वायु की गतियाँ - 50 महत्वपूर्ण तथ्य

वायु की गति सूर्य के ताप से उत्पन्न दाब अंतर के कारण होती है।

वायु दाब वह बल है जो वायु अपने भार से धरातल पर डालती है।

पृथ्वी पर असमान तापन से उच्च और निम्न दाब क्षेत्र बनते हैं।

हवाएँ हमेशा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर प्रवाहित होती हैं।

पृथ्वी का घूर्णन हवाओं की दिशा को प्रभावित करने वाला कोरिओलिस प्रभाव पैदा करता है।

उत्तरी गोलार्ध में हवाएँ दक्षिणावर्त उच्च दाब के चारों ओर घूमती हैं।

दक्षिणी गोलार्ध में हवाएँ वामावर्त उच्च दाब के चारों ओर घूमती हैं।

स्थायी पवनें पृथ्वी के दाब बेल्ट के कारण नियमित रूप से बहती हैं।

व्यापारिक पवनें उपोष्ण उच्च दाब से भूमध्य निम्न दाब की ओर बहती हैं।

उत्तरी गोलार्ध में व्यापारिक पवनें उत्तर-पूर्व दिशा में चलती हैं।

दक्षिणी गोलार्ध में व्यापारिक पवनें दक्षिण-पूर्व दिशा में प्रवाहित होती हैं।

पश्चिमी पवनें 30° से 60° अक्षांश के बीच पश्चिम से पूर्व बहती हैं।

ध्रुवीय पवनें ध्रुवीय उच्च दाब से उपध्रुवीय निम्न दाब की ओर बहती हैं।

मौसमी पवनें तापमान और दाब में मौसमी बदलाव से उत्पन्न होती हैं।

भारत में ग्रीष्मकालीन मानसून दक्षिण-पश्चिम से नमी लाता है।

शीतकालीन मानसून उत्तर-पूर्व से शुष्क हवाएँ लाता है।

स्थानीय पवनें दिन और रात के ताप अंतर से छोटे क्षेत्रों में बनती हैं।

समुद्री समीर दिन में समुद्र की ठंडी हवा को स्थल पर लाता है।

स्थलीय समीर रात में स्थल की ठंडी हवा को समुद्र की ओर ले जाता है।

लू भारत में गर्मियों में मैदानों पर चलने वाली गर्म हवा है।

शीतलहर सर्दियों में ठंडी और शुष्क हवा को मैदानों तक लाती है।

वायु दाब का मापन मिलीबार या पारा सेंटीमीटर में किया जाता है।

उच्च दाब क्षेत्र में मौसम आमतौर पर साफ और शुष्क रहता है।

निम्न दाब क्षेत्र में बादल और वर्षा की संभावना होती है।

भूमध्य रेखा पर निम्न दाब क्षेत्र को शांत मंडल (डोलड्रम) कहते हैं।

30° अक्षांश पर उच्च दाब क्षेत्र को अश्व अक्षांश कहते हैं।

चक्रवात तेज हवाओं के साथ निम्न दाब का घूमता हुआ तंत्र है।

प्रतिचक्रवात उच्च दाब का तंत्र है जो शांत मौसम लाता है।

उत्तरी गोलार्ध में चक्रवात की हवाएँ वामावर्त दिशा में चलती हैं।

दक्षिणी गोलार्ध में चक्रवात की हवाएँ दक्षिणावर्त दिशा में घूमती हैं।

वायु की गति को किमी/घंटा में एनीमोमीटर से मापते हैं।

पवन दिशा का पता पवन संकेतक (वेदर वेन) से लगाया जाता है।

गर्म हवा ऊपर उठकर निम्न दाब क्षेत्र बनाती है।

ठंडी हवा नीचे बैठकर उच्च दाब क्षेत्र बनाती है।

पृथ्वी पर वायु संचरण तीन कोष्ठकों में होता है।

मानसून पवनें भारत की कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं।

समुद्री समीर तटीय क्षेत्रों में तापमान को संतुलित करता है।

स्थलीय समीर रात में तटीय क्षेत्रों को ठंडा रखता है।

लू के कारण गर्मी से संबंधित बीमारियाँ बढ़ सकती हैं।

शीतलहर सर्दियों में तापमान को बहुत कम कर देती है।

चक्रवात की आँख में हवाएँ शांत और मौसम साफ रहता है।

पश्चिमी पवनें यूरोप में हल्का और नम मौसम लाती हैं।

व्यापारिक पवनें समुद्री व्यापार के लिए ऐतिहासिक रूप से उपयोगी रहीं।

ध्रुवीय पवनें ठंडे क्षेत्रों में बर्फीली हवाएँ लाती हैं।

समुद्र तल पर वायु दाब औसतन 1013.25 मिलीबार होता है।

पहाड़ों पर वायु दाब कम होने से साँस लेना कठिन होता है।

मानसून हिंद महासागर के तापमान से प्रभावित होता है।

चक्रवात तूफान और भारी वर्षा का कारण बनते हैं।

प्रतिचक्रवात शुष्क और स्थिर मौसम की स्थिति बनाता है।

वायु की गतियाँ पृथ्वी के मौसम पैटर्न को नियंत्रित करती हैं।