प्रकाश : परावर्तन एवं विक्षेपण

Optics · Exam Special
प्रकाश – ऊर्जा का एक रूप है जो दृष्टि की अनुभूति उत्पन्न करता है।
प्रकाश – विद्युत-चुंबकीय तरंग (Electromagnetic Wave) है – परीक्षा में बार-बार पूछा गया
प्रकाश का वेग निर्वात में – 3 × 10⁸ m/s (लगभग 299,792,458 m/s)।
प्रकाश का वेग – अधिकतम निर्वात में, न्यूनतम गहन माध्यम में – महत्वपूर्ण
जल में प्रकाश का वेग – निर्वात का ≈ 3/4 (0.75c)।
काँच में प्रकाश का वेग – निर्वात का ≈ 2/3 (0.67c)।
प्रकाश – अनुप्रस्थ तरंग (Transverse Wave) है – ध्वनि अनुदैर्ध्य होती है
प्रकाश के संचरण हेतु माध्यम आवश्यक नहीं – यह निर्वात में भी चलता है।
प्रकाश का प्रकाश-वर्ष (Light Year) – खगोलीय दूरी का मात्रक, लगभग 9.46 × 10¹⁵ m
सूर्य का प्रकाश – पृथ्वी तक पहुँचने में ≈ 8 मिनट 20 सेकंडबार-बार पूछा गया
परावर्तन – प्रकाश का किसी सतह से टकराकर वापस लौटना
आपतित किरण – सतह पर पड़ने वाली किरण।
परावर्तित किरण – सतह से लौटने वाली किरण।
अभिलंब (Normal) – आपतन बिंदु पर सतह पर लंबवत रेखा।
आपतन कोण – आपतित किरण और अभिलंब के बीच का कोण (∠i)।
परावर्तन कोण – परावर्तित किरण और अभिलंब के बीच का कोण (∠r)।
परावर्तन का प्रथम नियम – आपतित किरण, परावर्तित किरण एवं अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
परावर्तन का द्वितीय नियम∠i = ∠rसबसे महत्वपूर्ण
समतल दर्पण – सपाट परावर्तक सतह; प्रतिबिम्ब आभासी, समान आकार, उल्टा (बायाँ-दायाँ विपरीत)।
समतल दर्पण में – प्रतिबिम्ब की दूरी = वस्तु की दूरीप्रायः पूछा गया
समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब का आकार – वस्तु के बराबर (आवर्धन = 1)।
समतल दर्पण में पार्श्व विपर्यय (Lateral Inversion) – बायाँ-दायाँ उलटा।
गोलीय दर्पण – दो प्रकार – उत्तल (Convex) एवं अवतल (Concave)।
अवतल दर्पणअभिसारी (Converging) दर्पण; किरणें अभिसरित होती हैं – बार-बार
उत्तल दर्पणअपसारी (Diverging) दर्पण; किरणें अपसरित होती हैं – बार-बार
अवतल दर्पण – वास्तविक एवं आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिम्ब बना सकता है।
उत्तल दर्पण – सदैव आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है – महत्वपूर्ण
अवतल दर्पण के उपयोग – टॉर्च, वाहन हैडलाइट, शेविंग मिरर, दंत दर्पण, सोलर कुकर
उत्तल दर्पण के उपयोग – वाहनों के साइड मिरर, सुरक्षा दर्पण, ATM मशीनें (चौड़ा दृश्य क्षेत्र)।
दर्पण का सूत्र1/f = 1/v + 1/uसबसे महत्वपूर्ण सूत्र
दर्पण का आवर्धनm = -v/u (ऋण चिह्न वास्तविक प्रतिबिम्ब के लिए)।
फोकस दूरी (f) – अवतल दर्पण के लिए ऋणात्मक, उत्तल दर्पण के लिए धनात्मकप्रायः पूछा गया
अपवर्तन – प्रकाश का एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करने पर दिशा बदलना
स्नेल का नियमμ₁ sin i = μ₂ sin rबार-बार पूछा गया
प्रकाश सघन माध्यम में प्रवेश करे तो – अभिलंब की ओर झुकता है।
प्रकाश विरल माध्यम में प्रवेश करे तो – अभिलंब से दूर झुकता है।
अपवर्तनांक (Refractive Index) – μ = c/vमहत्वपूर्ण सूत्र
जल का अपवर्तनांक ≈ 1.33परीक्षा में बार-बार
काँच का अपवर्तनांक ≈ 1.5बार-बार
हीरे का अपवर्तनांक ≈ 2.42 (सर्वाधिक) – महत्वपूर्ण
हवा का अपवर्तनांक ≈ 1.0003 (लगभग 1)।
क्रांतिक कोण – वह आपतन कोण जिस पर अपवर्तन कोण = 90° हो।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन – क्रांतिक कोण से अधिक आपतन कोण पर प्रकाश का पूर्ण परावर्तन
पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए – प्रकाश सघन से विरल माध्यम में जाना चाहिए – महत्वपूर्ण
पूर्ण आंतरिक परावर्तन के उपयोग – ऑप्टिकल फाइबर, जल में हीरा चमकना, दूरबीनों में प्रिज्म
लेंस – पारदर्शी माध्यम का टुकड़ा जो प्रकाश को अपवर्तित करता है।
उत्तल लेंसअभिसारी (Converging) लेंस; किरणें अभिसरित होती हैं – बार-बार
अवतल लेंसअपसारी (Diverging) लेंस; किरणें अपसरित होती हैं – बार-बार
उत्तल लेंस – वास्तविक एवं आभासी दोनों प्रतिबिम्ब बना सकता है।
अवतल लेंस – सदैव आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है – महत्वपूर्ण
लेंस का सूत्र1/f = 1/v - 1/uसबसे महत्वपूर्ण
लेंस का आवर्धनm = v/u (धनात्मक = आभासी, ऋणात्मक = वास्तविक)।
लेंस की क्षमता (Power) – P = 1/f; SI मात्रक डायोप्टर (D) – महत्वपूर्ण
उत्तल लेंस – धनात्मक (+ve) क्षमता; अवतल लेंस – ऋणात्मक (-ve) क्षमता।
उत्तल लेंस के उपयोग – आवर्धक लेंस, कैमरा, मानव नेत्र, सूर्य प्रकाश संग्रहण, प्रोजेक्टर
अवतल लेंस के उपयोग – मायोपिया (निकट दृष्टि) सुधार, चश्मा – बार-बार
मानव नेत्र – उत्तल लेंस की भाँति कार्य करता है – बार-बार पूछा गया
कॉर्निया – नेत्र का सबसे बाहरी पारदर्शी भाग; अधिकतम अपवर्तन यहाँ होता है।
आइरिस – नेत्र का रंगीन भाग; प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करता है।
पुतली – आइरिस का केंद्रीय छिद्र; प्रकाश को अंदर जाने देता है।
रेटिना – नेत्र का पर्दा; प्रतिबिम्ब यहाँ बनता है – महत्वपूर्ण
रेटिना पर प्रतिबिम्ब – वास्तविक, उल्टा एवं छोटाबार-बार
निकट बिंदु – स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी ≈ 25 cmप्रायः पूछा गया
दूर बिंदु – स्पष्ट दृष्टि की अधिकतम दूरी – सामान्य नेत्र के लिए अनंत
दूरदर्शिता (Myopia/निकट दृष्टि) – अवतल लेंस से सुधार – बार-बार
दीर्घदर्शिता (Hypermetropia/दूर दृष्टि) – उत्तल लेंस से सुधार – बार-बार
जरादूरदर्शिता (Presbyopia) – उम्र बढ़ने के साथ; द्वि-फोकस लेंस से सुधार।
विक्षेपण – सफेद प्रकाश का सात रंगों में विभक्त होना – महत्वपूर्ण
सफेद प्रकाश के सात रंग – VIBGYOR (बैंगनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल) – बार-बार
विक्षेपण का कारण – विभिन्न रंगों के प्रकाश का अपवर्तनांक भिन्न होना।
बैंगनी (Violet) – सबसे अधिक विचलन; लाल (Red) – सबसे कम विचलनमहत्वपूर्ण
बैंगनी प्रकाश का वेग – न्यूनतम; लाल प्रकाश का वेग – अधिकतम (काँच में)।
प्रिज्म – विक्षेपण के लिए प्रयुक्त उपकरण – बार-बार
इन्द्रधनुष – प्राकृतिक विक्षेपण का उदाहरण; जल की बूंदों द्वारा – महत्वपूर्ण
इन्द्रधनुष के रंगों का क्रम – बाहर से अंदर – लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, बैंगनी।
द्वितीयक इन्द्रधनुष – दो बार परावर्तन के बाद; रंगों का क्रम उल्टा होता है।
प्रकाश का दोहरा अपवर्तन (Double Refraction) – कैल्साइट क्रिस्टल में होता है।
ध्रुवण (Polarization) – सिद्ध करता है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है – महत्वपूर्ण
निकोल प्रिज्म – ध्रुवित प्रकाश उत्पन्न करने के लिए प्रयुक्त।
प्रकाशिक तन्तु (Optical Fibre) – पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत पर कार्य – बार-बार
दूरबीन (Telescope) – आवर्धन हेतु उत्तल लेंस अथवा अवतल दर्पण का उपयोग।
सूक्ष्मदर्शी (Microscope) – उत्तल लेंस का उपयोग करता है।
पेरिस्कोप – समतल दर्पणों के युग्म पर आधारित।
सोलर कुकरअवतल दर्पण पर आधारित – प्रायः पूछा गया
स्टेथोस्कोप – ध्वनि का संचरण, प्रकाश से संबंधित नहीं।
प्रकाश वर्षदूरी का मात्रक, समय का नहीं – बार-बार पूछा गया
खगोलीय इकाई (AU) – सूर्य से पृथ्वी की औसत दूरी ≈ 1.5 × 10¹¹ m
पारसेक – 1 पारसेक = 3.26 प्रकाश वर्ष।
प्रकाश का रंग – तरंगदैर्घ्य पर निर्भर; लाल का तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक (~700 nm), बैंगनी का सबसे कम (~400 nm)।
प्रकाश का वेग निर्वात में → 3 × 10⁸ m/s
परावर्तन के नियम → ∠i = ∠r
समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब → आभासी, समान, पार्श्व विपर्यय
उत्तल दर्पण → अपसारी | अवतल दर्पण → अभिसारी
उत्तल लेंस → अभिसारी | अवतल लेंस → अपसारी
दर्पण सूत्र → 1/f = 1/v + 1/u
लेंस सूत्र → 1/f = 1/v - 1/u
लेंस की क्षमता → P = 1/f (डायोप्टर)
अपवर्तनांक → μ = c/v | जल = 1.33, काँच = 1.5, हीरा = 2.42
मानव नेत्र → उत्तल लेंस | निकट बिंदु = 25 cm
मायोपिया → अवतल लेंस | हाइपरमेट्रोपिया → उत्तल लेंस
VIBGYOR – बैंगनी (अधिक विचलन) से लाल (कम विचलन)
इन्द्रधनुष → जल की बूंदें (विक्षेपण + परावर्तन)
पूर्ण आंतरिक परावर्तन → ऑप्टिकल फाइबर
प्रकाश तरंग → अनुप्रस्थ (Transverse)
सोलर कुकर → अवतल दर्पण पर आधारित
प्रकाश वर्ष → दूरी का मात्रक (≈ 9.46 × 10¹⁵ m)
सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक → 8 मिनट 20 सेकंड

परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

प्रकाश का वेग – 3 × 10⁸ m/s
परावर्तन नियम – ∠i = ∠r
उत्तल दर्पण – अपसारी
अवतल दर्पण – अभिसारी
उत्तल लेंस – अभिसारी
अवतल लेंस – अपसारी
लेंस सूत्र – 1/f = 1/v - 1/u
दर्पण सूत्र – 1/f = 1/v + 1/u
नेत्र – उत्तल लेंस
निकट बिंदु – 25 cm
मायोपिया – अवतल लेंस
हाइपरमेट्रोपिया – उत्तल लेंस
अधिक विचलन – बैंगनी
कम विचलन – लाल
अपवर्तनांक (हीरा) – 2.42
अपवर्तनांक (जल) – 1.33
प्रकाश वर्ष – दूरी का मात्रक
सूर्य प्रकाश – 8 मिनट 20 सेकंड