12. दक्षिण भारत (6वीं से 11वीं शताब्दी)

अति विस्तृत नोट्स

1. परिचय: दक्षिण भारत

विवरण: दक्षिण भारत (6वीं से 11वीं शताब्दी) में राष्ट्रकूट, चालुक्य, पल्लव, और चोल वंशों ने शासन किया, जो कला, साहित्य, मंदिर निर्माण, और समुद्री व्यापार के लिए प्रसिद्ध थे।

विशेषताएँ:

  • क्षेत्र: दक्कन (महाराष्ट्र, कर्नाटक) और दक्षिणी प्रायद्वीप (तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल)।
  • प्रमुख वंश: राष्ट्रकूट (दक्कन), चालुक्य (वातापी), पल्लव (कांची), चोल (तंजोर)।
  • प्रतियोगी तथ्य: दक्षिण भारत ने भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया, विशेष रूप से चोलों के समुद्री साम्राज्य के माध्यम से।
  • प्रतियोगी तथ्य: दक्षिण भारत के वंशों ने उत्तर भारत के गुप्तों और हर्ष के बाद सांस्कृतिक निरंतरता प्रदान की।

2. संगम साहित्य

विवरण: संगम साहित्य तमिल भाषा का प्राचीन साहित्य है, जो दक्षिण भारत के सामाजिक, आर्थिक, और धार्मिक जीवन को दर्शाता है।

विशेषताएँ:

  • काल: 3वीं शताब्दी ई.पू. से 3वीं शताब्दी ई.।
  • प्रमुख ग्रंथ: तोल्काप्पियम् (व्याकरण), एट्टुत्तोकै (आठ संकलन), पत्तुप्पाट्टु (दस गीत)।
  • संगम सभा: मदुरै में कवियों की सभाएँ।
  • प्रतियोगी तथ्य: संगम साहित्य प्राचीन तमिल संस्कृति का प्राथमिक स्रोत है।
  • प्रतियोगी तथ्य: संगम साहित्य में व्यापार (रोम के साथ), कृषि, और सामाजिक संरचना का वर्णन मिलता है।

3. राष्ट्रकूट वंश (मान्यखेट)

विवरण: राष्ट्रकूट वंश दक्कन का शक्तिशाली वंश था, जिसने उत्तर और दक्षिण भारत में प्रभाव डाला।

विशेषताएँ:

  • शासन: 753-973 ई., राजधानी मान्यखेट (आधुनिक मालखेड, महाराष्ट्र)।
  • प्रमुख शासक: दन्ती दुर्ग, कृष्ण प्रथम, गोविंद तृतीय, अमोघवर्ष, कृष्ण तृतीय।
  • प्रतियोगी तथ्य: राष्ट्रकूटों ने त्रिपक्षीय संघर्ष (राष्ट्रकूट, गुर्जर-प्रतिहार, पाल) में भाग लिया।
  • प्रतियोगी तथ्य: राष्ट्रकूटों ने कन्नौज पर नियंत्रण के लिए प्रतिहारों और पालों से युद्ध किया।

प्रमुख शासक:

  • दन्ती दुर्ग (753-756 ई.): राष्ट्रकूट वंश का संस्थापक, चालुक्यों को हराया।
  • कृष्ण प्रथम (756-774 ई.): ऐलोरा के कैलाश मंदिर का निर्माण।
  • गोविंद तृतीय (793-814 ई.): कन्नौज पर आक्रमण, प्रतिहारों को हराया।
  • अमोघवर्ष (814-878 ई.): जैन धर्म का संरक्षक, ‘कविराजमार्ग’ ग्रंथ की रचना।
  • कृष्ण तृतीय (939-967 ई.): तंजोर पर कब्जा, चोलों को हराया।

प्रतियोगी तथ्य: राष्ट्रकूटों के शिलालेख (एलोरा और एलिफेंटा) उनके प्रशासन और कला के बारे में जानकारी देते हैं।

4. ऐलोरा का कैलाश मंदिर

विवरण: कैलाश मंदिर (गुफा 16) ऐलोरा की एकाश्मक वास्तुकला का शिखर है।

विशेषताएँ:

  • निर्माण: 8वीं शताब्दी, कृष्ण प्रथम।
  • शैली: द्रविड़ और नागर का संयोजन।
  • प्रतियोगी तथ्य: कैलाश मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
  • प्रतियोगी तथ्य: एकाश्मक संरचना (एक ही पत्थर से तराशा गया) इसे विश्व की अनूठी कृति बनाती है।

5. चालुक्य वंश (वातापी)

विवरण: चालुक्य वंश ने दक्कन में शासन किया और कला में योगदान दिया।

विशेषताएँ:

  • शासन: 543-757 ई., राजधानी वातापी (बादामी, कर्नाटक)।
  • प्रमुख शासक: पुलकेशिन प्रथम, पुलकेशिन द्वितीय।
  • प्रतियोगी तथ्य: चालुक्यों ने पल्लवों और हर्षवर्धन के साथ युद्ध किए।
  • प्रतियोगी तथ्य: बादामी की गुफाएँ और मंदिर चालुक्य वास्तुकला के प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रमुख शासक:

  • पुलकेशिन प्रथम (543-566 ई.): चालुक्य वंश का संस्थापक, वातापी की स्थापना।
  • पुलकेशिन द्वितीय (610-642 ई.): हर्षवर्धन को नर्मदा तट पर हराया, पल्लवों से युद्ध।

प्रतियोगी तथ्य: ऐहोल शिलालेख (पुलकेशिन द्वितीय) में उनकी विजयों का वर्णन है।

6. विरुपाक्ष मंदिर

विवरण: विरुपाक्ष मंदिर बादामी में चालुक्य वंश द्वारा निर्मित है।

विशेषताएँ:

  • निर्माण: 8वीं शताब्दी, विक्रमादित्य द्वितीय।
  • शैली: द्रविड़ शैली।
  • प्रतियोगी तथ्य: यह मंदिर चालुक्य कला का प्रारंभिक उदाहरण है।
  • प्रतियोगी तथ्य: मंदिर में पल्लव प्रभाव दिखता है, जो दक्षिण भारतीय वास्तुकला के विकास को दर्शाता है।

7. पल्लव वंश (कांची)

विवरण: पल्लव वंश ने तमिलनाडु में शासन किया और द्रविड़ वास्तुकला की नींव रखी।

विशेषताएँ:

  • शासन: 6वीं-9वीं शताब्दी, राजधानी कांची (कांचीपुरम)।
  • प्रमुख शासक: सिंह विष्णु, महेन्द्रवर्मन प्रथम, नरसिंहवर्मन प्रथम, राजसिंह।
  • प्रतियोगी तथ्य: पल्लवों ने महाबलीपुरम के रथ मंदिर और कैलासनाथ मंदिर बनवाए।
  • प्रतियोगी तथ्य: पल्लवों ने चीनी यात्री ह्वेनसांग के समय कांची को शिक्षा केंद्र बनाया।

प्रमुख शासक:

  • सिंह विष्णु (575 ई.): पल्लव वंश का संस्थापक।
  • महेन्द्रवर्मन प्रथम (600-630 ई.): गुफा मंदिर बनवाए, संगीत और नाटक का संरक्षक।
  • नरसिंहवर्मन प्रथम (630-668 ई.): महाबलीपुरम के रथ मंदिर, चालुक्यों को हराया।
  • राजसिंह (700-728 ई.): कांची के कैलासनाथ मंदिर का निर्माण।

प्रतियोगी तथ्य: नरसिंहवर्मन प्रथम को ‘महामल्ल’ कहा जाता था, और उनके शिलालेख महाबलीपुरम में मिलते हैं।

8. महाबलीपुरम का रथ मंदिर

विवरण: महाबलीपुरम के रथ मंदिर पल्लव वंश की एकाश्मक वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

विशेषताएँ:

  • निर्माण: 7वीं शताब्दी, नरसिंहवर्मन प्रथम।
  • विशेषता: पांच रथ (धर्मराज, भीम, अर्जुन, नकुल-सहदेव, द्रौपदी)।
  • प्रतियोगी तथ्य: महाबलीपुरम यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
  • प्रतियोगी तथ्य: रथ मंदिर द्रविड़ शैली के प्रारंभिक प्रयोग हैं।

9. चोल वंश (तंजोर)

विवरण: चोल वंश दक्षिण भारत का सबसे शक्तिशाली वंश था, जिसने समुद्री साम्राज्य स्थापित किया।

विशेषताएँ:

  • शासन: 9वीं-13वीं शताब्दी, राजधानी तंजोर और गंगैकोंडचोलपुरम।
  • प्रमुख शासक: करिकाल, विजयालय, राजराज प्रथम, राजेन्द्र प्रथम।
  • प्रतियोगी तथ्य: चोलों ने वृहदेश्वर मंदिर और समुद्री नौसेना विकसित की।
  • प्रतियोगी तथ्य: चोलों की नौसेना ने दक्षिण-पूर्व एशिया (श्रीविजय साम्राज्य) पर आक्रमण किया।

प्रमुख शासक:

  • करिकाल (2री शताब्दी ई.): प्रारंभिक चोल शासक, कावेरी नदी पर बांध बनवाया।
  • विजयालय (850-871 ई.): चोल वंश का पुनर्जनन, तंजोर पर कब्जा।
  • राजराज प्रथम (985-1014 ई.): वृहदेश्वर मंदिर, श्रीलंका पर विजय।
  • राजेन्द्र प्रथम (1014-1044 ई.): दक्षिण-पूर्व एशिया पर विजय, गंगैकोंडचोलपुरम की स्थापना।

प्रतियोगी तथ्य: तंजोर शिलालेख चोल प्रशासन और मंदिरों के आर्थिक महत्व को दर्शाते हैं।

10. शासन व्यवस्था

विवरण: दक्षिण भारत में विशेष रूप से चोलों की शासन व्यवस्था अत्यधिक संगठित थी।

विशेषताएँ:

  • राष्ट्र/मण्डलम: प्रांत, मण्डलम प्रमुख द्वारा शासित।
  • नाडु: जिला, स्थानीय सभाओं द्वारा प्रबंधन।
  • कुर्रम: गाँव समूह, ग्राम सभाएँ।
  • प्रतियोगी तथ्य: चोलों की स्थानीय स्वायत्तता (उत्तमेरूर शिलालेख) विश्व प्रसिद्ध थी।
  • प्रतियोगी तथ्य: उत्तमेरूर शिलालेख में ग्राम सभा चुनाव प्रक्रिया का वर्णन है।

शासन व्यवस्था:
स्तर नाम जिम्मेदारी
केंद्र राजा नीति निर्माण, युद्ध, कर संग्रह।
प्रांत राष्ट्र/मण्डलम प्रांतीय प्रशासन, कर संग्रह।
जिला नाडु स्थानीय प्रशासन, भूमि प्रबंधन।
गाँव कुर्रम गाँव प्रबंधन, विवाद निपटारा, कर संग्रह।

11. सामाजिक स्थिति

विवरण: दक्षिण भारतीय समाज वर्ण व्यवस्था और सामंती प्रथा पर आधारित था।

विशेषताएँ:

  • वर्ग: ब्राह्मण (पुजारी, विद्वान), क्षत्रिय (शासक, योद्धा), वैश्य (व्यापारी), शूद्र (कृषक, शिल्पी)।
  • प्रतियोगी तथ्य: भक्ति आंदोलन ने जातिगत भेदभाव को कम किया।
  • प्रतियोगी तथ्य: अलवार और नयनार संतों ने भक्ति आंदोलन को बढ़ावा दिया, जो सामाजिक सुधारों से जुड़ा था।

12. शंकराचार्य

विवरण: शंकराचार्य ने हिंदू धर्म को पुनर्जनन प्रदान किया।

विशेषताएँ:

  • काल: 788-820 ई. (केरल में जन्म)।
  • योगदान: अद्वैत वेदांत, चार मठ (बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी, श्रृंगेरी), बौद्ध धर्म का खंडन।
  • प्रतियोगी तथ्य: शंकराचार्य ने दर्शनशास्त्र में एकरूपता लाई।
  • प्रतियोगी तथ्य: उनके ग्रंथ (ब्रह्मसूत्र भाष्य) हिंदू दर्शन के आधार हैं।

13. रामानुजाचार्य

विवरण: रामानुजाचार्य ने भक्ति मार्ग को लोकप्रिय बनाया।

विशेषताएँ:

  • काल: 1017-1137 ई. (तमिलनाडु)।
  • योगदान: विशिष्टाद्वैत दर्शन, श्रीवैष्णव संप्रदाय, भक्ति आंदोलन।
  • प्रतियोगी तथ्य: रामानुज ने सामाजिक समानता पर जोर दिया।
  • प्रतियोगी तथ्य: रामानुज के दर्शन ने वैष्णव भक्ति को दक्षिण से उत्तर भारत तक फैलाया।

14. कला और साहित्य को बढ़ावा

विवरण: दक्षिण भारत में कला और साहित्य का अभूतपूर्व विकास हुआ।

विशेषताएँ:

  • कला: द्रविड़ शैली के मंदिर (विमान, गोपुरम)।
  • साहित्य: दण्डी (काव्यादर्श, संस्कृत), कम्बन (रामावतारम्, तमिल), तोल्काप्पियम्।
  • प्रतियोगी तथ्य: चोलों ने तमिल साहित्य और नाट्यकला को संरक्षण दिया।
  • प्रतियोगी तथ्य: मंदिरों में नृत्य (भरतनाट्यम) और संगीत का विकास हुआ।

15. वृहदेश्वर मंदिर

विवरण: वृहदेश्वर मंदिर चोल वास्तुकला का सर्वोत्तम उदाहरण है।

विशेषताएँ:

  • निर्माण: 1010 ई., राजराज प्रथम, तंजोर।
  • विशेषता: 66 मीटर ऊँचा विमान, 13 मंजिल।
  • प्रतियोगी तथ्य: वृहदेश्वर मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
  • प्रतियोगी तथ्य: मंदिर का शिखर एक ही पत्थर (80 टन) से बना है।

16. साहित्य की प्रगति

विवरण: दक्षिण भारत में तमिल और संस्कृत साहित्य फला-फूला।

विशेषताएँ:

  • प्रमुख लेखक: दण्डी (काव्यादर्श), कम्बन (रामावतारम्), पंप (कन्नड़)।
  • प्रतियोगी तथ्य: कम्बन की रामावतारम् तमिल साहित्य की उत्कृष्ट कृति है।
  • प्रतियोगी तथ्य: तिरुक्कुरल (तिरुवल्लुवर) नैतिकता और जीवन दर्शन का ग्रंथ है।

17. आर्थिक स्रोत: व्यापार और कृषि

विवरण: दक्षिण भारत की अर्थव्यवस्था व्यापार और कृषि पर आधारित थी।

विशेषताएँ:

  • व्यापार: दक्षिण-पूर्व एशिया (श्रीविजय), रोम, अरब के साथ मसाले, रेशम, रत्न।
  • कृषि: कावेरी, गोदावरी, कृष्णा नदियों के उपजाऊ क्षेत्र।
  • प्रतियोगी तथ्य: चोलों का समुद्री व्यापार विश्व प्रसिद्ध था।
  • प्रतियोगी तथ्य: मंदिर आर्थिक केंद्र थे, जो कर संग्रह और व्यापार प्रबंधन करते थे।

18. दक्षिण भारत का विदेशों से संपर्क

विवरण: दक्षिण भारत का व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्क विश्वव्यापी था।

विशेषताएँ:

  • क्षेत्र: श्रीलंका, मलय द्वीप, कंबोडिया, इंडोनेशिया।
  • प्रतियोगी तथ्य: चोलों ने दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदू संस्कृति फैलाई।
  • प्रतियोगी तथ्य: राजेन्द्र प्रथम का श्रीविजय अभियान भारत का पहला समुद्री सैन्य अभियान था।

19. अंकोरवाट का मंदिर

विवरण: अंकोरवाट कंबोडिया में हिंदू मंदिर है, जो भारतीय प्रभाव को दर्शाता है।

विशेषताएँ:

  • निर्माण: 12वीं शताब्दी, सूर्यवर्मन द्वितीय, विष्णु को समर्पित।
  • प्रतियोगी तथ्य: अंकोरवाट विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक है।
  • प्रतियोगी तथ्य: मंदिर में रामायण और महाभारत के दृश्य चित्रित हैं।

20. बोरोबुदूर का बौद्ध मंदिर

विवरण: बोरोबुदूर इंडोनेशिया में बौद्ध मंदिर है।

विशेषताएँ:

  • निर्माण: 9वीं शताब्दी, शैलेंद्र वंश।
  • विशेषता: 72 स्तूप, 504 बुद्ध मूर्तियाँ।
  • प्रतियोगी तथ्य: बोरोबुदूर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
  • प्रतियोगी तथ्य: मंदिर बौद्ध तीर्थयात्रा का प्रमुख केंद्र था।

21. समय रेखा

विवरण: दक्षिण भारत की प्रमुख घटनाएँ।

विशेषताएँ:

  • 543 ई.: चालुक्य वंश का उदय।
  • 575 ई.: पल्लव वंश का उदय।
  • 753 ई.: राष्ट्रकूट वंश की स्थापना।
  • 850 ई.: चोल वंश का पुनर्जनन।
  • 1010 ई.: वृहदेश्वर मंदिर निर्माण।
  • प्रतियोगी तथ्य: चोलों का समुद्री साम्राज्य 11वीं शताब्दी में चरम पर था।
  • प्रतियोगी तथ्य: 11वीं शताब्दी में चोलों ने भारत की सांस्कृतिक और सैन्य शक्ति को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित किया।

सारांश (एक पंक्ति के तथ्य)

  1. दक्षिण भारत में 6वीं से 11वीं शताब्दी में राष्ट्रकूट, चालुक्य, पल्लव, चोल वंशों का शासन था।
  2. संगम साहित्य तमिल भाषा का प्राचीन साहित्य है।
  3. तोल्काप्पियम् संगम साहित्य का व्याकरण ग्रंथ है।
  4. राष्ट्रकूट वंश की राजधानी मान्यखेट थी।
  5. दन्ती दुर्ग ने राष्ट्रकूट वंश की स्थापना की।
  6. कृष्ण प्रथम ने ऐलोरा के कैलाश मंदिर बनवाया।
  7. कैलाश मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
  8. राष्ट्रकूटों ने त्रिपक्षीय संघर्ष में भाग लिया।
  9. अमोघवर्ष ने कविराजमार्ग ग्रंथ लिखा।
  10. चालुक्य वंश की राजधानी वातापी थी।
  11. पुलकेशिन प्रथम चालुक्य वंश के संस्थापक थे।
  12. पुलकेशिन द्वितीय ने हर्षवर्धन को हराया।
  13. ऐहोल शिलालेख में पुलकेशिन द्वितीय की विजयों का वर्णन है।
  14. विरुपाक्ष मंदिर चालुक्य वंश द्वारा बनवाया गया।
  15. पल्लव वंश की राजधानी कांची थी।
  16. सिंह विष्णु पल्लव वंश के संस्थापक थे।
  17. महेन्द्रवर्मन ने गुफा मंदिर बनवाए।
  18. नरसिंहवर्मन प्रथम ने महाबलीपुरम के रथ मंदिर बनवाए।
  19. नरसिंहवर्मन प्रथम को महामल्ल कहा जाता था।
  20. राजसिंह ने कांची के कैलासनाथ मंदिर बनवाया।
  21. महाबलीपुरम यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
  22. चोल वंश की राजधानी तंजोर थी।
  23. करिकाल ने कावेरी नदी पर बांध बनवाया।
  24. विजयालय ने चोल वंश का पुनर्जनन किया।
  25. राजराज प्रथम ने वृहदेश्वर मंदिर बनवाया।
  26. राजेन्द्र प्रथम ने श्रीलंका और श्रीविजय पर विजय प्राप्त की।
  27. वृहदेश्वर मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
  28. चोल शासन में मण्डलम प्रांत थे।
  29. नाडु चोल शासन में जिला था।
  30. कुर्रम गाँव समूह था।
  31. उत्तमेरूर शिलालेख में ग्राम सभा का वर्णन है।
  32. चोलों की स्थानीय स्वायत्तता विश्व प्रसिद्ध थी।
  33. दक्षिण भारतीय समाज वर्ण व्यवस्था पर आधारित था।
  34. भक्ति आंदोलन ने सामाजिक समानता को बढ़ाया।
  35. अलवार और नयनार संतों ने भक्ति को लोकप्रिय बनाया।
  36. शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया।
  37. शंकराचार्य ने चार मठ स्थापित किए।
  38. रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैत दर्शन का प्रचार किया।
  39. रामानुज ने श्रीवैष्णव संप्रदाय को मजबूत किया।
  40. दण्डी ने काव्यादर्श लिखा।
  41. कम्बन ने रामावतारम् (तमिल रामायण) लिखा।
  42. तिरुक्कुरल तमिल में नैतिक दर्शन का ग्रंथ है।
  43. चोलों ने तमिल साहित्य को संरक्षण दिया।
  44. दक्षिण भारत में द्रविड़ शैली के मंदिर बने।
  45. वृहदेश्वर मंदिर का शिखर एक पत्थर से बना है।
  46. दक्षिण भारत का व्यापार दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ था।
  47. चोलों का समुद्री व्यापार विश्व प्रसिद्ध था।
  48. कावेरी नदी के क्षेत्र में कृषि समृद्ध थी।
  49. मंदिर आर्थिक केंद्र थे।
  50. चोलों ने दक्षिण-पूर्व एशिया में सांस्कृतिक प्रभाव डाला।
  51. अंकोरवाट कंबोडिया में हिंदू मंदिर है।
  52. अंकोरवाट विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक है।
  53. बोरोबुदूर इंडोनेशिया में बौद्ध मंदिर है।
  54. बोरोबुदूर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
  55. राष्ट्रकूट वंश 8वीं शताब्दी में उभरा।
  56. चोल वंश का पुनर्जनन 9वीं शताब्दी में हुआ।
  57. वृहदेश्वर मंदिर 1010 ई. में बना।
  58. चालुक्य और पल्लव 6वीं शताब्दी में उभरे।
  59. चोलों का समुद्री साम्राज्य 11वीं शताब्दी में चरम पर था।
  60. राजेन्द्र का श्रीविजय अभियान भारत का पहला समुद्री अभियान था।

बहु-विकल्पीय प्रश्न

1. संगम साहित्य किस भाषा में है?





2. राष्ट्रकूट वंश की राजधानी क्या थी?





3. ऐलोरा के कैलाश मंदिर का निर्माण किसने करवाया?





4. चालुक्य वंश की राजधानी क्या थी?





5. पुलकेशिन द्वितीय ने किसे हराया?





6. विरुपाक्ष मंदिर किस वंश ने बनवाया?





7. पल्लव वंश की राजधानी क्या थी?





8. महाबलीपुरम के रथ मंदिर किसने बनवाए?





9. चोल वंश की राजधानी क्या थी?





10. राजेन्द्र प्रथम ने कहाँ विजय प्राप्त की?





11. वृहदेश्वर मंदिर किसने बनवाया?





12. चोल शासन में प्रांत को क्या कहा जाता था?





13. शंकराचार्य ने किस दर्शन का प्रचार किया?





14. रामानुजाचार्य ने किस संप्रदाय को मजबूत किया?





15. दण्डी ने कौन सा ग्रंथ लिखा?





16. कम्बन ने कौन सा ग्रंथ लिखा?





17. वृहदेश्वर मंदिर किस शैली में बना है?





18. चोलों का समुद्री व्यापार किसके साथ था?





19. अंकोरवाट मंदिर कहाँ स्थित है?





20. बोरोबुदूर मंदिर किस धर्म से संबंधित है?





21. करिकाल ने क्या बनवाया?





22. विजयालय ने क्या किया?





23. शंकराचार्य ने कितने मठ स्थापित किए?





24. महेन्द्रवर्मन ने क्या बनवाया?





25. राजसिंह ने क्या बनवाया?





26. चोल शासन में जिला क्या कहलाता था?





27. दक्षिण भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्रोत क्या था?





28. अंकोरवाट मंदिर का निर्माण किसने करवाया?





29. बोरोबुदूर मंदिर किस वंश ने बनवाया?





30. चोलों का समुद्री साम्राज्य कब चरम पर था?