1. पृथ्वी पर जल की उपलब्धता
विवरण: पृथ्वी का 71% भाग जल से ढका है, लेकिन केवल 2.5% जल मीठा है, जिसमें से 70% हिमनदों और बर्फ में है।
महत्व:
- मीठा जल मानव जीवन, कृषि, और उद्योगों के लिए आवश्यक है।
- केवल 1% मीठा जल नदियों, झीलों, और भूजल के रूप में उपलब्ध है।
महत्वपूर्ण तथ्य :
- 1972 में स्टॉकहोम सम्मेलन ने जल संरक्षण को वैश्विक प्राथमिकता बनाया।
- 1993 में संयुक्त राष्ट्र ने विश्व जल दिवस (22 मार्च) की स्थापना की।
2. भू-जल की कमी के कारण
कारण:
- अत्यधिक दोहन: कृषि और उद्योगों में भूजल का अत्यधिक उपयोग।
- प्रदूषण: औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट से भूजल प्रदूषण।
- वर्षा की कमी: अनियमित मानसून और सूखा।
- शहरीकरण: कंक्रीट सतहें जल के पुनर्भरण को रोकती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य :
- 1977 में जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम ने भूजल प्रदूषण को नियंत्रित किया।
- 2005 में राष्ट्रीय जल नीति ने भूजल संरक्षण पर जोर दिया।
3. वर्षा जल संचयन की आवश्यकता
आवश्यकता:
- भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए।
- जल की कमी और सूखे से निपटने के लिए।
- कृषि और घरेलू उपयोग के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए।
महत्वपूर्ण तथ्य :
- 2019 में जल शक्ति मंत्रालय ने वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित किया।
- 2002 में भारत में राष्ट्रीय जल संचयन योजना शुरू हुई।
4. संचयन एवं पुनर्भरण की विधियाँ
1. पुनर्भरण पिट (गड्ढा) द्वारा छत से प्राप्त वर्षा जल का संचयन:
- छत का पानी पाइप के माध्यम से गड्ढे में जाता है, जो भूजल को रिचार्ज करता है।
- सावधानियाँ: गड्ढे को रेत और बजरी से भरें; नियमित सफाई करें।
2. खाई द्वारा छत से प्राप्त वर्षा जल का संचयन:
- खाई में वर्षा जल एकत्रित होता है और धीरे-धीरे मिट्टी में रिसता है।
- उपयुक्त ढलान वाले क्षेत्रों में प्रभावी।
3. नलकूप द्वारा छत से प्राप्त वर्षा जल का संचयन:
- छत का पानी नलकूप के माध्यम से भूजल में प्रवेश करता है।
- नलकूप में फिल्टर लगाना आवश्यक है।
4. गली प्लग द्वारा वर्षा जल का संचयन:
- पहाड़ी क्षेत्रों में गलियों में छोटे बाँध बनाकर जल प्रवाह को रोका जाता है।
- मिट्टी के कटाव को रोकता है।
5. कन्टूर बाँध द्वारा वर्षा जल का संचयन:
- ढलान पर समोच्च रेखाओं के साथ बाँध बनाए जाते हैं।
- जल को एकत्रित कर मिट्टी में रिसने देता है।
6. चेकडैम/नाला बाँध द्वारा वर्षा जल का संचयन:
- नालों में छोटे बाँध बनाकर जल को रोका जाता है।
- कृषि और भूजल पुनर्भरण के लिए उपयोगी।
7. नौबियन बाँध द्वारा वर्षा जल का संचयन:
- रेगिस्तानी क्षेत्रों में रेत के नीचे जल संग्रहण के लिए उपयोगी।
- नौबियन तकनीक प्राचीन मिस्र से प्रेरित है।
महत्वपूर्ण तथ्य :
- 2001 में तमिलनाडु ने वर्षा जल संचयन को अनिवार्य किया।
- 3000 ई.पू. में सिंधु घाटी सभ्यता में जल संचयन प्रणालियाँ थीं।
5. जल संरक्षण के लिए क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
- वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करें।
- नल बंद करें जब उपयोग न हो।
- कृषि में ड्रिप सिंचाई का उपयोग करें।
- जल प्रदूषण को रोकने के लिए जागरूकता फैलाएँ।
क्या न करें:
- पानी को व्यर्थ न बहाएँ।
- जल स्रोतों में कचरा न डालें।
- अत्यधिक भूजल दोहन न करें।
- रासायनिक अपशिष्ट को जल में न मिलाएँ।
महत्वपूर्ण तथ्य :
- 2011 में जल जीवन मिशन ने जल संरक्षण को बढ़ावा दिया।
6. सरकारी प्रयास
प्रयास:
- जल शक्ति मंत्रालय (2019): जल संरक्षण और प्रबंधन को समर्पित।
- नमामि गंगे (2016): गंगा नदी के जल को स्वच्छ करना।
- जल जीवन मिशन (2011): हर घर में नल से जल।
- राष्ट्रीय जल नीति (2005): जल संरक्षण और पुनर्भरण को प्रोत्साहन।
महत्वपूर्ण तथ्य :
- 2014 में स्वच्छ भारत मिशन ने जल स्वच्छता पर ध्यान दिया।
- 2002 में राष्ट्रीय जल संचयन योजना शुरू हुई।