कोशिका
- कोशिका (Cell) जीवन की मूल संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई (fundamental structural and functional unit) है। सभी जीव कोशिकाओं से मिलकर बने हैं। एककोशिकीय (unicellular) जीव जैसे अमीबा (Amoeba) एक ही कोशिका से कार्य करते हैं। बहुकोशिकीय (multicellular) जीव लाखों कोशिकाओं से बने होते हैं।
- रॉबर्ट हूक (Robert Hooke, 1665) ने कोशिका (cell) की खोज की थी। उन्होंने कॉर्क (cork) के पतले टुकड़े (thin slice) को सूक्ष्मदर्शी (microscope) से देखा। उन्होंने छत्ते (honeycomb) जैसी छोटी-छोटी कोठरियाँ (chambers) देखीं, जिन्हें उन्होंने "सेल" (cell) नाम दिया।
- कोशिका सिद्धांत (Cell Theory) श्लाइडन (Matthias Schleiden) और श्वान (Theodor Schwann) ने दिया (1839)। इस सिद्धांत के अनुसार – (1) सभी जीव कोशिकाओं से मिलकर बने हैं, (2) कोशिका जीवन की मूल इकाई है। बाद में रुडोल्फ विरचो (Rudolf Virchow, 1855) ने "सभी कोशिकाएँ पूर्व-मौजूदा कोशिकाओं से बनती हैं" जोड़ा।
- प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं (Prokaryotic cells) में नाभिकीय झिल्ली (nuclear membrane) नहीं होती। उदाहरण – जीवाणु (bacteria) और आर्किया (archaea)। इनका आनुवंशिक पदार्थ (DNA) न्यूक्लियॉइड (nucleoid) नामक क्षेत्र में होता है। इनमें झिल्ली-बद्ध अंगक (membrane-bound organelles) नहीं होते। ये सरल और छोटी (0.5-5 μm) कोशिकाएँ होती हैं।
- यूकैरियोटिक कोशिकाओं (Eukaryotic cells) में नाभिकीय झिल्ली (nuclear membrane) होती है। उदाहरण – पौधे, जंतु, कवक और प्रोटिस्टा। इनमें सुव्यवस्थित नाभिक (well-defined nucleus) और झिल्ली-बद्ध अंगक (membrane-bound organelles – माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी बॉडी, ER आदि) होते हैं। ये बड़ी (10-100 μm) और जटिल (complex) कोशिकाएँ होती हैं।
- प्रोकैरियोट्स (Prokaryotes) में डीएनए (DNA) गोलाकार (circular) होता है। यह एक ही गुणसूत्र (single chromosome) के रूप में होता है। इसके अतिरिक्त छोटे गोलाकार डीएनए अणु (plasmids) भी हो सकते हैं। प्लाज्मिड (plasmids) अक्सर एंटीबायोटिक प्रतिरोध (antibiotic resistance) जीन्स ले जाते हैं।
- यूकैरियोट्स (Eukaryotes) में डीएनए (DNA) रैखिक (linear) होता है। DNA हिस्टोन प्रोटीन (histone proteins) के साथ मिलकर गुणसूत्र (chromosomes) बनाता है। मनुष्यों में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं। प्रोकैरियोट्स के विपरीत, यह कोशिका के नाभिक (nucleus) के अंदर होता है।
- प्रोकैरियोट्स (Prokaryotes) में मेम्ब्रेन-बाउंड ऑर्गेनेल्स (membrane-bound organelles) नहीं होते। ये एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (ER), गॉल्जी बॉडी, माइटोकॉन्ड्रिया और लाइसोसोम जैसे अंगकों से रहित होते हैं। इनमें केवल राइबोसोम (ribosomes) पाए जाते हैं, जो झिल्ली-रहित (non-membranous) होते हैं।
- यूकैरियोट्स (Eukaryotes) में मेम्ब्रेन-बाउंड ऑर्गेनेल्स (membrane-bound organelles) होते हैं। ये कोशिका के विभिन्न कार्यों (protein synthesis, energy production, waste disposal) को विशिष्ट अंगकों में विभाजित करते हैं। इससे कार्य अधिक कुशलता (efficiency) से होते हैं।
- प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ (Prokaryotic cells) सरल संरचना (simple structure) वाली होती हैं। इनका आकार गोलाकार (cocci), छड़ाकार (bacilli) या सर्पिलाकार (spirilli) हो सकता है। इनमें कोशिका भित्ति (cell wall) होती है, लेकिन यह पौधों की भित्ति से रासायनिक रूप से भिन्न (peptidoglycan – म्यूरिन) होती है।
- यूकैरियोटिक कोशिकाएँ (Eukaryotic cells) जटिल संरचना (complex structure) वाली होती हैं। इनमें नाभिक (nucleus), माइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria), ER, गॉल्जी बॉडी, लाइसोसोम, पेरोक्सीसोम (peroxisomes) और साइटोस्केलेटन (cytoskeleton) होते हैं। पादप कोशिकाओं (plant cells) में क्लोरोप्लास्ट (chloroplasts) और बड़ा केंद्रीय रिक्तिका (central vacuole) भी होता है।
- कोशिका झिल्ली (Cell membrane / Plasma membrane) फॉस्फोलिपिड बाइलेयर (phospholipid bilayer) से बनी होती है। यह एक चयनात्मक पारगम्य (selectively permeable) बाधा है। यह कोशिका के अंदर और बाहर के वातावरण को अलग करती है। इसमें प्रोटीन (proteins), कार्बोहाइड्रेट (carbohydrates) और कोलेस्ट्रॉल (cholesterol – जंतु कोशिकाओं में) भी पाए जाते हैं।
- कोशिका झिल्ली (Cell membrane) अर्धपारगम्य (semipermeable) होती है। यह कुछ पदार्थों (जैसे पानी, छोटे अणु) को स्वतंत्र रूप से अंदर-बाहर जाने देती है। यह दूसरे पदार्थों (जैसे आयन, बड़े अणु) के प्रवेश को नियंत्रित (controlled) करती है। इसी गुण को चयनात्मक पारगम्यता (selective permeability) कहते हैं।
- कोशिका झिल्ली (Cell membrane) में प्रोटीन चैनल (protein channels) होते हैं। ये चैनल आयनों (ions) और छोटे अणुओं (small molecules) के पारगमन (transport) की अनुमति देते हैं। कुछ प्रोटीन पंप (pumps) के रूप में कार्य करते हैं और ATP (energy) का उपयोग करके सक्रिय परिवहन (active transport) करते हैं।
- कोशिका झिल्ली (Cell membrane) में सक्रिय परिवहन (active transport) होता है। इसमें पदार्थ कम सांद्रता (low concentration) से उच्च सांद्रता (high concentration) की ओर ले जाए जाते हैं। यह प्रक्रिया ऊर्जा (ATP) पर निर्भर (energy-dependent) होती है। उदाहरण – सोडियम-पोटैशियम पंप (Na⁺/K⁺ pump)।
- कोशिका झिल्ली (Cell membrane) में रिसेप्टर प्रोटीन (receptor proteins) होते हैं। ये प्रोटीन बाह्य संकेत अणुओं (signaling molecules – हार्मोन, न्यूरोट्रांसमीटर) को पहचानते और उनसे जुड़ते (bind) हैं। यह कोशिका संचार (cell communication) और संकेतन (signal transduction) के लिए आवश्यक है।
- कोशिका झिल्ली (Cell membrane) में ग्लाइकोप्रोटीन (glycoproteins) होते हैं। ये झिल्ली प्रोटीन से जुड़ी कार्बोहाइड्रेट श्रृंखलाएँ (carbohydrate chains) होती हैं। ये कोशिका पहचान (cell recognition), आसंजन (adhesion) और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (immune response) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- कोशिका झिल्ली (Cell membrane) में लिपिड राफ्ट्स (lipid rafts) होते हैं। ये झिल्ली के भीतर कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) और स्फिंगोलिपिड्स (sphingolipids) से बने माइक्रोडोमेन (microdomains) होते हैं। ये सिग्नल ट्रांसडक्शन (signal transduction) और एंडोसाइटोसिस (endocytosis) में मदद करते हैं।
- कोशिका झिल्ली (Cell membrane) में पंप प्रोटीन (pump proteins) होते हैं। ये सक्रिय परिवहन (active transport) के लिए ATP का उपयोग करते हैं। सबसे प्रसिद्ध उदाहरण सोडियम-पोटैशियम पंप (Na⁺/K⁺ ATPase) है, जो Na⁺ को बाहर और K⁺ को अंदर लाता है, जिससे झिल्ली विभव (membrane potential) बनता है।
- कोशिका झिल्ली (Cell membrane) में पेरीफेरल प्रोटीन (peripheral proteins) होते हैं। ये झिल्ली की सतह (outer or inner surface) पर ढीले ढंग से जुड़े (loosely attached) होते हैं, आमतौर पर इंटीग्रल प्रोटीन (integral proteins) से। वे एंजाइम (enzymes) या सिग्नलिंग अणु (signaling molecules) के रूप में कार्य करते हैं और आसानी से अलग किए जा सकते हैं।
- कोशिका झिल्ली (Cell membrane) में इंटीग्रल प्रोटीन (integral proteins) होते हैं। ये फॉस्फोलिपिड बाइलेयर (bilayer) में स्थायी रूप से (permanently) अंतर्निहित (embedded) होते हैं। ये चैनल, पंप, रिसेप्टर या एंजाइम के रूप में कार्य करते हैं। इन्हें झिल्ली से अलग करने के लिए डिटर्जेंट (detergents) की आवश्यकता होती है।
- नाभिक (Nucleus) कोशिका का नियंत्रण केंद्र (control center) है। यह यूकेरियोटिक कोशिकाओं (eukaryotic cells) में पाया जाता है। इसमें आनुवंशिक पदार्थ (DNA – deoxyribonucleic acid) होता है। यह कोशिका वृद्धि (growth), चयापचय (metabolism) और प्रजनन (reproduction) को नियंत्रित करता है।
- नाभिक (Nucleus) में गुणसूत्र (chromosomes) होते हैं। गुणसूत्र DNA और हिस्टोन प्रोटीन (histone proteins) के बने होते हैं। ये कोशिका विभाजन (cell division) के दौरान स्पष्ट दिखाई देते हैं। मनुष्यों में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं।
- नाभिक (Nucleus) में क्रोमैटिन (chromatin) होता है। यह DNA, RNA और प्रोटीन का अव्यवस्थित (uncoiled) रूप है, जो आराम की अवस्था (interphase) में पाया जाता है। कोशिका विभाजन के दौरान यह संघनित (condense) होकर गुणसूत्र (chromosomes) बनाता है।
- नाभिक (Nucleus) में न्यूक्लियोलस (nucleolus) होता है। यह नाभिक के अंदर एक गोलाकार, घना क्षेत्र (dense region) होता है। यहाँ राइबोसोमल RNA (rRNA) का संश्लेषण (synthesis) और राइबोसोम (ribosomes) के सबयूनिट्स (subunits) का निर्माण होता है। इस प्रकार न्यूक्लियोलस (nucleolus) राइबोसोम (ribosome) बनाता है।
- नाभिक (Nucleus) में न्यूक्लियोसोम (nucleosomes) होते हैं। न्यूक्लियोसोम DNA पैकेजिंग (DNA packaging) की मूल इकाई है। यह हिस्टोन प्रोटीन (histone proteins) के कोर (core) के चारों ओर DNA के कुंडलित होने (wrapping) से बनता है। यह लंबे DNA अणुओं को सघन रूप में पैक करने में मदद करता है।
- नाभिक (Nucleus) में डीएनए प्रतिकृति (DNA replication) होती है। यह कोशिका विभाजन (cell division) से पहले होता है। एंजाइम DNA पॉलीमरेज़ (DNA polymerase) नए DNA स्ट्रैंड का संश्लेषण (synthesis) करता है। प्रतिकृति (replication) के बाद प्रत्येक नए DNA अणु में एक पुराना और एक नया स्ट्रैंड होता है (semiconservative replication)।
- नाभिक (Nucleus) में ट्रांसक्रिप्शन (transcription) होता है। यह वह प्रक्रिया है जिसमें DNA से RNA (mRNA, tRNA, rRNA) बनता है। इसे RNA पॉलीमरेज़ एंजाइम (RNA polymerase) द्वारा उत्प्रेरित (catalyzed) किया जाता है। यह "सेंट्रल डोग्मा" (Central Dogma – DNA → RNA → Protein) का पहला चरण है।
- नाभिक (Nucleus) में जीन अभिव्यक्ति (gene expression) होती है। जीन वह DNA खंड (segment) है जो प्रोटीन (protein) या RNA बनाने का निर्देश देता है। जीन अभिव्यक्ति में ट्रांसक्रिप्शन (transcription) और ट्रांसलेशन (translation) शामिल हैं। यह कोशिका को विशिष्ट प्रोटीन बनाने और अपने कार्य करने में सक्षम बनाता है।
- नाभिक (Nucleus) में डीएनए पैकेजिंग (DNA packaging) होती है। DNA हिस्टोन प्रोटीन (histone proteins) के चारों ओर कुंडलित (wound) होता है, जिससे न्यूक्लियोसोम (nucleosomes) बनते हैं। न्यूक्लियोसोम आगे संघनित (condensed) होकर क्रोमैटिन फाइबर (chromatin fibers) और फिर गुणसूत्र (chromosomes) बनाते हैं। यह पैकेजिंग विशाल DNA अणुओं को कोशिका के छोटे से नाभिक में फिट होने देती है।
- नाभिक (Nucleus) में डीएनए रिपेयर (DNA repair) होता है। कई एंजाइम्स (DNA polymerase, ligase, nuclease) DNA में होने वाली क्षति (damage – जैसे उत्परिवर्तन – mutation) को लगातार ठीक करते हैं। यह आनुवंशिक जानकारी (genetic information) की अखंडता (integrity) बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
- नाभिक (Nucleus) में हिस्टोन प्रोटीन (histone proteins) होते हैं। ये मूलभूत (basic) प्रोटीन हैं जो DNA के साथ मिलकर क्रोमैटिन (chromatin) बनाते हैं। हिस्टोन के पाँच मुख्य प्रकार – H1, H2A, H2B, H3, H4। DNA हिस्टोन ऑक्टामर (histone octamer – H2A, H2B, H3, H4 के दो-दो अणु) के चारों ओर कुंडलित होता है।
- नाभिकीय झिल्ली (Nuclear membrane / Nuclear envelope) दोहरी (double membrane) होती है। ये दो लिपिड बाइलेयर (lipid bilayers) – बाहरी (outer) और भीतरी (inner) – होती हैं। बाहरी झिल्ली एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (ER) से जुड़ी होती है। यह झिल्ली नाभिक (nucleus) को साइटोप्लाज्म (cytoplasm) से अलग करती है।
- नाभिकीय झिल्ली (Nuclear membrane) में छिद्र (nuclear pores) होते हैं। ये छिद्र बड़े प्रोटीन कॉम्प्लेक्स (nuclear pore complexes – NPCs) द्वारा बनते हैं। ये RNA, राइबोसोमल सबयूनिट्स (ribosomal subunits) और प्रोटीन को नाभिक और साइटोप्लाज्म के बीच चयनात्मक परिवहन (selective transport) करते हैं। ये छिद्र आरएनए (RNA) के परिवहन (transport) में मदद करते हैं।
- नाभिकीय झिल्ली (Nuclear membrane) में न्यूक्लियोपोरिन प्रोटीन (nucleoporin proteins) होते हैं। ये प्रोटीन मिलकर नाभिकीय छिद्र कॉम्प्लेक्स (nuclear pore complex – NPC) का निर्माण करते हैं। वे छिद्र के माध्यम से अणुओं के आवागमन (trafficking) को नियंत्रित करते हैं। वे आणविक परिवहन में चयनात्मक (selective) फिल्टर के रूप में भी कार्य करते हैं।
- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) कोशिका का पॉवरहाउस (powerhouse) है। यह कोशिकीय श्वसन (cellular respiration) का स्थल है। यह ADP (Adenosine Diphosphate) को ATP (Adenosine Triphosphate) में परिवर्तित करके ऊर्जा (energy) का उत्पादन करता है। इस प्रक्रिया को ऑक्सीडेटिव फास्फोरिलेशन (oxidative phosphorylation) कहते हैं।
- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) डबल मेम्ब्रेन (double membrane) वाला होता है। बाहरी झिल्ली (outer membrane) चिकनी (smooth) होती है। भीतरी झिल्ली (inner membrane) अंदर की ओर मुड़ी हुई (folds) होती है, जिन्हें क्राइस्टी (cristae) कहते हैं। क्राइस्टी सतह क्षेत्र (surface area) बढ़ाती हैं, जिससे अधिक ATP बन सके।
- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में स्वयं का डीएनए (own DNA) होता है। यह गोलाकार (circular) DNA होता है, जैसा प्रोकैरियोट्स में होता है। इस कारण माइटोकॉन्ड्रिया अर्ध-स्वायत्त (semi-autonomous) अंगक है। यह अपने कुछ प्रोटीन स्वयं संश्लेषित (synthesize) कर सकता है।
- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में श्वसन (respiration) होता है। यहाँ ऑक्सीजन (O₂) का उपयोग करके ग्लूकोज (glucose) जैसे खाद्य अणुओं का ऑक्सीकरण (oxidation) किया जाता है। इस प्रक्रिया में ATP (ऊर्जा मुद्रा), CO₂ और H₂O बनते हैं।
- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में एटीपी (ATP – Adenosine Triphosphate) बनता है। यह ATP कोशिका की ऊर्जा मुद्रा (energy currency) है। यह ऊर्जा कोशिका के सभी कार्यों – मांसपेशी संकुचन (muscle contraction), सक्रिय परिवहन (active transport), प्रोटीन संश्लेषण (protein synthesis) आदि के लिए उपयोग की जाती है।
- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में क्रेब्स चक्र (Krebs cycle / Citric acid cycle) होता है। यह चक्र माइटोकॉन्ड्रियल मैट्रिक्स (mitochondrial matrix) में होता है। इसमें एसिटाइल-कोएंजाइम A (acetyl-CoA) का ऑक्सीकरण होता है। इससे NADH, FADH₂ और CO₂ उत्पन्न होते हैं। NADH और FADH₂ फिर इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला (ETC) में जाते हैं।
- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला (Electron Transport Chain – ETC) होती है। यह भीतरी झिल्ली (inner membrane) पर स्थित होती है। NADH और FADH₂ द्वारा लाए गए इलेक्ट्रॉन (electrons) श्रृंखला से गुजरते हैं और अंत में ऑक्सीजन (O₂) से जुड़कर पानी (H₂O) बनाते हैं। इस प्रक्रिया में ATP का अधिकांश भाग (लगभग 34 ATP) बनता है।
- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में ग्लाइकोलाइसिस (Glycolysis) नहीं होता। ग्लाइकोलाइसिस (ग्लूकोज का पाइरूवेट में टूटना) कोशिका के साइटोप्लाज्म (cytoplasm) में होता है। इसलिए, यूकेरियोटिक कोशिकाओं में, ग्लाइकोलाइसिस साइटोप्लाज्म में होता है और उसके बाद के चरण माइटोकॉन्ड्रिया में होते हैं।
- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में बीटा-ऑक्सीकरण (Beta-oxidation) होता है। यह वह प्रक्रिया है जिसमें फैटी अम्ल (fatty acids) टूटकर एसिटाइल-कोएंजाइम A (acetyl-CoA) बनाते हैं। यह एसिटाइल-CoA फिर क्रेब्स चक्र (Krebs cycle) में प्रवेश करता है। इस प्रकार, माइटोकॉन्ड्रिया वसा (fats) को भी ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में ऑक्सीडेटिव फास्फोरिलेशन (Oxidative Phosphorylation) होता है। यह ETC और केमीओस्मोसिस (chemiosmosis) के माध्यम से ATP बनाने की प्रक्रिया है। ETC द्वारा पंप किए गए प्रोटॉन (H⁺) के प्रवणता (gradient) का उपयोग ATP सिंथेज़ (ATP synthase) नामक एंजाइम द्वारा ATP बनाने के लिए किया जाता है।
- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में मेट्रिक्स (Matrix) होता है। यह भीतरी झिल्ली (inner membrane) के अंदर का जिलेटिनस (gelatinous) क्षेत्र है। यह क्रेब्स चक्र (Krebs cycle) का स्थल है। यहाँ माइटोकॉन्ड्रियल DNA (mtDNA), राइबोसोम और एंजाइम (enzymes) भी होते हैं।
- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) में क्लोरोफिल (chlorophyll) होता है। क्लोरोफिल एक हरा रंगद्रव्य (green pigment) है। यह सूर्य के प्रकाश (sunlight) को अवशोषित (absorb) करता है। यह प्रकाश ऊर्जा (light energy) को रासायनिक ऊर्जा (chemical energy) में बदलने में मदद करता है।
- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) डबल मेम्ब्रेन (double membrane) वाला होता है। बाहरी और भीतरी झिल्ली के अलावा, इसमें थायलकॉइड झिल्ली (thylakoid membrane) नामक एक तीसरी झिल्ली प्रणाली होती है। थायलकॉइड झिल्ली डिस्क के आकार (disc-shaped) की होती है और इनके ढेरों (stacks) को ग्राना (grana) कहते हैं।
- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) में प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) होता है। यह वह प्रक्रिया है जिसमें क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश (light energy) को अवशोषित करता है। CO₂ और H₂O का उपयोग करके ग्लूकोज (C₆H₁₂O₆ – भोजन) और ऑक्सीजन (O₂) बनता है। यह प्रक्रिया पौधों को अपना भोजन स्वयं बनाने (autotrophic) में सक्षम बनाती है।
- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) में थायलकॉइड (thylakoids) होते हैं। ये झिल्ली-बद्ध (membrane-bound) डिस्क के आकार की (disc-shaped) थैलियाँ (sacs) होती हैं। थायलकॉइड के ढेर (stacks) ग्राना (grana) कहलाते हैं। प्रकाश-आश्रित अभिक्रियाएँ (light-dependent reactions) थायलकॉइड झिल्ली पर होती हैं।
- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) में फोटोसिस्टम I और II (Photosystem I & II) होते हैं। ये थायलकॉइड झिल्ली (thylakoid membrane) पर स्थित बड़े प्रोटीन-वर्णक कॉम्प्लेक्स (pigment-protein complexes) हैं। ये प्रकाश-आश्रित अभिक्रियाओं (light-dependent reactions) में प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित (absorb) करने और इलेक्ट्रॉन परिवहन (electron transport) में मदद करते हैं।
- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) में फोटोलिसिस (Photolysis) होता है। यह प्रकाश-आश्रित अभिक्रियाओं (light-dependent reactions) के दौरान होता है। इसमें पानी (H₂O) के अणु टूटकर ऑक्सीजन (O₂), प्रोटॉन (H⁺) और इलेक्ट्रॉन (e⁻) बनाते हैं। यह इलेक्ट्रॉन फोटोसिस्टम II (PSII) में इलेक्ट्रॉनों की कमी को पूरा करते हैं।
- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) में कैल्विन चक्र (Calvin Cycle) होता है। यह एक प्रकाश-स्वतंत्र अभिक्रिया (light-independent reaction) है जो स्ट्रोमा (stroma) में होती है। इसमें CO₂ का उपयोग करके ग्लूकोज (C₆H₁₂O₆) का संश्लेषण (synthesis) किया जाता है। इसके लिए प्रकाश-आश्रित अभिक्रियाओं से प्राप्त ATP और NADPH का उपयोग होता है।
- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) में स्टार्च (starch) संग्रह होता है। प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) के दौरान बनने वाला अतिरिक्त ग्लूकोज (excess glucose) स्टार्च के रूप में संग्रहित (stored) किया जाता है। स्टार्च स्टार्च कणिकाओं (starch granules) के रूप में क्लोरोप्लास्ट के अंदर पाया जाता है।
- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) में क्लोरोफिल a और b (Chlorophyll a & b) होते हैं। क्लोरोफिल a मुख्य प्रकाश-संश्लेषक वर्णक (primary photosynthetic pigment) है, जो सीधे प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलता है। क्लोरोफिल b एक सहायक वर्णक (accessory pigment) है जो प्रकाश को अवशोषित करता है और इसे क्लोरोफिल a तक पहुँचाता है।
- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) में स्ट्रोमा (Stroma) होता है। यह भीतरी झिल्ली (inner membrane) के अंदर का द्रव (fluid) है, जो ग्राना (grana – थायलकॉइड के ढेर) को घेरे रहता है। कैल्विन चक्र (Calvin cycle) यहाँ होता है। इसमें एंजाइम (enzymes), DNA, RNA और राइबोसोम (ribosomes) भी होते हैं।
- राइबोसोम (Ribosomes) प्रोटीन संश्लेषण (protein synthesis) का स्थल है। ये झिल्ली-रहित (non-membranous) अंगक हैं। ये मुक्त रूप में (free) साइटोप्लाज्म (cytoplasm) में या रफ एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Rough ER) से जुड़े हो सकते हैं। इन्हें कोशिका के "प्रोटीन कारखाने" (protein factories) भी कहते हैं।
- प्रोकैरियोट्स (Prokaryotes) में राइबोसोम (Ribosomes) 70S प्रकार (type) के होते हैं। "S" (Svedberg unit) अवसादन गुणांक (sedimentation coefficient) है, जो आकार और आकृति को दर्शाता है। 70S राइबोसोम दो सबयूनिट्स (subunits) – 50S और 30S – से मिलकर बने होते हैं। कुछ एंटीबायोटिक्स (tetracycline, streptomycin) प्रोकैरियोटिक 70S राइबोसोम को लक्षित करते हैं।
- यूकैरियोट्स (Eukaryotes) में राइबोसोम (Ribosomes) 80S प्रकार (type) के होते हैं। ये दो सबयूनिट्स (subunits) – 60S और 40S – से मिलकर बने होते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria) और क्लोरोप्लास्ट (chloroplasts) में अपने स्वयं के 70S प्रकार के राइबोसोम होते हैं, जो उनके प्रोकैरियोटिक मूल को दर्शाते हैं (एंडोसिम्बायोटिक सिद्धांत – endosymbiotic theory)।
- राइबोसोम (Ribosomes) में आरएनए (RNA – Ribosomal RNA) होता है। राइबोसोम rRNA और प्रोटीन (proteins) से मिलकर बने होते हैं। rRNA राइबोसोमल RNA (ribosomal RNA) है। यह राइबोसोम की संरचना और उत्प्रेरक गतिविधि (catalytic activity – राइबोजाइम – ribozyme) के लिए आवश्यक है।
- राइबोसोम (Ribosomes) में ट्रांसलेशन (Translation) होता है। ट्रांसलेशन प्रोटीन संश्लेषण (protein synthesis) की प्रक्रिया है। यहाँ mRNA (messenger RNA) के कोडॉन (codon) का उपयोग करके, tRNA (transfer RNA) अमीनो अम्ल (amino acids) लाता है। राइबोसोम इन अमीनो अम्लों को श्रृंखला (polypeptide chain) में जोड़ता है।
- राइबोसोम (Ribosomes) में पेप्टाइड बांड (peptide bonds) बनते हैं। पेप्टाइड बांड अमीनो अम्ल (amino acids) को आपस में जोड़ने वाले सहसंयोजक बंध (covalent bonds) होते हैं। यह प्रोटीन (protein) की प्राथमिक संरचना (primary structure) बनाते हैं। राइबोसोम का rRNA (ribozyme) इस प्रक्रिया को उत्प्रेरित (catalyze) करता है।
- एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Endoplasmic Reticulum – ER) प्रोटीन और लिपिड (lipid) संश्लेषण (synthesis) में मदद करता है। यह झिल्लीदार (membrane-bound) नलिकाओं (tubules) और थैलियों (cisternae) का एक नेटवर्क है, जो नाभिक (nucleus) से जुड़ा होता है। यह दो प्रकार का होता है – रफ (rough – RER) और स्मूद (smooth – SER)।
- रफ एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Rough ER – RER) में राइबोसोम (ribosomes) होते हैं। इसकी सतह दानेदार (granular) दिखाई देती है। RER मुख्यतः प्रोटीन संश्लेषण (protein synthesis) और संशोधन (modification) में शामिल होता है। RER पर बनने वाले प्रोटीन आमतौर पर कोशिका से बाहर स्रावित (secreted), झिल्ली से जुड़े (membrane-bound), या लाइसोसोम (lysosomes) में जाते हैं।
- रफ एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Rough ER) में प्रोटीन फोल्डिंग (protein folding) होती है। नव-संश्लेषित (newly synthesized) प्रोटीन सही त्रि-आयामी (3D) संरचना में मुड़ते (fold) हैं। यहाँ डाइसल्फ़ाइड बांड (disulfide bonds) भी बनते हैं। गलत फोल्डिंग (misfolding) को रोकने के लिए चैपरोन प्रोटीन (chaperone proteins) सहायता करते हैं।
- रफ एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Rough ER) में प्रोटीन ट्रांसलोकेशन (protein translocation) होता है। नव-संश्लेषित पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला (polypeptide chain) को RER के ल्यूमेन (lumen – अंदरूनी भाग) में ले जाया जाता है। यह सह-अनुवादात्मक ट्रांसलोकेशन (co-translational translocation) कहलाता है। यह प्रक्रिया सिग्नल रिकॉग्निशन पार्टिकल (SRP – Signal Recognition Particle) द्वारा शुरू की जाती है।
- स्मूद एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Smooth ER – SER) लिपिड (lipid) बनाता है। इसकी सतह चिकनी (smooth) होती है क्योंकि इसमें राइबोसोम नहीं होते। SER फॉस्फोलिपिड्स (phospholipids), कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) और स्टेरॉयड हार्मोन (steroid hormones) का संश्लेषण करता है। यह यकृत (liver) कोशिकाओं में स्टेरॉयड (steroids) का उत्पादन करता है।
- स्मूद एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Smooth ER) डिटॉक्सिफिकेशन (detoxification) करता है। यह यकृत (liver) कोशिकाओं में हानिकारक रसायनों (toxins), दवाओं (drugs) और अल्कोहल (alcohol) को विषहरित (detoxify) करता है। यह कुछ पदार्थों (जैसे बार्बिटुरेट्स, एथेनॉल) को पानी में घुलनशील बनाकर शरीर से बाहर निकालने योग्य बनाता है।
- स्मूद एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Smooth ER) में स्टेरॉयड संश्लेषण (steroid synthesis) होता है। अंडकोष (testes – टेस्टोस्टेरोन), अंडाशय (ovaries – एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन) और अधिवृक्क ग्रंथियाँ (adrenal glands – कोर्टिसोल) में SER स्टेरॉयड हार्मोन (steroid hormones) बनाता है। स्टेरॉयड कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) से बनते हैं।
- स्मूद एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Smooth ER) में कैल्शियम आयन (calcium ions – Ca²⁺) संग्रह होता है। यह Ca²⁺ को पंप (pump) करके साइटोप्लाज्म (cytoplasm) से बाहर SER के ल्यूमेन (lumen) में संग्रहीत (store) करता है। मांसपेशी कोशिकाओं (muscle cells) में, इस संग्रहित Ca²⁺ को छोड़ने (release) से मांसपेशी संकुचन (muscle contraction) शुरू होता है (यहाँ इसे सार्कोप्लाज्मिक रेटिकुलम – SR कहते हैं)।
- गॉल्जी बॉडी (Golgi Body) प्रोटीन पैकेजिंग (protein packaging) का कार्य करता है। यह चपटी, डिस्क के आकार की थैलियों (cisternae) का ढेर होता है। यह ER से प्रोटीन और लिपिड प्राप्त करता है। यह उन्हें संशोधित (modify), छाँटता (sort) और स्रावी पुटिकाओं (secretory vesicles) में पैक करता है।
- गॉल्जी बॉडी (Golgi Body) में लाइसोसोम (lysosomes) बनते हैं। गॉल्जी बॉडी पाचक एंजाइम (digestive enzymes) को अलग करके लाइसोसोम में पैक करता है। लाइसोसोम तब गॉल्जी बॉडी से निकलते हैं (bud off) और अपना कार्य करते हैं।
- गॉल्जी बॉडी (Golgi Body) में सिस्टर्नी (Cisternae) होती हैं। सिस्टर्नी चपटी, डिस्क के आकार की थैलियाँ (stacked, flattened membrane-bound sacs) होती हैं। एक गॉल्जी बॉडी में आमतौर पर 3 से 8 सिस्टर्नी होती हैं। इनका एक cis (प्राप्ति) पक्ष और एक trans (प्रेषण) पक्ष होता है।
- गॉल्जी बॉडी (Golgi Body) में स्रावी पुटिकाएँ (secretory vesicles) बनती हैं। ये पुटिकाएँ प्रोटीन (proteins) और लिपिड (lipids) को कोशिका के अंदर या बाहर ले जाती हैं। जब वे कोशिका झिल्ली (plasma membrane) से जुड़ती हैं और अपनी सामग्री बाहर छोड़ती हैं, इसे एक्सोसाइटोसिस (exocytosis) कहते हैं।
- गॉल्जी बॉडी (Golgi Body) में ग्लाइकोसिलेशन (glycosylation) होता है। यह प्रोटीन (proteins) या लिपिड (lipids) में कार्बोहाइड्रेट समूहों (carbohydrate groups) को जोड़ने की प्रक्रिया है। इससे ग्लाइकोप्रोटीन (glycoproteins) और ग्लाइकोलिपिड (glycolipids) बनते हैं। ये अणु कोशिका पहचान (cell recognition) और सिग्नलिंग (signaling) में महत्वपूर्ण होते हैं।
- गॉल्जी बॉडी (Golgi Body) में स्रावी प्रोटीन संश्लेषण (secretory protein synthesis) नहीं होता। संश्लेषण (synthesis) RER (Rough Endoplasmic Reticulum) पर होता है। गॉल्जी बॉडी संश्लेषित नहीं करता, बल्कि प्राप्त प्रोटीन को संशोधित (modify) और पैकेज (package) करता है।
- गॉल्जी बॉडी (Golgi Body) में ग्लाइकोलिपिड (glycolipids) बनते हैं। यह लिपिड्स (lipids) में कार्बोहाइड्रेट समूह (carbohydrate group) जोड़ने की प्रक्रिया है। ग्लाइकोलिपिड्स कोशिका झिल्ली (cell membrane) का एक महत्वपूर्ण घटक हैं और कोशिका पहचान (cell recognition) में भाग लेते हैं।
- गॉल्जी बॉडी (Golgi Body) में प्रोटीन मॉडिफिकेशन (protein modification) होता है। इसमें फॉस्फोरिलेशन (phosphorylation), सल्फेशन (sulfation), और प्रोटीयोलाइटिक क्लीवेज (proteolytic cleavage) जैसे परिवर्तन शामिल हैं। ये संशोधन प्रोटीन को उसके अंतिम गंतव्य (final destination) के लिए सक्रिय (activate) या निष्क्रिय (deactivate) कर सकते हैं।
- गॉल्जी बॉडी (Golgi Body) में एक्सोसाइटोसिस (exocytosis) होता है। यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पुटिकाएँ (vesicles) गॉल्जी बॉडी से निकलकर कोशिका झिल्ली (plasma membrane) के साथ जुड़ जाती हैं। इससे पुटिका की सामग्री (जैसे हार्मोन, पाचक एंजाइम, म्यूकस) कोशिका के बाहर छोड़ दी जाती है।
- गॉल्जी बॉडी (Golgi Body) में पुटिका परिवहन (vesicle transport) होता है। पुटिकाएँ ER और गॉल्जी बॉडी और गॉल्जी बॉडी से अन्य कोशिका भागों के बीच परिवहन करती हैं। यह परिवहन लक्षित (targeted) होता है और स्नेयर प्रोटीन (SNARE proteins) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
- लाइसोसोम (Lysosomes) कोशिका का आत्मघाती बैग (suicidal bag) कहलाता है। यह एक झिल्ली-बद्ध (membrane-bound) अंगक है। इसमें हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (hydrolytic enzymes – पाचक एंजाइम) होते हैं। ये एंजाइम प्रोटीन, लिपिड, कार्बोहाइड्रेट और न्यूक्लिक एसिड (न्यूक्लिक अम्ल) को पाचित (digest) करते हैं।
- लाइसोसोम (Lysosomes) अपशिष्ट निपटान (waste disposal) में मदद करता है। यह कोशिका के अंदर पुराने, क्षतिग्रस्त (damaged) अंगकों (organelles) और मैक्रोमोलेक्यूल्स को पाचित करता है। यह फागोसाइटोसिस (phagocytosis) के माध्यम से कोशिका में प्रवेश करने वाले बैक्टीरिया (bacteria) और वायरस (viruses) को भी नष्ट कर सकता है।
- लाइसोसोम (Lysosomes) में हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (hydrolytic enzymes) होते हैं। ये एंजाइम प्रोटीज (proteases – प्रोटीन पाचन), लाइपेज (lipases – वसा पाचन), न्यूक्लीज (nucleases – न्यूक्लिक एसिड पाचन) और कार्बोहाइड्रेज (carbohydrases – शर्करा पाचन) हैं। ये एंजाइम अम्लीय pH (लगभग 5) पर सबसे अच्छा काम करते हैं।
- लाइसोसोम (Lysosomes) में फागोसाइटोसिस (phagocytosis) होता है। फागोसाइटोसिस कोशिका द्वारा बड़े कणों (जैसे बैक्टीरिया, मृत कोशिकाएँ) को निगलने (engulf) की प्रक्रिया है। इन निगले गए कणों को एक फागोसोम (phagosome) नामक पुटिका में रखा जाता है। फागोसोम लाइसोसोम के साथ मिलकर (fuse) फागोलाइसोसोम (phagolysosome) बनाता है, जहाँ पाचन होता है।
- लाइसोसोम (Lysosomes) में एंडोसाइटोसिस (endocytosis) होता है। एंडोसाइटोसिस कोशिका द्वारा बाह्य पदार्थों को छोटी पुटिकाओं (small vesicles) में निगलने की प्रक्रिया है। इन पुटिकाओं को एंडोसोम (endosomes) कहते हैं। एंडोसोम लाइसोसोम के साथ मिलकर सामग्री को पाचित करते हैं।
- लाइसोसोम (Lysosomes) में ऑटोफैजी (autophagy) होती है। ऑटोफैजी ("स्वयं-भक्षण" – self-eating) वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिका अपने ही क्षतिग्रस्त अंगकों (damaged organelles) या प्रोटीन संचय (protein aggregates) को पाचित कर देती है। क्षतिग्रस्त अंगक को एक ऑटोफैगोसोम (autophagosome) नामक झिल्ली में घेर लिया जाता है, जो फिर लाइसोसोम के साथ मिल जाता है।
- लाइसोसोम (Lysosomes) में प्रोटीन डिग्रेडेशन (protein degradation) होता है। हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (प्रोटीज – proteases) लंबी पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं को छोटे पेप्टाइड्स (peptides) और फिर अमीनो अम्लों (amino acids) में तोड़ देते हैं। इन अमीनो अम्लों को कोशिका नए प्रोटीन बनाने के लिए पुनर्नवीनीकृत (recycle) कर सकती है।
- लाइसोसोम (Lysosomes) में अपोप्टोसिस (apoptosis – क्रमादेशित कोशिका मृत्यु – programmed cell death) में भूमिका होती है। कुछ परिस्थितियों में, लाइसोसोम अपने पाचक एंजाइम (digestive enzymes) को साइटोप्लाज्म में छोड़ सकता है, जिससे कोशिका अंदर से पाचित हो जाती है। यह एक नियंत्रित प्रक्रिया है, जो विकास (development) और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को हटाने के लिए आवश्यक है।
- लाइसोसोम (Lysosomes) में पेरोक्सीसेम (peroxisomes) नहीं होते। पेरोक्सीसोम (peroxisomes) एक अलग प्रकार के अंगक होते हैं। उनमें कैटालेज (catalase) और अन्य ऑक्सीडेज (oxidases) एंजाइम होते हैं। वे लंबी-श्रृंखला फैटी एसिड (long-chain fatty acids) को ऑक्सीकृत (oxidize) करते हैं और हाइड्रोजन पेरोक्साइड (H₂O₂) जैसे विषाक्त पदार्थों (toxic substances) को विषहरित (detoxify) करते हैं।
- कोशिका भित्ति (Cell wall) पौधों की कोशिकाओं (plant cells) में पाई जाती है। यह कोशिका झिल्ली (plasma membrane) के बाहर एक कठोर (rigid), अजीवित (non-living) परत होती है। यह पौधों को संरचनात्मक सहारा (structural support) और यांत्रिक शक्ति (mechanical strength) प्रदान करती है। यह कोशिका को अत्यधिक पानी लेने पर फटने (burst) से भी बचाती है।
- कोशिका भित्ति (Cell wall) सेलूलोज (cellulose) से बनी होती है। सेलूलोज ग्लूकोज (glucose) इकाइयों की एक लंबी श्रृंखला (polysaccharide – बहुशर्करा) है। यह पृथ्वी पर सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला कार्बनिक बहुलक (organic polymer) है। सेलूलोज माइक्रोफाइब्रिल्स (microfibrils) बनाता है, जो भित्ति को तन्य शक्ति (tensile strength) देते हैं।
- कोशिका भित्ति (Cell wall) पौधों को मजबूती (strength) देती है। भित्ति की कठोरता (rigidity) पौधों को सीधा खड़ा रहने (stand upright) और भारी पुष्पों (flowers) एवं फलों (fruits) के भार को सहन करने में सक्षम बनाती है। यह पवन (wind) और बारिश (rain) जैसी पर्यावरणीय तनावों (environmental stresses) के खिलाफ यांत्रिक समर्थन (mechanical support) भी प्रदान करती है।
- कोशिका भित्ति (Cell wall) में पेक्टिन (pectin) होता है। पेक्टिन एक प्रकार का चिपकने वाला पदार्थ (adhesive substance) है। यह आसन्न (adjacent) कोशिकाओं की दीवारों को आपस में जोड़ता है। यह मध्य पट्टिका (middle lamella) का एक प्रमुख घटक है, जो दो पड़ोसी कोशिकाओं के बीच स्थित होता है।
- कोशिका भित्ति (Cell wall) में हेमीसेलूलोज (hemicellulose) होता है। हेमीसेलूलोज एक जटिल बहुशर्करा (complex polysaccharide) है। यह सेलूलोज माइक्रोफाइब्रिल्स (cellulose microfibrils) को आपस में जोड़ता है। यह भित्ति के जालक (matrix) का निर्माण करता है और भित्ति को अधिक लचीलापन (flexibility) प्रदान करता है।
- कोशिका भित्ति (Cell wall) में लिग्निन (lignin) हो सकता है। लिग्निन एक जटिल बहुलक (complex polymer) है जो सेलूलोज फाइबर (cellulose fibers) के बीच रिक्त स्थानों (spaces) में जमा होता है। यह भित्ति को अतिरिक्त कठोरता (rigidity) और जल-विकर्षक (waterproof) गुण प्रदान करता है। यह जाइलम (xylem) वाहिकाओं (vessels) और ट्रेकिड्स (tracheids) में पाया जाता है, जो पानी का परिवहन करते हैं।
- वेक्यूओल्स (Vacuoles) पौधों (plants) में भंडारण (storage) का कार्य करते हैं। ये एकल झिल्ली-बद्ध (single membrane-bound) थैलियाँ (sacs) होती हैं। परिपक्व पादप कोशिकाओं (mature plant cells) में एक बड़ा केंद्रीय रिक्तिका (central vacuole) होता है। यह कोशिका आयतन का 90% तक घेर सकता है।
- वेक्यूओल्स (Vacuoles) पौधों में टरगर दबाव (turgor pressure) बनाए रखते हैं। रिक्तिका के अंदर पानी (water) का दबाव कोशिका भित्ति (cell wall) के खिलाफ धक्का देता है, जिससे पौधे की कोशिकाएँ सख्त (firm) और पौधे सीधे खड़े (upright) रहते हैं। जब पानी की कमी होती है, तो टरगर दबाव कम हो जाता है और पौधा मुरझा जाता है (wilt)।
- वेक्यूओल्स (Vacuoles) में अपशिष्ट (waste) संग्रह (storage) होता है। पादप कोशिकाएँ विषाक्त अपशिष्ट उत्पादों (toxic waste products) को रिक्तिका में अलग करके संग्रहीत करती हैं। यह उन्हें साइटोप्लाज्म (cytoplasm) के हानिकारक प्रभावों से बचाता है। कुछ पौधों के रिक्तिका में टैनिन (tannins) या अल्कलॉइड (alkaloids) जैसे सुरक्षात्मक यौगिक (defensive compounds) भी होते हैं।
- वेक्यूओल्स (Vacuoles) में पिगमेंट (pigments) हो सकते हैं। फूलों और फलों के रंग (color) के लिए जिम्मेदार पानी में घुलनशील (water-soluble) वर्णक (pigments) – जैसे एंथोसायनिन (anthocyanins) – रिक्तिका में संग्रहित होते हैं। ये वर्णक कीटों को आकर्षित (attract) करने या UV विकिरण (UV radiation) से बचाने का काम करते हैं।
- वेक्यूओल्स (Vacuoles) में टोनोप्लास्ट (tonoplast) होता है। टोनोप्लास्ट रिक्तिका के चारों ओर की एकल झिल्ली (single membrane) है। यह चयनात्मक पारगम्य (selectively permeable) होती है। यह रिक्तिका के अंदर आयनों (ions) और अणुओं (molecules) के परिवहन (transport) को नियंत्रित करती है और इसे कोशिका के बाकी हिस्सों से अलग रखती है।
- सेंट्रीओल्स (Centrioles) कोशिका विभाजन (cell division) में मदद करते हैं। ये छोटे, बेलनाकार (cylindrical) अंगक हैं। ये केवल जंतु कोशिकाओं (animal cells) और कुछ निचले पौधों (lower plants) में पाए जाते हैं। ये प्रत्येक कोशिका के सेंट्रोसोम (centrosome) में जोड़े में होते हैं।
- माइक्रोट्यूब्यूल्स (Microtubules) कोशिका के कंकाल (cytoskeleton) का हिस्सा हैं। ये लंबी, पतली, खोखली (hollow) नलिकाएँ (tubes) होती हैं। ये ट्यूबुलिन प्रोटीन (tubulin protein – α और β ट्यूबुलिन) से बनी होती हैं। वे कोशिका को आकार (shape) देते हैं, अंगकों को स्थिति (position) देते हैं और कोशिका विभाजन (cell division) में सहायता करते हैं।
- माइक्रोट्यूब्यूल्स (Microtubules) कशाभिका (flagella) और पक्ष्माभ (cilia) बनाते हैं। कशाभिका (flagella – एकल, लंबी) और पक्ष्माभ (cilia – अनेक, छोटी) कोशिका के बाहर निकले हुए (projections) होते हैं। वे कोशिका गति (cell movement) या उसके आसपास के तरल पदार्थ (fluid) को स्थानांतरित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इनकी आंतरिक संरचना "9+2" व्यवस्था (arrangement) में माइक्रोट्यूब्यूल्स से बनी होती है, जो बेसल बॉडी (basal body – जो सेंट्रीओल्स से आती है) से बढ़ती है।
- माइक्रोट्यूब्यूल्स (Microtubules) में ट्यूबुलिन प्रोटीन (tubulin protein) होता है। ट्यूबुलिन एक वैश्विक प्रोटीन (globular protein) है। यह α-ट्यूबुलिन और β-ट्यूबुलिन नामक दो उप-इकाइयों (subunits) के हेटेरोडिमर (heterodimers) के रूप में मौजूद होता है। ये हेटेरोडिमर लंबी श्रृंखलाओं (chains) में जुड़कर (polymerize) माइक्रोट्यूब्यूल्स (microtubules) का निर्माण करते हैं।
- माइक्रोट्यूब्यूल्स (Microtubules) सेंट्रीओल्स (centrioles) से बनते हैं। प्रोटीन का संगठन (organization) सेंट्रोसोम (centrosome) द्वारा किया जाता है, जिसमें दो सेंट्रीओल्स (centrioles) होते हैं। सेंट्रीओल्स "माइक्रोट्यूब्यूल ऑर्गनाइजिंग सेंटर" (Microtubule Organizing Center – MTOC) के रूप में कार्य करते हैं। उनकी दीवारें (walls) स्वयं माइक्रोट्यूब्यूल्स (microtubules) के समूहों (triplets) से बनी होती हैं।
- माइक्रोट्यूब्यूल्स (Microtubules) में साइटोकाइनेसिस (cytokinesis) होता है। साइटोकाइनेसिस कोशिका विभाजन (cell division) का अंतिम चरण है, जिसमें साइटोप्लाज्म (cytoplasm) विभाजित होता है। पशु कोशिकाओं (animal cells) में, माइक्रोट्यूब्यूल्स का एक वलय (ring of microtubules – contractile ring – ऐक्टिन और मायोसिन फिलामेंट्स से बना) सिकुड़ता है, जिससे कोशिका बीच से दबकर दो भागों में बँट जाती है।
- प्रोकैरियोट्स (Prokaryotes) में प्लाज्मिड (plasmids) हो सकते हैं। प्लाज्मिड छोटे, गोलाकार (circular), अतिरिक्त-गुणसूत्रीय (extrachromosomal) DNA के टुकड़े होते हैं। वे मुख्य जीवाणु गुणसूत्र (main bacterial chromosome) से अलग (independent) प्रतिकृति (replicate) बना सकते हैं। वे अक्सर एंटीबायोटिक प्रतिरोध (antibiotic resistance) जीन ले जाते हैं और जीवाणुओं के बीच संयुग्मन (conjugation) के माध्यम से स्थानांतरित (transfer) हो सकते हैं।
- प्रोकैरियोट्स (Prokaryotes) में साइटोप्लाज्म (cytoplasm) में डीएनए (DNA) होता है। उनके पास एक सुव्यवस्थित नाभिक (well-defined nucleus) नहीं होता है। उनका DNA साइटोप्लाज्म के एक क्षेत्र (region) में स्थित होता है जिसे न्यूक्लियॉइड (nucleoid) कहते हैं। न्यूक्लियॉइड झिल्ली-बद्ध (membrane-bound) नहीं होता है।
- प्रोकैरियोट्स (Prokaryotes) में झिल्ली-बद्ध अंगक (membrane-bound organelles) नहीं होते। इसलिए, उनमें एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (ER), गॉल्जी बॉडी (Golgi), लाइसोसोम (lysosomes) और माइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria) नहीं पाए जाते। उनके राइबोसोम (ribosomes) 70S प्रकार के होते हैं और झिल्ली-बद्ध नहीं होते हैं।
- प्रोकैरियोट्स (Prokaryotes) में नाभिकीय झिल्ली (nuclear membrane) नहीं होती। उनका आनुवंशिक पदार्थ (genetic material) नाभिकीय झिल्ली से घिरा नहीं होता है। इसे न्यूक्लियॉइड (nucleoid) कहते हैं।