हमारे आसपास की आर्थिक गतिविधियाँ
Economics · Exam Special · NCERTआर्थिक गतिविधि – वह गतिविधि जिससे आय अर्जित होती है या आजीविका चलती है – NCERT।
गैर-आर्थिक गतिविधि – प्रेम, स्नेह, सेवा भाव से की गई गतिविधि (माता का खाना बनाना) – आय नहीं मिलती – NCERT।
आर्थिक गतिविधियों का उद्देश्य – आवश्यकताओं की पूर्ति एवं आय अर्जन – NCERT।
तीन मुख्य आर्थिक क्रियाएँ – उत्पादन, वितरण एवं उपभोग –
आर्थिक चक्र – उत्पादन → वितरण → उपभोग → पुनः उत्पादन – NCERT।
उत्पादन – वस्तुओं एवं सेवाओं को उत्पन्न करने की प्रक्रिया – आगतों को निर्गत में बदलना – NCERT।
उत्पादन के चार कारक – भूमि, श्रम, पूंजी एवं उद्यमिता –
भूमि (Land) – प्राकृतिक संसाधन (मिट्टी, जल, खनिज, वन) – पुरस्कार: लगान (Rent) – NCERT।
श्रम (Labour) – मानव का शारीरिक/मानसिक प्रयास – पुरस्कार: मजदूरी (Wages) – NCERT।
पूंजी (Capital) – मानव निर्मित आगत (मशीन, औजार, भवन, कच्चा माल) – पुरस्कार: ब्याज (Interest) – NCERT।
उद्यमिता (Entrepreneurship) – जोखिम उठाना, संगठन एवं प्रबंधन – पुरस्कार: लाभ (Profit) – NCERT।
स्थिर पूंजी – लंबे समय तक उपयोग (मशीन, भवन) – NCERT।
कार्यशील पूंजी – एक बार उपयोग (कच्चा माल, नकदी) – NCERT।
मानव पूंजी – शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल से युक्त श्रम – NCERT।
उत्पादन के प्रकार – प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक –
प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector) – प्रकृति से सीधे संसाधन निकालना – कृषि, मत्स्य, वानिकी, खनन, पशुपालन –
प्राथमिक क्षेत्र का महत्व – भारत में बड़ी जनसंख्या की आजीविका – खाद्य सुरक्षा – NCERT।
द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector) – कच्चे माल को निर्मित वस्तु में बदलना – विनिर्माण, निर्माण, बिजली –
उदाहरण – कपास से कपड़ा, लोहा से इस्पात, गन्ना से चीनी – NCERT।
तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector) – सेवाएँ प्रदान करना – परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, पर्यटन –
सेवा क्षेत्र का महत्व – आधुनिक अर्थव्यवस्था में सबसे तेजी से बढ़ता क्षेत्र – NCERT।
चतुर्थक क्षेत्र (Quaternary) – ज्ञान आधारित सेवाएँ (IT, R&D, शिक्षा) – कभी-कभी तृतीयक से अलग माना जाता है – NCERT।
क्षेत्रों की परस्पर निर्भरता – कृषि को उद्योग एवं सेवाओं की जरूरत, उद्योग को कच्चे माल की – NCERT।
वितरण – उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं को उपभोक्ताओं तक पहुँचाने की प्रक्रिया – NCERT।
वितरण की श्रृंखला – उत्पादक → थोक व्यापारी → खुदरा व्यापारी → उपभोक्ता – NCERT।
मध्यस्थों की भूमिका – भंडारण, परिवहन, वित्त, जोखिम वहन, बाजार जानकारी – NCERT।
परिवहन – सड़क, रेल, जल, वायु मार्ग – वितरण का महत्वपूर्ण अंग – NCERT।
भंडारण (Warehousing) – वस्तुओं को सुरक्षित रखना – मौसमी वस्तुओं के लिए आवश्यक – NCERT।
थोक व्यापार – बड़ी मात्रा में व्यापारियों को बिक्री – NCERT।
खुदरा व्यापार – अंतिम उपभोक्ता को छोटी मात्रा में बिक्री – NCERT।
प्रत्यक्ष वितरण – उत्पादक से सीधे उपभोक्ता (किसान बाजार, कंपनी आउटलेट, ऑनलाइन) – NCERT।
वितरण की समस्या – मध्यस्थों की अधिक संख्या से मूल्य बढ़ना – किसानों को कम भाव – NCERT।
उपभोग – आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं का उपयोग – NCERT।
उपभोग का उद्देश्य – संतुष्टि प्राप्त करना – NCERT।
उपभोग के प्रकार – आवश्यक (खाना, कपड़ा), आराम (पंखा), विलासिता (कार, एसी) – NCERT।
उपभोग को प्रभावित करने वाले कारक – आय, मूल्य, पसंद, फैशन, विज्ञापन, मौसम – NCERT।
उपयोगिता – वस्तु से मिलने वाली संतुष्टि – NCERT।
सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम – अतिरिक्त इकाई से संतुष्टि घटती है – NCERT।
बचत – आय का वह भाग जो उपभोग नहीं किया जाता – भविष्य के लिए – NCERT।
निवेश – बचत को उत्पादक कार्यों में लगाना – पूंजी निर्माण – NCERT।
आजीविका – जीवन निर्वाह के साधन – आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी – NCERT।
रोजगार के प्रकार – नियमित (नौकरी), मौसमी, स्वरोजगार, अनियमित – NCERT।
स्वरोजगार – स्वयं का व्यवसाय (दुकान, खेती, रिक्शा) – NCERT।
वेतन/मजदूरी रोजगार – दूसरों के यहां काम कर आय अर्जित करना – NCERT।
बेरोजगारी – काम करने योग्य व्यक्ति को काम न मिलना – NCERT।
छिपी बेरोजगारी – कृषि में अधिक लोग लगे होना – उत्पादकता कम –
मौसमी बेरोजगारी – फसल कटाई/बुवाई के अलावा काम न होना – NCERT।
Educated Unemployment – पढ़े-लिखे युवाओं को उपयुक्त काम न मिलना – NCERT।
ग्रामीण आर्थिक गतिविधियाँ – मुख्यतः प्राथमिक (कृषि, पशुपालन, मत्स्य) + छोटे उद्योग – NCERT।
कृषि पर निर्भरता – भारत में अभी भी बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर – NCERT।
शहरी आर्थिक गतिविधियाँ – द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र मुख्य – उद्योग, सेवाएँ, व्यापार – NCERT।
गैर-कृषि गतिविधियाँ – दूध उत्पादन, परिवहन, दुकानदारी, हस्तशिल्प – ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रही – NCERT।
प्रवासी मजदूर – काम की तलाश में गांव से शहर जाना – NCERT।
एकल स्वामित्व – एक व्यक्ति का व्यवसाय – सरल, पूर्ण नियंत्रण – NCERT।
साझेदारी – दो या अधिक व्यक्ति – पूंजी एवं जोखिम साझा – NCERT।
कंपनी – अलग कानूनी इकाई – सीमित दायित्व – NCERT।
सहकारी समितियाँ – सदस्य मिलकर चलाते हैं – दूध, कृषि, क्रेडिट सहकारी – NCERT।
अमूल उदाहरण – गुजरात की दुग्ध सहकारी – सफल मॉडल –
GDP – सकल घरेलू उत्पाद – देश में एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य –
क्षेत्रवार योगदान – तृतीयक क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक (वर्तमान में) – NCERT।
रोजगार बनाम उत्पादन – प्राथमिक क्षेत्र में अधिक रोजगार, कम उत्पादन; तृतीयक में कम रोजगार, अधिक उत्पादन – NCERT।
संगठित क्षेत्र – नियमित नौकरी, नियम, सामाजिक सुरक्षा – NCERT।
असंगठित क्षेत्र – अनियमित, कम मजदूरी, सुरक्षा नहीं – अधिकांश रोजगार यहीं –
MGNREGA – ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना – 100 दिन का काम –
आत्मनिर्भरता – गांव/क्षेत्र की अपनी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता – NCERT।
विशेषज्ञता – एक कार्य में दक्षता – उत्पादकता बढ़ाती है – NCERT।
विनिमय – अतिरिक्त उत्पादन का आदान-प्रदान – बाजार का आधार – NCERT।
पूंजी निर्माण – बचत को निवेश में बदलना – विकास के लिए आवश्यक – NCERT।
सतत विकास – पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना आर्थिक गतिविधि – NCERT।
महिलाओं की आर्थिक भूमिका – घरेलू कार्य + आय अर्जक कार्य – अक्सर अनदेखा – NCERT।
बच्चों का श्रम – कानूनन प्रतिबंधित – शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर प्रभाव – NCERT।
आर्थिक असमानता – आय एवं अवसरों का असमान वितरण – चुनौती – NCERT।
परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)
आर्थिक गतिविधि – आय अर्जन वाली
उत्पादन कारक – भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यम
प्राथमिक क्षेत्र – कृषि, खनन, मत्स्य
द्वितीयक क्षेत्र – विनिर्माण
तृतीयक क्षेत्र – सेवाएँ
वितरण श्रृंखला – उत्पादक → थोक → खुदरा → उपभोक्ता
उपभोग – आवश्यकताओं की पूर्ति
छिपी बेरोजगारी – कृषि में अधिक
GDP – अंतिम वस्तुओं का मूल्य
असंगठित क्षेत्र – अधिक रोजगार
MGNREGA – 100 दिन रोजगार
अमूल – सहकारी मॉडल
लगान – भूमि का पुरस्कार
मजदूरी – श्रम का पुरस्कार
ब्याज – पूंजी का पुरस्कार
लाभ – उद्यमिता का पुरस्कार
ग्रामीण – प्राथमिक मुख्य
शहरी – द्वितीयक + तृतीयक
बचत – आय – उपभोग
परस्पर निर्भरता – तीनों क्षेत्र