जल संचयन : पारंपरिक एवं आधुनिक विधियाँ
NCERT Based · Exam Specialजल संचयन (Water Harvesting) – वर्षा जल को एकत्रित एवं संग्रहित करना – NCERT।
जल संचयन का उद्देश्य – NCERT – जल की
उपलब्धता बढ़ाना, भूजल स्तर बढ़ाना, जल संकट से बचाव।
जल संचयन के लाभ – NCERT – भूजल पुनर्भरण,
बाढ़ नियंत्रण, मृदा अपरदन रोकना, पानी की बचत।
जल संचयन दो प्रकार – पारंपरिक (प्राचीन) एवं
आधुनिक – NCERT।
पारंपरिक जल संचयन – NCERT – प्राचीन भारत में
विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु एवं भूगोल के अनुसार विकसित विधियाँ।
तालाब (Ponds) – सबसे प्राचीन एवं सामान्य विधि – वर्षा जल संग्रहण – NCERT।
बावड़ी (Stepwell) – NCERT – सीढ़ीदार कुएँ –
राजस्थान, गुजरात में प्रचलित – जल संग्रहण एवं शीतलन।
बावड़ी की विशेषता – गहरे कुएँ – सीढ़ियों से जल स्तर तक पहुँच – NCERT।
खड़िन (Khadin) – NCERT – राजस्थान की
पारंपरिक विधि – बाँध बनाकर वर्षा जल रोकना – कृषि हेतु।
जोहड़ (Johad) – NCERT – राजस्थान के गाँवों
में छोटे तालाब – वर्षा जल संचयन एवं भूजल पुनर्भरण।
बंध (Bandh) – NCERT – मध्य प्रदेश, उत्तर
प्रदेश – नालों/नदियों पर छोटे बाँध – सिंचाई हेतु।
कुंड (Kund) – NCERT – राजस्थान की पारंपरिक
विधि – वर्षा जल संग्रहण हेतु गोलाकार टैंक।
नाड़ी (Nadi) – NCERT – राजस्थान – छोटे जलाशय
– पशुओं एवं सिंचाई हेतु।
हित (Hit) – NCERT – गुजरात – बावड़ी जैसी
संरचना – भूजल संग्रहण।
ज़िंग (Zing) – NCERT – जम्मू-कश्मीर – बर्फ
पिघलने से जल संग्रहण।
कुल (Kul) – NCERT – हिमाचल प्रदेश – छोटी
नहरें – पहाड़ी क्षेत्रों में सिंचाई।
फूल (Phool) – NCERT – हिमाचल – कुल जैसी विधि
– वर्षा जल संचयन।
कुहुल (Kuhul) – NCERT – हिमाचल – पहाड़ी
क्षेत्रों में जल संचयन हेतु नहरें।
राजस्थान – NCERT – बावड़ी, जोहड़, कुंड,
नाड़ी, खड़िन – शुष्क जलवायु के अनुकूल।
हिमाचल प्रदेश – NCERT – कुल, फूल, कुहुल –
पहाड़ी क्षेत्रों में जल संचयन।
गुजरात – NCERT – हित, बावड़ी, तालाब – जल
संग्रहण की पारंपरिक विधियाँ।
तमिलनाडु – NCERT – एरी (Eri) – तालाब एवं नहर
प्रणाली – सिंचाई हेतु।
कर्नाटक – NCERT – कट्टा (Katta) – छोटे बाँध
– वर्षा जल संग्रहण।
केरल – NCERT – सुरंगम (Surangam) – भूमिगत जल
संग्रहण – पहाड़ी क्षेत्रों में।
आधुनिक जल संचयन – NCERT – वैज्ञानिक एवं
तकनीकी विधियाँ – अधिक कुशल एवं प्रभावी।
रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (Rain Water Harvesting) – NCERT – छतों से वर्षा जल एकत्रित करना – सबसे आम आधुनिक विधि।
छत जल संचयन – NCERT – इमारतों की छतों से जल
एकत्रित कर टैंकों/कुओं में संग्रहित करना।
भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) – NCERT
– वर्षा जल को भूमिगत जल स्तर तक पहुँचाना।
रिचार्ज पिट (Recharge Pit) – NCERT – गड्ढे
में जल एकत्रित कर भूजल पुनर्भरण हेतु।
रिचार्ज ट्रेंच (Recharge Trench) – NCERT –
लंबी खाइयाँ – जल को भूमिगत जल स्तर तक पहुँचाना।
चेक डैम (Check Dam) – NCERT – छोटे बाँध – जल
के प्रवाह को रोकना एवं भूजल पुनर्भरण।
परकोलेशन टैंक (Percolation Tank) – NCERT –
जल को मिट्टी में रिसने देना – भूजल पुनर्भरण।
ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) – NCERT – जल
को सीधे जड़ों तक पहुँचाना – जल की बचत।
स्प्रिंकलर सिंचाई – NCERT – फुहारों द्वारा
सिंचाई – जल की बचत एवं समान वितरण।
बाँध (Dam) – NCERT – नदी पर बड़ा बाँध – जल
भंडारण, सिंचाई, विद्युत उत्पादन।
वनीकरण (Afforestation) – NCERT – वृक्षारोपण
– मृदा जल धारण क्षमता बढ़ाना, वाष्पीकरण कम करना।
समोच्च रेखा जुताई (Contour Ploughing) – NCERT – ढलान पर जुताई – जल अपवाह रोकना, मृदा अपरदन कम।
टेरेस फार्मिंग (Terrace Farming) – NCERT –
सीढ़ीदार खेत – पहाड़ी क्षेत्रों में जल एवं मृदा संरक्षण।
मल्चिंग (Mulching) – NCERT – मिट्टी पर परत
बिछाना – वाष्पीकरण कम करना, नमी बनाए रखना।
जल संकट – NCERT – विश्व के कई भागों में जल
की कमी – संचयन एवं संरक्षण आवश्यक।
भारत में जल संकट – NCERT – राजस्थान, गुजरात,
महाराष्ट्र, कर्नाटक – सबसे अधिक प्रभावित।
जल संचयन के प्रति जागरूकता – NCERT – सरकारी
योजनाएँ, जल दिवस, जनजागरूकता अभियान।
बावड़ी →
राजस्थान (सीढ़ीदार कुआँ)
जोहड़ →
राजस्थान (छोटे तालाब)
खड़िन →
राजस्थान (बाँध)
कुल →
हिमाचल (नहरें)
हित →
गुजरात (बावड़ी जैसी)
एरी →
तमिलनाडु (तालाब)
रेन वॉटर
हार्वेस्टिंग → छत जल संचयन
रिचार्ज
पिट → भूजल पुनर्भरण
चेक डैम →
जल प्रवाह रोकना
ड्रिप
सिंचाई → जल बचत
वनीकरण →
जल धारण क्षमता
समोच्च
जुताई → मृदा अपरदन रोकना
परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण NCERT तथ्य (Quick Revision)
बावड़ी – राजस्थान (सीढ़ीदार
कुआँ)
जोहड़ – राजस्थान (छोटे
तालाब)
खड़िन – राजस्थान (बाँध)
कुल – हिमाचल (नहरें)
हित – गुजरात
एरी – तमिलनाडु
रेन वॉटर – छत जल संचयन
रिचार्ज पिट – भूजल
पुनर्भरण
चेक डैम – जल प्रवाह रोकना
ड्रिप सिंचाई – जल बचत
वनीकरण – जल धारण क्षमता
समोच्च जुताई – मृदा अपरदन
तालाब – सबसे प्राचीन विधि
जल संचयन – भूजल स्तर बढ़ाना
जल संकट – राजस्थान, गुजरात
टेरेस फार्मिंग – पहाड़ी क्षेत्र