संसाधन एवं उनका संरक्षण
Geography · Exam Special · NCERTसंसाधन – वे वस्तुएँ जो मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं एवं तकनीकी रूप से उपलब्ध तथा सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य हों – NCERT।
संसाधनों का वर्गीकरण (उत्पत्ति के आधार पर) – जैविक (Biotic) एवं अजैविक (Abiotic) – NCERT।
जैविक संसाधन – जीव-जंतु, वन, मत्स्य – जैवमंडल से प्राप्त – NCERT।
अजैविक संसाधन – चट्टानें, खनिज, जल, वायु – निर्जीव पदार्थों से – NCERT।
निःशेषता के आधार पर – नवीकरणीय (Renewable) एवं अनवीकरणीय (Non-renewable) – NCERT।
नवीकरणीय संसाधन – सौर ऊर्जा, पवन, जल, वन – पुनः उत्पन्न हो सकते हैं – NCERT।
अनवीकरणीय संसाधन – खनिज, जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) – सीमित एवं समाप्त होने वाले – NCERT।
स्वामित्व के आधार पर – व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संसाधन – NCERT।
विकास की स्थिति के आधार पर – संभावित, विकसित, भंडार एवं आरक्षित संसाधन – NCERT।
संसाधन नियोजन – संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग हेतु योजना बनाना – भारत में आवश्यक – NCERT।
सतत पोषणीय विकास – वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएँ पूरी करते हुए भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं से समझौता न करना – NCERT।
रियो डी जेनेरियो पृथ्वी सम्मेलन (1992) – Agenda 21 अपनाया गया – सतत विकास हेतु वैश्विक कार्य योजना –
भूमि – प्राकृतिक संसाधनों में सबसे महत्वपूर्ण – कृषि, वन, आवास, उद्योग का आधार – NCERT।
भारत में भूमि उपयोग – शुद्ध बोया गया क्षेत्र सबसे अधिक – NCERT।
भूमि निम्नीकरण के कारण – वनों की कटाई, अतिचारण, खनन, जल एवं वायु अपरदन – NCERT।
भूमि संरक्षण के उपाय – वनीकरण, चरागाह विकास, समोच्च जुताई, पट्टीदार कृषि – NCERT।
बंजर भूमि – कृषि या वन के लिए अनुपयुक्त भूमि – NCERT।
मृदा – सबसे महत्वपूर्ण नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन – NCERT।
जलोढ़ मृदा – उत्तर भारत के मैदान में – सबसे उपजाऊ – गंगा-सिंधु-ब्रह्मपुत्र बेसिन – NCERT।
काली मृदा (रेगुर) – दक्कन ट्रैप क्षेत्र – कपास के लिए प्रसिद्ध – महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश –
लाल एवं पीली मृदा – लोहे के ऑक्साइड के कारण रंग – प्रायद्वीपीय पठार – NCERT।
लेटेराइट मृदा – उच्च तापमान एवं भारी वर्षा वाले क्षेत्र – चाय, कॉफी, काजू – NCERT।
मरुस्थलीय मृदा – राजस्थान – शुष्क क्षेत्र – NCERT।
वन मृदा – हिमालयी क्षेत्रों में – ऊँचाई के अनुसार भिन्न – NCERT।
मृदा अपरदन – जल एवं वायु द्वारा मिट्टी का कटाव – NCERT।
मृदा संरक्षण के उपाय – समोच्च जुताई, सीढ़ीदार खेती, पट्टीदार खेती, वृक्षारोपण, बांध – NCERT।
मेड़बंदी – खेतों की मेड़ बनाकर जल अपवाह नियंत्रित करना – NCERT।
जल – नवीकरणीय संसाधन किंतु असमान वितरण – NCERT।
भारत में जल संकट के कारण – बढ़ती जनसंख्या, कृषि एवं औद्योगिक माँग, प्रदूषण, असमान वर्षा – NCERT।
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ – बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, जल विद्युत, मत्स्य पालन, पर्यटन – NCERT।
भाखड़ा-नांगल परियोजना – सतलुज नदी पर – पंजाब, हरियाणा, राजस्थान –
हीराकुंड बाँध – महानदी पर – ओडिशा – विश्व का सबसे लंबा बाँध –
नागार्जुन सागर – कृष्णा नदी पर – आंध्र प्रदेश-तेलंगाना – NCERT।
जल संरक्षण के उपाय – वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण, ड्रिप सिंचाई, बाँध – NCERT।
वर्षा जल संचयन – छत से वर्षा जल एकत्र कर भूमिगत भंडारण – राजस्थान में प्राचीन परंपरा –
bamboo drip irrigation – मेघालय में पारंपरिक सिंचाई प्रणाली – NCERT।
जल शक्ति मंत्रालय – जल संसाधनों के एकीकृत प्रबंधन हेतु – महत्वपूर्ण।
वन – जैव विविधता, ऑक्सीजन, मिट्टी संरक्षण, जलवायु नियंत्रण – NCERT।
भारत का वन क्षेत्र लक्ष्य – राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार 33% भौगोलिक क्षेत्र –
आरक्षित वन – सबसे मूल्यवान – वन विभाग के पूर्ण नियंत्रण में – NCERT।
रक्षित वन – स्थानीय समुदाय को सीमित अधिकार – NCERT।
अवर्गीकृत वन – अन्य वन – NCERT।
चिपको आंदोलन – उत्तराखंड – वृक्षों की रक्षा हेतु गाँव वालों का आंदोलन –
अप्पिको आंदोलन – कर्नाटक – वन संरक्षण हेतु – NCERT।
ज्वाइंट फॉरेस्ट मैनेजमेंट (JFM) – 1988 के बाद – स्थानीय समुदाय एवं वन विभाग का सहयोग – NCERT।
प्रोजेक्ट टाइगर – 1973 में शुरू – बाघ संरक्षण –
प्रोजेक्ट एलीफेंट – हाथी संरक्षण हेतु – NCERT।
जैव विविधता हॉटस्पॉट – पश्चिमी घाट, पूर्वी हिमालय, इंडो-बर्मा – NCERT।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम – 1972 –
खनिज – अजैविक एवं अनवीकरणीय संसाधन – NCERT।
धातु खनिज – लौह अयस्क, बॉक्साइट, ताँबा, सोना – NCERT।
गैर-धातु खनिज – चूना पत्थर, अभ्रक, जिप्सम – NCERT।
लौह अयस्क – झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक –
बॉक्साइट – एल्युमिनियम का अयस्क – ओडिशा, गुजरात, झारखंड – NCERT।
अभ्रक – झारखंड (हजारीबाग) – विश्व में अग्रणी –
ऊर्जा संसाधन – परंपरागत (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जल विद्युत) एवं गैर-परंपरागत (सौर, पवन, बायोगैस, ज्वारीय) – NCERT।
कोयला – भारत का सबसे महत्वपूर्ण खनिज ईंधन – झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल – NCERT।
पेट्रोलियम – मुंबई हाई, असम, गुजरात – NCERT।
सौर ऊर्जा – राजस्थान, गुजरात में अधिक संभावना – NCERT।
पवन ऊर्जा – तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र – NCERT।
परमाणु ऊर्जा – यूरेनियम (झारखंड), थोरियम (केरल के समुद्री तट) – NCERT।
संसाधन संरक्षण – संसाधनों का विवेकपूर्ण एवं कुशल उपयोग – NCERT।
3R सिद्धांत – Reduce (कम उपयोग), Reuse (पुनः उपयोग), Recycle (पुनर्चक्रण) –
Agenda 21 – रियो सम्मेलन 1992 – 21वीं सदी के लिए कार्य योजना –
ब्रुंड्टलैंड आयोग रिपोर्ट (1987) – “Our Common Future” – सतत विकास की अवधारणा – NCERT।
राष्ट्रीय वन नीति 1988 – वन क्षेत्र 33% करने का लक्ष्य – NCERT।
जल संरक्षण – वर्षा जल संचयन, वाटरशेड प्रबंधन, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई – NCERT।
मृदा संरक्षण – समोच्च खेती, सीढ़ीनुमा खेती, वनीकरण, मेड़बंदी – NCERT।
ऊर्जा संरक्षण – नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना, ऊर्जा दक्ष उपकरण – NCERT।
सामुदायिक भागीदारी – संरक्षण में स्थानीय लोगों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण – NCERT।
संसाधनों का असमान वितरण – संसाधन नियोजन की आवश्यकता का मुख्य कारण – NCERT।
परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)
संसाधन – आवश्यकता + तकनीक + सांस्कृतिक स्वीकृति
नवीकरणीय – सौर, पवन, जल, वन
अनवीकरणीय – खनिज, कोयला, पेट्रोलियम
Agenda 21 – रियो 1992
काली मृदा – कपास (रेगुर)
जलोढ़ मृदा – सबसे उपजाऊ
लेटेराइट – चाय, कॉफी
हीराकुंड – महानदी (सबसे लंबा बाँध)
भाखड़ा-नांगल – सतलुज
वर्षा जल संचयन – महत्वपूर्ण उपाय
वन लक्ष्य – 33%
चिपको आंदोलन – उत्तराखंड
Project Tiger – 1973
JFM – संयुक्त वन प्रबंधन
अभ्रक – झारखंड (अग्रणी)
कोयला – सबसे महत्वपूर्ण खनिज ईंधन
3R – Reduce, Reuse, Recycle
ब्रुंड्टलैंड रिपोर्ट – 1987
राष्ट्रीय वन नीति – 1988
मृदा संरक्षण – समोच्च जुताई, सीढ़ीनुमा खेती