परिचय
दिव्यांगता एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक, या संवेदी क्षमताएँ सामान्य से कम होती हैं, जिसके कारण वह दैनिक जीवन की गतिविधियों में बाधा का सामना करता है। यह जन्मजात या जन्म के बाद विभिन्न कारणों से हो सकती है। भारत में दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए कई नीतियाँ और सुविधाएँ लागू की गई हैं।
प्रतियोगी तथ्य: भारत में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 ने दिव्यांगता की परिभाषा को व्यापक बनाया और 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को मान्यता दी।
1. दिव्यांगता की परिभाषा
विवरण: दिव्यांगता वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक, या संवेदी क्षमता में कमी के कारण वह सामान्य गतिविधियाँ करने में असमर्थ या सीमित होता है।
विशेषताएँ:
- दिव्यांगता स्थायी या अस्थायी हो सकती है।
- यह शारीरिक, संवेदी, या मानसिक हो सकती है।
- प्रतियोगी तथ्य: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, विश्व में लगभग 15% लोग किसी न किसी प्रकार की दिव्यांगता के साथ जी रहे हैं।
2. दिव्यांगता की श्रेणियाँ
विवरण: दिव्यांगता को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जैसे शारीरिक, संवेदी, और मानसिक।
विशेषताएँ:
- शारीरिक: अस्थि, मांसपेशी, या गतिशीलता से संबंधित।
- संवेदी: श्रवण, दृष्टि, या अन्य संवेदी अक्षमताएँ।
- मानसिक: बौद्धिक, मनोवैज्ञानिक, या सीखने की अक्षमताएँ।
- प्रतियोगी तथ्य: भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार, 2.68 करोड़ लोग दिव्यांग थे, जो कुल जनसंख्या का 2.21% था।
3. श्रवण संबंधी अक्षमता
विवरण: यह वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति सुनने की क्षमता में कमी या पूर्ण हानि का सामना करता है।
विशेषताएँ:
- यह जन्मजात या जन्म के बाद (जैसे बीमारी या दुर्घटना) हो सकती है।
- सहायता: श्रवण यंत्र, सांकेतिक भाषा।
- प्रतियोगी तथ्य: भारत में राष्ट्रीय बधिर विद्यालय की स्थापना 1963 में हुई, जो श्रवण अक्षम बच्चों की शिक्षा के लिए समर्पित है।
4. दृष्टि संबंधी अक्षमता
विवरण: यह वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति की दृष्टि कमजोर होती है या वह पूर्ण रूप से अंधा होता है।
विशेषताएँ:
- कारण: जन्मजात, ग्लूकोमा, मोतियाबिंद, या चोट।
- सहायता: ब्रेल लिपि, स्क्रीन रीडर, छड़ी।
- प्रतियोगी तथ्य: लुई ब्रेल ने 1824 में ब्रेल लिपि विकसित की, जिसने दृष्टिबाधित लोगों की शिक्षा में क्रांति ला दी।
5. अस्थि संबंधी अक्षमता
विवरण: यह शारीरिक अक्षमता है जो हड्डियों, जोड़ों, या मांसपेशियों को प्रभावित करती है।
विशेषताएँ:
- कारण: जन्मजात, दुर्घटना, पोलियो।
- सहायता: व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग, फिजियोथेरेपी।
- प्रतियोगी तथ्य: भारत में 1950 के दशक में पोलियो उन्मूलन अभियान शुरू हुआ, जिसने अस्थि अक्षमता को कम किया।
6. मानसिक अक्षमता
विवरण: यह बौद्धिक या मनोवैज्ञानिक अक्षमता है जो सीखने, निर्णय लेने, या व्यवहार को प्रभावित करती है।
विशेषताएँ:
- उदाहरण: डाउन सिंड्रोम, ऑटिज्म, डिस्लेक्सिया।
- सहायता: विशेष शिक्षा, थेरेपी।
- प्रतियोगी तथ्य: भारत में मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 2017 ने मानसिक अक्षमता के प्रति जागरूकता बढ़ाई।
7. जन्मजात दिव्यांगता: कारण एवं बचाव
विवरण: जन्मजात दिव्यांगता वह है जो जन्म के समय या गर्भावस्था के दौरान होती है।
कारण:
- आनुवंशिक विकार (जैसे डाउन सिंड्रोम)।
- गर्भावस्था में माँ की बीमारी (जैसे रूबेला)।
- कुपोषण या दवाओं का दुरुपयोग।
बचाव:
- गर्भावस्था में नियमित चिकित्सा जाँच।
- पौष्टिक आहार और टीकाकरण।
- आनुवंशिक परामर्श।
प्रतियोगी तथ्य: भारत में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (2005) ने जन्मजात दिव्यांगता को कम करने के लिए मातृ स्वास्थ्य पर जोर दिया।
8. जन्म के बाद दिव्यांगता: कारण एवं बचाव
विवरण: यह वह दिव्यांगता है जो जन्म के बाद दुर्घटना, बीमारी, या अन्य कारणों से होती है।
कारण:
- दुर्घटनाएँ (जैसे सड़क हादसे)।
- संक्रामक रोग (जैसे पोलियो, मस्तिष्क ज्वर)।
- कुपोषण या चोट।
बचाव:
- सुरक्षित यातायात नियम।
- टीकाकरण और स्वच्छता।
- चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार।
प्रतियोगी तथ्य: भारत में पल्स पोलियो अभियान (1995) ने पोलियो के कारण होने वाली अस्थि अक्षमता को लगभग समाप्त किया।
9. दिव्यांगजनों को दी जाने वाली सुविधाएँ
विवरण: भारत सरकार और समाज ने दिव्यांगजनों के लिए कई सुविधाएँ प्रदान की हैं।
विशेषताएँ:
- शिक्षा: विशेष स्कूल, समावेशी शिक्षा।
- रोजगार: सरकारी नौकरियों में 4% आरक्षण।
- सहायता: व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, ब्रेल किट।
- कानूनी अधिकार: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016।
- प्रतियोगी तथ्य: भारत में 1995 का दिव्यांगजन अधिनियम पहला कानून था जो दिव्यांगजनों के अधिकारों को संबोधित करता था।
10. दिव्यांगजनों द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्य एवं उपलब्धियाँ
विवरण: दिव्यांगजनों ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
उदाहरण:
- हेलेन केलर: दृष्टि और श्रवण अक्षमता के बावजूद विश्व प्रसिद्ध लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता।
- सुधा चंद्रन: अस्थि अक्षमता के बावजूद प्रसिद्ध नृत्यांगना।
- दीपा मलिक: पैरालंपिक में पदक विजेता (2016 रियो)।
- प्रशांत गोयल: दृष्टिबाधित IAS अधिकारी।
- प्रतियोगी तथ्य: भारत के अरुणिमा सिन्हा, अस्थि अक्षमता के साथ माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला बनीं (2013)।