भारत के राजनीतिक मानचित्र का पुनर्गठन

History · Exam Special · NCERT
राजनीतिक मानचित्र का पुनर्गठन – गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद भारत अनेक क्षेत्रीय राज्यों में विभाजित हो गया – NCERT
समय – लगभग 550 ई. से 1200 ई. तक – पूर्व मध्यकाल / गुप्तोत्तर काल – NCERT
मुख्य विशेषता – बड़े केंद्रीय साम्राज्य का अभाव, अनेक क्षेत्रीय राजवंशों का उदय-पतन, निरंतर युद्ध एवं गठबंधन – NCERT
कारण – गुप्तों का कमजोर होना, हूण आक्रमण, सामंतों का शक्तिशाली होना, आर्थिक विकेंद्रीकरण – NCERT
परिणाम – राजनीतिक विकेंद्रीकरण, सामंती प्रवृत्तियों का विकास, क्षेत्रीय संस्कृतियों का उत्कर्ष – NCERT
पुष्यभूति / वर्धन वंश – थानेश्वर (हरियाणा) – हर्षवर्धन सबसे प्रसिद्ध –
हर्षवर्धन – 606–647 ई. – कन्नौज को राजधानी बनाया – उत्तर भारत का अंतिम बड़ा हिंदू सम्राट –
हर्ष का साम्राज्य – पंजाब से बंगाल तक, नarmada तक – दक्षिण में पुलकेशिन II से पराजित – NCERT
बणभट्ट – हर्षचरित एवं कादंबरी के लेखक – हर्ष का राजकवि – NCERT
ह्वेनसांग – चीनी यात्री – हर्ष के समय भारत भ्रमण – विस्तृत विवरण –
मौखरि वंश – कन्नौज का पहले का शक्तिशाली वंश – हर्ष से वैवाहिक संबंध – NCERT
उत्तर गुप्त – मगध क्षेत्र में – गुप्त परंपरा जारी – NCERT
हूण – तोरमाण एवं मिहिरकुल – गुप्तों को कमजोर किया – बाद में पराजित – NCERT
त्रिपक्षीय संघर्ष – पाल, प्रतिहार एवं राष्ट्रकूट के बीच कन्नौज पर नियंत्रण के लिए – 8वीं–10वीं शताब्दी –
कन्नौज – राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रतीक – उत्तर भारत का केंद्र – NCERT
प्रतिहार (गुर्जर-प्रतिहार) – पश्चिमी भारत एवं राजस्थान – नागभट्ट I, मिहिरभोज, महेंद्रपाल –
मिहिरभोज – प्रतिहारों का सबसे शक्तिशाली शासक – अरब आक्रमणों को रोका – NCERT
पाल वंश – बंगाल-बिहार – गोपाल (संस्थापक), धर्मपाल, देवपाल –
धर्मपाल – पालों का महान शासक – कन्नौज पर अधिकार – विक्रमशिला विश्वविद्यालय – NCERT
राष्ट्रकूट – दक्कन – ध्रुव, गोविंद III, अमोघवर्ष –
अमोघवर्ष – राष्ट्रकूट का प्रसिद्ध शासक – जैन धर्म का संरक्षक – कन्नड़ साहित्य – NCERT
परिणाम – तीनों कमजोर हुए – क्षेत्रीय शक्तियों का उदय आसान हुआ – NCERT
राजपूत काल – 8वीं–12वीं शताब्दी – उत्तर-मध्य भारत में अनेक राजपूत वंश – NCERT
प्रतिहार – राजपूतों में सबसे शक्तिशाली प्रारंभिक वंश – NCERT
चौहान (चाहमान) – शाकंभरी/अजमेर – पृथ्वीराज चौहान प्रसिद्ध –
पृथ्वीराज चौहान – तराइन के युद्ध (1191, 1192) – मुहम्मद गौरी से –
परमार – मालवा (धार) – भोज परमार प्रसिद्ध – विद्वान शासक – NCERT
चंदेल – बुंदेलखंड – खजुराहो मंदिर – यशोवर्मन, धंग – NCERT
कलचुरि – त्रिपुरी (मध्य प्रदेश) – NCERT
गहड़वाल – कन्नौज – गोविंदचंद्र, जयचंद – NCERT
तोमर – दिल्ली-हरियाणा – अनंगपाल तोमर – दिल्ली की स्थापना से जुड़ा – NCERT
राजपूत विशेषता – वीरता, मान-सम्मान, सामंती ढांचा, मंदिर निर्माण – NCERT
पाल वंश – 750–1174 ई. – बंगाल एवं बिहार – बौद्ध धर्म का संरक्षण – NCERT
गोपाल – प्रथम पाल शासक – चुनाव द्वारा चुना गया – NCERT
विक्रमशिला एवं सोमपुर – पाल काल के महान बौद्ध विश्वविद्यालय/विहार – NCERT
सेन वंश – पालों के बाद बंगाल – बल्लाल सेन, लक्ष्मण सेन – NCERT
बख्तियार खिलजी – 1200 के आसपास सेन वंश का अंत – नालंदा-विक्रमशिला नष्ट – NCERT
चालुक्य (बादामी) – पुलकेशिन II सबसे महान – हर्ष को पराजित –
पुलकेशिन II – ऐहोल प्रशस्ति (रविकीर्ति) – दक्षिण का शक्तिशाली शासक – NCERT
राष्ट्रकूट – चालुक्यों को हराकर सत्ता – मान्यखेट राजधानी – NCERT
एलोरा के कैलाश मंदिर – राष्ट्रकूट कृष्ण I द्वारा – अद्वितीय शैलकृत मंदिर –
पल्लव – कांची – महेंद्रवर्मन, नरसिंहवर्मन (मामल्ल) –
महाबलीपुरम – पल्लव काल की रथ मंदिर एवं तटीय मंदिर –
चोलों का पुनरुत्थान – 9वीं शताब्दी से – विजयालय से शुरू – बाद में महान साम्राज्य – NCERT
पाण्ड्य एवं चेर – तमिल क्षेत्र के प्राचीन वंश – संगम परंपरा जारी – NCERT
होयसल एवं काकतीय – बाद के दक्कन राज्य – NCERT
उदय के कारण – सैन्य शक्ति, कृषि अधिशेष, व्यापार मार्ग नियंत्रण, कुशल नेतृत्व, वैवाहिक गठबंधन – NCERT
पतन के कारण – उत्तराधिकार संघर्ष, सामंतों का विद्रोह, निरंतर युद्ध, आर्थिक दबाव, विदेशी आक्रमण – NCERT
सामंती व्यवस्था – भूमि अनुदान से स्थानीय शक्तियाँ मजबूत – केंद्र कमजोर –
सैन्य तकनीक – घुड़सवार सेना, किले – महत्वपूर्ण भूमिका – NCERT
विदेशी आक्रमण – अरब (सिंध), गजनवी, गौरी – उत्तर भारत के राजवंशों को कमजोर किया – NCERT
सामंती ढांचा – राजा → सामंत → छोटे सामंत → किसान – NCERT
भूमि अनुदान – ब्राह्मण, मंदिर, सैन्य अधिकारियों को – प्रशासनिक विकेंद्रीकरण – NCERT
सैन्य संगठन – सामंत अपनी सेना रखते थे – केंद्रीय सेना सीमित – NCERT
दुर्ग – पहाड़ी एवं मैदानी किले – सुरक्षा एवं प्रशासन केंद्र – NCERT
नगर – कन्नौज, कांची, मान्यखेट, धारा, अजमेर – राजनीतिक-सांस्कृतिक केंद्र – NCERT
क्षेत्रीय संस्कृतियाँ – भाषा, कला, मंदिर शैली का क्षेत्रीय विकास – NCERT
मंदिर निर्माण – खजुराहो, मोढेरा, भुवनेश्वर, तंजावुर, महाबलीपुरम – NCERT
भाषाएँ – संस्कृत के साथ क्षेत्रीय भाषाओं (तमिल, कन्नड़, तेलुगु, बंगला) का विकास – NCERT
साहित्य – राजशेखर, सोमदेव, कन्नड़-तेलुगु साहित्य – NCERT
धर्म – भक्ति आंदोलन की शुरुआत, मंदिर केंद्रित पूजा, मठ – NCERT
तराइन का प्रथम युद्ध (1191) – पृथ्वीराज चौहान विजयी –
तराइन का द्वितीय युद्ध (1192) – मुहम्मद गौरी विजयी – दिल्ली सल्तनत की नींव –
चंदावर का युद्ध – जयचंद गहड़वाल की पराजय – NCERT
ऐहोल प्रशस्ति – पुलकेशिन II की विजयों का वर्णन – NCERT
अरब आक्रमण (सिंध) – 712 ई. – मुहम्मद बिन कासिम – सीमित प्रभाव – NCERT
राजनीतिक विखंडन – विदेशी आक्रमणों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ – NCERT
सामंतवाद का विकास – मध्यकालीन भारतीय समाज का आधार – NCERT
क्षेत्रीय पहचान – भाषा, संस्कृति, कला की क्षेत्रीय शैलियाँ मजबूत हुईं – NCERT
मंदिर एवं मठ – आर्थिक-सामाजिक शक्ति केंद्र बने – NCERT
संक्रमण काल – प्राचीन से मध्यकाल में संक्रमण का महत्वपूर्ण चरण – NCERT
ऐतिहासिक सबक – एकता की कमी एवं आंतरिक संघर्ष के परिणाम – NCERT

परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

हर्षवर्धन – 606–647, कन्नौज
ह्वेनसांग – हर्ष काल
त्रिपक्षीय संघर्ष – पाल-प्रतिहार-राष्ट्रकूट
मिहिरभोज – प्रतिहार
धर्मपाल – पाल
पृथ्वीराज चौहान – तराइन 1191-92
भोज परमार – मालवा
चंदेल – खजुराहो
पुलकेशिन II – चालुक्य, ऐहोल
पल्लव – महाबलीपुरम
एलोरा कैलाश – राष्ट्रकूट
पाल – विक्रमशिला
तराइन द्वितीय – 1192, गौरी विजय
सामंतवाद – भूमि अनुदान
कन्नौज – प्रतिष्ठा का केंद्र
बणभट्ट – हर्षचरित
राजपूत – वीरता + सामंत
क्षेत्रीय राज्य – मुख्य विशेषता
पतन कारण – आंतरिक संघर्ष + आक्रमण
संक्रमण काल – प्राचीन → मध्यकाल