संवैधानिक, वैधानिक एवं अर्ध-न्यायिक संस्थाएँ
- निर्वाचन आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत किया गया है, जो एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय है जो देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करता है। (UPSC Pre 1996)
- निर्वाचन आयोग संवैधानिक प्रावधानों के तहत लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं और राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के चुनावों का संचालन कर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करता है। (SSC CGL 2017)
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और उन्हें संसद के महाभियोग प्रक्रिया द्वारा ही हटाया जा सकता है, जो आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है। (UPPCS Pre 2018)
- निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अधिकतम दो निर्वाचन आयुक्त हो सकते हैं, जिससे कुल तीन आयुक्त होते हैं। (BPSC Pre 2019)
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है, और उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद नहीं दिया जा सकता। (SSC CHSL 2018)
- निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत संसद, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव कराने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। (MPPCS Pre 2016)
- निर्वाचन आयोग मतदाता सूची का निर्माण, अद्यतन और संशोधन करता है, जिसमें निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन और फोटो युक्त मतदाता पहचान पत्र जारी करना शामिल है। (SSC CPO 2019)
- निर्वाचन आयोग को आदर्श आचार संहिता लागू करने का अधिकार है, जो चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के आचरण को नियंत्रित करती है। (UPPCS Pre 2017)
- निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी, और इसके पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुकुमार सेन थे। (BPSC Pre 2018)
- निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 से संवैधानिक दर्जा प्राप्त है, जो इसे देश में चुनावों के संचालन हेतु व्यापक शक्तियाँ प्रदान करता है। (SSC CGL 2019)
- निर्वाचन आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है, और इसके क्षेत्रीय कार्यालय देश भर में स्थित हैं। (MPPCS Pre 2015)
- निर्वाचन आयोग राज्य निर्वाचन आयोगों की निगरानी करता है, जो पंचायत और नगरपालिका चुनावों का संचालन करते हैं। (SSC CHSL 2017)
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त को संसद द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही महाभियोग प्रक्रिया द्वारा हटाया जा सकता है। (UPPCS Pre 2016)
- निर्वाचन आयोग पंचायत और नगरपालिका चुनावों की देखरेख नहीं करता, यह कार्य संविधान के अनुच्छेद 243K और 243ZA के तहत राज्य निर्वाचन आयोग करते हैं। (BPSC Pre 2016)
- निर्वाचन आयोग को मतदान केंद्र निर्धारित करने, मतदान अधिकारियों की नियुक्ति और चुनाव प्रक्रिया के संचालन का अधिकार है। (SSC CPO 2018)
- वित्त आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत होता है, जो केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों को विनियमित करने वाला संवैधानिक निकाय है। (UPSC Pre 1997)
- वित्त आयोग हर 5 वर्ष में या उससे पहले राष्ट्रपति द्वारा गठित किया जाता है, जो केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों की समीक्षा करता है। (SSC CGL 2016)
- वित्त आयोग का अध्यक्ष राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होता है, और इसके सदस्यों में अर्थशास्त्र, वित्त और प्रशासन के क्षेत्र के विशेषज्ञ होते हैं। (UPPCS Pre 2019)
- वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों के वितरण, राज्यों को अनुदान और वित्तीय सहायता के सिद्धांतों की सिफारिश करता है। (BPSC Pre 2015)
- वित्त आयोग में एक अध्यक्ष और चार सदस्य होते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है और उनकी योग्यताएं संसद द्वारा निर्धारित की जाती हैं। (SSC CHSL 2019)
- वित्त आयोग की सिफारिशें संसद और राज्य विधानमंडलों के लिए बाध्यकारी नहीं होतीं, लेकिन सरकार को इन्हें गंभीरता से विचार करना होता है। (MPPCS Pre 2017)
- 15वां वित्त आयोग नवंबर 2017 में एन. के. सिंह की अध्यक्षता में गठित हुआ, जिसने 2021-26 की अवधि के लिए सिफारिशें दीं। (SSC CPO 2017)
- वित्त आयोग करों, especially केंद्र द्वारा एकत्रित करों जैसे आयकर और सीमा शुल्क, के राज्यों के बीच वितरण की सिफारिश करता है। (UPPCS Pre 2015)
- वित्त आयोग राज्यों को अनुदान की सिफारिश करता है, विशेषकर those राज्यों को जिन्हें राजस्व घाटा अनुदान की आवश्यकता होती है। (BPSC Pre 2018)
- वित्त आयोग का कार्यकाल 5 वर्ष होता है, और यह अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जो इसे संसद में रखता है। (SSC CGL 2018)
- वित्त आयोग की स्थापना 1951 में पहले वित्त आयोग के गठन के साथ हुई, जिसके अध्यक्ष के. सी. नियोगी थे। (MPPCS Pre 2016)
- वित्त आयोग केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों की समीक्षा करता है और राजस्व साझाकरण के सिद्धांतों का सुझाव देता है। (SSC CHSL 2016)
- वित्त आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत अनिवार्य है, और यह भारत की संघीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है। (UPPCS Pre 2017)
- वित्त आयोग की सिफारिशें संसद में प्रस्तुत होती हैं, और सरकार आमतौर पर इन्हें स्वीकार करती है, हालांकि कुछ संशोधनों के साथ। (BPSC Pre 2019)
- वित्त आयोग राज्यों के वित्तीय संसाधनों, उनकी राजस्व क्षमता और व्यय आवश्यकताओं का मूल्यांकन करता है। (SSC CPO 2016)
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का गठन संविधान के अनुच्छेद 315-323 के तहत हुआ है, जो केंद्र सरकार के लिए सिविल सेवकों की भर्ती करने वाला संवैधानिक निकाय है। (UPSC Pre 1995)
- UPSC का अध्यक्ष राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होता है, और इसके सदस्यों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। (SSC CGL 2017)
- UPSC में अधिकतम 10 सदस्य और 1 अध्यक्ष हो सकते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। (UPPCS Pre 2018)
- UPSC सिविल सेवाओं की भर्ती करता है, जिसमें IAS, IPS, IFS जैसी अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवाओं की परीक्षाएँ शामिल हैं। (BPSC Pre 2016)
- UPSC के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है। (SSC CHSL 2018)
- UPSC की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को ब्रिटिश काल में 'लोक सेवा आयोग' के रूप में हुई थी, और संविधान लागू होने पर इसे संवैधानिक दर्जा मिला। (MPPCS Pre 2015)
- UPSC का मुख्यालय नई दिल्ली में धौलपुर हाउस में स्थित है, और इसके क्षेत्रीय कार्यालय देश भर में हैं। (SSC CPO 2019)
- UPSC एक संवैधानिक निकाय है जिसकी स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 315-323 द्वारा सुनिश्चित की गई है। (UPPCS Pre 2016)
- UPSC की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं हैं, लेकिन सरकार को इन्हें अस्वीकार करने के कारण दर्ज करने होते हैं। (BPSC Pre 2017)
- UPSC सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है, जो तीन चरणों - प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार में आयोजित की जाती है। (SSC CGL 2019)
- राज्य लोक सेवा आयोग का गठन भी संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत होता है, जो राज्य स्तर पर UPSC के समकक्ष संस्था है। (MPPCS Pre 2018)
- राज्य PSC का अध्यक्ष राज्यपाल द्वारा नियुक्त होता है, और इसके सदस्यों की नियुक्ति भी राज्यपाल द्वारा की जाती है। (SSC CHSL 2017)
- राज्य PSC राज्य सेवाओं की भर्ती करता है, जिसमें राज्य सिविल सेवाएँ, पुलिस सेवाएँ और अन्य राज्य स्तरीय सेवाएँ शामिल हैं। (UPPCS Pre 2015)
- राज्य PSC के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है। (BPSC Pre 2018)
- राज्य PSC की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं हैं, लेकिन सरकार को इन्हें अस्वीकार करने के कारण दर्ज करने होते हैं। (SSC CPO 2018)
- राज्य PSC का गठन संवैधानिक निकाय के रूप में होता है, और इसकी स्वतंत्रता संविधान द्वारा सुनिश्चित की गई है। (MPPCS Pre 2016)
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) का गठन संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत हुआ है, जो भारत सरकार के लेखाओं का लेखा-परीक्षण करने वाला संवैधानिक निकाय है। (UPSC Pre 1998)
- CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और उन्हें संसद के महाभियोग प्रक्रिया द्वारा ही हटाया जा सकता है। (SSC CGL 2016)
- CAG का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है, और उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद नहीं दिया जा सकता। (UPPCS Pre 2019)
- CAG केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के खातों का लेखा-परीक्षण करता है। (BPSC Pre 2015)
- CAG की रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत होती है, जहाँ लोक लेखा समिति इसकी जाँच करती है और सिफारिशें करती है। (SSC CHSL 2019)
- CAG एक संवैधानिक निकाय है जिसकी स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 148-151 द्वारा सुनिश्चित की गई है। (MPPCS Pre 2017)
- CAG को संसद द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही महाभियोग प्रक्रिया द्वारा हटाया जा सकता है। (SSC CPO 2017)
- CAG का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है, और इसके क्षेत्रीय कार्यालय देश भर में स्थित हैं। (UPPCS Pre 2016)
- CAG केंद्र और राज्यों के खातों की जाँच करता है और सार्वजनिक धन के उचित उपयोग को सुनिश्चित करता है। (BPSC Pre 2018)
- CAG की स्वतंत्रता संविधान द्वारा सुनिश्चित है, और यह सरकारी खर्चों पर संसद की 'वॉचडॉग' के रूप में कार्य करता है। (SSC CGL 2018)