जीवों का वर्गीकरण
- वर्गिकी (टैक्सोनॉमी) जीवों (सूक्ष्मजीवों से लेकर
पशु-पौधों तक) का उनके लक्षणों, आनुवंशिकी और विकासात्मक इतिहास के आधार पर वैज्ञानिक वर्गीकरण
(क्लासिफिकेशन), नामकरण (नॉमेनक्लेचर) और पहचान (आइडेंटिफिकेशन) करने की शाखा है। इसका उद्देश्य जैव विविधता
को व्यवस्थित करना और विभिन्न प्रजातियों के बीच संबंधों को समझना है। यह जीव विज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा
है, जिसकी नींव कैरोलस लिनियस (Carolus Linnaeus) ने रखी थी।
- कैरोलस लिनियस (Carolus Linnaeus) ने द्विपद नामकरण प्रणाली
(बिनोमियल नॉमेनक्लेचर) दी, जिसमें प्रत्येक जीव को दो शब्दों से बना एक अनूठा वैज्ञानिक नाम
दिया जाता है। पहला शब्द वंश (जीनस) का नाम होता है (बड़े अक्षर से शुरू), और दूसरा शब्द
प्रजाति (स्पीशीज) का नाम होता है (छोटे अक्षर से शुरू), उदाहरण: होमो सेपियन्स
(Homo sapiens)। उनकी पुस्तक "सिस्टेमा नेचुरे" (1735) टैक्सोनॉमी का आधार है। यह प्रणाली
सार्वभौमिक है और नामों को स्थिरता और अद्वितीयता प्रदान करती है।
- व्हिटेकर (आर.एच. व्हिटेकर, 1969) ने जीवों को पांच जगतों (पांच
किंगडम) में वर्गीकृत किया: मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया। यह वर्गीकरण
मुख्य रूप से कोशिका संरचना (प्रोकैरियोटिक/यूकैरियोटिक), शरीर संगठन (एककोशिकीय/बहुकोशिकीय), पोषण विधि
(स्वपोषी/विषमपोषी/सैप्रोबिक) और प्रजनन पर आधारित था। यह वर्गीकरण पारिस्थितिकी और विकास को समझने में
सहायक है, हालाँकि आधुनिक वर्गीकरण में तीन-डोमेन प्रणाली (बैक्टीरिया, आर्किया, यूकैरिया) अधिक प्रचलित है।
- मोनेरा जगत (मोनेरा) में प्रोकैरियोटिक
(प्रोकैरियोटिक) जीव शामिल हैं, जिनमें स्पष्ट केन्द्रक (न्यूक्लियस) और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग
(ऑर्गेनेल) नहीं होते। इस जगत में सभी प्रकार के जीवाणु (बैक्टीरिया) - मीथेनोजेन, थर्मोएसिडोफाइल,
हैलोफाइल, सायनोबैक्टीरिया, माइकोप्लाज्मा, एक्टिनोमाइसीटीज, आर्कियाबैक्टीरिया शामिल हैं। ये सबसे पुराने,
सरलतम और सर्वाधिक विविधता वाले जीव हैं, जो लगभग सभी वातावरणों (गर्म झरने, अति लवणीय झीलें, मानव आंत,
मृदा, वायु, जल, चरम वातावरण) में पाए जाते हैं।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में एककोशिकीय
(यूनिसेल्युलर) यूकैरियोटिक (यूकेरियोटिक) जीव शामिल हैं, जिनमें स्पष्ट केन्द्रक और
झिल्ली-बद्ध कोशिकांग होते हैं। इस जगत को तीन मुख्य समूहों में बांटा गया है: प्रोटोजोआ (अमीबा,
पैरामीशियम, यूग्लीना, ट्रिपैनोसोमा, प्लास्मोडियम - मलेरिया का कारक), शैवाल (एककोशिकीय शैवाल, डायटम,
डाइनोफ्लैजलेट्स, यूग्लीना), और स्लाइम मोल्ड्स। ये जल (मीठा और समुद्री), नम मृदा, और परजीवी के रूप में
पाए जाते हैं।
- फंजाई जगत (फंजाई) में कवक (फंगस)
शामिल हैं, जो बहुकोशिकीय (मशरूम, मोल्ड्स) या एककोशिकीय (यीस्ट) विषमपोषी जीव हैं, जिनकी कोशिका भित्ति
काइटिन (चिटिन) से बनी होती है। ये सैप्रोबिक (मृत कार्बनिक पदार्थों को अपघटित करते हैं), परजीवी (रोगजनक),
या सहजीवी (लाइकेन और मायकोराइजा में) होते हैं। इनमें यीस्ट (खमीर), मशरूम (एगारिकस, ट्रफल्स), मोल्ड्स
(पेनिसिलियम, एस्परजिलस, राइजोपस, म्यूकर), फाइटोफ्थोरा, राइजोमाइसिस, फ्यूजेरियम, कैंडिडा, यूस्टिलैगो,
अल्टरनेरिया शामिल हैं।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में पौधे
(प्लांट्स) शामिल हैं, जो बहुकोशिकीय, प्रकाश संश्लेषी (स्वपोषी) यूकैरियोटिक जीव हैं, जिनकी
कोशिका भित्ति सेल्यूलोज (सेल्यूलोज) से बनी होती है। इनमें क्लोरोफिल होता है और ये अधिकतर स्थलीय होते
हैं। पादप जगत को विभिन्न समूहों में बांटा गया है: ब्रायोफाइट्स (मॉस, लिवरवॉर्ट्स,
हॉर्नवॉर्ट्स - असंवहनी पौधे), टेरिडोफाइट्स (फर्न, हॉर्सटेल - संवहनी, बीजरहित),
जिम्नोस्पर्म (साइकस, पाइनस, सिकोइया, गिंग्को - नग्न बीज), और
एंजियोस्पर्म (फूल वाले पौधे - चावल, गेहूं, मक्का, बांस, सूरजमुखी, गुलाब, ऑर्किड)।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में जंतु
(एनिमल्स) शामिल हैं, जो बहुकोशिकीय, विषमपोषी (हीटरोट्रोफिक) यूकैरियोटिक जीव हैं, जिनमें
कोशिका भित्ति नहीं होती। ये प्रायः गतिशील (मोटाइल) होते हैं और एक विशेष भ्रूणीय विकास (ब्लास्टुला)
दर्शाते हैं। इस जगत में अकशेरुकी (इनवर्टीब्रेट्स) - पोरिफेरा (स्पंज), सीनिडेरिया (जेलीफिश),
प्लैटीहेल्मिन्थीज (चपटे कृमि), निमेटोडा (गोल कृमि), एनेलिडा (खंडित कृमि), मोलस्का (मोलस्क, सिफालोपोडा,
बाइवैल्विया, गैस्ट्रोपोडा), आर्थ्रोपोडा (क्रस्टेशिया, मायरीआपोडा, चिलोपोडा, इन्सेक्टा), इकिनोडर्मेटा
(स्टारफिश), हेमिकॉर्डेटा, प्रोटोकॉर्डेटा, और कशेरुकी (वर्टेब्रेट्स) - मछलियाँ, उभयचर, सरीसृप, पक्षी,
स्तनधारी शामिल हैं।
- वर्गीकरण में जीनस (जीनस) और प्रजाति (स्पीशीज) सबसे
अधिक महत्वपूर्ण मूल स्तर हैं। प्रजाति (स्पीशीज) वर्गीकरण की सबसे छोटी बुनियादी इकाई है, जो प्राकृतिक रूप
से प्रजनन करने वाले समान समूह को दर्शाती है। वंश (जीनस) निकट से संबंधित प्रजातियों का एक समूह होता है।
द्विपद नाम में जीनस और प्रजाति दोनों शामिल होते हैं। उदाहरण: पैंथेरा टाइग्रिस (Panthera
tigris) - पैंथेरा (जीनस: बड़ी बिल्लियाँ), टाइग्रिस (प्रजाति: बाघ)।
- बैक्टीरिया (बैक्टीरिया) मोनेरा जगत
(मोनेरा) का मुख्य भाग हैं। ये सर्वाधिक विविध और प्रचुर प्रोकैरियोटिक सूक्ष्मजीव हैं, जो
विभिन्न आकृतियों (गोल - कोकस, छड़ - बेसिलस, सर्पिल - स्पाइरिलम, कॉमा - विब्रियो) में पाए जाते हैं। ये
सैप्रोबिक (अपघटक), सहजीवी (जैसे, राइजोबियम - फलीदार पौधों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण), या परजीवी (रोगजनक -
स्ट्रेप्टोकोकस, स्टेफिलोकोकस, स्यूडोमोनास, विब्रियो हैजा, क्लॉस्ट्रिडियम, लैक्टोबैसिलस) हो सकते हैं। कुछ
बैक्टीरिया नाइट्रोजन चक्र में आवश्यक भूमिका निभाते हैं।
- शैवाल (अल्गी) प्रोटिस्टा जगत
(प्रोटिस्टा) में शामिल क्लोरोफिल युक्त, प्रकाश संश्लेषी यूकैरियोटिक जीव हैं। ये एककोशिकीय
(क्लैमाइडोमोनास, डायटम, यूग्लीना, डाइनोफ्लैजलेट्स) या बहुकोशिकीय (वॉलवॉक्स, समुद्री शैवाल) हो सकते हैं।
इनकी कोशिका भित्ति सेल्यूलोज या सिलिका (डायटम) की बनी होती है। ये मीठे पानी और समुद्र में प्लवक के रूप
में पाए जाते हैं और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के प्राथमिक उत्पादक हैं। डाइनोफ्लैजलेट्स लाल ज्वार (रेड
टाइड) का कारण बनते हैं।
- कवक (फंजाई) फंजाई जगत (फंजाई) का
हिस्सा हैं, जिसमें यीस्ट, मोल्ड्स और मशरूम शामिल हैं। ये विषमपोषी (हीटरोट्रोफिक) जीव हैं जो सैप्रोफाइटिक
(मृत पदार्थों को तोड़कर पोषण), परजीवी (जीवित मेजबान से पोषण), या सहजीवी (लाइकेन और मायकोराइजा) होते हैं।
इनकी कोशिका भित्ति काइटिन (चिटिन) की बनी होती है। ये एंजाइम (प्रोटीज, एमाइलेज, लाइपेज, सेल्यूलेज) और
प्रतिजैविक (पेनिसिलिन) का उत्पादन करते हैं। इनमें राइजोपस, म्यूकर, एस्परजिलस, पेनिसिलियम, अगारिकस,
कैंडिडा, यीस्ट, फाइटोफ्थोरा, ट्रफल्स, फ्यूजेरियम, यूस्टिलैगो, अल्टरनेरिया शामिल हैं।
- पौधों (प्लांट्स) का वर्गीकरण प्लांटी जगत
(प्लांटी) में होता है। पादप वर्गीकरण के मुख्य समूह इस प्रकार हैं: शैवाल
(जल में), ब्रायोफाइट्स (मॉस - थैलस जैसे, असंवहनी), टेरिडोफाइट्स (फर्न
- संवहनी, बीजरहित), जिम्नोस्पर्म (साइकस, पाइनस, गिंग्को, सिकोइया - बीजधारी, फूल रहित),
और एंजियोस्पर्म (फूल वाले पौधे - एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री)। एंजियोस्पर्म पौधों का
सबसे बड़ा और सबसे विकसित समूह है, जिसमें अनाज (चावल, गेहूं, मक्का), सब्जियाँ, फल, फूल (गुलाब, ऑर्किड) और
पेड़ (सूरजमुखी, बांस) शामिल हैं।
- जंतुओं (एनिमल्स) का वर्गीकरण एनिमेलिया जगत
(एनिमेलिया) में होता है। जंतु वर्गीकरण के प्रमुख फाइलम (भाग) हैं: पोरिफेरा
(स्पंज), सीनिडेरिया (जेलीफिश), प्लैटीहेल्मिन्थीज (चपटे कृमि),
नेमाटोडा (गोल कृमि), एनेलिडा (केंचुआ), मोलस्का
(घोंघा, सीप, ऑक्टोपस, स्क्विड, स्लग), आर्थ्रोपोडा (कीट, मकड़ी, केकड़ा, झींगा, सेंटीपीड,
मिलीपीड), इकिनोडर्मेटा (तारामीन), हेमिकॉर्डेटा,
प्रोटोकॉर्डेटा, और कॉर्डेटा (रीढ़धारी जंतु - मछलियाँ, उभयचर, सरीसृप,
पक्षी, स्तनधारी)।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) की सबसे छोटी और सबसे बुनियादी इकाई
प्रजाति (स्पीशीज) है। प्रजाति जीवों का एक प्राकृतिक समूह है जो आपस में प्रजनन
(इंटरब्रीडिंग) करके उपजाऊ (फर्टाइल) संतान उत्पन्न कर सकते हैं और प्रजनन रूप से अन्य समूहों से अलग होते
हैं (प्रजनन अलगाव, रिप्रोडक्टिव आइसोलेशन)। प्रजाति का नाम द्विपद नामकरण (बिनोमियल नॉमेनक्लेचर) का हिस्सा
होता है। उदाहरण: कैनिस ल्यूपस (Canis lupus) - भेड़िया; कैनिस फेमिलियरिस (Canis
familiaris) - कुत्ता (हालाँकि आधुनिक वर्गीकरण में कुत्ते को कैनिस ल्यूपस फेमिलियरिस के रूप
में भेड़िये की उपप्रजाति माना जाता है)।
- कैरोलस लिनियस (Carolus Linnaeus) को वर्गिकी
(टैक्सोनॉमी) और द्विपद नामकरण का जनक (जनक) माना जाता है। उन्होंने 1735 में प्रकाशित अपनी
पुस्तक "सिस्टेमा नेचुरे" (Systema Naturae) में 7,700 से अधिक पौधों और 4,400 से अधिक जानवरों का वर्गीकरण
किया। उन्होंने पहली बार एक सुसंगत पदानुक्रम (डोमेन, किंगडम, फाइलम, क्लास, ऑर्डर, फैमिली, जीनस, स्पीशीज)
स्थापित किया। उनका प्रसिद्ध नारा: "Deus creavit, Linnaeus disposuit" (भगवान ने बनाया, लिनियस ने
व्यवस्थित किया)।
- द्विपद नामकरण (बिनोमियल नॉमेनक्लेचर) में जीव का नाम
दो भागों में होता है: पहला जीनस (जीनस) नाम (बड़े अक्षर से शुरू, संज्ञा) और दूसरा
प्रजाति (स्पीशीज) नाम (छोटे अक्षर से शुरू, विशेषण या संज्ञा)। जैसे मैंगीफेरा
इंडिका (Mangifera indica) - आम। नाम हमेशा इटैलिक (टेढ़ा) या अंडरलाइन किया
जाता है। उदाहरण: फेलिस डोमेस्टिका (Felis domestica) - बिल्ली, होमो सेपियन्स
(Homo sapiens) - मनुष्य।
- मोनेरा जगत (मोनेरा) में सायनोबैक्टीरिया
(सायनोबैक्टीरिया / ब्लू-ग्रीन अल्गी) शामिल हैं। ये प्रोकैरियोटिक, प्रकाश संश्लेषी जीव हैं,
जिनमें क्लोरोफिल और अन्य प्रकाश संश्लेषी वर्णक होते हैं, लेकिन झिल्ली-बद्ध क्लोरोप्लास्ट नहीं होते। ये
सबसे पुराने जीवाश्म (3.5 अरब वर्ष पुराने स्ट्रोमेटोलाइट्स) प्रदान करते हैं और पृथ्वी के वायुमंडल में
ऑक्सीजन के संचय के लिए उत्तरदायी थे (महान ऑक्सीकरण घटना, ग्रेट ऑक्सीडेशन इवेंट)। इनमें नॉस्टॉक, एनाबीना
(नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाली कोशिकाएँ - हेटरोसिस्ट), स्पाइरुलिना (भोजन), ऑस्किलेटोरिया शामिल हैं।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में अमीबा
(अमीबा) शामिल है, जो एक सरल, प्रोटोजोआ एककोशिकीय यूकैरियोट जीव है। यह अपने शरीर पर
कूटपाद (स्यूडोपोडिया) बनाकर गति करता है और भोजन ग्रहण करता है (फैगोसाइटोसिस)। यह मीठे
पानी, नम मृदा और परजीवी के रूप में पाया जाता है। अमीबा प्रोटियस (Amoeba proteus) सामान्य उदाहरण है। मानव
परजीवी एंटअमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) आंत्रिक अमीबियासिस (अमीबिक पेचिश) का कारण बनता है।
- फंजाई जगत (फंजाई) में यीस्ट (यीस्ट)
शामिल है, जो एककोशिकीय कवक (यूनिसेल्युलर फंगस) है। ये गोल या अंडाकार होते हैं और मुकुलन
(बडिंग) द्वारा प्रजनन करते हैं। ये चीनी (ग्लूकोज, सुक्रोज, फ्रुक्टोज) का किण्वन (फर्मेंटेशन) करके इथेनॉल
(अल्कोहल) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) बनाते हैं, जो ब्रेड बनाने, शराब बनाने, बीयर बनाने और जैव ईंधन
उत्पादन के लिए उपयोग किया जाता है। सैक्रोमाइसेस सेरेविसिए (Saccharomyces cerevisiae)
(बेकर्स यीस्ट) सबसे आम प्रजाति है।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में ब्रायोफाइट्स
(ब्रायोफाइट्स / मॉस) शामिल हैं, जो सबसे सरल स्थलीय पौधे हैं। ये असंवहनी
(नॉन-वैस्कुलर) पौधे हैं, जिनमें असली जड़, तना और पत्तियाँ नहीं होतीं (थैलॉयड) या अविकसित
होती हैं। ये नम, छायादार स्थानों पर उगते हैं और जल परिवहन के लिए संवहनी ऊतक (जाइलम, फ्लोएम) नहीं रखते।
ये "उभयचर पौधे" (एम्फीबियन ऑफ प्लांट किंगडम) कहलाते हैं। उदाहरण: रिकिया (लिवरवॉर्ट), मार्केंशिया
(लिवरवॉर्ट), फ्यूनारिया (मॉस), स्फैग्नम (पीट मॉस - ईंधन और बागवानी में उपयोगी)।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में कॉर्डेट्स
(कॉर्डेटा फाइलम) शामिल हैं, जिनमें कशेरुकी (वर्टेब्रेट्स) और अकशेरुकी कॉर्डेट
(प्रोटोकॉर्डेट्स) शामिल हैं। सभी कॉर्डेट्स में विकास के किसी न किसी चरण में तीन प्रमुख लक्षण होते हैं:
पृष्ठरज्जु (नोटोकॉर्ड) (रीढ़ की हड्डी का समर्थन करने वाली लचीली छड़), ग्रसनीय
क्लोम छिद्र (फेरिंजियल स्लिट्स), और पुच्छीय पश्च-गुदा पूंछ (पोस्ट-एनल
टेल)। कशेरुकी (वर्टेब्रेट्स) में, पृष्ठरज्जु को कशेरुक स्तंभ (वर्टीब्रल कॉलम) द्वारा बदल
दिया जाता है। उदाहरण: मछलियाँ, उभयचर, सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी, मानव।
- वर्गीकरण पदानुक्रम (टैक्सोनॉमिक हायरार्की) में
किंगडम (किंगडम / जगत) सबसे बड़ी और सबसे व्यापक इकाई है, जिसमें सबसे अधिक संख्या में जीव
शामिल होते हैं। यह पदानुक्रम ऊपर से नीचे की ओर बढ़ता है, जिसमें प्रत्येक स्तर पर इकाई (टैक्सोन) अधिक
विशिष्ट और संकीर्ण होती जाती है। लिनियस के मूल सात स्तर हैं: किंगडम > फाइलम (जंतुओं में) / डिवीजन (पौधों
में) > क्लास > ऑर्डर > फैमिली > जीनस > स्पीशीज। आधुनिक वर्गीकरण में "डोमेन" को किंगडम से भी ऊपर रखा गया
है (डोमेन - बैक्टीरिया, आर्किया, यूकैरिया)।
- बैक्टीरिया (बैक्टीरिया) में कोशिका भित्ति
(सेल वॉल) होती है, जो उन्हें आकार और यांत्रिक सुरक्षा प्रदान करती है। बैक्टीरिया की कोशिका
भित्ति मुख्य रूप से पेप्टिडोग्लाइकन (पेप्टिडोग्लाइकन) (म्यूरिन) नामक पॉलिमर से बनी होती
है, जो शर्करा (N-एसिटाइलग्लुकोसामाइन और N-एसिटाइलम्यूरैमिक अम्ल) और अमीनो अम्ल की लघु श्रृंखलाओं से बना
होता है। ग्राम-पॉजिटिव और ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति की संरचना भिन्न होती है, जो ग्राम
स्टेनिंग (ग्राम स्टेन) द्वारा पहचानी जाती है। यह कोशिका भित्ति कई एंटीबायोटिक्स (जैसे, पेनिसिलिन) का
लक्ष्य है, जो इसके संश्लेषण को बाधित करते हैं।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में पैरामीशियम
(पैरामीशियम) शामिल है, जो एक सिलिएट (सिलिया-युक्त) प्रोटोजोआ है। यह मीठे पानी में पाया जाता
है और अपने शरीर पर लगे सूक्ष्म बालों (सिलिया) के द्वारा गति करता है। इसमें दो केन्द्रक
(मैक्रोन्यूक्लियस और माइक्रोन्यूक्लियस) होते हैं, और यह संयुग्मन (कंजुगेशन) नामक यौन
प्रक्रिया द्वारा प्रजनन करता है, जिसमें दो व्यक्ति आनुवंशिक सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं। उदाहरण:
पैरामीशियम कॉडेटम (Paramecium caudatum), पैरामीशियम ऑरिलिया (Paramecium aurelia) - जेनेटिक्स के अध्ययन
में प्रयुक्त।
- कवक (फंजाई) में मशरूम (मशरूम) शामिल
हैं, जो बहुकोशिकीय कवक का फलन शरीर (फ्रूटिंग बॉडी) है, जो बीजाणु (स्पोर्स) उत्पन्न करता है। अधिकांश
मशरूम बेसिडियोमाइकोटा (बेसिडियोमाइसेट्स) समूह से संबंधित हैं। ये सैप्रोबिक (अपघटक) होते
हैं, लेकिन कुछ परजीवी भी होते हैं। खाने योग्य मशरूम में अगारिकस बिस्पोरस (Agaricus bisporus) - बटन
मशरूम, प्लुरोटस ऑस्ट्रेलियस (Pleurotus ostreatus) - ऑयस्टर मशरूम शामिल हैं। जहरीले मशरूम में अमानिटा
फैलोइड्स (Amanita phalloides) - डेथ कैप (घातक विषैला) शामिल है। ट्रफल्स (Truffles) एक प्रकार का भूमिगत
(सबटेरेनियन) मशरूम है।
- पौधों (प्लांट्स) में टेरिडोफाइट्स (टेरिडोफाइट्स /
फर्न) शामिल हैं, जो संवहनी पौधे (वैस्कुलर प्लांट्स) हैं (जाइलम और फ्लोएम
रखते हैं), लेकिन ये बीजरहित (सीडलेस) होते हैं। ये ज्यादातर नम, छायादार स्थानों पर पाए
जाते हैं। इनका शरीर जड़, तना (प्रकंद/राइजोम) और पत्तियों (फ्रॉन्ड्स) में विभेदित होता है। ये
बीजाणु (स्पोर्स) द्वारा प्रजनन करते हैं, जो पत्तियों के नीचे की तरफ स्पोरैंगिया में
बनते हैं। उदाहरण: ड्रायोप्टेरिस (ड्रायोप्टेरिस - नर फर्न), नेफ्रोलेपिस (नेफ्रोलेपिस - स्वॉर्ड फर्न),
साल्विनिया (साल्विनिया - तैरता फर्न), एजोला (एजोला - नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला फर्न), प्टेरिडियम
(पीटरिडियम - कॉमन ब्रैकेन)।
- जंतुओं (एनिमल्स) में मोलस्का (मोलस्का) शामिल हैं, जो
मोलस्क (मोलस्क) हैं - अकशेरुकी (इनवर्टीब्रेट्स) का एक प्रमुख संघ (फाइलम) है। इनका शरीर
तीन भागों में बंटा होता है: सिर-पैर (हेड-फुट), आंत (विसरल मास), और
आवरण (मैंटल)। अधिकांश में कैल्शियम कार्बोनेट का एक खोल (शैल) होता है। इनमें
गैस्ट्रोपोडा (घोंघा, स्लग), बाइवैल्विया (सीप, क्लैम, मसल्स, स्कैलप्स),
और सेफालोपोडा (स्क्विड, ऑक्टोपस, कटलफिश, नॉटिलस) शामिल हैं। ये समुद्री, मीठे पानी और
स्थलीय (घोंघा) वातावरण में पाए जाते हैं।
- वर्गीकरण पदानुक्रम (टैक्सोनॉमिक हायरार्की) में फाइलम
(फाइलम) एक महत्वपूर्ण स्तर है, जो किंगडम (जगत) और क्लास (वर्ग) के बीच स्थित होता है। पौधों
में फाइलम के समकक्ष "डिवीजन" (डिवीजन) शब्द का उपयोग किया जाता है। एक फाइलम में संबंधित क्लासों का समूह
शामिल होता है। उदाहरण: कॉर्डेटा (Chordata) फाइलम में कशेरुकी (वर्टेब्रेट्स) और अकशेरुकी
कॉर्डेट्स (प्रोटोकॉर्डेट्स) शामिल हैं। आर्थ्रोपोडा (Arthropoda) फाइलम में कीट, मकड़ी,
केकड़ा, सेंटीपीड आदि शामिल हैं।
- मोनेरा जगत (मोनेरा) में आर्कियाबैक्टीरिया
(आर्कियाबैक्टीरिया) शामिल हैं, जो प्राचीन जीवाणु (आर्किया) हैं। ये
प्रोकैरियोटिक हैं, लेकिन आनुवंशिकी और जैव रसायन के मामले में सामान्य बैक्टीरिया (यूबैक्टीरिया) से भिन्न
होते हैं। ये अत्यधिक कठोर वातावरण (चरमपंथी - एक्सट्रीमोफाइल्स) में पाए जाते हैं:
थर्मोएसिडोफाइल्स (गर्म झरने, 80°C से अधिक, अम्लीय - सल्फोलोबस),
हैलोफाइल्स (अति लवणीय झीलें - डेड सी, ग्रेट साल्ट लेक), मीथेनोजेन्स
(दलदल, रुमेन, मीथेन गैस उत्पन्न करते हैं, सख्त अवायवीय - एनारोबिक)।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में डायटम
(डायटम) शामिल हैं, जो एककोशिकीय, प्रकाश संश्लेषी शैवाल हैं, जिनकी कोशिका भित्ति
(फ्रस्ट्यूल) सिलिका (SiO₂ - कांच जैसा पदार्थ) से बनी होती है। ये समुद्र और मीठे पानी में प्लवक
(फाइटोप्लैंकटन) के रूप में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और वैश्विक ऑक्सीजन उत्पादन में महत्वपूर्ण
योगदान देते हैं (लगभग 20-50%)। इनके मरने के बाद, सिलिका कोशिका भित्तियाँ समुद्र तल पर जमा होकर
डायटोमेसियस अर्थ (डायटोमेसियस अर्थ / कीज़लगुहर) बनाती हैं, जिसका उपयोग फिल्टर, अपघर्षक
(एब्रेसिव), पेंट, प्लास्टिक, और डायनामाइट में किया जाता है।
- फंजाई जगत (फंजाई) में पेनिसिलियम
(पेनिसिलियम) शामिल है, जो एक मोल्ड (फफूंद) है जो अलेक्जेंडर फ्लेमिंग द्वारा खोजे गए पहले
एंटीबायोटिक पेनिसिलिन (पेनिसिलिन) का स्रोत था। यह एक सैप्रोबिक (मृत कार्बनिक पदार्थों
पर उगने वाला) कवक है। पेनिसिलियम का उपयोग नीले पनीर (रोक्फोर्ट, स्टिलटन, गोर्गोन्जोला) के उत्पादन और
प्रोटीज एंजाइम (पपैन जैसे) के निर्माण में भी किया जाता है। उदाहरण: पेनिसिलियम क्राइसोजेनम (Penicillium
chrysogenum) और पेनिसिलियम नोटेटम (Penicillium notatum) पेनिसिलिन के स्रोत हैं।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में जिम्नोस्पर्म
(जिम्नोस्पर्म / नग्नबीजी) शामिल हैं, जो संवहनी बीजधारी पौधे हैं जिनमें फूल और फल
(फूल और फल) नहीं लगते हैं। उनके बीज नग्न (नग्न) होते हैं, अर्थात वे शंकु
(कोन - कपिला) के नीचे खुले हुए बीजपत्रों पर स्थित होते हैं। इनमें साइकस (साइकस),
पाइनस (पाइनस / देवदार, चीड़), गिंग्को बाइलोबा (जिन्कगो बिलोबा) (एक
जीवित जीवाश्म, लिविंग फॉसिल - जापान और चीन का मूल), सिकोइया (सेक्विया) (विशालकाय रेडवुड
पेड़, दुनिया के सबसे ऊंचे और सबसे पुराने पेड़), और सरू (साइप्रस), जुनिपर (जुनिपर), फ़िर (फ़िर) शामिल
हैं।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में आर्थ्रोपोडा
(आर्थ्रोपोडा) शामिल हैं, जो जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ (फाइलम) है। इनमें कीट
(इन्सेक्टा), अरचनिडा (मकड़ी, बिच्छू, टिक, घुन),
क्रस्टेशिया (केकड़ा, झींगा, क्रेफ़िश, लॉबस्टर, बार्नेकल, कोपेपोड),
मायरीआपोडा (मिलीपीड - सहस्रपाद), और चिलोपोडा (सेंटीपीड - शतपाद) शामिल
हैं। इनकी मुख्य विशेषताएँ: खंडित शरीर (सेग्मेंटेड बॉडी), जोड़दार उपांग (जॉइंटेड
एपेंडेज), काइटिन (चिटिन) का बाह्य कंकाल (एक्सोस्केलेटन), और खुला संचार
तंत्र (ओपन सर्कुलेटरी सिस्टम)।
- वर्गीकरण पदानुक्रम (टैक्सोनॉमिक हायरार्की) में क्लास (क्लास /
वर्ग) एक महत्वपूर्ण स्तर है, जो फाइलम (संघ) और ऑर्डर (गण) के बीच स्थित होता है। एक क्लास
में संबंधित ऑर्डर का समूह शामिल होता है। उदाहरण: मैमेलिया (मैमेलिया - स्तनधारी) एक
क्लास है जो कॉर्डेटा फाइलम के अंतर्गत आती है। मैमेलिया क्लास में ऑर्डर प्राइमेट्स (प्राइमेट्स - वानर,
मानव), कार्निवोरा (कार्निवोरा - बिल्ली, कुत्ता), रोडेंटिया (रोडेंटिया - चूहे, गिलहरी) शामिल हैं।
- बैक्टीरिया (बैक्टीरिया) एकल कोशिका (यूनीसेल्युलर)
वाले जीव हैं, जो जीवन के सबसे सरल और प्राचीन रूपों में से हैं। ये सूक्ष्म होते हैं (0.5-5 माइक्रोमीटर)
और विभिन्न आकृतियों (कोकस - गोल, बेसिलस - छड़, स्पाइरिलम - सर्पिल, विब्रियो - कॉमा के आकार,
प्लियोमोर्फिक - बहुरूपी) में पाए जाते हैं। ये द्विविभाजन (बाइनरी फिशन) द्वारा अलैंगिक रूप से प्रजनन करते
हैं। ये अत्यधिक संख्या में पाए जाते हैं (ग्राम मृदा में लगभग 40 मिलियन बैक्टीरिया) और पारिस्थितिकी तंत्र
के कामकाज (अपघटन, नाइट्रोजन स्थिरीकरण, प्रकाश संश्लेषण, पोषक चक्रण) के लिए आवश्यक हैं।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में यूग्लीना
(यूग्लीना) शामिल है, जो एक एककोशिकीय यूकैरियोट है जो प्रकाश संश्लेषण (क्लोरोप्लास्ट के साथ)
और विषमपोषण (अन्य कार्बनिक पदार्थों का अवशोषण) दोनों में सक्षम है, इसलिए इसे मिक्सोट्रॉफ
(मिक्सोट्रॉफ) कहते हैं। यह मीठे पानी में पाया जाता है, और अपने शरीर पर लगे एक लंबे
फ्लैजेलम (फ्लैजेलम) की सहायता से गति करता है। इसमें एक प्रकाश संवेदी आँख का
धब्बा (स्टिग्मा / आइस्पॉट) होता है, जो प्रकाश की दिशा में गति करने (फोटोटैक्सिस) में मदद
करता है।
- कवक (फंजाई) में राइजोपस (राइजोपस)
शामिल है, जो एक ज़ाइगोमाइकोट (ज़ाइगोमाइसीट) कवक है, जिसे ब्रेड मोल्ड (ब्रेड
मोल्ड) भी कहते हैं। यह एक सैप्रोबिक कवक है जो रोटी, फलों और सब्जियों पर उगता है। इसमें
शाखित हाइफे (हाइफे) होते हैं (स्टोलोन, राइजोइड्स, स्पोरैन्जियोफोरस), और यह स्पोरैन्जिया (स्पोरैन्जिया)
में बीजाणु (स्पोर्स) बनाकर अलैंगिक प्रजनन करता है। लैंगिक प्रजनन के दौरान, दो विपरीत (यौन) हाइफे के बीच
संयुग्मन (कंजुगेशन) से जाइगोस्पोर बनता है। उदाहरण: राइजोपस स्टोलोनिफेर (Rhizopus stolonifer) (आम ब्लैक
ब्रेड मोल्ड), राइजोपस नाइग्रिकन्स (Rhizopus nigricans)।
- पौधों (प्लांट्स) में एंजियोस्पर्म (एंजियोस्पर्म /
आवृतबीजी) शामिल हैं, जो पौधों का सबसे बड़ा और सबसे विकसित समूह है, जिनमें फूल
(फूल) और फल (फल) लगते हैं। बीज फल के अंदर संलग्न (आवृत) होते हैं। ये दो
उपवर्गों में विभाजित हैं: मोनोकोटाइलेडोनस (एकबीजपत्री) - एक बीजपत्र, समानांतर शिरा
विन्यास (पैरेलल वेनेशन), बंडल तने में बिखरे हुए, उदाहरण: चावल, गेहूं, मक्का, बांस, प्याज, केला, ऑर्किड;
और डिकोटाइलेडोनस (द्विबीजपत्री) - दो बीजपत्र, जालिका शिरा विन्यास (रिटिक्यूलेट वेनेशन),
बंडल एक वलय में, उदाहरण: सूरजमुखी, गुलाब, सेब, आम, राजमा, आलू, टमाटर।
- जंतुओं (एनिमल्स) में कॉर्डेट्स (कॉर्डेटा) में
रीढ़धारी (रीढ़धारी / वर्टेब्रेट्स) शामिल हैं, जिनमें एक आंतरिक कंकाल (एंडोस्केलेटन)
होता है जो रीढ़ (वर्टीब्रल कॉलम) से बना होता है। कशेरुकी (वर्टेब्रेट्स) को निम्नलिखित मुख्य क्लासों में
वर्गीकृत किया गया है: साइक्लोस्टोमाटा (जबड़े रहित मछलियाँ - लैम्प्रे, हैगफिश),
कोंड्रिकथाइस (कार्टिलाजिनस मछलियाँ - शार्क, रे), ओस्टीचथाइस (बोनी
मछलियाँ), एम्फीबिया (उभयचर - मेंढक, सैलामैंडर), रेप्टिलिया (सरीसृप -
छिपकली, सांप, कछुआ, मगरमच्छ), एविस (पक्षी), और मैमेलिया (स्तनधारी -
मनुष्य, बिल्ली, कुत्ता, व्हेल, चमगादड़)।
- वर्गीकरण पदानुक्रम (टैक्सोनॉमिक हायरार्की) में ऑर्डर (ऑर्डर /
गण) एक स्तर है, जो क्लास (वर्ग) और फैमिली (कुल) के बीच स्थित होता है। एक ऑर्डर में संबंधित
फैमिली का समूह शामिल होता है। उदाहरण: प्राइमेट्स (प्राइमेट) एक ऑर्डर है, जो मैमेलिया
क्लास के अंतर्गत आता है। प्राइमेट ऑर्डर में फैमिली होमिनिडे (Hominidae - गोरिला, चिंपैंजी, ऑरंगुटान,
मानव), सेरकोपिथेसिडे (Cercopithecidae - पुरानी दुनिया के बंदर), और लेमुरिडे (Lemuridae - लीमर) शामिल
हैं।
- मोनेरा जगत (मोनेरा) में माइकोप्लाज्मा
(माइकोप्लाज्मा) शामिल है, जो सबसे छोटे स्व-प्रतिकृति (सेल्फ-रिप्लिकेटिंग) जीव हैं, जिनमें
कोशिका भित्ति (सेल वॉल) नहीं होती। कोशिका भित्ति की अनुपस्थिति के कारण, वे आकार में
बहुरूपी (प्लियोमोर्फिक) होते हैं और पेनिसिलिन (जो कोशिका भित्ति के संश्लेषण को लक्षित करता है) के प्रति
प्रतिरोधी होते हैं। माइकोप्लाज्मा मनुष्यों, जानवरों और पौधों में रोग पैदा कर सकता है। उदाहरण:
माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया (Mycoplasma pneumoniae) - एटिपिकल न्यूमोनिया का कारण।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में ट्रिपैनोसोमा
(ट्रिपैनोसोमा) शामिल है, जो एक फ्लैजेलेटेड (एक या अधिक फ्लैजेला वाला) प्रोटोजोआ है। यह
मनुष्यों और जानवरों में गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। ट्रिपैनोसोमा ब्रूसी (Trypanosoma
brucei) अफ्रीकी ट्रिपैनोसोमियासिस (अफ्रीकन ट्रिपैनोसोमियासिस / स्लीपिंग
सिकनेस) का कारण है, जो त्सेत्से मक्खी (ग्लोसिना पल्पालिस) द्वारा फैलता है।
ट्रिपैनोसोमा क्रूजी (Trypanosoma cruzi) चगास रोग (चागास डिजीज) का कारण
है, जो रेडुविड कीट (ट्रायटोमिन / किसिंग बग) द्वारा फैलता है।
- फंजाई जगत (फंजाई) में एस्परजिलस
(एस्परजिलस) शामिल है, जो एक मोल्ड (फफूंद) है जो बड़े पैमाने पर औद्योगिक और प्रयोगशाला
सेटिंग्स में उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग साइट्रिक एसिड (साइट्रिक एसिड) के उत्पादन,
प्रोटीज, एमाइलेज और लाइपेज एंजाइमों के उत्पादन, और स्टैटिन
(कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं) के किण्वन में किया जाता है। यह एस्परजिलोसिस (एस्परजिलोसिस) -
प्रतिरक्षाविहीन व्यक्तियों में फुफ्फुसीय (फेफड़े) संक्रमण का कारण भी बन सकता है। उदाहरण: एस्परजिलस नाइजर
(Aspergillus niger) - साइट्रिक एसिड उत्पादन के लिए; एस्परजिलस फ्लेवस (Aspergillus flavus) - ऐफ्लाटॉक्सिन
(कैंसरजनक विष) उत्पन्न करता है।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में मॉस (मॉस /
ब्रायोफाइट्स) शामिल हैं, जो सबसे सरल पौधे हैं। ये असंवहनी (नॉन-वैस्कुलर)
होते हैं, जिनमें असली जड़, तना और पत्तियाँ नहीं होतीं, और ये नम, छायादार स्थानों पर उगते हैं। ये जल और
पोषक तत्वों के परिवहन के लिए संवहनी ऊतकों पर निर्भर नहीं होते हैं, बल्कि विसरण (डिफ्यूजन) और
कोशिका-दर-कोशिका परिवहन पर निर्भर होते हैं। इनका जीवन चक्र में गैमेटोफाइट (गैमेटोफाइट)
(यौन पीढ़ी) प्रमुख होता है। उदाहरण: फ्यूनारिया (Funaria), पॉलिट्रिकम (Polytrichum), स्फैग्नम (Sphagnum -
पीट मॉस)।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में एनेलिडा
(एनेलिडा / खंडित कृमि) शामिल हैं, जैसे केंचुआ (अर्थवर्म), जोक (लीच) और पॉलीकीट्स (समुद्री
कीड़े)। इनका शरीर खंडों (सेग्मेंट्स / मेटामीयर्स) में विभाजित होता है, जो उन्हें
लचीलापन और गति में लाभ प्रदान करता है। इनमें एक बंद संचार प्रणाली (क्लोज्ड सर्कुलेटरी सिस्टम) होती है,
और तंत्रिका तंत्र में उदर (वेंट्रल) तंत्रिका रज्जु (नेर्व कॉर्ड) शामिल होती है। केंचुआ मृदा उर्वरता के
लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मृदा को वातित (एरेट) करता है और कार्बनिक पदार्थों को तोड़ता है।
- वर्गीकरण पदानुक्रम (टैक्सोनॉमिक हायरार्की) में फैमिली (फैमिली
/ कुल) एक स्तर है, जो ऑर्डर (गण) और जीनस (वंश) के बीच स्थित होता है। एक फैमिली में संबंधित
जीनस का समूह शामिल होता है। उदाहरण: होमिनिडे (होमिनिडे / महान वानर) एक फैमिली है, जो
प्राइमेट्स ऑर्डर के अंतर्गत आती है। होमिनिडे फैमिली में जीनस पैन (चिंपैंजी), गोरिला (गोरिला), पोंगो
(ऑरंगुटान), और होमो (मानव) शामिल हैं।
- बैक्टीरिया (बैक्टीरिया) में पेप्टिडोग्लाइकन
(पेप्टिडोग्लाइकन) कोशिका भित्ति होती है, जो एक अद्वितीय पॉलीमर है जो बैक्टीरिया को उनका
आकार और सुरक्षा प्रदान करती है। पेप्टिडोग्लाइकन शर्करा (N-एसिटाइलग्लुकोसामाइन और N-एसिटाइलम्यूरैमिक
एसिड) और एमिनो एसिड (जैसे, डायमिनोपिमेलिक एसिड - DAP) की छोटी पेप्टाइड श्रृंखलाओं से बना होता है। यह
कोशिका भित्ति बैक्टीरिया को कोशिका लसीकोश (सेल लिसिस - फटने) से रोकती है (टर्गर प्रेशर के कारण)। यह
पेनिसिलिन और सेफलोस्पोरिन (सेफलोस्पोरिन) एंटीबायोटिक्स का लक्ष्य है, जो पेप्टिडोग्लाइकन पुलों के
क्रॉस-लिंकेज को रोकते हैं।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में
डाइनोफ्लैजलेट्स (डाइनोफ्लैजलेट्स) शामिल हैं, जो एककोशिकीय, प्रकाश संश्लेषी प्रोटिस्ट
हैं, जिनमें दो असमान फ्लैजेला (फ्लैगेला) होते हैं (एक अनुदैर्ध्य, एक अनुप्रस्थ), जो
उन्हें एक घूर्णी गति प्रदान करते हैं। इनमें कुछ जैवल्यूमिनसेंट (बायोलुमिनेसेंट) भी होते हैं। कुछ
डाइनोफ्लैजलेट्स (जैसे, जिम्नोडिनियम, गोन्यौलैक्स, ग्लेनोडिनियम, नोक्टिलुका) लाल ज्वार (रेड टाइड
/ एल्गल ब्लूम) का कारण बनते हैं, जो उनके द्वारा उत्पादित न्यूरोटॉक्सिन (शेलफिश विषाक्तता)
के कारण समुद्री जीवन और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
- कवक (फंजाई) में म्यूकर (म्यूकर)
शामिल है, जो एक जाइगोमाइकोट कवक है, जो राइजोपस के समान है, लेकिन इसमें स्टोलन और राइजोइड्स (राइजोइड्स)
नहीं होते हैं। यह एक सैप्रोबिक कवक है जो रोटी, फलों और अन्य कार्बनिक पदार्थों पर उगता है। म्यूकर
म्यूकोर्माइकोसिस (म्यूकोर्माइकोसिस) नामक दुर्लभ लेकिन गंभीर फंगल संक्रमण का कारण बन सकता है, जो मुख्य
रूप से प्रतिरक्षाविहीन (इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड) व्यक्तियों (जैसे, डायबिटीज, ल्यूकेमिया, एचआईवी / एड्स) को
प्रभावित करता है।
- पौधों (प्लांट्स) में फर्न (फर्न / टेरिडोफाइट्स)
शामिल हैं, जो संवहनी (वैस्कुलर) पौधे हैं, लेकिन बीज रहित (सीडलेस) होते हैं। वे नम, छायादार वातावरण
(जैसे, वर्षावन, नदियों के किनारे, दलदल) में पाए जाते हैं। उनके पास एक अच्छी तरह से विकसित जड़, तना
(भूमिगत प्रकंद / राइजोम) और बड़ी पत्तियाँ (फ्रॉन्ड्स / फ़्रॉन्ड) होती हैं, जो अक्सर यौगिक होती हैं
(पिन्ने / पिन्ने में विभाजित)। बीजाणु (स्पोर्स) पत्तियों (स्पोरोफिल्स) के नीचे की ओर सोरी
(सोरी) नामक संरचनाओं में स्थित स्पोरैंगिया में बनते हैं। उदाहरण: ड्रायोप्टेरिस
(Dryopteris), नेफ्रोलेपिस (Nephrolepis), प्टेरिडियम (Pteridium), साल्विनिया (Salvinia), एजोला (Azolla)।
- जंतुओं (एनिमल्स) में निमेटोडा (नेमाटोडा / गोल कृमि)
शामिल हैं, जो बेलनाकार, अखंडित (नॉन-सेग्मेंटेड) कृमि हैं। ये अत्यधिक प्रचुर (सभी जानवरों में से ~40%
नेमाटोड हैं) और लगभग सभी वातावरणों (मृदा, मीठा पानी, समुद्र, पौधे, जानवर) में पाए जाते हैं। इनमें एक
स्यूडोकोइलोम (स्यूडोकोइलोम) बॉडी कैविटी होती है और एक पूर्ण पाचन तंत्र (मुंह से गुदा तक) होता है। कई
प्रजातियाँ परजीवी (पैरासिटिक) हैं, जो मनुष्यों (एस्केरिस, एंकिलोस्टोमा, नेकेटर, ट्राइक्यूरिस, एंटरोबियस
- पिनवॉर्म), पशुओं और पौधों में रोग का कारण बनती हैं।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में प्रजाति का नाम (स्पीशीज नेम) पूरे
जीव जगत में अद्वितीय (यूनीक) होता है। द्विपद नामकरण (बिनोमियल नॉमेनक्लेचर) के
नियमों के अनुसार, एक ही वैज्ञानिक नाम एक ही प्रजाति को संदर्भित करता है, और दो अलग-अलग प्रजातियों का
एक ही नाम नहीं हो सकता है। यह विशिष्टता वैज्ञानिक संचार में सटीकता और स्पष्टता सुनिश्चित करती है।
उदाहरण के लिए, होमो सेपियन्स (Homo sapiens) केवल आधुनिक मनुष्यों को संदर्भित करता
है, न कि किसी अन्य जीव को।
- मोनेरा जगत (मोनेरा) में नाइट्रोजन स्थिरीकरण
(नाइट्रोजन फिक्सेशन) करने वाले बैक्टीरिया शामिल हैं, जैसे राइजोबियम
(राइजोबियम) (फलीदार पौधों की जड़ों में पिंड - नोड्यूल्स में सहजीवी), एजोटोबैक्टर
(एजोटोबैक्टर) (स्वतंत्र - फ्री-लिविंग, मृदा में), क्लॉस्ट्रिडियम पाश्चुरियनम
(Clostridium pasteurianum) (अवायवीय - एनारोबिक, मृदा में), एजोस्पिरिलम
(एजोस्पिरिलम) (मुक्त-जीवित, घास की जड़ों से जुड़ा), और एनाबीना (अनाबीना)
(सायनोबैक्टीरिया, जल में) . ये बैक्टीरिया वायुमंडलीय नाइट्रोजन (N₂) को अमोनिया (NH₃) में परिवर्तित करते
हैं, जिसे पौधे उपयोग कर सकते हैं, जिससे मृदा की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरकों की
आवश्यकता कम होती है।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में प्लास्मोडियम
(प्लास्मोडियम) शामिल है, जो एक परजीवी प्रोटोजोआ है जो मनुष्यों में मलेरिया
(मलेरिया) का कारण बनता है। यह मादा एनोफिलीज मच्छर (फीमेल एनोफिलीज मॉस्किटो) के काटने से
फैलता है। प्लास्मोडियम की कई प्रजातियाँ हैं: प्लास्मोडियम विवैक्स (Plasmodium vivax),
प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) (सबसे घातक - मैलिग्नेंट टेरशियन
मलेरिया), प्लास्मोडियम मलेरिया (Plasmodium malariae), प्लास्मोडियम ओवेल
(Plasmodium ovale), और प्लास्मोडियम नोलेसी (Plasmodium knowlesi) (प्राइमेट
से मानव में)। यह परजीवी मानव यकृत (लिवर) और लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) में गुणा करता है, जिससे तेज
बुखार, ठंड लगना, एनीमिया और यदि इलाज न किया जाए तो मृत्यु हो सकती है।
- कवक (फंजाई) रोगजनक (रोगजनक) हो सकते
हैं, जो पौधों, जानवरों और मनुष्यों में बीमारियों का कारण बनते हैं। कवक के कारण होने वाले मानव रोगों को
माइकोसिस (माइकोसिस) कहते हैं। उदाहरण: रिंगवॉर्म (रिंगवॉर्म) -
ट्राइकोफाइटन (Trichophyton), एथलीट फुट (एथलीट फुट) - ट्राइकोफाइटन, कैंडिडिआसिस
(कैंडिडिआसिस / यीस्ट इंफेक्शन) - कैंडिडा अल्बिकन्स (Candida albicans), एस्परजिलोसिस
(एस्परजिलोसिस) - एस्परजिलस (Aspergillus), हिस्टोप्लाज्मोसिस
(हिस्टोप्लाज्मोसिस) - हिस्टोप्लाज्मा कैप्सुलैटम (Histoplasma capsulatum)। पौधों के कवक
रोगों में पछेती तुषार (लेट ब्लाइट / फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टन्स - आयरिश आलू अकाल),
ख़स्ता फफूंदी (पाउडरी मिल्ड्यू), गेहूं का काला रतुआ (ब्लैक रस्ट ऑफ
व्हीट) - पुकिनिया ग्रैमिनिस (Puccinia graminis), और चावल का ब्लास्ट (राइस
ब्लास्ट) - मैग्नापोर्थे ओराइजे (Magnaporthe oryzae) शामिल हैं।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में साइकस
(साइकस) शामिल है, जो एक जिम्नोस्पर्म (नग्नबीजी) है, जिसे अक्सर "जीवित जीवाश्म"
(लिविंग फॉसिल) कहा जाता है क्योंकि यह डायनासोर के युग (मेसोज़ोइक युग) से काफी हद तक
अपरिवर्तित रहा है। इसमें एक ताड़ के पेड़ (पाम ट्री) जैसा दिखने वाला तना होता है, और इसके पत्ते मोटे,
चमकदार, सदाबहार (एवरग्रीन) होते हैं। साइकस पर नर और मादा शंकु (कपिला / कोन) अलग-अलग पेड़ों पर होते हैं
(द्विलिंगी / डायोशियस), और बीज नंगे होते हैं। इसे प्रागैतिहासिक पौधा माना जाता है।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में इकिनोडर्मेटा
(इकिनोडर्मेटा) शामिल हैं, जैसे तारामीन (स्टारफिश / सी स्टार), समुद्री अर्चिन (सी अर्चिन),
समुद्री खीरा (सी ककुम्बर), समुद्री लिली (सी लिली / फेदर स्टार) और ब्रिटल स्टार (ब्रिटल स्टार)। ये पूर्ण
रूप से समुद्री (एक्सक्लूसिवली मरीन) और रेडियल समरूपता (रेडियल सिमेट्री) (वयस्क अवस्था में पेंटामेरस -
पाँच-गुना समरूपता) वाले होते हैं। उनके पास एक कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) का अंतर्कंकाल (एंडोस्केलेटन)
(ऑसिकल्स) होता है, और एक अद्वितीय पानी संवहनी प्रणाली (वॉटर वैस्कुलर सिस्टम) होती है
जिसका उपयोग गति, भोजन और श्वसन के लिए किया जाता है। कई इकिनोडर्म टूटे हुए अंगों को पुनर्जीवित (रीजनरेट)
कर सकते हैं।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में डोमेन (डोमेन) सबसे
बड़ा और सबसे शीर्ष स्तर है, जिसे 1990 में कार्ल वोस (Carl Woese) ने 16S rRNA (राइबोसोमल आरएनए)
अनुक्रमण के आधार पर प्रस्तावित किया था। तीन डोमेन हैं: बैक्टीरिया (बैक्टीरिया)
(सच्चे बैक्टीरिया - सामान्य प्रोकैरियोट्स, जिनकी कोशिका भित्ति पेप्टिडोग्लाइकन होती है),
आर्किया (आर्किया) (प्राचीन बैक्टीरिया - चरमपंथी प्रोकैरियोट्स, जिनकी कोशिका भित्ति
की संरचना भिन्न होती है, पेप्टिडोग्लाइकन नहीं होता), और यूकैरिया (यूकैरिया) (सभी
यूकैरियोट्स - प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया)। डोमेन सिस्टम पांच-जगत वर्गीकरण से अधिक
विकासवादी (फाइलोजेनेटिक) रूप से सटीक है।
- बैक्टीरिया (बैक्टीरिया) में राइजोबियम
(राइजोबियम) शामिल है, जो एक नाइट्रोजन-स्थिरीकरण करने वाला बैक्टीरिया है जो फलीदार पौधों
(लेग्यूम - मटर, सेम, सोयाबीन, मूंगफली, तिपतिया घास, अल्फाल्फा) की जड़ों में पिंड
(नोड्यूल्स) बनाता है। यह एक सहजीवी (म्यूचुअलिस्टिक) संबंध है: बैक्टीरिया को पौधे से आश्रय
और कार्बोहाइड्रेट मिलते हैं, जबकि पौधे को बैक्टीरिया से अमोनिया (NH₃) के रूप में प्रयोग करने योग्य
नाइट्रोजन मिलती है, जिसकी उन्हें वृद्धि के लिए आवश्यकता होती है। यह संबंध कृषि में बेहद महत्वपूर्ण है,
क्योंकि यह मृदा में नाइट्रोजन उर्वरकों की आवश्यकता को कम करता है।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में स्लाइम
मोल्ड्स (स्लाइम मोल्ड्स) शामिल हैं, जो कवक (फंगस) और प्रोटोजोआ (प्रोटोजोआ) के समान
विशेषताओं वाले अद्वितीय प्रोटिस्ट हैं। वे नम, सड़ने वाले लॉग, पत्ती कूड़े और मिट्टी पर पाए जाते हैं,
जहां वे बैक्टीरिया, यीस्ट और कवक के बीजाणुओं को खाते हैं। उनके दो मुख्य प्रकार हैं: प्लास्मोडियल
(एक्युलर) स्लाइम मोल्ड्स (फिज़ेरम, स्टेमोनाइटिस) - एक बड़ी, बहुकेंद्रीय (कोएनोसाइटिक),
चिपचिपी, गतिशील प्लास्मोडियल द्रव्यमान; और सेलुलर (डिक्टीओस्टेलिड) स्लाइम मोल्ड्स
(डिक्टीओस्टेलियम डिस्कोइडम) - एककोशिकीय अमीबा जो भूख लगने पर एक साथ इकट्ठा होकर एक बहुकोशिकीय फलन शरीर
बनाता है।
- कवक (फंजाई) में कैंडिडा (कैंडिडा)
शामिल है, जो एक खमीर (यीस्ट) जैसा कवक है जो मनुष्यों में अवसरवादी (ऑपरच्युनिस्टिक) संक्रमण का कारण बनता
है। कैंडिडा अल्बिकन्स (Candida albicans) सबसे आम प्रजाति है। यह सामान्य रूप से त्वचा,
मुंह, आंतों और योनि में एक कमensal (हानिरहित) जीव के रूप में रहता है, लेकिन प्रतिरक्षा प्रणाली के कमजोर
होने (एचआईवी / एड्स, कैंसर, कीमोथेरेपी, डायबिटीज, एंटीबायोटिक्स के अत्यधिक उपयोग) पर यह अत्यधिक बढ़ सकता
है और कैंडिडिआसिस (कैंडिडिआसिस / यीस्ट इंफेक्शन) (ओरल थ्रश, योनि यीस्ट इंफेक्शन, त्वचा
कैंडिडिआसिस, प्रणालीगत कैंडिडिआसिस) का कारण बन सकता है।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में पाइनस (पाइनस /
देवदार, चीड़) शामिल है, जो एक जिम्नोस्पर्म (जिम्नोस्पर्म) है जो कोनिफर (कोनिफर /
शंकुवृक्ष) के समूह से संबंधित है। ये सदाबहार (एवरग्रीन) पेड़ हैं, जिनमें सुई के आकार की
(नेडल-शेप्ड) पत्तियाँ होती हैं जो पानी के नुकसान को कम करने के लिए अनुकूलित होती हैं (मोटी क्यूटिकल,
गहरे धंसे हुए रंध्र)। नर और मादा शंकु (कोन) अलग-अलग होते हैं, लेकिन वे एक ही पेड़ पर होते हैं (एकलिंगी /
मोनोसियस)। बीज नंगे होते हैं, मादा शंकु के बीजपत्रों पर स्थित होते हैं। पाइनस की लकड़ी का उपयोग निर्माण
(टिम्बर), फर्नीचर और कागज उद्योग (पल्पवुड) में किया जाता है।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में पोरिफेरा
(पोरिफेरा / स्पंज) शामिल हैं, जो सबसे सरल और सबसे आदिम बहुकोशिकीय जानवर (मेटाजोआ) हैं। ये
मुख्यतः समुद्री (समुद्री) होते हैं, लेकिन कुछ मीठे पानी में भी पाए जाते हैं। उनके शरीर में कई
छिद्र (ओस्टिया) और एक बड़ा बहिर्द्वार (ऑस्कुलम / ऑस्कुला) होता है,
जिसके माध्यम से पानी बहता है। उनके पास ऊतक (टिशू) या अंग (ऑर्गन) नहीं होते हैं, और वे एक स्थिर (सेसाइल)
जीवन शैली जीते हैं। उनके पास स्पिक्यूल्स (स्पिक्यूल्स) (सिलिका या कैल्शियम कार्बोनेट के
सुई के आकार के ढांचे) और स्पंजिन (स्पोंजिन) (प्रोटीन फाइबर) से बना एक अंतर्कंकाल
(एंडोस्केलेटन) होता है। उदाहरण: यूस्पोंजिया (यूस्पोंजिया - हरी स्पंज), साइकोन (सायकोन / साइकोन),
ग्रांटिया (ग्रांटिया), यूलोमा (यूलोमा - नियॉन स्पंज)।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में लिनियस ने सात स्तर (7 लेवल)
दिए हैं: किंगडम, फाइलम (जंतुओं में)/ डिवीजन (पौधों में), क्लास, ऑर्डर, फैमिली,
जीनस, स्पीशीज। ये स्तर एक पदानुक्रम (हायरार्की) बनाते हैं, जहाँ प्रत्येक स्तर एक टैक्सोन
(वर्गीकरण इकाई) होता है। इस पदानुक्रम के स्मरण (मेमोरी) के लिए एक लोकप्रिय लोकोक्ति है: "कंडक्टर का खाना
ठंडा है, फिर भी गर्म बिकता है" (किंगडम - फाइलम - क्लास - ऑर्डर - फैमिली - जीनस - स्पीशीज)।
- मोनेरा जगत (मोनेरा) में थर्मोफाइलिक
(गर्मी-प्रेमी) बैक्टीरिया (थर्मोफाइल्स) शामिल हैं, जो अत्यधिक उच्च तापमान (45°C से 80°C या
उससे भी अधिक) पर पनपते हैं। ये गर्म झरनों (येलोस्टोन नेशनल पार्क के गर्म झरने), डीप-सी हाइड्रोथर्मल
वेंट्स (समुद्र के अंदर गर्म पानी के छिद्र), और कम्पोस्ट गड्ढों में पाए जाते हैं। इन बैक्टीरिया के एंजाइम
(जैसे, टैक पोलीमरेज - Taq पॉलीमरेज़ थर्मस एक्वाटिकस से) का उपयोग मॉलिक्यूलर
बायोलॉजी में पीसीआर (पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन) (डीएनए एम्प्लीफिकेशन) के लिए किया जाता है।
उदाहरण: थर्मस एक्वाटिकस (Thermus aquaticus), थर्मोकोकस सेलेर (Thermococcus celer) (हाइड्रोथर्मल वेंट),
सल्फोलोबस एसिडोकैल्डेरियस (Sulfolobus acidocaldarius) (गर्म अम्लीय झरने)।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में रेडियोलारिया
(रेडियोलारिया) शामिल हैं, जो समुद्री ज़ोप्लांकटन (ज़ूप्लैंकटन) हैं, जो अपने जटिल, सुंदर,
सिलिका (SiO₂) के अंतर्कंकाल (एंडोस्केलेटन) के लिए जाने जाते हैं। इनमें केंद्रीय कैप्सूल के अंदर एक
न्यूक्लियस (केन्द्रक) होता है और कैप्सूल के चारों ओर स्यूडोपोडिया (स्यूडोपोडिया) की एक झालर होती है
(एक्सोपोडिया और एक्सोपोडिया के साथ एक्सोपोडियल स्यूडोपोडिया - एक्सोपोडियल स्यूडोपोडिया के साथ)। उनकी
मृत्यु के बाद, सिलिका कंकाल समुद्र तल पर जमा होकर रेडियोलेरियन ऊज (रेडियोलेरियन ऊज)
बनाते हैं, जो समुद्री तलछट में योगदान करते हैं।
- फंजाई जगत (फंजाई) में लाइकेन
(लाइकेन) शामिल हैं, जो एक कवक (फंगस) (आमतौर पर एस्कोमाइकोटा - एस्कोमाइसीट या
बेसिडियोमाइकोटा - बेसिडियोमाइसीट) और एक प्रकाश संश्लेषी सहजीवी (फोटोबियोंट) (हरा शैवाल या
सायनोबैक्टीरियम) के बीच एक सहजीवी (म्यूचुअलिस्टिक) संघ है। कवक शैवाल को पानी, खनिज और सुरक्षा प्रदान
करता है, जबकि शैवाल कवक के लिए प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बोहाइड्रेट प्रदान करता है। लाइकेन अत्यधिक
पर्यावरणीय परिस्थितियों (ध्रुवीय क्षेत्रों, रेगिस्तान, ऊंचे पहाड़ों) में विकसित हो सकते हैं, और वे
वायु प्रदूषण (वायु प्रदूषण) (विशेष रूप से SO₂) के अच्छे जैव-संकेतक (बायोइंडिकेटर) हैं।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में लिवरवॉर्ट्स
(लिवरवॉर्ट्स / यकृतकाय) शामिल हैं, जो सबसे सरल पौधों (ब्रायोफाइट्स) में से हैं, जिनका नाम
उनके पत्ती जैसे थैलस (थैलस) (कुछ प्रजातियों में) के कारण रखा गया है जो यकृत (लिवर) के आकार का होता है।
ये नम, छायादार स्थानों में पाए जाते हैं। इनमें असली जड़, तना, पत्तियाँ (अनुपस्थित या अविकसित) और संवहनी
ऊतक नहीं होते हैं। वे जल और पोषक तत्वों के लिए सीधे अवशोषण पर निर्भर होते हैं। इनके जीवन चक्र में
गैमेटोफाइट (यौन पीढ़ी) प्रमुख होता है। उदाहरण: मार्केंशिया (Marchantia), रिकिया (Riccia), पेलेलिया
(Pellia)।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में सिफालोपोडा
(सेफालोपोडा / सिरपाद) शामिल हैं, जो मोलस्क का सबसे विकसित (मोस्ट एडवांस्ड) वर्ग है। इसमें
स्क्विड (स्क्विड), ऑक्टोपस (ऑक्टोपस), कटलफिश (कटलफिश), और नॉटिलस (नॉटिलस) शामिल हैं। ये सक्रिय,
बुद्धिमान (इंटेलिजेंट) समुद्री शिकारी होते हैं, जिनमें एक अच्छी तरह से विकसित तंत्रिका तंत्र (बड़ा
मस्तिष्क), जटिल आंखें (जटिल आंखें), और एक जेट प्रणोदन (जेट प्रोपल्शन) के लिए एक साइफन
(साइफन) होता है। उनके पास एक आंतरिक खोल (इंटरनल शेल) होता है (स्क्विड और कटलफिश में पेन / ग्लैडियस या
कटलबोन) या बाहरी खोल (नॉटिलस) होता है। कई सेफलोपोड (जैसे, स्क्विड, ऑक्टोपस) अपने परिवेश के अनुकूल रंग
बदलने और स्याही (इंक) का एक बादल छोड़ने में सक्षम होते हैं।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में डीएनए अनुक्रम (डीएनए
सीक्वेंसेस) आधुनिक वर्गीकरण के लिए अत्यधिक उपयोगी हैं, क्योंकि वे विकासवादी संबंधों
(फाइलोजेनी) का एक आणविक (मॉलिक्यूलर) दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। आणविक फाइलोजेनेटिक्स
(मॉलिक्यूलर फाइलोजेनेटिक्स) राइबोसोमल आरएनए (rRNA) जीन (जैसे, 16S rRNA प्रोकैरियोट्स
में, 18S rRNA यूकैरियोट्स में), माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए), और प्रोटीन-कोडिंग जीन
के अनुक्रमों की तुलना करता है ताकि विकासवादी वृक्ष (इवोल्यूशनरी ट्री) बनाया जा सके। इससे
क्लैडिस्टिक्स (क्लैडिस्टिक्स) का विकास हुआ है, जो वर्गीकरण का एक आधुनिक दृष्टिकोण है जो मोनोफिलेटिक
समूहों (एक सामान्य पूर्वज और उसके सभी वंशजों से मिलकर) पर आधारित है।
- बैक्टीरिया (बैक्टीरिया) में स्टेफिलोकोकस
(स्टेफिलोकोकस) शामिल है, जो गोलाकार (कोकस) बैक्टीरिया का एक जीनस है, जो अंगूर के गुच्छों
(ग्रेप-लाइक क्लस्टर्स) जैसे समूहों (क्लस्टर) में व्यवस्थित होता है। स्टेफिलोकोकस ऑरियस
(Staphylococcus aureus) एक आम रोगजनक (पैथोजेन) है, जो मनुष्यों में त्वचा संक्रमण (फोड़े,
इम्पेटिगो, सेल्युलाइटिस), निमोनिया, एंडोकार्डिटिस, ऑस्टियोमाइलाइटिस, और विषाक्त शॉक सिंड्रोम (टॉक्सिक
शॉक सिंड्रोम) का कारण बन सकता है। यह मेथिसिलिन-प्रतिरोधी स्टेफिलोकोकस ऑरियस
(मेथिसिलिन-रेसिस्टेंट स्टैफिलोकोकस ऑरियस - एमआरएसए) के रूप में कई एंटीबायोटिक दवाओं के लिए
प्रतिरोधी होने के लिए भी कुख्यात है।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में फोरमिनिफेरा
(फोरमिनिफेरा / फोराम्स) शामिल हैं, जो समुद्री प्रोटोजोआ (प्रोटोजोआ) हैं, जो एक कैल्शियम
कार्बोनेट (CaCO₃) टेस्ट (टेस्ट / शेल) (बहुकोशिकीय कक्षों के साथ) द्वारा विशेषता रखते
हैं, जिसमें से साइटोप्लाज्मिक प्रक्रियाओं (स्यूडोपोडिया) के लिए छोटे छिद्र (फोरामिना /
फोरामेन) होते हैं। वे फोरामिनिफेरल ऊज (फोरामिनिफेरल ऊज) के रूप में समुद्री तलछट में प्रमुख
योगदान देते हैं। उनके जीवाश्म (फोसिल) टेस्ट (जो लगभग 300 मिलियन वर्ष पुराने हैं) का व्यापक रूप से
जैव स्तरीकरण (बायोस्ट्रेटीग्राफी) (चट्टान की परतों की डेटिंग और सहसंबंध) और
जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) (तेल और प्राकृतिक गैस) की खोज में उपयोग किया जाता है।
- कवक (फंजाई) में ट्रफल्स (ट्रफल्स /
ट्रफल) शामिल हैं, जो एक प्रकार का अत्यधिक मूल्यवान (एक्सपेंसिव) भूमिगत (सबटेरेनियन) मशरूम
(एस्कोमाइकोटा - एस्कोमाइसीट) है। ये विशिष्ट पेड़ों (ओक, हेज़लनट, बीच, पाइन) की जड़ों के साथ माइकोराइजा
(माइकोराइजा) (सहजीवी फंगल-रूट एसोसिएशन) बनाते हैं। ट्रफल अपनी तीव्र, अनोखी सुगंध (अरोमा) के लिए प्रसिद्ध
हैं, जो एक प्राकृतिक शक्तिशाली गंध (फेरोमोन-जैसी) के कारण होती है, जो सूअरों और कुत्तों (ट्रफल डॉग्स) को
आकर्षित करती है, जिनका उपयोग खोज के लिए किया जाता है। सबसे प्रसिद्ध प्रजाति पीडमोंटे व्हाइट
ट्रफल (ट्यूबर मैग्नेटम - Tuber magnatum) और ब्लैक पेरिगॉर्ड ट्रफल (ट्यूबर
मेलानोस्पोरम - Tuber melanosporum) हैं।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में ऑर्किड
(ऑर्किड) शामिल हैं, जो फूल वाले पौधों (एंजियोस्पर्म - एंजियोस्पर्म) के सबसे बड़े परिवारों
में से एक (ऑर्किडेसी - Orchidaceae) है (लगभग 28,000 स्वीकृत प्रजातियां)। ये अपने जटिल, सुंदर और अक्सर
बहुत ही विशिष्ट फूलों के लिए जाने जाते हैं। ऑर्किड के फूलों में एक विशेष पंखुड़ी (पेटल) होती है जिसे
लेबेल्लम (लेबेलम / लिप) कहा जाता है, जो अक्सर बहुत बड़ी और रंगीन होती है। कई ऑर्किड
कीटों (पोलिनेटर - कीट, पक्षी, चमगादड़) के साथ अत्यधिक विशिष्ट सहजीवी संबंध रखते हैं, और उनके बीज अत्यधिक
छोटे होते हैं (धूल के कणों की तरह), जो अंकुरण के लिए कवक (फंगल) सहजीवन पर निर्भर करते हैं।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में क्रस्टेशिया
(क्रस्टेशिया / क्रस्टेशियंस) शामिल हैं, जो आर्थ्रोपोडा (आर्थ्रोपोड) का एक बड़ा उपसंघ
(सबफाइलम) है। इनमें केकड़ा (क्रैब), झींगा (श्रिम्प), झींगा मछली (लॉबस्टर), क्रेफ़िश (क्रेफ़िश), केप
(क्रेफ़िश), बार्नेकल (बार्नेकल), कोपेपोड (कोपेपोड), एम्फिपोड (एम्फिपोड), और आइसोपोड (आइसोपोड) शामिल हैं।
अधिकांश क्रस्टेशियन जलीय (एक्वेटिक) (समुद्री या मीठे पानी) होते हैं, लेकिन कुछ स्थलीय (टेरेस्ट्रियल) भी
होते हैं (जैसे, वुडलाउस - लकड़ी के जूँ / रोली-पोली)। उनकी मुख्य विशेषताएं हैं: दो जोड़ी एंटीना, एक कठोर
कैल्शियम युक्त बाह्य कंकाल (एक्सोस्केलेटन), पांच या अधिक जोड़ी पैर, और अक्सर फूला हुआ (पंखनुमा)
गलफड़े (गलफड़े) होते हैं। क्रेफ़िश और झींगा मछली (लॉबस्टर) जैसे क्रस्टेशियन मत्स्य पालन
(फिशरीज) के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में फेनेटिक्स (फेनेटिक्स /
न्यूमेरिकल टैक्सोनॉमी) वर्गीकरण का एक दृष्टिकोण है जो जीवों के समग्र रूप-रंग
(ओवरऑल फेनोटाइपिक सिमिलेरिटी) पर आधारित है, न कि उनके विकासवादी इतिहास (फाइलोजेनी) पर।
यह बिना किसी विकासवादी धारणा के, विभिन्न लक्षणों (मॉर्फोलॉजिकल, एनाटोमिकल, बायोकेमिकल) की बड़ी
संख्या में समानता की गणना (न्यूमेरिकल मेथड) करता है। इसका उपयोग 1950-60 के दशक में किया गया था,
लेकिन इसे काफी हद तक क्लैडिस्टिक्स (क्लैडिस्टिक्स) (विकासवादी संबंधों पर आधारित)
द्वारा बदल दिया गया है।
- मोनेरा जगत (मोनेरा) में स्यूडोमोनास
(स्यूडोमोनास) शामिल है, जो छड़ के आकार (रॉड-शेप्ड) के ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया का एक विविध
जीनस है। स्यूडोमोनास एरुजिनोसा (Pseudomonas aeruginosa) एक अवसरवादी रोगजनक
(ऑपरच्युनिस्टिक पैथोजेन) है, जो प्रतिरक्षाविहीन (इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड) व्यक्तियों में संक्रमण का कारण
बनता है, जैसे कि सिस्टिक फाइब्रोसिस (सिस्टिक फाइब्रोसिस) रोगियों में फुफ्फुसीय संक्रमण (पल्मोनरी
इन्फेक्शन), बर्न विक्टिम्स (जलने के पीड़ितों) में त्वचा संक्रमण, और अस्पताल-अधिग्रहित संक्रमण
(हॉस्पिटल-एक्वायर्ड इन्फेक्शन) (यूरिनरी ट्रैक्ट, रक्तप्रवाह)। यह कई एंटीबायोटिक्स के लिए प्रतिरोधी
(रेसिस्टेंट) होने के लिए कुख्यात है।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में वॉलवॉक्स
(वॉलवॉक्स) शामिल है, जो एक कोलोनियल (कॉलोनियल) हरा शैवाल (ग्रीन अल्गा) है, जो हजारों
व्यक्तिगत एककोशिकीय वॉलवॉक्स कोशिकाओं से बना एक गोलाकार (स्फेरिकल) समूह (कॉलोनी) बनाता है। यह अपने
सहकारी व्यवहार (कोऑपरेटिव बिहेवियर) और विशेषीकृत कोशिकाओं (प्रजनन कोशिकाओं - गोनिडिया और दैहिक कोशिकाओं
- सोमेटिक सेल्स) में कोशिकीय विभेदन (सेल्युलर डिफरेंशिएशन) के प्रारंभिक रूप के लिए उल्लेखनीय है। यह
प्रोटिस्ट और बहुकोशिकीय पौधों (मल्टीसेल्युलर प्लांट्स) के बीच एक विकासवादी कड़ी (इवोल्यूशनरी लिंक) का
प्रतिनिधित्व करता है।
- फंजाई जगत (फंजाई) में फाइटोफ्थोरा
(फाइटोफ्थोरा) शामिल है, जो पौधों के रोगजनक ओमीसीट (ओमीसीट) (जिसे अक्सर "वॉटर मोल्ड्स" (वॉटर
मोल्ड्स) कहा जाता है, हालाँकि अब उन्हें प्रोटिस्टा (प्रोटिस्टा) में वर्गीकृत किया गया है) का एक जीनस है।
फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टन्स (Phytophthora infestans) 1840 के दशक में आयरलैंड में
आलू के पछेती तुषार (पोटैटो लेट ब्लाइट) का कारण था, जिसके परिणामस्वरूप महान
आयरिश अकाल (ग्रेट आयरिश फेमाइन) (1845-1852) हुआ, जिसमें लगभग दस लाख लोग मारे गए और एक और दस
लाख लोग आयरलैंड से पलायन कर गए। यह रोग आज भी आलू और टमाटर की फसलों को प्रभावित करता है, जिससे दुनिया भर
में महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान होता है।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में गिंग्को (गिंग्को /
जिन्कगो) शामिल है, विशेष रूप से जिन्कगो बिलोबा (Ginkgo biloba), जिसे अक्सर
"जीवित जीवाश्म" (लिविंग फॉसिल) कहा जाता है। यह एक जिम्नोस्पर्म है, जो मेसोज़ोइक युग
(डायनासोर का युग) से संबंधित है, और यह जिन्कगोफाइटा (Ginkgophyta) फाइलम की एकमात्र जीवित प्रजाति है।
इसके पत्ते प्रशंसक के आकार (फैन-शेप्ड) (बिलोबेड) के होते हैं। यह एक द्विलिंगी (डायोशियस) पौधा है: नर और
मादा शंकु (कोन) अलग-अलग पेड़ों पर होते हैं। मादा पेड़ बीज पैदा करता है, जो बाहरी आवरण (गूदेदार, बदबूदार
गूदा) से ढके होते हैं, जो ब्यूटिरिक एसिड (ब्यूटिरिक एसिड - बासी मक्खन की गंध) की उपस्थिति के कारण
दुर्गंधयुक्त होता है। जिन्कगो बिलोबा का उपयोग पारंपरिक चीनी चिकित्सा में स्मृति और संज्ञानात्मक कार्य
(कॉग्निटिव फंक्शन) में सुधार के लिए किया जाता है (सीमित वैज्ञानिक प्रमाण)।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में
प्लैटीहेल्मिन्थीज (प्लैटीहेल्मिन्थीज / फ्लैटवर्म्स - चपटे कृमि) शामिल हैं, जो सबसे सरल
ट्रिपलोब्लास्टिक (तीन-भ्रूणीय परत) अकशेरुकी (इनवर्टीब्रेट्स) हैं। इनका शरीर चपटा (डोर्सोवेंट्रली
फ्लैटन्ड) होता है, और वे अखंडित (नॉन-सेग्मेंटेड) होते हैं। उनके पास एक अधूरा पाचन तंत्र (इनकम्प्लीट
डाइजेस्टिव सिस्टम) (केवल मुंह, गुदा नहीं) होता है, और कोई श्वसन या परिसंचरण प्रणाली नहीं होती है (गैस
विनिमय विसरण द्वारा होता है)। उनमें से कई परजीवी (पैरासिटिक) हैं, जो मनुष्यों और जानवरों में रोग का कारण
बनते हैं। उदाहरण: टेनिया सोलियम (Taenia solium) - पोर्क टेपवॉर्म, फैसिओला
हेपेटिका (Fasciola hepatica) - लिवर फ्लूक, और स्किस्टोसोमा (Schistosoma) -
ब्लड फ्लूक (स्किस्टोसोमियासिस - बिलहार्जिया का कारण)।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में क्लैडिस्टिक्स
(क्लैडिस्टिक्स) वर्गीकरण का एक आधुनिक दृष्टिकोण है जो विकासवादी संबंधों
(इवोल्यूशनरी रिलेशनशिप) (फाइलोजेनी) पर आधारित है। यह जीवों को उनके साझा व्युत्पन्न
लक्षणों (शेयर्ड डिराइव्ड कैरेक्टर्स - सिनापोमोर्फीज) के अनुसार समूहित करता है, जो एक सामान्य पूर्वज
(कॉमन एंसेस्टर) से विरासत में मिले हैं। यह केवल मोनोफिलेटिक समूहों (मोनोफिलेटिक
ग्रुप्स) (एक पूर्वज और उसके सभी वंशजों से मिलकर) को मान्यता देता है, और पैराफिलेटिक (एक
पूर्वज लेकिन सभी वंशज नहीं) और पॉलीफिलेटिक (विभिन्न पूर्वजों) समूहों को खारिज करता है। क्लैडिस्टिक्स
ने तीन-डोमेन प्रणाली (बैक्टीरिया, आर्किया, यूकैरिया) के विकास का नेतृत्व किया।
- बैक्टीरिया (बैक्टीरिया) में स्ट्रेप्टोकोकस
(स्ट्रेप्टोकोकस) शामिल है, जो गोलाकार (कोकस) बैक्टीरिया का एक जीनस है, जो लंबी श्रृंखलाओं
(चेन-लाइक स्ट्रक्चर) में व्यवस्थित होता है। स्ट्रेप्टोकोकस पाइोजेन्स (Streptococcus
pyogenes) (ग्रुप ए स्ट्रेप्टोकोकस) मनुष्यों में स्ट्रेप थ्रोट (स्ट्रेप थ्रोट / गले
का संक्रमण), स्कार्लेट ज्वर (स्कार्लेट फीवर), और त्वचा संक्रमण (इम्पेटिगो, सेल्युलाइटिस) का
कारण बनता है। स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया (Streptococcus pneumoniae) न्यूमोकोकल
निमोनिया (न्यूमोकोकल न्यूमोनिया), मेनिन्जाइटिस (मेनिंगोकोकल मेनिन्जाइटिस), और ओटिटिस मीडिया
(ओटिटिस मीडिया - कान में संक्रमण) का एक प्रमुख कारण है।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में
डायनोफ्लैजलेट्स (डाइनोफ्लैजलेट्स / डाइनोफ्लैगेलेट्स) एक महत्वपूर्ण समूह हैं, जिनमें से
कई बायोल्यूमिनसेंट (बायोलुमिनेसेंट) हैं, जिसका अर्थ है कि वे रसायनिक प्रतिक्रिया
(ल्यूसिफेरेज-ल्यूसिफ़ेरिन) के माध्यम से प्रकाश उत्पन्न कर सकते हैं। जब समुद्र में बड़ी संख्या में
डाइनोफ्लैजलेट्स मौजूद होते हैं (एल्गल ब्लूम - शैवालीय प्रस्फुटन), तो वे रात के समय टकराती लहरों या नावों
की गति से एक शानदार नीली चमक (बायोल्यूमिनसेंस) पैदा कर सकते हैं। उदाहरण: नोक्टिलुका सिंटिलन्स (Noctiluca
scintillans) (समुद्री स्पार्कलर), गोन्यौलैक्स पॉलीहेड्रा (Gonyaulax polyedra), लिंगुलोडिनियम पॉलीहेड्रा
(Lingulodinium polyedra)।
- कवक (फंजाई) में अगारिकस (अगारिकस)
शामिल है, जो बेसिडियोमाइकोटा (बेसिडियोमाइसेट्स) का एक जीनस है, जिसमें खाने योग्य मशरूम की कई प्रजातियां
शामिल हैं। अगारिकस बिस्पोरस (Agaricus bisporus) सबसे व्यापक रूप से खेती किया जाने वाला
मशरूम है, जो युवा अवस्था में "बटन मशरूम" (बटन मशरूम) और परिपक्व अवस्था में "पोर्टोबेलो मशरूम"
(पोर्टोबेलो मशरूम) (या क्रेमिनी - क्रेमिनी) के रूप में बेचा जाता है। अगारिकस कैम्पेस्ट्रिस
(Agaricus campestris) एक जंगली फील्ड मशरूम (फील्ड मशरूम) है। हालांकि अगारिकस की कुछ
प्रजातियाँ खाने योग्य हैं, लेकिन कुछ जहरीली भी हैं (जैसे, येलो स्टेनर - अगारिकस ज़ैंथोडर्मस - Agaricus
xanthodermus)।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में रोज (रोज /
गुलाब) शामिल है, जो फूल वाले पौधों (एंजियोस्पर्म - एंजियोस्पर्म) के जीनस रोजा (Rosa) से
संबंधित है, जिसमें 100 से अधिक प्रजातियां और हजारों किस्में (कल्टीवार) (हाइब्रिड, कल्टीवेटेड) हैं। गुलाब
अपने सुंदर, सुगंधित (फ्रेग्रेंट) फूलों के लिए बेशकीमती हैं और दुनिया भर में सबसे लोकप्रिय सजावटी पौधों
में से एक हैं। गुलाब के फल को रोज हिप (रोज हिप / गुलाब कुटीर) कहा जाता है, जो विटामिन
सी (विटामिन सी) से भरपूर होता है और इसका उपयोग हर्बल चाय, जैम और कॉस्मेटिक्स में किया जाता है। गुलाब
पार्कों, बगीचों, और व्यावसायिक फूलों के व्यापार (कट फ्लावर, कट फ्लावर इंडस्ट्री) (वेलेंटाइन डे,
एनिवर्सरी) में व्यापक रूप से उगाए जाते हैं।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में सीनिडेरिया
(सीनिडेरिया / निडेरियन्स) शामिल हैं, जो मुख्य रूप से समुद्री (मरीन) अकशेरुकी
(इनवर्टीब्रेट्स) का एक संघ (फाइलम) है, जिसमें जेलीफिश (जेलीफिश), समुद्री एनीमोन (सी एनीमोन), कोरल
(कोरल), हाइड्रा (हाइड्रा), और पोर्चुगीज मैन ऑफ वॉर (पोर्चुगीज मैन-ऑफ-वॉर) शामिल हैं। उनकी मुख्य विशेषता
सीनिडोसाइट्स (सीनिडोसाइट्स / स्टिंगिंग सेल्स) की उपस्थिति है, जो डंक मारने वाली
कोशिकाएं हैं जिनमें नेमाटोसिस्ट (नेमाटोसिस्ट) (एक तार-जैसी जहर की डोरी के साथ एक
कैप्सूल) होता है, जिसका उपयोग शिकार को पकड़ने और बचाव के लिए किया जाता है। वे रेडियल समरूपता (रेडियल
सिमेट्री) दिखाते हैं। कोरल (कोरल) पॉलीप्स द्वारा स्रावित कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) के बाह्य कंकाल
(एक्सोस्केलेटन) के निर्माण के लिए जिम्मेदार होते हैं, जो प्रवाल भित्तियाँ (कोरल रीफ्स)
बनाते हैं, जो समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के सबसे विविध उत्पादक आवासों में से हैं।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में डोमेन (डोमेन) बैक्टीरिया
(डोमेन बैक्टीरिया) शामिल है, जिसमें सभी सच्चे जीवाणु (यूबैक्टीरिया) शामिल हैं। ये
प्रोकैरियोट्स (प्रोकैरियोट्स) हैं, जिनकी कोशिका भित्ति (सेल वॉल) में पेप्टिडोग्लाइकन
(पेप्टिडोग्लाइकन) होता है, और उनकी कोशिका झिल्ली लिपिड एस्टर (लिपिड एस्टर) से बनी होती है।
बैक्टीरिया के उदाहरणों में ई. कोलाई (ई. कोलाई), साल्मोनेला (साल्मोनेला), बैसिलस (बैसिलस),
स्ट्रेप्टोकोकस (स्ट्रेप्टोकोकस), स्टेफिलोकोकस (स्टेफिलोकोकस), लैक्टोबैसिलस (लैक्टोबैसिलस),
सायनोबैक्टीरिया (सायनोबैक्टीरिया), राइजोबियम (राइजोबियम) शामिल हैं। ये सबसे विविध और प्रचुर जीव हैं,
जो पृथ्वी पर लगभग हर वातावरण में पाए जाते हैं।
- मोनेरा जगत (मोनेरा) में क्लॉस्ट्रिडियम
(क्लॉस्ट्रिडियम) शामिल है, जो छड़ के आकार (रॉड-शेप्ड) के ग्राम-पॉजिटिव बैक्टीरिया का एक
जीनस है, जो एंडोस्पोर (एंडोस्पोर) (प्रतिकूल परिस्थितियों में बनने वाले अत्यधिक
प्रतिरोधी, निष्क्रिय ढांचे) बनाने में सक्षम हैं। क्लॉस्ट्रिडियम बोटुलिनम (Clostridium
botulinum) एक न्यूरोटॉक्सिन (न्यूरोटॉक्सिन) (बोटुलिनम टॉक्सिन) पैदा करता है, जो
बोटुलिज़्म (बोटुलिज़्म) नामक गंभीर, कभी-कभी घातक, फूड पॉइज़निंग (खाद्य विषाक्तता) का
कारण बनता है। क्लॉस्ट्रिडियम टेटानी (Clostridium tetani) टेटनस (टेटनस /
धनुस्तंभ) का कारण बनता है। क्लॉस्ट्रिडियम डिफिसाइल (Clostridium difficile)
एंटीबायोटिक-से संबंधित डायरिया (एंटीबायोटिक-एसोसिएटेड डायरिया) और कोलाइटिस का एक प्रमुख कारण है।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में ट्राइकोमोनास
(ट्राइकोमोनास) शामिल है, विशेष रूप से ट्राइकोमोनास वेजाइनलिस (Trichomonas
vaginalis), जो एक फ्लैगेलेटेड (फ्लैगेलेटेड) प्रोटोजोआ परजीवी है, जो मनुष्यों में
ट्राइकोमोनियासिस (ट्राइकोमोनियासिस) नामक यौन संचारित संक्रमण (एसटीडी) का कारण बनता है।
यह महिलाओं में योनि स्राव, खुजली और दर्द (वेजिनाइटिस), और पुरुषों में मूत्रमार्गशोथ (यूरेथ्राइटिस -
मूत्रमार्ग की सूजन) का कारण बनता है। इसका कोई सिस्ट (सिस्ट) चरण नहीं होता है, और यह केवल ट्राफोजोइट
(ट्रॉफोज़ोइट) (सक्रिय, खिला, गतिशील) रूप में मौजूद होता है।
- फंजाई जगत (फंजाई) में राइजोमाइसिस
(राइजोमाइसिस) शामिल है, जो एक जाइगोमाइकोट (ज़ाइगोमाइसीट) कवक है। राइजोमाइसिस
स्टोलोनिफेर (Rhizomucor stolonifer) (जिसे अक्सर "ब्लैक ब्रेड मोल्ड" (ब्लैक ब्रेड मोल्ड) के
रूप में राइजोपस स्टोलोनिफेर (Rhizopus stolonifer) के साथ भ्रमित किया जाता है) एक सैप्रोबिक (सैप्रोबिक)
कवक है जो रोटी, फलों और सब्जियों पर उगता है। राइजोमाइसिस पुसिलस (Rhizomucor pusillus)
और राइजोमाइसिस मियेहे (Rhizomucor miehei) प्रतिरक्षाविहीन (इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड)
रोगियों में म्यूकोर्माइकोसिस (म्यूकोर्माइकोसिस) (ज़ाइगोमाइकोसिस) नामक गंभीर फंगल
संक्रमण पैदा कर सकते हैं।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में सिकोइया (सिकोइया /
रेडवुड) शामिल है, जो जिम्नोस्पर्म (जिम्नोस्पर्म) (कोनिफर - कोनिफर) के जीनस से है।
सिकोइया सेम्परविरेन्स (Sequoia sempervirens) (कोस्ट रेडवुड - कोस्ट
रेडवुड) दुनिया का सबसे ऊंचा जीवित पेड़ है (115.92 मीटर - 380 फीट; "हाइपरियन" 2006 में पाया
गया)। सिकोइया डेंड्रोन गिगेंटियम (Sequoiadendron giganteum) (जायंट सीक्वोइया -
जायंट सीक्वोइया) दुनिया के सबसे बड़े पेड़ हैं (आयतन के हिसाब से)। ये कैलिफोर्निया, यूएसए के
मूल निवासी हैं। सिकोइया की लकड़ी क्षय-प्रतिरोधी (रॉट-रेसिस्टेंट) है, और इन पेड़ों की छाल बहुत मोटी होती
है, जो उन्हें जंगल की आग से बचाती है।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में हेमिकॉर्डेटा
(हेमिकॉर्डेटा / अर्ध-रज्जुकी) शामिल हैं, जो अकशेरुकी (इनवर्टीब्रेट्स) का एक छोटा संघ
(फाइलम) है, जिसे अक्सर कॉर्डेट्स (कॉर्डेट्स) (जिसमें कशेरुकी शामिल हैं) के सबसे करीबी अकशेरुकी रिश्तेदार
माना जाता है। उनके पास कॉर्डेट्स के समान कुछ विशेषताएं हैं, जैसे कि एक पृष्ठरज्जु
(नोटोकॉर्ड) के समान एक संरचना (स्टोमोकोर्ड) और ग्रसनीय क्लोम छिद्र
(फेरिंजियल स्लिट्स)। हेमिकॉर्डेट्स पूर्ण रूप से समुद्री (एक्सक्लूसिवली मरीन) होते हैं, और
इनमें एकोर्न वर्म्स (एकोर्न वर्म्स / बलूत के आकार के कृमि) (क्लास एंटरोपनेस्टा -
एंटरोपनेस्टा) शामिल हैं।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में डोमेन (डोमेन) आर्किया
(डोमेन आर्किया) शामिल है, जिसमें प्राचीन जीवाणु (प्राचीन जीवाणु) (आर्कियाबैक्टीरिया)
शामिल हैं। ये प्रोकैरियोट्स (प्रोकैरियोट्स) हैं, लेकिन आनुवंशिकी और जैव रसायन (जैसे, कोशिका झिल्ली
लिपिड ईथर (ईथर) होते हैं, एस्टर नहीं; कोशिका भित्ति में पेप्टिडोग्लाइकन की कमी; कई अद्वितीय आनुवंशिक
और चयापचय विशेषताएं) में बैक्टीरिया से भिन्न होते हैं। आर्किया चरमपंथी
(एक्सट्रीमोफाइल्स) हैं, जो अत्यधिक वातावरण में पाए जाते हैं:
हैलोफाइल्स (उच्च नमक), थर्मोफाइल्स (उच्च तापमान),
एसिडोफाइल्स (अम्लीय pH), एल्केलिफाइल्स (क्षारीय pH),
मीथेनोजेन्स (दलदल, रुमेन में मीथेन का उत्पादन करते हैं)। तीन डोमेन में से, आर्किया
यूकैरिया (यूकैरियोट्स) के सबसे करीबी रिश्तेदार हैं।
- बैक्टीरिया (बैक्टीरिया) में लैक्टोबैसिलस
(लैक्टोबैसिलस) शामिल है, जो लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया - एलएबी) का एक
जीनस है, जो लैक्टोज (लैक्टोज) और अन्य शर्करा को लैक्टिक एसिड (लैक्टिक एसिड) में किण्वित
(फर्मेंट) करता है। ये बैक्टीरिया प्रोबायोटिक्स (प्रोबायोटिक्स) के रूप में महत्वपूर्ण
हैं क्योंकि वे मानव आंत के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं (हानिकारक बैक्टीरिया के विकास को
रोकते हैं, पाचन में सहायता करते हैं)। लैक्टोबैसिलस का उपयोग दही (योगर्ट), पनीर
(पनीर), अचार (पिकल्स), खट्टी ब्रेड (सॉरडो ब्रेड), और
किण्वित सब्जियों (सॉकरक्राट, किम्ची) के उत्पादन में किया जाता है। उदाहरण: लैक्टोबैसिलस बल्गेरिकस
(Lactobacillus bulgaricus) (दही बनाने में) और लैक्टोबैसिलस केसी (Lactobacillus casei) (प्रोबायोटिक पेय
में)।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में जिआर्डिया
(जिआर्डिया / जिआर्डिया) शामिल है, विशेष रूप से जिआर्डिया लैम्ब्लिया (Giardia
lamblia) (जिसे जिआर्डिया इंटेस्टिनैलिस (Giardia intestinalis) भी कहा जाता है), जो एक
फ्लैजेलेटेड (फ्लैगेलेटेड) प्रोटोजोआ परजीवी है, जो मनुष्यों में जिआर्डियासिस (जिआर्डियासिस / बीवर
फीवर) का कारण बनता है। यह दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैलता है और गंभीर दस्त, पेट में
ऐंठन, मतली और वजन घटाने का कारण बनता है। जिआर्डिया एक सिस्ट (सिस्ट) (निष्क्रिय,
प्रतिरोधी चरण) बना सकता है जो क्लोरीनीकरण (क्लोरीनेशन) सहित कठोर पर्यावरणीय परिस्थितियों में जीवित रह
सकता है, जिससे यह एक आम जलजनित रोगज़नक़ बन जाता है।
- कवक (फंजाई) में यूस्टिलैगो
(यूस्टिलैगो) शामिल है, विशेष रूप से यूस्टिलैगो मेडिस (Ustilago maydis), जो
मक्का (कॉर्न / मक्का) में कॉर्न स्मट (कॉर्न स्मट / आग का झुलसा) का
कारण बनता है। यह एक पादप रोगजनक (प्लांट पैथोजन) कवक है, जो भुट्टे (ईयर) पर ग्रे-ब्लैक, गॉल जैसी संरचनाएं
(स्मट गॉल्स) बनाता है। दिलचस्प बात यह है कि कॉर्न स्मट को मैक्सिको में एक व्यंजन (हुइटलाकोचे
(Huitlacoche)) माना जाता है, जहाँ इसे एक स्वादिष्ट व्यंजन के रूप में खाया जाता है। यह एक
खाद्य कवक है, जिसे अक्सर "मैक्सिकन ट्रफल" (मैक्सिकन ट्रफल) कहा जाता है।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में बांस
(बांस) शामिल है, जो घास परिवार (पोएसी - Poaceae) का एक बारहमासी सदाबहार फूल वाला पौधा
(एंजियोस्पर्म - एंजियोस्पर्म) है, जिसकी 1,400 से अधिक प्रजातियां हैं। बांस दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने
वाला पौधा है; कुछ प्रजातियां एक दिन में 91 सेमी (36 इंच) तक बढ़ सकती हैं। यह अपनी ताकत, हल्केपन, लचीलेपन
और स्थिरता के लिए अत्यधिक बहुमुखी है। बांस का उपयोग निर्माण (मचान, फर्श, फर्नीचर), कागज उद्योग (पल्प),
कपड़ा (बांस फाइबर), खाद्य (बांस के अंकुर), और संगीत वाद्ययंत्र (बांसुरी) में किया जाता है।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में मायरीआपोडा
(मायरीआपोडा / मिलीपीड्स - सहस्रपाद) शामिल हैं, जो आर्थ्रोपोडा (आर्थ्रोपोड) का एक उपसंघ
(सबफाइलम) है। मिलीपीड्स के शरीर में कई खंड (सेग्मेंट) होते हैं, जिनमें से अधिकांश पर प्रति खंड में
दो जोड़ी पैर (टू पेयर ऑफ लेग्स) होते हैं (पहले कुछ खंडों को छोड़कर)। वे धीमी गति से
चलने वाले, डिट्रिटिवोर (डिट्रिटिवोर) (सड़ने वाले पौधों के पदार्थ, पत्ती कूड़े को खाते हैं) होते हैं, और
मिलीपीड जहरीले नहीं होते हैं (हालाँकि कुछ सुरक्षात्मक रसायन (बेंजोक्विनोन) का स्राव कर सकते हैं)।
मिलीपीड का एक सामान्य उदाहरण "आइरन वर्म" (आयरन वर्म) है।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में डोमेन (डोमेन) यूकैरिया
(डोमेन यूकैरिया) शामिल है, जिसमें सभी यूकैरियोटिक (यूकेरियोटिक) जीव शामिल हैं। इनमें
स्पष्ट केन्द्रक (न्यूक्लियस) और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग (मेम्ब्रेन-बाउंड ऑर्गेनेल) (माइटोकॉन्ड्रिया,
एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम, गॉल्जी कॉम्प्लेक्स, क्लोरोप्लास्ट (पौधों में)) होते हैं। यूकैरिया डोमेन के
अंतर्गत चार मुख्य जगत (किंगडम) आते हैं: प्रोटिस्टा (प्रोटिस्टा), फंजाई (फंजाई), प्लांटी (प्लांटी),
और एनिमेलिया (एनिमेलिया)। प्रोटिस्टा में एककोशिकीय यूकैरियोट (जैसे, अमीबा, पैरामीशियम) और शैवाल
शामिल हैं, जबकि फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया मुख्य रूप से बहुकोशिकीय (मल्टीसेल्युलर) यूकैरियोट्स हैं।
- मोनेरा जगत (मोनेरा) में बैसिलस
(बैसिलस) शामिल है, जो छड़ के आकार (रॉड-शेप्ड), ग्राम-पॉजिटिव, एंडोस्पोर-फॉर्मिंग बैक्टीरिया
का एक जीनस है। बैसिलस एन्थ्रेसीस (Bacillus anthracis) एन्थ्रेक्स
(एन्थ्रेक्स) का कारण बनता है, जो मुख्य रूप से शाकाहारी जानवरों (भेड़, बकरी, मवेशी) और
कभी-कभी मनुष्यों की एक गंभीर बीमारी है। बैसिलस थुरिंजिएन्सिस (Bacillus thuringiensis -
बीटी) एक महत्वपूर्ण जैव कीटनाशक (बायोपेस्टिसाइड) है, क्योंकि यह एक प्रोटीन (क्रिस्टल
टॉक्सिन) पैदा करता है जो कुछ कीटों (लेपिडोप्टेरान लार्वा - कैटरपिलर) के लिए विषाक्त है, लेकिन मनुष्यों
और अन्य स्तनधारियों के लिए हानिरहित है। बीटी जीन को आनुवंशिक रूप से फसलों (बीटी कॉटन, बीटी कॉर्न) में
स्थानांतरित किया गया है ताकि उन्हें कीट-प्रतिरोधी (पेस्ट-रेसिस्टेंट) बनाया जा सके।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में नॉस्टॉक
(नॉस्टॉक) शामिल है, जो सायनोबैक्टीरियम (सायनोबैक्टीरिया) का एक जीनस है, लेकिन यह प्रोटिस्टा
नहीं है; यह मोनेरा (मोनेरा) के अंतर्गत आता है। (ध्यान दें: नॉस्टॉक एक सायनोबैक्टीरियम है, इसलिए यह
मोनेरा में है, प्रोटिस्टा में नहीं। मैं इसे सही कर रहा हूँ)। नॉस्टॉक (नॉस्टॉक) एक
प्रकाश संश्लेषी, नाइट्रोजन-स्थिरीकरण करने वाला सायनोबैक्टीरियम (मोनेरा) है, जो मिट्टी, नदियों और झीलों
की सतहों पर जिलेटिनस कालोनियों (जिलेटिनस कॉलोनी) (जेली जैसा समूह) के रूप में पाया जाता है। इसमें
हेटरोसिस्ट (हेटरोसिस्ट) नामक विशिष्ट कोशिकाएं होती हैं, जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण
(नाइट्रोजन फिक्सेशन) करती हैं (जो ऑक्सीजन के प्रति संवेदनशील है), और प्रकाश संश्लेषण (प्रकाश संश्लेषण)
ऑक्सीजन-उत्पादक कोशिकाओं (वेजीटेटिव सेल्स) में होता है। नॉस्टॉक अक्सर लाइकेन (लाइकेन)
(जैसे, पेल्टिगेरा कैनिना - पेल्टिगेरा) में सहजीवी (फोटोबियोंट) भी बनाता है।
- फंजाई जगत (फंजाई) में अल्टरनेरिया
(अल्टरनेरिया) शामिल है, जो आम मोल्ड (मोल्ड) का एक जीनस है, जो पौधों के रोगजनक (प्लांट
पैथोजन) और सैप्रोबिक (सैप्रोबिक) (मृत कार्बनिक पदार्थों पर उगने वाला) के रूप में पाया जाता है। कई
प्रजातियाँ फसलों (टमाटर, आलू, ब्रोकोली, फूलगोभी, गाजर, प्याज) में रोग का कारण बनती हैं, जैसे कि
अर्ली ब्लाइट (अर्ली ब्लाइट / आलू और टमाटर का अगेती झुलसा रोग), जो अल्टरनेरिया सोलानी
(Alternaria solani) के कारण होता है। अल्टरनेरिया एलर्जी (एलर्जी) और श्वसन संबंधी समस्याएं (घर के अंदर,
इनडोर एयर क्वालिटी) भी पैदा कर सकता है।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में सूरजमुखी (सूरजमुखी
/ सनफ्लॉवर) शामिल है, (हेलियनथस एनुअस - Helianthus annuus), जो एंजियोस्पर्म (एंजियोस्पर्म)
का एक द्विबीजपत्री (डिकोट) पौधा है। यह अपने बड़े, सिर के आकार के पुष्पक्रम (कैपिटुलम - कैपिटुलम) के लिए
जाना जाता है, जिसमें बाहर की तरफ बाँझ रे फ्लोरेट्स (रे फ्लोरेट्स) (पंखुड़ियों जैसी) और अंदर की तरफ उपजाऊ
डिस्क फ्लोरेट्स (डिस्क फ्लोरेट्स) होते हैं, जो सर्पिल पैटर्न (गोल्डन रेशियो, फिबोनाची सीक्वेंस) में
व्यवस्थित होते हैं। सूरजमुखी के बीज (बीज) (एकेन्स) तेल (सूरजमुखी तेल - सनफ्लॉवर ऑयल) (खाना पकाने,
बायोडीजल) से भरपूर होते हैं, और बीजों को स्नैक के रूप में भी खाया जाता है। सूरजमुखी हेलियोट्रोपिज्म
(हेलियोट्रोपिज्म) का प्रदर्शन करता है: युवा फूलों के सिरे सूर्य के पार (पूर्व से पश्चिम) गति करते हैं।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में चिलोपोडा
(चिलोपोडा / सेंटीपीड्स - शतपाद) शामिल हैं, जो आर्थ्रोपोडा (आर्थ्रोपोड) का एक उपसंघ
(सबफाइलम) है। सेंटीपीड्स के शरीर में कई खंड (सेग्मेंट) होते हैं, जिनमें से प्रत्येक पर पैरों की
एक जोड़ी (वन पेयर ऑफ लेग्स) होती है (पहले खंड को छोड़कर, जिसमें जहरीले पंजे होते हैं -
फोर्सिप्यूल्स - फोर्सिप्यूल्स)। वे शिकारी (प्रिडेटरी) होते हैं, जो छोटे कीड़ों, मकड़ियों, और अन्य
अकशेरुकी जीवों को खाते हैं, और अपने शिकार को मारने और बचाव के लिए जहर (वेनम) इंजेक्ट कर सकते हैं।
सेंटीपीड्स के काटने से मनुष्यों में दर्दनाक लेकिन शायद ही कभी घातक प्रतिक्रिया हो सकती है। उदाहरण:
स्कोलोपेंड्रा (Scolopendra) (विशाल रेगिस्तानी सेंटीपीड)।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में प्रजाति का नाम (स्पीशीज
नेम) इटैलिक (टेढ़ा) में लिखा जाता है (या हाथ से लिखते समय अंडरलाइन किया जाता है)।
द्विपद नामकरण (बिनोमियल नॉमेनक्लेचर) के नियमों के अनुसार, वैज्ञानिक नाम (जीनस + स्पीशीज) हमेशा
टाइपोग्राफिक रूप से दूसरे पाठ से अलग किया जाता है, या तो इटैलिक (टेढ़ा) फ़ॉन्ट में या रेखांकित
(अंडरलाइन) करके। जीनस का नाम हमेशा बड़े अक्षर (कैपिटल लेटर) से शुरू होता है, जबकि प्रजाति का नाम
हमेशा छोटे अक्षर (लोअर केस) से शुरू होता है। उदाहरण: होमो सेपियन्स (Homo sapiens),
कैनिस फेमिलियरिस (Canis familiaris), एस्चेरिचिया कोलाई (Escherichia
coli) (ई. कोलाई - E. coli)।
- बैक्टीरिया (बैक्टीरिया) में विब्रियो
(विब्रियो) शामिल है, जो अल्पविराम के आकार (कॉमा-शेप्ड) (विब्रियोइड) बैक्टीरिया का एक जीनस
है। विब्रियो हैजा (Vibrio cholerae) हैजा (हैजा / कोलेरा) का कारण बनता
है, जो एक गंभीर दस्त (डायरिया) संक्रमण है, जो दूषित पानी के माध्यम से फैलता है और अगर इलाज न किया जाए
(गंभीर निर्जलीकरण - डिहाइड्रेशन) तो यह घातक हो सकता है। विब्रियो पैराहेमोलिटिकस (Vibrio
parahaemolyticus) समुद्री भोजन (सीफ़ूड) (विशेष रूप से कच्चे या अधपके सीफ़ूड) के सेवन से
जठरांत्र संबंधी बीमारी (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) का कारण बनता है। विब्रियो वुल्निफिकस (Vibrio
vulnificus) एक घातक रोगज़नक़ है जो घावों के माध्यम से या समुद्री भोजन खाने से जीवन-धमकी
देने वाले संक्रमण (सेप्सिस) का कारण बन सकता है, विशेष रूप से प्रतिरक्षाविहीन व्यक्तियों या क्रोनिक लिवर
रोग (सिरोसिस) वाले लोगों में।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में
क्लैमाइडोमोनास (क्लैमाइडोमोनास) शामिल है, जो हरे शैवाल (ग्रीन अल्गा) का एक जीनस है,
जिसमें एक ही जीनस के भीतर कई उपभेद और प्रजातियां शामिल हैं। क्लैमाइडोमोनास राइनहार्डटी
(Chlamydomonas reinhardtii) आनुवंशिकी, कोशिका जीव विज्ञान, और जैव प्रौद्योगिकी
(बायोटेक्नोलॉजी) के लिए एक मॉडल जीव (मॉडल ऑर्गेनिज्म) के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इसमें
दो सबसे आगे (एपिकल) फ्लैगेला (फ्लैगेला) हैं, एक कप के आकार का क्लोरोप्लास्ट, और एक
फोटोरेसेप्टर (आईस्पॉट / आईस्पॉट) है। यह यौन और अलैंगिक दोनों तरह से प्रजनन करता है। यह प्रोटिस्टा और
पादप जगत के बीच एक महत्वपूर्ण संक्रमणकालीन रूप है।
- कवक (फंजाई) में फ्यूजेरियम
(फ्यूजेरियम) शामिल है, जो मोल्ड (मोल्ड) का एक विविध जीनस है, जो फिलामेंटस कवक (फिलामेंटस
फंजाई) के समूह से संबंधित है। यह एक सैप्रोबिक (सैप्रोबिक) कवक है, लेकिन कई प्रजातियां पौधों (ऑर्किड,
टमाटर, केला, अनाज), जानवरों और मनुष्यों में बीमारियों के रूप में महत्वपूर्ण रोगजनक (पैथोजन) हैं।
फ्यूजेरियम ऑक्सीस्पोरम (Fusarium oxysporum) कई फसलों (विल्ट रोग - विल्ट डिजीज) में
फ्यूजेरियम विल्ट (फ्यूजेरियम विल्ट) का कारण बनता है। फ्यूजेरियम ग्रैमिनियरम
(Fusarium graminearum) अनाज (गेहूं, मक्का, जौ) में फ्यूजेरियम हेड ब्लाइट
(फ्यूजेरियम हेड ब्लाइट / स्कैब) का कारण बनता है, जो माइकोटॉक्सिन (माइकोटॉक्सिन)
(डीऑक्सीनिवेलेनॉल - डीऑक्सीनिवेलेनॉल) पैदा कर सकता है, जो मनुष्यों और जानवरों के लिए हानिकारक है।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में गेहूं (गेहूं /
व्हीट) (ट्रिटिकम एस्टिवम - Triticum aestivum) शामिल है, जो एक घास है जिसकी खेती दुनिया भर
में एक मुख्य भोजन अनाज के रूप में की जाती है। यह एंजियोस्पर्म (एंजियोस्पर्म) का एक मोनोकोट (मोनोकोट)
पौधा है। गेहूं के बीज (बीज) (बेरी) को पीसकर गेहूं का आटा (व्हीट फ्लोर) बनाया जाता है,
जिसका उपयोग ब्रेड (ब्रेड), पास्ता (पास्ता), नूडल्स (नूडल्स), बिस्कुट (बिस्कुट), केक (केक), पेस्ट्री
(पेस्ट्री) और अन्य बेकरी उत्पादों (बेकरी प्रोडक्ट्स) को बनाने के लिए किया जाता है। गेहूं में
ग्लूटेन (ग्लूटेन) नामक प्रोटीन होता है, जो आटे को लोचदार बनावट (इलास्टिक टेक्सचर) देता
है, जिससे यह ब्रेड बनाने के लिए उपयुक्त हो जाता है। गेहूं के आटे से निकाला गया सूजी (सूजी) का उपयोग
पास्ता और मिठाई बनाने में किया जाता है।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में प्रोटोकॉर्डेटा
(प्रोटोकॉर्डेटा / प्रोटोकॉर्डेट्स) शामिल हैं, जो अकशेरुकी (इनवर्टीब्रेट्स) हैं, जो
कॉर्डेट्स (कॉर्डेट्स) के सबसे आदिम सदस्य हैं। उनके पास कॉर्डेट्स की तीन मुख्य विशेषताएं हैं (एक
पृष्ठरज्जु - नोटोकॉर्ड, एक खोखली पृष्ठीय तंत्रिका रज्जु - हॉलो डोरसल नर्व
कॉर्ड, और ग्रसनीय क्लोम छिद्र - फेरिंजियल स्लिट्स) अपने जीवन चक्र के कम से
कम कुछ चरणों में। उनके पास कशेरुक (वर्टीब्रा) (रीढ़ की हड्डी) की कमी होती है। प्रोटोकॉर्डेट्स के दो
मुख्य समूह हैं: यूरोकॉर्डेटा (ट्यूनिकेट्स/सी स्क्विर्ट्स) - समुद्री, वयस्क के रूप में
स्थिर (सेसाइल); और सेफलोकॉर्डेटा (लांसलेट्स/एम्फिऑक्सस - एम्फिऑक्सस) - छोटे, मछली जैसे
समुद्री जीव, जो जीवन भर सभी कॉर्डेट विशेषताओं को बनाए रखते हैं।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में जीनस का नाम (जीनस नेम) बड़े
अक्षर (कैपिटल लेटर) से शुरू होता है। द्विपद नामकरण (बिनोमियल नॉमेनक्लेचर) के नियमों के
अनुसार, प्रजाति के वैज्ञानिक नाम का पहला शब्द (वंश - जीनस) हमेशा बड़े अक्षर (कैपिटलाइज़्ड) से लिखा
जाता है, जबकि दूसरा शब्द (प्रजाति - स्पीशीज) हमेशा छोटे अक्षर (लोअर केस) में लिखा जाता है। उदाहरण:
होमो सेपियन्स (Homo sapiens) (होमो - बड़ा H; सेपियन्स - छोटा s), फेलिस
डोमेस्टिका (Felis domestica) (बिल्ली), कैनिस फेमिलियरिस (Canis
familiaris) (कुत्ता), मैंगीफेरा इंडिका (Mangifera indica) (आम)।
- मोनेरा जगत (मोनेरा) में स्टैफिलोकोकस
(स्टैफिलोकोकस) एक रोगजनक (पैथोजेनिक) बैक्टीरियम है, विशेष रूप से स्टैफिलोकोकस ऑरियस
(Staphylococcus aureus)। यह मनुष्यों में बीमारियों की एक विस्तृत श्रृंखला का कारण बन सकता
है, मामूली त्वचा संक्रमण (फोड़े, इम्पेटिगो, सेल्युलाइटिस) से लेकर गंभीर संक्रमण (निमोनिया,
एंडोकार्डिटिस, ऑस्टियोमाइलाइटिस, विषाक्त शॉक सिंड्रोम - टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम) तक। यह कई एंटीबायोटिक
दवाओं (पेनिसिलिन, मेथिसिलिन - MRSA, वैनकोमाइसिन - VRSA) के लिए प्रतिरोध विकसित करने की क्षमता के लिए
प्रसिद्ध है। यह एक अवसरवादी रोगजनक (ऑपरच्युनिस्टिक पैथोजन) भी है, जो प्रतिरक्षाविहीन
(इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड) व्यक्तियों (जैसे, अस्पताल में भर्ती रोगियों) को संक्रमित कर सकता है।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में डायटम (डायटम
/ डायटम) में एक खनिज युक्त कोशिका भित्ति (मिनरलाइज्ड सेल वॉल) होती है,
जिसे फ्रस्ट्यूल (फ्रस्ट्यूल) कहा जाता है, जो सिलिका (SiO₂ - सिलिका) से बना होता है।
फ्रस्ट्यूल जैसे दो हिस्सों (वाल्व) (ऊपरी एपिथेका - एपिथेका और निचला हाइपोथेका - हाइपोथेका) से बना होता
है, जैसे एक पेट्री डिश (पेट्री डिश) के साथ फिट होता है। इन कोशिका भित्ति में जटिल, सममित, अक्सर सुंदर
पैटर्न (स्ट्राइ, पंक्टे, रिब्स) होते हैं, जो प्रकाश सूक्ष्मदर्शी (लाइट माइक्रोस्कोप) के तहत दिखाई देते
हैं। सिलिका कोशिका भित्ति अवक्षयण (डिपॉजिशन) के कारण, डायटम एक जिलेटिनस आवरण (गर्डल बैंड) के भीतर
फ्रस्ट्यूल को सिकोड़कर (डिवीजन के दौरान) बढ़ते हैं, जिससे एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी तक क्रमिक (प्रोग्रेसिव)
आकार में कमी आती है। जब डायटम एक निश्चित महत्वपूर्ण छोटे आकार तक पहुँच जाता है, तो यह एक यौन प्रजनन
(सेक्शुअल रिप्रोडक्शन) से गुजरता है (ऑक्सोगैमी - ऑक्सोगैमी) एक औक्सोस्पोर (ऑक्सोस्पोर) बनाने के लिए, जो
अपनी मूल बड़ी कोशिका के आकार को पुनर्स्थापित करता है।
- कवक (फंजाई) में लाइकेन (लाइकेन) एक
सहजीवी (स्यूम्बायोटिक) जीव है, जो एक कवक (फंजाई) (माइकोबियोंट - माइकोबियोंट) और एक प्रकाश संश्लेषी
(फोटोसिंथेटिक) सहजीवी (फोटोबियोंट - फोटोबियोंट) (हरा शैवाल - ग्रीन अल्गा या सायनोबैक्टीरियम -
सायनोबैक्टीरियम) के बीच पारस्परिक (म्यूचुअलिस्टिक) सहजीवन (स्यूम्बायोसिस) है। यह संबंध इतना करीबी और
स्थिर है कि लाइकेन को अक्सर एक एकल जीव (ऑर्गेनिज्म) माना जाता है, और उन्हें उनके फंगल घटक के आधार पर एक
अद्वितीय वैज्ञानिक नाम दिया जाता है। लाइकेन अत्यधिक पर्यावरणीय परिस्थितियों (ध्रुवीय क्षेत्र, रेगिस्तान,
ऊंचे पहाड़, चट्टानों, पेड़ों की छाल) के लिए अत्यधिक सहिष्णु हैं, और वे वायु प्रदूषण (वायु
प्रदूषण) (विशेष रूप से SO₂ - सल्फर डाइऑक्साइड) के अत्यधिक संवेदनशील संकेतक (बायोइंडिकेटर)
हैं, क्योंकि वे वायुमंडल से नमी और पोषक तत्वों को सीधे अवशोषित करते हैं।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में चावल (चावल /
राइस) (ओराइजा सैटिवा - Oryza sativa) शामिल है, जो एक मोनोकोट (मोनोकोट) एंजियोस्पर्म
(एंजियोस्पर्म) है, और यह दुनिया के कई हिस्सों (विशेष रूप से एशिया, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका) में एक मुख्य
भोजन (स्टेपल फूड) है। चावल को आमतौर पर बाढ़ वाले खेतों (धान के खेत - पैडी फील्ड्स) में
उगाया जाता है, हालाँकि इसे सूखी भूमि (अपलैंड राइस) पर भी उगाया जा सकता है। सफेद चावल (व्हाइट राइस)
प्राप्त करने के लिए ब्राउन राइस (भूरा चावल) को पॉलिश (पॉलिश) किया जाता है, जो भूसी (हुल), चोकर (ब्रैन)
और रोगाणु (जर्म) (जहां अधिकांश पोषक तत्व और फाइबर स्थित होते हैं) को हटा देता है। चावल की पुआल (राइस
स्ट्रॉ) का उपयोग पशु चारा (एनिमल फीड), छप्पर (थैचिंग), टोकरियाँ (बास्केट), और बायोडिग्रेडेबल उत्पादों
(बायोडिग्रेडेबल प्रोडक्ट्स) के लिए सामग्री के रूप में किया जाता है।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में गैस्ट्रोपोडा
(गैस्ट्रोपोडा / घोंघे, स्लग) शामिल हैं, जो मोलस्क (मोलस्क) का सबसे बड़ा और सबसे विविध वर्ग
है। उनके पास एक अच्छी तरह से परिभाषित सिर (हेड) होता है, जिसमें एक या दो जोड़ी तंबू (टेंटेकल्स) होते
हैं, और एक स्नायु-पाद (मस्कुलर फुट) होता है जो शरीर की उदर (वेंट्रल) सतह पर स्थित होता है (इसलिए नाम
"गैस्ट्रोपोड" - पेट-पैर)। अधिकांश गैस्ट्रोपोड में एक खोल (शैल) होता है (एकल, कुंडलित - स्पाइरल्ड), लेकिन
कुछ (स्लग) में खोल कम हो गया है या अनुपस्थित है। गैस्ट्रोपोड समुद्री (मरीन), मीठे पानी (फ्रेश वॉटर), और
स्थलीय (टेरेस्ट्रियल) (भूमि घोंघा, स्लग) वातावरण में पाए जाते हैं। उदाहरण: हेलिक्स पोमाटिया (Helix
pomatia) (भूमि घोंघा - "एस्करगो"), लिटोरिना लिटोरिया (Littorina littorea) (समुद्री घोंघा - पेरिविंकल),
आयोनिया फोर्बेसी (Aeonium forbesii) (स्लग)।
- वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में आनुवंशिक डेटा (जेनेटिक
डेटा) (जैसे, डीएनए, आरएनए, प्रोटीन अनुक्रम) का उपयोग आणविक फाइलोजेनेटिक्स
(मॉलिक्यूलर फाइलोजेनेटिक्स) में विकासवादी संबंधों (फाइलोजेनी) को निर्धारित करने के लिए
किया जाता है। पारंपरिक रूप-रंग पर आधारित वर्गीकरण (फेनेटिक्स, मॉर्फोलॉजी) की तुलना में आणविक डेटा
अधिक सटीक और सूक्ष्म है क्योंकि यह डीएनए, आरएनए, या प्रोटीन अणुओं (जैसे, साइटोक्रोम सी, राइबोसोमल
आरएनए - rRNA, माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए - mtDNA) के अनुक्रमों में समानता और अंतर (होमोलॉजी) पर आधारित
है। आनुवंशिक डेटा ने तीन-डोमेन प्रणाली (बैक्टीरिया, आर्किया, यूकैरिया) के विकास का नेतृत्व किया और
पैराफिलेटिक (जैसे, प्रोटिस्टा) और पॉलीफिलेटिक समूहों के कई पारंपरिक वर्गीकरणों को संशोधित किया है।
- बैक्टीरिया (बैक्टीरिया) में सायनोबैक्टीरिया
(सायनोबैक्टीरिया / सायनोबैक्टीरिया) (नीले-हरे शैवाल - ब्लू-ग्रीन अल्गी) प्रकाश संश्लेषी
(फोटोसिंथेटिक) प्रोकैरियोट्स हैं। वे क्लोरोफिल ए (क्लोरोफिल ए), फाइकोबिलिन (फाइकोबिलिन) (फाइकोसाइनिन -
फाइकोसाइनिन - नीला, फाइकोएरिथ्रिन - फाइकोएरिथ्रिन - लाल), और बीटा-कैरोटीन (बीटा-कैरोटीन) जैसे अन्य
प्रकाश संश्लेषी रंजक (पिगमेंट) रखते हैं, जो उन्हें उनका विशिष्ट रंग देते हैं। वे पृथ्वी पर सबसे पुराने
जीवित जीवों में से कुछ हैं (सायनोबैक्टीरियल जीवाश्म, स्ट्रोमेटोलाइट्स - स्ट्रोमेटोलाइट्स, 3.5 अरब वर्ष
पुराने) और पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन (ऑक्सीजन) के निर्माण में जिम्मेदार थे (महान ऑक्सीकरण घटना -
ग्रेट ऑक्सीडेशन इवेंट) (लगभग 2.4 अरब वर्ष पहले)। कई सायनोबैक्टीरिया नाइट्रोजन-स्थिरीकरण (नाइट्रोजन
फिक्सेशन) करते हैं (उदाहरण: एनाबीना (Anabaena), नॉस्टॉक (Nostoc), कैलोथ्रिक्स (Calothrix)) और विशेष
कोशिकाओं (हेटरोसिस्ट्स) में ऑक्सीजन-संवेदनशील नाइट्रोजनेज एंजाइम (नाइट्रोजनेज एंजाइम)
को स्थानीयकृत करके ऑक्सीजन उत्पादन (प्रकाश संश्लेषण) और नाइट्रोजन स्थिरीकरण के बीच संघर्ष को दूर करते
हैं।
- प्रोटिस्टा जगत (प्रोटिस्टा) में प्रोटोजोआ
(प्रोटोजोआ) शामिल हैं, जो विषमपोषी (हीटरोट्रोफिक), एककोशिकीय (यूनिसेल्युलर) प्रोटिस्ट हैं।
वे फागोसाइटोसिस (फैगोसाइटोसिस) या पिनोसाइटोसिस (पिनोसाइटोसिस) द्वारा जैविक कणों (बैक्टीरिया, अन्य
प्रोटिस्ट, कार्बनिक डेट्रिटस) पर भोजन करते हैं। प्रोटोजोआ को उनके गति (लोकोमोशन) के अंगों (ऑर्गेनेल) के
आधार पर चार मुख्य समूहों में वर्गीकृत किया जाता है: मास्टिगोफोरा (फ्लैगेलेट्स -
फ्लैगेला के साथ; उदाहरण: यूग्लीना (Euglena), ट्रिपैनोसोमा (Trypanosoma), जिआर्डिया (Giardia),
ट्राइकोमोनास (Trichomonas)); सरकोडिना (स्यूडोपोडिया के साथ - स्यूडोपोडिया; उदाहरण:
अमीबा (Amoeba), फोरमिनिफेरा (Foraminifera), रेडियोलारिया (Radiolaria)); सिलियोफोरा
(सिलिया के साथ; उदाहरण: पैरामीशियम (Paramecium), स्टेंटर (Stentor), वोर्टिसेला (Vorticella),
टेट्राहाइमेना (Tetrahymena)); और एपिकॉम्प्लेक्सा (बिना गति अंगों के, परजीवी; उदाहरण:
प्लास्मोडियम (Plasmodium), टोक्सोप्लाज्मा (Toxoplasma), क्रिप्टोस्पोरिडियम (Cryptosporidium))।
- कवक (फंजाई) में मोल्ड्स (मोल्ड्स /
फफूंद) शामिल हैं, जो बहुकोशिकीय (मल्टीसेल्युलर) फिलामेंटस कवक हैं (सैप्रोबिक, कभी-कभी
परजीवी)। वे ब्रेड, फलों, सब्जियों, पनीर और अन्य कार्बनिक पदार्थों पर उगते हैं, और एक विशिष्ट धुंधली
(फजी) या चूर्ण जैसी (पाउडरी) उपस्थिति पैदा करते हैं। मोल्ड्स में लंबी, शाखाओं वाली, बेलनाकार तंतु होते
हैं जिन्हें हाइफे (हाइफे) कहा जाता है, जो एक नेटवर्क (मायसेलियम -
मायसेलियम) बनाते हैं। वे अलैंगिक रूप से (एसेक्सुअल रिप्रोडक्शन) (बीजाणु - स्पोर्स का
उत्पादन करके) और यौन रूप से (सेक्सुअल रिप्रोडक्शन) प्रजनन करते हैं। कई मोल्ड्स औद्योगिक रूप से
महत्वपूर्ण हैं (पेनिसिलियम (Penicillium) - पेनिसिलिन एंटीबायोटिक, एस्परजिलस (Aspergillus) - साइट्रिक
एसिड, एंजाइम), जबकि अन्य खाद्य खराब (फूड स्पॉइलेज) और स्वास्थ्य समस्याएं (एलर्जी, श्वसन संक्रमण,
माइकोसिस) पैदा कर सकते हैं।
- प्लांटी जगत (प्लांटी) में मक्का (मक्का /
कॉर्न) (ज़िया मेज़ - Zea mays) शामिल है, जो एंजियोस्पर्म (एंजियोस्पर्म) का एक मोनोकोट
(मोनोकोट) पौधा है, जो दुनिया भर में एक मुख्य अनाज की फसल (स्टेपल क्रॉप) है (गेहूं और चावल के साथ)। मक्का
के पौधे द्विलिंगी (मोनोशियस) (एकलिंगी) होते हैं, जिसमें नर फूल (टैसल - टैसल) शीर्ष पर
होते हैं, और मादा फूल (ईयर (भुट्टा) जिसमें रेशम जैसे वर्तिकाग्र (सिल्क्स) होते हैं)
पत्तियों की धुरी (एक्सिल्स) में स्थित होते हैं। मक्का पवन-परागणित (विंड-पोलिनेटेड) होता है। मक्का का
उपयोग मानव भोजन (मक्का के दाने, कॉर्नमील, कॉर्न सिरप, कॉर्न स्टार्च, कॉर्न ऑयल, पॉपकॉर्न), पशु चारा
(एनिमल फीड), और जैव ईंधन (बायोफ्यूल) (इथेनॉल) के रूप में किया जाता है। मक्का एक सी4 (सी4) कार्बन
स्थिरीकरण (कार्बन फिक्सेशन) प्लांट है, जो इसे गर्म, शुष्क परिस्थितियों में कुशल बनाता है।
- एनिमेलिया जगत (एनिमेलिया) में बाइवैल्विया
(बाइवैल्विया / बाइवाल्व्स) शामिल हैं, जो मोलस्क (मोलस्क) का एक वर्ग है, जिसमें सीप
(ऑयस्टर), क्लैम (क्लैम), मसल्स (मसल्स), स्कैलप्स (स्कैलप्स), और कॉकल्स (कॉकल्स) शामिल हैं। उनके पास दो
कैल्शियम कार्बोनेट (कैल्शियम कार्बोनेट) के खोल (वाल्व - वाल्व) होते हैं, जो एक लिगामेंट द्वारा एक साथ
जुड़े होते हैं। बाइवाल्व्स ज्यादातर समुद्री (मरीन) या मीठे पानी (फ्रेश वॉटर) होते हैं, और वे फिल्टर फीडर
(फिल्टर फीडर) होते हैं, जो पानी में घुले सूक्ष्मजीवों, प्लवक (प्लैंकटन) और कार्बनिक कणों पर भोजन करते
हैं। उनके पास एक अच्छी तरह से विकसित सिर (हेड) नहीं होता है, और उनके पास रेडुला (रेडुला) (खुरचने / चबाने
के लिए जीभ जैसी संरचना) नहीं होती है। बाइवाल्व्स पारिस्थितिकी (जल निस्पंदन, फिल्ट्रेशन) और व्यावसायिक
रूप से (भोजन, सीप, मसल्स, क्लैम) महत्वपूर्ण हैं। मोती (पर्ल्स) कुछ बाइवाल्व्स (सीप, मसल्स) द्वारा
निर्मित होते हैं, जो एक परेशानी (इरिटेंट) (जैसे, रेत का कण) के चारों ओर मदर-ऑफ-पर्ल (नैक्रे) की परतें
(लेयर्स) जमा करते हैं।