ऊष्मा एवं ऊष्मा गतिकी (Heat & Thermodynamics)
- ऊष्मा ऊर्जा का वह रूप है जो तापांतर के कारण उच्च तापमान वाली वस्तु से निम्न तापमान वाली वस्तु की ओर प्रवाहित होती है। ऊष्मा का SI मात्रक जूल (J) तथा पारंपरिक मात्रक कैलोरी है।
- तापमान किसी वस्तु की उष्णता या शीतलता की माप है, जबकि ऊष्मा ऊर्जा का स्थानांतरण है। तापमान का SI मात्रक केल्विन (K) है।
- 1 कैलोरी ऊष्मा वह ऊष्मा है जो 1 ग्राम जल का तापमान 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक होती है। 1 कैलोरी = 4.186 जूल।
- ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) भौतिकी की वह शाखा है जो ऊष्मा, कार्य, तापमान तथा ऊर्जा के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन करती है।
- ऊष्मागतिकी का शून्य नियम बताता है कि यदि दो वस्तुएँ किसी तीसरी वस्तु के साथ तापीय साम्य में हों, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगी। इसी सिद्धांत पर थर्मामीटर कार्य करता है।
- ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण का नियम है, जिसके अनुसार ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न नष्ट; यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है।
- ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम का गणितीय रूप ΔU = Q − W है, जहाँ ΔU आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन, Q दी गई ऊष्मा तथा W किया गया कार्य है।
- ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम बताता है कि ऊष्मा स्वतः केवल गर्म वस्तु से ठंडी वस्तु की ओर प्रवाहित होती है। यह एन्ट्रॉपी की अवधारणा को स्पष्ट करता है।
- एन्ट्रॉपी (Entropy) किसी प्रणाली की अव्यवस्था का माप है तथा पृथक प्रणाली में इसका मान सदैव बढ़ता है।
- ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम कहता है कि पूर्ण शून्य तापमान (0 K) पर किसी आदर्श क्रिस्टल की एन्ट्रॉपी शून्य हो जाती है।
- ऊष्मा का स्थानांतरण मुख्यतः तीन विधियों—संचालन, संवहन और विकिरण—द्वारा होता है।
- संचालन (Conduction) में ऊष्मा का स्थानांतरण बिना माध्यम के कणों के वास्तविक विस्थापन के होता है। यह मुख्यतः ठोस पदार्थों में पाया जाता है।
- धातुएँ ऊष्मा की अच्छी चालक होती हैं क्योंकि उनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। चाँदी सर्वोत्तम चालक तथा ताँबा व्यावहारिक रूप से सबसे उपयोगी चालक है।
- लकड़ी, प्लास्टिक, रबर, काँच तथा ऊन ऊष्मा के कुचालक पदार्थ हैं, इसलिए इनका उपयोग ऊष्मा रोधन में किया जाता है।
- फूरियर का ऊष्मा संचालन नियम Q = kAΔT/L है, जहाँ k चालकता, A क्षेत्रफल, ΔT तापांतर तथा L मोटाई को दर्शाता है।
- संवहन (Convection) में ऊष्मा का स्थानांतरण द्रव या गैस के वास्तविक प्रवाह द्वारा होता है। समुद्री एवं स्थलीय हवाएँ संवहन के कारण उत्पन्न होती हैं।
- गर्म द्रव का घनत्व कम होने के कारण वह ऊपर उठता है तथा ठंडा द्रव नीचे आता है, जिससे संवहन धाराएँ बनती हैं।
- विकिरण (Radiation) ऊष्मा स्थानांतरण की वह विधि है जिसमें माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक विकिरण द्वारा पहुँचती है।
- काले रंग की वस्तुएँ ऊष्मा की सर्वश्रेष्ठ अवशोषक एवं उत्सर्जक होती हैं, जबकि चमकीली एवं सफेद सतहें ऊष्मा का अच्छा परावर्तन करती हैं।
- स्टेफन-बोल्ट्जमैन नियम के अनुसार किसी वस्तु द्वारा उत्सर्जित ऊष्मा विकिरण उसकी निरपेक्ष ताप के चौथे घात (T⁴) के समानुपाती होती है।
- विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat Capacity) वह ऊष्मा है जो किसी पदार्थ के 1 किलोग्राम द्रव्यमान का तापमान 1 K बढ़ाने हेतु आवश्यक होती है। इसका SI मात्रक J/kg·K है।
- जल की विशिष्ट ऊष्मा 4200 J/kg·K के लगभग होती है, इसलिए जल ताप को लंबे समय तक बनाए रखता है।
- विशिष्ट ऊष्मा का सूत्र Q = mcΔT है, जहाँ m द्रव्यमान, c विशिष्ट ऊष्मा तथा ΔT तापमान परिवर्तन है।
- गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) वह ऊष्मा है जो किसी पदार्थ की अवस्था बदलने में प्रयुक्त होती है, जबकि तापमान स्थिर रहता है।
- बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा लगभग 3.34 × 10⁵ J/kg तथा जल के वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा लगभग 2.26 × 10⁶ J/kg होती है।
- गुप्त ऊष्मा का सूत्र Q = mL है, जहाँ L गुप्त ऊष्मा तथा m पदार्थ का द्रव्यमान है।
- ताप बढ़ने पर अधिकांश पदार्थों का आयतन बढ़ता है, जिसे ऊष्मीय प्रसार कहते हैं। यह ठोस, द्रव और गैस तीनों में होता है।
- रेल की पटरियों तथा पुलों में प्रसार के लिए खाली स्थान छोड़ा जाता है ताकि गर्मी में वे मुड़ें नहीं।
- द्विधात्विक पट्टी (Bimetallic Strip) दो भिन्न धातुओं से बनी होती है और ताप बढ़ने पर अलग-अलग प्रसार के कारण मुड़ जाती है। इसका उपयोग थर्मोस्टेट में होता है।
- ऊष्मा इंजन ऊष्मीय ऊर्जा को यांत्रिक कार्य में परिवर्तित करता है। भाप इंजन एवं आंतरिक दहन इंजन इसके उदाहरण हैं।
- किसी ऊष्मा इंजन की दक्षता η = W/Q₁ होती है, जहाँ W किया गया कार्य तथा Q₁ प्राप्त ऊष्मा है।
- कार्नोट इंजन एक आदर्श ऊष्मा इंजन है जिसकी दक्षता सभी इंजनों में अधिकतम मानी जाती है।
- कार्नोट चक्र में दो समतापी तथा दो रुद्धोष्म प्रक्रियाएँ होती हैं। इसकी दक्षता η = 1 − T₂/T₁ से व्यक्त की जाती है।
- कोई भी ऊष्मा इंजन 100% दक्ष नहीं हो सकता क्योंकि कुछ ऊष्मा सदैव वातावरण में नष्ट होती है।
- रेफ्रिजरेटर ऊष्मा को निम्न ताप वाले स्थान से उच्च ताप वाले स्थान की ओर स्थानांतरित करता है। यह ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम पर आधारित है।
- मिट्टी के घड़े का पानी वाष्पीकरण के कारण ठंडा रहता है, क्योंकि वाष्पीकरण में गुप्त ऊष्मा अवशोषित होती है।
- ऊन के कपड़े शरीर की ऊष्मा को बाहर जाने से रोकते हैं क्योंकि उनमें वायु फँसी रहती है, जो ऊष्मा की कुचालक होती है।
- थर्मस फ्लास्क में ऊष्मा हानि को संचालन, संवहन और विकिरण तीनों से कम किया जाता है।
- प्रेशर कुकर में दाब बढ़ने से जल का क्वथनांक बढ़ जाता है, जिससे भोजन जल्दी पकता है।
- ऊँचाई वाले क्षेत्रों में वायुदाब कम होने से जल का क्वथनांक घट जाता है, इसलिए भोजन पकने में अधिक समय लगता है।
- मानव शरीर का सामान्य तापमान 37°C या 98.6°F होता है।
- फारेनहाइट और सेल्सियस तापमान पैमानों के बीच संबंध °F = (9/5 × °C) + 32 होता है।
- केल्विन तापमान पैमाना वैज्ञानिक गणनाओं में प्रयुक्त होता है तथा 0 K को पूर्ण शून्य तापमान कहा जाता है।