पर्वतीय क्षेत्र एवं जीवनशैली

Exam Facts · SSC UPSC Railway
जीवन, व्यवसाय, खेती एवं चुनौतियाँ · केवल परीक्षा तथ्य 80+ facts
पर्वतीय क्षेत्र – ऊँचाई, ढलान, ठंडी जलवायु वाले भाग।
भारत के प्रमुख पर्वत – हिमालय, पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट, अरावली, विंध्य, सतपुड़ा।
हिमालयी राज्य – जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल।
हिमालय श्रेणियाँ – महान हिमालय, लघु हिमालय, शिवालिक।
बर्फ रेखा – स्थायी हिम का निम्नतम स्तर – ऊँचाई के साथ बदलता।
आवास – लकड़ी/पत्थर के घर, ढलवाँ छत (बर्फ/बारिश के लिए)।
कश्मीर घर – लकड़ी आधारित, गर्म रखने हेतु डिज़ाइन।
लद्दाख घर – पत्थर, मोटी दीवारें – अत्यधिक ठंड से बचाव।
वस्त्र – ऊनी कपड़े, फेरन (कश्मीर), टोपी, रस्सी वाली जूती।
भोजन – मोटे अनाज, जौ, फाफर, मांस, दूध उत्पाद – ठंड के अनुकूल।
ईंधन – लकड़ी, गोबर, कभी-कभी पशु गोबर के कंडे।
सीढ़ीदार खेती (Terrace Farming) – ढलान पर सीढ़ियाँनुमा खेत।
सीढ़ीदार खेती का लाभ – मृदा अपरदन कम, जल संरक्षण।
मुख्य फसलें – मक्का, जौ, गेहूँ, आलू, सेब, चाय (पहाड़ी)।
बागवानी – सेब (हिमाचल/J&K), चाय (दार्जिलिंग), केसर (कश्मीर)।
केसर – जम्मू-कश्मीर की प्रमुख नकदी फसल।
झूम खेती – पूर्वोत्तर पहाड़ियों में स्थानांतरित कृषि।
सीमित कृषि भूमि – ढलान के कारण समतल खेत कम।
पशुचारण – भेड़, बकरी, याक, पहाड़ी गाय – मुख्य व्यवसाय।
ट्रांसह्यूमेंस (Transhumance) – मौसमी पशु प्रवास।
ग्रीष्म चरागाह – ऊँची घाटियाँ (बुग्याल/मर्ग)।
शीत प्रवास – निचली घाटियों/मैदानों की ओर।
गद्दी – हिमाचल प्रदेश के पशुचारक समुदाय।
बकरवाल / गुज्जर – जम्मू-कश्मीर के मौसमी पशुचारक।
याक – लद्दाख/हिमालय की ऊँचाई पर भार वाहक पशु।
पश्मीना – पहाड़ी बकरियों से ऊन – कश्मीर प्रसिद्ध।
पर्यटन – पहाड़ी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा।
तीर्थ पर्यटन – बद्रीनाथ, केदारनाथ, वैष्णो देवी, अमरनाथ।
हस्तशिल्प – ऊनी गलीचे, शॉल, लकड़ी नक्काशी।
वन उत्पाद – जड़ी-बूटी, शहद, लकड़ी, औषधीय पौधे।
जल विद्युत – तीव्र ढलान वाली नदियों से – हिमाचल, उत्तराखंड।
सैन्य / सीमा क्षेत्र – कई पर्वतीय भाग अंतरराष्ट्रीय सीमा पर।
भूस्खलन (Landslide) – वर्षा/भूकंप से पहाड़ी ढलान खिसकना।
बाढ़ / फ्लैश फ्लड – अचानक तीव्र वर्षा से।
हिमनद झील विस्फोट (GLOF) – हिमनद झील टूटने से बाढ़।
कठिन परिवहन – सड़कें सीमित, सर्दियों में बंद।
पलायन (Migration) – रोजगार हेतु युवा मैदानों की ओर।
सीमित शिक्षा/स्वास्थ्य – दूर-दराज गाँवों में पहुँच कम।
ठंड एवं ऑक्सीजन – अत्यधिक ऊँचाई पर जीवन कठिन।
मृदा अपरदन – ढलान + वर्षा से उपजाऊ मिट्टी बहना।
वन कटाई – भूस्खलन एवं अपरदन बढ़ाती है।
आपदाएँ – 2013 केदारनाथ, 2021 चमोली – उदाहरण।
वन संरक्षण – पहाड़ों की स्थिरता एवं जल स्रोत के लिए आवश्यक।
चिपको आंदोलन – उत्तराखंड – वृक्ष बचाने का प्रसिद्ध आंदोलन।
बुग्याल – ऊँचे हिमालयी घास के मैदान।
राष्ट्रीय उद्यान – ग्रेट हिमालयन, वैली ऑफ फ्लावर्स, काजीरंगा (पहाड़ी निकट)।
पारिस्थितिकी संवेदनशील – पर्वतीय क्षेत्र नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र।
भोटिया / जौनसारी – उत्तराखंड की पर्वतीय जनजातियाँ।
लेपचा / भूटिया – सिक्किम।
मोनपा / आपतानी – अरुणाचल प्रदेश।
लाहुल-स्पीति / किन्नौर – हिमाचल की ऊँची घाटियाँ।
सीढ़ीदार खेती → Terrace Farming
ट्रांसह्यूमेंस → मौसमी पशुचारण
गद्दी → हिमाचल
बकरवाल → जम्मू-कश्मीर
केसर → कश्मीर
चिपको → उत्तराखंड
भूस्खलन → मुख्य आपदा
याक → लद्दाख भार वाहक
बुग्याल → ऊँचे घास मैदान
झूम → पूर्वोत्तर
पश्मीना → कश्मीर ऊन
ढलवाँ छत → बर्फ/बारिश

परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण (Quick Revision)

सीढ़ीदार खेती – Terrace
ट्रांसह्यूमेंस – मौसमी प्रवास
गद्दी – हिमाचल
बकरवाल – J&K
केसर – कश्मीर
चिपको – उत्तराखंड
भूस्खलन – मुख्य आपदा
याक – लद्दाख
झूम – पूर्वोत्तर
बुग्याल – घास मैदान
ढलवाँ छत – बर्फ हेतु
पर्यटन – मुख्य आय
सेब – हिमाचल/J&K
पलायन – युवा मैदान ओर
मृदा अपरदन – ढलान+वर्षा
शिवालिक – बाहरी हिमालय