कृषि पद्धतियाँ
NCERT Based · Exam Specialकृषि (Agriculture) – भोजन, चारा, रेशा एवं अन्य उत्पादों के लिए पौधों एवं
जानवरों का पालन-पोषण।
कृषि विज्ञान – कृषि से संबंधित वैज्ञानिक अध्ययन को
एग्रोनॉमी (Agronomy) कहते हैं।
भारत में कृषि – लगभग 58% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है (NCERT
तथ्य)।
फसल उत्पादन के मुख्य चरण – (1) भूमि तैयार करना, (2) बुआई, (3) खाद/उर्वरक,
(4) सिंचाई, (5) निराई-गुड़ाई, (6) कटाई, (7) भंडारण।
भूमि तैयार करना – जुताई (Ploughing) – मिट्टी को पलटना, ढीला करना, समतल करना
– हल (Plough) का उपयोग।
जुताई के लाभ – मिट्टी ढीली होती है, जड़ें आसानी से प्रवेश करती हैं, वातन
बढ़ता है, खरपतवार नष्ट होते हैं।
हैरो (Harrow) – जुताई के बाद मिट्टी को समतल करने एवं ढीलों को तोड़ने का
उपकरण।
बुआई (Sowing) – बीजों को मिट्टी में डालना – बीज बोने की मशीन (Seed
Drill) का उपयोग – NCERT महत्वपूर्ण।
बीज ड्रिल – बीजों को उचित गहराई एवं दूरी पर बोता है – बीजों की बचत करता
है।
छिड़काव विधि (Broadcasting) – बीजों को हाथ से फैलाना – पुरानी विधि, बीज
अधिक लगते हैं।
खाद (Manure) – जैविक पदार्थ (पौधे/जानवरों के अपशिष्ट) – मिट्टी की संरचना
एवं उर्वरता बढ़ाता है – NCERT महत्वपूर्ण।
उर्वरक (Fertilizer) – रासायनिक पदार्थ – पौधों को सीधे पोषक तत्व प्रदान करते
हैं – NCERT।
जैविक खाद – कम्पोस्ट, वर्मी-कम्पोस्ट, हरी खाद (Green Manure) – मिट्टी को
स्वस्थ रखती है।
हरी खाद – मिट्टी में हरी फसलों (जैसे – सनई, ढैंचा) को दबाना – नाइट्रोजन की
पूर्ति करती है।
NPK उर्वरक – नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटाश (K) –
तीनों प्रमुख पोषक तत्व – बार-बार।
यूरिया – सबसे अधिक नाइट्रोजन (46%) वाला उर्वरक – NCERT महत्वपूर्ण।
उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग – मिट्टी की अम्लता बढ़ाता है, जल प्रदूषण
(यूट्रोफिकेशन) का कारण बनता है।
सिंचाई (Irrigation) – फसलों को पानी देना – वर्षा पर निर्भरता
कम करती है – NCERT।
सिंचाई के स्रोत – नहरें, कुएँ, ट्यूबवेल, तालाब, नदियाँ, बाँध।
आधुनिक सिंचाई विधियाँ – स्प्रिंकलर सिंचाई
(Sprinkler System) एवं बूंद-बूंद सिंचाई (Drip System) – NCERT महत्वपूर्ण।
स्प्रिंकलर सिंचाई – पानी को फुहारों (Sprinklers) द्वारा छिड़कना – असमान
भूमि के लिए उपयुक्त।
बूंद-बूंद सिंचाई (Drip Irrigation) – जल को बूंद-बूंद करके जड़ों तक पहुँचाना
– जल की अधिकतम बचत – NCERT।
पारम्परिक सिंचाई – नहरें (Canals), नालियाँ (Furrows), बाढ़ सिंचाई (Flood
Irrigation) – जल की बर्बादी अधिक।
निराई (Weeding) – खरपतवार (Weeds) को हटाना – NCERT।
खरपतवार – अवांछित पौधे जो फसलों के साथ उगते हैं – पोषक तत्वों, जल, प्रकाश
के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
निराई के उपाय – हाथ से निराई, कल्टीवेटर, खरपतवारनाशी (Weedicides) – NCERT।
खरपतवारनाशी (Weedicides) – रासायनिक पदार्थ – खरपतवार नष्ट करते हैं – जैसे –
2,4-D।
फसल सुरक्षा – कीट, रोग, खरपतवार से फसल की रक्षा – कीटनाशक
(Pesticides), कवकनाशी (Fungicides) का उपयोग।
एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) – जैविक, रासायनिक एवं सांस्कृतिक विधियों का
समन्वित उपयोग।
कटाई (Harvesting) – पकी फसल को खेत से काटना – NCERT।
कटाई के उपकरण – दरांती (Sickle), कम्बाइन हार्वेस्टर (Combine Harvester) –
आधुनिक मशीन।
कम्बाइन हार्वेस्टर – कटाई एवं फसल की थ्रेसिंग एक साथ करता है – समय एवं श्रम
बचाता है।
थ्रेसिंग – कटी हुई फसल से अनाज को अलग करना – थ्रेसर मशीन
द्वारा।
भंडारण – अनाज को सुरक्षित रखना – NCERT
महत्वपूर्ण।
भंडारण के स्थान – साइलो (Silos), गोदाम, कोठियाँ – अनाज को नमी, कीट, चूहों
से बचाना।
फसल की कटाई के बाद का प्रबंधन – सुखाना, साफ करना, ग्रेडिंग, पैकिंग,
भंडारण।
आधुनिक कृषि – उच्च उपज देने वाली किस्में (HYV),
उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई, मशीनीकरण – NCERT।
हरित क्रांति – 1960 के दशक – HYV बीज, उर्वरक, सिंचाई –
खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि – NCERT।
HYV बीज (High Yielding Variety) – अधिक उपज देने वाले बीज – जैसे –
मेक्सिकन गेहूँ, IR8 चावल।
संकर बीज (Hybrid Seeds) – दो विभिन्न किस्मों के क्रॉस से – अधिक उत्पादन,
रोग प्रतिरोध।
जैविक कृषि (Organic Farming) – बिना रासायनिक उर्वरक/कीटनाशक के –
जैविक खाद, फसल चक्र, जैविक कीट नियंत्रण – NCERT।
प्राकृतिक कृषि – जीवाणु, केंचुए, कवक आदि का उपयोग – मिट्टी की उर्वरता बनाए
रखना।
सटीक कृषि (Precision Farming) – GPS, GIS, सेंसर का उपयोग – फसल की आवश्यकता
के अनुसार उर्वरक/पानी।
फसल चक्र (Crop Rotation) – एक ही खेत में अलग-अलग फसलें उगाना – मिट्टी की
उर्वरता बनाए रखता है, रोगों को कम करता है – NCERT।
बहु-फसल (Mixed Cropping) – एक ही खेत में दो या अधिक फसलें एक साथ – जोखिम
कम।
एग्रोनॉमी – कृषि विज्ञान – फसल उत्पादन का अध्ययन।
हॉर्टिकल्चर – बागवानी विज्ञान – फल, सब्जियाँ, फूलों का अध्ययन।
सिल्विकल्चर – वन विज्ञान – वृक्षारोपण एवं वन प्रबंधन।
ओलेरीकल्चर – सब्जी उत्पादन विज्ञान।
पोमोलॉजी – फलों का अध्ययन।
प्रकाश संश्लेषण – पौधों द्वारा सूर्य प्रकाश, CO₂ एवं जल से भोजन बनाना –
कृषि का आधार – NCERT।
पौधों के पोषक तत्व – 16 आवश्यक तत्व – N, P, K (प्रमुख); S, Ca, Mg
(माध्यमिक); Fe, Zn, Mn, Cu, B, Mo, Cl (सूक्ष्म) – NCERT।
नाइट्रोजन स्थिरीकरण – राइजोबियम जीवाणु द्वारा – दलहनी
पौधों की जड़ों में – NCERT।
दलहनी फसलें – मूंग, उड़द, चना, तुअर – नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती हैं – मिट्टी
को उर्वर बनाती हैं।
भारत की मुख्य खाद्य फसलें – चावल, गेहूँ, मक्का, ज्वार, बाजरा – NCERT।
चावल – जलवायु – उच्च तापमान, अधिक वर्षा (100 cm से अधिक) –
NCERT।
गेहूँ – जलवायु – शीतल एवं शुष्क जलवायु – सर्दियों में
बुआई।
गन्ना – जलवायु – उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय – अधिक
पानी की आवश्यकता।
कपास – जलवायु – शुष्क एवं गर्म जलवायु – काली मिट्टी
(रेगुर) में अच्छी उपज।
कृषि
विज्ञान → एग्रोनॉमी
भूमि
तैयार करना → जुताई (Ploughing)
बीज बोने
की मशीन → Seed Drill
जैविक खाद
→ कम्पोस्ट, वर्मी-कम्पोस्ट, हरी खाद
सबसे अधिक
N वाला उर्वरक → यूरिया (46%)
जल बचाने
वाली सिंचाई → बूंद-बूंद सिंचाई
खरपतवारनाशी → 2,4-D
हरित
क्रांति → HYV बीज, उर्वरक, सिंचाई
जैविक
कृषि → बिना रासायनिक
नाइट्रोजन
स्थिरीकरण → राइजोबियम (दलहनी पौधे)
NPK →
नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश
परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण NCERT तथ्य (Quick Revision)
जुताई – भूमि तैयार करना
Seed Drill – बीज बोने की
मशीन
यूरिया – 46% N
जैविक खाद – कम्पोस्ट, वर्मी
ड्रिप सिंचाई – जल बचत
खरपतवारनाशी – 2,4-D
हरित क्रांति – HYV बीज
जैविक कृषि – रासायनिक
मुक्त
राइजोबियम – N₂ स्थिरीकरण
NPK – N, P, K
दलहनी – नाइट्रोजन बढ़ाती
हैं
एग्रोनॉमी – कृषि विज्ञान
कम्बाइन – कटाई + थ्रेसिंग
फसल चक्र – उर्वरता बनाए
रखना
गेहूँ – शीतल जलवायु
चावल – अधिक वर्षा (100 cm+)