सोडियम मेटाबाइसल्फाइट) फलों (सूखे मेवे, फलों के रस) के संरक्षण में उपयोगी हैं क्योंकि वे एंटीऑक्सीडेंट (एंटीऑक्सीडेंट) और रोगाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल) एजेंट के रूप में कार्य करते हैं। वे फलों के ऑक्सीकरण (भूरा होना) को रोकते हैं, चमकीले रंग को बनाए रखते हैं, और बैक्टीरिया, फफूंद, और यीस्ट के विकास को रोकते हैं। इनका उपयोग सूखे खुबानी, किशमिश, सेब, नाशपाती, अंगूर, और जूस, वाइन, सिरका, और अचार में व्यापक रूप से किया जाता है।
- मैग्नीशियम (Mg) मांसपेशियों (मांसपेशियों) के उचित कार्य के लिए जरूरी है क्योंकि यह मांसपेशियों के संकुचन और विश्राम (मसल रिलैक्सेशन) दोनों को नियंत्रित करता है, और यह ATP (ऊर्जा मुद्रा) के उत्पादन में एक सहकारक (कोफैक्टर) है। यह तंत्रिका आवेगों के संचरण, हड्डियों के स्वास्थ्य, रक्त शर्करा नियंत्रण, और रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके प्रमुख स्रोत हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक), नट्स (बादाम, काजू), बीज (कद्दू के बीज), साबुत अनाज, फलियाँ, और केले हैं।
- एमॉक्सिसिलिन (एमोक्सिसिलिन, C₁₆H₁₉N₃O₅S) एक पेनिसिलिन एंटीबायोटिक (पेनिसिलिन एंटीबायोटिक) है जिसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, और यह पेनिसिलिन के समान ही जीवाणुओं की कोशिका भित्ति के संश्लेषण को रोकता है। यह एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक है, जो ग्राम-पॉजिटिव और कुछ ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया के खिलाफ प्रभावी है। इसका उपयोग ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, गले का खराश (स्ट्रेप थ्रोट), कान में संक्रमण, त्वचा संक्रमण, मूत्र पथ के संक्रमण (UTI), और टाइफाइड के उपचार में किया जाता है।
- अचार बनाना (पिकलिंग) खाद्य संरक्षण की एक विधि है जिसमें खाद्य पदार्थों (सब्जियाँ, फल, मांस, अंडे) को अम्लीय घोल (सिरका या साइट्रिक अम्ल) या नमकीन पानी (ब्राइन) में डुबोकर रखा जाता है। अम्लीय माध्यम (pH 4.6 से नीचे) और उच्च नमक सांद्रता सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, फफूंद, यीस्ट) के विकास को रोकते हैं। भारत में, आम, नींबू, मिर्च, करेला, आंवला, और लहसुन का अचार मसालों (अजवाइन, सौंफ, कलौंजी, मेथी) और तेल (सरसों का तेल) के साथ बनाया जाता है।
- विटामिन B3 (नियासिन, C₆H₅NO₂) को नियासिन (नियासिन) कहा जाता है, और यह ऊर्जा चयापचय (कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन को ऊर्जा में परिवर्तित करने) के लिए आवश्यक कोएंजाइम NAD और NADP का एक अग्रदूत (पूर्ववर्ती) है। इसकी कमी से पेलाग्रा (पेलाग्रा) रोग होता है, जिसके लक्षण हैं - डर्मेटाइटिस (त्वचा पर लाल चकत्ते, खुरदरापन), डायरिया (दस्त), डिमेंशिया (मनोभ्रंश), और मृत्यु (यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाए)। इसके प्रमुख स्रोत मांस (चिकन, टर्की), मछली (टूना, सैल्मन), मूंगफली, साबुत अनाज, और दालें हैं।
- कोडीन (C₁₈H₂₁NO₃) एक कफ दबाने वाली (एंटीट्यूसिव) दवा है जो मस्तिष्क में कफ केंद्र (मेडुला ऑबोंगेटा में) पर कार्य करके खांसी की प्रतिक्रिया को कम करती है। यह एक हल्का ओपिओइड दर्द निवारक (एनाल्जेसिक) भी है, जो मॉर्फिन की तुलना में बहुत कमजोर है। इसका उपयोग सूखी, अनुत्पादक (नॉन-प्रोडक्टिव) खांसी (जैसे, फ्लू, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, एलर्जी के कारण) के इलाज के लिए किया जाता है, लेकिन इसकी लत लगने की क्षमता (एडिक्शन पोटेंशियल) के कारण इसे सख्त नियंत्रण में रखा जाता है।
- गर्मी उपचार (हीट ट्रीटमेंट) खाद्य संरक्षण में उपयोगी है क्योंकि उच्च तापमान सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, फफूंद, यीस्ट) के प्रोटीन को विकृत (डिनेचर) कर देता है और उन्हें मार देता है, जिससे भोजन सुरक्षित हो जाता है। विभिन्न ताप उपचार विधियों में पास्चुरीकरण (दूध, जूस), स्टरलाइजेशन (डिब्बाबंदी, UHT दूध), उबालना (पानी), भाप देना (सब्जियाँ), और तलना (मांस) शामिल हैं। ताप उपचार की प्रभावशीलता तापमान और समय दोनों पर निर्भर करती है।
- पोटैशियम (K) हृदय (हृदय) के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है क्योंकि यह हृदय की मांसपेशियों के विद्युत आवेगों (इलेक्ट्रिकल इम्पल्स) को नियंत्रित करता है, जो नियमित हृदय गति (रिदम) और रक्तचाप को बनाए रखने में मदद करता है। यह तंत्रिका आवेगों के संचरण, मांसपेशियों के संकुचन, और शरीर में द्रव संतुलन (सोडियम के साथ) के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके प्रमुख स्रोत केला, संतरा, आलू, शकरकंद, पालक, टमाटर, एवोकाडो, फलियाँ, और दही हैं।
- सिप्रोफ्लोक्सासिन (सिप्रोफ्लोक्सासिन, C₁₇H₁₈FN₃O₃) एक फ्लोरोक्विनोलोन (फ्लोरोक्विनोलोन) एंटीबायोटिक है जो बैक्टीरिया के DNA प्रतिकृति (DNA रेप्लिकेशन) को रोकता है (DNA जाइरेज़ और टोपोइसोमरेज़ IV एंजाइमों को बाधित करके)। यह एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक है जो ग्राम-पॉजिटिव और ग्राम-नेगेटिव दोनों बैक्टीरिया के खिलाफ प्रभावी है। इसका उपयोग मूत्र पथ के संक्रमण (UTI), श्वसन पथ के संक्रमण (निमोनिया), आंतों के संक्रमण (टाइफाइड, शिगेलोसिस), और हड्डियों/जोड़ों के संक्रमण में किया जाता है।
- साइट्रिक अम्ल (C₆H₈O₇) एक प्राकृतिक खाद्य परिरक्षक है जिसका उपयोग pH को कम करने (अम्लीय बनाने), एंटीऑक्सीडेंट के रूप में, और एक स्वाद बढ़ाने वाले पदार्थ के रूप में किया जाता है। यह एंजाइमैटिक ब्राउनिंग (फलों और सब्जियों का कटने पर भूरा होना) को रोकता है, बैक्टीरिया के विकास को धीमा करता है, और विटामिन C को स्थिर करता है। इसका उपयोग शीतल पेय, जैम, जेली, डिब्बाबंद फल, जूस, वाइन, और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में किया जाता है।
- विटामिन B6 (पाइरिडॉक्सिन, C₈H₁₁NO₃) को पाइरिडॉक्सिन (पाइरिडॉक्सिन) कहा जाता है, और यह अमीनो अम्ल चयापचय (प्रोटीन के टूटने और उपयोग), न्यूरोट्रांसमीटर (डोपामाइन, सेरोटोनिन, GABA) के संश्लेषण, और हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए आवश्यक एक कोएंजाइम (PLP - पाइरिडॉक्सल फॉस्फेट) है। इसकी कमी से त्वचा के रोग (सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस), एनीमिया, अवसाद, और तंत्रिका क्षति हो सकती है। इसके स्रोतों में मांस (चिकन, टर्की), मछली (टूना, सैल्मन), केला, आलू, छोले, और फोर्टिफाइड अनाज शामिल हैं।
- एजिथ्रोमाइसिन (ज़िथ्रोमैक्स, C₃₈H₇₂N₂O₁₂) एक मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक (मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक) है जो श्वसन संक्रमण (श्वसन संक्रमण) के उपचार के लिए अत्यधिक उपयोगी है, क्योंकि यह फेफड़ों और श्वसन मार्ग के ऊतकों में अच्छी तरह से प्रवेश कर जाता है। यह बैक्टीरिया में प्रोटीन संश्लेषण (50S राइबोसोमल सबयूनिट से बंधकर) को रोकता है। इसका उपयोग ब्रोंकाइटिस, निमोनिया (विशेष रूप से समुदाय-अधिग्रहित निमोनिया), साइनसाइटिस, गले का खराश (स्ट्रेप थ्रोट), और कान में संक्रमण (ओटिटिस मीडिया) के उपचार में व्यापक रूप से किया जाता है।
- नाइट्राइट्स (सोडियम नाइट्राइट, NaNO₂) मांस संरक्षण में उपयोगी हैं क्योंकि वे बैक्टीरिया (विशेष रूप से क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम, जो बोटुलिज़्म का कारण बनता है) के विकास को रोकते हैं, मांस को एक विशिष्ट गुलाबी-लाल रंग प्रदान करते हैं, और इसके स्वाद को बढ़ाते हैं। उपचारित मांस के बिना, वे जल्दी भूरे रंग (ग्रे) के हो जाते हैं और बैक्टीरिया से खराब हो जाते हैं। इनका उपयोग बेकन, हैम, सॉसेज, हॉट डॉग, और डेली मीट (लंच मीट) के उत्पादन में किया जाता है।
- ओमेगा-3 फैटी एसिड (ω-3 फैटी एसिड) हृदय के लिए लाभकारी है क्योंकि वे ट्राइग्लिसराइड्स (रक्त में वसा) को कम करते हैं, रक्तचाप को थोड़ा कम करते हैं, रक्त के थक्कों (ब्लड क्लॉट्स) को बनने से रोकते हैं, धमनियों में प्लाक (एथेरोस्क्लेरोसिस) के निर्माण को धीमा करते हैं, और हृदय ताल को स्थिर (एंटीएरिथमिक) रखते हैं। इसके प्रमुख स्रोत फैटी मछली (सैल्मन, मैकेरल, सार्डिन, टूना), अलसी के बीज (फ्लैक्ससीड्स), चिया सीड्स, अखरोट, और सोयाबीन तेल हैं।
- मेट्रोनिडाजोल (फ्लैगिल, C₆H₉N₃O₃) एक एंटीबायोटिक और एंटीप्रोटोज़ोअल (परजीवी रोधी) दवा है जो परजीवी संक्रमणों (प्रोटोजोआ और अवायवीय बैक्टीरिया) के उपचार में उपयोगी है। यह सूक्ष्मजीवों के DNA को नुकसान पहुँचाता है, जिससे वे मर जाते हैं। इसका उपयोग एमीबिक पेचिश (Entamoeba histolytica), जिआर्डियासिस (Giardia lamblia), ट्राइकोमोनियासिस (Trichomonas vaginalis), बैक्टीरियल वेजिनोसिस, और अवायवीय बैक्टीरियल संक्रमणों (जैसे, पेरिटोनिटिस, फोड़े) के उपचार में किया जाता है।
- लैक्टिक अम्ल (C₃H₆O₃) खाद्य संरक्षण में उपयोगी है क्योंकि यह खाद्य पदार्थों के pH को कम करता है (अम्लीय बनाता है), जिससे रोगजनक बैक्टीरिया का विकास रुक जाता है। यह एक प्राकृतिक परिरक्षक है जो किण्वित खाद्य पदार्थों (दही, अचार, सॉकरक्राट, किम्ची, खट्टी ब्रेड) में बनता है। यह बैक्टीरिया कोशिका झिल्ली को बाधित करके और सेलुलर चयापचय को रोककर काम करता है। इसका उपयोग मांस, सलाद ड्रेसिंग, पनीर, और शीतल पेय में परिरक्षक के रूप में भी किया जाता है।
- विटामिन A (रेटिनॉल) को रेटिनॉल (रेटिनॉल) कहा जाता है, और यह एक वसा में घुलनशील विटामिन है जो दृष्टि, प्रतिरक्षा कार्य, और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इसके तीन सक्रिय रूप हैं: रेटिनॉल (अल्कोहल), रेटिनल (एल्डिहाइड, दृष्टि के लिए), और रेटिनोइक अम्ल (विकास और विभेदन के लिए)। β-कैरोटीन (गाजर में) शरीर में विटामिन A में परिवर्तित हो जाता है। विटामिन A की कमी से रतौंधी, जेरोफ्थाल्मिया, और संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
- डाइक्लोफेनैक (C₁₄H₁₁Cl₂NO₂) एक गैर-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा (NSAID) है जो एक शक्तिशाली दर्द निवारक (एनाल्जेसिक) और सूजन कम करने वाली (एंटी-इंफ्लेमेटरी) दवा है। यह साइक्लोऑक्सीजिनेज (COX-1 और COX-2) एंजाइमों को बाधित करके प्रोस्टाग्लैंडिन (दर्द और सूजन के रसायन) के संश्लेषण को कम करती है। इसका उपयोग गठिया (रूमेटाइड, ऑस्टियोआर्थराइटिस, गाउट), मांसपेशियों में दर्द, पीठ दर्द, दांत दर्द, सिरदर्द, और चोट (मोच, फ्रैक्चर) के लिए किया जाता है।
- रेडिएशन (विकिरण, आयनकारी विकिरण - गामा किरणें, एक्स-रे, इलेक्ट्रॉन बीम) खाद्य संरक्षण की एक आधुनिक, कोल्ड (ठंडी) विधि है जो सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, फफूंद, यीस्ट, परजीवी) और कीटों को मारती है, और बीजों के अंकुरण को रोकती है। यह खाद्य पदार्थों के पोषण मूल्य, स्वाद, या बनावट को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किए बिना उनकी शेल्फ-लाइफ को बढ़ा देती है। इसका उपयोग मसाले, फल (स्ट्रॉबेरी, आम), सब्जियाँ (आलू, प्याज), मांस, और समुद्री भोजन के संरक्षण के लिए किया जाता है।
- फास्फोरस (P) हड्डियों के लिए जरूरी है क्योंकि यह कैल्शियम के साथ मिलकर हाइड्रॉक्सीपैटाइट [Ca₁₀(PO₄)₆(OH)₂] बनाता है, जो हड्डियों और दांतों को कठोरता और मजबूती प्रदान करता है। यह ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) का एक घटक है, जो शरीर की प्राथमिक ऊर्जा मुद्रा है, और DNA, RNA, कोशिका झिल्ली (फॉस्फोलिपिड), और एंजाइमों का भी एक हिस्सा है। इसके प्रमुख स्रोत दूध, पनीर, मांस, मछली, अंडे, साबुत अनाज, नट्स, और फलियाँ हैं।
- रिफैम्पिसिन (रिफैम्पिसिन, C₄₃H₅₈N₄O₁₂) टीबी (तपेदिक, ट्यूबरक्यूलोसिस) के लिए उपयोगी एक प्रथम-पंक्ति एंटीबायोटिक है, और यह बैक्टीरिया में RNA संश्लेषण (RNA सिंथेसिस) को रोकता है (DNA-निर्भर RNA पॉलीमरेज़ को बाधित करके)। यह एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक है, जिसका उपयोग टीबी, कुष्ठ रोग (लेप्रोसी), मेनिंगोकोकल मेनिन्जाइटिस, और स्टैफिलोकोकल संक्रमणों के उपचार में किया जाता है। यह अपने दुष्प्रभावों (जैसे, मूत्र, पसीने, आंसुओं का नारंगी-लाल रंग) के लिए जाना जाता है।
- सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) का उपयोग सूखे फलों (सूखे मेवे) और वाइन के संरक्षण में एक एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल एजेंट के रूप में व्यापक रूप से किया जाता है। यह ऑक्सीकरण (भूरा होना, रंग बदलना) को रोकता है, बैक्टीरिया और यीस्ट के विकास को रोकता है, और फलों के चमकीले रंग को बनाए रखता है। सूखे खुबानी, किशमिश, अंजीर, और वाइन में SO₂ आमतौर पर पाया जाता है। इसका उपयोग अचार, जूस, और सिरके में भी किया जाता है।
- विटामिन B7 (बायोटिन, C₁₀H₁₆N₂O₃S) को बायोटिन (बायोटिन) कहा जाता है, और यह कार्बोहाइड्रेट, वसा, और प्रोटीन के चयापचय (मैक्रोन्यूट्रिएंट्स को ऊर्जा में बदलने) के लिए आवश्यक एक कोएंजाइम (कार्बोक्सिलेज) है। यह स्वस्थ बालों, त्वचा और नाखूनों (बायोटिन की कमी से बालों का झड़ना, भंगुर नाखून) के लिए लोकप्रिय है, हालाँकि वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। इसके प्रमुख स्रोत अंडे की जर्दी, यकृत (कलेजी), नट्स (बादाम, अखरोट), सालमन, एवोकाडो, शकरकंद, और फूलगोभी हैं।
- लेवोफ्लोक्सासिन (C₁₈H₂₀FN₃O₄) एक फ्लोरोक्विनोलोन एंटीबायोटिक (फ्लोरोक्विनोलोन एंटीबायोटिक) है जो एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम दवा है, जो बैक्टीरिया के DNA प्रतिकृति (DNA replication) और मरम्मत को बाधित करती है (DNA जाइरेज़ और टोपोइसोमरेज़ IV को रोककर)। इसका उपयोग श्वसन पथ के संक्रमण (साइनसाइटिस, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया), मूत्र पथ के संक्रमण (UTI), त्वचा और कोमल ऊतकों के संक्रमण, प्रोस्टेटाइटिस, और आंखों के संक्रमण (नेत्र संबंधी बूंदों के रूप में) के उपचार में किया जाता है।
- फ्रीज ड्राइंग (लियोफिलाइजेशन, फ्रीज-ड्राइंग) खाद्य संरक्षण की एक उन्नत विधि है जिसमें खाद्य पदार्थ को पहले जमाया जाता है और फिर निर्वात (वैक्यूम) में रखा जाता है, जिससे बर्फ सीधे जल वाष्प (उर्ध्वपातन, सब्लिमेशन) में बदल जाती है। यह विधि अधिकांश सूक्ष्मजीवों और एंजाइमी गतिविधि को रोक देती है, और भोजन के मूल आकार, रंग, स्वाद, और पोषण मूल्य को लगभग बरकरार रखती है। इसका उपयोग कॉफी, फलों, सब्जियों, मांस, अंतरिक्ष यात्री भोजन, और दवाओं के संरक्षण के लिए किया जाता है।
- सेलेनियम (Se) एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट (एंटीऑक्सीडेंट) है जो शरीर को मुक्त मूलकों (फ्री रेडिकल्स) द्वारा ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाता है, कोशिकाओं और DNA की रक्षा करता है। यह थायराइड हार्मोन चयापचय (आयोडीन के साथ), प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य, और प्रजनन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इसके प्रमुख स्रोत ब्राज़ील नट्स (बेहद समृद्ध), टूना, सार्डिन, साबुत अनाज (ब्राउन राइस), अंडे, और सूरजमुखी के बीज हैं। गंभीर कमी से काशिन-बेक रोग (हृदय रोग) हो सकता है।
- हाइड्रोकोर्टिसोन (हाइड्रोकोर्टिसोन, C₂₁H₃₀O₅) एक कॉर्टिकोस्टेरॉयड (कोर्टिकोस्टेरॉइड) दवा है जो सूजन (इंफ्लेमेशन) को कम करती है, एलर्जी प्रतिक्रियाओं को दबाती है, और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है (इम्यूनोसप्रेसेन्ट)। यह शरीर में प्राकृतिक रूप से उत्पादित हार्मोन कोर्टिसोल के समान है। इसका उपयोग सूजन वाली त्वचा की स्थितियों (एक्जिमा, सोरायसिस, एलर्जी दाने), गठिया, अस्थमा, एलर्जी राइनाइटिस (हे फीवर), और अधिवृक्क अपर्याप्तता (एडिसन रोग) के उपचार में किया जाता है।
- सोडियम नाइट्रेट (NaNO₃) मांस संरक्षण (बेकन, हैम, सॉसेज) में उपयोगी है, क्योंकि यह एक परिरक्षक (प्रिजर्वेटिव), रंग स्थिरक (कलर फिक्सेटिव), और स्वाद बढ़ाने वाला (फ्लेवर एन्हांसर) के रूप में कार्य करता है। यह क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम (बोटुलिज़्म बैक्टीरिया) के विकास को रोकता है और मांस को उसका विशिष्ट गुलाबी-लाल रंग देता है। उपचारित मांस में, बैक्टीरिया नाइट्रेट को नाइट्राइट में बदल देते हैं, जो सक्रिय परिरक्षक है। इसका उपयोग पनीर और मछली के संरक्षण में भी किया जाता है।
- विटामिन B5 (पैंटोथेनिक अम्ल, C₉H₁₇NO₅) को पैंटोथेनिक अम्ल (पैंटोथेनिक एसिड) कहा जाता है, और यह कोएंजाइम A (CoA) का एक घटक है, जो कार्बोहाइड्रेट, वसा, और प्रोटीन के चयापचय (ऊर्जा उत्पादन) और फैटी एसिड, कोलेस्ट्रॉल, और हार्मोन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है। इसकी कमी दुर्लभ है, लेकिन होने पर थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, और त्वचा में झुनझुनी हो सकती है। इसके प्रमुख स्रोत मांस (यकृत), एवोकाडो, ब्रोकोली, अंडे, दालें, और साबुत अनाज हैं।
- एट्रोपिन (C₁₇H₂₃NO₃) एक दवा है जो मांसपेशियों को शिथिल करने के बजाय, वास्तव में मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने में मदद करती है, विशेष रूप से आंखों की मांसपेशियों के परीक्षण (पुतली फैलाने - मायड्रियासिस) और पेट/आंतों की मांसपेशियों की ऐंठन (एंटीस्पास्मोडिक) के लिए। यह एक एंटीकोलिनर्जिक दवा है, जो एसिटाइलकोलाइन (एक न्यूरोट्रांसमीटर) के प्रभाव को अवरुद्ध करती है। इसका उपयोग पुतली फैलाने के लिए आंखों की बूंदों में, नेत्र परीक्षा और सर्जरी से पहले, और ऑर्गेनोफॉस्फेट विषाक्तता (कीटनाशक) के लिए एक एंटीडोट के रूप में किया जाता है।
- सिरके (विनेगर) में एसीटिक अम्ल (एसीटिक एसिड, CH₃COOH) 4-8% सांद्रता में होता है, जो इसे खट्टा स्वाद और तीखी गंध प्रदान करता है। सिरका एक प्राकृतिक खाद्य परिरक्षक है क्योंकि यह खाद्य पदार्थों के pH को कम करता है (अम्लीय बनाता है), जिससे अधिकांश बैक्टीरिया (जैसे, क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम) नहीं बढ़ सकते। इसका उपयोग अचार बनाने (पिकलिंग), सॉस, केचप, मेयोनेज़, सलाद ड्रेसिंग, और अन्य संरक्षित खाद्य पदार्थों में किया जाता है। सिरका भी एक उत्कृष्ट घरेलू क्लीनर और कीटाणुनाशक है।
- विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) को एस्कॉर्बिक अम्ल (एस्कॉर्बिक एसिड) कहा जाता है, और यह एक पानी में घुलनशील विटामिन है जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। यह कोलेजन (त्वचा, रक्त वाहिकाओं, हड्डियों) के संश्लेषण, घाव भरने, आयरन के अवशोषण, और प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य के लिए आवश्यक है। यह शरीर में निर्मित नहीं होता है और आहार के माध्यम से प्राप्त किया जाना चाहिए। इसकी कमी से स्कर्वी (स्कर्वी) होता है, जिसके लक्षण हैं - मसूड़ों से खून आना, दांत गिरना, जोड़ों में दर्द, और घाव का ठीक से न भरना।
- नियोमाइसिन (C₂₃H₄₆N₆O₁₃) एक एमिनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक (एमिनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक) है जिसका उपयोग मुख्य रूप से त्वचा संक्रमण, कान में संक्रमण, और आंखों के संक्रमण के लिए टॉपिकल (स्थानीय) दवा (क्रीम, मलहम, बूंदों) के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह मौखिक रूप से लेने पर खराब अवशोषित होता है और इसके गंभीर दुष्प्रभाव (गुर्दे और कान की क्षति) हो सकते हैं। यह बैक्टीरिया में प्रोटीन संश्लेषण (30S राइबोसोमल सबयूनिट) को बाधित करता है। इसका उपयोग मुँहासे, कट, खरोंच, जलन, और सर्जरी के बाद के संक्रमणों में किया जाता है।
- किण्वन (किण्वन) खाद्य संरक्षण की एक प्राकृतिक विधि है जिसमें सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, यीस्ट, फफूंद) भोजन में शर्करा और अन्य कार्बोहाइड्रेट को तोड़कर अल्कोहल, अम्ल (जैसे, लैक्टिक अम्ल, एसीटिक अम्ल), या गैसों का उत्पादन करते हैं। ये उत्पाद (अल्कोहल, अम्ल) प्राकृतिक परिरक्षक के रूप में कार्य करते हैं, जो रोगजनक सूक्ष्मजीवों के विकास को रोकते हैं और भोजन को खराब होने से बचाते हैं। इस विधि से दही, अचार (पिकल्स), सॉकरक्राट (किण्वित गोभी), किम्ची, खट्टी ब्रेड (सॉरडो ब्रेड), और शराब (वाइन, बीयर) बनाए जाते हैं।
- क्रोमियम (Cr³⁺, ट्रिवेलेंट क्रोमियम) इंसुलिन (इंसुलिन) के कार्य में मदद करता है, जो रक्त शर्करा (ग्लूकोज) को कोशिकाओं में प्रवेश करने और ऊर्जा के लिए उपयोग करने में सहायता करता है। यह कार्बोहाइड्रेट, वसा, और प्रोटीन के चयापचय के लिए एक आवश्यक ट्रेस खनिज है। इसकी कमी से ग्लूकोज सहिष्णुता में कमी (प्रीडायबिटीज) और इंसुलिन प्रतिरोध हो सकता है। इसके प्रमुख स्रोत ब्रोकोली (सबसे अच्छा स्रोत), अंगूर का रस, साबुत अनाज, मांस (टर्की), अंडे, सेब, और केले हैं।
- बार्बिट्यूरेट्स (बार्बिट्यूरेट्स) एक वर्ग है जिसमें नींद लाने वाली (हिप्नोटिक), शामक (सेडेटिव), और निरोधी (एंटीकन्वल्सेंट) दवाएं शामिल हैं, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) को उदास (डिप्रेस) करती हैं। इनका उपयोग नींद न आना (अनिद्रा), चिंता, दौरे (एपिलेप्सी), और एनेस्थीसिया के प्रेरण (इंडक्शन) के लिए किया जाता था, लेकिन इनके दुरुपयोग, नशे की लत (एडिक्शन), ओवरडोज (ओवरडोज - मृत्यु) के जोखिम के कारण अब इन्हें बेंजोडायजेपाइन (जैसे, डायजेपाम) द्वारा बड़े पैमाने पर प्रतिस्थापित कर दिया गया है।
- बेंजोइक अम्ल (C₆H₅COOH) का उपयोग शीतल पेय (सॉफ्ट ड्रिंक्स), फलों के रस, अचार, और सॉस में परिरक्षक (प्रिजर्वेटिव) के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह यीस्ट, फफूंद और कुछ बैक्टीरिया के विकास को रोकता है। यह अम्लीय माध्यम (pH 2.5-4.0) में सबसे प्रभावी है, जहाँ यह गैर-आयनित रूप में होता है और सूक्ष्मजीवों की कोशिका झिल्ली में प्रवेश कर सकता है। कोका-कोला, पेप्सी, और फैंटा में बेंजोइक अम्ल या सोडियम बेंजोएट उनके खट्टे स्वाद को बनाए रखते हुए उन्हें लंबे समय तक संरक्षित करता है।
- विटामिन B9 (फोलिक अम्ल, C₁₉H₁₉N₇O₆) को फोलिक अम्ल (फोलिक एसिड, सिंथेटिक फॉर्म) या फोलेट (प्राकृतिक फॉर्म) कहा जाता है, और यह कोशिका विभाजन (DNA, RNA, और प्रोटीन के संश्लेषण) के लिए आवश्यक है। यह गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के न्यूरल ट्यूब (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी) के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को फोलिक एसिड की खुराक लेने की सलाह दी जाती है। इसकी कमी से न्यूरल ट्यूब दोष (स्पाइना बिफिडा) और मेगालोब्लास्टिक एनीमिया हो सकता है। इसके स्रोत हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फलियाँ, और फोर्टिफाइड अनाज हैं।
- सैलिसिलिक अम्ल (C₇H₆O₃) मुँहासे (एक्ने) की दवा में उपयोगी है क्योंकि यह एक केराटोलिटिक (केराटोलिटिक) एजेंट है, जो त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाकर रोम छिद्रों (पोर्स) को खोलता है और ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स, और सफेद दानों को कम करता है। यह बैक्टीरिया के विकास को भी थोड़ा रोकता है और सूजन को कम करता है। इसका उपयोग टॉपिकल (स्थानीय) जैल, क्रीम, लोशन, क्लींजर, और पैड्स (एक्ने पैच) में 0.5% से 2% सांद्रता पर किया जाता है। यह एक प्राकृतिक एस्पिरिन-जैसा यौगिक है जो विलो (विलो) पेड़ की छाल में पाया जाता है।
- स्टरलाइजेशन (नसबंदी) खाद्य संरक्षण की एक विधि है जिसमें भोजन को उच्च तापमान (आमतौर पर 121°C, 15-20 मिनट के लिए दबाव कुकर या ऑटोक्लेव में) पर गर्म किया जाता है, जिससे सभी सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, फफूंद, यीस्ट) और उनके बीजाणु (स्पोर्स) नष्ट हो जाते हैं, जिससे भोजन पूरी तरह से रोगाणु-मुक्त (स्टेराइल) हो जाता है। यह प्रक्रिया डिब्बाबंद सब्जियों, मांस, मछली, और UHT दूध (अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर दूध) के लिए उपयोग की जाती है, जिसे कमरे के तापमान पर महीनों या वर्षों तक संग्रहीत किया जा सकता है।
- मैंगनीज (Mn) एंजाइम कार्य (एंजाइम फंक्शन) में मदद करता है, क्योंकि यह कई एंजाइमों (जैसे, सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज - एक एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम, पाइरूवेट कार्बोक्सिलेज - ऊर्जा चयापचय में) के लिए एक आवश्यक सहकारक (कोफैक्टर) है। यह हड्डियों के निर्माण, घाव भरने, रक्त शर्करा के नियमन, और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके प्रमुख स्रोत साबुत अनाज (ब्राउन राइस, ओट्स), नट्स (हेज़लनट्स, पेकान), हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक), चाय, अनानास, और फलियाँ हैं।
- एम्फेटामाइन (एम्फेटामाइन) एक शक्तिशाली उत्तेजक (स्टिमुलेंट) दवा है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) को उत्तेजित करती है, जिससे सतर्कता, ऊर्जा, और एकाग्रता बढ़ती है, और भूख कम होती है। इसका उपयोग अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) और नार्कोलेप्सी (बेकाबू नींद) के उपचार में किया जाता है, लेकिन इसकी लत लगने की उच्च क्षमता (एडिक्शन पोटेंशियल) के कारण इसे दुरुपयोग के जोखिम में सख्त नियंत्रण में रखा जाता है। यह मेथामफेटामाइन (क्रिस्टल मेथ, एक खतरनाक अवैध दवा) के समान है।
- नमक (सोडियम क्लोराइड, NaCl) खाद्य पदार्थों को निर्जलीकरण (डिहाइड्रेट) करता है, अर्थात यह परासरण (ओस्मोसिस) के द्वारा खाद्य कोशिकाओं और सूक्ष्मजीवों से पानी निकाल लेता है। पानी की कमी (कम पानी गतिविधि, aw) के कारण, सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, फफूंद, यीस्ट) जीवित नहीं रह पाते और न ही बढ़ पाते हैं, जिससे खाद्य पदार्थ खराब नहीं होता है। यही कारण है कि नमक मांस (बेकन, हैम), मछली (सॉल्टेड कॉड), और सब्जियों (अचार) को संरक्षित करने के लिए सदियों से उपयोग किया जाता रहा है।
- विटामिन D को कैल्सिफेरॉल (कैल्सिफेरॉल) कहा जाता है, जो वसा में घुलनशील विटामिनों का एक समूह है, मुख्यतः विटामिन D₂ (एर्गोकैल्सिफेरॉल) और विटामिन D₃ (कोलेकैल्सिफेरॉल)। विटामिन D₃ त्वचा में सूर्य के प्रकाश (UV-B) के संपर्क में आने से कोलेस्ट्रॉल से संश्लेषित होता है। यह आंतों से कैल्शियम और फास्फोरस के अवशोषण को बढ़ाकर हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी से रिकेट्स (बच्चों में) और ऑस्टियोमलेशिया (वयस्कों में) होता है।
- जेंटामाइसिन (C₂₁H₄₃N₅O₇) एक एमिनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक (एमिनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक) है जो ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया (जैसे, स्यूडोमोनास, एस्चेरिचिया कोलाई, क्लेबसिएला) के कारण होने वाले गंभीर संक्रमणों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। यह बैक्टीरिया में प्रोटीन संश्लेषण (30S राइबोसोमल सबयूनिट) को बाधित करता है। इसका उपयोग अक्सर इंजेक्शन (इंट्रावीनस या इंट्रामस्क्युलर) के रूप में, या स्थानीय रूप से (त्वचा, आंख, कान की बूंदों) में किया जाता है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव (गुर्दे और कान की क्षति) के कारण इसका उपयोग सीमित है।
- सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) का उपयोग शराब (वाइन) संरक्षण में एक एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल के रूप में किया जाता है, ताकि ऑक्सीकरण (रंग और स्वाद का बिगड़ना) को रोका जा सके और अवांछित बैक्टीरिया और यीस्ट के विकास को रोका जा सके। यह वाइन में प्राकृतिक रूप से (किण्वन के दौरान) और अतिरिक्त रूप में (सोडियम मेटाबाइसल्फाइट के रूप में) भी मौजूद होता है। यह सूखे मेवों (विशेष रूप से खुबानी, किशमिश) और जूस में भी उपयोग किया जाता है। कुछ लोगों में, यह एलर्जी प्रतिक्रियाओं (सिरदर्द, अस्थमा) का कारण बन सकता है।
- कॉपर (Cu) त्वचा स्वास्थ्य के लिए जरूरी है क्योंकि यह मेलेनिन (त्वचा, बालों और आंखों को रंग देने वाला वर्णक) के संश्लेषण, कोलेजन और इलास्टिन (त्वचा की संरचना और लोच) के निर्माण, और घाव भरने के लिए आवश्यक एक ट्रेस खनिज है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम (सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज, SOD) का एक घटक है, जो त्वचा को मुक्त मूलकों से होने वाले नुकसान (उम्र बढ़ना) से बचाता है। इसके प्रमुख स्रोत कस्तूरी, केकड़ा, नट्स, बीज, यकृत (कलेजी), और साबुत अनाज हैं।
- प्रोकेन (प्रोकेन, C₁₃H₂₀N₂O₂) एक स्थानीय संवेदनाहारी (लोकल एनेस्थेटिक) दवा है, जिसे व्यापार नाम नोवोकेन (नोवोकेन) के रूप में जाना जाता है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से दंत चिकित्सा (दांतों की ड्रिलिंग, निष्कर्षण) और छोटी सर्जिकल प्रक्रियाओं (टाँके लगाना, त्वचा की बायोप्सी) में इंजेक्शन के रूप में किया जाता है। यह तंत्रिका कोशिकाओं में सोडियम चैनलों (सोडियम चैनल) को अवरुद्ध करके दर्द के संकेतों के संचरण को रोकता है। यह लिडोकेन की तुलना में धीमी गति से काम करता है और लंबे समय तक चलता है, लेकिन एलर्जी प्रतिक्रियाएं अधिक आम हैं।
- लैक्टिक अम्ल (C₃H₆O₃) दही (योगर्ट) के संरक्षण में उपयोगी है क्योंकि यह किण्वन (फर्मेंटेशन) के दौरान दूध शर्करा (लैक्टोज) से बनता है और दही के pH को 4.0-4.5 (अम्लीय) कर देता है। यह अम्लीय वातावरण रोगजनक बैक्टीरिया (जैसे, साल्मोनेला, स्टैफिलोकोकस) के विकास को रोकता है, जबकि लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इस प्रकार, लैक्टिक अम्ल प्राकृतिक रूप से दही को खराब होने से बचाता है और इसे रेफ्रिजरेटर में कई दिनों तक सुरक्षित रखता है।
- विटामिन B1 (थायमिन) को थायमिन (थायमिन) कहा जाता है, और यह एक पानी में घुलनशील विटामिन है जो ऊर्जा चयापचय (कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा उत्पन्न करने) के लिए आवश्यक है। यह पाइरूवेट डिहाइड्रोजनेज और α-केटोग्लूटरेट डिहाइड्रोजनेज जैसे प्रमुख एंजाइमों के लिए एक सहकारक (कोएंजाइम) के रूप में कार्य करता है। इसकी कमी से बेरी-बेरी (बेरी-बेरी) होता है, जो तंत्रिका तंत्र (न्यूरोलॉजिकल), हृदय (कार्डियोवैस्कुलर), और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पाचन) लक्षणों का कारण बनता है।
- ओपियम (अफीम) नारकोटिक (मादक) का एक स्रोत है, जो पापावर सोम्नीफेरम (अफीम पोस्ता) के कच्चे लेटेक्स से प्राप्त होता है। ओपियम में 20 से अधिक एल्कलॉइड होते हैं, जिनमें मुख्य हैं मॉर्फिन (10-20%, दर्द निवारक), कोडीन (0.5-3%, कफ दबाने वाला और हल्का दर्द निवारक), और थीबेन (ओपिओइड संश्लेषण के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे, ऑक्सीकोडोन, हाइड्रोकोडोन)। ओपियम और उसके डेरिवेटिव (जैसे, हेरोइन) के दुरुपयोग से गंभीर लत (एडिक्शन), श्वसन अवसाद, और मृत्यु हो सकती है।
- सोडियम बेंजोएट (C₆H₅COONa) का उपयोग जैम, जेली, मुरब्बा, और कैंडीड फलों में परिरक्षक (प्रिजर्वेटिव) के रूप में किया जाता है क्योंकि यह यीस्ट, फफूंद और कुछ बैक्टीरिया के विकास को रोकता है। यह बेंजोइक अम्ल का सोडियम नमक है, जो पानी में अधिक घुलनशील है। जैम और जेली में (जो पहले से ही उच्च शर्करा सामग्री के कारण आंशिक रूप से संरक्षित होते हैं), सोडियम बेंजोएट अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे उनकी शेल्फ-लाइफ बढ़ जाती है। यह आमतौर पर अम्लीय खाद्य पदार्थों (pH 3.5-4.5) में उपयोग किया जाता है, जहाँ यह सबसे प्रभावी होता है।
- कोबाल्ट (Co) विटामिन B12 (कोबालामिन) का एक हिस्सा है, जिसका अर्थ है कि कोबाल्ट विटामिन B12 के रासायनिक ढांचे का केंद्रीय भाग है। विटामिन B12 तंत्रिका तंत्र (माइलिन शीथ के रखरखाव) और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक है। कोबाल्ट की कमी अत्यंत दुर्लभ है क्योंकि यह विटामिन B12 के माध्यम से प्राप्त होता है, और विटामिन B12 की कमी के लक्षण (एनीमिया, तंत्रिका क्षति) कोबाल्ट की कमी के समान होते हैं। कोबाल्ट के प्रमुख आहार स्रोत मांस, यकृत, मछली, अंडे, दूध, और पनीर हैं।
- हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine, C₁₈H₂₆ClN₃O) एक दवा है जो मलेरिया (मलेरिया, प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम और पी. विवैक्स) के उपचार और रोकथाम के लिए उपयोगी है। यह एक एंटीमलेरियल दवा है जो परजीवी के विकास को रोकती है (हेमेज़ पोलीमरेज़ को बाधित करके)। इसका उपयोग ऑटोइम्यून बीमारियों जैसे रुमेटाइड गठिया (RA), सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (SLE), और स्जोग्रेन सिंड्रोम के उपचार के लिए भी किया जाता है, क्योंकि यह प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करता है। COVID-19 के उपचार के लिए इसे प्रस्तावित किया गया था, लेकिन इसकी प्रभावशीलता साबित नहीं हुई और इसके गंभीर दुष्प्रभाव (हृदय अतालता) देखे गए।
- स्मोकिंग (धूम्रपान) मछली (जैसे, सैल्मन, ट्राउट, मैकेरल, हैडॉक) के संरक्षण में उपयोगी है क्योंकि धुएं में रोगाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल) यौगिक (फिनोल, फॉर्मल्डिहाइड, एसीटिक अम्ल, क्रेओसोट) होते हैं जो सूक्ष्मजीवों को मारते हैं, सतह पर एक सुरक्षात्मक परत (बार्क) बनाते हैं, और मछली की नमी को कम करते हैं। गर्म स्मोकिंग (गर्म धूम्रपान, 70-80°C, मछली को पकाता है) और कोल्ड स्मोकिंग (ठंडा धूम्रपान, 15-30°C, मछली को पकाता नहीं है, बल्कि केवल स्वाद और संरक्षित करता है) दो मुख्य तरीके हैं। स्मोक्ड सैल्मन (लॉक्स) एक कोल्ड-स्मोक्ड उत्पाद है।
- विटामिन E (टोकोफेरॉल) को टोकोफेरॉल (टोकोफेरॉल) कहा जाता है, और यह वसा में घुलनशील विटामिनों (A, D, E, K) में से एक है। यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट (एंटीऑक्सीडेंट) है जो कोशिका झिल्लियों को मुक्त मूलकों (फ्री रेडिकल्स) द्वारा होने वाले नुकसान (लिपिड पेरोक्सीडेशन) से बचाता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य, त्वचा के स्वास्थ्य, और DNA की मरम्मत के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसकी कमी दुर्लभ है, लेकिन होने पर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं (परिधीय न्यूरोपैथी, एटैक्सिया) और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली हो सकती है।
- मेथाडोन (Methadone, C₂₁H₂₇NO) एक सिंथेटिक ओपिओइड दवा है जो नशा मुक्ति (ओपिओइड एडिक्शन) के उपचार में उपयोगी है, विशेष रूप से हेरोइन या मॉर्फिन की लत के लिए। यह एक लंबे समय तक काम करने वाला (लॉन्ग-एक्टिंग) ओपिओइड है जो मस्तिष्क में ओपिओइड रिसेप्टर्स को सक्रिय करके वापसी के लक्षणों (विदड्रॉल सिंड्रोम) और तीव्र इच्छा (क्रेविंग) को कम करता है। मेथाडोन मेन्टेनेंस थेरेपी (MMT) रोगियों को उनके दुरुपयोग वाली दवा (जैसे, हेरोइन) के बिना स्थिर रहने, नशा-मुक्त जीवन जीने, और सामाजिक रूप से कार्य करने की अनुमति देती है।
- नाइट्रेट्स (सोडियम नाइट्रेट, NaNO₃) मांस के रंग को बनाए रखते हैं क्योंकि वे बैक्टीरिया द्वारा नाइट्राइट्स (नाइट्राइट्स) में बदल जाते हैं, जो फिर मायोग्लोबिन (मांस में लाल वर्णक) के साथ अभिक्रिया करके एक स्थिर गुलाबी-लाल रंग (नाइट्रोसोमायोग्लोबिन) बनाते हैं। इसके बिना, उपचारित मांस (जैसे, बेकन, हैम, सॉसेज) ऑक्सीकरण (हवा के संपर्क में आने) के कारण जल्दी से भूरा या ग्रे हो जाएगा। नाइट्रेट्स और नाइट्राइट्स (नाइट्राइट्स) भी बोटुलिज़्म (बोटुलिज़्म) पैदा करने वाले बैक्टीरिया (क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम) के विकास को रोकते हैं।
- कैल्शियम फॉस्फेट (कैल्शियम फॉस्फेट) हड्डियों में पाया जाने वाला प्राथमिक खनिज है, जो हाइड्रॉक्सीपैटाइट (Ca₁₀(PO₄)₆(OH)₂) के रूप में मौजूद होता है, और यह हड्डियों को उनकी कठोरता, मजबूती, और संरचनात्मक अखंडता प्रदान करता है। यह दांतों के इनेमल (दाँतों के इनेमल) का भी एक प्रमुख घटक है। आहार में, कैल्शियम फॉस्फेट कैल्शियम और फास्फोरस का एक स्रोत है, जो दोनों ही हड्डियों के स्वास्थ्य, ऊर्जा चयापचय (ATP), और DNA संश्लेषण के लिए आवश्यक हैं।
- डोक्सीसाइक्लिन (डोक्सीसाइक्लिन, C₂₂H₂₄N₂O₈) एक टेट्रासाइक्लिन (टेट्रासाइक्लिन) एंटीबायोटिक है जो बैक्टीरिया में प्रोटीन संश्लेषण (30S राइबोसोमल सबयूनिट) को बाधित करता है। यह एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक है, जो टेट्रासाइक्लिन की तुलना में लंबे समय तक काम करता है और इसे भोजन के साथ लिया जा सकता है। इसका उपयोग मुँहासे (एक्ने), क्लैमाइडिया, सिफलिस, लाइम रोग, मलेरिया की रोकथाम, श्वसन पथ के संक्रमण (निमोनिया), और त्वचा संक्रमण के उपचार के लिए किया जाता है। टेट्रासाइक्लिन की तरह, यह बच्चों (8 वर्ष से कम) और गर्भवती महिलाओं में दांतों के रंग को स्थायी रूप से पीला कर सकता है।
- सिरका (विनेगर) खाद्य पदार्थों को अम्लीय (एसिडिक) बनाता है, अर्थात यह उनके pH को 4.6 से नीचे कम कर देता है। यह अम्लीय वातावरण अधिकांश बैक्टीरिया, फफूंद, और यीस्ट के लिए प्रतिकूल है, क्योंकि वे तटस्थ या थोड़े अम्लीय pH (6.5-7.5) में सबसे अच्छे से बढ़ते हैं। सिरके में मुख्य अम्ल एसीटिक अम्ल (CH₃COOH) होता है, जो कोशिका झिल्ली को नुकसान पहुंचाकर और सेलुलर चयापचय को बाधित करके सूक्ष्मजीवों को मारता है। यही कारण है कि अचार (पिकल्स) और सलाद ड्रेसिंग जैसे अम्लीय खाद्य पदार्थ बिना प्रशीतन के लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
- विटामिन A का एक प्रमुख स्रोत गाजर (गाजर) है, जिसमें β-कैरोटीन (β-कैरोटीन) नामक एक प्रोविटामिन ए कैरोटेनॉयड प्रचुर मात्रा में (लगभग 835 माइक्रोग्राम प्रति 100 ग्राम) होता है। β-कैरोटीन शरीर के अंदर (आंतों और यकृत में) रेटिनॉल (विटामिन A का सक्रिय रूप) में परिवर्तित हो जाता है, जो दृष्टि (रतौंधी से बचाता है), प्रतिरक्षा प्रणाली, और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। गाजर β-कैरोटीन का सबसे अच्छा ज्ञात स्रोत है, जो उन्हें उनका विशिष्ट नारंगी रंग भी देता है।
- आइसोनियाजिड (आइसोनियाजिड, C₆H₇N₃O) टीबी (तपेदिक, ट्यूबरक्यूलोसिस) के लिए एक प्रथम-पंक्ति (फर्स्ट-लाइन) एंटीबायोटिक है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्यूलोसिस (M. ट्यूबरक्यूलोसिस) के खिलाफ अत्यधिक प्रभावी है। यह बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति में माइकोलिक अम्ल (माइकोलिक एसिड) के संश्लेषण को रोकता है, जो जीवाणु के लिए अद्वितीय है। यह सक्रिय (एक्टिव) टीबी और अव्यक्त (लैटेंट) टीबी (प्रोफिलैक्सिस) दोनों के उपचार में उपयोग किया जाता है, आमतौर पर रिफैम्पिसिन और पाइराजिनामाइड (ट्रिपल थेरेपी) के साथ संयोजन में। इसका एक सामान्य दुष्प्रभाव परिधीय न्यूरोपैथी (विटामिन B6 की कमी के कारण) है।
- सल्फाइट्स (सल्फाइट्स, सल्फर डाइऑक्साइड और इसके लवण) खाद्य रंग को बनाए रखते हैं क्योंकि वे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट (एंटीऑक्सीडेंट) हैं जो खाद्य पदार्थों (विशेष रूप से सूखे फलों, शीतल पेय, वाइन) के ऑक्सीकरण (भूरा होना, मलिनकिरण) को रोकते हैं। वे पॉलीफेनोल ऑक्सीडेज (पीपीओ) नामक एंजाइम को बाधित करते हैं, जो कटे या प्रसंस्कृत फलों और सब्जियों में ब्राउनिंग का कारण बनता है। सूखे खुबानी, किशमिश, सेब, और नाशपाती में उनके चमकीले, आकर्षक रंग (प्राकृतिक रंग) को बनाए रखने के लिए सल्फाइट्स मिलाए जाते हैं।
- फोलिक अम्ल (फोलिक एसिड) का एक प्रमुख स्रोत हरी सब्जियां (हरी पत्तेदार सब्जियाँ) हैं, जैसे पालक (पालक), सलाद, केल, सरसों का साग, ब्रोकोली, और शतावरी। इन सब्जियों में फोलेट (प्राकृतिक फोलिक एसिड) उच्च मात्रा में (पालक में ~194 माइक्रोग्राम प्रति 100 ग्राम) होता है। फोलेट डीएनए संश्लेषण, कोशिका विभाजन, और भ्रूण के न्यूरल ट्यूब विकास के लिए आवश्यक है, जो गर्भावस्था के दौरान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि गर्भवती महिलाओं को अक्सर फोलिक एसिड की खुराक के साथ-साथ हरी सब्जियों का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
- लोराजेपाम (लोराजेपाम, Ativan, C₁₅H₁₀Cl₂N₂O₂) एक बेंजोडायजेपाइन (बेंजोडायजेपाइन) दवा है जो चिंता विकारों (एंग्ज़ायटी डिसऑर्डर), अल्पकालिक चिंता (शॉर्ट-टर्म एंग्ज़ायटी रिलीफ), अनिद्रा (नींद न आना), और पैनिक अटैक (घबराहट के दौरे) के उपचार में उपयोग की जाती है। यह मस्तिष्क में GABA (गामा-एमिनोब्यूट्रिक एसिड, एक निरोधात्मक न्यूरोट्रांसमीटर) के प्रभाव को बढ़ाकर काम करता है, जिससे अति-उत्तेजित तंत्रिका कोशिकाएं शांत हो जाती हैं। इसका उपयोग बरामदगी (सेजर) के तत्काल नियंत्रण और शराब वापसी के लक्षणों के उपचार के लिए भी किया जाता है। यह दीर्घकालिक उपयोग के लिए नहीं है क्योंकि इसकी लत लग सकती है।
- स्टरलाइजेशन (नसबंदी) दूध की शेल्फ लाइफ (शेल्फ-लाइफ) को बढ़ाता है, विशेष रूप से UHT (अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर, अल्ट्रा-उच्च तापमान) विधि में, जहाँ दूध को 135-150°C पर 1-4 सेकंड के लिए गर्म किया जाता है और फिर एसेप्टिक (असेप्टिक) कंटेनरों में पैक किया जाता है। यह प्रक्रिया सभी सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, फफूंद, यीस्ट) और उनके बीजाणुओं (स्पोर्स) को मार देती है, जिससे दूध बिना प्रशीतन (रेफ्रिजरेशन) के 6-9 महीनों तक ताजा रहता है (खोलने से पहले)। नियमित पास्चुरीकृत (पाश्चुरीकृत) दूध, इसके विपरीत, केवल रोगजनकों को मारता है और इसे प्रशीतित रखना पड़ता है, जिसकी शेल्फ लाइफ केवल 2-3 सप्ताह होती है।
- विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) का एक प्रचुर स्रोत संतरा (संतरा) है, जिसमें प्रति मध्यम आकार के फल में लगभग 70-90 मिलीग्राम विटामिन C होता है। विटामिन C एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है, कोलेजन संश्लेषण में मदद करता है, आयरन के अवशोषण को बढ़ाता है, और मुक्त मूलकों (फ्री रेडिकल्स) से कोशिकाओं की रक्षा करता है। एक संतरा एक वयस्क के दैनिक विटामिन C आवश्यकता (65-90 मिलीग्राम) को पूरा करता है या उससे अधिक करता है, जिससे यह स्कर्वी (स्कर्वी) को रोकने का एक आसान और स्वादिष्ट तरीका बन जाता है।
- सल्फाडायजीन (C₁₀H₁₀N₄O₂S) एक सल्फोनामाइड (सल्फा) जीवाणुरोधी दवा है जो बैक्टीरिया में फोलिक अम्ल (फोलेट) के संश्लेषण को बाधित करती है। यह मूत्र पथ के संक्रमण (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, UTI), ब्रोंकाइटिस, और नोकार्डियोसिस (नोकार्डियोसिस) के उपचार के लिए उपयोगी है। हालाँकि इसका उपयोग अब कम आम है क्योंकि कई बैक्टीरिया ने प्रतिरोध (रेसिस्टेंस) विकसित कर लिया है, यह कुछ विशिष्ट संक्रमणों (जैसे, टोक्सोप्लाज्मोसिस, मलेरिया की रोकथाम) के लिए उपयोग किया जाता है। यह आमतौर पर ट्राइमेथोप्रिम (ट्राइमेथोप्रिम) के साथ संयोजन में उपयोग किया जाता है।
- पास्चुरीकरण (पाश्चुरीकरण) बैक्टीरिया को नष्ट करता है क्योंकि यह दूध (या अन्य तरल पदार्थ, जैसे फलों का रस) को एक विशिष्ट तापमान (जैसे, 72°C, 15 सेकंड के लिए) तक गर्म करता है, जो कि रोगजनक बैक्टीरिया (जैसे, साल्मोनेला, एस्चेरिचिया कोलाई, लिस्टेरिया, कैम्पिलोबैक्टर) को मारने के लिए पर्याप्त है, लेकिन दूध में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया (प्रोबायोटिक्स) को पूरी तरह से नष्ट नहीं करता है और इसके पोषण मूल्य या स्वाद को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित नहीं करता है। यह प्रोटीन डिनेचुरेशन (विकृतीकरण) और कोशिका झिल्ली को नुकसान पहुंचाकर बैक्टीरिया को मारता है। यह प्रक्रिया दूध को सुरक्षित बनाती है, जिससे उपभोग के बिना बीमारी (ब्रुसेलोसिस, टीबी) फैलने का खतरा समाप्त हो जाता है।
- विटामिन D का स्रोत सूर्य प्रकाश (सूर्य प्रकाश) है, क्योंकि पराबैंगनी B (UV-B) किरणें त्वचा में 7-डिहाइड्रोकोलेस्ट्रोल (7-डिहाइड्रोकोलेस्ट्रोल) को विटामिन D₃ (कोलेकैल्सिफेरॉल) में परिवर्तित कर देती हैं। यही कारण है कि विटामिन D को "सनशाइन विटामिन" (सनशाइन विटामिन) भी कहा जाता है। पर्याप्त धूप के संपर्क में रहने पर (चेहरे, बाहों, और पैरों पर प्रतिदिन 10-30 मिनट), शरीर अपनी सभी विटामिन D आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। सर्दियों के महीनों में, उच्च अक्षांशों पर, या सनस्क्रीन का उपयोग करने पर, आहार पूरक या फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों की आवश्यकता हो सकती है।
- क्लोरप्रोमाजीन (क्लोरप्रोमाजीन, C₁₇H₁₉ClN₂S) एक एंटीसाइकोटिक (एंटीसाइकोटिक) दवा है, जो सिज़ोफ्रेनिया, उन्मत्त प्रकरणों, गंभीर चिंता, और हिचकी (hiccups) जैसे मानसिक रोगों के उपचार में उपयोगी है। यह पहली एंटीसाइकोटिक दवा थी, जिसे 1950 के दशक में विकसित किया गया था, और इसे "टाइपिकल एंटीसाइकोटिक" (टाइपिकल एंटीसाइकोटिक) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह मस्तिष्क में डोपामाइन (डोपामाइन) रिसेप्टर्स (D₂ रिसेप्टर्स) को अवरुद्ध करके काम करता है, जिससे मनोविकार (साइकोसिस) के लक्षण (भ्रम, मतिभ्रम) कम हो जाते हैं। इसके दुष्प्रभावों में तंद्रा, शुष्क मुँह, कब्ज, और आंदोलन विकार (एक्स्ट्रापाइरामिडल लक्षण - ईपीएस) शामिल हैं।
- नमक (सोडियम क्लोराइड) खाद्य पदार्थों में नमी (पानी) को कम करता है क्योंकि यह एक हाइग्रोस्कोपिक (हाइग्रोस्कोपिक) पदार्थ है, जो अपने चारों ओर से पानी को अवशोषित करता है। जब नमक खाद्य पदार्थों पर छिड़का जाता है, तो यह परासरण (ओस्मोसिस) द्वारा उनके भीतर की कोशिकाओं से पानी को बाहर निकाल देता है। पानी की इस कमी (नमी की कम गतिविधि, aw) के कारण, सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, फफूंद, यीस्ट) जीवित नहीं रह पाते हैं और न ही बढ़ पाते हैं, जिससे खाद्य पदार्थ संरक्षित हो जाते हैं। यही कारण है कि नमक मांस (बेकन), मछली, और सब्जियों (अचार) को संरक्षित करता है।
- विटामिन K का एक प्रमुख स्रोत पालक (पालक) है, जिसमें प्रति 100 ग्राम पका हुआ पालक लगभग 540 माइक्रोग्राम विटामिन K1 (फाइलोक्विनोन) होता है। विटामिन K रक्त के थक्के बनने (ब्लड क्लॉटिंग) के लिए आवश्यक है क्योंकि यह यकृत में थक्के कारकों (प्रोथ्रोम्बिन, कारक VII, IX, X) के संश्लेषण के लिए एक सहकारक (कोफैक्टर) है। यह हड्डियों के स्वास्थ्य (ऑस्टियोकैल्सिन, एक हड्डी-विशिष्ट प्रोटीन, को सक्रिय करके) में भी भूमिका निभाता है। पालक में इतना अधिक विटामिन K होता है कि वारफारिन (ब्लड थिनर) लेने वाले लोगों को अपने आहार को लगातार बनाए रखने की आवश्यकता होती है।
- टेट्रासाइक्लिन (टेट्रासाइक्लिन) मुँहासे (एक्ने) की एक सामयिक (टॉपिकल) दवा के रूप में उपयोगी है, साथ ही मौखिक रूप से भी। यह प्रोपियोनिबैक्टीरियम एक्ने (प्रोपियोनिबैक्टीरियम एक्ने) बैक्टीरिया के विकास को रोकता है, जो मुँहासे पैदा करने वाले मुख्य बैक्टीरिया हैं। यह एक एंटी-इंफ्लेमेटरी के रूप में भी कार्य करता है, जो मुँहासे से जुड़ी लालिमा और सूजन को कम करता है। टेट्रासाइक्लिन मुँहासे के उपचार के लिए प्रभावी है, विशेष रूप से इन्फ्लेमेटरी (पपल्स, पस्ट्यूल्स, नोड्यूल्स, सिस्ट) प्रकार के मुँहासे में। यह अक्सर बेंज़ोयल पेरोक्साइड या रेटिनोइड्स (जैसे, ट्रेटीनोइन) के साथ संयोजन में प्रयोग किया जाता है।
- सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) का उपयोग सूखे मेवों (सूखे मेवे), विशेष रूप से खुबानी (खुबानी), किशमिश, अंजीर, सेब, और नाशपाती में संरक्षक (प्रिजर्वेटिव) के रूप में किया जाता है। यह उनके चमकीले, प्राकृतिक रंग (जैसे, नारंगी-पीला रंग) को बनाए रखता है, ऑक्सीकरण (भूरा होना) को रोकता है, और सूक्ष्मजीवों के विकास को रोकता है। सूखे खुबानी, जिनका SO₂ के साथ उपचार किया जाता है, एक चमकदार नारंगी-पीले रंग को बनाए रखते हैं, जबकि अनुपचारित खुबानी एक गहरे, भूरे रंग के हो जाते हैं।
- आयरन (Fe) का एक प्रमुख स्रोत मांस (लाल मांस, विशेष रूप से यकृत - कलेजी) है, जिसमें हीम आयरन (हीम आयरन) होता है। हीम आयरन पौधों (गैर-हीम आयरन) में पाए जाने वाले आयरन की तुलना में शरीर द्वारा अधिक आसानी से अवशोषित किया जाता है (हीम आयरन की अवशोषण दर ~25-30%, गैर-हीम आयरन की ~5-10%)। यकृत (बीफ लिवर, चिकन लिवर) आयरन के सबसे समृद्ध स्रोतों में से एक है, जो प्रति 100 ग्राम में लगभग 6-8 मिलीग्राम प्रदान करता है। यही कारण है कि एनीमिया (रक्ताल्पता) के उपचार के लिए मांस या कलेजी का सेवन अक्सर सलाह दी जाती है।
- फ्लुकोनाजोल (फ्लुकोनाजोल, C₁₃H₁₂F₂N₆O) एक कवकनाशी (एंटीफंगल) दवा है जिसका उपयोग कैंडिडा (कैंडिडा) जैसे फफूंद के कारण होने वाले संक्रमणों के उपचार में किया जाता है। यह एक एज़ोल (एज़ोल) एंटीफंगल है जो फफूंद कोशिका झिल्ली में एर्गोस्टेरॉल (एर्गोस्टेरॉल - एक महत्वपूर्ण स्टेरॉल) के संश्लेषण को रोकता है, जिससे झिल्ली की अखंडता कमजोर हो जाती है और फफूंद मर जाती है। इसका उपयोग योनि यीस्ट संक्रमण (योनि कैंडिडिआसिस), थ्रश (ओरल कैंडिडिआसिस), और इनवेसिव कैंडिडिआसिस (फैलने वाला) के उपचार के लिए एकल-खुराक या लघु-अवधि के उपचार के रूप में किया जाता है।