मरुस्थल शुष्क क्षेत्र हैं जो 20° से 30° अक्षांशों के बीच स्थित हैं।
विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल सहारा है।
मरुस्थल में वार्षिक वर्षा 250 मिमी से कम होती है।
यहाँ दिन का तापमान 50°C तक और रात का 0°C तक हो सकता है।
मरुस्थल में तापमान का अंतर दिन और रात में बहुत अधिक होता है।
मरुस्थल की जलवायु शुष्क और गर्म होती है।
यहाँ की मिट्टी रेतीली और कम उर्वर होती है।
कैक्टस मरुस्थल का प्रमुख पौधा है जो पानी संग्रहित करता है।
खजूर का पेड़ मरुस्थल में ओएसिस के पास उगता है।
मरुस्थल में घास बहुत कम होती है।
यहाँ के जानवर पानी के बिना लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं।
ऊँट मरुस्थल का सबसे महत्वपूर्ण जानवर है।
रेगिस्तानी साँप और छिपकली यहाँ के प्रमुख सरीसृप हैं।
गिद्ध और बाज मरुस्थल के शिकारी पक्षी हैं।
मरुस्थल में जनसंख्या घनत्व बहुत कम होता है।
यहाँ के लोग खानाबदोश जीवन जीते हैं।
बेदुइन जनजाति सहारा मरुस्थल में रहती है।
मरुस्थल में लोग ऊँट पालते हैं और व्यापार करते हैं।
ओएसिस मरुस्थल में जीवन का आधार हैं।
यहाँ की खेती केवल ओएसिस के पास संभव है।
खजूर और जौ मरुस्थल की प्रमुख फसलें हैं।
मरुस्थल में पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या है।
यहाँ के लोग पानी के लिए कुओं और झरनों पर निर्भर हैं।
मरुस्थल में घर मिट्टी और पत्थरों से बनाए जाते हैं।
यहाँ के लोग मोटे और ढीले कपड़े पहनते हैं।
मरुस्थल में परिवहन के लिए ऊँट का उपयोग होता है।
यहाँ सड़कें कम होती हैं और रेत के टीले आवागमन को कठिन बनाते हैं।
मरुस्थल में तेज हवाएँ रेत के टीले बनाती हैं।
रेत का तूफान मरुस्थल की आम घटना है।
मरुस्थल में खनिज संसाधन जैसे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पाए जाते हैं।
थार मरुस्थल भारत का सबसे बड़ा मरुस्थल है।
मरुस्थल में मृगमरीचिका एक ऑप्टिकल भ्रम है।
यहाँ के लोग सूरज की गर्मी से बचने के लिए दिन में छाया में रहते हैं।
मरुस्थल में रातें ठंडी होती हैं जिससे जीवन कठिन हो जाता है।
यहाँ की संस्कृति रेत और ऊँटों से प्रभावित है।
मरुस्थल में पशुपालन मुख्य आजीविका है।
यहाँ के लोग पानी संग्रह के लिए मटके और चमड़े की मशक का उपयोग करते हैं।
मरुस्थल में वन्यजीव संरक्षण चुनौतीपूर्ण है।
यहाँ की जैव विविधता बहुत कम होती है।
मरुस्थल में पर्यटन ऊँट सफारी और रेगिस्तानी त्योहारों से बढ़ रहा है।
यहाँ की हवाएँ मिट्टी के कटाव का कारण बनती हैं।
मरुस्थल में ओएसिस के पास छोटे-छोटे बाजार बनते हैं।
यहाँ के लोग पारंपरिक संगीत और नृत्य के लिए जाने जाते हैं।
मरुस्थल में बिजली और पानी की आपूर्ति सीमित है।
यहाँ की जलवायु परिवर्तन से मरुस्थलीकरण बढ़ रहा है।
मरुस्थल में रेत के नीचे छिपे जीवाश्म पाए जाते हैं।
यहाँ के लोग सूर्यास्त और सितारों को देखने का आनंद लेते हैं।
मरुस्थल में खानाबदोश जीवन शैली अब भी मौजूद है।
मरुस्थल का विस्तार जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहा है।