सिंथेटिक रेशे एवं प्लास्टिक

Polymers · Exam Special
सिंथेटिक रेशे – मानव निर्मित रेशे जो रासायनिक संश्लेषण द्वारा बनाए जाते हैं।
प्राकृतिक रेशे – कपास, ऊन, रेशम, जूट – प्रकृति में पाए जाते हैं।
बहुलक (Polymer) – बड़े अणु जो अनेक मोनोमर इकाइयों से बनते हैं।
सिंथेटिक रेशे बहुलक होते हैं।
मोनोमर – एकल इकाई जो बहुलक बनाती है (जैसे – एथिलीन, कैप्रोलैक्टम)।
सिंथेटिक रेशों के गुण – परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
सिंथेटिक रेशे प्राकृतिक रेशों से अधिक मजबूत होते हैं।
सिंथेटिक रेशे जल्दी सूखते हैं।
सिंथेटिक रेशे झुर्री रहित होते हैं।
सिंथेटिक रेशे सस्ते होते हैं।
सिंथेटिक रेशों में नमी अवशोषण कम होता है।
सिंथेटिक रेशे रासायनिक रूप से स्थिर होते हैं।
रेयॉन (Rayon) – सबसे पहला सिंथेटिक रेशा – सेल्यूलोज से बनता है।
रेयॉन को "कृत्रिम रेशम" (Artificial Silk) कहा जाता है।
रेयॉन का उपयोग – वस्त्र, टायर की रस्सी, चिकित्सा उपकरण।
रेयॉन – अर्ध-सिंथेटिक रेशा (सेल्यूलोज से)।
नायलॉन (Nylon) – पूर्णतः सिंथेटिक रेशा – ड्यूपोंट कंपनी ने 1935 में बनाया।
नायलॉन पेट्रोलियम उत्पादों से बनता है।
नायलॉन – मजबूत, लोचदार, हल्का।
नायलॉन का उपयोग – रस्सी, पैराशूट, वस्त्र, टूथब्रश के बाल।
पॉलिएस्टर (Polyester) – तेल एवं कोयला से बनता है।
पॉलिएस्टर – झुर्री रहित, जल्दी सूखने वाला।
पॉलिएस्टर का उपयोग – वस्त्र, बोतलें, फिल्म, टेप।
टेरिलीन – पॉलिएस्टर का एक प्रकार।
एक्रिलिक (Acrylic) – ऊन के विकल्प के रूप में उपयोग।
एक्रिलिक – हल्का, मुलायम, गर्म।
एक्रिलिक का उपयोग – स्वेटर, कंबल, कालीन, भरवां खिलौने।
स्पैन्डेक्स (Spandex/Lycra) – अत्यधिक लोचदार रेशा।
स्पैन्डेक्स का उपयोग – खेल वस्त्र, स्विमसूट, कसरती कपड़े।
केवलर (Kevlar) – बुलेटप्रूफ जैकेट में प्रयोग।
टेफ्लॉन – नॉन-स्टिक बर्तनों में प्रयोग (पॉलिटेट्राफ्लोरोएथिलीन)।
प्लास्टिक – सिंथेटिक बहुलक जिन्हें आकार दिया जा सकता है।
प्लास्टिक हल्का, टिकाऊ, रासायनिक रूप से प्रतिरोधी होता है।
प्लास्टिक ऊष्मा एवं विद्युत का कुचालक होता है।
प्लास्टिक दो प्रकार – तापप्लास्टिक (Thermoplastic) और तापदृढ़ (Thermosetting)।
तापप्लास्टिक (Thermoplastic) – गर्म करने पर नरम होते हैं, ठंडा करने पर कठोर।
तापप्लास्टिक को पुनः आकार दिया जा सकता है।
तापप्लास्टिक के उदाहरण – पॉलीथीन, PVC, नायलॉन, पॉलीप्रोपाइलीन।
तापदृढ़ (Thermosetting) – गर्म करने पर स्थायी रूप से कठोर हो जाते हैं।
तापदृढ़ प्लास्टिक को पुनः आकार नहीं दिया जा सकता।
तापदृढ़ प्लास्टिक के उदाहरण – बैकलाइट, मेलामीन, एपॉक्सी।
बैकलाइट – पहला पूर्णतः सिंथेटिक प्लास्टिक (लियो बैकलैंड, 1907)।
बैकलाइट का उपयोग – बिजली के स्विच, सॉकेट, हैंडल।
मेलामीन – गर्मी प्रतिरोधी – रसोई के बर्तन में प्रयोग।
PVC (पॉलीविनाइल क्लोराइड) – पाइप, तारों का आवरण, कृत्रिम चमड़ा।
पॉलीथीन (Polythene) – सबसे सामान्य प्लास्टिक – थैलियाँ, बोतलें।
पॉलीप्रोपाइलीन (PP) – बोतलें, कार के पुर्जे, वस्त्र।
पॉलीस्टाइरीन (Polystyrene) – फोम, कप, पैकेजिंग।
बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक – सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित होने वाला प्लास्टिक।
PLA (पॉलीलैक्टिक एसिड) – मक्का/गन्ना से बने बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक।
PHA (पॉलीहाइड्रोक्सीअल्केनोएट) – जीवाणु द्वारा निर्मित बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक।
बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक – पर्यावरण हितैषी।
प्लास्टिक प्रदूषण – परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
प्लास्टिक अविघटनशील (Non-biodegradable) होता है।
प्लास्टिक को विघटित होने में 100-1000 वर्ष लगते हैं।
प्लास्टिक जल स्रोतों को प्रदूषित करता है।
प्लास्टिक समुद्री जीवन को नुकसान पहुँचाता है।
माइक्रोप्लास्टिक – प्लास्टिक के छोटे कण (< 5mm)।
माइक्रोप्लास्टिक खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं।
प्लास्टिक जलाने पर विषैली गैसें (डाइऑक्सिन, फ्यूरान) उत्सर्जित होती हैं।
डाइऑक्सिन – अत्यंत विषैला – प्लास्टिक जलाने से उत्पन्न।
3R सिद्धांत – Reduce, Reuse, Recycle।
Reduce – प्लास्टिक का उपयोग कम करना।
Reuse – प्लास्टिक वस्तुओं का पुनः उपयोग करना।
Recycle – प्लास्टिक को पुनर्चक्रित करना।
प्लास्टिक पुनर्चक्रण – प्लास्टिक को पिघलाकर नई वस्तु बनाना।
प्लास्टिक रीसाइक्लिंग कोड – 1 से 7 तक।
PET (पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट) – कोड 1 – बोतलें।
HDPE – कोड 2 – दूध की बोतलें।
PVC – कोड 3 – पाइप।
LDPE – कोड 4 – थैलियाँ।
PP – कोड 5 – बोतलें, कंटेनर।
PS – कोड 6 – फोम, कप।
Other – कोड 7 – अन्य प्लास्टिक।
भारत में सिंगल-यूज प्लास्टिक – 2022 में प्रतिबंधित।
सिंगल-यूज प्लास्टिक – एक बार उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है।
भारत में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम – 2016।
स्वच्छ भारत अभियान – प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन पर जोर।
ई-वेस्ट – इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट में भी प्लास्टिक होता है।
सिंथेटिक रेशों का उपयोग – वस्त्र उद्योग में लागत कम करता है।
सिंथेटिक रेशे प्राकृतिक रेशों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं।
सिंथेटिक रेशे कीटों और फफूंदी से प्रभावित नहीं होते।
सिंथेटिक रेशे गर्मी से पिघल सकते हैं।
प्लास्टिक के लाभ – हल्का, सस्ता, टिकाऊ, जंग रहित।
प्लास्टिक के हानियाँ – अविघटनशील, प्रदूषण, विषैली गैसें।
पॉलिमर क्रांति – 20वीं शताब्दी की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्रांति।
स्टायरोफोम – पॉलीस्टाइरीन फोम का ब्रांड नाम।
गोर-टेक्स – सांस लेने योग्य जलरोधक कपड़ा।
पहला सिंथेटिक रेशा → रेयॉन (Artificial Silk)
पूर्णतः सिंथेटिक रेशा → नायलॉन (1935)
पहला पूर्णतः सिंथेटिक प्लास्टिक → बैकलाइट (1907)
तापप्लास्टिक → पॉलीथीन, PVC, नायलॉन
तापदृढ़ → बैकलाइट, मेलामीन
बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक → PLA, PHA
3R → Reduce, Reuse, Recycle
PET कोड → 1 | HDPE → 2 | PVC → 3
LDPE → 4 | PP → 5 | PS → 6 | Other → 7
बैकलाइट आविष्कारक → लियो बैकलैंड (1907)
नायलॉन निर्माता → ड्यूपोंट (1935)
प्लास्टिक प्रदूषण → अविघटनशील
सिंगल-यूज प्लास्टिक प्रतिबंध (भारत) → 2022

परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

पहला सिंथेटिक रेशा – रेयॉन
पूर्णतः सिंथेटिक – नायलॉन
पहला प्लास्टिक – बैकलाइट
तापप्लास्टिक – पॉलीथीन, PVC
तापदृढ़ – बैकलाइट, मेलामीन
बायोडिग्रेडेबल – PLA, PHA
3R – Reduce, Reuse, Recycle
PET कोड – 1 | HDPE – 2
PVC कोड – 3 | LDPE – 4
PP कोड – 5 | PS – 6 | Other – 7
बैकलाइट आविष्कारक – लियो बैकलैंड
नायलॉन निर्माता – ड्यूपोंट
प्लास्टिक प्रदूषण – अविघटनशील
सिंगल-यूज प्रतिबंध – 2022 (भारत)
रेयॉन – कृत्रिम रेशम
टेफ्लॉन – नॉन-स्टिक बर्तन
केवलर – बुलेटप्रूफ जैकेट
माइक्रोप्लास्टिक – < 5mm