रुधिर परिवहन तंत्र
- हृदय (Heart) रुधिर परिवहन तंत्र (circulatory system) का मुख्य अंग है। यह एक मांसपेशीय पंप (muscular pump) है, जो पूरे शरीर में रक्त (blood) का परिवहन करता है। यह लगभग मुट्ठी (fist) के आकार का होता है। यह छाती (chest) के बाईं ओर स्थित होता है।
- मानव हृदय (Human heart) में चार कक्ष (four chambers) होते हैं। दो ऊपरी कक्ष (upper chambers) – अटरिया (atria – left and right atrium) और दो निचले कक्ष (lower chambers) – निलय (ventricles – left and right ventricle)। यह संरचना ऑक्सीजनयुक्त (oxygenated) और ऑक्सीजन-रहित (deoxygenated) रक्त को अलग रखती है।
- हृदय (Heart) के अटरिया (Atria) रक्त प्राप्त करते हैं (receive blood)। दायाँ अलिंद (right atrium) वेना कावा (vena cava) से ऑक्सीजन-रहित (deoxygenated) रक्त प्राप्त करता है। बायाँ अलिंद (left atrium) फेफड़ों (lungs) से पल्मोनरी शिराओं (pulmonary veins) द्वारा ऑक्सीजनयुक्त (oxygenated) रक्त प्राप्त करता है।
- हृदय (Heart) के निलय (Ventricles) रक्त पंप करते हैं (pump blood)। दायाँ निलय (right ventricle) ऑक्सीजन-रहित (deoxygenated) रक्त को पल्मोनरी धमनी (pulmonary artery) के माध्यम से फेफड़ों (lungs) में पंप करता है। बायाँ निलय (left ventricle) ऑक्सीजनयुक्त (oxygenated) रक्त को महाधमनी (aorta) के माध्यम से पूरे शरीर में पंप करता है।
- हृदय का दायाँ कक्ष (Right side) ऑक्सीजन-रहित रक्त (deoxygenated blood) लेता है। दायाँ अलिंद (right atrium) शरीर से वापस आने वाला ऑक्सीजन-रहित रक्त प्राप्त करता है। यह रक्त फिर दाएँ निलय (right ventricle) में जाता है। फिर इसे फेफड़ों (lungs) में पंप किया जाता है।
- हृदय का बायाँ कक्ष (Left side) ऑक्सीजनयुक्त रक्त (oxygenated blood) पंप करता है। बायाँ अलिंद (left atrium) फेफड़ों (lungs) से ऑक्सीजनयुक्त रक्त प्राप्त करता है। यह रक्त फिर बाएँ निलय (left ventricle) में जाता है। बायाँ निलय (left ventricle) इसे महाधमनी (aorta) के माध्यम से पूरे शरीर में पंप करता है।
- हृदय (Heart) में वाल्व (valves) रक्त के विपरीत प्रवाह (backflow) को रोकते हैं। ये रक्त को एक दिशा (one direction) में बहने देते हैं। मुख्य वाल्व हैं – ट्राइकस्पिड (tricuspid), माइट्रल (mitral), पल्मोनरी (pulmonary) और एओर्टिक (aortic)। ये हृदय की धड़कन के दौरान खुलते और बंद होते हैं।
- हृदय (Heart) में ट्राइकस्पिड वाल्व (tricuspid valve) दायाँ कक्ष (right side) नियंत्रित करता है। यह दाएँ अलिंद (right atrium) और दाएँ निलय (right ventricle) के बीच स्थित होता है। यह सुनिश्चित करता है कि रक्त अलिंद (atrium) से निलय (ventricle) की ओर बहे और वापस न आए।
- हृदय (Heart) में माइट्रल वाल्व (mitral valve) बायाँ कक्ष (left side) नियंत्रित करता है। इसे बाइकस्पिड वाल्व (bicuspid valve) भी कहते हैं। यह बाएँ अलिंद (left atrium) और बाएँ निलय (left ventricle) के बीच स्थित होता है। यह ऑक्सीजनयुक्त रक्त (oxygenated blood) के पंप होने के दौरान वापसी (backflow) को रोकता है।
- हृदय (Heart) में एओर्टिक वाल्व (aortic valve) रक्त प्रवाह नियंत्रित करता है। यह बाएँ निलय (left ventricle) और महाधमनी (aorta) के बीच स्थित होता है। जब बायाँ निलय सिकुड़ता है, तो यह वाल्व खुलता है, जिससे रक्त महाधमनी (aorta) में प्रवेश करता है। जब निलय शिथिल होता है, तो यह वाल्व बंद हो जाता है।
- हृदय (Heart) में पल्मोनरी वाल्व (pulmonary valve) फेफड़ों (lungs) को रक्त नियंत्रित करता है। यह दाएँ निलय (right ventricle) और पल्मोनरी धमनी (pulmonary artery) के बीच स्थित होता है। यह रक्त को एक दिशा (निलय से धमनी की ओर) में बहने देता है और विपरीत प्रवाह (backflow) को रोकता है।
- रक्त (Blood) में लाल रक्त कोशिकाएँ (Red Blood Cells – RBCs) ऑक्सीजन ले जाती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन (hemoglobin) नामक एक प्रोटीन (protein) होता है। हीमोग्लोबिन फेफड़ों (lungs) से ऑक्सीजन (O₂) बाँधता (binds) है और इसे शरीर के सभी ऊतकों (tissues) तक पहुँचाता है।
- रक्त (Blood) का मुख्य घटक (main component) प्लाज्मा (plasma) है। प्लाज्मा (plasma) रक्त का तरल भाग (liquid part) है, जो लगभग 55% होता है। यह 90% पानी (water) और 10% प्रोटीन (proteins – एल्ब्यूमिन, ग्लोब्युलिन, फाइब्रिनोजेन), लवण (salts), पोषक तत्वों (nutrients) और हार्मोन (hormones) से बना होता है।
- श्वेत रक्त कोशिकाएँ (White Blood Cells – WBCs / ल्यूकोसाइट्स – Leukocytes) रोगों से लड़ती हैं (fight diseases)। ये प्रतिरक्षा तंत्र (immune system) का भाग हैं। ये बैक्टीरिया (bacteria), वायरस (viruses) और अन्य रोगाणुओं (pathogens) को नष्ट करती हैं। इनकी संख्या संक्रमण (infection) में बढ़ जाती है।
- प्लेटलेट्स (Platelets / थ्रोम्बोसाइट्स – Thrombocytes) रक्तस्राव (bleeding) को रोकते हैं। ये छोटे, अस्थि मज्जा (bone marrow) में बनने वाले कोशिका टुकड़े (cell fragments) हैं। चोट लगने पर, ये एकत्रित (aggregate) होकर थक्का (clot) बनाते हैं, जिससे रक्तस्राव रुकता है (हेमोस्टेसिस – hemostasis)।
- रक्त (Blood) में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) ऑक्सीजन (oxygen) बाँधता है (binds)। हीमोग्लोबिन (Hb) RBCs में पाया जाने वाला एक लौह-युक्त (iron-containing) प्रोटीन है। एक हीमोग्लोबिन अणु (molecule) चार ऑक्सीजन अणुओं (O₂) को बाँध सकता है। यह रक्त को उसका लाल रंग (red colour) देता है।
- रक्त (Blood) में लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes) प्रतिरक्षा (immunity) में मदद करते हैं। ये श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBCs) का एक प्रकार हैं। बी-लिम्फोसाइट्स (B-cells) एंटीबॉडी (antibodies) बनाती हैं। टी-लिम्फोसाइट्स (T-cells) संक्रमित कोशिकाओं (infected cells) को नष्ट करती हैं। ये अर्जित प्रतिरक्षा (acquired immunity) का आधार हैं।
- रक्त (Blood) में न्यूट्रोफिल्स (Neutrophils) बैक्टीरिया (bacteria) से लड़ते हैं। ये सबसे अधिक संख्या में पाए जाने वाले WBCs हैं (50-70%)। ये फागोसाइटोसिस (phagocytosis – निगलकर नष्ट करना) द्वारा बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं। इनकी संख्या जीवाणु संक्रमण (bacterial infection) में बढ़ जाती है (न्यूट्रोफिलिया – neutrophilia)।
- रक्त (Blood) में मोनोसाइट्स (Monocytes) मैक्रोफेज (macrophages) में बदलते हैं। ये रक्त से ऊतकों (tissues) में जाकर मैक्रोफेज (macrophages) में परिवर्तित (transform) हो जाते हैं। मैक्रोफेज मृत कोशिकाओं (dead cells), रोगाणुओं (pathogens) और मलबे (debris) को फागोसाइटोसिस (phagocytosis) द्वारा साफ करते हैं।
- रक्त (Blood) में बेसोफिल्स (Basophils) एलर्जी प्रतिक्रियाओं (allergic reactions) में भूमिका निभाते हैं। ये सबसे कम संख्या में पाए जाने वाले WBCs हैं (0.5-1%)। ये हिस्टामाइन (histamine) और हेपरिन (heparin) स्रावित करते हैं। हिस्टामाइन एलर्जी (allergy) का कारण बनता है, जबकि हेपरिन रक्त के थक्के (clotting) को रोकता है।
- रक्त (Blood) में इओसिनोफिल्स (Eosinophils) परजीवी (parasites) से लड़ते हैं। ये परजीवी संक्रमणों (parasitic infections – कीड़े, मलेरिया) के खिलाफ रक्षा करते हैं। ये एलर्जी प्रतिक्रियाओं (allergic reactions – दमा – asthma) में भी शामिल होते हैं। इनकी संख्या परजीवी संक्रमण (parasitic infection) और एलर्जी (allergy) में बढ़ जाती है (इओसिनोफिलिया – eosinophilia)।
- रक्त (Blood) में 55% प्लाज्मा (plasma) और 45% कोशिकाएँ (cells) होती हैं। प्लाज्मा (plasma) – 55% (90% पानी, 10% प्रोटीन, लवण, पोषक तत्व, हार्मोन)। लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs) – 44%, श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBCs) और प्लेटलेट्स (platelets) – 1% (बफी कोट – buffy coat)।
- लाल रक्त कोशिकाएँ (Red Blood Cells – RBCs / एरिथ्रोसाइट्स – Erythrocytes) अस्थि मज्जा (bone marrow) में बनती हैं। वयस्कों में, RBCs मुख्य रूप से फ्लैट हड्डियों (flat bones – कूल्हे – hip, उरोस्थि – sternum, पसलियाँ – ribs) के लाल मज्जा (red marrow) में बनती हैं। इनके उत्पादन को एरिथ्रोपोइटिन (erythropoietin – EPO) हार्मोन द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जो गुर्दे (kidneys) द्वारा स्रावित होता है।
- रक्त (Blood) में फाइब्रिनोजेन (Fibrinogen) थक्का (clot) बनाता है। यह यकृत (liver) में बनने वाला एक घुलनशील (soluble) प्लाज्मा प्रोटीन (plasma protein) है। रक्तस्राव (bleeding) के दौरान, यह थ्रोम्बिन (thrombin) एंजाइम द्वारा अघुलनशील फाइब्रिन (insoluble fibrin) में बदल जाता है। फाइब्रिन (fibrin) जाल (mesh) बनाकर रक्त का थक्का (blood clot) जमाता है।
- रक्त में ग्लोब्युलिन्स (Globulins) प्रतिरक्षा (immunity) में मदद करते हैं। ये प्लाज्मा प्रोटीन (plasma proteins) का एक समूह (group) है। अल्फा-ग्लोब्युलिन (α-globulins) और बीटा-ग्लोब्युलिन (β-globulins) परिवहन प्रोटीन (transport proteins – हार्मोन, लिपिड, धातु आयन) हैं। गामा-ग्लोब्युलिन (γ-globulins – एंटीबॉडी – antibodies) प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) के लिए आवश्यक हैं।
- रक्त (Blood) में थ्रोम्बिन (Thrombin) थक्का निर्माण (clot formation) में मदद करता है। यह प्रोथ्रोम्बिन (prothrombin – एक प्लाज्मा प्रोटीन) से बनने वाला एक एंजाइम (enzyme) है। यह फाइब्रिनोजेन (fibrinogen) को फाइब्रिन (fibrin) में परिवर्तित करता है। फाइब्रिन (fibrin) फिर प्लेटलेट्स (platelets) और लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) को फँसाकर (trap) थक्का (clot) बनाता है।
- रक्त (Blood) में ल्यूकोसाइट्स (Leukocytes – WBCs) रोगजनकों (pathogens) को फागोसाइटोसिस (phagocytosis) करते हैं। फागोसाइटोसिस ("कोशिका-भक्षण" – cell-eating) वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिकाएँ बड़े कणों (जैसे बैक्टीरिया – bacteria, मृत कोशिकाएँ – dead cells) को निगलकर (engulf) नष्ट कर देती हैं। न्यूट्रोफिल्स (neutrophils), मोनोसाइट्स (monocytes) और मैक्रोफेज (macrophages) मुख्य फागोसाइटिक कोशिकाएँ (phagocytic cells) हैं।
- रक्त (Blood) में एल्ब्यूमिन (Albumin) प्रोटीन दबाव (pressure) बनाए रखता है। यह सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला प्लाज्मा प्रोटीन (plasma protein) (लगभग 60%) है। यह कोलाइड आसमाटिक दबाव (colloidal osmotic pressure – ऑन्कोटिक दबाव – oncotic pressure) बनाए रखता है, जो रक्त वाहिकाओं (blood vessels) के अंदर पानी को बनाए रखने में मदद करता है। यह विभिन्न पदार्थों (हार्मोन, दवाओं, फैटी एसिड) का परिवहन (transport) भी करता है।
- रक्त (Blood) में प्लाज्मा (plasma) 90% पानी (water) होता है। पानी रक्त (blood) के आयतन (volume) का अधिकांश भाग होता है। यह पोषक तत्वों (nutrients), हार्मोन (hormones), अपशिष्ट उत्पादों (waste products) और गैसों (gases) को घोलकर (dissolve) ले जाता है। यह शरीर के तापमान (body temperature) को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।
- रक्त (Blood) में प्लेटलेट्स (Platelets) 7-10 दिन (days) जीवित रहते हैं। ये अस्थि मज्जा (bone marrow) में मेगाकार्योसाइट्स (megakaryocytes) से बनते हैं। इनका जीवनकाल (lifespan) लगभग 7-10 दिन होता है। पुराने या अप्रयुक्त प्लेटलेट्स (platelets) प्लीहा (spleen) और यकृत (liver) द्वारा हटा दिए जाते हैं।
- लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs) 120 दिन (days) जीवित रहती हैं। मनुष्यों में, परिपक्व RBCs में नाभिक (nucleus) और अंगक (organelles) नहीं होते हैं, इसलिए वे विभाजित (divide) या मरम्मत (repair) नहीं कर सकती हैं। पुरानी RBCs प्लीहा (spleen) और यकृत (liver) में नष्ट हो जाती हैं। उनके हीमोग्लोबिन (hemoglobin) को पुनर्नवीनीकृत (recycle) किया जाता है।
- रक्त (Blood) में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) का स्तर पुरुषों (males) में 13-17 g/dL होता है। महिलाओं (females) में, सामान्य स्तर 12-15 g/dL होता है (मासिक धर्म – menstruation के कारण थोड़ा कम)। कम हीमोग्लोबिन (low hemoglobin) एनीमिया (anemia – खून की कमी) कहलाता है। अधिक हीमोग्लोबिन (high hemoglobin) पॉलीसिथेमिया (polycythemia) कहलाता है।
- रक्त (Blood) में प्लेटलेट्स (Platelets) की संख्या 150,000-400,000 प्रति माइक्रोलीटर (per microliter) होती है। कम प्लेटलेट्स (low platelets – थ्रोम्बोसाइटोपेनिया – thrombocytopenia) से रक्तस्राव का खतरा (bleeding risk) बढ़ जाता है। उच्च प्लेटलेट्स (high platelets – थ्रोम्बोसाइटोसिस – thrombocytosis) से थक्का जमने (clotting) का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दिल का दौरा (heart attack) या स्ट्रोक (stroke) हो सकता है।
- रक्त (Blood) में ल्यूकोसाइट्स (Leukocytes – WBCs) की संख्या 4000-11000 प्रति माइक्रोलीटर (per microliter) होती है। ल्यूकोसाइटोसिस (Leukocytosis – उच्च WBC गणना – high WBC count) संक्रमण (infection) या सूजन (inflammation) का संकेत है। ल्यूकोपेनिया (Leukopenia – निम्न WBC गणना – low WBC count) अस्थि मज्जा (bone marrow) की विफलता या एचआईवी (HIV) जैसे वायरल संक्रमणों में हो सकता है।
- धमनियाँ (Arteries) रक्त को हृदय (heart) से दूर (away) ले जाती हैं। ये मोटी (thick), लोचदार (elastic) और पेशीय (muscular) दीवारों वाली रक्त वाहिकाएँ (blood vessels) होती हैं। इनमें ऑक्सीजनयुक्त रक्त (oxygenated blood) होता है (पल्मोनरी धमनी – pulmonary artery को छोड़कर)। इनमें रक्त का दबाव (blood pressure) उच्च (high) होता है और प्रवाह (flow) तेज (fast) होता है।
- शिराएँ (Veins) रक्त को हृदय (heart) की ओर (towards) लाती हैं। ये पतली (thin), कम लोचदार (less elastic) दीवारों वाली रक्त वाहिकाएँ होती हैं। इनमें ऑक्सीजन-रहित रक्त (deoxygenated blood) होता है (पल्मोनरी शिराएँ – pulmonary veins को छोड़कर)। इनमें वाल्व (valves) होते हैं जो रक्त के विपरीत प्रवाह (backflow) को रोकते हैं।
- केशिकाएँ (Capillaries) गैस (gas) और पोषक तत्वों (nutrients) का आदान-प्रदान (exchange) करती हैं। ये सबसे छोटी (smallest) और पतली (thinnest) रक्त वाहिकाएँ हैं। इनकी दीवारें केवल एक कोशिका मोटी (one-cell thick) होती हैं, जो पदार्थों को आसानी से पारित (pass) होने देती हैं। ये धमनियों (arteries) और शिराओं (veins) को जोड़ती हैं।
- धमनियाँ (Arteries) उच्च दबाव (high pressure) में रक्त ले जाती हैं। हृदय (heart) से रक्त को बाहर धकेलने के लिए एक बल (force) की आवश्यकता होती है, जो धमनियों (arteries) में उच्च दबाव (high pressure) पैदा करता है। इस दबाव को रक्तचाप (blood pressure) कहते हैं। धमनियों की मोटी (thick) और लोचदार (elastic) दीवारें इस उच्च दबाव (high pressure) को सहन कर सकती हैं।
- शिराएँ (Veins) निम्न दबाव (low pressure) में रक्त ले जाती हैं। जब तक रक्त केशिकाओं (capillaries) से शिराओं (veins) में पहुँचता है, तब तक उसका अधिकांश दबाव (pressure) कम हो चुका होता है। इस कम दबाव (low pressure) के कारण, शिराओं (veins) में वाल्व (valves) होते हैं, जो रक्त को हृदय (heart) की ओर बहने में मदद करते हैं और पीछे की ओर बहने (backflow) से रोकते हैं।
- महाधमनी (Aorta) शरीर की सबसे बड़ी धमनी (largest artery) है। यह हृदय (heart) के बाएँ निलय (left ventricle) से निकलती है। यह ऑक्सीजनयुक्त रक्त (oxygenated blood) को शरीर के सभी भागों तक पहुँचाती है। महाधमनी (aorta) शाखाओं (branches) में विभाजित होती है, जो सिर (head), गर्दन (neck), बाहों (arms) और पैरों (legs) तक रक्त ले जाती हैं।
- धमनियों (Arteries) की दीवारें (walls) मोटी (thick) और लचीली (elastic) होती हैं। वे तीन परतों (three layers) से बनी होती हैं – अंतर्कला (tunica intima – आंतरिक परत – inner layer), मध्यमा (tunica media – मध्य पेशीय परत – middle muscular layer) और बाह्यकला (tunica adventitia – बाहरी संयोजी ऊतक परत – outer connective tissue layer)। मध्यमा परत (tunica media) में लोचदार तंतु (elastic fibers) और चिकनी मांसपेशियाँ (smooth muscles) होती हैं।
- शिराओं (Veins) में वाल्व (valves) रक्त के विपरीत प्रवाह (backflow) को रोकते हैं। ये पतले, फ्लैप जैसी (flap-like) संरचनाएँ होती हैं, जो शिराओं (veins) के अंदर स्थित होती हैं। वे केवल एक दिशा (one direction) – हृदय (heart) की ओर – में खुलती हैं। यदि रक्त वापस बहने की कोशिश करता है, तो वाल्व (valves) बंद हो जाते हैं। वाल्व (valves) विशेष रूप से पैरों (legs) की शिराओं (veins) में महत्वपूर्ण होते हैं।
- धमनियों (Arteries) में लोचदार तंतु (elastic fibers) होते हैं। ये तंतु (fibers) धमनियों (arteries) को हृदय (heart) के प्रत्येक संकुचन (systole – धड़कन) के साथ फैलने (stretch) और फिर सिकुड़ने (recoil) की अनुमति देते हैं। यह फैलाव और प्रतिक्षेप (recoil) रक्त के प्रवाह (blood flow) को सुचारू (smooth) बनाए रखने में मदद करता है और नाड़ी (pulse) बनाता है।
- शिराओं (Veins) में मांसपेशी परत (muscle layer) पतली (thin) होती है। क्योंकि शिराओं (veins) में रक्त कम दबाव (low pressure) पर बहता है, इसलिए उन्हें धमनियों (arteries) की तरह मोटी, पेशीय दीवारों (thick, muscular walls) की आवश्यकता नहीं होती है। इसके बजाय, शिराएँ (veins) रक्त को वापस हृदय (heart) की ओर ले जाने के लिए अपने वाल्वों (valves) और आसपास की कंकाल की मांसपेशियों (skeletal muscles) (मांसपेशी पंप – muscle pump) पर निर्भर करती हैं।
- पल्मोनरी परिसंचरण (Pulmonary circulation) फेफड़ों (lungs) को रक्त ले जाता है। यह हृदय (heart) के दाएँ निलय (right ventricle) से शुरू होता है, पल्मोनरी धमनी (pulmonary artery) और फेफड़ों (lungs) के माध्यम से जाता है, और बाएँ अलिंद (left atrium) में समाप्त होता है। यह ऑक्सीजन-रहित रक्त (deoxygenated blood) को फेफड़ों (lungs) तक ले जाता है और ऑक्सीजनयुक्त (oxygenated) रक्त को वापस हृदय (heart) में लाता है।
- प्रणालीगत परिसंचरण (Systemic circulation) शरीर (body) को रक्त आपूर्ति (blood supply) करता है। यह हृदय (heart) के बाएँ निलय (left ventricle) से शुरू होता है, महाधमनी (aorta), सभी धमनियों (arteries), धमनियों (arterioles), केशिकाओं (capillaries) और शिराओं (veins) के माध्यम से जाता है, और दाएँ अलिंद (right atrium) में समाप्त होता है। यह पूरे शरीर (शरीर के सभी ऊतकों) को ऑक्सीजनयुक्त रक्त (oxygenated blood) की आपूर्ति करता है और ऑक्सीजन-रहित रक्त (deoxygenated blood) को वापस लाता है।
- हृदय (Heart) का दोहरा परिसंचरण (double circulation) प्रणाली होती है। इसमें दो अलग-अलग परिसंचरण पथ (circulatory pathways) होते हैं – पल्मोनरी परिसंचरण (pulmonary circulation – हृदय-फेफड़े-हृदय) और प्रणालीगत परिसंचरण (systemic circulation – हृदय-शरीर-हृदय)। यह प्रणाली अधिक कुशल (efficient) है, क्योंकि यह ऑक्सीजनयुक्त (oxygenated) और ऑक्सीजन-रहित (deoxygenated) रक्त को अलग रखती है।
- हृदय की धड़कन (Heartbeat) साइनोएट्रियल नोड (SA node – Sinoatrial node) द्वारा शुरू होती है। SA node को हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर (natural pacemaker) कहा जाता है। यह दाएँ अलिंद (right atrium) में स्थित होता है और नियमित विद्युत आवेग (electrical impulse) उत्पन्न करता है। यह आवेग अटरिया (atria) के संकुचन (contraction) का कारण बनता है।
- हृदय की धड़कन (Heartbeat) स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (autonomic nervous system) द्वारा नियंत्रित होती है। सहानुभूति तंत्र (sympathetic nervous system) धड़कन को तेज (increase) करता है (एपिनेफ्रीन/एड्रेनालाईन – epinephrine/adrenaline द्वारा)। परानुकंपी तंत्र (parasympathetic nervous system – वेगस तंत्रिका – vagus nerve) धड़कन को धीमा (slow) करता है (एसिटाइलकोलाइन – acetylcholine द्वारा)। यह शरीर की आवश्यकता (व्यायाम – exercise, विश्राम – rest) के अनुसार धड़कन को समायोजित (adjust) करता है।
- हृदय (Heart) में एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड (AV node – Atrioventricular node) धड़कन रिले (relay) करता है। AV node अटरिया (atria) और निलय (ventricles) के बीच स्थित होता है। यह SA node से विद्युत आवेग (electrical impulse) प्राप्त करता है और इसे थोड़ी देरी (slight delay) के बाद निलय (ventricles) तक पहुँचाता है। यह देरी अटरिया (atria) को निलय (ventricles) में रक्त पंप करने से पहले पूरी तरह से सिकुड़ने (contract) का समय देती है।
- हृदय (Heart) में पर्किन्जे फाइबर (Purkinje fibers) धड़कन संचालित (conduct) करते हैं। ये विशेष पेशीय तंतु (specialized muscle fibers) हैं जो निलय (ventricles) की दीवारों (walls) में स्थित होते हैं। वे AV node और एट्रियोवेंट्रिकुलर बंडल (atrioventricular bundle / बंडल ऑफ हिस – bundle of His) से विद्युत आवेग (electrical impulse) प्राप्त करते हैं। ये तंतु (fibers) आवेग को तेजी से (quickly) निलय (ventricles) के सभी भागों में फैलाते हैं, जिससे वे लगभग एक साथ (almost simultaneously) सिकुड़ते हैं।
- हृदय (Heart) का सिस्टोल (Systole) संकुचन चरण (contraction phase) है। इस चरण के दौरान, हृदय की मांसपेशियाँ (cardiac muscles) सिकुड़ती हैं (contract), और कक्षों (chambers) के अंदर रक्त का दबाव (pressure) बढ़ जाता है। यह उच्च दबाव (high pressure) वाल्वों (valves) को खोल देता है, और रक्त कक्षों से बाहर पंप (pumped out) हो जाता है। सिस्टोलिक रक्तचाप (systolic blood pressure) इस चरण के दौरान मापा जाने वाला दबाव है (लगभग 120 mmHg)।
- हृदय (Heart) का डायस्टोल (Diastole) विश्राम चरण (relaxation phase) है। इस चरण के दौरान, हृदय की मांसपेशियाँ (cardiac muscles) शिथिल (relax) हो जाती हैं, और कक्ष (chambers) रक्त से भर जाते हैं। निलय (ventricles) के अंदर दबाव (pressure) कम हो जाता है, जिससे एट्रियोवेंट्रिकुलर वाल्व (AV valves – ट्राइकस्पिड और माइट्रल – tricuspid & mitral) खुल जाते हैं, और रक्त अटरिया (atria) से निलय (ventricles) में प्रवेश करता है। डायस्टोलिक रक्तचाप (diastolic blood pressure) इस चरण के दौरान मापा जाने वाला दबाव है (लगभग 80 mmHg)।
- हृदय (Heart) की धड़कन (heartbeat) 60-100 बार प्रति मिनट (beats per minute – bpm) होती है। वयस्कों (adults) में, आराम के समय (at rest) सामान्य हृदय गति (normal heart rate) 60-100 bpm होती है। एथलीटों (athletes) में, आराम के समय हृदय गति 40-60 bpm तक कम हो सकती है (ब्रैडीकार्डिया – bradycardia)। हृदय गति को स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (autonomic nervous system) और हार्मोन (hormones – एपिनेफ्रीन/adrenaline) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
- हृदय (Heart) में एट्रियोवेंट्रिकुलर बंडल (AV bundle / Bundle of His) संकेत (signal) ले जाता है। यह AV node से निकलने वाले विद्युत तंतुओं (electrical fibers) का एक बंडल (bundle) है। यह इंटरवेंट्रिकुलर सेप्टम (interventricular septum – निलय (ventricles) के बीच की दीवार) के नीचे जाता है। फिर यह दाएँ और बाएँ बंडल शाखाओं (right and left bundle branches) में विभाजित हो जाता है, जो पर्किन्जे फाइबर (Purkinje fibers) से जुड़ती हैं।
- हृदय (Heart) का कार्डियक चक्र (cardiac cycle) 0.8 सेकंड (seconds) का होता है। 72 bpm (बीट्स प्रति मिनट – beats per minute) की हृदय गति (heart rate) पर, एक पूर्ण हृदय चक्र (complete cardiac cycle – एक धड़कन) लगभग 0.8 सेकंड तक रहता है। इसमें अटरिया (atria) का सिस्टोल (atrial systole – 0.1 सेकंड), निलय (ventricles) का सिस्टोल (ventricular systole – 0.3 सेकंड) और पूर्ण कार्डियक डायस्टोल (complete cardiac diastole – 0.4 सेकंड) शामिल होता है।
- हृदय (Heart) का कार्डियक आउटपुट (cardiac output) 5 लीटर/मिनट (liters/minute) होता है। कार्डियक आउटपुट (cardiac output) = स्ट्रोक वॉल्यूम (stroke volume – प्रति धड़कन पंप किया गया रक्त – blood pumped per beat) × हृदय गति (heart rate)। एक स्वस्थ वयस्क (healthy adult) के लिए, सामान्य स्ट्रोक वॉल्यूम (normal stroke volume) लगभग 70 mL/beat होता है। एक मिनट में, हृदय (heart) लगभग 5 लीटर (70 mL × 72 bpm ≈ 5 L/min) रक्त पंप करता है।
- हृदय (Heart) का सिस्टोलिक दबाव (systolic pressure) 120 mmHg होता है। सिस्टोलिक दबाव (systolic pressure) रक्तचाप (blood pressure) का वह मान है, जब हृदय (heart) सिकुड़ता है (contracts) और रक्त को धमनियों (arteries) में पंप करता है। यह रक्तचाप रीडिंग (blood pressure reading) में शीर्ष संख्या (top number) है (जैसे, 120/80 mmHg)। यह धमनियों (arteries) के अंदर अधिकतम दबाव (maximum pressure) को दर्शाता है।
- हृदय (Heart) का डायस्टोलिक दबाव (diastolic pressure) 80 mmHg होता है। डायस्टोलिक दबाव (diastolic pressure) रक्तचाप (blood pressure) का वह मान है, जब हृदय (heart) शिथिल (relaxes) होता है और रक्त से भर रहा होता है। यह रक्तचाप रीडिंग (blood pressure reading) में निचली संख्या (bottom number) है (जैसे, 120/80 mmHg)। यह धमनियों (arteries) के अंदर न्यूनतम दबाव (minimum pressure) को दर्शाता है।
- हृदय (Heart) के साइनोएट्रियल नोड (SA node – Sinoatrial node) को पेसमेकर (pacemaker) कहा जाता है। यह विशेष विद्युत आवेगों (specialized electrical impulses) को उत्पन्न करके हृदय गति (heart rate) निर्धारित करता है (सेट करता है)। यह सामान्य रूप से 60-100 bpm की दर से विद्युत आवेग (electrical impulse) उत्पन्न करता है। "अस्थानिक पेसमेकर" (Ectopic pacemaker) हृदय में अन्य स्थान होते हैं जो संकेत (signals) उत्पन्न कर सकते हैं (जैसे, AV node, Purkinje fibers), लेकिन वे सामान्य रूप से SA node के संकेतों (signals) से अभिभूत (overridden) हो जाते हैं।
- हृदय (Heart) का इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG – Electrocardiogram) धड़कन (heartbeat) मापता है। ECG हृदय (heart) द्वारा उत्पन्न विद्युत गतिविधि (electrical activity) को रिकॉर्ड करता है। एक सामान्य ECG (normal ECG) में P तरंग (P wave – अटरिया – atria का विध्रुवण – depolarization), QRS कॉम्प्लेक्स (QRS complex – निलय – ventricles का विध्रुवण – depolarization) और T तरंग (T wave – निलय – ventricles का पुनर्ध्रुवण – repolarization) शामिल हैं।
- हृदय (Heart) में पेरिकार्डियम (pericardium) हृदय की रक्षा (protect) करता है। पेरिकार्डियम (pericardium) एक दोहरी-परत वाली (double-layered) थैली (sac) है, जो हृदय (heart) और महान वाहिकाओं के आधारों (bases of the great vessels) को घेरे रहती है। इसकी परतों के बीच एक चिकनाई (lubricating) द्रव (fluid – पेरिकार्डियल द्रव – pericardial fluid) होता है, जो हृदय (heart) को धड़कते समय रगड़ (friction) से बचाता है।
- हृदय (Heart) में मायोकार्डियम (myocardium) मांसपेशी परत (muscle layer) है। यह हृदय की दीवार (heart wall) की मध्य और सबसे मोटी (middle and thickest) परत है। यह अनैच्छिक (involuntary), धारीदार (striated) मांसपेशी ऊतक (muscle tissue) से बना होता है, जो केवल हृदय (heart) में पाया जाता है (कार्डियक मांसपेशी – cardiac muscle)। यह सिकुड़ता (contracts) है, जिससे रक्त पंप (pumped) होता है।
- हृदय (Heart) में एंडोकार्डियम (endocardium) आंतरिक परत (inner layer) है। यह हृदय (heart) के अंदर (inner) की परत है। यह चिकनी (smooth) होती है, जो रक्त के थक्के (blood clots) को बनने से रोकती है। यह अंतर्कला (endothelium) से बनी होती है, जो रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को भी रेखाबद्ध (line) करती है।
- हृदय (Heart) में इंटरवेंट्रिकुलर सेप्टम (interventricular septum) निलय (ventricles) को अलग करता है। यह एक मोटी (thick), पेशीय (muscular) दीवार (wall) है, जो दाएँ निलय (right ventricle) और बाएँ निलय (left ventricle) को अलग करती है। यह ऑक्सीजन-रहित रक्त (deoxygenated blood) को ऑक्सीजनयुक्त रक्त (oxygenated blood) के साथ मिश्रित (mix) होने से रोकती है।
- हृदय (Heart) में इंटरएट्रियल सेप्टम (interatrial septum) अटरिया (atria) को अलग करता है। यह एक पतली (thin) दीवार (wall) है, जो दाएँ अलिंद (right atrium) और बाएँ अलिंद (left atrium) को अलग करती है। यह भी ऑक्सीजन-रहित (deoxygenated) और ऑक्सीजनयुक्त (oxygenated) रक्त को अलग रखती है।
- हृदय (Heart) की कोरोनरी धमनियाँ (coronary arteries) हृदय (heart) को रक्त देती हैं (supply blood)। ये महाधमनी (aorta) से निकलने वाली पहली शाखाएँ (first branches) हैं। ये ऑक्सीजनयुक्त रक्त (oxygenated blood) को हृदय की मांसपेशी (cardiac muscle – मायोकार्डियम – myocardium) को आपूर्ति (supply) करती हैं। कोरोनरी धमनी की रुकावट (blockage) से दिल का दौरा (heart attack – मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन – myocardial infarction) हो सकता है।
- हृदय (Heart) में कोरोनरी शिराएँ (coronary veins) रक्त लौटाती हैं (return blood)। ये हृदय की मांसपेशियों (cardiac muscles) से ऑक्सीजन-रहित रक्त (deoxygenated blood) को एकत्रित (collect) करती हैं। यह रक्त कोरोनरी साइनस (coronary sinus – एक बड़ी शिरा – large vein) के माध्यम से दाएँ अलिंद (right atrium) में वापस लौटाती हैं।
- रक्त (Blood) का pH 7.35-7.45 होता है। रक्त (blood) थोड़ा क्षारीय (slightly alkaline) होता है। यह एक संकीर्ण सीमा (narrow range) के भीतर बना रहता है। शरीर में कई बफर सिस्टम (buffer systems) होते हैं (जैसे, बाइकार्बोनेट-कार्बोनिक एसिड बफर सिस्टम – bicarbonate-carbonic acid buffer system) जो रक्त pH (blood pH) को नियंत्रित (regulate) करते हैं। अम्लीय (acidic – pH <7.35) एसिडोसिस (acidosis) है; क्षारीय (alkaline – pH >7.45) एल्कलोसिस (alkalosis) है।
- रक्त (Blood) में ग्लूकोज (glucose) ऊर्जा (energy) का स्रोत है। रक्त शर्करा (blood sugar) शरीर की कोशिकाओं (body's cells) के लिए ऊर्जा (energy) का मुख्य स्रोत है। रक्त में ग्लूकोज (glucose) का स्तर हार्मोन (hormones – इंसुलिन – insulin, ग्लूकागन – glucagon, एपिनेफ्रीन – epinephrine, कोर्टिसोल – cortisol) द्वारा कसकर नियंत्रित (tightly regulated) किया जाता है। उपवास रक्त शर्करा (Fasting blood sugar) आम तौर पर 70-99 mg/dL होता है।
- रक्त (Blood) में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂ – carbon dioxide) भी ले जाता है। हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) CO₂ ले जाने में भी भूमिका निभाता है (लगभग 20-25% CO₂ हीमोग्लोबिन से बंधकर कार्बोमिनोहीमोग्लोबिन – carbaminohemoglobin के रूप में ले जाया जाता है)। अधिकांश CO₂ को प्लाज्मा (plasma) में बाइकार्बोनेट आयनों (bicarbonate ions – HCO₃⁻) के रूप में ले जाया जाता है (लगभग 70%)।
- लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs) बिना नाभिक (without nucleus) की होती हैं। मनुष्यों और अधिकांश स्तनधारियों (mammals) में, परिपक्व RBCs में नाभिक (nucleus) और अन्य ऑर्गेनेल (organelles – माइटोकॉन्ड्रिया) नहीं होते हैं। इससे कोशिका के अंदर अधिक जगह (space) बन जाती है, जिससे अधिक हीमोग्लोबिन (hemoglobin) पैक (pack) किया जा सकता है। यह उन्हें अपना चक्राकार आकार (biconcave shape) भी देता है, जो लचीलापन (flexibility) और सतह क्षेत्र (surface area) को बढ़ाता है।
- रक्त (Blood) में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) की कमी (deficiency) एनीमिया (anemia) का कारण है। एनीमिया (anemia) एक ऐसी स्थिति है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) या हीमोग्लोबिन (hemoglobin) की संख्या सामान्य से कम होती है। इसके लक्षणों (symptoms) में थकान (fatigue), कमजोरी (weakness), पीलापन (pallor – pale skin), और सांस फूलना (shortness of breath) शामिल हैं। एनीमिया (anemia) के सामान्य कारणों (common causes) में आयरन की कमी (iron deficiency), विटामिन B₁₂ की कमी (vitamin B₁₂ deficiency) और रक्त की हानि (blood loss) शामिल हैं।
- रक्त (Blood) में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) की कमी (deficiency) थैलेसीमिया (thalassemia) का कारण है। थैलेसीमिया (thalassemia) एक आनुवंशिक रक्त विकार (genetic blood disorder) है, जिसमें शरीर हीमोग्लोबिन (hemoglobin) का एक असामान्य रूप (abnormal form) बनाता है। इसके परिणामस्वरूप लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) का अत्यधिक विनाश (excessive destruction) होता है, जिससे एनीमिया (anemia) होता है। यह सबसे आम आनुवंशिक विकारों (most common genetic disorders) में से एक है।
- रक्त (Blood) में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) की कमी (deficiency) सिकल सेल एनीमिया (sickle cell anemia) का कारण है। सिकल सेल एनीमिया (sickle cell anemia) एक आनुवंशिक रक्त विकार (genetic blood disorder) है, जिसमें शरीर असामान्य (abnormal) हीमोग्लोबिन (hemoglobin – HbS) बनाता है। यह असामान्य हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) को एक दरांती (sickle) या अर्धचंद्र (crescent) आकार लेने का कारण बनता है। ये असामान्य (abnormal), कठोर (rigid), चिपचिपी (sticky) कोशिकाएँ रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को अवरुद्ध (block) कर सकती हैं।
- रक्त (Blood) में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) कार्बन मोनोऑक्साइड (CO – carbon monoxide) से बंधता है (binds)। कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) हीमोग्लोबिन (hemoglobin) के लिए ऑक्सीजन (O₂) की तुलना में लगभग 200 गुना अधिक आकर्षण (affinity) रखता है। जब CO हीमोग्लोबिन (hemoglobin) से बंधता है, तो यह कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन (carboxyhemoglobin – HbCO) बनाता है, जो ऑक्सीजन (oxygen) ले जाने में असमर्थ (unable) होता है। यह कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता (CO poisoning) का कारण बनता है।
- रक्त (Blood) में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) ऑक्सीहीमोग्लोबिन (oxyhemoglobin) बनाता है। ऑक्सीहीमोग्लोबिन (Oxyhemoglobin – HbO₂) हीमोग्लोबिन (hemoglobin) का वह रूप (form) है, जब यह ऑक्सीजन (O₂) से बंधा होता है। यह चमकीला लाल (bright red) होता है, यही कारण है कि धमनी रक्त (arterial blood) चमकीला लाल (bright red) होता है। शिरापरक रक्त (venous blood) गहरा लाल (dark red) होता है, क्योंकि हीमोग्लोबिन (hemoglobin) का अधिकांश भाग डीऑक्सीहीमोग्लोबिन (deoxyhemoglobin) के रूप में होता है।
- हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) में आयरन (Iron) होता है। यह आयरन (iron) हीमोग्लोबिन (hemoglobin) के हीम (heme) भाग का एक घटक है। यह आयरन परमाणु (iron atom) है जो वास्तव में ऑक्सीजन (O₂) से बंधता है (reversibly)। शरीर में अधिकांश आयरन (iron) (लगभग 70%) हीमोग्लोबिन (hemoglobin) में पाया जाता है।
- रक्त (Blood) में एंटीजन (Antigens) रक्त समूह (blood group) निर्धारित करते हैं। एंटीजन (antigens) अणु (आमतौर पर प्रोटीन – proteins या शर्करा – sugars) होते हैं, जो लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की सतह पर मौजूद होते हैं। सबसे प्रसिद्ध रक्त समूह प्रणालियाँ (blood group systems) ABO प्रणाली (ABO system) और Rh प्रणाली (Rh system) हैं। ABO प्रणाली (ABO system) को A और B एंटीजन (A and B antigens) की उपस्थिति या अनुपस्थिति (presence or absence) द्वारा निर्धारित किया जाता है। Rh प्रणाली (Rh system) को Rh एंटीजन (Rh antigen – आमतौर पर D एंटीजन) की उपस्थिति या अनुपस्थिति द्वारा निर्धारित किया जाता है।
- रक्त (Blood) में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन (carboxyhemoglobin – HbCO) बनाता है। यह हीमोग्लोबिन (hemoglobin) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) का यौगिक (compound) है। CO के लिए हीमोग्लोबिन (hemoglobin) की उच्च आत्मीयता (high affinity) के कारण, यह स्थिर (stable) और प्रतिवर्ती (reversible) नहीं है। सिगरेट के धुएँ (cigarette smoke) में CO होता है, और HbCO का बढ़ा हुआ स्तर (elevated level) धूम्रपान (smoking) का एक संकेतक है।