वाष्पीकरण, संघनन एवं जल चक्र

Exam Special · NCERT Based
वाष्पीकरण, संघनन, वर्षा, जल चक्र एवं संबंधित प्रक्रियाएँ 90+ facts
वाष्पीकरण (Evaporation) – द्रव का वाष्प में बदलना – किसी भी तापमान पर सतह से।
क्वथन (Boiling) – पूरे द्रव में बुलबुले – निश्चित तापमान (पानी 100°C, 1 atm)।
अंतर – वाष्पीकरण सतह से, धीमा; क्वथन पूरे आयतन में, तीव्र।
प्रभावित कारक – तापमान↑, सतह क्षेत्र↑, हवा की गति↑, आर्द्रता↓ → वाष्पीकरण↑।
गुप्त ऊष्मा – वाष्पीकरण के लिए आवश्यक ऊष्मा – तापमान बढ़ाए बिना।
शीतलन प्रभाव – पसीना वाष्पित होकर शरीर ठंडा करता है।
समुद्र से वाष्पीकरण – जल चक्र का मुख्य स्रोत – सूर्य ऊर्जा से।
वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) – पौधों की पत्तियों से जल वाष्प का निकलना।
एवापोट्रांसपिरेशन – वाष्पीकरण + वाष्पोत्सर्जन – कुल जल हानि।
सूखी कपड़े – वाष्पीकरण से सूखना – धूप एवं हवा में तेज।
नमक उत्पादन – समुद्री जल वाष्पीकरण से नमक।
कड़ाह में नमक – जल वाष्पित → नमक पीछे रह जाता।
संघनन (Condensation) – वाष्प का द्रव में बदलना – ठंडा होने पर।
ओस (Dew) – रात में ठंडी सतहों पर जल की बूंदें – संघनन।
ओस बिंदु (Dew Point) – वह तापमान जिस पर वाष्प संघनित होने लगे।
कोहरा (Fog) – भूमि के निकट हवा में संघनित जल बूंदें।
बादल (Clouds) – ऊँचाई पर संघनित जल बूंदें/बर्फ क्रिस्टल।
बादल निर्माण – गर्म हवा ऊपर उठ→फैल→ठंडी→संघनन→बादल।
पाला (Frost) – 0°C से नीचे संघनन – बर्फ के क्रिस्टल।
शीशे पर पानी – ठंडे गिलास पर हवा की वाष्प संघनित।
संघनन नाभिक – धूल, नमक कण – बूंद बनने के केंद्र।
गुप्त ऊष्मा मुक्त – संघनन पर ऊष्मा निकलती है – बादलों को ऊर्जा।
वर्षा (Precipitation) – बादलों से जल का बूंद/बर्फ रूप में गिरना।
वर्षा की बूंदें – छोटी बूंदें मिलकर बड़ी → गुरुत्वाकर्षण से गिरना।
बरसात (Rain) – द्रव बूंदों के रूप में।
हिम (Snow) – बर्फ क्रिस्टल – ठंडे क्षेत्रों में।
ओला (Hail) – बर्फ के गोले – तेज ऊर्ध्व हवाओं में परत दर परत।
फुहार (Drizzle) – बहुत छोटी बूंदें।
पारंपरिक वर्षा – संवहनीय, पर्वतीय (orographic), चक्रवाती।
मानसून – भारत में मौसमी पवन से भारी वर्षा।
वर्षा मापक – रेन गेज – मिमी में माप।
जल चक्र (Water Cycle / Hydrological Cycle) – प्रकृति में जल का निरंतर चक्र।
मुख्य प्रक्रियाएँ – वाष्पीकरण → संघनन → वर्षा → अपवाह/रिसाव → पुनः वाष्पीकरण।
सूर्य ऊर्जा – जल चक्र को चलाने वाली मुख्य शक्ति।
अपवाह (Runoff) – वर्षा जल का नदियों/झीलों में बहना।
रिसाव (Infiltration) – जल का मिट्टी में प्रवेश → भूजल।
भूजल (Groundwater) – भूमिगत जल भंडार – कुएँ, झरने।
जल स्तर (Water Table) – भूजल की ऊपरी सतह।
स्रोत / स्प्रिंग – भूजल का प्राकृतिक निकलना।
नदी प्रणाली – वर्षा → अपवाह → नदी → समुद्र।
जल संरक्षण – चक्र संतुलित रखने के लिए वन, वर्षा जल संचयन।
वन की भूमिका – वाष्पोत्सर्जन, वर्षा आकर्षण, अपवाह नियंत्रण।
महासागर – पृथ्वी के जल का ≈97% – मुख्य वाष्पीकरण स्रोत।
मीठा जल – ≈2.5% – हिमनद, भूजल, झील, नदी।
उपलब्ध मीठा जल – बहुत कम प्रतिशत – नदियाँ, झीलें।
जल की तीन अवस्थाएँ – ठोस (बर्फ), द्रव (पानी), गैस (वाष्प)।
पिघलना (Melting) – ठोस → द्रव – 0°C पर (1 atm)।
जमना (Freezing) – द्रव → ठोस।
sublimation – ठोस → गैस (बिना द्रव) – बर्फ से वाष्प।
deposition – गैस → ठोस – पाला बनना।
गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) – अवस्था परिवर्तन पर अवशोषित/मुक्त ऊष्मा।
विशिष्ट ऊष्मा – पानी की उच्च – तापमान धीरे बदलता – जलवायु संतुलन।
आर्द्रता (Humidity) – हवा में जल वाष्प की मात्रा।
सापेक्ष आर्द्रता – दिए तापमान पर धारण क्षमता का प्रतिशत।
निरपेक्ष आर्द्रता – प्रति इकाई आयतन वाष्प की वास्तविक मात्रा।
हाइग्रोमीटर – आर्द्रता मापने का यंत्र।
शुष्क हवा – वाष्पीकरण तेज – कपड़े जल्दी सूखते।
नम हवा – वाष्पीकरण धीमा – पसीना कम सूखता – असुविधा।
पसीना – वाष्पीकरण से शरीर ठंडा।
मटके का पानी ठंडा – सतह से वाष्पीकरण।
एसी / फ्रिज – संघनन से पानी निकलता (ड्रेन)।
भाप से बर्तन ढक्कन – संघनन – पानी की बूंदें।
सुबह घास पर ओस – रात के ठंडे तापमान पर संघनन।
बादल → वर्षा – जल चक्र का दृश्य रूप।
वाष्पीकरण → द्रव → वाष्प (सतह)
संघनन → वाष्प → द्रव
क्वथन → 100°C (पानी)
ओस → रात में संघनन
वाष्पोत्सर्जन → पौधों से
जल चक्र शक्ति → सूर्य
भूजल → रिसाव से
महासागर जल → ≈97%
मीठा जल → ≈2.5%
पसीना ठंडक → वाष्पीकरण
बादल → संघनन
गुप्त ऊष्मा → अवस्था परिवर्तन

परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

वाष्पीकरण – द्रव→वाष्प (सतह)
संघनन – वाष्प→द्रव
क्वथन – 100°C पानी
ओस – रात संघनन
वाष्पोत्सर्जन – पौधे
जल चक्र – सूर्य संचालित
वर्षा – अवक्षेपण
भूजल – रिसाव से
महासागर – 97% जल
मीठा जल – ≈2.5%
पसीना – शीतलन
बादल – संघनन
गुप्त ऊष्मा – अवस्था बदल
आर्द्रता – वाष्प मात्रा
मटका ठंडा – वाष्पीकरण
अपवाह – नदी की ओर