ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन
Environment · Exam Specialग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) – पृथ्वी के औसत तापमान में लगातार वृद्धि
होना – सबसे महत्वपूर्ण।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) – पृथ्वी की जलवायु में दीर्घकालिक परिवर्तन
– तापमान, वर्षा, मौसम पैटर्न में बदलाव।
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण – ग्रीनहाउस प्रभाव
(Greenhouse Effect) – बार-बार।
पृथ्वी का औसत तापमान – 15°C (ग्रीनहाउस प्रभाव के बिना -18°C होता) – महत्वपूर्ण।
ग्रीनहाउस प्रभाव – पृथ्वी के वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों द्वारा ऊष्मा को
रोकने की प्रक्रिया – बार-बार।
ग्रीनहाउस प्रभाव प्राकृतिक एवं मानवजनित दोनों होता है –
महत्वपूर्ण।
प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव – पृथ्वी को जीवन योग्य बनाता है।
मानवजनित ग्रीनहाउस प्रभाव – मानव गतिविधियों से बढ़ा हुआ – वैश्विक ऊष्मीकरण
का मुख्य कारण – बार-बार।
प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें (GHGs) – CO₂, CH₄, N₂O, CFC, O₃,
जलवाष्प – सबसे महत्वपूर्ण।
CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड) – सबसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैस –
जीवाश्म ईंधनों के दहन से – बार-बार।
CO₂ का
वैश्विक ऊष्मीकरण में योगदान – लगभग 76% – महत्वपूर्ण।
CH₄ (मीथेन) – CO₂ से 25-28 गुना अधिक प्रभावी – कृषि,
अपशिष्ट, गैस रिसाव से – बार-बार।
N₂O (नाइट्रस ऑक्साइड) – CO₂ से 298 गुना अधिक प्रभावी –
उर्वरकों, औद्योगिक प्रक्रियाओं से – महत्वपूर्ण।
CFC (क्लोरोफ्लोरोकार्बन) – CO₂ से 1000+ गुना प्रभावी –
ओजोन क्षरण भी करते हैं – बार-बार।
जलवाष्प (H₂O) – सबसे अधिक मात्रा में ग्रीनहाउस गैस – लेकिन मानवजनित नहीं –
महत्वपूर्ण।
ग्रीनहाउस गैसों की ग्लोबल वार्मिंग क्षमता (GWP) – CO₂ = 1, CH₄ = 28, N₂O =
298, CFC-12 = 10,200 – महत्वपूर्ण।
ग्लोबल वार्मिंग के प्रमुख कारण – परीक्षा में
बार-बार पूछे जाते हैं।
जीवाश्म ईंधनों का दहन – कोयला, पेट्रोल, डीजल, CNG – CO₂ का प्रमुख स्रोत –
बार-बार।
वनों की कटाई (Deforestation) – CO₂ अवशोषण में कमी – बार-बार।
कृषि गतिविधियाँ – CH₄ (धान के खेत, पशुपालन), N₂O (उर्वरक) – महत्वपूर्ण।
औद्योगिक गतिविधियाँ – सीमेंट उत्पादन, रसायन उद्योग, खनन।
अपशिष्ट एवं लैंडफिल – CH₄ उत्सर्जन का स्रोत।
परिवहन क्षेत्र – वाहनों से CO₂, NOx, सूक्ष्म कण – महत्वपूर्ण।
ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव – परीक्षा में सबसे अधिक
पूछे जाते हैं।
हिमनदों का पिघलना – ग्रीनलैंड, अंटार्कटिका, हिमालय – बार-बार।
समुद्र स्तर में वृद्धि – तटीय क्षेत्रों के डूबने का खतरा – बार-बार।
अत्यधिक मौसमी घटनाएँ – चक्रवात, बाढ़, सूखा, गर्मी की लहरें – बार-बार।
जैव विविधता पर प्रभाव – प्रजातियों का विलुप्त होना, प्रवासन पैटर्न में
परिवर्तन – महत्वपूर्ण।
कृषि पर प्रभाव – फसलों की उत्पादकता में परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा खतरे में –
महत्वपूर्ण।
जल संकट – हिमनदों के पिघलने से जलापूर्ति प्रभावित – महत्वपूर्ण।
महासागरीय अम्लीकरण – CO₂ के जल में घुलने से – समुद्री जीवन प्रभावित – महत्वपूर्ण।
स्वास्थ्य पर प्रभाव – गर्मी से संबंधित बीमारियाँ, वायु प्रदूषण में
वृद्धि।
औद्योगिक क्रांति के बाद पृथ्वी का तापमान ≈ 1.1°C बढ़ चुका है – बार-बार।
सबसे गर्म वर्ष – 2016, 2020, 2023 (दर्ज इतिहास में) – महत्वपूर्ण।
वैश्विक ऊष्मीकरण वर्तमान दर – लगभग 0.2°C प्रति दशक।
CO₂
का वर्तमान स्तर – ≈ 420 ppm (प्री-औद्योगिक 280 ppm) – बार-बार।
IPCC (Intergovernmental Panel on Climate Change) – संयुक्त राष्ट्र की
जलवायु परिवर्तन पर समिति – बार-बार।
UNFCCC – संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (1992) – महत्वपूर्ण।
क्योटो प्रोटोकॉल (1997/2005) – विकसित देशों के लिए GHG उत्सर्जन कटौती –
बार-बार।
पेरिस समझौता (2015/2016) – तापमान वृद्धि को 2°C से कम,
प्रयास 1.5°C पर – सबसे महत्वपूर्ण।
पेरिस समझौते में 197 देश शामिल हैं – महत्वपूर्ण।
ग्लासगो जलवायु सम्मेलन (COP26) – 2021 – कोयला चरणबद्ध कटौती पर सहमति –
बार-बार।
COP27 (2022, शर्म अल-शेख, मिस्र) – जलवायु वित्त पर चर्चा – महत्वपूर्ण।
COP28 (2023, दुबई, UAE) – फॉसिल फ्यूल से बाहर निकलने पर सहमति – बार-बार।
भारत की प्रतिबद्धता – 2030 तक नेट जीरो (2070) – बार-बार।
इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) – भारत एवं फ्रांस द्वारा स्थापित – महत्वपूर्ण।
राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) – 2008 – 8 मिशन – बार-बार।
NAPCC के
8 मिशन – सौर, ऊर्जा दक्षता, जल, हिमालय, हरित भारत, सतत कृषि, ज्ञान, तटीय क्षेत्र – महत्वपूर्ण।
ग्लोबल वार्मिंग शमन के उपाय – परीक्षा में बार-बार
पूछे जाते हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा – सौर, पवन, जल विद्युत – CO₂ उत्सर्जन कम करना – बार-बार।
ऊर्जा दक्षता – कम ऊर्जा खपत वाले उपकरण – LED, ऊर्जा-कुशल इमारतें – महत्वपूर्ण।
वन संरक्षण एवं वृक्षारोपण – CO₂ अवशोषण बढ़ाना – बार-बार।
कार्बन कैप्चर एवं स्टोरेज (CCS) – CO₂ को पकड़कर भूमिगत संग्रहित करना –
महत्वपूर्ण।
सतत कृषि – उर्वरकों का कम उपयोग, जैविक खेती – N₂O में कमी – महत्वपूर्ण।
सार्वजनिक परिवहन एवं इलेक्ट्रिक वाहन – परिवहन से उत्सर्जन में कमी – महत्वपूर्ण।
अपशिष्ट प्रबंधन – जैव-गैस उत्पादन, पुनर्चक्रण – CH₄ उत्सर्जन कम करना –
महत्वपूर्ण।
अनुकूलन (Adaptation) – जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के उपाय –
महत्वपूर्ण।
जल प्रबंधन – वर्षा जल संचयन, सिंचाई में सुधार।
सूखा-प्रतिरोधी फसलें – जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बीजों का विकास।
तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा – समुद्र स्तर वृद्धि के लिए बाँध, तटबंध।
एल नीनो – प्रशांत महासागर में तापमान वृद्धि – वैश्विक मौसम प्रभावित – बार-बार।
ला नीना – एल नीनो के विपरीत – प्रशांत महासागर में ठंडा पानी – बार-बार।
कार्बन बाज़ार – उत्सर्जन व्यापार प्रणाली – कार्बन क्रेडिट – महत्वपूर्ण।
हरित हाइड्रोजन – नवीकरणीय ऊर्जा से बना हाइड्रोजन – स्वच्छ ईंधन – महत्वपूर्ण।
हीटवेव (लू) – अत्यधिक गर्मी की लहरें – स्वास्थ्य के लिए खतरनाक – बार-बार।
प्रवाल भित्ति विरंजन (Coral Bleaching) – समुद्री तापमान वृद्धि से – महत्वपूर्ण।
ग्लोबल
वार्मिंग → तापमान वृद्धि
ग्रीनहाउस
प्रभाव → GHGs द्वारा ऊष्मा रोकना
प्रमुख
GHG → CO₂, CH₄, N₂O, CFC
CO₂
योगदान → 76% (सबसे अधिक)
CH₄
प्रभाव → CO₂ का 25-28 गुना
तापमान
वृद्धि → 1.1°C (औद्योगिक क्रांति से)
CO₂ स्तर
→ 420 ppm (वर्तमान)
पेरिस
समझौता → 2015 – 1.5°C लक्ष्य
IPCC →
जलवायु परिवर्तन समिति
क्योटो
प्रोटोकॉल → 1997/2005
भारत नेट
जीरो → 2070
NAPCC →
2008 – 8 मिशन
परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)
ग्लोबल वार्मिंग – तापमान
वृद्धि
ग्रीनहाउस प्रभाव – GHGs
द्वारा ऊष्मा
प्रमुख GHG – CO₂, CH₄, N₂O,
CFC
CO₂ योगदान – 76%
CH₄ प्रभाव – 25-28 गुना
तापमान वृद्धि – 1.1°C
CO₂ स्तर – 420 ppm
पेरिस समझौता – 2015
(1.5°C)
IPCC – UN जलवायु समिति
क्योटो – 1997/2005
भारत नेट जीरो – 2070
NAPCC – 2008 (8 मिशन)
नवीकरणीय ऊर्जा – सौर, पवन
वन संरक्षण – CO₂ अवशोषण
एल नीनो – प्रशांत महासागर
हीटवेव – लू (गर्मी की लहर)