संज्ञा: परिभाषा एवं विशेषताएँ

शाब्दिक अर्थ: नाम

परिभाषा: किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव, गुण, अवस्था के नाम को संज्ञा कहते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • संज्ञा = नामवाचक शब्द
  • वाक्य में कर्ता, कर्म, करण आदि की भूमिका
  • हिन्दी में 5 मुख्य भेद (अधिकांश वैयाकरण)
  • कुछ वैयाकरण: 3 भेद (द्रव्य+समूह → जातिवाचक)

1. संज्ञा के 5 भेद

भेदपरिभाषाउदाहरण (50+)
व्यक्तिवाचक एक व्यक्ति/वस्तु/स्थान का बोध राम, कृष्ण, दिल्ली, गंगा, हिमालय, सोमवार, जनवरी, दीपावली, रामायण, दैनिक जागरण, भारत, पाकिस्तान, काला सागर, कामायनी, देवनागरी, ताजमहल, कश्मीर, लखनऊ, आगरा, काबा, मक्का, वेटिकन, एफिल टॉवर, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी, बिग बेन, पिरामिड, ग्रेट वॉल, कोलोसियम, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, गांधी जयंती
जातिवाचक समान जाति का बोध लड़का, नदी, पर्वत, कुत्ता, गाय, मंत्री, लेखक, जंगल, पुस्तक, ज्वालामुखी, भूकंप, देश, कर्मचारी, मजदूर, कवि, फल, लहर, आम, भिक्षुक, अमीर, गरीब, पेड़, पक्षी, ठग, जुलाहा, तूफान, डोंगर, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, प्रोफेसर, वकील, मनुष्य, बकरी, हाथी, नगर, सुन्दर, पहाड़, घर, पशु
भाववाचक गुण, दशा, भाव का बोध बुढ़ापा, बचपन, मिठास, लम्बाई, क्रोध, चौड़ाई, गर्मी, ठण्डी, धैर्य, ममत्व, मधुरता, बंधुत्व, चतुराई, मनुष्यता, पांडित्य, मित्रता, मूर्खता, दया, भूख, करुणा, सुन्दरता, निराशा, गरीबी, अमीरी, प्रेम, ईमानदारी, बेईमानी, बपौती, रसीलापन, कड़वाहट, उन्नति, घबराहट, फिसलन, शाबाशी, अपना (अपनापन)
द्रव्यवाचक धातु/द्रव्य का बोध सोना, चाँदी, लोहा, पीतल, तेल, पानी, दूध, गेहूं, चावल, कोयला, घी, तेजाब, चमड़ा, पेट्रोल, डीजल, हीरा, माणिक, पन्ना, मूँगा, मोती, पुखराज, दही, छाछ, लस्सी, चाय, शराब, सिरका, इत्र
समूहवाचक समूह/समुदाय का बोध संसद, सेना, कक्षा, भीड़, दल, गिरोह, पुस्तकालय, मंत्रिपरिषद्, कुंज, सभा, परिषद्, पुंज, ढेर, मंडल, घाँद (केले), गुच्छा (अंगूर), झुंड, कुटुम्ब, संघ, टोली, फौज, प्रजा, कमेटी

नोट: व्यक्तिवाचक → समूहवाचक (यदि एक से अधिक): राम → रामायण के पात्र

2. व्युत्पत्ति के आधार पर संज्ञा

प्रकारपरिभाषाउदाहरण
रूढ़ खंड सार्थक न हों कमल, नाक, आज, कल, पर, घर, पानी, हवा
यौगिक दो सार्थक खंड विद्यालय, पुस्तकालय, हिमालय, घुड़सवार
योगरूढ़ यौगिक पर विशेष अर्थ पंकज (कमल), जलज (कमल), लम्बोदर (गणेश), चक्रपाणि (विष्णु)

3. लिंग (पुल्लिंग ↔ स्त्रीलिंग)

पुल्लिंग नियम (50+)
  • आ, आव, पा, पन, ना → बुढ़ापा, लड़कपन
  • पर्वत, दिन, ग्रह → हिमालय, सोमवार, सूर्य
  • पेड़ → आम, पीपल, नीम
  • अनाज → गेहूं, चावल, जौ (अपवाद: मकई)
  • धातु/द्रव्य → सोना, पानी, दूध (अपवाद: चाँदी)
  • रत्न → हीरा, पन्ना (अपवाद: मणि)
  • शरीर अंग → हाथ, पैर, नेत्र
  • जल/स्थल → समुद्र, द्वीप, आकाश
  • वर्ण → अ, क, ख (अपवाद: इ, ई)
स्त्रीलिंग नियम (40+)
  • आ, इ, ई, न, ना, उ, ऊ → नदी, रोटी, झाड़ू
  • ख अंत → ईख, भूख (अपवाद: रुख)
  • भाषा/लिपि → हिन्दी, देवनागरी
  • नदी → गंगा, यमुना (अपवाद: सोन)
  • तिथि → पहली, अमावस्या
  • खाद्य → पूरी, खिचड़ी (अपवाद: हलुआ)
  • कपड़ा → साड़ी, पगड़ी
पुल्लिंग → स्त्रीलिंग नियम (15+)
  • नर/मादा → नर कोयल → कोयल
  • ई → गधा → गधी
  • इया → बेटा → बिटिया
  • इन → साँप → साँपिन
  • त्री → नेता → नेत्री
  • नी → भील → भीलनी
  • इनी → अभिमान → अभिमानिनी
  • वती → भाग्यवान → भाग्यवती
उभयलिंगी (20+)

विनय, सहाय, चित्रकार, राष्ट्रपति, स्टेशन, प्लेग, मेल, मोटर, पिस्तौल, घास, बर्फ, चाल-चलन, पुस्तक, पवन, तमाखू, सन्तान, श्वास, दरार, गेंद, समाज

4. वचन (एकवचन ↔ बहुवचन)

नियमउदाहरण
आ → ए लड़का → लड़के
अ → एँ चादर → चादरें
या → याँ चिड़िया → चिड़ियाँ
इ/ई → इयाँ मिठाई → मिठाइयाँ
ओं जोड़ें घर → घरों
सदा एकवचन (15+)

जनता, चाय, वर्षा, मजा, चर्चा, आटा, जल, आकाश, प्रेम, क्षमा, काया, पानी, दूध, सोना, हरएक

सदा बहुवचन (15+)

दर्शन, प्राण, समाचार, हस्ताक्षर, अक्षत, लोग, होश, दाम, भाग्य, रोम, बोल, आशीर्वाद, अश्रु, केश

5. कारक (8 भेद)

कारकचिह्नउदाहरण
कर्ता ने, ० राम ने खाना खाया
कर्म को, ० पुस्तक पढ़ी
करण से, द्वारा कलम से लिखा
सम्प्रदान को, के लिए बच्चे को दूध
अपादान से पेड़ से फल गिरा
संबंध का, की, के राम का घर
अधिकरण में, पर मेज पर किताब
संबोधन हे!, अरे! हे राम!

परीक्षोपयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • बुढ़ापा, बीमारी, मिठास, मित्रता आदि भाववाचक संज्ञाएँ हैं।
  • वकील, राज्यपाल, पर्वत, लड़का जातिवाचक संज्ञाएँ हैं।
  • दही पुल्लिंग शब्द है जबकि छाछ स्त्रीलिंग है।
  • भाषा, बोली एवं लिपियाँ स्त्रीलिंग होते हैं।
  • आँसू, कपूर पुल्लिंग शब्द हैं।
  • दर्शन, प्राण, हस्ताक्षर, अक्षत, आँसू सदा बहुवचन के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
  • पानी, जनता, चर्चा, वर्षा, आकाश, प्रत्येक, हरएक सदा एकवचन के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
  • हिन्दी भाषा में शब्दों का लिंग निर्धारण संज्ञा के आधार पर किया जाता है।
  • मीठा की भाववाचक संज्ञा मिठास होती है।
  • जिन संज्ञाओं से एक ही प्रकार की वस्तुओं अथवा व्यक्तियों का बोध हो, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।
  • 'लिंग' संस्कृत भाषा का शब्द है।
  • विनय, सहाय, मन-गढ़न्त, चित्रकार, डॉक्टर आदि उभयलिंगी शब्द हैं।
  • हिन्दी में लिंग के दो भेद होते हैं: (1) पुल्लिंग (2) स्त्रीलिंग
  • इ, ई और ऋ के अलावा वर्णमाला के सभी वर्ण पुल्लिंग होते हैं।
  • पृथ्वी, चाँदी, अरहर, मणि, आँख आदि स्त्रीलिंग शब्द हैं।
  • हिन्दी भाषा में वचन दो प्रकार के होते हैं।
  • बाप का संबंधवाचक एवं भाववाचक संज्ञा रूप 'बपौती' होगा।
  • वचन का प्रयोग संज्ञा के लिए किया जाता है।
  • जातिवाचक संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, अव्यय आदि शब्दों से भाववाचक संज्ञाओं का निर्माण होता है।
  • संज्ञा में लिंग, वचन एवं कारक के कारण रूपान्तरण होता है।
  • 'कलत्र' नपुंसक लिंग है।
  • अप्राणिवाचक शब्दों (पर्वत, नदी आदि) के लिंग का निर्णय क्रिया एवं विशेषण के आधार पर किया जाता है।
  • सदैव स्त्रीलिंग: मकड़ी, तितली, गिलहरी, दीमक, कोयल, छिपकली, लोमड़ी आदि।
  • सदैव पुल्लिंग: कौआ, उल्लू, बिच्छू, खरगोश, मच्छर, भालू, खटमल, गीदड़ आदि।
  • कारक के 8 भेद हैं।
  • संज्ञाओं के साथ आने वाली विभक्तियों को विश्लिष्ट कहा जाता है।
  • सर्वनामों के साथ आने वाली विभक्तियों को संश्लिष्ट कहा जाता है।
  • संज्ञा का पद-परिचय देते समय संज्ञा, भेद, लिंग, वचन, कारक और अन्य पदों से संबंध बताना जरूरी होता है।