1. प्रदूषण
परिभाषा: प्रदूषण पर्यावरण में अवांछित पदार्थों या ऊर्जा का प्रवेश है जो जीवों और पर्यावरण को हानि पहुँचाता है।
प्रकार:
- जल प्रदूषण
- वायु प्रदूषण
- ध्वनि प्रदूषण
- मृदा प्रदूषण
- तापीय प्रदूषण
महत्वपूर्ण तथ्य:
- 1974 में जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम लागू हुआ।
- 1981 में वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम लागू हुआ।
2. जल प्रदूषण
परिभाषा: जल में हानिकारक पदार्थों का मिश्रण जो इसके उपयोग को असुरक्षित बनाता है।
कारण:
- औद्योगिक कचरा
- घरेलू अपशिष्ट
- कृषि रसायन (कीटनाशक, उर्वरक)
- सीवेज और अपशिष्ट जल
प्रभाव:
- जल-जनित रोग जैसे हैजा, पेचिश
- जलीय जीवों का विनाश
- पानी की गुणवत्ता में कमी
महत्वपूर्ण तथ्य:
- 1950 के दशक में जापान में मीनामाता रोग पारा प्रदूषण के कारण हुआ।
- गंगा एक्शन प्लान 1986 में शुरू हुआ।
3. जल-जनित रोग और सूक्ष्मजीव
| सूक्ष्मजीव | उत्पन्न रोग |
|---|---|
| विषाणु (Hepatitis A Virus) | हैपेटाइटिस A |
| विषाणु (Rotavirus) | दस्त |
| जीवाणु (Vibrio cholerae) | हैजा |
| जीवाणु (Salmonella typhi) | टाइफाइड |
| जीवाणु (Shigella spp.) | पेचिश |
| जीवाणु (Escherichia coli) | गैस्ट्रोएंटेराइटिस |
| प्रोटोजोआ (Giardia lamblia) | जियार्डियासिस |
| प्रोटोजोआ (Entamoeba histolytica) | अमीबियासिस |
| कृमि (Ascaris lumbricoides) | एस्केरियासिस |
| कृमि (Schistosoma spp.) | शिस्टोसोमियासिस |
4. मीनामाता रोग
परिभाषा: मीनामाता रोग पारा विषाक्तता के कारण होने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारी है।
कारण: औद्योगिक अपशिष्ट से पारा का जल में मिश्रण।
प्रभाव: तंत्रिका तंत्र की क्षति, कांपना, दृष्टि और श्रवण हानि।
महत्वपूर्ण तथ्य: 1956 में जापान के मीनामाता खाड़ी में पहली बार यह रोग देखा गया।
5. जल-जनित रोगों से बचाव
- पानी को उबालना और फ़िल्टर करना।
- सीवेज उपचार संयंत्र स्थापित करना।
- औद्योगिक अपशिष्ट का उचित निपटान।
- स्वच्छता और जागरूकता अभियान।
6. जल प्रदूषण का नियंत्रण
- अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र।
- कृषि रसायनों का नियंत्रित उपयोग।
- जल संरक्षण नीतियाँ लागू करना।
- नदियों और झीलों की नियमित सफाई।
महत्वपूर्ण तथ्य: 2015 में स्वच्छ भारत मिशन ने जल स्वच्छता पर जोर दिया।
7. वायु प्रदूषण
परिभाषा: वायु में हानिकारक गैसों, कणों, या रसायनों का मिश्रण।
कारण:
- वाहनों का धुआँ
- औद्योगिक उत्सर्जन
- जलवायु परिवर्तन
- कृषि और जंगल की आग
प्रभाव:
- श्वसन रोग जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस
- ग्लोबल वार्मिंग
- अम्ल वर्षा
महत्वपूर्ण तथ्य:
- 1984 में भोपाल गैस त्रासदी मिथाइल आइसोसाइनेट रिसाव के कारण हुई।
- 2015 में पेरिस समझौते ने वायु प्रदूषण नियंत्रण पर जोर दिया।
8. वायु प्रदूषण का नियंत्रण
- नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग
- वाहनों में CNG का प्रयोग
- औद्योगिक चिमनियों में फिल्टर
- वृक्षारोपण और ग्रीन मफलर
ग्रीन मफलर: सड़कों के किनारे वृक्षों की पंक्तियाँ जो वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करती हैं।
9. ध्वनि प्रदूषण
परिभाषा: अवांछित और हानिकारक ध्वनि जो मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
कारण:
- वाहनों की आवाज
- औद्योगिक मशीनें
- लाउडस्पीकर और आतिशबाजी
प्रभाव:
- श्रवण हानि
- तनाव और अनिद्रा
- उच्च रक्तचाप
नियंत्रण:
- ध्वनिरोधी उपकरणों का उपयोग
- शोर नियंत्रण नियम लागू करना
- सार्वजनिक जागरूकता
महत्वपूर्ण तथ्य: भारत में ध्वनि प्रदूषण (नियंत्रण) नियम 2000 में लागू हुआ।
10. मृदा प्रदूषण
परिभाषा: मिट्टी में हानिकारक पदार्थों का मिश्रण जो इसकी उर्वरता को कम करता है।
कारण:
- कीटनाशक और उर्वरक
- प्लास्टिक और औद्योगिक कचरा
- खनन और निर्माण
प्रभाव:
- मिट्टी की उर्वरता में कमी
- फसल उत्पादन में हानि
- भूमिगत जल प्रदूषण
नियंत्रण:
- जैविक खेती को बढ़ावा
- प्लास्टिक का पुनर्चक्रण
- मृदा संरक्षण तकनीकें
महत्वपूर्ण तथ्य: 1986 में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू हुआ।
11. आधुनिक समाज की जीवन शैली और पर्यावरण
ईंधन और बिजली: जीवाश्म ईंधन का उपयोग ग्लोबल वार्मिंग और वायु प्रदूषण का कारण।
प्लास्टिक: गैर-जैव निम्नीकरणीय, मृदा और जल प्रदूषण का कारण।
डिटरजेंट: फॉस्फेट युक्त डिटरजेंट जल प्रदूषण और यूरीट्रॉफिकेशन का कारण।
पेंट: VOCs (वाष्पशील कार्बनिक यौगिक) वायु प्रदूषण को बढ़ाते हैं।
प्रशीतक: CFC (क्लोरोफ्लोरोकार्बन) ओजोन परत को नष्ट करते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने CFC पर प्रतिबंध लगाया।
- 2019 में भारत ने सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध की घोषणा की।