भूगोल तथ्य - 100 रोचक तथ्य

अमावस्या से पूर्णिमा तक के पखवाड़े को शुक्ल पक्ष कहते हैं।

पूर्णिमा से अमावस्या तक के पखवाड़े को कृष्ण पक्ष कहते हैं।

एक पूर्णिमा से दूसरी पूर्णिमा तक अपनी कलाओं को पूरा करने में चंद्रमा को 29 दिन 12 घंटे 44 मिनट लगते हैं।

विश्व का प्रथम व्यक्ति जिसने अंतरिक्ष से पृथ्वी की परिक्रमा की, यूरी गागरिन था (12 अप्रैल 1961)।

यूरी गागरिन पूर्व सोवियत संघ (रूस) के निवासी थे।

यूरी गागरिन ने वोस्तोक-1 अंतरिक्षयान से पृथ्वी की परिक्रमा की।

चंद्रमा पर सर्वप्रथम कदम रखने वाला व्यक्ति नील आर्मस्ट्रांग था (20 जुलाई 1969)।

नील आर्मस्ट्रांग अपोलो-11 अंतरिक्षयान से चंद्रमा पर पहुँचे।

नील आर्मस्ट्रांग संयुक्त राज्य अमेरिका के निवासी थे।

अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय राकेश शर्मा थे।

राकेश शर्मा ने सोयूज टी-11 अंतरिक्षयान से अंतरिक्ष की यात्रा की (3 अप्रैल 1984)।

जिन वस्तुओं के आर-पार प्रकाश न जा सके, उन्हें अपारदर्शी कहते हैं।

जब सूर्य, पृथ्वी, और चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं, तो यह स्थिति सिजिगी कहलाती है।

सिजिगी दो प्रकार की होती है: युति और वियुति।

जब सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाता है, तो इस स्थिति को युति कहते हैं।

युति की घटना अमावस्या के दिन होती है।

युति की स्थिति में चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है, जिससे सूर्यग्रहण होता है।

जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है, तो इस स्थिति को वियुति कहते हैं।

वियुति की घटना पूर्णिमा के दिन होती है।

वियुति की स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रग्रहण होता है।

पृथ्वी अपने अक्ष पर 23.5° झुकी हुई है।

चंद्रमा का कक्षा तल पृथ्वी के कक्षा तल से 5° का कोण बनाता है।

रात को आकाश में सबसे चमकीला आकाशीय पिंड चंद्रमा है।

भू-आभ (Geoid) का अर्थ है पृथ्वी के समान आकार।

पृथ्वी का लघु रूप में वास्तविक प्रतिरूप ग्लोब कहलाता है।

वह काल्पनिक रेखा जो पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटती है, भूमध्य रेखा कहलाती है।

भूमध्य रेखा को विषुवत रेखा के नाम से भी जाना जाता है।

भूमध्य रेखा के उत्तर का भाग उत्तरी गोलार्ध कहलाता है।

भूमध्य रेखा के दक्षिण का भाग दक्षिणी गोलार्ध कहलाता है।

किसी स्थान की भूमध्य रेखा से कोणीय दूरी की माप को अक्षांश कहते हैं।

भूमध्य रेखा को 0° अक्षांश माना गया है।

सबसे लंबी अक्षांश रेखा भूमध्य रेखा है।

भूमध्य रेखा की लंबाई 40,075 किमी है।

10° उत्तरी अक्षांश की लंबाई भूमध्य रेखा से कम होती है।

अक्षांश रेखाओं की कुल संख्या 181 है।

0° अक्षांश को भूमध्य रेखा कहते हैं।

23.5° उत्तरी अक्षांश को कर्क रेखा कहते हैं।

23.5° दक्षिणी अक्षांश को मकर रेखा कहते हैं।

66.5° उत्तरी अक्षांश को आर्कटिक वृत्त कहते हैं।

66.5° दक्षिणी अक्षांश को अंटार्कटिक वृत्त कहते हैं।

उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव को मिलाने वाली अर्धवृत्ताकार रेखाएँ देशांतर रेखाएँ कहलाती हैं।

ग्लोब पर देशांतर रेखाओं की संख्या 360 है।

ध्रुवों पर देशांतर रेखाओं के बीच की दूरी शून्य होती है।

अक्षांश वृत्तों के विपरीत सभी देशांतर रेखाओं की लंबाई समान होती है।

ग्रीनविच वेधशाला से गुजरने वाली देशांतर रेखा 0° देशांतर या ग्रीनविच रेखा कहलाती है।

0° देशांतर और 180° देशांतर मिलकर पृथ्वी को पूर्वी और पश्चिमी गोलार्ध में विभाजित करते हैं।

समय का अनुमान सूर्य की स्थिति के आधार पर किया जाता है।

किसी देशांतर पर जब सूर्य सबसे ऊँचाई पर होता है, तो वहाँ दिन के 12 बजे होते हैं।

एक देशांतर रेखा पर स्थित सभी स्थानों पर स्थानीय समय समान होता है।

पृथ्वी अपने काल्पनिक अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है।

पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है।

पृथ्वी की घूर्णन गति 15° प्रति घंटा है।

1° देशांतर घूमने में पृथ्वी को 4 मिनट लगते हैं।

भारत के सबसे पूर्वी और पश्चिमी सीमा के बीच देशांतर विस्तार लगभग 30° है।

भारत में 82.5° पूर्वी देशांतर को मानक मध्याह्न रेखा माना गया है।

IST की फुल फॉर्म Indian Standard Time है।

GMT की फुल फॉर्म Greenwich Mean Time है।

भारतीय मानक समय ग्रीनविच मानक समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

कनाडा में 6 मानक समय कटिबंध हैं।

यदि ग्रीनविच रेखा पर शाम 4 बजे हैं, तो भारत में रात 9:30 बजे होंगे।

अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा 180° देशांतर को माना गया है।

अक्षांश और देशांतर का मापन डिग्री में किया जाता है।

पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना परिभ्रमण कहलाता है।

पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करना परिक्रमण कहलाता है।

पृथ्वी का अक्ष कक्षा तल से 66.5° का कोण बनाता है।

एक पृथ्वी दिवस 24 घंटे का होता है।

पृथ्वी की दैनिक गति के कारण दिन और रात होते हैं।

पृथ्वी सूर्य से प्रकाश और ऊष्मा प्राप्त करती है।

पृथ्वी पर दिन और रात को विभाजित करने वाला वृत्त प्रदीप्ति वृत्त कहलाता है।

पृथ्वी की वार्षिक गति का समय 365 दिन है।

अधिवर्ष में फरवरी 29 दिन की होती है।

अधिवर्ष में कुल 366 दिन होते हैं।

पृथ्वी सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार पथ पर परिक्रमा करती है।

सूर्य सौर मण्डल का सबसे बड़ा पिंड है।

सौर मण्डल में कुल 8 ग्रह हैं।

चंद्रमा पृथ्वी से 3,84,400 किमी दूर है।

चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी का एक-छठा है।

सूर्य का व्यास लगभग 13.9 लाख किमी है।

पृथ्वी का व्यास 12,742 किमी है।

ग्रह दो प्रकार के होते हैं: स्थलीय और गैसीय।

पृथ्वी को नीला ग्रह कहते हैं क्योंकि इसमें पानी की अधिकता है।

सूर्य का प्रकाश सभी ग्रहों को ऊर्जा देता है।

सौर मण्डल का निर्माण नीहारिका से हुआ।

हमारा सौर मण्डल मंदाकिनी आकाशगंगा में है।

सूर्य का जीवनकाल लगभग 10 अरब वर्ष है।

सौर मण्डल में गुरुत्वाकर्षण संतुलन बनाए रखता है।

पृथ्वी की कक्षा में 365.25 दिन लगते हैं।

मंगल को लाल ग्रह कहते हैं।

बृहस्पति के 79 से अधिक चंद्रमा हैं।

शनि का सबसे बड़ा चंद्रमा टाइटन है।

यूरेनस अपनी धुरी पर 98° झुका हुआ है।

नेपच्यून पर तेज़ हवाएँ चलती हैं।

सूर्य सौर मण्डल का 99.86% द्रव्यमान रखता है।

क्षुद्रग्रह मंगल और बृहस्पति के बीच पाए जाते हैं।

धूमकेतु सौर मण्डल के बाहरी भाग से आते हैं।

सूर्य एक मध्यम आकार का तारा है।

पृथ्वी का वायुमंडल जीवन को संभव बनाता है।

सौर मण्डल में कई बौने ग्रह हैं।

सूर्य का वर्गीकरण G2V तारा है।

सौर मण्डल अंतरिक्ष का एक छोटा हिस्सा है।