आनुवांशिकता
- आनुवंशिकता (Heredity) लक्षणों का पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण (transfer of traits) है। यह माता-पिता से संतानों में जीन के माध्यम से होता है। डीएनए (DNA) इस प्रक्रिया का आणविक आधार है।
- ग्रेगर मेंडल (Gregor Mendel) को आनुवंशिकता के जनक (Father of Genetics) कहा जाता है। उन्होंने मटर (Pisum sativum) के पौधों पर प्रयोग किए। उन्होंने आनुवंशिकता के मूलभूत नियम प्रतिपादित किए।
- जीन (Gene) आनुवंशिकता की मूल इकाई (basic unit of heredity) है। यह डीएनए (DNA) का एक विशिष्ट खंड (segment) होता है। प्रत्येक जीन एक विशेष प्रोटीन के संश्लेषण का निर्देश देता है।
- डीएनए (DNA – Deoxyribonucleic Acid) आनुवंशिक सामग्री (genetic material) का आधार है। यह एक दोहरी कुंडल (double helix) संरचना वाला अणु है। वाटसन और क्रिक (Watson & Crick, 1953) ने इसकी संरचना की खोज की थी।
- प्रभावी लक्षण (Dominant trait) प्रमुख रूप से व्यक्त (expressed) होते हैं। यह हेटेरोजाइगस (heterozygous) अवस्था में भी दिखाई देता है। एक प्रभावी एलील (dominant allele) अप्रभावी एलील को मास्क (mask) कर देता है।
- अप्रभावी लक्षण (Recessive trait) प्रभावी जीन (dominant gene) की अनुपस्थिति में व्यक्त होते हैं। यह केवल होमोजाइगस अप्रभावी (homozygous recessive – tt) अवस्था में ही दिखाई देता है। यह हेटेरोजाइगस (Tt) अवस्था में छिपा (hidden) रहता है।
- एलील्स (Alleles) एक ही जीन (same gene) के भिन्न रूप (different forms) हैं। ये एक ही स्थान (locus) पर विभिन्न गुणसूत्रों (homologous chromosomes) पर स्थित होते हैं। उदाहरण – बैंगनी फूल (P) और सफेद फूल (p) ।
- होमोजाइगस (Homozygous) में समान एलील्स (same alleles) होते हैं। यह शुद्ध (pure) अवस्था होती है। उदाहरण – प्रभावी होमोजाइगस (TT – tall) या अप्रभावी होमोजाइगस (tt – dwarf) ।
- हेटेरोजाइगस (Heterozygous) में भिन्न एलील्स (different alleles) होते हैं। उदाहरण – Tt (लंबा तना वाला मटर का पौधा)। इसमें प्रभावी एलील (T) फेनोटाइप (phenotype) को व्यक्त करता है।
- जीनोटाइप (Genotype) आनुवंशिक संरचना (genetic constitution) को दर्शाता है। यह किसी जीव में उपस्थित एलील्स (alleles) का समूह होता है। यह लिखित रूप में TT, Tt या tt जैसा होता है। यह पर्यावरण (environment) से प्रभावित नहीं होता।
- फेनोटाइप (Phenotype) जीन (gene) की बाह्य अभिव्यक्ति (external expression) है। यह भौतिक लक्षणों (physical traits) का समूह है। यह जीनोटाइप (genotype) और पर्यावरण (environment) दोनों से प्रभावित होता है। उदाहरण – ऊँचाई, रंग, रक्त समूह (blood group) ।
- मेंडल (Mendel) ने मटर के पौधों (pea plants) पर प्रयोग किए। उन्होंने मटर के सात लक्षणों (seven traits) का अध्ययन किया। उन्होंने संकरण (hybridization) तकनीक का उपयोग किया। उनके कार्य को 1900 में पुनः खोजा गया।
- मेंडल का प्रथम नियम (Mendel's First Law) एकरूपता का नियम (Law of Uniformity) है। इसे "प्रभाविता का नियम" (Law of Dominance) भी कहते हैं। F1 पीढ़ी में केवल प्रभावी लक्षण ही दिखाई देता है।
- मेंडल का द्वितीय नियम (Mendel's Second Law) स्वतंत्र वर्गीकरण का नियम (Law of Independent Assortment) है। दो भिन्न लक्षणों के जीन (एलील) एक दूसरे से स्वतंत्र रूप से युग्मकों (gametes) में जाते हैं। यह तब लागू होता है जब जीन विभिन्न गुणसूत्रों पर हों।
- मेंडल ने सात लक्षणों (seven traits) का अध्ययन किया। ये थे – बीज का आकार (गोल/झुर्रीदार), बीज का रंग (पीला/हरा), फूल का रंग (बैंगनी/सफेद), फली का आकार, फली का रंग, फूल की स्थिति और तने की ऊँचाई।
- फेनोटाइप अनुपात (Phenotypic ratio) 3:1 प्रभावी-अप्रभावी (dominant-recessive) में होता है। यह एकल लक्षण (monohybrid cross) के F2 पीढ़ी में प्राप्त होता है। उदाहरण – 3 बैंगनी : 1 सफेद, 3 गोल : 1 झुर्रीदार।
- जीनोटाइप अनुपात (Genotypic ratio) 1:2:1 मेंडल के प्रयोगों में देखा गया। यह एकल लक्षण (monohybrid cross) के F2 पीढ़ी में प्राप्त होता है। यह अनुपात 1 (TT) : 2 (Tt) : 1 (tt) होता है।
- डीएनए में न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) की दोहरी कुंडल संरचना (double helix) होती है। यह वाटसन और क्रिक मॉडल (1953) है। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में फॉस्फेट, शुगर (डीऑक्सीराइबोज) और एक नाइट्रोजन आधार (A, T, G, C) होता है।
- डीएनए (DNA) में चार न्यूक्लियोटाइड्स (four nucleotides) होते हैं। ये हैं – एडिनिन (A), थाइमिन (T), ग्वानिन (G) और साइटोसिन (C)। A हमेशा T के साथ और G हमेशा C के साथ जुड़ता है। यह आधार युग्मन (base pairing) कहलाता है।
- डीएनए (DNA) में एडिनिन (A) थाइमिन (T) से जुड़ता है। यह दो हाइड्रोजन बंधों (hydrogen bonds) के माध्यम से होता है। ग्वानिन (G) और साइटोसिन (C) तीन हाइड्रोजन बंधों से जुड़ते हैं। यह आधार युग्मन (complementary base pairing) का नियम है।
- डीएनए (DNA) में साइटोसिन (C) ग्वानिन (G) से जुड़ता है। यह नियम चार्गाफ (Chargaff's rule) द्वारा दिया गया था। A = T और G = C होता है। यह डीएनए की दोहरी कुंडल संरचना को स्थिरता प्रदान करता है।
- डीएनए (DNA) में न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) की जोड़ी हाइड्रोजन बंध (hydrogen bond) से जुड़ती है। A-T में दो और G-C में तीन हाइड्रोजन बंध होते हैं। ये बंध कमजोर होते हैं, जिससे प्रतिकृति (replication) के समय डीएनए आसानी से खुल सकता है।
- आरएनए (RNA – Ribonucleic Acid) प्रोटीन संश्लेषण (protein synthesis) में मदद करता है। यह डीएनए की तरह दोहरी कुंडल नहीं, बल्कि एकल श्रृंखला (single-stranded) होता है। इसमें थाइमिन (T) के स्थान पर यूरासिल (U) पाया जाता है।
- आरएनए (RNA) में यूरासिल (Uracil – U) थाइमिन (Thymine – T) की जगह लेता है। इसलिए RNA में A (एडिनिन) U (यूरासिल) से जुड़ता है। RNA में प्रोटीन संश्लेषण के लिए तीन प्रकार होते हैं – mRNA, tRNA, rRNA।
- गुणसूत्र (Chromosomes) आनुवंशिक सामग्री (genetic material) के वाहक हैं। ये कोशिका के केंद्रक (nucleus) में स्थित होते हैं। प्रत्येक क्रोमोसोम (chromosome) में डीएनए (DNA) और प्रोटीन (protein) होते हैं।
- हाप्लॉयड (Haploid) कोशिकाओं में एक गुणसूत्र सेट (one set of chromosomes) होता है। इसे 'n' से दर्शाते हैं। उदाहरण – युग्मक (gametes – शुक्राणु और अंडाणु) में 23 गुणसूत्र होते हैं।
- डिप्लॉयड (Diploid) कोशिकाओं में दो गुणसूत्र सेट (two sets of chromosomes) होते हैं। इसे '2n' से दर्शाते हैं। उदाहरण – मानव दैहिक कोशिकाओं (somatic cells) में 46 (23 जोड़े) गुणसूत्र होते हैं।
- माइटोसिस (Mitosis) में कोशिका विभाजन (cell division) समान (identical) होता है। इसमें एक द्विगुणित (2n) मातृ कोशिका से दो समान द्विगुणित (2n) संतति कोशिकाएँ बनती हैं। यह वृद्धि (growth) और मरम्मत (repair) के लिए होता है।
- माइटोसिस (Mitosis) में गुणसूत्रों की संख्या समान (same number) रहती है। इसे समसूत्री विभाजन (equational division) भी कहते हैं। इसमें एक कोशिका विभाजित होकर दो समान कोशिकाएँ बनाती है। यह अलैंगिक प्रजनन (asexual reproduction) का आधार है।
- मायोसिस (Meiosis) युग्मक निर्माण (gamete formation) के लिए होता है। इसमें एक द्विगुणित (2n) मातृ कोशिका से चार अगुणित (n) युग्मक बनते हैं। यह यौन प्रजनन (sexual reproduction) के लिए आवश्यक है।
- मायोसिस (Meiosis) में गुणसूत्रों की संख्या आधी (half) होती है। इसे न्यूनकारी विभाजन (reductional division) कहते हैं। यह दो विभाजनों – मायोसिस I और मायोसिस II – में पूरा होता है।
- मायोसिस (Meiosis) में चार युग्मक (four gametes) बनते हैं। नर में चारों शुक्राणु (sperms) कार्यशील होते हैं। मादा में एक अंडाणु (ovum) और तीन ध्रुवीय पिंड (polar bodies) बनते हैं।
- क्रॉसिंग ओवर (Crossing Over) मायोसिस (meiosis) के प्रोफेज I (Prophase I) में होता है। यह समजात गुणसूत्रों (homologous chromosomes) के बीच आनुवंशिक सामग्री के विनिमय की प्रक्रिया है। यह आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) बढ़ाता है।
- मायोसिस (Meiosis) के प्रोफेज I (Prophase I) में टेट्राड (tetrad) बनता है। टेट्राड चार क्रोमैटिड्स (four chromatids) का समूह होता है। इसी अवस्था में क्रॉसिंग ओवर (crossing over) होता है, जिसमें जीन विनिमय होता है।
- मायोसिस (Meiosis) के प्रोफेज I (Prophase I) में सिनैप्सिस (Synapsis) होता है। सिनैप्सिस समजात गुणसूत्रों (homologous chromosomes) का युग्मन (pairing) है। यह क्रॉसिंग ओवर के लिए आवश्यक है। यह केवल मायोसिस में होता है, माइटोसिस में नहीं।
- मायोसिस (Meiosis) के प्रोफेज I (Prophase I) में क्रॉसिंग ओवर (crossing over) होता है। इससे जीन्स का पुनर्योजन (recombination) होता है। यह पुनर्योजन (recombination) जीन संयोजन बदलता है।
- मायोसिस (Meiosis) के एनाफेज I (Anaphase I) में गुणसूत्र (homologous chromosomes) अलग होते हैं। इस चरण में समजात गुणसूत्र विपरीत ध्रुवों (opposite poles) की ओर जाते हैं। इसमें सेंट्रोमियर (centromere) नहीं टूटता, इसलिए क्रोमैटिड अलग नहीं होते।
- मायोसिस (Meiosis) के एनाफेज II (Anaphase II) में क्रोमैटिड्स (chromatids) अलग होते हैं। यह माइटोसिस के एनाफेज की तरह होता है। सेंट्रोमियर विभाजित होते हैं और सिस्टर क्रोमैटिड्स अलग-अलग ध्रुवों की ओर जाते हैं। यह चार अगुणित कोशिकाओं का निर्माण करता है।
- मायोसिस (Meiosis) के मेटाफेज I (Metaphase I) में टेट्राड (tetrad) संरेखित होता है। टेट्राड (दो समजात गुणसूत्र) कोशिका के भूमध्य रेखा (equator) पर संरेखित होते हैं। यह संरेखण यादृच्छिक (random) होता है, जिससे विविधता बढ़ती है।
- माइटोसिस (Mitosis) में मेटाफेज (Metaphase) में गुणसूत्र मध्य में संरेखित होते हैं। प्रत्येक गुणसूत्र अपने सेंट्रोमियर (centromere) से धुरी तंतुओं (spindle fibres) से जुड़ता है। यह चरण गुणसूत्रों के समान वितरण के लिए महत्वपूर्ण है।
- माइटोसिस (Mitosis) में टेलोफेज (Telophase) में नाभिक (nucleus) का पुनर्जनन होता है। गुणसूत्र अपने कुंडलित रूप से खुल जाते हैं (decondense) और न्यूक्लियर झिल्ली (nuclear membrane) पुनः बनती है। इसके बाद साइटोकाइनेसिस (cytokinesis) होता है।
- माइटोसिस (Mitosis) में सेंट्रीओल्स (centrioles) धुरी तंतु (spindle fibres) बनाते हैं। ये केवल पशु कोशिकाओं (animal cells) में पाए जाते हैं। पादप कोशिकाओं में धुरी तंतु (spindle fibres) साइटोप्लाज्म से बनते हैं, सेंट्रीओल नहीं होते।
- माइटोसिस (Mitosis) में साइटोकाइनेसिस (Cytokinesis) कोशिका विभाजन पूर्ण करता है। यह वह अंतिम चरण है जहाँ कोशिका द्रव्य (cytoplasm) विभाजित होता है। पशु कोशिकाओं में क्लीवेज खांच (cleavage furrow) बनता है, जबकि पादप कोशिकाओं में कोशिका प्लेट (cell plate) बनती है।
- म्यूटेशन (Mutation) जीन (gene) या गुणसूत्र (chromosome) में परिवर्तन (change) लाता है। यह आनुवंशिक सामग्री (DNA) में अचानक होने वाला स्थायी परिवर्तन है। यह आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) का स्रोत (source) है। यह विकास (evolution) के लिए आवश्यक है।
- म्यूटेशन (Mutation) में पॉइंट म्यूटेशन (point mutation) शामिल है। इसमें डीएनए (DNA) के एकल न्यूक्लियोटाइड (single nucleotide) में परिवर्तन होता है। यह सिकल सेल एनीमिया (sickle cell anemia) का कारण है।
- म्यूटेशन (Mutation) में फ्रेमशिफ्ट म्यूटेशन (frameshift mutation) शामिल है। इसमें डीएनए (DNA) में न्यूक्लियोटाइड्स का इंसर्शन (insertion) या डिलीशन (deletion) होता है। यह रीडिंग फ्रेम (reading frame) को बदल देता है, जिससे पूरा प्रोटीन परिवर्तित हो जाता है।
- म्यूटेशन (Mutation) में जीन डिलीशन (gene deletion) शामिल हो सकता है। इसमें डीएनए (DNA) का एक भाग (segment) पूरी तरह हट जाता है। यह क्रि-डु-चैट सिंड्रोम (Cri-du-chat syndrome) का कारण है, जिसमें 5p गुणसूत्र का भाग हट जाता है।
- म्यूटेशन (Mutation) में जीन डुप्लिकेशन (gene duplication) शामिल हो सकता है। इसमें डीएनए (DNA) का एक भाग दोहरा (duplicate) हो जाता है। यह विकास (evolution) के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नए जीनों का निर्माण कर सकता है।
- म्यूटेशन (Mutation) में जीन इंसर्शन (gene insertion) शामिल हो सकता है। इसमें डीएनए (DNA) में अतिरिक्त न्यूक्लियोटाइड्स (extra nucleotides) जुड़ जाते हैं। यह फ्रेमशिफ्ट म्यूटेशन (frameshift mutation) का कारण बनता है।
- म्यूटेशन (Mutation) में क्रोमोसोमल विचलन (chromosomal aberration) शामिल हो सकता है। यह गुणसूत्रों की संरचना या संख्या में बड़े परिवर्तन होते हैं। उदाहरण – डाउन सिंड्रोम (Down syndrome – ट्राइसोमी 21) , टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome – XO) , क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter syndrome – XXY) ।
- म्यूटेशन (Mutation) में ट्रांसलोकेशन (translocation) शामिल हो सकता है। इसमें गुणसूत्र का एक भाग टूटकर दूसरे गुणसूत्र (non-homologous) से जुड़ जाता है। यह कुछ कैंसरों (cancers) और क्रोनिक माइलॉयड ल्यूकेमिया (CML – Philadelphia chromosome) का कारण है।
- म्यूटेशन (Mutation) में इनवर्शन (inversion) शामिल हो सकता है। इसमें गुणसूत्र का एक भाग टूटकर उल्टी दिशा (reverse direction) में पुनः जुड़ जाता है। यह जीन अभिव्यक्ति (gene expression) को प्रभावित कर सकता है।
- डीएनए प्रतिकृति (DNA Replication) सेमिकंजर्वेटिव (semiconservative) होती है। प्रत्येक नए डीएनए अणु में एक पुराना (मूल) और एक नया स्ट्रैंड (strand) होता है। मेसलसन और स्टाल (Meselson & Stahl, 1958) ने इसका प्रमाण दिया।
- डीएनए प्रतिकृति (DNA Replication) में डीएनए पॉलीमरेज (DNA Polymerase) कार्य करता है। यह एंजाइम नए न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) को जोड़ता है। यह केवल 5' से 3' दिशा (direction) में ही नई श्रृंखला बना सकता है।
- डीएनए प्रतिकृति (DNA Replication) में हेलिकेज (Helicase) एंजाइम कार्य करता है। यह एंजाइम डीएनए के दोहरे कुंडल (double helix) को खोलता है। यह हाइड्रोजन बंधों (hydrogen bonds) को तोड़ता है, जिससे प्रतिकृति कांटा (replication fork) बनता है।
- डीएनए प्रतिकृति (DNA Replication) में प्राइमर (primer) की आवश्यकता होती है। प्राइमर RNA का एक छोटा टुकड़ा (short fragment) होता है। इसे प्राइमेस (primase) एंजाइम बनाता है। डीएनए पॉलीमरेज (DNA Polymerase) प्राइमर के 3' सिरे पर न्यूक्लियोटाइड्स जोड़ता है।
- डीएनए प्रतिकृति (DNA Replication) में लैगिंग स्ट्रैंड (lagging strand) बनता है। यह स्ट्रैंड 3'→5' टेम्पलेट पर बनता है। यह छोटे-छोटे टुकड़ों (ओकाजाकी फ्रैगमेंट्स – Okazaki fragments) में बनता है, जो बाद में जुड़ जाते हैं।
- डीएनए प्रतिकृति (DNA Replication) में लीडिंग स्ट्रैंड (leading strand) बनता है। यह स्ट्रैंड 3'→5' टेम्पलेट पर 5'→3' दिशा में लगातार (continuously) बनता है। इसके लिए केवल एक प्राइमर (primer) की आवश्यकता होती है।
- जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) प्रोटीन (protein) बनाती है। यह दो चरणों में होती है – ट्रांसक्रिप्शन (transcription) और ट्रांसलेशन (translation)। डीएनए का निर्देश प्रोटीन में परिवर्तित होता है। यह "सेंट्रल डोग्मा" (Central Dogma) कहलाता है – DNA → RNA → Protein।
- जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) में ट्रांसक्रिप्शन (Transcription) शामिल है। यह डीएनए (DNA) से mRNA (messenger RNA) बनने की प्रक्रिया है। यह कोशिका के केंद्रक (nucleus) में होता है। mRNA जीन की प्रतिलिपि (copy) लेकर साइटोप्लाज्म (cytoplasm) में जाता है।
- जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) में एमआरएनए (mRNA) महत्वपूर्ण है। mRNA (messenger RNA) डीएनए से आनुवंशिक कोड (genetic code) को राइबोसोम (ribosome) तक ले जाता है। यह एक टेम्पलेट (template) का कार्य करता है। यह प्रोटीन के एमिनो एसिड क्रम (amino acid sequence) को निर्धारित करता है।
- जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) में ट्रांसलेशन (Translation) प्रोटीन संश्लेषण (protein synthesis) की प्रक्रिया है। यह राइबोसोम (ribosome) पर होता है। इसमें mRNA के कोडॉन (codon) के अनुसार अमीनो अम्ल (amino acids) जुड़ते हैं। यह प्रक्रिया साइटोप्लाज्म (cytoplasm) में होती है।
- जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) में राइबोसोम (Ribosome) महत्वपूर्ण हैं। राइबोसोम rRNA और प्रोटीन से मिलकर बने होते हैं। ये कोशिका के "प्रोटीन कारखाने" (protein factories) कहलाते हैं। ये ट्रांसलेशन (translation) की साइट होते हैं।
- जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) में प्रोमोटर क्षेत्र (promoter region) शामिल है। यह डीएनए का वह भाग है जहाँ ट्रांसक्रिप्शन (transcription) शुरू होता है। RNA पॉलीमरेज (RNA Polymerase) इसी क्षेत्र से जुड़ता है। यह जीन अभिव्यक्ति के नियमन (regulation) के लिए महत्वपूर्ण है।
- जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) में टीआरएनए (tRNA) महत्वपूर्ण है। tRNA (transfer RNA) अमीनो अम्लों (amino acids) को राइबोसोम तक लाता है। प्रत्येक tRNA एक विशिष्ट अमीनो अम्ल वहन करता है। इसमें एंटीकोडॉन (anticodon) होता है जो mRNA के कोडॉन (codon) से जुड़ता है।
- कोडॉन (Codon) तीन न्यूक्लियोटाइड्स (three nucleotides) का समूह है। यह mRNA पर स्थित होता है। प्रत्येक कोडॉन एक विशिष्ट अमीनो अम्ल (amino acid) को निर्दिष्ट करता है। उदाहरण – AUG कोडॉन मेथियोनिन (methionine – प्रारंभ कोडॉन) को कोड करता है।
- कोडॉन (Codon) एमिनो अम्ल (amino acid) को निर्दिष्ट (specify) करता है। आनुवंशिक कोड (genetic code) सार्वभौमिक (universal) है – अर्थात सभी जीवों में एक ही कोडॉन एक ही अमीनो अम्ल को कोड करता है। 64 कोडॉन में से 61 अमीनो अम्लों को कोड करते हैं, शेष 3 स्टॉप कोडॉन (stop codons) हैं।
- कोडॉन (Codon) में तीन न्यूक्लियोटाइड्स (three nucleotides) प्रोटीन बनाते हैं। यह ट्रिपलेट कोड (triplet code) कहलाता है। उदाहरण – AUG (मेथियोनिन), GGG (ग्लाइसिन), UUU (फेनिलएलानिन), AAA (लाइसिन), CCC (प्रोलिन), UAA, UAG, UGA (स्टॉप कोडॉन – प्रोटीन संश्लेषण रोकते हैं)।
- कोडॉन (Codon) में स्टार्ट कोडॉन (start codon) AUG है। यह प्रोटीन संश्लेषण (translation) के आरंभ का संकेत देता है। यह अमीनो अम्ल मेथियोनिन (methionine – Met) को कोड करता है। प्रोकैरियोट्स (prokaryotes) में यह फॉर्माइल मेथियोनिन (fMet) होता है।
- कोडॉन (Codon) में स्टॉप कोडॉन (stop codon) प्रोटीन संश्लेषण रोकता है। स्टॉप कोडॉन UAA, UAG और UGA हैं। ये किसी भी अमीनो अम्ल को कोड नहीं करते। इन्हें "नॉनसेंस कोडॉन" (nonsense codons) भी कहते हैं। ये ट्रांसलेशन को समाप्त (terminate) करते हैं।
- लिंग निर्धारण (Sex determination) में X और Y गुणसूत्र (X and Y chromosomes) महत्वपूर्ण हैं। मनुष्यों में XY लिंग निर्धारण प्रणाली (XY sex-determination system) है। मादा (female) में XX और नर (male) में XY गुणसूत्र होते हैं। माता (mother) से केवल X, पिता (father) से X या Y गुणसूत्र प्राप्त होता है।
- लिंग-संबंधी लक्षण (Sex-linked traits) X और Y गुणसूत्रों (X and Y chromosomes) पर होते हैं। अधिकांश लिंग-संबंधी रोग X-लिंक्ड (X-linked) होते हैं, क्योंकि X गुणसूत्र बड़ा होता है और इसमें अधिक जीन होते हैं। Y-लिंक्ड (Y-linked) रोग दुर्लभ (rare) होते हैं।
- लिंग-संबंधी रोग (Sex-linked diseases) जैसे हेमोफीलिया (Hemophilia) X-लिंक्ड (X-linked) हैं। हीमोफीलिया रक्तस्राव विकार (bleeding disorder) है। यह पुरुषों (men) में अधिक होता है क्योंकि उनमें केवल एक X गुणसूत्र होता है। महिलाएँ वाहक (carrier) हो सकती हैं।
- लिंग-संबंधी रोग (Sex-linked diseases) में डाल्टनिज्म (Colour blindness / Daltonism) X-लिंक्ड (X-linked) है। यह लाल-हरे रंग की अंधता (red-green colour blindness) है। यह पुरुषों (men) में अधिक प्रचलित (prevalent) है (लगभग 8% पुरुष) , जबकि महिलाओं में दुर्लभ (0.5%) है।
- लिंग-संबंधी रोग (Sex-linked diseases) में Y-लिंक्ड रोग (Y-linked diseases) दुर्लभ (rare) हैं। ये केवल पुरुषों (males) में ही होते हैं। उदाहरण – Y-लिंक्ड अवृषणता (Y-linked infertility) , हाइपरट्रिकोसिस ऑरिकुलिस (hypertrichosis of ears) ।
- पॉलीजेनिक लक्षण (Polygenic traits) कई जीनों (multiple genes) द्वारा नियंत्रित होते हैं। ये निरंतर परिवर्तनशीलता (continuous variation) दिखाते हैं। इनका वितरण सामान्य वक्र (bell curve / normal distribution) जैसा होता है। ऊंचाई (height) , वजन (weight) , त्वचा का रंग (skin colour) , बुद्धि (intelligence) पॉलीजेनिक लक्षणों के उदाहरण हैं।
- जीन पूल (Gene Pool) आबादी (population) की आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) है। यह किसी आबादी में सभी जीनों और एलील्स (alleles) का समूह होता है। प्राकृतिक चयन (natural selection) जीन पूल पर प्रभाव डालता है। प्राकृतिक चयन (natural selection) कुछ एलील्स की आवृत्ति (frequency) को बढ़ा सकता है।
- पुनर्योजन (Recombination) जीन संयोजन (gene combination) बदलता है। यह मुख्यतः क्रॉसिंग ओवर (crossing over) और स्वतंत्र वर्गीकरण (independent assortment) से होता है। पुनर्योजन (Recombination) में जीन विनिमय (gene exchange) होता है। यह नए जीनोटाइप (new genotypes) बनाता है।
- पुनर्योजन (Recombination) जीन विनिमय (gene exchange) की प्रक्रिया है। यह मायोसिस (meiosis) के प्रोफेज I (Prophase I) में क्रॉसिंग ओवर (crossing over) द्वारा होता है। यह आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) बढ़ाता है और विकास (evolution) में सहायक होता है।
- डीएनए (DNA) में हिस्टोन प्रोटीन (histone proteins) क्रोमैटिन (chromatin) बनाते हैं। डीएनए हिस्टोन प्रोटीन के चारों ओर कुंडलित (wound) होता है। यह डीएनए को सघन रूप (condensed form) में पैक (pack) करता है। यह पैकिंग गुणसूत्र (chromosomes) का निर्माण करती है।
- जीनोटाइप (Genotype) में होमोजाइगस प्रभावी (homozygous dominant – TT) होता है। इसमें दोनों एलील्स प्रभावी (dominant) होते हैं। यह शुद्ध (pure) अवस्था है। उदाहरण – लंबा तना वाला शुद्ध मटर (pure tall pea plant) ।
- जीनोटाइप (Genotype) में अप्रभावी लक्षण (recessive trait) छिपे (hidden) रहते हैं। ये हेटेरोजाइगस (heterozygous – Tt) अवस्था में व्यक्त नहीं होते। ये केवल होमोजाइगस अप्रभावी (homozygous recessive – tt) अवस्था में ही प्रकट होते हैं। उदाहरण – बौना तना (dwarf stem) केवल tt में दिखता है।
- डीएनए (DNA) में न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) की संरचना फॉस्फेट समूह (phosphate group) रखती है। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में फॉस्फेट, एक शुगर (डीऑक्सीराइबोज) और एक नाइट्रोजन आधार (A, T, G, C) होता है। फॉस्फेट और शुगर डीएनए की रीढ़ (backbone) बनाते हैं।
- डीएनए (DNA) में न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) की संरचना डीऑक्सीराइबोज (deoxyribose sugar) रखती है। डीऑक्सीराइबोज एक पाँच-कार्बन शुगर (five-carbon sugar) है। यह RNA में पाई जाने वाली राइबोज (ribose) से भिन्न होती है (इसमें एक ऑक्सीजन कम होती है)।
- डीएनए (DNA) में न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) की जोड़ी डबल हेलिक्स (double helix) बनाती है। यह दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं (polynucleotide chains) का एक साथ कुंडलित (coiled) होना है। यह संरचना वाटसन और क्रिक (Watson & Crick) मॉडल का आधार है।
- डीएनए (DNA) में न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) का क्रम (sequence) महत्वपूर्ण है। यह क्रम (sequence) आनुवंशिक जानकारी (genetic information) को संग्रहित करता है। यह जीन (gene) का वास्तविक स्वरूप है। डीएनए अनुक्रमण (DNA sequencing) इसी क्रम को पढ़ने की तकनीक है।
- फेनोटाइप (Phenotype) में पर्यावरण (environment) का प्रभाव (influence) महत्वपूर्ण है। समान जीनोटाइप (genotype) वाले जीवों में पर्यावरण के कारण भिन्न फेनोटाइप हो सकता है। उदाहरण – हाइड्रेंजिया (Hydrangea) फूल का रंग मिट्टी के pH पर निर्भर करता है।
- डीएनए (DNA) में टेम्पलेट स्ट्रैंड (template strand) ट्रांसक्रिप्शन (transcription) में उपयोग होता है। यह वह स्ट्रैंड है जिसकी प्रतिलिपि (copy) बनाकर mRNA बनाया जाता है। दूसरे स्ट्रैंड को कोडिंग स्ट्रैंड (coding strand) कहते हैं।
- मायोसिस (Meiosis) में टेलोफेज I (Telophase I) में कोशिका विभाजन (cell division) शुरू होता है। इस चरण में गुणसूत्र (chromosomes) ध्रुवों (poles) पर पहुँच जाते हैं। न्यूक्लियर झिल्ली (nuclear membrane) पुनः बनने लगती है। इसके बाद साइटोकाइनेसिस (cytokinesis) होकर दो अगुणित (haploid) कोशिकाएँ बनती हैं।
- डीएनए (DNA) में न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) की जोड़ी आधार युग्मन (base pairing) से जुड़ती है। A = T (दो हाइड्रोजन बंध) और G ≡ C (तीन हाइड्रोजन बंध) । यह नियम पूरकता (complementarity) का आधार है। यह प्रतिकृति (replication) और ट्रांसक्रिप्शन (transcription) के लिए आवश्यक है।
- उत्परिवर्तन (Mutation) में जीन इंसर्शन (gene insertion) शामिल हो सकता है। इसमें एक या एक से अधिक न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) डीएनए (DNA) में जुड़ जाते हैं। यह फ्रेमशिफ्ट म्यूटेशन (frameshift mutation) का कारण बनता है। इससे प्रोटीन (protein) का संश्लेषण बाधित हो सकता है।
- जीन पूल (Gene Pool) में म्यूटेशन (mutation) नई विविधता (new diversity) लाता है। यह एलील्स (alleles) में नए बदलाव (variations) उत्पन्न करता है। यह आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) का मूल स्रोत (ultimate source) है। यह विकास (evolution) के लिए आवश्यक कच्चा माल (raw material) है।