ध्वनि : मूलभूत अवधारणाएँ
Soundध्वनि – ऊर्जा का वह रूप जो सुनने की अनुभूति उत्पन्न करती
है।
ध्वनि का
उत्पादन – कंपन (Vibration) से होता है।
बिना कंपन
के ध्वनि उत्पन्न नहीं हो सकती।
ध्वनि –
एक यांत्रिक (Mechanical) तरंग है।
ध्वनि
के संचरण हेतु माध्यम आवश्यक है।
निर्वात में ध्वनि का संचरण नहीं होता।
अंतरिक्ष यात्री रेडियो संचार का उपयोग करते हैं – अंतरिक्ष में ध्वनि नहीं
फैलती।
ध्वनि – अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal Wave) के रूप में चलती है।
ध्वनि के संचरण में माध्यम के कण ऊर्जा का स्थानांतरण करते हैं,
पदार्थ का नहीं।
ध्वनि की चाल – माध्यम की प्रकृति एवं तापमान पर निर्भर करती है।
ध्वनि का वेग – ठोस > द्रव > गैस।
शुष्क वायु में 20°C पर ध्वनि का वेग ≈ 343 m/s।
जल में
ध्वनि का वेग – वायु की अपेक्षा ≈ 4 गुना अधिक।
इस्पात में
ध्वनि का वेग – वायु की अपेक्षा ≈ 15 गुना अधिक।
तापमान बढ़ने पर गैसों में ध्वनि का वेग बढ़ता है।
आर्द्र
वायु में ध्वनि का वेग – शुष्क वायु से अधिक।
बिजली की
चमक पहले दिखाई देती है, गरज बाद में – प्रकाश का वेग > ध्वनि का वेग।
प्रकाश का
वेग ≈ 3 × 10⁸ m/s
ध्वनि का
वेग ≈ 343 m/s
संपीड़न (Compression) – क्षेत्र जहाँ कण पास-पास होते हैं।
विरलन (Rarefaction) – क्षेत्र जहाँ कण दूर-दूर होते हैं।
एक
संपीड़न से दूसरे संपीड़न तक की दूरी – तरंगदैर्घ्य।
अधिक आयाम वाली ध्वनि – अधिक तीव्र सुनाई देती है।
अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि – अधिक तीखी सुनाई देती है।
आवृत्ति
का SI मात्रक – हर्ट्ज (Hz)।
1000 Hz – 1000 कंपन प्रति सेकंड।
आवर्तकाल और आवृत्ति – परस्पर व्युत्क्रमानुपाती।
f = 1/T
मानव कान
के तीन भाग – बाह्य कर्ण, मध्य कर्ण, आंतरिक कर्ण।
कान का पर्दा (Eardrum) – ध्वनि तरंगों से कंपन करता है।
मानव शरीर
की सबसे छोटी अस्थि – स्टेप्स (Stapes) – मध्य कर्ण में।
कर्णावर्त (Cochlea) – आंतरिक कान का महत्वपूर्ण भाग।
श्रवण तंत्रिका (Auditory Nerve) – मस्तिष्क तक संदेश पहुँचाती है।
वृद्धावस्था में सुनने की क्षमता कम हो सकती है।
चमगादड़ – 20 kHz से अधिक आवृत्ति की ध्वनि उत्पन्न करता है।
डॉल्फिन – जल में दिशा ज्ञात करने हेतु पराश्रव्य तरंगें।
कुत्ते – मनुष्यों की तुलना में अधिक उच्च आवृत्ति सुन सकते हैं।
हाथी – अवश्रव्य ध्वनियों द्वारा दूरस्थ संचार करते हैं।
व्हेल – अवश्रव्य ध्वनियाँ उत्पन्न करती हैं।
अल्ट्रासोनिक क्लीनर – पराश्रव्य तरंगों का उपयोग करता है।
गर्भस्थ
शिशु की जाँच – अल्ट्रासोनोग्राफी द्वारा (पराश्रव्य तरंगें)।
हृदय
की जाँच – इकोकार्डियोग्राफी (पराश्रव्य तरंगों पर आधारित)।
प्रतिध्वनि – ध्वनि के परावर्तन के कारण उत्पन्न होती है।
प्रतिध्वनि हेतु न्यूनतम समय अंतराल – 0.1 सेकंड।
पहाड़ों एवं बड़ी इमारतों के पास प्रतिध्वनि आसानी से सुनाई देती है।
चमगादड़ – प्रतिध्वनि सिद्धांत (Echolocation) से दिशा ज्ञात करता है।
डॉल्फिन – Echolocation का उपयोग करती है।
अनुरणन – बड़े कक्ष में ध्वनि का बार-बार परावर्तन।
अत्यधिक अनुरणन – भाषण अस्पष्ट करता है।
सिनेमा
हॉल एवं सभागारों में – ध्वनि अवशोषक पदार्थ लगाए जाते हैं।
पर्दे,
कालीन एवं फोम – अनुरणन कम करते हैं।
SONAR – समुद्री गहराई मापने हेतु आविष्कार।
SONAR –
पराश्रव्य तरंगों पर आधारित तकनीक।
समुद्र
की गहराई ज्ञात करने में SONAR उपयोगी।
मछलियों
के समूहों का पता लगाने में SONAR उपयोगी।
नौसेना – पनडुब्बियों की खोज में SONAR का प्रयोग।
85 डेसीबल से अधिक ध्वनि – स्वास्थ्य के लिए हानिकारक।
120 डेसीबल से अधिक ध्वनि – दर्द उत्पन्न कर सकती है।
जेट
विमान की ध्वनि ≈ 140 dB तक हो सकती है।
अत्यधिक
शोर – तनाव, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप का कारण।
ध्वनि
प्रदूषण – श्रवण क्षमता प्रभावित हो सकती है।
विश्व श्रवण दिवस – 3 मार्च।
ध्वनि का
अध्ययन → ध्वनिकी (Acoustics)
ध्वनि
ऊर्जा का स्रोत → कंपन
ध्वनि
तरंग का प्रकार → अनुदैर्ध्य
ध्वनि
निर्वात में → संचरित नहीं होती
ध्वनि का
वेग सबसे अधिक → ठोस में
ध्वनि का
वेग सबसे कम → गैस में
आवृत्ति
की इकाई → हर्ट्ज (Hz)
ध्वनि की
तीव्रता की इकाई → डेसीबल (dB)
मानव की
श्रव्य सीमा → 20 Hz – 20,000 Hz
पराश्रव्य
ध्वनि → 20,000 Hz से अधिक
अवश्रव्य
ध्वनि → 20 Hz से कम
प्रतिध्वनि का कारण → ध्वनि का परावर्तन
चमगादड़
दिशा ज्ञात करता है → Echolocation द्वारा
SONAR का
आधार → पराश्रव्य तरंगें
SONAR का
उपयोग → समुद्र की गहराई मापना
अल्ट्रासोनोग्राफी में प्रयुक्त तरंगें → पराश्रव्य
कान की
सबसे छोटी अस्थि → स्टेप्स (Stapes)
ध्वनि का
वेग बढ़ता है → तापमान बढ़ने पर
बिजली
पहले दिखाई देती है → प्रकाश का वेग > ध्वनि
ध्वनि के
संचरण हेतु आवश्यक → माध्यम
ध्वनि के
दो मुख्य भाग → संपीड़न एवं विरलन
Echo
सुनने हेतु न्यूनतम समय → 0.1 सेकंड
ध्वनि की
तीव्रता निर्धारित करती है → आयाम
ध्वनि की
तारता निर्धारित करती है → आवृत्ति
ध्वनिकी
(Acoustics) के जनक → वॉलेस क्लेमेंट सेबिन
प्रतियोगी परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण तथ्य
ध्वनि का अध्ययन – ध्वनिकी
ध्वनि तरंग – अनुदैर्ध्य
निर्वात में – संचरित
नहीं
सर्वाधिक वेग – ठोस
में
आवृत्ति इकाई – हर्ट्ज
तीव्रता इकाई – डेसीबल
श्रव्य सीमा – 20 Hz – 20,000 Hz
प्रतिध्वनि – परावर्तन से
Echolocation – चमगादड़
SONAR – पराश्रव्य तरंगें
सबसे छोटी अस्थि – स्टेप्स
ध्वनिकी जनक – वॉलेस सेबिन