पुनर्गठन का युग

History · Exam Special · NCERT
पुनर्गठन का युग – मौर्य साम्राज्य के पतन (लगभग 185 ई.पू.) के बाद राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक व्यवस्थाओं का पुनः संगठन – NCERT
समय काल – लगभग 200 ई.पू. से 300 ई. तक (मौर्योत्तर काल) एवं आगे गुप्त काल तक परिवर्तन जारी – NCERT
मुख्य विशेषता – बड़े केंद्रीय साम्राज्य के स्थान पर क्षेत्रीय राज्यों का उदय, सामाजिक स्तरीकरण में वृद्धि, नए धार्मिक आंदोलन – NCERT
कारण – मौर्य प्रशासन का कमजोर होना, विदेशी आक्रमण, आर्थिक परिवर्तन, धार्मिक असंतोष – NCERT
मौर्य पतन के बाद – उत्तर भारत में शुंग, कण्व; दक्कन में सातवाहन; दक्षिण में चेर-चोल-पांड्य; उत्तर-पश्चिम में इंडो-ग्रीक, शक, कुषाण – NCERT
शुंग वंश – पुष्यमित्र शुंग (185 ई.पू.) – ब्राह्मणवादी प्रतिक्रिया – अश्वमेध यज्ञ – NCERT
सातवाहन – दक्कन का शक्तिशाली वंश – गौतमीपुत्र शातकर्णि – शक-क्षत्रपों से संघर्ष –
कुषाण साम्राज्य – कनिष्क – मध्य एशिया से मथुरा तक – रेशम मार्ग पर नियंत्रण – NCERT
क्षेत्रीय राज्यों का उदय – बड़े साम्राज्य के स्थान पर अनेक छोटे-बड़े राज्य – राजनीतिक विकेंद्रीकरण – NCERT
सामंत व्यवस्था की शुरुआत – भूमि अनुदान से स्थानीय शक्तिशाली व्यक्ति – बाद में सामंतवाद का आधार –
नए राजनीतिक केंद्र – उज्जैनी, प्रतिष्ठान (पैठन), मथुरा, तक्षशिला, कांची – NCERT
विदेशी शासक – इंडो-ग्रीक, शक, पार्थियन, कुषाण – भारतीय संस्कृति में घुलमिल गए – NCERT
वर्ण व्यवस्था का कठोर होना – जन्म आधारित जाति व्यवस्था मजबूत – धर्मशास्त्रों में नियम – NCERT
जाति व्यवस्था – व्यवसाय एवं जन्म से निर्धारित – अस्पृश्यता के तत्व बढ़े – NCERT
भूमि अनुदान (Land Grants) – ब्राह्मणों, मंदिरों एवं अधिकारियों को भूमि दान – सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण कारक – बार-बार
अग्रहार – ब्राह्मणों को दिया गया कर-मुक्त भूमि अनुदान – NCERT
नए वर्ण/जातियाँ – विदेशी शासकों (शक, कुषाण) को क्षत्रिय का दर्जा – सामाजिक गतिशीलता – NCERT
शूद्रों की स्थिति – कृषि एवं शिल्प में अधिक भागीदारी – कुछ सुधार भी – NCERT
स्त्रियों की स्थिति – धर्मशास्त्रों में प्रतिबंध बढ़े – सती, बाल विवाह के उल्लेख – परंतु कुछ क्षेत्रों में अधिकार – NCERT
अस्पृश्यता – धीरे-धीरे कठोर रूप लेती गई – सामाजिक भेदभाव बढ़ा – NCERT
शहरी मध्यम वर्ग – व्यापारी, शिल्पी श्रेणियाँ – सामाजिक प्रभाव बढ़ा – NCERT
भूमि अनुदान का प्रभाव – कृषि विस्तार, नए क्षेत्रों का विकास, लेकिन केंद्रीय नियंत्रण कमजोर – NCERT
कृषि का विस्तार – जंगलों की सफाई, नई भूमि पर खेती – NCERT
व्यापार – आंतरिक एवं बाह्य व्यापार जारी – रेशम मार्ग, समुद्री मार्ग – NCERT
रोमन व्यापार – दक्षिण भारत से मसाले, वस्त्र, रत्न – सोने के सिक्के आए – NCERT
श्रेणी संगठन – शिल्पी एवं व्यापारी श्रेणियाँ मजबूत – स्वायत्तता बढ़ी – NCERT
मुद्रा – सोने, चांदी, तांबे के सिक्के – कुषाण एवं सातवाहन काल में प्रचुर – NCERT
नगरीय जीवन – कुछ नगर फले-फूले, कुछ मौर्य नगरों का पतन – NCERT
ब्राह्मण धर्म का पुनरुत्थान – शुंग काल से – यज्ञ, वर्ण व्यवस्था पर जोर – NCERT
वैष्णव एवं शैव धर्म – भक्ति तत्व का विकास – व्यक्तिगत ईश्वर की पूजा –
अवतार अवधारणा – विष्णु के अवतार (राम, कृष्ण) – लोकप्रिय हुए – NCERT
बौद्ध धर्म में परिवर्तन – हीनयान से महायान का विकास – बोधिसत्व अवधारणा –
महायान – बुद्ध की मूर्ति पूजा, बोधिसत्व – कुषाण काल में फलना-फूलना – NCERT
गांधार एवं मथुरा कला – बुद्ध की मानवीय मूर्तियाँ – ग्रीक प्रभाव (गांधार) – NCERT
जैन धर्म – दिगंबर एवं श्वेतांबर विभाजन – दक्षिण एवं पश्चिम में फैलाव – NCERT
स्तूप एवं चैत्य – बौद्ध स्थापत्य का विकास – सांची, भरहुत, अमरावती – NCERT
पुराणों का संकलन – धार्मिक कथाओं एवं रीति-रिवाजों का संग्रह – लोक धर्म का आधार – NCERT
तीर्थ एवं मंदिर – मंदिर निर्माण की शुरुआत – भक्ति का केंद्र – NCERT
संस्कृत का उदय – शाही भाषा एवं साहित्य की भाषा बनी – NCERT
धर्मशास्त्र – मनुस्मृति आदि – सामाजिक नियमों का संहिताकरण – NCERT
महाकाव्य – रामायण एवं महाभारत का वर्तमान रूप में विकास – NCERT
विज्ञान एवं खगोल – इस काल में भी प्रगति – बाद में गुप्त काल में चरम – NCERT
कला में समन्वय – भारतीय एवं विदेशी (ग्रीक, मध्य एशियाई) शैलियों का मिश्रण – NCERT
भूमि अनुदान के प्रकार – ब्राह्मणों को, धार्मिक संस्थाओं को, अधिकारियों को, सैनिकों को – NCERT
प्रभाव – किसानों पर नियंत्रण बढ़ा, स्थानीय स्वायत्तता, केंद्रीय शक्ति कमजोर – NCERT
सामंतवाद की जड़ें – भूमि अनुदान से उत्पन्न अधिकार – बाद के सामंती ढांचे का आधार –
अभिलेखीय साक्ष्य – अनेक भूमिदान अभिलेख – सातवाहन, पल्लव, गुप्त काल में – NCERT
कृषक एवं भूमि – किसान भूमि से बंधे – स्वतंत्रता कम हुई – NCERT
विदेशी शासकों का भारतीयकरण – शक, कुषाण ने भारतीय धर्म एवं संस्कृति अपनाई – NCERT
कनिष्क – बौद्ध धर्म का महान संरक्षक – चौथी संगीति – NCERT
हेलीओडोरस स्तंभ – इंडो-ग्रीक दूत – विष्णु भक्त – सांस्कृतिक समन्वय का उदाहरण – NCERT
बहुधार्मिक समाज – ब्राह्मण, बौद्ध, जैन, स्थानीय पंथ साथ-साथ – NCERT
भक्ति की जड़ें – व्यक्तिगत ईश्वर के प्रति समर्पण – बाद के भक्ति आंदोलन की नींव – NCERT
पुरातात्विक स्रोत – सिक्के, अभिलेख, स्तूप, मूर्तियाँ, मिट्टी के बर्तन – NCERT
साहित्यिक स्रोत – पुराण, धर्मशास्त्र, बौद्ध-जैन ग्रंथ, संगम साहित्य – NCERT
विदेशी स्रोत – प्लिनी, टॉलेमी, चीनी यात्री (बाद में) – NCERT
अभिलेख – भूमिदान अभिलेख सबसे महत्वपूर्ण – सामाजिक-आर्थिक इतिहास के लिए – NCERT
राजनीतिक – क्षेत्रीय राज्यों एवं सामंतवाद की नींव – NCERT
सामाजिक – जाति व्यवस्था का कठोर रूप, भूमि संबंधों में परिवर्तन – NCERT
धार्मिक – भक्ति, मंदिर, महायान, पुराण – मध्यकालीन धर्म की नींव – NCERT
सांस्कृतिक समन्वय – विदेशी एवं भारतीय तत्वों का मिश्रण – भारतीय संस्कृति की समृद्धि – NCERT
गुप्त काल की तैयारी – इन परिवर्तनों ने गुप्त साम्राज्य एवं स्वर्ण युग की पृष्ठभूमि तैयार की – NCERT
आधुनिक प्रासंगिकता – जाति, भूमि संबंध, धार्मिक विविधता एवं समन्वय की जड़ें इसी युग में – NCERT

परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

पुनर्गठन युग – मौर्य पतन के बाद
शुंग – पुष्यमित्र, ब्राह्मण प्रतिक्रिया
सातवाहन – गौतमीपुत्र शातकर्णि
कनिष्क – कुषाण, महायान
भूमि अनुदान – सामाजिक-आर्थिक बदलाव
अग्रहार – ब्राह्मण भूमिदान
जाति कठोर – जन्म आधारित
महायान – बोधिसत्व, मूर्ति पूजा
वैष्णव-शैव – भक्ति का विकास
गांधार कला – ग्रीक प्रभाव
रोमन व्यापार – दक्षिण भारत
सामंतवाद की जड़ – भूमि अनुदान
मनुस्मृति – धर्मशास्त्र
हेलीओडोरस – विष्णु भक्त यूनानी
क्षेत्रीय राज्य – राजनीतिक विशेषता
पुराण – लोक धर्म का आधार
विदेशी → क्षत्रिय – सामाजिक गतिशीलता
रेशम मार्ग – कुषाण नियंत्रण
भक्ति की नींव – इस युग में