मानव शारीरिकी
- मानव शरीर (Human body) में 206 हड्डियाँ (bones) होती हैं। एक नवजात शिशु (newborn) में लगभग 300 हड्डियाँ होती हैं, जो बड़े होने पर आपस में जुड़कर (fuse) 206 हो जाती हैं। हड्डियाँ शरीर को आकार (shape) और सहारा (support) देती हैं।
- मेरुदंड (Spine / Vertebral column) में 33 कशेरुकाएँ (vertebrae) होती हैं। ये 7 ग्रीवा (cervical), 12 वक्षीय (thoracic), 5 कटि (lumbar), 5 त्रिक (sacral – जुड़ी हुई) और 4 अनुत्रिक (coccygeal – जुड़ी हुई) में विभाजित हैं। यह रीढ़ की हड्डी (spinal cord) की रक्षा करता है।
- मेरुदंड (Spine) में 7 ग्रीवा कशेरुकाएँ (cervical vertebrae – C1 से C7) होती हैं। पहली ग्रीवा कशेरुका को एटलस (Atlas) और दूसरी को एक्सिस (Axis) कहते हैं। ये सिर को हिलाने (nodding) और घुमाने (rotation) में मदद करती हैं।
- मेरुदंड (Spine) में 12 वक्षीय कशेरुकाएँ (thoracic vertebrae – T1 से T12) होती हैं। ये पसलियों (ribs) से जुड़ी होती हैं। ये वक्ष गुहा (thoracic cavity) का निर्माण करती हैं और हृदय (heart) तथा फेफड़ों (lungs) की रक्षा करती हैं।
- मेरुदंड (Spine) में 5 कटि कशेरुकाएँ (lumbar vertebrae – L1 से L5) होती हैं। ये सबसे बड़ी और मजबूत कशेरुकाएँ होती हैं। ये शरीर के अधिकांश भार (weight) को वहन करती हैं। ये झुकने (bending) और मुड़ने (twisting) में मदद करती हैं।
- मेरुदंड (Spine) में 5 त्रिक कशेरुकाएँ (sacral vertebrae – S1 से S5) होती हैं। ये वयस्कों में आपस में जुड़कर त्रिकास्थि (sacrum) बनाती हैं। त्रिकास्थि श्रोणि (pelvis) का भाग होती है और शरीर के भार को कूल्हों (hips) तक स्थानांतरित करती है।
- मेरुदंड (Spine) में 4 अनुत्रिक कशेरुकाएँ (coccygeal vertebrae) होती हैं। ये आपस में जुड़कर टेलबोन (coccyx / tailbone) बनाती हैं। यह एक अवशेषी संरचना (vestigial structure) है, जो हमारे पूर्वजों की पूंछ (tail) का अवशेष है।
- मेरुदंड (Spine) में डिस्क (intervertebral discs) कुशन (cushion) का काम करती हैं। ये उपास्थि (cartilage) से बनी होती हैं और कशेरुकाओं के बीच स्थित होती हैं। ये सदमे अवशोषक (shock absorbers) के रूप में कार्य करती हैं और रीढ़ को लचीलापन (flexibility) देती हैं।
- मेरुदंड (Spinal cord) रीढ़ की हड्डी की रक्षा (protects the spinal cord) करता है। कशेरुकाएँ मिलकर एक नलिका (neural canal / vertebral foramen) बनाती हैं, जिसके अंदर मेरुरज्जु (spinal cord) स्थित होती है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) का एक महत्वपूर्ण भाग है।
- हड्डियों (Bones) में कैल्शियम (Calcium) और फॉस्फोरस (Phosphorus) होता है। ये खनिज (minerals) हड्डियों को कठोरता (hardness) और मजबूती (strength) प्रदान करते हैं। कैल्शियम शरीर में अन्य महत्वपूर्ण कार्यों (जैसे मांसपेशी संकुचन – muscle contraction) के लिए भी आवश्यक है।
- हड्डियों (Bones) में मज्जा (bone marrow) रक्त कोशिकाएँ (blood cells) बनाता है। लाल मज्जा (red marrow) लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs), श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBCs) और प्लेटलेट्स (platelets) का निर्माण करता है। वयस्कों में यह मुख्य रूप से कूल्हे (hip), उरोस्थि (sternum) और पसलियों (ribs) में पाया जाता है।
- हड्डियों (Bones) में ऑस्टियोसाइट्स (osteocytes) कोशिकाएँ होती हैं। ये परिपक्व हड्डी कोशिकाएँ (mature bone cells) हैं। ये हड्डी के मैट्रिक्स (bone matrix) के अंदर छोटी-छोटी जगहों (lacunae) में स्थित होती हैं। ये हड्डी के पोषण (nutrition) और रखरखाव (maintenance) में मदद करती हैं।
- हड्डियों (Bones) में ऑस्टियोब्लास्ट्स (osteoblasts) नई हड्डी (new bone) बनाते हैं। ये हड्डी निर्माण कोशिकाएँ (bone-forming cells) हैं। ये हड्डी के मैट्रिक्स (collagen और calcium) को स्रावित (secrete) करती हैं। ये हड्डियों की वृद्धि (growth) और मरम्मत (repair) में आवश्यक हैं।
- हड्डियों (Bones) में ऑस्टियोक्लास्ट्स (osteoclasts) हड्डी का पुनर्जनन (bone resorption) करते हैं। ये बड़ी, बहुकेंद्रकीय (multinucleated) कोशिकाएँ होती हैं। ये पुरानी या क्षतिग्रस्त हड्डी को तोड़कर (break down) कैल्शियम (calcium) रक्त में छोड़ती हैं। यह प्रक्रिया हड्डी के निरंतर पुनर्निर्माण (remodeling) के लिए आवश्यक है।
- हड्डियों (Bones) में कोलेजन तंतु (collagen fibers) होते हैं। कोलेजन एक प्रोटीन (protein) है। यह हड्डियों को लचीलापन (flexibility) और तन्य शक्ति (tensile strength) प्रदान करता है। यह हड्डी के खनिज भाग (mineral part) को जोड़ने (binding) का काम करता है।
- हड्डियों (Bones) में मज्जा (marrow) दो प्रकार का होता है – लाल (red) और पीला (yellow)। लाल मज्जा (red marrow) रक्त कोशिकाएँ बनाता है (hematopoiesis – हेमटोपोइजिस)। पीली मज्जा (yellow marrow) मुख्यतः वसा (fat) से बनी होती है और यह ऊर्जा का भंडार (energy reserve) है।
- रक्त (Blood) में लाल रक्त कोशिकाएँ (Red Blood Cells – RBCs) ऑक्सीजन (oxygen) ले जाती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन (hemoglobin) नामक एक प्रोटीन (protein) होता है। हीमोग्लोबिन फेफड़ों (lungs) से ऑक्सीजन बाँधता (binds) है और इसे शरीर के सभी ऊतकों (tissues) तक पहुँचाता है।
- रक्त (Blood) में प्लाज्मा (plasma) 55% हिस्सा होता है। प्लाज्मा रक्त का तरल भाग (liquid part) है। यह 90% पानी (water) और 10% प्रोटीन (proteins – एल्ब्यूमिन albumin, ग्लोब्युलिन globulin, फाइब्रिनोजेन fibrinogen), लवण (salts) और पोषक तत्वों (nutrients) से बना होता है। यह कोशिकाओं के परिवहन (transport) का माध्यम है।
- रक्त (Blood) में श्वेत रक्त कोशिकाएँ (White Blood Cells – WBCs) रोगों से लड़ती हैं। ये प्रतिरक्षा तंत्र (immune system) का भाग हैं। ये बैक्टीरिया (bacteria), वायरस (viruses) और अन्य रोगाणुओं (pathogens) को नष्ट करती हैं। इनकी संख्या बढ़ना संक्रमण (infection) का संकेत है।
- रक्त (Blood) में प्लेटलेट्स (platelets – थ्रोम्बोसाइट्स) रक्तस्राव (bleeding) को रोकते हैं। ये छोटे, अस्थि मज्जा (bone marrow) में बनने वाले कोशिका टुकड़े (cell fragments) हैं। चोट लगने पर, ये चोट वाली जगह (injury site) पर एकत्रित (aggregate) होकर थक्का (clot) बनाते हैं, जिससे रक्तस्राव रुकता है।
- रक्त (Blood) में हीमोग्लोबिन (hemoglobin) ऑक्सीजन (oxygen) बाँधता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) में पाया जाने वाला एक लौह-युक्त (iron-containing) प्रोटीन है। यह ऑक्सीजन को धारण (hold) और मुक्त (release) कर सकता है। यह रक्त को उसका लाल रंग (red colour) देता है।
- रक्त (Blood) में लिम्फोसाइट्स (lymphocytes) प्रतिरक्षा (immunity) में मदद करते हैं। ये श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBCs) का एक प्रकार हैं। बी-लिम्फोसाइट्स (B-cells) एंटीबॉडी (antibodies) बनाती हैं, और टी-लिम्फोसाइट्स (T-cells) संक्रमित कोशिकाओं (infected cells) को नष्ट करती हैं। ये हमारी अर्जित प्रतिरक्षा (acquired immunity) का आधार हैं।
- रक्त (Blood) में न्यूट्रोफिल्स (neutrophils) बैक्टीरिया (bacteria) से लड़ते हैं। ये सबसे अधिक संख्या में पाए जाने वाले श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBCs) हैं (50-70%)। ये फागोसाइटोसिस (phagocytosis) द्वारा बैक्टीरिया को निगलकर (engulf) नष्ट कर देते हैं। इनकी संख्या जीवाणु संक्रमण (bacterial infection) में तेजी से बढ़ जाती है।
- रक्त (Blood) में बेसोफिल्स (basophils) एलर्जी (allergy) में भूमिका निभाते हैं। ये सबसे कम संख्या में पाए जाने वाले श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBCs) हैं (0.5-1%)। ये हिस्टामाइन (histamine) और हेपरिन (heparin) स्रावित करते हैं। हिस्टामाइन एलर्जी प्रतिक्रिया (allergic reaction) का कारण बनता है, जबकि हेपरिन रक्त के थक्के (blood clotting) को रोकता है।
- रक्त (Blood) में मोनोसाइट्स (monocytes) प्रतिरक्षा (immunity) में मदद करते हैं। ये श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBCs) का एक प्रकार हैं। ये रक्त से ऊतकों (tissues) में जाकर मैक्रोफेज (macrophages) में परिवर्तित (transform) हो जाते हैं। मैक्रोफेज मृत कोशिकाओं (dead cells), रोगाणुओं (pathogens) और मलबे (debris) को फागोसाइटोसिस (phagocytosis) द्वारा साफ करते हैं।
- हृदय (Heart) एक मांसपेशीय अंग (muscular organ) है जो रक्त (blood) पंप (pump) करता है। यह लगभग मुट्ठी (fist) के आकार का होता है। यह शरीर के सभी भागों में ऑक्सीजन (oxygen) और पोषक तत्वों (nutrients) से भरपूर रक्त पहुँचाता है। यह एक स्वायत्त (autonomous) कार्य करता है, जिसके लिए हमें सचेत प्रयास (conscious effort) नहीं करना पड़ता।
- हृदय (Heart) में चार कक्ष (four chambers) होते हैं। दो ऊपरी कक्ष (upper chambers) अटरिया (atria – left atrium, right atrium) और दो निचले कक्ष (lower chambers) निलय (ventricles – left ventricle, right ventricle) कहलाते हैं। अटरिया (atria) रक्त प्राप्त करते हैं (receive), और निलय (ventricles) रक्त को पंप (pump) करते हैं।
- हृदय (Heart) का दायाँ कक्ष (right atrium) ऑक्सीजन-रहित (deoxygenated) रक्त लेता है। यह रक्त शरीर के सभी भागों (वेना कैवा – vena cava के माध्यम से) से आता है। फिर यह रक्त दाएँ निलय (right ventricle) में जाता है, जो इसे फेफड़ों (lungs) में भेजता है (पल्मोनरी धमनी – pulmonary artery)।
- हृदय (Heart) का बायाँ कक्ष (left ventricle) ऑक्सीजनयुक्त (oxygenated) रक्त पंप (pump) करता है। यह रक्त फेफड़ों (lungs – पल्मोनरी शिरा – pulmonary vein के माध्यम से) से आता है। बायाँ निलय (left ventricle) हृदय का सबसे मजबूत कक्ष (strongest chamber) है। यह ऑक्सीजनयुक्त रक्त को शरीर के सभी भागों (महाधमनी – aorta के माध्यम से) में पंप करता है।
- हृदय (Heart) में दायाँ निलय (right ventricle) ऑक्सीजन-रहित (deoxygenated) रक्त पंप (pump) करता है। यह रक्त दाएँ अलिंद (right atrium) से प्राप्त करता है। फिर यह इसे फेफड़ों (lungs) तक (पल्मोनरी धमनी – pulmonary artery के माध्यम से) पंप करता है। फेफड़ों में, यह रक्त कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) छोड़ता है और ऑक्सीजन (O₂) ग्रहण करता है।
- हृदय (Heart) में बायाँ निलय (left ventricle) ऑक्सीजनयुक्त (oxygenated) रक्त पंप (pump) करता है। यह रक्त बाएँ अलिंद (left atrium) से प्राप्त करता है। फिर यह इसे पूरे शरीर (महाधमनी – aorta के माध्यम से) में पंप करता है। बाएँ निलय की दीवारें (walls) सबसे मोटी (thickest) होती हैं, क्योंकि इसे सबसे अधिक दबाव (pressure) के साथ पंप करना होता है।
- हृदय (Heart) का पेसमेकर (pacemaker) साइनोएट्रियल नोड (SA node – Sinoatrial node) है। यह दाएँ अलिंद (right atrium) में स्थित कोशिकाओं (cells) का एक समूह (cluster) है। यह विद्युत संकेत (electrical impulses) उत्पन्न करता है, जो हृदय की धड़कन (heartbeat) शुरू करते हैं। यह हृदय की लय (rhythm) को नियंत्रित करता है।
- हृदय (Heart) में वाल्व (valves) रक्त के प्रवाह (blood flow) को एक दिशा (one direction) में नियंत्रित करते हैं। ये रक्त को पीछे की ओर बहने (backflow) से रोकते हैं। मुख्य वाल्व हैं – ट्राइकस्पिड (tricuspid), माइट्रल (mitral), पल्मोनरी (pulmonary) और एओर्टिक (aortic)।
- हृदय (Heart) का ट्राइकस्पिड वाल्व (tricuspid valve) दायाँ कक्ष (right side) नियंत्रित करता है। यह दाएँ अलिंद (right atrium) और दाएँ निलय (right ventricle) के बीच स्थित होता है। यह सुनिश्चित करता है कि रक्त अलिंद (atrium) से निलय (ventricle) की ओर बहे और वापस न आए।
- हृदय (Heart) का माइट्रल वाल्व (mitral valve) बायाँ कक्ष (left side) नियंत्रित करता है। इसे बाइकस्पिड वाल्व (bicuspid valve) भी कहते हैं। यह बाएँ अलिंद (left atrium) और बाएँ निलय (left ventricle) के बीच स्थित होता है। यह ऑक्सीजनयुक्त रक्त (oxygenated blood) के पंप होने के दौरान वापसी (backflow) को रोकता है।
- हृदय (Heart) में वाल्व (valves) रक्त के प्रवाह (blood flow) को नियंत्रित करते हैं। एओर्टिक वाल्व (aortic valve) बाएँ निलय (left ventricle) और महाधमनी (aorta) के बीच होता है। पल्मोनरी वाल्व (pulmonary valve) दाएँ निलय (right ventricle) और पल्मोनरी धमनी (pulmonary artery) के बीच होता है।
- हृदय (Heart) की धड़कन (heartbeat) स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (autonomic nervous system) द्वारा नियंत्रित होती है। सहानुभूति तंत्र (sympathetic nervous system) धड़कन को तेज (increase) करता है। परानुकंपी तंत्र (parasympathetic nervous system – vagus nerve) धड़कन को धीमा (slow) करता है। यह शरीर की आवश्यकता (exercise, rest) के अनुसार नियंत्रित होता है।
- हृदय (Heart) के अटरिया (atria) रक्त प्राप्त करते हैं (receive blood)। दायाँ अलिंद (right atrium) शरीर (body) से ऑक्सीजन-रहित (deoxygenated) रक्त प्राप्त करता है (वेना कावा – vena cava)। बायाँ अलिंद (left atrium) फेफड़ों (lungs) से ऑक्सीजनयुक्त (oxygenated) रक्त प्राप्त करता है (पल्मोनरी शिरा – pulmonary vein)।
- हृदय (Heart) के निलय (ventricles) रक्त पंप करते हैं (pump blood)। दायाँ निलय (right ventricle) ऑक्सीजन-रहित (deoxygenated) रक्त को फेफड़ों (lungs) में पंप करता है (पल्मोनरी धमनी – pulmonary artery)। बायाँ निलय (left ventricle) ऑक्सीजनयुक्त (oxygenated) रक्त को पूरे शरीर (body) में पंप करता है (महाधमनी – aorta)।
- हृदय (Heart) से धमनियाँ (arteries) रक्त को बाहर ले जाती हैं (carry blood away)। महाधमनी (aorta) और पल्मोनरी धमनी (pulmonary artery) मुख्य धमनियाँ हैं। धमनियों में ऑक्सीजनयुक्त रक्त (oxygenated blood) होता है (पल्मोनरी धमनी को छोड़कर)।
- हृदय (Heart) में शिराएँ (veins) रक्त को वापस लाती हैं (bring blood back)। वेना कावा (vena cava – superior and inferior) और पल्मोनरी शिराएँ (pulmonary veins) मुख्य शिराएँ हैं। शिराओं में ऑक्सीजन-रहित रक्त (deoxygenated blood) होता है (पल्मोनरी शिराओं को छोड़कर)।
- हृदय (Heart) की पल्मोनरी धमनी (pulmonary artery) फेफड़ों (lungs) को ऑक्सीजन-रहित (deoxygenated) रक्त ले जाती है। यह एकमात्र धमनी (artery) है जो ऑक्सीजन-रहित रक्त ले जाती है। फेफड़ों में, यह रक्त कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) छोड़ता है और ऑक्सीजन (O₂) ग्रहण करता है।
- हृदय (Heart) की पल्मोनरी शिरा (pulmonary vein) फेफड़ों (lungs) से ऑक्सीजनयुक्त (oxygenated) रक्त लाती है। यह एकमात्र शिरा (vein) है जो ऑक्सीजनयुक्त रक्त ले जाती है। यह रक्त बाएँ अलिंद (left atrium) में आता है, जिसे फिर बायाँ निलय (left ventricle) पूरे शरीर में पंप करता है।
- मस्तिष्क (Brain) तंत्रिका तंत्र (nervous system) का नियंत्रण केंद्र (control center) है। यह शरीर के सभी कार्यों (functions) – सोच (thinking), स्मृति (memory), गति (movement), भावनाएँ (emotions), श्वसन (breathing) और हृदय गति (heart rate) को नियंत्रित करता है। यह लगभग 1.4 किलोग्राम वजन का होता है।
- मस्तिष्क (Brain) का सेरिब्रल कॉर्टेक्स (cerebral cortex) सोच (thinking) का केंद्र है। यह मस्तिष्क की सबसे बाहरी परत (outer layer) है। यह चेतना (consciousness), भाषा (language), स्मृति (memory), ध्यान (attention) और निर्णय लेने (decision making) के लिए जिम्मेदार है।
- मस्तिष्क (Brain) का सेरिबेलम (cerebellum) संतुलन (balance) और समन्वय (coordination) बनाए रखता है। यह मस्तिष्क के पीछे (back) के भाग में स्थित होता है। यह स्वैच्छिक गतिविधियों (voluntary movements – चलना, लिखना, बोलना) को सुचारू (smooth) और समन्वित (coordinated) बनाता है। यह शरीर का संतुलन (body balance) भी बनाए रखता है।
- मस्तिष्क (Brain) का हाइपोथैलेमस (hypothalamus) हार्मोन (hormones) नियंत्रण करता है। यह मस्तिष्क का एक छोटा (small) लेकिन महत्वपूर्ण भाग है। यह पिट्यूटरी ग्रंथि (pituitary gland) को नियंत्रित करता है, जो मास्टर ग्रंथि (master gland) है। यह शरीर के तापमान (body temperature), भूख (hunger), प्यास (thirst) और नींद (sleep) को भी नियंत्रित करता है।
- मस्तिष्क (Brain) का मेडुला (medulla oblongata) श्वसन (breathing) नियंत्रित करता है। यह मस्तिष्क तंत्र (brainstem) का भाग है। यह हृदय गति (heart rate), रक्तचाप (blood pressure) और श्वसन दर (respiratory rate) जैसे स्वायत्त (autonomic) कार्यों को नियंत्रित करता है। यह जीवन के लिए आवश्यक (vital) कार्यों का केंद्र है।
- मस्तिष्क (Brain) का थैलेमस (thalamus) संवेदी संदेश (sensory messages) रिले (relay) करता है। यह मस्तिष्क के केंद्र (center) के पास स्थित होता है। यह आँखों, कानों, त्वचा और अन्य इंद्रियों (senses) से आने वाले संवेदी संकेतों (sensory signals) को प्राप्त करता है और उन्हें सेरिब्रल कॉर्टेक्स (cerebral cortex) के उपयुक्त भागों (appropriate areas) तक पहुँचाता है (relay)।
- मस्तिष्क (Brain) का पॉन्स (pons) मस्तिष्क (brain) और मेरुदंड (spinal cord) को जोड़ता है। यह मस्तिष्क तंत्र (brainstem) का भाग है। यह मस्तिष्क के विभिन्न भागों के बीच संचार (communication) में मदद करता है। यह श्वसन (breathing), नींद (sleep) और स्वप्न (dreaming) में भी भूमिका निभाता है।
- मस्तिष्क (Brain) का अमिग्डाला (amygdala) भावनाओं (emotions) को नियंत्रित करता है। यह भय (fear), क्रोध (anger), चिंता (anxiety) और आनंद (pleasure) जैसी भावनाओं के प्रसंस्करण (processing) में शामिल है। यह लिंबिक प्रणाली (limbic system) का एक भाग है।
- मस्तिष्क (Brain) का हिप्पोकैम्पस (hippocampus) स्मृति (memory) का केंद्र है। यह नई यादों (new memories) के निर्माण (formation) और उन्हें संग्रहीत करने (storage) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह दीर्घकालिक स्मृति (long-term memory) और स्थानिक स्मृति (spatial memory) के लिए आवश्यक है।
- मस्तिष्क (Brain) का फ्रंटल लोब (frontal lobe) निर्णय लेने (decision making) में मदद करता है। यह मस्तिष्क के सबसे आगे (front) के भाग में स्थित होता है। यह तर्क (reasoning), योजना बनाना (planning), समस्या-समाधान (problem-solving), व्यक्तित्व (personality) और स्वैच्छिक गतिविधियों (voluntary movements) के लिए जिम्मेदार है।
- मस्तिष्क (Brain) का पैरिएटल लोब (parietal lobe) संवेदी जानकारी (sensory information) संसाधित (process) करता है। यह मस्तिष्क के ऊपरी-पिछले (upper-back) भाग में स्थित होता है। यह स्पर्श (touch), दर्द (pain), तापमान (temperature) और दबाव (pressure) की अनुभूति (sensation) को संसाधित करता है। यह स्थानिक जागरूकता (spatial awareness) में भी मदद करता है।
- मस्तिष्क (Brain) का टेम्पोरल लोब (temporal lobe) श्रवण (hearing) और स्मृति (memory) में मदद करता है। यह मस्तिष्क के किनारे (side) पर, कानों (ears) के पास स्थित होता है। यह सुनने (hearing) की क्षमता, भाषा समझने (language comprehension), और स्मृति (memory) के लिए जिम्मेदार होता है। इसमें हिप्पोकैम्पस (hippocampus) और अमिग्डाला (amygdala) स्थित होते हैं।
- मस्तिष्क (Brain) का ऑक्सिपिटल लोब (occipital lobe) दृष्टि (vision) संसाधित (process) करता है। यह मस्तिष्क के पिछले (back) भाग में स्थित होता है। यह आँखों (eyes) से प्राप्त दृश्य संकेतों (visual signals) को प्राप्त करता है और उन्हें छवियों (images) में बदलता है। यह रंग (color), गति (motion) और पहचान (recognition) को समझने में मदद करता है।
- मस्तिष्क (Brain) में न्यूरॉन्स (neurons) संदेश (messages) प्रसारित (transmit) करते हैं। न्यूरॉन्स तंत्रिका तंत्र (nervous system) की मूल कोशिकाएँ (basic cells) हैं। वे विद्युत (electrical) और रासायनिक (chemical) संकेतों (signals) का उपयोग करके एक दूसरे से संचार करते हैं।
- मस्तिष्क (Brain) में सेरिब्रोस्पाइनल द्रव (CSF – Cerebrospinal Fluid) मस्तिष्क (brain) की रक्षा (protect) करता है। यह एक स्पष्ट (clear), रंगहीन (colorless) तरल (fluid) है। यह मस्तिष्क (brain) और मेरुदंड (spinal cord) को चोटों (injuries) से बचाने के लिए कुशन (cushion) का काम करता है। यह पोषक तत्व (nutrients) प्रदान करता है और अपशिष्ट (waste) हटाता है।
- मस्तिष्क (Brain) में मेनिन्जेस (meninges) परतें (layers) मस्तिष्क (brain) की रक्षा (protect) करती हैं। ये तीन सुरक्षात्मक झिल्लियाँ (protective membranes) होती हैं – ड्यूरा मेटर (dura mater), अरैक्नॉयड मेटर (arachnoid mater) और पिया मेटर (pia mater)। ये मस्तिष्क (brain) और मेरुदंड (spinal cord) को ढकती (cover) और सुरक्षित (protect) करती हैं।
- फेफड़े (Lungs) श्वसन (respiration) के मुख्य अंग (primary organs) हैं। मनुष्यों में दो फेफड़े (left and right lung) होते हैं। ये वक्ष गुहा (thoracic cavity) में स्थित होते हैं। इनका मुख्य कार्य रक्त (blood) और वायु (air) के बीच गैसों (gases – O₂ और CO₂) का विनिमय (exchange) करना है।
- फेफड़ों (Lungs) में एल्वियोली (alveoli) गैस विनिमय (gas exchange) करते हैं। एल्वियोली छोटी, हवा से भरी (air-filled) थैलियाँ (sacs) होती हैं, जो केशिकाओं (capillaries) से घिरी होती हैं। यहाँ ऑक्सीजन (O₂) रक्त में जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) रक्त से बाहर निकलती है।
- फेफड़े (Lungs) कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂ – carbon dioxide) बाहर निकालते हैं। यह शरीर की कोशिकाओं (body cells) में चयापचय (metabolism) का एक अपशिष्ट उत्पाद (waste product) है। रक्त CO₂ को फेफड़ों (lungs) तक लाता है, जहाँ से इसे साँस छोड़ने (exhalation) के दौरान बाहर निकाल दिया जाता है।
- फेफड़ों (Lungs) में ब्रॉन्कियोल्स (bronchioles) हवा (air) वितरित (distribute) करते हैं। ये श्वसनिका (bronchi) की छोटी शाखाएँ (small branches) होती हैं। ये हवा को एल्वियोली (alveoli) तक पहुँचाती हैं। इनकी दीवारों में चिकनी मांसपेशियाँ (smooth muscles) होती हैं, जो हवा के प्रवाह (airflow) को नियंत्रित कर सकती हैं।
- फेफड़ों (Lungs) में डायाफ्राम (diaphragm) श्वसन (breathing) में मदद करता है। डायाफ्राम एक गुंबद के आकार की (dome-shaped) मांसपेशी (muscle) है, जो वक्ष (chest) और उदर (abdominal) गुहाओं को अलग करती है। साँस लेते समय (inhalation) यह सिकुड़ता (contracts) और नीचे आता है, जिससे फेफड़ों में हवा भरती है। साँस छोड़ते समय (exhalation) यह शिथिल (relaxes) होता है।
- फेफड़ों (Lungs) में ट्रेकिया (trachea – श्वासनली / windpipe) हवा (air) ले जाती है। यह एक कठोर (rigid) नलिका (tube) है, जो गले (throat) से छाती (chest) तक जाती है। यह उपास्थि के छल्लों (rings of cartilage) से बनी होती है, जो इसे खुला रखने में मदद करती है। यह फेफड़ों (lungs) तक हवा पहुँचाने का मुख्य मार्ग है।
- फेफड़ों (Lungs) में लैरींक्स (larynx – स्वर यंत्र / voice box) स्वर (voice) उत्पन्न करता है। यह गले (throat) के ऊपरी भाग में स्थित होता है। इसमें स्वर रज्जु (vocal cords) होते हैं, जो हवा के पारित होने (passage of air) पर कंपन (vibrate) करते हैं, जिससे ध्वनि (sound) उत्पन्न होती है।
- फेफड़ों (Lungs) में श्वसनिका (bronchi) हवा (air) वितरित (distribute) करती है। ट्रेकिया (trachea) दो मुख्य श्वसनिकाओं (primary bronchi – left and right bronchus) में विभाजित (divides) होती है, जो प्रत्येक फेफड़े (each lung) में जाती हैं। ये आगे चलकर छोटी श्वसनिकाओं (secondary and tertiary bronchi) और फिर ब्रॉन्कियोल्स (bronchioles) में विभाजित होती हैं।
- यकृत (Liver) शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग (largest internal organ) है। यह लगभग 1.5 किलोग्राम वजन का होता है। यह पेट के ऊपरी दाएँ भाग (upper right quadrant of abdomen) में स्थित होता है। यह 500 से अधिक महत्वपूर्ण कार्य (vital functions) करता है।
- यकृत (Liver) विषाक्त पदार्थों (toxins) को डिटॉक्सिफाई (detoxify) करता है। यह रक्त (blood) से हानिकारक पदार्थों (harmful substances) – जैसे दवाएँ (drugs), अल्कोहल (alcohol) और अमोनिया (ammonia) – को हटाता है और उन्हें हानिरहित यौगिकों (harmless compounds) में बदल देता है।
- यकृत (Liver) पित्त (bile) स्रावित करता है (secretes)। पित्त (bile) एक पीला-हरा (yellow-green) तरल (fluid) है। यह पित्ताशय (gallbladder) में संग्रहीत (stored) होता है और छोटी आंत (small intestine) में स्रावित (released) होता है। यह वसा (fats) के पाचन (digestion) और अवशोषण (absorption) में मदद करता है।
- यकृत (Liver) में ग्लूकोज (glucose) का भंडारण (storage) होता है। यह अतिरिक्त ग्लूकोज (excess glucose) को ग्लाइकोजन (glycogen) के रूप में संग्रहीत (store) करता है। जब शरीर को ऊर्जा (energy) की आवश्यकता होती है, तो यह ग्लाइकोजन (glycogen) को वापस ग्लूकोज (glucose) में बदलकर रक्तप्रवाह (bloodstream) में छोड़ देता है। यह प्रक्रिया ग्लाइकोजेनोलिसिस (glycogenolysis) कहलाती है।
- यकृत (Liver) में प्रोटीन संश्लेषण (protein synthesis) होता है। यह रक्त प्लाज्मा प्रोटीन (blood plasma proteins) – जैसे एल्ब्यूमिन (albumin) और फाइब्रिनोजेन (fibrinogen) – का संश्लेषण करता है। यह थक्का कारक (clotting factors) भी बनाता है।
- यकृत (Liver) में विटामिन A (Vitamin A) का भंडारण (storage) होता है। यह विटामिन A, D, E, K और B₁₂ जैसे वसा-घुलनशील विटामिन (fat-soluble vitamins) का भंडारण करता है। यह आयरन (iron) और ताँबा (copper) जैसे खनिजों (minerals) को भी संग्रहीत करता है।
- फेफड़े (Lungs) श्वसन (respiration) के मुख्य अंग (primary organs) हैं। मनुष्यों में दो फेफड़े (left and right lung) होते हैं। ये वक्ष गुहा (thoracic cavity) में स्थित होते हैं। इनका मुख्य कार्य रक्त (blood) और वायु (air) के बीच गैसों (gases – O₂ और CO₂) का विनिमय (exchange) करना है। (पुनरावृत्ति से बचने के लिए एक बार ही लिखा गया है)
- छोटी आंत (Small intestine) पाचन (digestion) और अवशोषण (absorption) का मुख्य स्थल (main site) है। यह लगभग 6 मीटर (20 फीट) लंबी होती है। यहाँ पाचक एंजाइम (digestive enzymes) कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा (carbohydrates, proteins, and fats) को तोड़ते हैं। पोषक तत्व (nutrients) यहाँ से रक्त (blood) में अवशोषित (absorbed) होते हैं।
- छोटी आंत (Small intestine) में विली (villi) पोषक अवशोषण (nutrient absorption) में मदद करते हैं। विली (villi) छोटी, उँगली के आकार की (finger-like) प्रक्षेपण (projections) होती हैं, जो आंत की दीवार (intestinal wall) पर होती हैं। ये अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र (surface area) को बहुत अधिक बढ़ा देती हैं। प्रत्येक विलस (villus) में रक्त केशिकाएँ (blood capillaries) और लैक्टियल (lacteal – lymph vessel) होती हैं।
- छोटी आंत (Small intestine) में लैक्टियल (lacteal) वसा (fats) अवशोषित (absorb) करते हैं। लैक्टियल (lacteal) लसीका वाहिकाएँ (lymphatic vessels) हैं, जो प्रत्येक विलस (villi) के केंद्र में स्थित होती हैं। वे पची हुई वसा (digested fats) को अवशोषित करके लसीका तंत्र (lymphatic system) में भेज देते हैं, जो अंततः रक्तप्रवाह (bloodstream) में मिल जाता है।
- छोटी आंत (Small intestine) में पाचक एंजाइम (digestive enzymes) स्रावित (secrete) होते हैं। ये एंजाइम अग्न्याशय (pancreas) और आंत की दीवार (intestinal wall) से आते हैं। इनमें पेप्सिन (pepsin – प्रोटीन के लिए), लाइपेज (lipase – वसा के लिए), एमाइलेज (amylase – स्टार्च के लिए), माल्टेज (maltase), सुक्रेज (sucrase), लैक्टेज (lactase) और पेप्टिडेज (peptidases) शामिल हैं।
- अग्न्याशय (Pancreas) इंसुलिन (insulin) और ग्लूकागन (glucagon) स्रावित (secretes) करता है। ये हार्मोन (hormones) हैं जो रक्त शर्करा स्तर (blood sugar level) को नियंत्रित करते हैं। इंसुलिन (insulin) रक्त शर्करा (blood sugar) को कम करता है, जबकि ग्लूकागन (glucagon) इसे बढ़ाता है। अग्न्याशय एक अंतःस्रावी (endocrine – हार्मोन) और बहिःस्रावी (exocrine – पाचक एंजाइम) दोनों ग्रंथि है।
- अग्न्याशय (Pancreas) में लैंगरहैंस की कोशिकाएँ (Islets of Langerhans) होती हैं। ये अग्न्याशय में स्थित कोशिकाओं के छोटे समूह (clusters) हैं। ये हार्मोन (hormones) उत्पन्न करती हैं। बीटा कोशिकाएँ (β-cells) इंसुलिन (insulin) बनाती हैं, जबकि अल्फा कोशिकाएँ (α-cells) ग्लूकागन (glucagon) बनाती हैं। डेल्टा कोशिकाएँ (δ-cells) सोमाटोस्टेटिन (somatostatin) बनाती हैं, जो इंसुलिन और ग्लूकागन के स्राव को नियंत्रित करता है।
- अग्न्याशय (Pancreas) में ट्रिप्सिन (trypsin) एंजाइम (enzyme) बनता है। यह एक प्रोटीज (protease – प्रोटीन पाचक एंजाइम) है। यह अग्न्याशय में निष्क्रिय रूप में (inactive form – trypsinogen) बनता है और छोटी आंत (small intestine) में सक्रिय होता है। यह प्रोटीन (proteins) को पॉलीपेप्टाइड्स (polypeptides) और फिर अमीनो अम्लों (amino acids) में तोड़ता है।
- अग्न्याशय (Pancreas) में ग्लूकागन (glucagon) रक्त शर्करा (blood sugar) बढ़ाता है। यह अल्फा कोशिकाओं (α-cells – Islets of Langerhans) द्वारा स्रावित होता है। जब रक्त शर्करा स्तर (blood glucose level) कम होता है (hypoglycemia), तो ग्लूकागन यकृत (liver) को संग्रहीत ग्लाइकोजन (stored glycogen) को ग्लूकोज (glucose) में बदलने और रक्त में छोड़ने का संकेत देता है।
- अग्न्याशय (Pancreas) इंसुलिन (insulin) रक्त शर्करा (blood sugar) कम करता है। यह बीटा कोशिकाओं (β-cells – Islets of Langerhans) द्वारा स्रावित होता है। यह कोशिकाओं को रक्त से ग्लूकोज (glucose) लेने में मदद करता है। मधुमेह (diabetes) में इंसुलिन का उत्पादन (production) कम हो जाता है या कोशिकाएँ इसके प्रति प्रतिरोधी (resistant) हो जाती हैं।
- गुर्दे (Kidneys) रक्त (blood) को छानते हैं (filter)। मनुष्यों में दो गुर्दे (kidneys) होते हैं। ये पेट के पीछे (back of abdomen), रीढ़ के दोनों ओर (on either side of the spine) स्थित होते हैं। ये रक्त से अपशिष्ट (waste – यूरिया), अतिरिक्त पानी (excess water) और इलेक्ट्रोलाइट्स (electrolytes) को हटाकर मूत्र (urine) बनाते हैं।
- गुर्दे (Kidneys) में नेफ्रॉन (nephrons) रक्त (blood) को छानते हैं (filter)। नेफ्रॉन (nephron) गुर्दे की मूल कार्यात्मक इकाई (functional unit) है। प्रत्येक गुर्दे में लगभग 10 लाख नेफ्रॉन (nephrons) होते हैं। प्रत्येक नेफ्रॉन (nephron) में एक ग्लोमेरूलस (glomerulus – केशिकाओं का एक गुच्छा – tuft of capillaries) और एक रीनल ट्यूब्यूल (renal tubule) होता है।
- गुर्दे (Kidneys) में ग्लोमेरूलस (glomerulus) रक्त (blood) छानता है (filters)। ग्लोमेरूलस (glomerulus) केशिकाओं (capillaries) का एक गुच्छा (network) है। यहाँ उच्च रक्तचाप (high blood pressure) के कारण पानी (water), ग्लूकोज (glucose), नमक (salts) और यूरिया (urea) जैसे छोटे अणु (small molecules) रक्त से छानकर (filter) बोमन कैप्सूल (Bowman's capsule) में आ जाते हैं। बड़े अणु (जैसे प्रोटीन – proteins) और रक्त कोशिकाएँ (blood cells) रक्त में ही रहते हैं।
- गुर्दे (Kidneys) यूरिया (urea) को उत्सर्जित (excrete) करते हैं। यूरिया (urea) प्रोटीन (protein) चयापचय (metabolism) का एक अपशिष्ट उत्पाद (waste product) है। यह यकृत (liver) में बनता है और रक्त (blood) द्वारा गुर्दों (kidneys) तक लाया जाता है। गुर्दे (kidneys) इसे रक्त से छानकर (filter) मूत्र (urine) के रूप में बाहर निकाल देते हैं।
- गुर्दे (Kidneys) में रेनिन (renin) रक्तचाप (blood pressure) नियंत्रित (regulate) करता है। यह एक एंजाइम (enzyme) है, जो गुर्दे की जक्स्टाग्लोमेरुलर कोशिकाओं (juxtaglomerular cells) द्वारा स्रावित होता है। जब रक्तचाप कम होता है, तो रेनिन (renin) एक श्रृंखला प्रतिक्रिया (cascade – RAAS – Renin-Angiotensin-Aldosterone System) शुरू करता है, जो अंततः रक्तचाप (blood pressure) को बढ़ाता है।
- गुर्दे (Kidneys) में एरिथ्रोपोइटिन (erythropoietin – EPO) रक्त कोशिका निर्माण (blood cell formation) में मदद करता है। यह एक हार्मोन (hormone) है, जो गुर्दों (kidneys) द्वारा स्रावित होता है। यह अस्थि मज्जा (bone marrow) को लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs – red blood cells) का उत्पादन बढ़ाने के लिए उत्तेजित (stimulate) करता है।
- गुर्दे (Kidneys) में यूरेटर (ureter) मूत्र (urine) को मूत्राशय (urinary bladder) तक ले जाता है। यूरेटर (ureter) एक पेशीय नलिका (muscular tube) है, जो प्रत्येक गुर्दे (kidney) को मूत्राशय (urinary bladder) से जोड़ती है। यह क्रमाकुंचन (peristalsis – मांसपेशियों के संकुचन और विश्राम) के माध्यम से मूत्र को गुर्दों से मूत्राशय तक ले जाता है।
- गुर्दे (Kidneys) में मूत्र (urine) का निर्माण (formation) होता है। यह प्रक्रिया तीन चरणों में होती है – ग्लोमेरुलर निस्पंदन (glomerular filtration), ट्यूब्यूलर पुनर्अवशोषण (tubular reabsorption) और ट्यूब्यूलर स्राव (tubular secretion)। अंत में एकत्रित मूत्र (final urine) अपशिष्ट उत्पादों (urea, creatinine, uric acid) और अतिरिक्त पानी का एक समाधान (solution) होता है।
- त्वचा (Skin) शरीर का सबसे बड़ा अंग (largest organ) है। इसका कुल सतह क्षेत्र (surface area) लगभग 2 वर्ग मीटर होता है। यह शरीर के भीतर के अंगों (internal organs) को बाहरी वातावरण (external environment) से बचाती है। यह शरीर के तापमान (body temperature) को नियंत्रित करने में भी मदद करती है।
- त्वचा (Skin) में मेलानिन (melanin) रंग (colour) प्रदान करता है। मेलानिन (melanin) एक वर्णक (pigment) है, जो मेलानोसाइट्स (melanocytes) नामक कोशिकाओं (cells) द्वारा निर्मित होता है। यह त्वचा (skin) को उसका रंग (colour) देता है। यह सूर्य (sun) से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV – ultraviolet) किरणों से त्वचा की रक्षा (protect) करता है।
- त्वचा (Skin) में स्वेद ग्रंथियाँ (sweat glands – sudoriferous glands) पसीना (sweat) स्रावित (secrete) करती हैं। पसीना (sweat) मुख्य रूप से पानी (water) और लवण (salts – NaCl) से बना होता है। यह शरीर के तापमान (body temperature) को नियंत्रित करने में मदद करता है (वाष्पीकरण – evaporation द्वारा ठंडक – cooling)। यह शरीर से यूरिया (urea) जैसे कुछ अपशिष्ट उत्पादों (waste products) को हटाने में भी मदद करता है।
- त्वचा (Skin) में सिबेशियस ग्रंथियाँ (sebaceous glands) तेल (oil – sebum) स्रावित (secrete) करती हैं। ये ग्रंथियाँ बालों के रोम (hair follicles) से जुड़ी होती हैं। सीबम (sebum) त्वचा (skin) और बालों (hair) को चिकनाई (lubricate) और सूखने से बचाता है। यह त्वचा (skin) को जलरोधी (waterproof) और लचीला (flexible) भी बनाता है। यह एक कमजोर जीवाणुरोधी (antibacterial) और कवकरोधी (antifungal) सुरक्षा भी प्रदान करता है।
- त्वचा (Skin) में डर्मिस (dermis) परत (layer) होती है। डर्मिस (dermis) एपिडर्मिस (epidermis) के ठीक नीचे स्थित मध्य परत (middle layer) है। यह संयोजी ऊतक (connective tissue) से बनी होती है। इसमें रक्त वाहिकाएँ (blood vessels), तंत्रिका अंत (nerve endings), स्वेद ग्रंथियाँ (sweat glands), सिबेशियस ग्रंथियाँ (sebaceous glands) और बालों के रोम (hair follicles) होते हैं।
- त्वचा (Skin) में एपिडर्मिस (epidermis) बाहरी परत (outer layer) है। यह केराटिनाइज्ड स्क्वैमस एपिथेलियम (keratinized stratified squamous epithelium) से बनी होती है। इसकी सबसे बाहरी परत में केराटिन (keratin – एक प्रोटीन) से भरी मृत कोशिकाएँ (dead cells) होती हैं, जो एक सुरक्षात्मक, जलरोधी (waterproof) बाधा (barrier) बनाती हैं।
- त्वचा (Skin) में केराटिन कोशिकाएँ (keratinocytes) सुरक्षा (protection) देती हैं। ये एपिडर्मिस (epidermis) की मुख्य कोशिकाएँ (primary cells) हैं (लगभग 95%)। ये केराटिन (keratin) नामक एक कठोर (tough), रेशेदार (fibrous) प्रोटीन (protein) का उत्पादन करती हैं। केराटिन (keratin) त्वचा (skin) को मजबूत, जलरोधी (waterproof) और रोगाणुओं (germs) और रसायनों (chemicals) के प्रति प्रतिरोधी (resistant) बनाता है।
- रेटिना (Retina) आँख (eye) का प्रकाश-संवेदी (light-sensitive) हिस्सा है। यह आँख (eye) के पिछले हिस्से (back) की अंदरूनी परत (inner layer) है। इसमें फोटोरिसेप्टर कोशिकाएँ (photoreceptor cells – रॉड्स – rods और कोन्स – cones) होती हैं। ये प्रकाश (light) को विद्युत संकेतों (electrical signals) में बदलती हैं, जो ऑप्टिक तंत्रिका (optic nerve) के माध्यम से मस्तिष्क (brain) को भेजे जाते हैं।
- आँख (Eye) में लेंस (lens) छवि (image) को केंद्रित (focus) करता है। यह एक पारदर्शी (transparent), लचीला (flexible) संरचना है। यह आइरिस (iris) के पीछे (behind) स्थित होता है। यह रेटिना (retina) पर प्रकाश (light) को केंद्रित करने के लिए अपना आकार (shape) बदल सकता है (समंजन – accommodation process)।
- आँख (Eye) का कॉर्निया (cornea) प्रकाश (light) को केंद्रित (focus) करता है। यह आँख (eye) का सबसे बाहरी (outermost), पारदर्शी (transparent) भाग है। यह आँख में प्रवेश करने वाले अधिकांश प्रकाश (light) को केंद्रित (focus) करने के लिए जिम्मेदार होता है। यह एक स्थिर (fixed) फोकल लंबाई (focal length) है।
- आँख (Eye) में रॉड कोशिकाएँ (rod cells) रात में दृष्टि (night vision) देती हैं। ये फोटोरिसेप्टर कोशिकाएँ (photoreceptor cells) हैं, जो मंद प्रकाश (dim light) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील (sensitive) होती हैं। वे रंग (colour) में भेद नहीं कर पाती हैं, केवल प्रकाश की तीव्रता (intensity) और गति (movement) का पता लगाती हैं।
- आँख (Eye) में कोन कोशिकाएँ (cone cells) रंग दृष्टि (colour vision) देती हैं। ये फोटोरिसेप्टर कोशिकाएँ (photoreceptor cells) हैं, जो तेज प्रकाश (bright light) में सक्रिय (active) होती हैं। ये लाल (red), हरा (green) और नीला (blue) प्रकाश के लिए अलग-अलग प्रकार की (three types) होती हैं। ये उच्च तीक्ष्णता (sharpness) और विवरण (detail) प्रदान करती हैं।
- आँख (Eye) में प्यूपिल (pupil) प्रकाश (light) को नियंत्रित (control) करता है। प्यूपिल (pupil) आइरिस (iris) के केंद्र (center) में एक छिद्र (hole) है। इसका आकार (size) आइरिस (iris) की मांसपेशियों (muscles) द्वारा बदला जाता है। तेज रोशनी (bright light) में यह सिकुड़ता (constricts) है (कम रोशनी आने देता है), और मंद रोशनी (dim light) में यह फैलता (dilates) है (अधिक रोशनी आने देता है)।
- आँख (Eye) में आइरिस (iris) रंगीन भाग (coloured part) है। यह प्यूपिल (pupil) के चारों ओर का रंगीन (coloured) भाग है। आइरिस (iris) में मांसपेशियाँ (muscles) होती हैं, जो प्यूपिल (pupil) के आकार (size) को नियंत्रित करती हैं। यह आँख (eye) में प्रवेश करने वाले प्रकाश (light) की मात्रा (amount) को नियंत्रित (control) करने में मदद करता है।
- आँख (Eye) में स्क्लेरा (sclera) सफेद भाग (white part) है। यह आँख (eye) की बाहरी परत (outer layer) का रेशेदार (fibrous), सफेद (white), सुरक्षात्मक (protective) ऊतक (tissue) है। यह आँख (eye) को आकार (shape) देता है और मांसपेशियाँ (muscles) जो आँख (eye) को घुमाती हैं, इससे जुड़ी होती हैं।
- आँख (Eye) में लेंस (lens) छवि (image) को रेटिना (retina) पर केंद्रित (focus) करता है। यह प्रकाश (light) के अपवर्तन (refraction) के सिद्धांत पर काम करता है। लेंस (lens) की वक्रता (curvature) को सिलिअरी मांसपेशियाँ (ciliary muscles) द्वारा समायोजित (adjust) किया जाता है, जिससे निकट (near) और दूर (far) दोनों की वस्तुओं (objects) को साफ देखा जा सकता है (समंजन – accommodation)।
- थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid gland) थायरोक्सिन (thyroxine – T₄) हार्मोन (hormone) बनाती है। यह गर्दन (neck) के सामने (front) स्थित एक तितली के आकार की (butterfly-shaped) ग्रंथि है। थायरोक्सिन (thyroxine) शरीर के चयापचय (metabolism – ऊर्जा उत्पादन और उपयोग) को नियंत्रित करता है। यह वृद्धि (growth) और विकास (development) के लिए भी आवश्यक है।
- मानव शरीर (Human body) में 12 जोड़ी कपाल तंत्रिकाएँ (12 pairs of cranial nerves) होती हैं। ये तंत्रिकाएँ (nerves) सीधे मस्तिष्क (brain) (मेरुदंड के बजाय) से निकलती हैं। ये मुख्य रूप से सिर (head) और गर्दन (neck) के क्षेत्रों (areas) को संकेत (signals) भेजती हैं। उदाहरण – ऑप्टिक तंत्रिका (optic nerve – दृष्टि), घ्राण तंत्रिका (olfactory nerve – गंध) और वेगस तंत्रिका (vagus nerve – कई आंतरिक अंगों को)।
- मांसपेशियाँ (Muscles) तीन प्रकार की (three types) होती हैं – कंकाल (skeletal), चिकनी (smooth), हृदय (cardiac)। कंकाल (skeletal) – स्वैच्छिक (voluntary), हड्डियों (bones) से जुड़ी। चिकनी (smooth) – अनैच्छिक (involuntary), अंगों (organs – पेट, आंत) की दीवारों (walls) में। हृदय (cardiac) – अनैच्छिक (involuntary), केवल हृदय (heart) में पाई जाती है।
- पाचन तंत्र (Digestive system) भोजन (food) को ऊर्जा (energy) में बदलता है। यह भोजन (food) को तोड़ता है (break down) छोटे अणुओं (small molecules – पोषक तत्वों) में। फिर ये पोषक तत्व (nutrients) रक्त (blood) द्वारा अवशोषित (absorbed) और कोशिकाओं (cells) तक पहुँचाए जाते हैं। कोशिकाएँ (cells) इन पोषक तत्वों (nutrients) का उपयोग करके ATP (ऊर्जा – energy) बनाती हैं।
- तंत्रिका कोशिकाएँ (Nerve cells – neurons) संदेश (messages) प्रसारित (transmit) करती हैं। न्यूरॉन्स (neurons) तंत्रिका तंत्र (nervous system) की मूल कार्यात्मक इकाइयाँ (basic functional units) हैं। वे विद्युत आवेगों (electrical impulses – action potentials) के रूप में संदेश ले जाते हैं। उनके बीच संचार (communication) रासायनिक संदेशवाहकों (chemical messengers – न्यूरोट्रांसमीटर – neurotransmitters) के माध्यम से होता है।
- हृदय (Heart) की धड़कन (heartbeat) स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (autonomic nervous system) द्वारा नियंत्रित होती है। यह हमारी इच्छा के बिना (involuntarily) काम करती है। (पुनरावृत्ति से बचने के लिए एक बार ही लिखा गया है)