अनुवांशिकी इंजीनियरिंग तथा बायोटेक्नोलॉजी
- अनुवांशिकी इंजीनियरिंग (Genetic Engineering) डीएनए (DNA) में परिवर्तन (modification) करती है। यह जीन (genes) में सीधे हेरफेर (direct manipulation) करने की तकनीक है। इसके द्वारा किसी जीव के जीनोम (genome) में विदेशी डीएनए (foreign DNA) डाला जा सकता है या मौजूदा जीन को हटाया/बदला जा सकता है।
- बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) जीवों (organisms) का औद्योगिक उपयोग (industrial use) है। यह जीवित प्रणालियों (living systems), जीवों या उनके भागों का उपयोग करके उत्पाद (products) बनाने या प्रक्रियाएँ (processes) विकसित करने का विज्ञान (science) है। इसके अंतर्गत अनुवांशिकी इंजीनियरिंग (genetic engineering), ऊतक संवर्धन (tissue culture), किण्वन (fermentation) आदि आते हैं।
- जीएमओ (Genetically Modified Organism – GMO) में विदेशी जीन (foreign genes) डाले जाते हैं। इन जीनों को एक जीव से दूसरे जीव में स्थानांतरित (transfer) किया जाता है। उद्देश्य वांछित गुण (desired traits) – जैसे कीट प्रतिरोध (pest resistance), सूखा सहनशीलता (drought tolerance) – प्रदान करना होता है।
- ट्रांसजेनिक जीव (Transgenic organisms) विदेशी डीएनए (foreign DNA) युक्त होते हैं। इनमें एक या अधिक जीन किसी अन्य प्रजाति (species) से डाले गए होते हैं। ट्रांसजेनिक पौधे (transgenic plants) और ट्रांसजेनिक पशु (transgenic animals) दोनों बनाए गए हैं। ये दवा उत्पादन, अनुसंधान और कृषि में उपयोगी हैं।
- प्लाज्मिड (Plasmid) डीएनए (DNA) स्थानांतरण (transfer) में उपयोग होता है। यह बैक्टीरिया (bacteria) में पाया जाने वाला एक छोटा, गोलाकार (circular), अतिरिक्त-गुणसूत्रीय (extrachromosomal) डीएनए अणु (DNA molecule) है। इसे अनुवांशिकी इंजीनियरिंग में एक वाहक (vector) के रूप में प्रयोग किया जाता है। विदेशी जीन (foreign gene) को प्लाज्मिड (plasmid) में डालकर बैक्टीरिया में प्रवेश कराया जाता है।
- प्लाज्मिड (Plasmid) बैक्टीरिया (bacteria) में डीएनए का हिस्सा है। यह जीवाणु गुणसूत्र (bacterial chromosome) से अलग (separate) रहता है और स्वतंत्र रूप से प्रतिकृति (replicate) बना सकता है। प्लाज्मिड (plasmids) अक्सर एंटीबायोटिक प्रतिरोध (antibiotic resistance) जीन जैसे अतिरिक्त लाभ (additional benefits) प्रदान करते हैं।
- रेस्ट्रिक्शन एंजाइम (Restriction enzymes) डीएनए (DNA) को काटते (cut) हैं। ये आणविक कैंची (molecular scissors) की तरह काम करते हैं। प्रत्येक रेस्ट्रिक्शन एंजाइम डीएनए में एक विशिष्ट अनुक्रम (specific recognition sequence) को पहचानकर (recognize) उस स्थान पर डीएनए को काटता है। ये पुनर्योजी डीएनए (recombinant DNA) तकनीक के लिए आवश्यक हैं।
- डीएनए पुनर्संयोजन (DNA recombination) अनुवांशिकी इंजीनियरिंग (genetic engineering) का आधार (basis) है। इसमें दो अलग-अलग स्रोतों से डीएनए के टुकड़ों (DNA fragments) को जोड़कर (join) एक नया डीएनए अणु (recombinant DNA) बनाया जाता है। पुनर्योजी डीएनए (Recombinant DNA) में जीन को पुनर्संयोजित (recombine) किया जाता है और डीएनए रिकॉम्बिनेशन (DNA recombination) में जीन स्थानांतरित (transferred) होते हैं।
- पॉलिमरेज चेन रिएक्शन (Polymerase Chain Reaction – PCR) डीएनए (DNA) की प्रतिलिपि (copy) बनाता है। यह एक प्रयोगशाला तकनीक (laboratory technique) है। इसके द्वारा डीएनए के एक छोटे टुकड़े (small fragment) की अरबों प्रतियाँ (billions of copies) कुछ ही घंटों में बनाई जा सकती हैं। PCR का उपयोग डीएनए विश्लेषण (DNA analysis), रोग निदान (disease diagnosis) और वायरस का पता लगाने (virus detection) में होता है।
- क्रिस्पर-कैस9 (CRISPR-Cas9) जीन संपादन (gene editing) तकनीक है। यह बैक्टीरिया (bacteria) के प्राकृतिक रक्षा तंत्र (natural defense mechanism) पर आधारित है। यह तकनीक सटीक जीन संपादन (precise gene editing) की अनुमति देती है। इससे जीन निष्क्रिय (knockout) या सक्रिय (activate) किए जा सकते हैं और जीन म्यूटेशन (gene mutations) को ठीक किया जा सकता है।
- पुनर्योजी डीएनए (Recombinant DNA) में जीन को पुनर्संयोजित किया जाता है। यह दो अलग-अलग स्रोतों से डीएनए (DNA) के टुकड़ों को जोड़कर बनाया जाता है। इस तकनीक का उपयोग करके इंसुलिन (insulin), वृद्धि हार्मोन (growth hormone) और टीके (vaccines) जैसे महत्वपूर्ण उत्पाद बनाए गए हैं।
- डीएनए अनुक्रमण (DNA sequencing) जीन की संरचना (gene structure) बताता है। यह एक प्रक्रिया (process) है जिसके द्वारा डीएनए अणु (DNA molecule) में न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides – A, T, G, C) के सटीक क्रम (exact order) का निर्धारण (determination) किया जाता है। इससे रोगों का निदान (disease diagnosis), प्रजाति पहचान (species identification) और आनुवंशिक रोगों का पता लगाना (genetic disease detection) संभव है।
- रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज (Reverse transcriptase) RNA से DNA बनाता है (RNA → DNA)। यह एक एंजाइम (enzyme) है जो रेट्रोवायरस (retroviruses – जैसे HIV) में पाया जाता है। इसका उपयोग आणविक जीव विज्ञान (molecular biology) में mRNA से cDNA (complementary DNA) बनाने के लिए किया जाता है। यह तकनीक जीन क्लोनिंग (gene cloning) और आनुवंशिक अध्ययनों (genetic studies) में महत्वपूर्ण है।
- इंसुलिन (Insulin) बायोटेक्नोलॉजी (biotechnology) से निर्मित पहली दवा (first drug) है। इससे पहले इंसुलिन जानवरों के अग्न्याशय (animal pancreas) से प्राप्त किया जाता था। जेनेटिक इंजीनियरिंग (genetic engineering) से इंसुलिन उत्पादन (insulin production) किया जाता है। मानव इंसुलिन जीन (human insulin gene) को बैक्टीरिया (E. coli) में डालकर बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है।
- बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) का उपयोग टीका निर्माण (vaccine production) में होता है। पुनर्योजी डीएनए (recombinant DNA) तकनीक का उपयोग करके शुद्ध एंटीजन (pure antigens) का उत्पादन किया जाता है (जैसे हेपेटाइटिस B वैक्सीन – Hepatitis B vaccine)। mRNA वैक्सीन (mRNA vaccines – COVID-19 के लिए) भी बायोटेक्नोलॉजी की एक उन्नत तकनीक है। जेनेटिक इंजीनियरिंग से वैक्सीन (vaccine) बनाई जाती है।
- जीन थैरेपी (Gene therapy) आनुवंशिक रोगों (genetic diseases) का उपचार (treatment) करती है। इसमें रोग पैदा करने वाले जीन (defective gene) को ठीक करने या उसकी जगह एक स्वस्थ जीन (healthy gene) डाला जाता है। जीन थैरेपी से सिस्टिक फाइब्रोसिस (cystic fibrosis), हीमोफीलिया (hemophilia), मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (muscular dystrophy), सिकल सेल एनीमिया (sickle cell anemia), थैलेसीमिया (thalassemia) और कैंसर (cancer) का उपचार संभव है।
- बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) का उपयोग दवा उत्पादन (drug production), एंजाइम उत्पादन (enzyme production), एंटीबायोटिक उत्पादन (antibiotic production), हार्मोन उत्पादन (hormone production) और बायोफार्मास्यूटिकल्स (biopharmaceuticals) में होता है। जेनेटिक इंजीनियरिंग से हार्मोनल दवाएँ (hormonal drugs) और औषधीय प्रोटीन (therapeutic proteins) बनती हैं।
- बीटी (Bt – Bacillus thuringiensis) से जीन (gene) लिया जाता है। यह एक मृदा जीवाणु (soil bacterium) है। इस बैक्टीरियम में एक प्रोटीन (protein) बनाने वाला जीन होता है जो कुछ कीटों (insects) के लिए विषैला (toxic) होता है। बीटी कपास (Bt cotton) और बीटी मक्का (Bt maize) कीट प्रतिरोधी (insect-resistant) फसलें (crops) हैं। जेनेटिक इंजीनियरिंग से बीटी मक्का (Bt corn) बनाया गया।
- जेनेटिकली मोडिफाइड फसलें (Genetically Modified crops – GM crops) में उपज (yield) बढ़ती है। इनमें कीट प्रतिरोध (pest resistance), खरपतवारनाशी सहनशीलता (herbicide tolerance), सूखा सहनशीलता (drought tolerance), और अधिक पोषण मूल्य (enhanced nutritional value) जैसे गुण होते हैं। जेनेटिक इंजीनियरिंग से उच्च उपज वाली फसलें (high-yielding crops), रोग प्रतिरोधी फसलें (disease-resistant crops) और पोषक फसलें (nutrient-rich crops) बनाई जाती हैं।
- जेनेटिक इंजीनियरिंग से बायोफोर्टिफाइड फसलें (biofortified crops) बनाई जाती हैं। इन फसलों में आवश्यक विटामिन (vitamins) और खनिज (minerals) की मात्रा बढ़ाई जाती है। उदाहरण – गोल्डन राइस (Golden Rice) जिसमें विटामिन A (beta-carotene) की मात्रा बढ़ाई गई है। यह कुपोषण (malnutrition) से निपटने में सहायक है। ट्रांसजेनिक फसलों (transgenic crops) में कीटनाशक (pesticides) कम लगते हैं।
- क्लोनिंग (Cloning) जीव (organism) की समान प्रतिलिपि (identical copy) बनाना है। यह एक अलैंगिक प्रजनन (asexual reproduction) विधि है। पहली क्लोन भेड़ (first cloned sheep) का नाम डॉली (Dolly) था। उसे 1996 में सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (Somatic Cell Nuclear Transfer – SCNT) तकनीक से बनाया गया था। जीन क्लोनिंग (gene cloning) में डीएनए की प्रतियां (DNA copies) बनती हैं – इसे डीएनए प्रवर्धन (DNA amplification) भी कहते हैं।
- बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) का उपयोग बायोफ्यूल (biofuel – बायोएथेनॉल – bioethanol, बायोडीजल – biodiesel), बायोगैस (biogas), बायोप्लास्टिक (bioplastic), जैव उर्वरक (biofertilizer) और बायोपेस्टिसाइड (biopesticide – बायोइंसेक्टिसाइड – bioinsecticide) के उत्पादन में होता है। ये नवीकरणीय (renewable) और पर्यावरण-अनुकूल (eco-friendly) ऊर्जा स्रोत हैं।
- बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) का उपयोग बायोरिमेडिएशन (bioremediation) यानी पर्यावरण संरक्षण (environmental protection) में होता है। इसमें सूक्ष्मजीवों (microorganisms) का उपयोग करके प्रदूषकों (pollutants) को हानिरहित पदार्थों (harmless substances) में बदला जाता है। जेनेटिक इंजीनियरिंग से बायोरेमेडिएशन (bioremediation) किया जाता है और बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग अपशिष्ट प्रबंधन (waste management), जल शुद्धिकरण (water purification) और जैव अपशिष्ट प्रबंधन (biowaste management) में होता है।
- डीएनए फिंगरप्रिंटिंग (DNA fingerprinting) व्यक्ति की पहचान (identification) करती है। यह तकनीक इस तथ्य पर आधारित है कि प्रत्येक व्यक्ति का डीएनए (DNA) अद्वितीय (unique) होता है (समान जुड़वाँ – identical twins को छोड़कर)। इसका उपयोग अपराध जांच (crime investigation), पितृत्व जांच (paternity testing), जैव विविधता अध्ययन (biodiversity study) और वन्यजीव संरक्षण (wildlife conservation) में होता है।
- ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट (Human Genome Project – HGP) ने मानव डीएनए (human DNA) का मानचित्र (map) बनाया। यह एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजना (international scientific project) थी। इसने संपूर्ण मानव जीनोम (complete human genome) के सभी जीनों (genes) का अनुक्रमण (sequencing) किया। यह परियोजना 2003 में पूरी हुई थी।
- जीनोमिक्स (Genomics) जीनों (genes) का अध्ययन (study) है। यह किसी जीव (organism) के संपूर्ण जीनोम (entire genome) की संरचना, कार्य, विकास और मानचित्रण (mapping) का अध्ययन करता है। यह आणविक जीव विज्ञान (molecular biology) और आनुवंशिकी (genetics) की एक शाखा (branch) है। यह दवा (medicine), कृषि (agriculture) और विकासवादी जीव विज्ञान (evolutionary biology) में महत्वपूर्ण है।