प्रकाश (Optics)
- प्रकाश एक विद्युत चुम्बकीय तरंग है जिसे संचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। यह अनुप्रस्थ तरंग (transverse wave) है, जिसमें विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे के लंबवत दोलन करते हैं।
- निर्वात में प्रकाश की गति 3 × 10⁸ m/s (लगभग 3,00,000 km/s) होती है, जो ब्रह्मांड की सबसे तीव्र गति है। आइंस्टीन के विशेष आपेक्षिकता सिद्धांत के अनुसार, कोई भी भौतिक वस्तु इस गति को पार नहीं कर सकती।
- प्रकाश की गति माध्यम के घनत्व के व्युत्क्रमानुपाती होती है – सघन माध्यम में गति कम एवं विरल माध्यम में गति अधिक। जल में प्रकाश की गति 2.25 × 10⁸ m/s तथा काँच में लगभग 2 × 10⁸ m/s होती है।
- प्रकाश की द्वैत प्रकृति (dual nature) होती है – यह कभी तरंग (व्यतिकरण, विवर्तन) एवं कभी कण (प्रकाश विद्युत प्रभाव) की भाँति व्यवहार करता है। डी-ब्रोग्ली ने सभी कणों की तरंग प्रकृति प्रतिपादित की।
- परावर्तन के नियम – आपतन कोण (i) = परावर्तन कोण (r) तथा आपतित किरण, परावर्तित किरण एवं अभिलंब एक ही तल में होते हैं। समतल दर्पण में प्रतिबिंब आभासी, सीधा एवं वस्तु के समान आकार का बनता है।
- उत्तल दर्पण (convex mirror) सदैव आभासी, सीधा एवं छोटा प्रतिबिंब बनाता है। इसका उपयोग वाहनों में साइड मिरर तथा सुरक्षा दर्पण के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह दृष्टि क्षेत्र (field of view) अधिक देता है।
- अवतल दर्पण (concave mirror) वास्तविक एवं आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है। वस्तु को फोकस व ध्रुव के मध्य रखने पर आभासी, अन्य स्थितियों पर वास्तविक प्रतिबिंब बनता है। इसका उपयोग टॉर्च, हेडलाइट, दंत दर्पण में होता है।
- अपवर्तन (refraction) – माध्यम बदलने पर प्रकाश की दिशा में झुकाव होता है। प्रकाश सघन से विरल माध्यम में अभिलंब से दूर हटता है एवं विरल से सघन में अभिलंब की ओर झुकता है।
- अपवर्तनांक (refractive index) n = c/v होता है, जहाँ c निर्वात में प्रकाश गति एवं v माध्यम में प्रकाश गति है। सघन माध्यम का अपवर्तनांक सदैव 1 से अधिक होता है, उदाहरण – जल (1.33), काँच (1.5), हीरा (2.42)।
- स्नेल का नियम (Snell's Law): n₁ sin i = n₂ sin r – यह अपवर्तन कोण एवं आपतन कोण के मध्य सम्बन्ध स्थापित करता है। इस नियम का उपयोग प्रिज्म, लेंस एवं ऑप्टिकल फाइबर में किया जाता है।
- प्रकाश की आवृत्ति (frequency) माध्यम बदलने पर स्थिर रहती है, जबकि तरंगदैर्घ्य (wavelength) एवं वेग परिवर्तित हो जाते हैं। आवृत्ति ही प्रकाश का रंग निर्धारित करती है।
- पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR) – सघन से विरल माध्यम में क्रांतिक कोण (critical angle) से अधिक कोण पर आपतित प्रकाश का पूर्ण परावर्तन होता है। इसके लिए आवश्यक है – प्रकाश सघन से विरल में जाए तथा आपतन कोण > क्रांतिक कोण।
- TIR का प्रमुख उदाहरण हीरे की चमक है – हीरे का अपवर्तनांक (2.42) अत्यधिक होता है, जिससे क्रांतिक कोण (लगभग 24°) बहुत छोटा हो जाता है। अधिकांश प्रकाश TIR के कारण हीरे के भीतर परावर्तित होता रहता है, जिससे यह चमकता है।
- ऑप्टिकल फाइबर (optical fiber) TIR के सिद्धांत पर कार्य करता है – प्रकाश की संकेतों को बिना क्षय के लंबी दूरी तक भेजा जा सकता है। इसका उपयोग अंतर्राष्ट्रीय संचार, एंडोस्कोपी एवं ब्रॉडबैंड इंटरनेट में होता है।
- लेंस सूत्र (lens formula) – 1/f = 1/v – 1/u होता है, जहाँ f = फोकस दूरी, v = प्रतिबिंब दूरी, u = वस्तु दूरी। चिन्ह परिपाटी (sign convention) के अनुसार उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक (+) एवं अवतल लेंस की ऋणात्मक (-) होती है।
- लेंस की शक्ति (power of lens) P = 1/f (मीटर में) तथा इसका मात्रक डायोप्टर (D) है। उत्तल लेंस की शक्ति धनात्मक (संसारी) एवं अवतल लेंस की शक्ति ऋणात्मक (अपसारी) होती है। 1 डायोप्टर = 1 मीटर की फोकस दूरी।
- उत्तल लेंस (convex lens) अभिसारी (converging) होता है – समानांतर किरणों को फोकस पर एकत्रित करता है। इसका उपयोग माइक्रोस्कोप, दूरबीन, कैमरा एवं निकट दृष्टि दोष में होता है।
- अवतल लेंस (concave lens) अपसारी (diverging) होता है – यह सदैव आभासी, सीधा एवं छोटा प्रतिबिंब बनाता है। इसका उपयोग दूर-दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) एवं चश्मों में किया जाता है।
- प्रकाश का व्यतिकरण (interference) – दो तरंगों के अध्यारोपण से प्रकाश की तीव्रता में वृद्धि या कमी होती है। यह यंग के डबल स्लिट प्रयोग द्वारा सिद्ध हुआ। रचनात्मक व्यतिकरण से दीप्त फ्रिंज (bright fringe) एवं विनाशकारी से अदीप्त फ्रिंज (dark fringe) बनती है।
- साबुन के बुलबुले एवं तेल पर तैरती फिल्म में रंगीन पट्टियाँ व्यतिकरण के कारण बनती हैं – प्रकाश की किरणें फिल्म की ऊपरी एवं निचली सतहों से परावर्तित होकर व्यतिकरण करती हैं। यह प्रकाश के तरंग सिद्धांत का प्रबल प्रमाण है।
- प्रकाश का विवर्तन (diffraction) – किसी बाधा या संकीर्ण झिरी के किनारों से प्रकाश का झुकना है। फ्रेस्नेल एवं फ्राउनहोफर विवर्तन इसके प्रकार हैं। विवर्तन प्रकाश की तरंग प्रकृति को सिद्ध करता है एवं संकीर्ण छिद्रों पर अधिक स्पष्ट होता है।
- प्रकाश का ध्रुवण (polarization) – अनुप्रस्थ तरंगों के दोलन को एक निश्चित दिशा में सीमित करना है। यह केवल अनुप्रस्थ तरंगों में ही संभव है, अतः यह प्रकाश की अनुप्रस्थ प्रकृति का प्रमाण है। ध्रुवण निकोल प्रिज्म एवं पोलरॉइड शीट द्वारा किया जाता है।
- न्यूटन के छल्ले (Newton's rings) प्रकाश के व्यतिकरण का ही उदाहरण हैं – ये समान मोटाई की वायु फिल्म के कारण बनते हैं। इस प्रयोग से लेंस की फोकस दूरी एवं प्रकाश की तरंगदैर्घ्य ज्ञात की जाती है।
- प्रकाश का प्रकीर्णन (scattering) – माध्यम के कणों द्वारा प्रकाश का चारों ओर फैल जाना है। रैले का प्रकीर्णन नियम – प्रकीर्णन की तीव्रता ∝ 1/λ⁴ (तरंगदैर्घ्य की चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती) होती है।
- आकाश का नीला रंग प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण होता है – नीले प्रकाश की तरंगदैर्घ्य (लगभग 470 nm) सबसे कम होती है, अतः यह वायुमंडलीय कणों द्वारा सबसे अधिक प्रकीर्णित होता है। सूर्यास्त के समय लाल रंग दिखता है क्योंकि अधिक दूरी तय करने पर नीला प्रकाश पूर्णतः प्रकीर्णित हो जाता है।
- प्रिज्म (prism) प्रकाश को उसके घटक वर्णों में विभाजित करता है – यह प्रकीर्णन (dispersion) कहलाता है – सफेद प्रकाश सात रंगों (VIBGYOR) में बँट जाता है। यह इसलिए होता है क्योंकि प्रिज्म में विभिन्न तरंगदैर्घ्य के प्रकाश का अपवर्तनांक भिन्न-भिन्न होता है (बैंगनी के लिए अधिकतम, लाल के लिए न्यूनतम)।
- इंद्रधनुष (rainbow) प्रकाश के प्रकीर्णन, अपवर्तन एवं पूर्ण आंतरिक परावर्तन के संयोग से बनता है – वर्षा की बूँदें प्रिज्म का कार्य करती हैं। प्राथमिक इंद्रधनुष में लाल रंग बाहर एवं बैंगनी अंदर, जबकि द्वितीयक इंद्रधनुष में रंग क्रम उल्टा होता है।
- प्रकाश का रंग (colour) तरंगदैर्घ्य पर निर्भर करता है – दृश्य स्पेक्ट्रम (visible spectrum) 400 nm से 700 nm के मध्य होता है। लाल प्रकाश की तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक (लगभग 700 nm) एवं बैंगनी प्रकाश की सबसे कम (लगभग 400 nm) होती है।
- प्रकाश का प्रकीर्णन छोटी तरंगदैर्घ्य (बैंगनी, नीला) पर अधिक होता है जबकि लाल पर न्यूनतम। इसी कारण कोहरे एवं धुंध में लाल रंग की किरणें सबसे अधिक दूरी तक दिखती हैं, इसलिए खतरे के सिग्नल में लाल रंग का प्रयोग किया जाता है।
- प्रकाश का कण सिद्धांत (corpuscular theory) न्यूटन द्वारा प्रस्तावित किया गया था – इसमें प्रकाश अति सूक्ष्म कणों (कॉर्पसल्स) से बना माना गया था। बाद में हाइगेंस ने तरंग सिद्धांत एवं प्लांक/आइंस्टीन ने फोटॉन सिद्धांत दिया।
- फोटॉन (photon) प्रकाश का ऊर्जा पैकेट है, जिसका कोई द्रव्यमान नहीं होता परंतु संवेग (momentum) होता है। फोटॉन की ऊर्जा E = hν (जहाँ h प्लांक नियतांक = 6.63 × 10⁻³⁴ Js) होती है। प्रकाश विद्युत प्रभाव (photoelectric effect) प्रकाश की कण प्रकृति का प्रमाण है।
- समतल दर्पण में प्रतिबिंब पार्श्व परिवर्तित (laterally inverted) होता है – अर्थात् बायाँ हाथ दायाँ दिखता है। समतल दर्पण में वस्तु एवं प्रतिबिंब के मध्य दूरी 2 × (दर्पण से वस्तु की दूरी) होती है।
- प्रकाश का परावर्तन समतल सतहों पर नियमित (regular) एवं खुरदरी सतहों पर विसरित (diffused) होता है – विसरित परावर्तन के कारण ही हम किसी वस्तु को सभी दिशाओं से देख सकते हैं। कागज, दीवार आदि पर विसरित परावर्तन होता है।
- प्रकाश की चाल अधिकतम निर्वात में होती है – यह कभी भी निर्वात में प्रकाश की गति से अधिक नहीं हो सकती। चिरेन्कोव विकिरण (Cherenkov radiation) तब उत्पन्न होता है जब कोई कण किसी पारदर्शी माध्यम में प्रकाश की गति से अधिक गति से गुजरता है।
- लेजर (Laser – Light Amplification by Stimulated Emission of Radiation) एक अत्यधिक एकवर्णी (monochromatic), संसक्त (coherent) एवं समांतर प्रकाश स्रोत है – इसका उपयोग चिकित्सा, संचार, मेजरमेंट एवं होलोग्राफी में किया जाता है।