पाचन एवं उत्सर्जन
- पाचन तंत्र (Digestive system) भोजन (food) को ऊर्जा (energy) में बदलता है। यह भोजन के बड़े अणुओं (बहुलकों – polymers) को छोटे, घुलनशील अणुओं (मोनोमर्स – monomers) में तोड़ता है। ये छोटे अणु रक्त (blood) द्वारा अवशोषित (absorb) होते हैं और कोशिकाओं (cells) तक पहुँचाए जाते हैं।
- छोटी आंत (Small intestine) पाचन (digestion) का मुख्य स्थल (main site) है। यहाँ अधिकांश पाचन एंजाइम (digestive enzymes – अग्न्याशयी रस – pancreatic juice और आंतों के रस – intestinal juice) कार्य करते हैं। यहाँ सभी प्रमुख पोषक तत्वों (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा) का पाचन पूरा होता है।
- यकृत (Liver) शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग (largest internal organ) है। यह लगभग 1.5 किलोग्राम वजन का होता है। यह पेट (abdomen) के ऊपरी दाएँ भाग (upper right quadrant) में स्थित होता है। यह 500 से अधिक महत्वपूर्ण कार्य (vital functions) करता है।
- गुर्दे (Kidneys) रक्त (blood) को छानकर मूत्र (urine) बनाते हैं। मनुष्यों में दो गुर्दे (kidneys) होते हैं। वे रक्त से अपशिष्ट उत्पादों (waste products – यूरिया – urea, क्रिएटिनिन – creatinine) और अतिरिक्त पानी (excess water) को हटाते हैं। यह प्रक्रिया शरीर के तरल पदार्थों (body fluids) का संतुलन बनाए रखती है।
- अग्न्याशय (Pancreas) इंसुलिन (insulin) और ग्लूकागन (glucagon) स्रावित करता है। ये हार्मोन (hormones) रक्त शर्करा स्तर (blood sugar level) को नियंत्रित करते हैं। इंसुलिन (insulin) रक्त शर्करा (blood sugar) को कम करता है, जबकि ग्लूकागन (glucagon) इसे बढ़ाता है।
- मुख (Mouth) में लार (saliva) एमाइलेज (amylase) एंजाइम (enzyme) स्रावित करती है। लार तीन जोड़ी लार ग्रंथियों (salivary glands – पैरोटिड – parotid, सबमैंडिबुलर – submandibular, सबलिंगुअल – sublingual) द्वारा स्रावित होती है। लार (saliva) 99% पानी (water) और 1% एंजाइम (enzymes), म्यूसिन (mucin), लाइसोजाइम (lysozyme) और इलेक्ट्रोलाइट्स (electrolytes) से बनी होती है।
- लार (Saliva) में एमाइलेज (amylase) स्टार्च (starch) को माल्टोज (maltose) में बदलता है। यह एंजाइम (enzyme) एक कार्बोहाइड्रेट-पाचक एंजाइम (carbohydrate-digesting enzyme) है। यह स्टार्च (amylose और amylopectin) के α-1,4 ग्लाइकोसिडिक बंधों (glycosidic bonds) को तोड़ता है। माल्टोज (maltose) दो ग्लूकोज (glucose) इकाइयों का एक डाइसैकेराइड (disaccharide) है।
- पाचन तंत्र (Digestive system) में लार (saliva) भोजन (food) को नम (moisten) करती है। लार (saliva) भोजन को गीला करती है, जिससे एक बोलस (bolus) बनता है जिसे निगलना (swallow) आसान होता है। यह मुंह (mouth) में बैक्टीरिया (bacteria) के विकास को नियंत्रित करने में भी मदद करती है।
- पाचन तंत्र (Digestive system) में जीभ (tongue) भोजन (food) का स्वाद (taste) लेती है। जीभ पर स्वाद कलिकाएँ (taste buds) होती हैं, जो पाँच मूल स्वादों (basic tastes – मीठा – sweet, खट्टा – sour, नमकीन – salty, कड़वा – bitter, उमामी – umami) को पहचानती हैं। जीभ भोजन को चबाने (chewing) और निगलने (swallowing) में भी मदद करती है।
- पेट (Stomach) में पेप्सिन (pepsin) प्रोटीन (protein) पचाता है। पेप्सिन (pepsin) एक प्रोटीज (protease – प्रोटीन-पाचक एंजाइम) है। यह निष्क्रिय रूप पेप्सिनोजेन (pepsinogen) से सक्रिय होता है। सक्रियण (activation) HCl (हाइड्रोक्लोरिक एसिड – hydrochloric acid) द्वारा होता है।
- पेट (Stomach) में हाइड्रोक्लोरिक एसिड (Hydrochloric acid – HCl) बैक्टीरिया (bacteria) को मारता है। HCl पेट (stomach) के अंदर एक अम्लीय वातावरण (acidic environment – pH 1.5-3.5) बनाता है। यह अम्लीय pH अधिकांश बैक्टीरिया (bacteria) और अन्य रोगाणुओं (pathogens) को मार देता है। यह पेप्सिनोजेन (pepsinogen) को पेप्सिन (pepsin) में सक्रिय करने के लिए भी आवश्यक है।
- पेट (Stomach) में म्यूकस (mucus) पेट की दीवार (stomach wall) की रक्षा करता है। यह एक मोटा, चिपचिपा स्राव (thick, viscous secretion) है, जो पेट की अंदरूनी परत (inner lining) को कोट (coat) करता है। यह पेट की दीवार (stomach wall) को हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) और पेप्सिन (pepsin) के क्षरण (erosion) से बचाता है।
- पेट (Stomach) में गैस्ट्रिक लिपेज (gastric lipase) वसा (fat) पचाता है। यह एंजाइम (enzyme) एक लाइपेज (lipase – वसा-पाचक एंजाइम) है, जो पेट (stomach) में स्रावित होता है। यह ट्राइग्लिसराइड्स (triglycerides) को डाइग्लिसराइड्स (diglycerides) और फैटी एसिड (fatty acids) में तोड़ता है। वयस्कों (adults) में, यह शिशुओं (infants) की तुलना में कम महत्वपूर्ण है, जहाँ यह दूध (milk) में वसा (fat) को पचाने में मदद करता है।
- पेट (Stomach) में पेप्सिनोजेन (pepsinogen) पेप्सिन (pepsin) में बदलता है। पेप्सिनोजेन (pepsinogen) पेट (stomach) की मुख्य कोशिकाओं (chief cells) द्वारा स्रावित एक निष्क्रिय एंजाइम (inactive enzyme – ज़ाइमोजेन – zymogen) है। हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) पेप्सिनोजेन (pepsinogen) के एक छोटे से हिस्से को हटाकर (cleave) इसे सक्रिय पेप्सिन (active pepsin) में परिवर्तित करता है। सक्रिय पेप्सिन (active pepsin) अधिक पेप्सिनोजेन (pepsinogen) को सक्रिय कर सकता है (ऑटोकैटलिसिस – autocatalysis)।
- पेट (Stomach) में रेनिन (renin) दूध (milk) को पचाता है। रेनिन (renin) एक प्रोटीज (protease) है, जो दूध (milk) में मौजूद प्रोटीन केसिन (casein) को पचाता है। यह मुख्य रूप से शिशुओं (infants) और युवा जानवरों (young animals) में पाया जाता है। वयस्कों (adults) में, इसकी मात्रा कम होती है और दूध का पाचन मुख्य रूप से पेप्सिन (pepsin) और अन्य प्रोटीज (proteases) द्वारा होता है।
- पेट (Stomach) में पाचन (digestion) भोजन (food) को कीमा (chyme) में बदलता है। कीमा (chyme) एक अर्ध-तरल (semi-fluid) द्रव्यमान है, जो आंशिक रूप से पचे हुए भोजन (partially digested food) और गैस्ट्रिक जूस (gastric juice) से बना होता है। पेट (stomach) की मांसपेशियाँ (muscles) कीमा (chyme) को छोटी आंत (small intestine) (डुओडेनम – duodenum) में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में धकेलती हैं।
- पेट (Stomach) में गैस्ट्रिक ग्लैंड्स (gastric glands) जठर रस (gastric juice) स्रावित करते हैं। गैस्ट्रिक ग्रंथियाँ (gastric glands) पेट (stomach) की अंदरूनी परत (inner lining) में स्थित होती हैं। वे विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ रखती हैं – पार्श्विका कोशिकाएँ (parietal cells – HCl), मुख्य कोशिकाएँ (chief cells – पेप्सिनोजेन – pepsinogen), म्यूकस कोशिकाएँ (mucous cells – म्यूकस – mucus) और एंडोक्राइन कोशिकाएँ (endocrine cells – हार्मोन – hormones)।
- पेट (Stomach) में गैस्ट्रिन (gastrin) हार्मोन (hormone) स्रावित होता है। गैस्ट्रिन (gastrin) पेट (stomach) की जी-कोशिकाओं (G-cells) द्वारा स्रावित होता है। भोजन के सेवन (food intake) की प्रतिक्रिया में, यह पार्श्विका कोशिकाओं (parietal cells) को HCl स्रावित करने और मुख्य कोशिकाओं (chief cells) को पेप्सिनोजेन (pepsinogen) स्रावित करने के लिए उत्तेजित करता है।
- पेट (Stomach) में भोजन (food) 2-4 घंटे (hours) रहता है। यह समय भोजन के प्रकार (type) और आकार (size) के आधार पर भिन्न होता है। वसायुक्त भोजन (fatty food) कार्बोहाइड्रेट (carbohydrates) की तुलना में पेट (stomach) में अधिक समय तक रहता है। औसतन, भोजन (food) पेट (stomach) में लगभग 2-4 घंटे तक रहता है, जिसे गैस्ट्रिक खाली होने का समय (gastric emptying time) कहा जाता है।
- पेट (Stomach) में म्यूसिन (mucin) पेट की रक्षा (protect) करता है। म्यूसिन (mucin) एक प्रकार का ग्लाइकोप्रोटीन (glycoprotein) है, जो म्यूकस (mucus) का मुख्य घटक (main component) है। यह पानी के अणुओं (water molecules) के साथ मिलकर एक चिपचिपा (viscous), जेल जैसा (gel-like) बाधा (barrier) बनाता है। यह बाधा (barrier) पेट की दीवार (stomach wall) को एंजाइमैटिक (enzymatic) और एसिड (acid) क्षति से बचाती है।
- पेट (Stomach) में भोजन (food) का रासायनिक पाचन (chemical digestion) शुरू होता है। प्रोटीन (protein) का पाचन (digestion) यहाँ पेप्सिन (pepsin) द्वारा शुरू होता है। वसा (fat) का पाचन (digestion) भी यहाँ गैस्ट्रिक लाइपेज (gastric lipase) द्वारा कुछ हद तक शुरू होता है। कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate) का पाचन (digestion) मुख्य रूप से मुंह (mouth) में शुरू हुआ था और पेट (stomach) के अम्लीय वातावरण (acidic environment) में रुक जाता है।
- पेट (Stomach) का गैस्ट्रिक जूस (gastric juice) का pH 1.5-3.5 होता है। यह अम्लीय pH (acidic pH) अधिकांश बैक्टीरिया (bacteria) को मारने, पेप्सिनोजेन (pepsinogen) को पेप्सिन (pepsin) में सक्रिय करने और प्रोटीन (protein) के विकृतीकरण (denaturation) के लिए आवश्यक है। यह pH पेट (stomach) में प्रोटीन (protein) के पाचन (digestion) के लिए एक इष्टतम वातावरण (optimal environment) प्रदान करता है।
- यकृत (Liver) पित्त (bile) स्रावित करता है। पित्त (bile) एक पीला-हरा (yellow-green), क्षारीय (alkaline) तरल (fluid) है, जो यकृत कोशिकाओं (hepatocytes) द्वारा स्रावित होता है। यह पित्त नलिकाओं (bile ducts) के माध्यम से पित्ताशय (gallbladder) में संग्रहीत और सांद्रित (concentrated) किया जाता है। इसमें पानी (water), पित्त लवण (bile salts), पित्त वर्णक (bile pigments – बिलीरुबिन – bilirubin), कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) और इलेक्ट्रोलाइट्स (electrolytes) होते हैं।
- पित्त (Bile) वसा (fats) के पायसीकरण (emulsification) में मदद करता है। पित्त लवण (bile salts) वसा (fats) के बड़े ग्लोब्यूल्स (large globules) को छोटी, छोटी बूंदों (small, tiny droplets – micelles) में तोड़ देते हैं। यह पायसीकरण (emulsification) सतह क्षेत्र (surface area) को बहुत बढ़ा देता है, जिससे लाइपेज एंजाइम (lipase enzymes) वसा (fats) को अधिक कुशलता से पचा पाते हैं।
- पित्ताशय (Gallbladder) पित्त (bile) का भंडारण (store) करता है। यह एक छोटा, नाशपाती के आकार का (pear-shaped) अंग है, जो यकृत (liver) के नीचे स्थित होता है। यह यकृत (liver) से पित्त (bile) को संग्रहीत और सांद्रित करता है। भोजन (विशेष रूप से वसा – fat) के सेवन के बाद, यह पित्त (bile) को छोटी आंत (small intestine – duodenum) में छोड़ता है।
- यकृत (Liver) में ग्लाइकोजन (glycogen) का भंडारण (storage) होता है। यकृत (liver) अतिरिक्त ग्लूकोज (excess glucose) को ग्लाइकोजन (glycogen) (एक बहुलक – polymer of glucose) में परिवर्तित करता है (ग्लाइकोजेनेसिस – glycogenesis)। जब शरीर (body) को ऊर्जा (energy) की आवश्यकता होती है (जैसे, उपवास – fasting के दौरान), तो यकृत (liver) ग्लाइकोजन (glycogen) को वापस ग्लूकोज (glucose) में तोड़कर (ग्लाइकोजेनोलिसिस – glycogenolysis) रक्तप्रवाह (bloodstream) में छोड़ देता है।
- यकृत (Liver) विषाक्त पदार्थों (toxins) को डिटॉक्सिफाई (detoxify) करता है। यह रक्त (blood) से हानिकारक पदार्थों (harmful substances – दवाएँ – drugs, अल्कोहल – alcohol, अमोनिया – ammonia) को हटाता है और उन्हें हानिरहित यौगिकों (harmless compounds) में बदल देता है। उदाहरण के लिए, यह अमोनिया (ammonia – जो प्रोटीन चयापचय – protein metabolism के दौरान उत्पन्न होता है, जो अत्यधिक विषैला होता है) को यूरिया (urea – कम विषैला – less toxic) में परिवर्तित करता है, जो गुर्दे (kidneys) द्वारा उत्सर्जित (excreted) किया जाता है।
- यकृत (Liver) में ग्लूकोज (glucose) का भंडारण (storage) होता है। ग्लूकोज (glucose) को ग्लाइकोजन (glycogen) के रूप में संग्रहीत किया जाता है। यह यकृत (liver) की ग्लाइकोजन भंडारण (glycogen storage) क्षमता लगभग 100 ग्राम (लगभग 400 कैलोरी) है, जो 12-24 घंटे की ऊर्जा आवश्यकताओं (energy needs) को पूरा कर सकती है।
- यकृत (Liver) में प्रोटीन संश्लेषण (protein synthesis) होता है। यह रक्त प्लाज्मा प्रोटीन (blood plasma proteins – एल्ब्यूमिन – albumin, ग्लोब्युलिन – globulins, फाइब्रिनोजेन – fibrinogen) का अधिकांश भाग संश्लेषित करता है। यह थक्का कारक (clotting factors – प्रोथ्रोम्बिन – prothrombin, फाइब्रिनोजेन – fibrinogen) भी बनाता है। यकृत (liver) के बिना, रक्त का थक्का जमना (blood clotting) असंभव होगा।
- यकृत (Liver) में विटामिन A (Vitamin A) का भंडारण (storage) होता है। यह वसा-घुलनशील विटामिनों (fat-soluble vitamins – A, D, E, K) और विटामिन B₁₂ (vitamin B₁₂) का भंडारण करता है। यह लोहा (iron – फेरिटिन – ferritin के रूप में) और ताँबा (copper) जैसे खनिजों (minerals) को भी संग्रहीत करता है।
- यकृत (Liver) में बाइल पिगमेंट (bile pigment) बिलीरुबिन (bilirubin) होता है। बिलीरुबिन (bilirubin) हीम (heme) के विघटन (breakdown) का एक अपशिष्ट उत्पाद (waste product) है, जो हीमोग्लोबिन (hemoglobin) (पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं – old RBCs से) का एक भाग है। यह पित्त (bile) को उसका विशिष्ट पीला-हरा रंग (yellow-green colour) देता है। यह यकृत (liver) द्वारा रक्त से हटा दिया जाता है और पित्त (bile) में उत्सर्जित (excreted) कर दिया जाता है।
- यकृत (Liver) में विटामिन D (Vitamin D) का भंडारण (storage) होता है। यकृत (liver) वसा-घुलनशील विटामिनों (fat-soluble vitamins – A, D, E, K) का भंडारण करता है। विटामिन D (Vitamin D) कैल्शियम (calcium) के अवशोषण (absorption) और हड्डियों के स्वास्थ्य (bone health) के लिए महत्वपूर्ण है। यकृत (liver) विटामिन D (vitamin D) को उसके सक्रिय रूप (active form) में परिवर्तित करने में भी मदद करता है (हाइड्रॉक्सिलेशन – hydroxylation)।
- यकृत (Liver) में विटामिन K (Vitamin K) का भंडारण (storage) होता है। विटामिन K (Vitamin K) रक्त के थक्के जमने (blood clotting) के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह कई थक्का कारकों (clotting factors – प्रोथ्रोम्बिन – prothrombin, कारक VII, IX, X) के संश्लेषण (synthesis) के लिए एक सहकारक (cofactor) है। यह हड्डियों के चयापचय (bone metabolism) में भी भूमिका निभाता है।
- यकृत (Liver) अमोनिया (ammonia) को यूरिया (urea) में बदलता है। यूरिया चक्र (urea cycle) एक चयापचय मार्ग (metabolic pathway) है जो यकृत (liver) में होता है। यह अत्यधिक विषैले अमोनिया (highly toxic ammonia – NH₃) को कम विषैले यूरिया (less toxic urea) में परिवर्तित करता है। यूरिया (urea) तब गुर्दे (kidneys) द्वारा उत्सर्जित (excreted) किया जाता है।
- यकृत (Liver) में लिपिड चयापचय (lipid metabolism) होता है। यकृत (liver) वसा (fats) के चयापचय (metabolism) का केंद्र है। यह फैटी एसिड (fatty acids) को ऑक्सीकृत (oxidize) करता है, कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) और ट्राइग्लिसराइड्स (triglycerides) को संश्लेषित (synthesize) करता है, और लिपोप्रोटीन (lipoproteins – वीएलडीएल – VLDL) का उत्पादन करता है। यह कीटोन निकायों (ketone bodies – कीटोन बॉडीज) का भी उत्पादन करता है, जो उपवास (fasting) के दौरान एक ईंधन स्रोत (fuel source) हैं।
- यकृत (Liver) में कोलेस्ट्रॉल संश्लेषण (cholesterol synthesis) होता है। यकृत (liver) शरीर में कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) का प्राथमिक स्थल (primary site) है। कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) कोशिका झिल्लियों (cell membranes) के लिए आवश्यक है और हार्मोन (हार्मोन – स्टेरॉयड – steroids, विटामिन D – vitamin D), पित्त लवणों (bile salts) के संश्लेषण (synthesis) के लिए एक अग्रदूत (precursor) है।
- यकृत (Liver) में विटामिन B12 (Vitamin B₁₂) का भंडारण (storage) होता है। यकृत (liver) विटामिन B₁₂ (cobalamin) को संग्रहीत करता है, जो पानी में घुलनशील विटामिन (water-soluble vitamin) है। यह लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) के निर्माण और तंत्रिका तंत्र (nervous system) के समुचित कार्य (proper functioning) के लिए आवश्यक है। शरीर (body) में विटामिन B₁₂ (vitamin B₁₂) का अधिकांश भाग यकृत (liver) में संग्रहीत होता है।
- यकृत (Liver) में हीम (heme) का विघटन (breakdown) होता है। पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं (old RBCs) से हीमोग्लोबिन (hemoglobin) का हीम भाग (heme portion) यकृत (liver) में बिलीरुबिन (bilirubin) में टूट जाता है। बिलीरुबिन (bilirubin) तब पित्त (bile) में उत्सर्जित होता है और मल (feces) में शरीर से बाहर निकल जाता है।
- यकृत (Liver) में लिपोप्रोटीन संश्लेषण (lipoprotein synthesis) होता है। यकृत (liver) लिपोप्रोटीन (lipoproteins) – वीएलडीएल (VLDL – very low-density lipoproteins), आईडीएल (IDL – intermediate-density lipoproteins), एचडीएल (HDL – high-density lipoproteins) – का संश्लेषण करता है। ये लिपोप्रोटीन (lipoproteins) वसा (fats – ट्राइग्लिसराइड्स – triglycerides) और कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) को रक्त (blood) के माध्यम से शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाते हैं।
- यकृत (Liver) में विटामिन E (Vitamin E) का भंडारण (storage) होता है। यकृत (liver) वसा-घुलनशील विटामिनों (fat-soluble vitamins – A, D, E, K) के भंडारण का मुख्य स्थल है। विटामिन E (Vitamin E) एक एंटीऑक्सीडेंट (antioxidant) है, जो कोशिकाओं (cells) को क्षति (damage) से बचाता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) के लिए भी महत्वपूर्ण है।
- यकृत (Liver) में कार्बोहाइड्रेट चयापचय (carbohydrate metabolism) होता है। यकृत (liver) कार्बोहाइड्रेट चयापचय (carbohydrate metabolism) में केंद्रीय भूमिका निभाता है। यह ग्लाइकोजेनेसिस (glycogenesis – ग्लाइकोजन संश्लेषण – glycogen synthesis), ग्लाइकोजेनोलिसिस (glycogenolysis – ग्लाइकोजन टूटना – glycogen breakdown) और ग्लूकोनियोजेनेसिस (gluconeogenesis – नए ग्लूकोज का उत्पादन – production of new glucose from non-carbohydrate sources) करता है।
- यकृत (Liver) में ग्लूकागन (glucagon) रक्त शर्करा (blood sugar) बढ़ाता है। ग्लूकागन (glucagon) एक हार्मोन (hormone) है, जो अग्न्याशय (pancreas) की अल्फा कोशिकाओं (α-cells of pancreas) द्वारा स्रावित होता है। यह यकृत (liver) और मांसपेशियों (muscles) में ग्लाइकोजेनोलिसिस (glycogenolysis – ग्लाइकोजन (glycogen) का टूटना) और ग्लूकोनियोजेनेसिस (gluconeogenesis) को उत्तेजित करता है, जिससे रक्त शर्करा का स्तर (blood glucose level) बढ़ता है।
- यकृत (Liver) में बिलीवर्डिन (biliverdin) बिलीरुबिन (bilirubin) में बदलता है। बिलीवर्डिन (biliverdin) एक हरा वर्णक (green pigment) है, जो हीम (heme) के टूटने (breakdown) के दौरान बनता है। यह एंजाइम बिलीवर्डिन रिडक्टेस (biliverdin reductase) द्वारा बिलीरुबिन (bilirubin – पीला वर्णक – yellow pigment) में कम हो जाता है। यह प्रतिक्रिया यकृत (liver) में होती है।
- यकृत (Liver) में ग्लूकोज (glucose) को ग्लाइकोजन (glycogen) में बदलता है। इंसुलिन (insulin) एक हार्मोन (hormone) है, जो अग्न्याशय (pancreas) की बीटा कोशिकाओं (β-cells) द्वारा स्रावित होता है। यह यकृत (liver) और मांसपेशियों (muscles) में ग्लाइकोजेनेसिस (glycogenesis – ग्लाइकोजन (glycogen) संश्लेषण) को उत्तेजित करता है, जिससे रक्त शर्करा का स्तर (blood glucose level) कम होता है।
- अग्न्याशय (Pancreas) में ट्रिप्सिन (trypsin) प्रोटीन (protein) पचाता है। ट्रिप्सिन (trypsin) एक प्रोटीज (protease – प्रोटीन-पाचक एंजाइम) है, जो अग्न्याशय (pancreas) द्वारा निष्क्रिय रूप ट्रिप्सिनोजेन (trypsinogen) में स्रावित होता है। यह छोटी आंत (small intestine – duodenum) में एंटरोकाइनेज (enterokinase) द्वारा सक्रिय होता है। सक्रिय ट्रिप्सिन (active trypsin) अन्य अग्न्याशयी प्रोटीज (pancreatic proteases – काइमोट्रिप्सिनोजेन – chymotrypsinogen, प्रोकार्बोक्सीपेप्टिडेज़ – procarboxypeptidase) को सक्रिय करता है।
- अग्न्याशय (Pancreas) में लैंगरहैंस की कोशिकाएँ (Islets of Langerhans) हार्मोन (hormones) बनाती हैं। ये अग्न्याशय (pancreas) में स्थित कोशिकाओं (cells) के छोटे समूह (clusters) हैं। वे अंतःस्रावी (endocrine) कोशिकाएँ (endocrine cells) हैं। बीटा कोशिकाएँ (β-cells) इंसुलिन (insulin) का उत्पादन करती हैं, अल्फा कोशिकाएँ (α-cells) ग्लूकागन (glucagon) का उत्पादन करती हैं, और डेल्टा कोशिकाएँ (δ-cells) सोमाटोस्टेटिन (somatostatin – वृद्धि हार्मोन-अवरोधक हार्मोन – growth hormone-inhibiting hormone) का उत्पादन करती हैं।
- अग्न्याशय (Pancreas) में सोमाटोस्टेटिन (somatostatin) हार्मोन (hormone) स्रावित होता है। सोमाटोस्टेटिन (somatostatin) डेल्टा कोशिकाओं (δ-cells of pancreas) द्वारा स्रावित होता है। यह इंसुलिन (insulin) और ग्लूकागन (glucagon) दोनों के स्राव (secretion) को रोकता है (inhibits) (पैराक्राइन सिग्नलिंग – paracrine signaling)। यह पिट्यूटरी ग्रंथि (pituitary gland) से वृद्धि हार्मोन (growth hormone) की रिहाई (release) को भी रोकता है।
- छोटी आंत (Small intestine) में विली (villi) पोषक तत्वों (nutrients) का अवशोषण (absorption) करते हैं। विली (villi) छोटी, उँगली के आकार की (finger-like) प्रक्षेपण (projections) होती हैं, जो छोटी आंत (small intestine) की दीवार (inner wall) पर होती हैं। वे अवशोषण (absorption) के लिए सतह क्षेत्र (surface area) को बहुत बढ़ा देती हैं। प्रत्येक विलस (villus) रक्त केशिकाओं (blood capillaries) और एक लसीका वाहिका (lymphatic vessel – लैक्टियल – lacteal) से युक्त होता है।
- छोटी आंत (Small intestine) में लैक्टियल (lacteal) वसा (fats) अवशोषित (absorb) करते हैं। लैक्टियल (lacteal) प्रत्येक विलस (villus) के केंद्र में स्थित एक लसीका वाहिका (lymphatic vessel) है। यह पची हुई वसा (digested fats) को अवशोषित करता है, जो फिर लसीका तंत्र (lymphatic system) के माध्यम से रक्तप्रवाह (bloodstream) में प्रवेश करती है।
- छोटी आंत (Small intestine) में लाइपेज (lipase) वसा (fat) पचाता है। अग्न्याशयी लाइपेज (pancreatic lipase) अग्न्याशय (pancreas) द्वारा स्रावित एक महत्वपूर्ण वसा-पाचक एंजाइम (fat-digesting enzyme) है। यह ट्राइग्लिसराइड्स (triglycerides) को मोनोग्लिसराइड्स (monoglycerides) और फैटी एसिड (fatty acids) में तोड़ता है। आंतों की लाइपेज (intestinal lipase) भी एक छोटी भूमिका निभाती है।
- छोटी आंत (Small intestine) में लैक्टेज (lactase) लैक्टोज (lactose) पचाता है। लैक्टेज (lactase) एक एंजाइम (enzyme) है, जो ब्रश बॉर्डर (brush border) पर स्थित होता है (छोटी आंत – small intestine की कोशिकाओं पर)। यह लैक्टोज (lactose – दूध की शर्करा – milk sugar) को ग्लूकोज (glucose) और गैलेक्टोज (galactose) (दोनों सरल शर्कराएँ – simple sugars) में तोड़ता है। लैक्टेज की कमी (lactase deficiency) लैक्टोज असहिष्णुता (lactose intolerance) का कारण बनती है।
- छोटी आंत (Small intestine) में माल्टेज (maltase) शर्करा (sugar) पचाता है। माल्टेज (maltase) एक एंजाइम (enzyme) है, जो ब्रश बॉर्डर (brush border) (छोटी आंत – small intestine की कोशिकाओं पर) पर स्थित होता है। यह माल्टोज (maltose – दो ग्लूकोज – glucose इकाइयाँ) को दो ग्लूकोज (glucose) अणुओं (molecules) में तोड़ता है।
- छोटी आंत (Small intestine) में सुक्रेज (sucrase) सुक्रोज (sucrose) को पचाता है। सुक्रेज (sucrase) एक एंजाइम (enzyme) है, जो ब्रश बॉर्डर (brush border) (छोटी आंत – small intestine की कोशिकाओं पर) पर स्थित होता है। यह सुक्रोज (sucrose – टेबल शुगर – table sugar) को ग्लूकोज (glucose) और फ्रुक्टोज (fructose) में तोड़ता है।
- छोटी आंत (Small intestine) में पेप्टिडेज (peptidase) प्रोटीन (protein) पचाता है। पेप्टिडेज़ (Peptidases) (एक प्रकार के प्रोटीज – proteases) ब्रश बॉर्डर (brush border) पर स्थित होते हैं। वे छोटे पेप्टाइड्स (small peptides) को अमीनो एसिड (amino acids) में तोड़ते हैं। अमीनो एसिड (amino acids) तब रक्तप्रवाह (bloodstream) में अवशोषित (absorbed) हो जाते हैं।
- छोटी आंत (Small intestine) में विली (villi) सतह क्षेत्र (surface area) बढ़ाते हैं। विली (villi) और माइक्रोविली (microvilli) (प्रत्येक विलस – villus पर कोशिकाओं की सतह पर छोटे, उँगली के आकार के प्रक्षेपण – finger-like projections) अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र को नाटकीय रूप से बढ़ाते हैं। यह छोटी आंत (small intestine) के अवशोषण (absorption) के लिए एक अत्यधिक कुशल (efficient) अंग होने का एक प्रमुख कारण है।
- छोटी आंत (Small intestine) में माइक्रोविली (microvilli) अवशोषण (absorption) बढ़ाते हैं। माइक्रोविली (microvilli) छोटी आंत (small intestine) की कोशिकाओं (enterocytes – अवशोषक कोशिकाएँ – absorptive cells) की सतह पर छोटे, उँगली के आकार के प्रक्षेपण (finger-like projections) होते हैं। वे मिलकर "ब्रश बॉर्डर" (brush border) बनाते हैं। वे अवशोषण (absorption) के लिए सतह क्षेत्र (surface area) को बहुत बढ़ा देते हैं।
- पाचन तंत्र (Digestive system) में ग्रहणी (duodenum) छोटी आंत (small intestine) का पहला भाग है। यह "C" आकार का (C-shaped) होता है और लगभग 25-30 सेमी लंबा होता है। अधिकांश रासायनिक पाचन (chemical digestion) यहाँ होता है। यह पेट (stomach) से कीमा (chyme), यकृत (liver) से पित्त (bile), और अग्न्याशय (pancreas) से अग्न्याशयी रस (pancreatic juice) प्राप्त करता है।
- छोटी आंत (Small intestine) में जेजुनम (jejunum) पोषक अवशोषण (nutrient absorption) करता है। यह छोटी आंत (small intestine) का मध्य भाग (middle part) है (लगभग 2.5 मीटर लंबा)। यहीं अधिकांश पोषक तत्वों (nutrients – कार्बोहाइड्रेट – carbohydrates, प्रोटीन – proteins, विटामिन – vitamins) का अवशोषण (absorption) होता है। इसकी दीवार (wall) में विली (villi) की उच्च सांद्रता (high density) होती है।
- छोटी आंत (Small intestine) में इलियम (ileum) अंतिम भाग (final part) है। यह लगभग 3-4 मीटर लंबा होता है। यह पित्त लवणों (bile salts) और विटामिन B₁₂ (vitamin B₁₂) को अवशोषित (absorb) करता है। इलियम (ileum) एक वाल्व (ileocecal valve) के माध्यम से बड़ी आंत (large intestine – सीकम – cecum) से जुड़ता है, जो भोजन को वापस बड़ी आंत (large intestine) से छोटी आंत (small intestine) में जाने से रोकता है।
- छोटी आंत (Small intestine) में पाचक रस (digestive juices) अग्न्याशय (pancreas) से आता है। अग्न्याशयी रस (pancreatic juice) अग्न्याशय (pancreas) द्वारा स्रावित एक स्पष्ट (clear), क्षारीय (alkaline) तरल (fluid) है। इसमें पानी (water), बाइकार्बोनेट आयन (bicarbonate ions – HCO₃⁻) और पाचक एंजाइम (digestive enzymes – एमाइलेज़ – amylase, लाइपेज़ – lipase, प्रोटीज़ – proteases (ट्रिप्सिनोजेन – trypsinogen, काइमोट्रिप्सिनोजेन – chymotrypsinogen, प्रोकार्बोक्सीपेप्टिडेज़ – procarboxypeptidase)) होते हैं।
- छोटी आंत (Small intestine) में लिम्फेटिक वाहिकाएँ (lymphatic vessels – लैक्टियल्स – lacteals) वसा (fat) ले जाती हैं। पची हुई वसा (digested fats) (मोनोग्लिसराइड्स – monoglycerides, फैटी एसिड – fatty acids) आंतों की कोशिकाओं (enterocytes) में पुनः ट्राइग्लिसराइड्स (triglycerides) में संश्लेषित होती हैं और काइलोमाइक्रोन्स (chylomicrons) (लिपोप्रोटीन कण – lipoprotein particles) में पैक हो जाती हैं। काइलोमाइक्रोन्स (chylomicrons) फिर लैक्टियल्स (lacteals) (लसीका वाहिकाएँ – lymphatic vessels) में प्रवेश करते हैं और लसीका तंत्र (lymphatic system) के माध्यम से ले जाए जाते हैं।
- छोटी आंत (Small intestine) में पाचन एंजाइम (digestive enzymes) स्रावित होते हैं। छोटी आंत (small intestine) की दीवार (wall) अपने स्वयं के पाचक एंजाइम (digestive enzymes) को स्रावित करती है, जिन्हें ब्रश बॉर्डर एंजाइम (brush border enzymes) कहा जाता है। इनमें पेप्टिडेज़ (peptidases), डाइसैकेरिडेज़ (disaccharidases – माल्टेज – maltase, सुक्रेज – sucrase, लैक्टेज – lactase) और एंटरोकाइनेज (enterokinase) शामिल हैं।
- छोटी आंत (Small intestine) में एंटरोकाइनेज (enterokinase) ट्रिप्सिनोजेन (trypsinogen) को सक्रिय करता है। एंटरोकाइनेज (enterokinase) एक ब्रश बॉर्डर एंजाइम (brush border enzyme) है। यह अग्न्याशय (pancreas) द्वारा स्रावित निष्क्रिय एंजाइम (inactive enzyme) ट्रिप्सिनोजेन (trypsinogen) को सक्रिय ट्रिप्सिन (active trypsin) में परिवर्तित करता है। यह पाचन एंजाइम सक्रियण (digestive enzyme activation) का एक महत्वपूर्ण चरण है।
- छोटी आंत (Small intestine) में पाचन (digestion) पूर्ण होता है। सभी प्रमुख पोषक तत्वों (प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, न्यूक्लिक एसिड) का पाचन (digestion) छोटी आंत (small intestine) के अंत तक पूरा हो जाता है। परिणामस्वरूप, मोनोमर्स (monomers – अमीनो एसिड – amino acids, ग्लूकोज – glucose, फैटी एसिड – fatty acids, न्यूक्लियोटाइड – nucleotides) बनते हैं, जो अवशोषण (absorption) के लिए तैयार होते हैं।
- छोटी आंत (Small intestine) में ग्लूकोज (glucose) का अवशोषण (absorption) होता है। ग्लूकोज (glucose) (और गैलेक्टोज – galactose) सोडियम-ग्लूकोज कोट्रांसपोर्टर (SGLT1 – Sodium-Glucose Cotransporter) के माध्यम से सक्रिय परिवहन (active transport) द्वारा आंतों की कोशिकाओं (enterocytes) में अवशोषित होता है। फ्रुक्टोज (fructose) सुगम प्रसार (facilitated diffusion – GLUT5 ट्रांसपोर्टर – GLUT5 transporter) द्वारा अवशोषित होता है।
- छोटी आंत (Small intestine) में अमीनो एसिड (amino acids) का अवशोषण (absorption) होता है। अमीनो एसिड (amino acids) कई सोडियम-निर्भर (sodium-dependent) कोट्रांसपोर्टर (cotransporters) के माध्यम से सक्रिय परिवहन (active transport) द्वारा अवशोषित होते हैं। डाइपेप्टाइड्स (dipeptides) और ट्राइपेप्टाइड्स (tripeptides) भी सक्रिय परिवहन (active transport – पेप्टी-1 – PepT1 ट्रांसपोर्टर) द्वारा अवशोषित हो सकते हैं और फिर कोशिका के अंदर अमीनो एसिड (amino acids) में टूट जाते हैं।
- पाचन तंत्र (Digestive system) में ग्रहणी (duodenum) में पित्त (bile) और अग्न्याशयी रस (pancreatic juice) मिलते हैं। पित्त (bile) यकृत (liver) से और अग्न्याशयी रस (pancreatic juice) अग्न्याशय (pancreas) से ग्रहणी (duodenum) में खाली होते हैं (निकलते हैं)। सामान्य पित्त नली (common bile duct) और अग्न्याशयी नली (pancreatic duct) आमतौर पर ग्रहणी (duodenum) में प्रवेश करने से पहले जुड़ती हैं।
- छोटी आंत (Small intestine) में पाचन पूर्ण होने पर अवशेष (undigested residue) बड़ी आंत (large intestine) में जाता है। पचा नहीं सकने वाले भोजन के घटक (undigested food components) (जैसे, सेलूलोज़ – cellulose – फाइबर – fiber), पानी (water), बैक्टीरिया (bacteria), और मृत कोशिकाएँ (dead cells) इलियोसेकल वाल्व (ileocecal valve) के माध्यम से बड़ी आंत (large intestine – सीकम – cecum) में चले जाते हैं।
- बड़ी आंत (Large intestine) पानी (water) का अवशोषण (absorption) करती है। यह मुख्य रूप से पाचन तंत्र (digestive tract) से पानी (water) और इलेक्ट्रोलाइट्स (electrolytes – सोडियम – sodium, क्लोराइड – chloride) को पुनर्अवशोषित (reabsorb) करता है। यह भोजन के अवशेष (undigested food residue) से तरल (liquid) को हटाकर उसे अर्ध-ठोस (semi-solid) मल (feces) में बदल देता है।
- गुर्दे (Kidneys) यूरिया (urea) को उत्सर्जित (excrete) करते हैं। यूरिया (urea) प्रोटीन चयापचय (protein metabolism) का एक अपशिष्ट उत्पाद (waste product) है। यह यकृत (liver) में बनता है और रक्त (blood) द्वारा गुर्दे (kidneys) तक ले जाया जाता है। गुर्दे (kidneys) यूरिया (urea) (और अन्य नाइट्रोजनी अपशिष्ट – nitrogenous wastes – क्रिएटिनिन – creatinine, यूरिक एसिड – uric acid) को रक्त से छानकर (filter) मूत्र (urine) के रूप में बाहर निकाल देते हैं।
- गुर्दे (Kidneys) में नेफ्रॉन (nephron) रक्त छानने की इकाई (filtering unit) है। प्रत्येक गुर्दे (kidney) में लगभग 10 लाख नेफ्रॉन (nephrons) होते हैं। प्रत्येक नेफ्रॉन (nephron) एक ग्लोमेरूलस (glomerulus – केशिकाओं का एक गुच्छा – tuft of capillaries) और एक वृक्क नलिका (renal tubule) से बना होता है। नेफ्रॉन (nephrons) रक्त से अपशिष्ट (wastes) को निकालने और शरीर में पानी (water) और इलेक्ट्रोलाइट्स (electrolytes) के संतुलन (balance) को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
- गुर्दे (Kidneys) में ग्लोमेरूलस (glomerulus) रक्त (blood) छानता है (filters)। ग्लोमेरूलस (glomerulus) केशिकाओं (capillaries) का एक गुच्छा (network) है, जो उच्च दबाव (high pressure) पर होता है। यहाँ रक्त का तरल भाग (fluid part) (पानी – water, ग्लूकोज – glucose, लवण – salts, यूरिया – urea, यूरिक एसिड – uric acid, अमीनो एसिड – amino acids) बोमैन कैप्सूल (Bowman's capsule) में छानकर (filter) निकल जाता है। बड़े अणु (large molecules – प्रोटीन – proteins) और रक्त कोशिकाएँ (blood cells) रक्तप्रवाह (bloodstream) में बने रहते हैं।
- गुर्दे (Kidneys) में रेनिन (renin) रक्तचाप (blood pressure) नियंत्रित करता है। रेनिन (renin) गुर्दे (kidneys) की जक्स्टाग्लोमेरुलर कोशिकाओं (juxtaglomerular cells) द्वारा स्रावित एक एंजाइम (enzyme) है। जब रक्तचाप (blood pressure) कम होता है, तो रेनिन (renin) एक श्रृंखला प्रतिक्रिया (cascade – RAAS – Renin-Angiotensin-Aldosterone System) शुरू करता है। अंततः, रेनिन (renin) एंजियोटेंसिन II (angiotensin II) का उत्पादन करता है, जो रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को संकुचित (constrict) करता है और एल्डोस्टेरोन (aldosterone) (एक हार्मोन – hormone) की रिहाई (release) को उत्तेजित करता है, जो सोडियम (sodium) और पानी (water) के पुनरावशोषण (reabsorption) को बढ़ाता है, दोनों ही रक्तचाप (blood pressure) को बढ़ाते हैं।
- गुर्दे (Kidneys) में एरिथ्रोपोइटिन (erythropoietin – EPO) रक्त कोशिका निर्माण (red blood cell production) में मदद करता है। EPO एक हार्मोन (hormone) है, जो मुख्य रूप से गुर्दे (kidneys) (और थोड़ी मात्रा में यकृत – liver) में निर्मित होता है। यह अस्थि मज्जा (bone marrow) को लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs – red blood cells) के उत्पादन को बढ़ाने के लिए उत्तेजित करता है। रक्त में ऑक्सीजन का स्तर (oxygen level) कम होने पर EPO का उत्पादन बढ़ जाता है (हाइपोक्सिया – hypoxia)।
- गुर्दे (Kidneys) में यूरेटर (ureter) मूत्र (urine) को मूत्राशय (urinary bladder) तक ले जाता है। यूरेटर (ureter) एक पेशीय नलिका (muscular tube) है, जो प्रत्येक गुर्दे (kidney) को मूत्राशय (urinary bladder) से जोड़ती है। यह क्रमाकुंचन तरंगों (peristaltic waves – मांसपेशियों के संकुचन और विश्राम – muscle contractions and relaxations) का उपयोग करके मूत्र (urine) को गुर्दे (kidneys) से मूत्राशय (urinary bladder) तक ले जाता है।
- गुर्दे (Kidneys) में मूत्राशय (urinary bladder) मूत्र (urine) का भंडारण (storage) करता है। मूत्राशय (urinary bladder) एक खोखला, पेशीय अंग (hollow, muscular organ) है, जो मूत्र (urine) को तब तक संग्रहीत करता है जब तक कि यह पेशाब (urination) के माध्यम से शरीर से बाहर नहीं निकल जाता है। यह पेट (abdomen) के निचले हिस्से (lower part) में स्थित होता है।
- गुर्दे (Kidneys) में मूत्रमार्ग (urethra) मूत्र (urine) का उत्सर्जन (excretion) करता है। मूत्रमार्ग (urethra) एक ट्यूब (tube) है, जो मूत्राशय (urinary bladder) से मूत्र (urine) को शरीर से बाहर तक ले जाती है। पुरुषों (males) में, मूत्रमार्ग (urethra) प्रजनन प्रणाली (reproductive system) के साथ एक सामान्य मार्ग साझा करता है; महिलाओं (females) में यह पूरी तरह से अलग होता है और छोटा होता है।
- गुर्दे (Kidneys) में हेनले का लूप (Loop of Henle) पानी (water) का पुनरावशोषण (reabsorption) करता है। हेनले का लूप (Loop of Henle) नेफ्रॉन (nephron) का U-आकार का भाग (U-shaped portion) है। यह गुर्दे (kidney) के मज्जा (medulla) में एक आसमाटिक प्रवणता (osmotic gradient) बनाता है। यह प्रवणता (gradient) कलेक्टिंग डक्ट (collecting duct) को बहुत अधिक मात्रा में पानी (water) को पुनर्अवशोषित (reabsorb) करने की अनुमति देता है, जिससे सांद्रित मूत्र (concentrated urine) का उत्पादन होता है।
- गुर्दे (Kidneys) में डिस्टल ट्यूब्यूल (distal tubule) इलेक्ट्रोलाइट संतुलन (electrolyte balance) करता है। डिस्टल कनवल्यूटेड ट्यूब्यूल (DCT – Distal Convoluted Tubule) इलेक्ट्रोलाइट्स (electrolytes – सोडियम – Na⁺, पोटेशियम – K⁺, कैल्शियम – Ca²⁺) के पुनरावशोषण (reabsorption) और स्राव (secretion) को विनियमित (regulate) करता है। यह हार्मोन (hormones – एल्डोस्टेरोन – aldosterone, पैराथाइरॉइड हार्मोन – PTH) के प्राथमिक स्थलों (primary sites) में से एक है।
- गुर्दे (Kidneys) में प्रॉक्सिमल ट्यूब्यूल (proximal tubule) ग्लूकोज (glucose) का पुनरावशोषण (reabsorption) करता है। PCT (Proximal Convoluted Tubule) नेफ्रॉन (nephron) के निस्पंदन (filtrate) से अधिकांश ग्लूकोज (glucose), अमीनो एसिड (amino acids), विटामिन (vitamins), और इलेक्ट्रोलाइट्स (electrolytes) को सक्रिय परिवहन (active transport) द्वारा पुनर्अवशोषित (reabsorb) करता है। सामान्य परिस्थितियों में, मूत्र (urine) में कोई ग्लूकोज (glucose) नहीं होता है (ग्लाइकोसुरिया – glycosuria मधुमेह – diabetes का संकेत है)।
- गुर्दे (Kidneys) में कलेक्टिंग डक्ट (collecting duct) मूत्र (urine) सांद्रण (concentration) करता है। कलेक्टिंग डक्ट (collecting duct) नेफ्रॉन (nephron) के कई डिस्टल ट्यूब्यूल्स (distal tubules) से निस्पंदन (filtrate) एकत्र करता है। यह एंटीडाययूरेटिक हार्मोन (ADH – Antidiuretic Hormone) के प्रति संवेदनशील (sensitive) होता है। ADH के उच्च स्तर (high levels) पर, कलेक्टिंग डक्ट (collecting duct) अधिक पानी (water) को पुनर्अवशोषित (reabsorb) करता है, जिससे सांद्रित (concentrated) मूत्र (urine) बनता है। ADH के निम्न स्तर (low levels) पर, पतला (dilute) मूत्र (urine) बनता है।
- गुर्दे (Kidneys) में ग्लोमेरूलर निस्पंदन दर (Glomerular Filtration Rate – GFR) 125 mL/मिनट (min) होती है। GFR एक मिनट में ग्लोमेरुली (glomeruli) (सभी नेफ्रॉन – all nephrons में) द्वारा उत्पादित प्राथमिक निस्पंदन (primary filtrate) की मात्रा है। एक स्वस्थ वयस्क (healthy adult) में, यह लगभग 125 mL/min (180 लीटर/दिन – liters/day) है। GFR का उपयोग गुर्दे के कार्य (kidney function) का आकलन करने के लिए किया जाता है (एक मार्कर के रूप में)।
- गुर्दे (Kidneys) में यूरिक एसिड (uric acid) उत्सर्जित होता है। यूरिक एसिड (uric acid) प्यूरीन (purines – DNA और RNA के घटक – components of DNA and RNA) चयापचय (metabolism) का एक अपशिष्ट उत्पाद (waste product) है। गुर्दे (kidneys) रक्त से यूरिक एसिड (uric acid) को छानकर (filter) मूत्र (urine) में उत्सर्जित (excrete) करते हैं। रक्त में यूरिक एसिड का उच्च स्तर (high level) (हाइपरयूरिसीमिया – hyperuricemia) गाउट (gout – एक प्रकार का गठिया – a type of arthritis) का कारण बन सकता है।
- गुर्दे (Kidneys) में एडीएच (ADH – Antidiuretic Hormone) पानी (water) के पुनरावशोषण (reabsorption) को नियंत्रित करता है। ADH (जिसे वैसोप्रेसिन – vasopressin भी कहा जाता है) एक हार्मोन (hormone) है, जो हाइपोथैलेमस (hypothalamus) में निर्मित होता है और पश्च पिट्यूटरी ग्रंथि (posterior pituitary gland) से स्रावित होता है। यह कलेक्टिंग डक्ट (collecting duct) को अधिक पानी (water) को पुनर्अवशोषित (reabsorb) करने का कारण बनता है, जिससे मूत्र उत्पादन (urine output) कम हो जाता है (एंटीडाययूरेसिस – antidiuresis)।
- गुर्दे (Kidneys) में एल्डोस्टेरोन (aldosterone) सोडियम (sodium) का पुनरावशोषण (reabsorption) करता है। एल्डोस्टेरोन (aldosterone) एक हार्मोन (hormone) है, जो अधिवृक्क प्रांतस्था (adrenal cortex) द्वारा स्रावित होता है। यह डिस्टल ट्यूब्यूल (distal tubule) और कलेक्टिंग डक्ट (collecting duct) को सोडियम (Na⁺) के पुनरावशोषण (reabsorption) और पोटेशियम (K⁺) के स्राव (secretion) को बढ़ाने का कारण बनता है। पानी (water) सोडियम (sodium) का अनुसरण करता है (आसमाटिक रूप से – osmotically), इसलिए एल्डोस्टेरोन (aldosterone) रक्त की मात्रा (blood volume) और रक्तचाप (blood pressure) को भी बढ़ाता है।
- गुर्दे (Kidneys) में कूपर की ग्रंथियाँ (Cowper's glands) मूत्रमार्ग (urethra) की रक्षा (protect) करती हैं। कूपर की ग्रंथियाँ (Cowper's glands – बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथियाँ – bulbourethral glands) प्रजनन प्रणाली (reproductive system) का हिस्सा हैं, मूत्र प्रणाली (urinary system) का नहीं। वे एक स्पष्ट, चिकनाई वाला (lubricating) स्राव (fluid) स्रावित करते हैं जो यौन उत्तेजना (sexual arousal) के दौरान मूत्रमार्ग (urethra) को चिकनाई देता है और किसी भी शेष मूत्र (residual urine) को बेअसर (neutralize) करता है।
- गुर्दे (Kidneys) में बोमैन कैप्सूल (Bowman's capsule) निस्पंदन (filtration) करता है। बोमैन कैप्सूल (Bowman's capsule) नेफ्रॉन (nephron) का शुरुआती, कप के आकार का (cup-shaped) भाग है। यह ग्लोमेरूलस (glomerulus) (केशिकाओं का गुच्छा – tuft of capillaries) को घेरे रहता है। ग्लोमेरूलस (glomerulus) में केशिकाओं (capillaries) से तरल (fluid) बोमैन कैप्सूल (Bowman's capsule) की जगह (space) में छानकर (filter) निकल जाता है, जो प्राथमिक मूत्र (primary urine – glomerular filtrate) की शुरुआत होती है।
- गुर्दे (Kidneys) में नेफ्रॉन (nephron) की संख्या लाखों (millions) में होती है। प्रत्येक मानव गुर्दे (human kidney) में लगभग 0.8 से 1.5 मिलियन नेफ्रॉन (nephrons) होते हैं। नेफ्रॉन (nephrons) जन्म के समय मौजूद होते हैं। नेफ्रॉन (nephrons) का नुकसान (loss) अपरिवर्तनीय (irreversible) है और उम्र (aging) या गुर्दे की बीमारी (kidney disease) के साथ हो सकता है।
- गुर्दे (Kidneys) में मूत्राशय स्फिंक्टर (urinary bladder sphincter) मूत्र (urine) को नियंत्रित करता है। मूत्राशय स्फिंक्टर (urinary bladder sphincters) – आंतरिक (internal – अनैच्छिक – involuntary) और बाहरी (external – स्वैच्छिक – voluntary) – मूत्रमार्ग (urethra) के आसपास की पेशीय (muscular) संरचनाएँ हैं। वे मूत्राशय (bladder) से मूत्र (urine) के प्रवाह (flow) को नियंत्रित करते हैं। जब वे सिकुड़ते हैं (contract), तो मूत्रमार्ग (urethra) बंद हो जाता है, जिससे मूत्र (urine) को गुजरने से रोका जा सकता है।
- गुर्दे (Kidneys) में रक्त (blood) का निस्पंदन (filtration) ग्लोमेरूलस (glomerulus) में होता है। ग्लोमेरूलस (glomerulus) एक अत्यधिक पारगम्य (highly permeable) केशिका बिस्तर (capillary bed) है। यह एक फिल्टर के रूप में कार्य करता है, जो छोटे अणुओं (small molecules – पानी, ग्लूकोज, लवण, यूरिया) को रक्त (blood) से निकलने देता है, जबकि बड़े अणुओं (large molecules – प्रोटीन) और कोशिकाओं (blood cells) को रक्तप्रवाह (bloodstream) में बनाए रखता है।
- गुर्दे (Kidneys) में मूत्र (urine) का निर्माण (formation) नेफ्रॉन (nephron) में होता है। यह प्रक्रिया तीन चरणों में होती है – ग्लोमेरुलर निस्पंदन (glomerular filtration – बोमैन कैप्सूल – Bowman's capsule में), ट्यूब्यूलर पुनरावशोषण (tubular reabsorption – PCT, लूप ऑफ हेनले – Loop of Henle, DCT से रक्त में वापस) और ट्यूब्यूलर स्राव (tubular secretion – DCT और कलेक्टिंग डक्ट – collecting duct से रक्त से मूत्र में)।
- गुर्दे (Kidneys) में मूत्र (urine) का pH 4.5-8 (सामान्यतः लगभग 6) होता है। मूत्र का pH (urine pH) आहार (diet) और चयापचय स्थितियों (metabolic conditions) के आधार पर भिन्न होता है। प्रोटीन युक्त आहार (high-protein diet) और निर्जलीकरण (dehydration) मूत्र (urine) को अधिक अम्लीय (more acidic) बना सकते हैं। पौधे-आधारित आहार (plant-based diet) मूत्र (urine) को अधिक क्षारीय (more alkaline) बना सकता है। मूत्र का pH (urine pH) शरीर के एसिड-बेस संतुलन (acid-base balance) को बनाए रखने में एक कारक है।
- गुर्दे (Kidneys) में मूत्र (urine) का सांद्रण (concentration) ADH (antidiuretic hormone) द्वारा नियंत्रित होता है। ADH कलेक्टिंग डक्ट (collecting duct) को पानी के प्रति अधिक पारगम्य (permeable) बनाता है, जिससे अधिक पानी (water) को पुनर्अवशोषित (reabsorb) किया जा सकता है। यह प्रक्रिया गुर्दे (kidney) के मज्जा (medulla) में निर्मित उच्च आसमाटिक प्रवणता (high osmotic gradient) पर निर्भर करती है (मुख्य रूप से हेनले के लूप – Loop of Henle द्वारा)। परिणाम सांद्रित (concentrated) मूत्र (urine) है, जो शरीर के पानी (body water) को बचाता है।
- गुर्दे (Kidneys) में मूत्र (urine) का निर्माण (formation) रक्त प्लाज्मा (blood plasma) से होता है। मूत्र (urine) प्लाज्मा (plasma) का एक अल्ट्राफिल्ट्रेट (ultrafiltrate) है, जिसे नेफ्रॉन (nephron) द्वारा संशोधित किया गया है (पुनरावशोषण और स्राव के माध्यम से – through reabsorption and secretion)। यह प्लाज्मा (plasma) के समान है, लेकिन इसमें बड़े अणु (large molecules – प्रोटीन) नहीं होते हैं और इसमें यूरिया (urea) और अन्य अपशिष्ट उत्पादों (waste products) का स्तर अधिक होता है।
- गुर्दे (Kidneys) में रक्त (blood) का निस्पंदन (filtration) चयनात्मक (selective) होता है। ग्लोमेरुलर निस्पंदन (glomerular filtration) आकार के आधार पर चयनात्मक (size-selective) होता है। छोटे अणु (small molecules – < 70,000 Daltons) और सकारात्मक रूप से चार्ज किए गए (positively charged) अणु अधिक आसानी से फिल्टर होते हैं। बड़े अणु (large molecules – प्रोटीन – proteins, 70,000 Daltons से अधिक) और नकारात्मक रूप से चार्ज किए गए (negatively charged) अणु कम आसानी से फिल्टर होते हैं।
- गुर्दे (Kidneys) में रक्त (blood) का 20% हर मिनट (every minute) छनता है। गुर्दे (kidneys) को रक्त की आपूर्ति (blood supply) बहुत अधिक होती है (कार्डियक आउटपुट – cardiac output का लगभग 20-25%)। यह उच्च रक्त प्रवाह (high blood flow) उच्च GFR (लगभग 125 mL/min) बनाए रखने और अपशिष्ट उत्पादों (waste products) को कुशलतापूर्वक (efficiently) हटाने की अनुमति देता है।