जैव उर्वरक
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) सूक्ष्मजीवों (microorganisms) से बने पदार्थ हैं जो मृदा की उर्वरता (soil fertility) बढ़ाते हैं। ये जीवित कोशिकाएँ (living cells) होती हैं जो बीज या मिट्टी में डाली जाती हैं। ये रासायनिक उर्वरकों का पर्यावरण अनुकूल विकल्प हैं।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) रासायनिक उर्वरकों (chemical fertilizers) के उपयोग को कम करते हैं। ये मृदा में पोषक तत्वों की उपलब्धता (nutrient availability) बढ़ाते हैं। ये मृदा की जैविक गतिविधि (biological activity) को प्रोत्साहित करते हैं। ये पर्यावरण प्रदूषण (environmental pollution) को कम करते हैं।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) पर्यावरण अनुकूल (environmentally friendly) होते हैं। ये मृदा में विषाक्त पदार्थ (toxic substances) नहीं छोड़ते। ये रासायनिक उर्वरकों का पर्यावरणीय विकल्प (environmental alternative) हैं। ये टिकाऊ कृषि (sustainable agriculture) के लिए आवश्यक हैं।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) मृदा की संरचना (soil structure) में सुधार करते हैं। ये मृदा में जैविक पदार्थों (organic matter) की मात्रा बढ़ाते हैं। ये मृदा की जल धारण क्षमता (water holding capacity) को बढ़ाते हैं। ये मृदा के pH को संतुलित (balance) करते हैं।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) मृदा में सूक्ष्मजीवों की गतिविधि (microbial activity) बढ़ाते हैं। ये सूक्ष्मजीवों की संख्या और विविधता (diversity) को बढ़ावा देते हैं। ये मृदा में पोषक तत्वों के चक्रण (nutrient cycling) को तेज करते हैं। ये मृदा को स्वस्थ (healthy) बनाते हैं।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) मृदा में ह्यूमस (humus) की मात्रा बढ़ाते हैं। ह्यूमस मृदा का कार्बनिक घटक (organic component) है। यह मृदा की जल धारण (water retention) और पोषक धारण (nutrient retention) क्षमता बढ़ाता है। यह मृदा की उर्वरता का मापदंड है।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) फसल उत्पादकता (crop productivity) में सुधार करते हैं। ये पौधों को आवश्यक पोषक तत्व (essential nutrients) प्रदान करते हैं। ये पौधों की वृद्धि (plant growth) को प्रोत्साहित करते हैं। ये फसल की उपज (crop yield) बढ़ाते हैं।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) मृदा की उर्वरता को दीर्घकाल तक बनाए रखते हैं। ये रासायनिक उर्वरकों की तरह मृदा को क्षीण (degrade) नहीं करते। ये मृदा के प्राकृतिक संतुलन (natural balance) को बनाए रखते हैं। ये टिकाऊ कृषि (sustainable agriculture) के लिए आवश्यक हैं।
- एजोला (Azolla) एक जलीय फर्न (aquatic fern) है जो जैव उर्वरक (biofertilizer) के रूप में प्रयोग होता है। यह धान के खेतों (paddy fields) में उगाया जाता है। यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन (atmospheric nitrogen) को स्थिर करता है। यह मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाता है।
- एजोला (Azolla) धान की फसल (paddy crop) में नाइट्रोजन की पूर्ति करता है। यह धान के खेतों में हरी खाद (green manure) के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह नाइट्रोजन उर्वरक (nitrogen fertilizer) की आवश्यकता को कम करता है। यह धान की फसल की उपज (paddy yield) बढ़ाता है।
- एजोला (Azolla) पशुओं के लिए अनुपूरक भोजन (supplementary feed) के रूप में उपयोगी है। यह प्रोटीन (protein), विटामिन (vitamins) और खनिज (minerals) से भरपूर होता है। यह मुर्गी पालन (poultry) और मछली पालन (aquaculture) में भी प्रयोग किया जाता है। यह पशुओं के दूध उत्पादन (milk production) को बढ़ाता है।
- एजोला (Azolla) पशु चारा (animal fodder) के रूप में भी प्रयोग होता है। यह सस्ता और पौष्टिक (nutritious) चारा है। यह गायों, भैंसों, बकरियों और सूअरों को खिलाया जाता है। यह पशुओं के स्वास्थ्य (animal health) में सुधार करता है।
- एजोला (Azolla) जल शोधन (water purification) में भी उपयोगी है। यह जल से अतिरिक्त पोषक तत्वों (excess nutrients) को अवशोषित करता है। यह जल में यूट्रोफिकेशन (eutrophication) को रोकता है। यह अपशिष्ट जल उपचार (wastewater treatment) में प्रयोग किया जाता है।
- एजोला (Azolla) का उपयोग मानव भोजन (human food) के रूप में भी हो सकता है। दक्षिण-पूर्व एशिया (Southeast Asia) में इसे सब्जी (vegetable) के रूप में खाया जाता है। यह प्रोटीन (protein) और आयरन (iron) का अच्छा स्रोत है। यह सलाद (salad) और सूप (soup) में प्रयोग किया जाता है।
- एजोला पिनाटा (Azolla pinnata) एक जलीय फर्न (aquatic fern) है। यह भारत में पाया जाने वाला सामान्य प्रकार (common species) है। यह धान के खेतों में प्राकृतिक रूप से उगता है। इसका उपयोग जैव उर्वरक (biofertilizer) के रूप में किया जाता है।
- एजोला (Azolla) की पत्तियों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु (nitrogen-fixing bacteria) होते हैं। ये जीवाणु एजोला की पत्तियों की गुहाओं (leaf cavities) में रहते हैं। यह सहजीवी संबंध (symbiotic relationship) है। यह एजोला को नाइट्रोजन प्रदान करता है।
- एजोला (Azolla) के सहजीवी (symbiont) में एनाबीना एजोली (Anabaena azollae) नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है। यह एक नीला-हरा शैवाल (cyanobacterium) है। यह एजोला की पत्तियों में रहता है। यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन (N₂) को अमोनिया (NH₃) में बदलता है।
- एजोला की पत्तियों में एनाबीना एजोली (Anabaena azollae) जीवाणु रहते हैं। यह एक सहजीवी संबंध (symbiotic association) है। एनाबीना एजोला को नाइट्रोजन प्रदान करता है। एजोला एनाबीना को आश्रय (shelter) और कार्बन (carbon) प्रदान करता है।
- नील हरित शैवाल (Blue-Green Algae / Cyanobacteria) प्रोकैरियोटिक सूक्ष्मजीव (prokaryotic microorganisms) हैं। ये धान की फसल (paddy crop) में नाइट्रोजन की आपूर्ति (nitrogen supply) करते हैं। ये वायुमंडलीय नाइट्रोजन (atmospheric nitrogen) को स्थिर करते हैं। ये धान के खेतों में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं।
- नील हरित शैवाल (Cyanobacteria) जैव उर्वरक (biofertilizer) के रूप में उपयोगी हैं। ये धान के खेतों में हरी खाद (green manure) के रूप में कार्य करते हैं। ये मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा (nitrogen content) बढ़ाते हैं। ये धान की उपज (paddy yield) को बढ़ाते हैं।
- नील हरित शैवाल (Cyanobacteria) धान के खेतों में उर्वरता (fertility) बढ़ाता है। ये मृदा में कार्बनिक पदार्थ (organic matter) बढ़ाते हैं। ये मृदा की जैविक गतिविधि (biological activity) को प्रोत्साहित करते हैं। ये धान की फसल के लिए प्रभावी जैव उर्वरक हैं।
- नील हरित शैवाल (Cyanobacteria) सायनोबैक्टीरिया (cyanobacteria) का एक प्रकार है। ये ऑक्सीजनिक प्रकाश संश्लेषण (oxygenic photosynthesis) करते हैं। ये वायुमंडलीय नाइट्रोजन (N₂) को अमोनिया (NH₃) में बदलते हैं। इनमें हेटेरोसिस्ट (heterocyst) नामक विशेष कोशिकाएँ होती हैं।
- नील हरित शैवाल (Cyanobacteria) मृदा में कार्बनिक पदार्थ (organic matter) जोड़ता है। ये प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) द्वारा कार्बनिक पदार्थ बनाते हैं। ये मृदा में ह्यूमस (humus) की मात्रा बढ़ाते हैं। ये मृदा की संरचना (soil structure) में सुधार करते हैं।
- नील हरित शैवाल (Cyanobacteria) धान के खेतों में जैव उर्वरक (biofertilizer) हैं। ये धान की फसल में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) करते हैं। ये रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरकों (chemical nitrogen fertilizers) की आवश्यकता को कम करते हैं। ये टिकाऊ धान कृषि (sustainable paddy cultivation) के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- नील हरित शैवाल (Cyanobacteria) धान की फसल में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) करता है। ये धान के खेतों के पानी (floodwater) में उगते हैं। ये वायुमंडलीय नाइट्रोजन (N₂) को पौधों के लिए उपलब्ध रूप (available form) में बदलते हैं। ये धान की उपज (yield) को बढ़ाते हैं।
- राइजोबियम (Rhizobium) दलहनी फसलों (leguminous crops) में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) करता है। यह फलीदार पौधों (legumes) की जड़ों में ग्रंथियां (nodules) बनाता है। यह एक सहजीवी जीवाणु (symbiotic bacterium) है। यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन (N₂) को अमोनिया (NH₃) में बदलता है।
- राइजोबियम (Rhizobium) दलहनी फसलों (leguminous crops) की जड़ों के साथ सहजीवी संबंध (symbiotic relationship) बनाता है। यह जड़ों की कोशिकाओं (root cells) में प्रवेश करता है। यह जड़ों पर ग्रंथियाँ (nodules) बनाता है। यह पौधे को नाइट्रोजन (nitrogen) प्रदान करता है।
- राइजोबियम (Rhizobium) नाइट्रोजन (nitrogen) को अमोनिया (ammonia) में बदलता है। यह नाइट्रोजिनेज एंजाइम (nitrogenase enzyme) का उपयोग करता है। यह प्रक्रिया ऊर्जा-गहन (energy-intensive) है। अमोनिया (NH₃) पौधों द्वारा उपयोग किया जाता है।
- राइजोबियम जैपोनिकम (Rhizobium japonicum) सोयाबीन (soybean – Glycine max) में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है। सोयाबीन एक महत्वपूर्ण तिलहन (oilseed) और दलहनी (legume) फसल है। यह जीवाणु सोयाबीन की जड़ों पर ग्रंथियाँ (nodules) बनाता है। यह सोयाबीन की उपज (yield) बढ़ाता है।
- राइजोबियम लैग्यूमिनोसैरम (Rhizobium leguminosarum) मटर (pea – Pisum sativum) में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है। यह मटर की जड़ों पर ग्रंथियाँ (nodules) बनाता है। यह मटर की वृद्धि (growth) और उपज (yield) को बढ़ाता है। यह एक विशिष्ट प्रजाति (specific species) है।
- राइजोबियम मेलिलोति (Rhizobium meliloti) लुसर्न (lucerne / alfalfa – Medicago sativa) में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है। लुसर्न एक महत्वपूर्ण चारा फसल (fodder crop) है। यह जीवाणु लुसर्न की जड़ों पर ग्रंथियाँ (nodules) बनाता है। यह लुसर्न की पोषक गुणवत्ता (nutritional quality) बढ़ाता है।
- राइजोबियम ट्राइफोली (Rhizobium trifolii) तिनपतिया घास (clover – Trifolium) में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है। तिनपतिया घास एक चारा फसल (fodder crop) है। यह जीवाणु तिनपतिया घास की जड़ों पर ग्रंथियाँ (nodules) बनाता है। यह चारे की गुणवत्ता (fodder quality) में सुधार करता है।
- राइजोबियम (Rhizobium) फसलों की वृद्धि (crop growth) को प्रोत्साहित करता है। यह पौधों को नाइट्रोजन (nitrogen) की आपूर्ति करता है। यह पौधों की जड़ों (roots) और तनों (stems) की वृद्धि बढ़ाता है। यह फसल की उपज (crop yield) और गुणवत्ता (quality) में सुधार करता है।
- एजोटोबैक्टर (Azotobacter) असहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण (asymbiotic nitrogen fixation) करता है। यह मृदा में स्वतंत्र रूप से (free-living) नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है। यह गैर-दलहनी फसलों (non-leguminous crops) में नाइट्रोजन आपूर्ति करता है। यह एरोबिक जीवाणु (aerobic bacterium) है।
- एजोटोबैक्टर (Azotobacter) मृदा में स्वतंत्र रूप से (free-living) नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है। यह किसी पौधे के साथ सहजीवी संबंध (symbiotic relationship) नहीं बनाता। यह मृदा में उपलब्ध कार्बनिक पदार्थों (organic matter) पर निर्भर करता है। यह गेहूं (wheat), मक्का (maize), ज्वार (sorghum) आदि के लिए उपयोगी है।
- एजोस्पिरिलम (Azospirillum) मृदा में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) करता है। यह गैर-दलहनी फसलों (non-leguminous crops) में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है। यह घास (grasses) और अनाज (cereals) की जड़ों (roots) के साथ संबंध बनाता है। यह मक्का (maize), गेहूं (wheat), ज्वार (sorghum), बाजरा (millet) के लिए उपयोगी है।
- एजोस्पिरिलम (Azospirillum) गैर-दलहनी फसलों (non-leguminous crops) में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है। यह जड़ों के आसपास के क्षेत्र (rhizosphere) में रहता है। यह पौधों को नाइट्रोजन प्रदान करता है। यह फसल की उपज (yield) को बढ़ाता है।
- नोस्टॉक (Nostoc) नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) करने वाला जीव है। यह एक नीला-हरा शैवाल (cyanobacterium) है। यह मृदा में स्वतंत्र रूप से (free-living) नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है। यह धान के खेतों (paddy fields) में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।
- एनाबीना (Anabaena) नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) में सहायक है। यह एक नीला-हरा शैवाल (cyanobacterium) है। यह एजोला (Azolla) के साथ सहजीवी संबंध (symbiotic relationship) बनाता है। यह मृदा में स्वतंत्र रूप से भी नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर सकता है।
- फॉस्फोबैक्टीरिया (Phosphobacteria) फॉस्फोरस (phosphorus) को घुलनशील (soluble) बनाता है। यह मृदा में अघुलनशील फॉस्फेट (insoluble phosphate) को घुलनशील रूप (soluble form) में बदलता है। यह पौधों द्वारा फॉस्फोरस अवशोषण (phosphorus uptake) को बढ़ाता है। यह फसल की वृद्धि (crop growth) को प्रोत्साहित करता है।
- स्यूडोमोनास (Pseudomonas) फॉस्फोरस घुलाने वाला जीवाणु (phosphorus solubilizing bacterium) है। यह मृदा में अकार्बनिक फॉस्फेट (inorganic phosphate) को घुलनशील बनाता है। यह पौधों को फॉस्फोरस उपलब्ध कराता है। यह पौधों की वृद्धि (plant growth) को बढ़ावा देता है।
- माइकोराइजा (Mycorrhiza) नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) नहीं करता। यह फॉस्फोरस अवशोषण (phosphorus absorption) में मदद करता है। यह कवक (fungus) और पौधों की जड़ों (plant roots) के बीच सहजीवी संबंध (symbiotic relationship) है। यह पौधों को फॉस्फोरस (P) और अन्य खनिज (minerals) प्रदान करता है।
- माइकोराइजा (Mycorrhiza) फॉस्फोरस अवशोषण (phosphorus uptake) को बढ़ाता है। यह जड़ों के सतह क्षेत्र (surface area) को बढ़ाता है। यह पौधों को पानी (water) और सूक्ष्म पोषक तत्वों (micronutrients) का अवशोषण बढ़ाता है। यह पौधों को सूखा (drought) और रोगों (diseases) से बचाता है।
- बायोचार (Biochar) मृदा की जलधारण क्षमता (water holding capacity) बढ़ाता है। यह जैविक पदार्थों (organic matter) के पायरोलिसिस (pyrolysis – ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में गर्म करना) से बनता है। यह मृदा में कार्बन (carbon) को स्थिर करता है। यह मृदा की उर्वरता (soil fertility) को बढ़ाता है।
- बायोचार (Biochar) मृदा की उर्वरता (soil fertility) को बढ़ाता है। यह मृदा में पोषक तत्वों (nutrients) को बनाए रखता है। यह मृदा की जल धारण क्षमता (water holding capacity) में सुधार करता है। यह फसल उत्पादकता (crop productivity) को बढ़ाता है।
- बायोचार (Biochar) मृदा में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (greenhouse gas emissions) को कम करता है। यह मीथेन (CH₄) और नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) के उत्सर्जन को कम करता है। यह कार्बन पृथक्करण (carbon sequestration) में सहायक है। यह जलवायु परिवर्तन (climate change) शमन में उपयोगी है।
- बायोचार (Biochar) नाइट्रोजन यौगिकीकरण (nitrogen immobilization) को प्रोत्साहित करता है। यह मृदा में नाइट्रोजन (nitrogen) को बनाए रखता है। यह नाइट्रोजन के रिसाव (nitrogen leaching) को कम करता है। यह नाइट्रोजन उपयोग दक्षता (nitrogen use efficiency – NUE) को बढ़ाता है।
- वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost) जैविक खाद (organic manure) का एक रूप है। यह केंचुओं (earthworms) द्वारा जैविक अपशिष्ट (organic waste) के अपघटन (decomposition) से बनता है। यह पोषक तत्वों (nutrients) से भरपूर होता है। यह मृदा की संरचना (soil structure) और उर्वरता (fertility) में सुधार करता है।
- बायोगैस (Biogas) अपशिष्ट (waste) जैव उर्वरक (biofertilizer) के रूप में उपयोगी है। बायोगैस संयंत्रों (biogas plants) से निकलने वाला अवशेष (slurry) उत्तम जैव उर्वरक है। यह पोषक तत्वों (nitrogen, phosphorus, potassium) से भरपूर होता है। यह मृदा की उर्वरता (soil fertility) बढ़ाता है।
- अल्फाल्फा (Alfalfa – Medicago sativa) जैव उर्वरक (biofertilizer) नहीं, बल्कि एक फलीदार पौधा (leguminous plant) है। यह स्वयं नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) करता है। इसका उपयोग हरी खाद (green manure) के रूप में किया जा सकता है। यह मृदा की उर्वरता (soil fertility) बढ़ाने में सहायक है।
- नाइट्रोजन (Nitrogen) पौधों द्वारा नाइट्रेट (nitrate – NO₃⁻) के रूप में अवशोषित होता है। कुछ पौधे अमोनियम (ammonium – NH₄⁺) को भी अवशोषित कर सकते हैं। नाइट्रेट पानी में घुलनशील (water-soluble) होता है। यह पौधों की जड़ों (roots) द्वारा आसानी से अवशोषित किया जाता है।
- नाइट्रोजन उपयोग क्षमता (Nitrogen Use Efficiency – NUE) धीरे छोड़ने वाले उर्वरकों (slow-release fertilizers) से बढ़ती है। ये उर्वरक नाइट्रोजन को धीरे-धीरे (gradually) पौधों को उपलब्ध कराते हैं। यह नाइट्रोजन के रिसाव (nitrogen leaching) और वाष्पीकरण (volatilization) को कम करता है। यह पर्यावरण प्रदूषण (environmental pollution) को भी कम करता है।
- धान की फसल (Paddy crop) में नाइट्रोजन (nitrogen) की कमी यूरिया (urea) से पूर्ति होती है। यूरिया (CH₄N₂O) नाइट्रोजन का सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला रासायनिक उर्वरक (chemical fertilizer) है। इसमें 46% नाइट्रोजन होती है। यह सस्ता और प्रभावी (cost-effective and efficient) है।
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) मृदा उर्वरता (soil fertility) के लिए महत्वपूर्ण है। यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन (N₂) को पौधों द्वारा उपयोग योग्य रूप (NH₃) में बदलता है। यह प्राकृतिक रूप से जीवाणुओं (bacteria) और शैवालों (algae) द्वारा होता है। यह मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा (nitrogen content) बनाए रखता है।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (greenhouse gas emissions) को कम करते हैं। वे रासायनिक उर्वरकों (chemical fertilizers) के निर्माण और उपयोग से होने वाले उत्सर्जन को कम करते हैं। वे मृदा में कार्बन (carbon) को स्थिर (sequester) करते हैं। वे जलवायु परिवर्तन (climate change) शमन में सहायक हैं।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) मृदा में सूक्ष्म पोषक तत्व (micronutrients) प्रदान करते हैं। ये आयरन (Fe), जिंक (Zn), कॉपर (Cu), मैंगनीज (Mn) आदि को घुलनशील बनाते हैं। ये पौधों द्वारा सूक्ष्म पोषक तत्वों के अवशोषण (uptake) को बढ़ाते हैं। ये पौधों के स्वास्थ्य (plant health) में सुधार करते हैं।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) मृदा में पोषक तत्वों की हानि (nutrient loss) को कम करते हैं। वे पोषक तत्वों को मृदा में बनाए रखते हैं। वे रासायनिक उर्वरकों की तुलना में कम रिसाव (leaching) और वाष्पीकरण (volatilization) होने देते हैं। वे पोषक तत्वों की उपलब्धता (nutrient availability) को स्थिर करते हैं।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) मृदा में पोषक तत्वों का संतुलन (nutrient balance) बनाए रखते हैं। वे आवश्यक पोषक तत्वों (N, P, K, S, Zn, Fe, etc.) की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। वे पोषक तत्वों की अधिकता (excess) और कमी (deficiency) दोनों को रोकते हैं। वे मृदा को स्वस्थ (healthy) बनाए रखते हैं।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) मृदा में पोषक तत्वों का चक्रण (nutrient cycling) बढ़ाते हैं। वे कार्बनिक पदार्थों (organic matter) के अपघटन (decomposition) को तेज करते हैं। वे नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), सल्फर (S) आदि के चक्रण में सहायक होते हैं। वे मृदा को अधिक उत्पादक (productive) बनाते हैं।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) मृदा की जैविक कार्बन सामग्री (organic carbon content) बढ़ाते हैं। वे मृदा में कार्बनिक पदार्थ (organic matter) की मात्रा बढ़ाते हैं। मृदा कार्बनिक कार्बन (soil organic carbon – SOC) मृदा उर्वरता (soil fertility) का एक प्रमुख संकेतक (indicator) है। यह मृदा की संरचना (structure) और पोषक धारण (nutrient retention) में सुधार करता है।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) मृदा की सूक्ष्मजीव विविधता (microbial diversity) बढ़ाते हैं। वे लाभकारी सूक्ष्मजीवों (beneficial microorganisms) की वृद्धि को प्रोत्साहित करते हैं। वे मृदा में जीवाणुओं (bacteria), कवक (fungi), एक्टिनोमाइसेट्स (actinomycetes) आदि की संख्या और विविधता बढ़ाते हैं। यह मृदा स्वास्थ्य (soil health) के लिए आवश्यक है।
- जैव उर्वरक (Biofertilizers) मृदा में जैविक पदार्थों (organic matter) का विघटन (decomposition) तेज करते हैं। वे सेल्यूलेज (cellulase), लिग्निनेज (ligninase) आदि एंजाइम (enzymes) उत्पन्न करते हैं। ये एंजाइम जटिल कार्बनिक यौगिकों (complex organic compounds) को सरल यौगिकों (simple compounds) में तोड़ते हैं। यह पोषक तत्वों (nutrients) को पौधों के लिए उपलब्ध कराता है।