8. शासन और लोक नीति
- लोक प्रशासन सरकारी नीतियों के कार्यान्वयन के साथ-साथ नीति निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। (UPSC Pre 1996)
- लोक प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और भागीदारी सुशासन के तीन मुख्य स्तंभ हैं। (SSC CGL 2017)
- लोक प्रशासन का प्राथमिक उद्देश्य जनकल्याण और सार्वजनिक सेवाओं का प्रभावी वितरण है। (UPPCS Pre 2018)
- लोक प्रशासन में नौकरशाही वेबर के सिद्धांत के अनुसार संगठनात्मक दक्षता सुनिश्चित करती है। (BPSC Pre 2019)
- लोक प्रशासन नीति निर्माण, कार्यान्वयन, मूल्यांकन और सुधार की निरंतर प्रक्रिया है। (SSC CHSL 2018)
- लोक प्रशासन में दक्षता (कम लागत में अधिक output) और प्रभावशीलता (लक्ष्य प्राप्ति) दोनों आवश्यक हैं। (MPPCS Pre 2016)
- भारत में प्रशासनिक सुधार आयोग (1966-1970) ने लोक प्रशासन में व्यापक सुधारों की सिफारिश की। (SSC CPO 2019)
- लोक प्रशासन में 73वें और 74वें संविधान संशोधन द्वारा शक्ति के विकेंद्रीकरण को संवैधानिक मान्यता मिली। (UPPCS Pre 2017)
- लोक प्रशासन में जनता की भागीदारी ग्राम सभा, सामाजिक अंकेक्षण और सार्वजनिक सुनवाई के माध्यम से बढ़ाई जाती है। (BPSC Pre 2018)
- सुशासन के सिद्धांत में पारदर्शिता, जवाबदेही, भागीदारी, समावेशिता और न्यायसंगतता शामिल हैं। (SSC CGL 2019)
- लोक प्रशासन में नियमों का पालन नौकरशाही के विवेक को सीमित कर भ्रष्टाचार रोकता है। (MPPCS Pre 2015)
- प्रशासकीय जवाबदेही संसदीय नियंत्रण, न्यायिक समीक्षा और लोकपाल जैसे संस्थानों द्वारा सुनिश्चित होती है। (SSC CHSL 2017)
- लोक प्रशासन में नैतिकता लोक सेवकों के आचरण संहिता और सार्वजनिक जीवन के मानकों द्वारा सुनिश्चित की जाती है। (UPPCS Pre 2016)
- लोक प्रशासन में तकनीकी नवाचार ई-गवर्नेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और AI के उपयोग से संभव हुए हैं। (BPSC Pre 2016)
- लोक प्रशासन में जनहित सर्वोपरि सिद्धांत राज्य नीति के निदेशक तत्वों (अनुच्छेद 38) में निहित है। (SSC CPO 2018)
- ई-गवर्नेंस सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया है जो G2C, G2B, G2G और G2E संबंधों को सुगम बनाती है। (UPSC Pre 2015)
- ई-गवर्नेंस में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से सेवा वितरण, पारदर्शिता और दक्षता में सुधार होता है। (SSC CGL 2016)
- डिजिटल इंडिया कार्यक्रम 1 जुलाई 2015 को शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज बनाना है। (UPPCS Pre 2019)
- डिजिटल इंडिया का उद्देश्य डिजिटल सशक्तिकरण, डिजिटल अवसंरचना और डिजिटल सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना है। (BPSC Pre 2017)
- ई-गवर्नेंस में ऑनलाइन सेवा वितरण के लिए UMANG, डिजिटल लॉकर और e-साइन जैसे प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। (SSC CHSL 2018)
- डिजिटल इंडिया के 9 प्रमुख स्तंभ हैं: ब्रॉडबैंड हाइवे, मोबाइल कनेक्टिविटी, पब्लिक इंटरनेट एक्सेस, ई-गवर्नेंस, ई-क्रांति, सूचना सभी के लिए, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, IT for Jobs और अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम। (MPPCS Pre 2016)
- ई-गवर्नेंस पारदर्शिता बढ़ाकर, प्रक्रियाओं को डिजिटल करके और मानवीय हस्तक्षेप कम करके भ्रष्टाचार को कम करता है। (SSC CPO 2019)
- डिजिटल इंडिया में डिजिटल लॉकर नागरिकों को दस्तावेजों के डिजिटल संस्करण सुरक्षित रखने की सुविधा प्रदान करता है। (UPPCS Pre 2017)
- ई-गवर्नेंस में आधार कार्ड का उपयोग बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए होता है, जिससे सेवा वितरण में दक्षता आती है। (BPSC Pre 2018)
- डिजिटल इंडिया में राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन के तहत ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पर जोर है। (SSC CGL 2018)
- ई-गवर्नेंस में नागरिक सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए सेवा, यूनिफाइड मोबाइल एप्लिकेशन आदि प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। (MPPCS Pre 2015)
- डिजिटल इंडिया में प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के माध्यम से डिजिटल साक्षरता पर जोर दिया गया है। (SSC CHSL 2017)
- नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान (2006) के तहत ई-गवर्नेंस के लिए समग्र दृष्टिकोण और संस्थागत ढांचा विकसित किया गया। (UPPCS Pre 2016)
- डिजिटल इंडिया में मोबाइल गवर्नेंस के तहत UMANG एप द्वारा 2000+ सेवाएँ मोबाइल पर उपलब्ध हैं। (BPSC Pre 2019)
- ई-गवर्नेंस लेन-देन की डिजिटल रिकॉर्डिंग और ऑडिट ट्रेल से भ्रष्टाचार को कम करता है। (SSC CPO 2017)
- पारदर्शिता सूचना के मुक्त प्रवाह और निर्णय प्रक्रियाओं की खुलापन से शासन में जनता का विश्वास बढ़ाती है। (UPSC Pre 1997)
- जवाबदेही प्रशासन को नागरिकों के प्रति उत्तरदायी बनाती है और लोक सेवकों के कार्यों की व्याख्या अनिवार्य करती है। (SSC CGL 2017)
- पारदर्शिता में सूचना का स्वतः खुलासा और निर्णय प्रक्रियाओं में सार्वजनिक भागीदारी आवश्यक है। (UPPCS Pre 2018)
- जवाबदेही में प्रशासकों का उत्तरदायित्व संसद, न्यायपालिका और नागरिक समाज के प्रति सुनिश्चित होता है। (BPSC Pre 2016)
- पारदर्शिता नीति निर्माण में खुलेपन और सूचना की सार्वजनिक उपलब्धता से भ्रष्टाचार को कम करती है। (SSC CHSL 2019)
- जवाबदेही में प्रशासकीय जवाबदेही लोकपाल, सीवीसी और आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र द्वारा सुनिश्चित होती है। (MPPCS Pre 2017)
- पारदर्शिता में सार्वजनिक खरीद, नियुक्तियों और नीति निर्माण की खुली प्रक्रियाओं से जनता का विश्वास बढ़ता है। (SSC CPO 2018)
- जवाबदेही में प्रदर्शन मूल्यांकन, परिणाम आधारित प्रबंधन और नागरिक रिपोर्ट कार्ड शामिल हैं। (UPPCS Pre 2015)
- पारदर्शिता में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 नागरिकों को सरकारी कार्यों की जानकारी लेने का अधिकार देता है। (BPSC Pre 2018)
- जवाबदेही में नागरिकों की शिकायतों का समाधान लोकपाल, लोकायुक्त और सीजीएचएस जैसे तंत्रों द्वारा होता है। (SSC CGL 2019)
- पारदर्शिता में बजट आवंटन, खर्च और नीति निर्माण प्रक्रियाओं का सार्वजनिक खुलासा होता है। (MPPCS Pre 2016)
- जवाबदेही में प्रशासकीय सुधार द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2005-2009) की सिफारिशों के आधार पर किए जाते हैं। (SSC CHSL 2016)
- पारदर्शिता में सामाजिक अंकेक्षण और जन सुनवाई जैसी प्रक्रियाओं से जनता की भागीदारी बढ़ती है। (UPPCS Pre 2019)
- जवाबदेही में लोक सेवकों की जिम्मेदारी आचार संहिता, सतर्कता और अनुशासनात्मक कार्यवाही द्वारा सुनिश्चित होती है। (BPSC Pre 2017)
- नागरिक चार्टर की शुरुआत 1997 में ब्रिटिश मॉडल के आधार पर भारत में हुई, जो सेवा वितरण में गुणवत्ता सुनिश्चित करता है। (UPSC Pre 1998)
- नागरिक चार्टर में सेवाओं का समयबद्ध वितरण, सेवा मानक और शिकायत निवारण तंत्र शामिल हैं। (SSC CGL 2016)
- नागरिक चार्टर पारदर्शिता (सेवा मानकों का खुलासा) और जवाबदेही (समय सीमा का पालन) बढ़ाता है। (UPPCS Pre 2017)
- नागरिक चार्टर में नागरिकों के अधिकारों के साथ-साथ उनकी जिम्मेदारियों का भी उल्लेख होता है। (BPSC Pre 2015)
- नागरिक चार्टर में शिकायत निवारण तंत्र के रूप में अपीलीय प्राधिकारी और संस्थागत तंत्र शामिल हैं। (SSC CHSL 2018)
- नागरिक चार्टर में सेवा मानक, समय सीमा, शुल्क और शिकायत निवारण प्रक्रिया जैसे मानक निर्धारित होते हैं। (MPPCS Pre 2016)
- नागरिक चार्टर में जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए सेवा वितरण प्रक्रियाओं का सरलीकरण शामिल है। (SSC CPO 2019)
- नागरिक चार्टर प्रशासन को जवाबदेह बनाता है क्योंकि नागरिक सेवा मानकों के अनुपालन की मांग कर सकते हैं। (UPPCS Pre 2016)
- नागरिक चार्टर में समयबद्ध सेवा वितरण पर जोर देकर प्रशासनिक विलंब और भ्रष्टाचार को कम किया जाता है। (BPSC Pre 2018)
- नागरिक चार्टर में नागरिकों की जिम्मेदारियाँ भी शामिल हैं, जैसे दस्तावेजों की सही जानकारी देना और शुल्क का समय पर भुगतान। (SSC CGL 2018)
- लोकपाल की स्थापना लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत 2014 में हुई, जो केंद्र सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों की जाँच करता है। (UPSC Pre 2014)
- लोकपाल का गठन लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत हुआ, जिसे अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद लागू किया गया। (SSC CGL 2017)
- लोकपाल का अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय का वर्तमान या पूर्व मुख्य न्यायाधीश या कोई प्रख्यात व्यक्ति हो सकता है। (UPPCS Pre 2019)
- लोकपाल केंद्र सरकार के मंत्रियों, सांसदों और Group A, B, C, D अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों की जाँच करता है। (BPSC Pre 2016)
- लोकपाल में 1 अध्यक्ष और अधिकतम 8 सदस्य (50% न्यायिक सदस्य) होते हैं, जिनमें से आधे SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक/महिला होने चाहिए। (SSC CHSL 2019)
- लोकपाल को स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार है, अर्थात वह किसी शिकायत के बिना भी भ्रष्टाचार की जाँच शुरू कर सकता है। (MPPCS Pre 2017)
- लोकपाल भ्रष्टाचार की शिकायतों की जाँच कर सकता है और दोषी पाए जाने पर संपत्ति जब्ती, कारावास की सिफारिश कर सकता है। (SSC CPO 2018)
- लोकपाल एक वैधानिक निकाय है जिसे संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है, लेकिन इसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित की गई है। (UPPCS Pre 2015)
- लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक होता है। (BPSC Pre 2019)
- लोकपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, विपक्ष के नेता और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश पर करते हैं। (SSC CGL 2019)
- लोकायुक्त राज्य स्तर पर लोकपाल के समकक्ष संस्था है जो राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जाँच करता है। (UPSC Pre 2015)
- लोकायुक्त की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विपक्ष के नेता और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश पर करते हैं। (SSC CHSL 2016)
- लोकायुक्त का गठन राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित कानून के तहत होता है और सभी राज्यों में इसकी संरचना भिन्न हो सकती है। (UPPCS Pre 2018)
- लोकायुक्त की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं, लेकिन सरकार को तीन महीने में कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होती है। (BPSC Pre 2017)
- लोकायुक्त में 1 अध्यक्ष और अधिकतम 4 सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से 50% न्यायिक पृष्ठभूमि के होने चाहिए। (MPPCS Pre 2016)
- लोकायुक्त को स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार है और वह मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर भी जाँच शुरू कर सकता है। (SSC CPO 2017)
- लोकायुक्त राज्य सरकार के मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों की जाँच करता है। (UPPCS Pre 2019)
- लोकायुक्त एक वैधानिक निकाय है जिसे राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानून के तहत स्थापित किया जाता है। (BPSC Pre 2018)
- लोकायुक्त के सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक होता है और उन्हें महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है। (SSC CGL 2016)
- लोकायुक्त राज्य सरकार के सभी स्तरों के अधिकारियों की जाँच कर सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री और राज्यपाल कुछ शर्तों के अधीन। (MPPCS Pre 2015)
- सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 15 जून 2005 को लागू हुआ और 12 अक्टूबर 2005 से पूरे भारत में लागू किया गया। (UPSC Pre 2006)
- RTI अधिनियम के तहत नागरिकों को केंद्र और राज्य सरकारों के सार्वजनिक प्राधिकरणों से सूचना प्राप्त करने का अधिकार है। (SSC CGL 2017)
- RTI का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाकर, सूचना के अधिकार से जवाबदेही सुनिश्चित करना और भ्रष्टाचार को कम करना है। (UPPCS Pre 2018)
- RTI के तहत सूचना 30 दिनों के भीतर दी जानी चाहिए, जबकि जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में 48 घंटे के भीतर। (BPSC Pre 2016)
- RTI में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) केंद्र सरकार के सार्वजनिक प्राधिकरणों के लिए सर्वोच्च अपीलीय निकाय है। (SSC CHSL 2019)
- RTI में प्रत्येक राज्य में राज्य सूचना आयोग (SIC) गठित किया जाता है जो राज्य सरकार के प्राधिकरणों के लिए अपीलीय निकाय है। (MPPCS Pre 2017)
- RTI में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और केंद्रीय मंत्री की सिफारिश पर करते हैं। (SSC CPO 2018)
- RTI में सार्वजनिक प्राधिकरणों से सूचना माँगी जा सकती है, जिसमें सरकारी विभाग, PSU, NGOs जो सरकारी फंड प्राप्त करते हैं शामिल हैं। (UPPCS Pre 2015)
- RTI में राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता, कैबिनेट पेपर्स और व्यक्तिगत जानकारी जैसी सूचनाएँ छूट के अंतर्गत हैं। (BPSC Pre 2019)
- RTI में अपील की दो-स्तरीय प्रक्रिया है: पहली अपील लोक सूचना अधिकारी के वरिष्ठ अधिकारी से और दूसरी सूचना आयोग से। (SSC CGL 2018)