1. पर्यावरण असन्तुलन और मानव हस्तक्षेप
परिभाषा: पर्यावरण असन्तुलन वह स्थिति है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन और मानव गतिविधियों के कारण पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ता है।
प्राकृतिक आपदाएँ:
- बाढ़, सूखा, भूकंप, ज्वालामुखी, और आँधी-तूफान जैसी आपदाएँ मानव हस्तक्षेप के कारण बढ़ रही हैं।
- मानव द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का दोहन, जैसे वनों की कटाई और नदियों का प्रदूषण, इन आपदाओं को बढ़ावा देता है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- 1972 में स्टॉकहोम सम्मेलन ने पर्यावरण संरक्षण पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया।
- 2015 में पेरिस समझौते ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया।
2. जनसंख्या दबाव और भूमि
जनसंख्या वृद्धि: स्वतंत्रता के बाद भारत की जनसंख्या लगभग तीन गुना बढ़ी है।
उत्तर प्रदेश की जनसंख्या:
- 2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश की जनसंख्या 19 करोड़ से अधिक थी, जो भारत की कुल जनसंख्या का 16.5% है।
- बढ़ती जनसंख्या के कारण खेती योग्य भूमि और आवास की कमी हो रही है।
प्रभाव:
- शहरीकरण के कारण वनों की कटाई और खेती योग्य भूमि पर इमारतें बन रही हैं।
- संसाधनों पर अत्यधिक दबाव, जैसे पानी और ऊर्जा की कमी।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- 2011 की जनगणना भारत की अंतिम पूर्ण जनगणना है।
- जनसंख्या नियंत्रण के लिए भारत सरकार ने 1952 में राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया।
3. ऊर्जा: जीवन के लिए आवश्यक
ऊर्जा के स्रोत:
- सूर्य प्रकाश, बहता जल, वायु, और भोज्य पदार्थ प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत हैं।
- ईंधन: गोबर, लकड़ी, कोयला, डीजल, पेट्रोल, मिट्टी का तेल, और LPG।
- विद्युत: कोयला, डीजल, प्राकृतिक गैस, जल, पवन, और नाभिकीय ऊर्जा से उत्पन्न।
पर्यावरण पर प्रभाव:
- ईंधन जलने से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैसें निकलती हैं, जो वायु प्रदूषण का कारण हैं।
- नाभिकीय ऊर्जा से रेडियोधर्मी प्रदूषण का खतरा।
ऊर्जा संरक्षण:
- सौर ऊर्जा का उपयोग: भोजन पकाने, पानी गर्म करने, और प्रकाश के लिए।
- गोबर गैस संयंत्र: पर्यावरण अनुकूल और खाद उत्पादन।
- ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग और बिजली की बचत।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने CFC गैसों पर प्रतिबंध लगाया, जो ओजोन परत को नुकसान पहुँचाती हैं।
- 2015 में स्वच्छ भारत मिशन ने ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छता पर जोर दिया।
4. जल और इसका प्रदूषण
जल का महत्व:
- जल खाद्यान्न उत्पादन, औद्योगिक विकास, ऊर्जा उत्पादन, और अपशिष्ट निपटान के लिए आवश्यक है।
- स्रोत: कुएँ, हैण्डपम्प, तालाब, झरने, नदियाँ।
नदियों का प्रदूषण:
- प्रमुख नदियाँ: गंगा, यमुना, गोमती, सरयू, घाघरा।
- कारण: औद्योगिक कचरा, सीवेज, रासायनिक पदार्थ (फ्लोराइड, आर्सेनिक, कैडमियम, सीसा, पारा)।
- प्रभाव: जल-जनित रोग (जैसे आंत्रशोथ, पेचिश), जलीय जीवों का विनाश।
नमामि गंगे कार्यक्रम:
- जून 2014 में शुरू, जलशक्ति मंत्रालय के तहत।
- उद्देश्य: गंगा के प्रदूषण को कम करना और पुनर्जनन।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- गंगा विश्व की सात सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल है।
- 1986 में गंगा एक्शन प्लान शुरू हुआ।
5. समुद्र प्रदूषण
समुद्र का महत्व:
- मछली, खनिज, नमक, और आयोडीन का स्रोत।
प्रदूषण के कारण:
- प्रदूषित नदियों का जल, कीटनाशक, हाइड्रोकार्बन, और विषाक्त पदार्थ।
- तेल टैंकर दुर्घटनाएँ और समुद्र तल से तेल निष्कासन।
प्रभाव:
- तेल की परत सौर ऊर्जा और गैस विनिमय को रोकती है, जिससे जलीय जीवों को नुकसान।
- मछली पकड़ने की उन्नत तकनीकों से समुद्री जीवों का दोहन।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- 1969 में सांता बारबरा तेल रिसाव ने समुद्र प्रदूषण पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया।
- 2010 में डीपवाटर होराइजन तेल रिसाव सबसे बड़े समुद्री प्रदूषण घटनाओं में से एक था।
6. वन: हमारे रक्षक
वनों का महत्व:
- हवा को शुद्ध करते हैं, ईंधन और इमारती लकड़ी प्रदान करते हैं।
- जड़ी-बूटियाँ, कच्चा माल, और वन्यजीवों के लिए आवास।
वनों की कटाई:
- कारण: जनसंख्या वृद्धि, आवास, मार्ग निर्माण, और ईंधन।
- प्रभाव: मृदा कटाव, उर्वरता हानि, जैव विविधता ह्रास (जैसे भारतीय चीता विलुप्तप्राय)।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- 1973 में चिपको आंदोलन ने वन संरक्षण को बढ़ावा दिया।
- 1980 में भारत में वन संरक्षण अधिनियम लागू हुआ।